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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. आभासी न्यायालयों को जारी रखा जाए: विधि पैनल

2. उम्मीदवारों के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन हेतु समयसीमा

3. पीएम केयर्स फंड के लिए FCRA से छूट

4. जम्मू-कश्मीर एकीकृत शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (JK-IGRAMS)

5. पांच सूत्रीय कार्ययोजना पर भारत तथा चीन में सहमति

 

सामान्य अध्ययन-III

1. स्टार्टअप पारितंत्र को समर्थन के लिए राज्यों की रैंकिंग

2. जलवायु स्मार्ट शहरों का आकलन ढांचा (CSCAF) 2.0

3. स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज

4. शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. टाइफून हैशेन (Typhoon Haishen)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

आभासी न्यायालयों को जारी रखा जाए: विधि पैनल


(Let virtual courts stay: law panel)

संदर्भ:

हाल ही में, विधि और न्याय पर गठित संसदीय पैनल द्वारा “वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आभासी न्यायालय / न्यायालयों द्वारा सुनवाई की कार्यप्रणाली” पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है।

यह, महामारी के प्रभाव पर किसी भी संसदीय पैनल द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली पहली रिपोर्ट है।

प्रमुख सिफारिशें:

  • कोविड परिदृश्य के पश्चात भी आभासी न्यायालयों (virtual courts) को जारी रखा जाए।
  • ट्रैफ़िक चालान तथा अन्य छोटे अपराधों से संबंधित एक निश्चित श्रेणी के मामलों को नियमित अदालत से आभासी अदालतों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए, इससे नियमित अदालतों में लंबित मामलों में कमी आयेगी।
  • इसे कार्यान्वित करने के लिए विशेष रूप से जिला अदालतों में बुनियादी ढांचे को उन्नत करने की आवश्यकता है।
  • भारत की न्यायिक प्रणाली के लिए एक नया प्लेटफॉर्म विकसित करते समय ‘विधि एवं न्याय मंत्रालय’ तथा ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ‘को डेटा गोपनीयता और डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना चाहिए।

वर्तमान में चुनौतियाँ

  • वर्तमान अवसंरचना, आभासी अदालती कार्यवाही के लिए पर्याप्त नहीं है।
  • लगभग 50% वकीलों के पास, विशेष रूप से जिला अदालतों में, लैपटॉप या कंप्यूटर की सुविधा नहीं है।
  • कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, आभासी अदालत में सुनवाई के दौरान, विशेष रूप से कार्य-समय के दौरान जब कई लोग वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम में लॉग इन करते हैं, सिस्टम के लगातार क्रैश होने से परेशान थे और पूरी कार्यवाही एक तकनीकी गड़बड़ होने से ख़राब हो सकती है।
  • आभासी अदालतों द्वारा डेटा की गोपनीयता के साथ-साथ विचार-विमर्श और अदालती कार्यवाही की गोपनीयता संबंधी सुरक्षा के बारे में चिंताएं देखी गयी। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका की अदालतों को हैकर्स तथा इन्टरनेट ट्रोल द्वारा ज़ूम कांफ्रेंस कॉल से निपटना पड़ा था।

‘आभासी अदालतें’ क्या हैं?

  • आभासी न्यायालय (virtual court) एक ऐसी अवधारणा है, जिसका उद्देश्य अदालत में वादी अथवा वकील की उपस्थिति को समाप्त करना तथा मामले को ऑनलाइन निपटान करना है।
  • ई-कोर्ट या इलेक्ट्रॉनिक कोर्ट का तात्पर्य उस स्थान से होता है, जहाँ योग्य न्यायाधीशों की उपस्थिति में विधि संबंधी मामलों को निपटाया जाता है और इसके लिए वहां पर अच्छी तरह से विकसित तकनीकी बुनियादी ढांचा स्थापित होता है।

ई-कोर्ट परियोजना:

ई-कोर्ट परियोजना (eCourts Project) की की परिकल्पना ‘भारतीय न्यायपालिका में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के कार्यान्वयन के लिये राष्ट्रीय नीति एवं कार्ययोजना-2005’ के आधार पर की गई थी।

  • ई-कोर्ट मिशन मोड प्रोजेक्ट, एक पैन-इंडिया प्रोजेक्ट है। देश भर में ज़िला न्यायालयों के लिये इस परियोजना की निगरानी तथा वित्त पोषण न्याय विभाग, कानून एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा की जाती है।
  • अब तक देश भर में कुल 16845 जिला तथा अधीनस्थ न्यायालय आईटी सक्षम बनाए जा चुके हैं।

परियोजना का उद्देश्य:

  1. ई-कोर्ट प्रोजेक्ट लिटिगेंट चार्टर (eCourt Project Litigant’s Charter) के अनुसार सक्षम और समयबद्ध नागरिक केंद्रित सेवाएं प्रदान करना।
  2. अदालतों में फैसले देने में सहायक प्रणाली को विकसित, स्थापित और कार्यान्वित करना।
  3. हितधारकों को सूचना तक पहुंच में पारदर्शिता प्रदान करने के लिए प्रक्रियाओं को स्वचालित करना।
  4. न्यायिक उत्पादकता को गुणात्मक और मात्रात्मक रूप से बढ़ाने के लिए, न्यायिक वितरण प्रणाली को सस्ती, सुलभ, लागत प्रभावी, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के रूप में किसी अन्य स्थान को तय करने के लिए कौन अधिकृत है?
  2. ई-कोर्ट परियोजना किसके द्वारा शुरू किया गया था?
  3. मिशन मोड परियोजना क्या होती है?
  4. विधि आयोग के बारे में- संरचना और कार्य।

मेंस लिंक:

आभासी अदालतों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं।

उम्मीदवारों के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन हेतु समयसीमा


संदर्भ:

हाल ही में, निर्वाचन आयोग (Election CommissionEC) द्वारा उम्मीदवारों तथा उनको चुनाव में उतारने वाले राजनीतिक दलों को उनके संबंध में आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन से संबंधित समयसीमा को संशोधित करने का फैसला किया गया है।

संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार:

संशोधित दिशानिर्देश के तहत, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के साथ-साथ उन्हें चुनाव में उतारने वाले राजनीतिक दलों को उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि होने की स्थिति में निम्नलिखित तरीके से इसका प्रकाशन समाचार पत्रों और टेलीविजन पर करना होगा:

  1. पहला प्रकाशन: नाम वापसी की अंतिम तारीख से पहले 4 दिनों के भीतर।
  2. दूसरा प्रकाशन: नाम वापसी की अंतिम तारीख से 5 से 8 दिनों के भीतर।
  3. तीसरा प्रकाशन: 9वें दिन से प्रचार के अंतिम दिन तक (मतदान के दो दिन पहले तक)।
  4. इस समयसीमा से मतदाताओं को ज्यादा सोच समझकर अपनी पसंद तय करने में सहायता मिलेगी।

निर्विरोध अथवा नामित विजेता उम्मीदवार के संदर्भ में:

निर्विरोध जीतने वाले उम्मीदवारों के साथ उन्हें उतारने वाले राजनीतिक दलों को भी उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि होने पर इसके बारे में अन्य उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को सुझाई गई प्रक्रिया के तहत प्रकाशन करना होगा।

इस कदम का महत्व:

आयोग द्वारा लिए गए फैसले के तहत, हितधारकों के फायदे के लिए इस मामले में अभी तक सभी निर्देशों और प्रारूपों के संकलन को प्रकाशित किया जा रहा है। इससे मतदाताओं और हितधारकों को ज्यादा जागरूक बनाने में सहायता मिलेगी। इस संबंध में सभी निर्देशों को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों और उन्हें चुनाव में उतारने वाले राजनीतिक दलों द्वारा संकलन किया जाना चाहिए।

पृष्ठभूमि:

आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन संबंधी चुनावी सुधार, सितंबर, 2018 में उच्चतम न्यायालय द्वारा गिये गए निर्देशों से शुरू किया गया था। इन दिशा निर्देशों में न्यायालय ने राजनीतिक दलों को समाचार मीडिया में उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करने के लिए कहा था।

इस साल की शुरुआत में, उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि, लंबित मामलों के विवरण के साथ, राजनीतिक दलों के लिए, ‘इस प्रकार के उम्मीदवारों के चयन के कारणों को भी प्रकाशित करना होगा, तथा साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनके द्वारा गैर-आपराधिक पृष्ठभूमियों के उम्मीदवारों क्यों नहीं चुना गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उम्मीदवारों के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रकाशन हेतु संशोधित समयसीमा
  2. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8
  3. उच्चत्तम न्यायालय दिशानिर्देश।
  4. ECI – रचना और कार्य।
  5. CEC- नियुक्ति।
  6. उम्मीदवारों के चुनाव से संबंधित मामलों पर निर्वाचन आयोग की शक्तियां।

मेंस लिंक:

राजनीति के अपराधीकरण से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए और इन चिंताओं को दूर करने के लिए उच्चत्तम न्यायालय ने क्या कदम उठाये हैं?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

पीएम केयर्स फंड के लिए FCRA से छूट


चर्चा का विषय:

हाल ही में, PM CARES फंड को विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के सभी प्रावधानों से छूट दे दी गयी है।

इसके लिए यह कहा गया है, PM CARES फंड, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट किये जाने के लिए, सरकार द्वारा स्थापित और स्वामित्व वाले निकाय होने संबंधी पूर्व-शर्तों को पूरा नहीं करता है।

संबंधित नियम

जुलाई 2011 में, गृह मंत्रालय ने, केंद्रीय या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित सभी निकायों को, कैग द्वारा ऑडिट कराया जाने से छूट देते हुए एक आदेश जारी किया था।

इस साल की शुरुआत में, 30 जनवरी, 2020 को, गृह मंत्रालय ने, पूर्व आदेश को प्रतिस्थापित करते हुए एक नया आदेश जारी किया, जिसमे, केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम के तहत अथवा केंद्र सरकार या किसी भी राज्य सरकार के कार्यकारी आदेश द्वारा स्थापित और संबंधित सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले किसी संगठन (राजनीतिक दल के अलावा) को, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) या CAG की किसी भी एजेंसी द्वारा ऑडिट कराये जाने से छूट दी गयी थी।

PM CARES फंड को छूट क्यों नहीं दी जा सकती है?

  1. इसे किसी केंद्रीय अथवा राज्य अधिनियम के द्वारा स्थापित नहीं किया गया है।
  2. सरकार का तर्क है कि PM CARES फंड आरटीआई के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है।
  3. PM CARES फंड का ऑडिट, किसी स्वतंत्र ऑडिटर द्वारा किया जाता है, CAG के द्वारा नहीं।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA)

[Foreign Contribution (Regulation) Act]

  • FCRA का उद्देश्य विदेशी अंशदान की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करने तथा राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक गतिविधियों के लिए इसके उपयोग को रोकना है।
  • इसके अंतर्गत किसी विदेशी श्रोत से निजी उपयोग हेतु उपहार तथा प्रतिभूतियों के अतिरिक्त प्राप्त होने वाली धनराशि तथा सामग्री को सम्मिलित किया जाता है।
  • निश्चित सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक, धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम रखने वाला कोई व्यक्ति अथवा संस्था FCRA के अंतर्गत पंजीकरण अथवा केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति प्राप्त करने के बाद विदेशी अनुदान को स्वीकार कर सकता है।
  • अधिनियम की धारा 50 में केंद्र सरकार को, लोक हित में आवश्यक लगने पर, शर्तो के साथ किसी संगठन (राजनीतिक दल के अतिरिक्त) FCRA के प्रावधानों से छूट देने संबंधी आदेश जारी करने की अनुमति दी गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लोक खाता क्या होता है?
  2. पीएम केयर फंड का प्रबंधन कौन करता है?
  3. किस संगठन को आरटीआई अधिनियम के दायरे से छूट दी गई है?
  4. भारत के समेकित कोष के बारे में
  5. धर्मार्थ ट्रस्ट क्या होता है?
  6. FCRA की धारा 50 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

पीएम केयर फंड को आरटीआई अधिनियम के दायरे में क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

जम्मू-कश्मीर एकीकृत शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (JK-IGRAMS)


(Jammu and Kashmir Integrated Grievance Redress and Monitoring System)

संदर्भ:

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल द्वारा प्रशासनिक अमले को बेहतर और उनके काम करने की गुणवत्ता सुधारने के क्रम में जम्मू-कश्मीर एकीकृत शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (JK-IGRAMS) का शुभारंभ किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • JK-IGRAMS को अभी पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जम्मू, श्रीनगर और रियासी जिले में शुरू किया जा रहा है।
  • यह प्रणाली वर्ष 2018 में सरकार द्वारा शुरू किए गए मौजूदा शिकायत निवारण तंत्र को प्रतिस्थापित करेगी।
  • यह केंद्र सरकार के ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली/पोर्टल- CPGRAMS से जुड़ने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश होगा।

क्रियाविधि

  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन संबंधी शिकायतों के निपटान और निगरानी हेतु प्राथमिक स्तर पर ‘उपायुक्तों’ (Deputy Commissioners) को तैनात किया गया है।
  • सप्ताह में पांच दिन निर्धारित समय पर सभी जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक शिकायतों के निपटान हेतु उपलब्ध रहेंगे। इनके कार्यालयों में कोई भी व्यक्ति उनसे जाकर मिल सकता है।

महत्व:

जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब लोगों में, विशेष रूप से कश्मीर घाटी में, असंबद्धता और अलगाव की भावना बढ़ रही है। विदित हो कि, पिछले साल J & K की विशेष स्थिति को रद्द कर देने के बाद से घाटी में उद्विग्नता की स्थिति व्याप्त है।

केंद्रीयकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) क्या है?

केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System- CPGRAMS)  को लोक शिकायत निदेशालय (Directorate of Public GrievancesDPG) और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public GrievancesDARPG) के सहयोग से इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre) द्वारा विकसित किया गया है।

  • इसका उद्देश्य, जनता की शिकायतों को प्राप्त करना, उनका निवारण तथा निगरानी करना था।
  • इसे कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के तहत प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा शुरू किया गया है।

प्रमुख विशेषताऐं:

CPGRAMS, देश के किसी भी भौगोलिक हिस्से से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है।

यह नागरिकों को संबंधित विभागों के साथ की जा रही शिकायत को ऑनलाइन ट्रैक करने में सक्षम बनाता है और साथ ही DARPG  के लिए शिकायत मॉनिटर करने के लिए सक्षम बनाता है।

इस प्रक्रिया के अंतर्गत प्रत्येक कार्यालय में एक वरिष्ठ अधिकारी को शिकायत अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जायेगा। जिससे इस प्रणाली में सार्वजनिक शिकायतों और कर्मचारियों से संबंधित कार्यों को सुलभ, सरल, त्वरित, निष्पक्ष और उत्तरदायी तरीके से तय समय सीमा में निपटान को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CPGRAMS क्या है?
  2. किसके द्वारा विकसित किया गया है?
  3. प्रमुख विशेषताएं
  4. भारत में CPGRAMS के साथ जुड़ने वाला पहला केंद्र शासित प्रदेश

मेंस लिंक:

CPGRAMS की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

 पांच सूत्रीय कार्ययोजना पर भारत तथा चीन में सहमति


(India, China agree on 5-point action plan)

संदर्भ:

लद्दाख में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच पाँच बिंदुओं पर सहमति बन गई है।

सहमति के पांच बिंदु:

  1. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई आम सहमति के बाद ‘असहमतियों को तनाव का रूप अख्तियार नहीं करने देना’ पर दोनों देश सहमत हुए हैं।
  2. सीमा पर तनाव कम करने के लिए शीघ्रता से सैनिकों की वापसी।
  3. भारत-चीन सीमा के इलाक़ों में शांति और सौहार्द्य बनाए रखने और सीमा मामलों को लेकर दोनों पक्ष सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और तनाव बढ़ाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी।
  4. भारत-चीन मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच विशेष प्रतिनिधियों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और श्री वांग के साथ-साथ अन्य तंत्रों के मध्य बातचीत जारी रखी जायेगी।
  5. नए विश्वास-बहाली उपायों (Confidence-Building Measures (CBMs) की दिशा में काम किया जाएगा।

तात्कालिक चुनौतियां

  • दोनों देशों के मध्य अप्रैल में हुए गतिरोध (stand-off) से ‘पूर्व की स्थिति’ (status quo) की बहाली अथवा पहले के मोर्चों पर लौटने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
  • भारत ने चीन से पोंगोंग त्सो, डेपसांग और LAC के अन्य भागों पर अतिक्रमण करने की जगहों से पीछे हटने के लिए भी नहीं कहा है।

भारत और चीन दोनों के लिए क्या करने की आवश्यकता है?

  • दोनों देशों के लिए तात्कालिक रूप से सभी विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी को सुनिश्चित करना चाहिए। भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए यह आवश्यक है।
  • सैन्य अधिकारियों द्वारा चरणबद्ध तरीके से सैन्य टुकड़ियों को स्थाई मोर्चो पर तैनात करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाना चाहिए।

मुठभेड़ों के कारण

  • मुख्य रूप, दोनों देशों के मध्य मुठभेड़ें वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) क्षेत्रों में होती हैं। LAC का कभी भी सीमांकन नहीं किया गया है।
  • भारत-चीन सीमा के पश्चिमी (लद्दाख), मध्य (हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड), सिक्किम और पूर्वी (अरुणाचल प्रदेश) क्षेत्रों में लगभग दो दर्जन स्थानों पर सीमा संबंधी अवधारणाओं में विशेष रूप से भिन्नता है।
  • अधिकतर मुठभेड़ें सीमा पर अतिव्यापी दावा करने वाले क्षेत्रों में गश्त करने के दौरान होती हैं।
  • ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वर्ष 2005 और 2013 में दोनों देशों द्वारा विस्तृत प्रोटोकॉल पर सहमति व्यक्त की गयी थी, लेकिन इन नियमों का पालन हमेशा नहीं किया जाता है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC)  को स्पष्ट क्यों नहीं किया गया है?

भारत द्वारा काफी समय से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए LAC के संबंध में भिन्न अवधारणाओं को स्पष्ट करने के लिए एक अभ्यास प्रस्तावित की जाती रही है। इसी क्रम में मध्य क्षेत्र में मानचित्रों का आदान-प्रदान किया गया था, लेकिन पश्चिमी क्षेत्र में अभ्यास विफल हो गया। पश्चिमी क्षेत्र में LAC संबंधी दावों को लेकर दोनों देशो के मध्य भिन्नता काफी अधिक है।

  • चीन ने इस अभ्यास को खारिज कर दिया है, तथा वह इसे पहले से जारी सीमा वार्ताओं में जटिलता उत्पन्न करने वाला समझता है।
  • भारत का तर्क है कि, इस अभ्यास से, एक LAC पर सहमत होने के बजाय, दोनों पक्षों को दूसरे के दावों को समझने में मदद मिल सकती है, जिससे सीमा विवाद का अंतिम निपटारा होने तक विवादित क्षेत्रों में गतिविधियों को विनियमित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एलओसी क्या है और इसकी स्थापना, भौगोलिक सीमा और महत्व कैसे है?
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो कहाँ है?
  5. अक्साई चिन का प्रशासन कौन करता है?
  6. नाकु ला कहाँ अवस्थित है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में नियंत्रण

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

स्टार्टअप पारितंत्र को समर्थन के लिए राज्यों की रैंकिंग


(Ranking of States on Support to Startup Ecosystems)

संदर्भ:

हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री द्वारा स्टार्टअप पारितंत्र के लिए समर्थन पर राज्यों की रैकिंग के दूसरे संस्करण के परिणाम जारी किए गए।

स्टार्टअप पारितंत्र को समर्थन के लिए राज्यों की रैंकिंग के बारे में:

  • उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग के दूसरे संस्करण का संचालन किया गया है।
  • इसका उद्देश्य राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और स्टार्टअप पारितंत्र के सन्दर्भ में सक्रियता से काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

राज्य स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क 2019:

इसमें 7 व्यापक सुधार क्षेत्र को साम्मिलित किया गया हैं, जिसमें संस्थागत समर्थन, आसान शिकायतें, सार्वजनिक खरीद मानदंडों में ढील, ऊष्मायन समर्थन, बीज अनुदान सहायता, उद्यम अनुदान सहायता और जागरूकता और आउटरीच से लेकर 30 कार्रवाई बिंदु शामिल हैं।

रैंकिंग प्रक्रिया

रैंकिंग प्रक्रिया में एकरूपता स्थापित करने और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो समूहों में विभाजित किया गया है।

  1. दिल्ली को छोड़कर सभी संघ शासित क्षेत्र और असम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी राज्य श्रेणी वाई में रखे गए हैं।
  2. वहीं अन्य राज्यों और संघ शासित क्षेत्र दिल्ली को श्रेणी एक्स में रखा गया है।

रैंकिंग के उद्देश्य से, राज्यों को 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला,
  2. उत्तम प्रदर्शन,
  3. अग्रणी (लीडर),
  4. आकांक्षी अग्रणी और
  5. उभरता हुआ स्टार्टअप पारितंत्र।

हर श्रेणी में इकाइयों को वर्ण माला के क्रम में रखा गया है।

राज्य स्टार्टअप रैंकिंग परिणाम 2019:

श्रेणी X:

  1. सबसे अच्छा प्रदर्शन: गुजरात
  2. उत्तम प्रदर्शन (टॉप परफॉर्मर): कर्नाटक, केरल
  3. अग्रणी: बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान
  4. आकांक्षी अग्रणी: हरियाणा, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड
  5. उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र: आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश

श्रेणी Y:

  1. सबसे अच्छा प्रदर्शन: अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह
  2. उत्तम प्रदर्शन (टॉप परफॉर्मर): चंडीगढ़
  3. आकांक्षी अग्रणी: नगालैंड
  4. उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र: मिजोरम, सिक्किम

सभी 7 सुधार क्षेत्रों में अग्रणी (एक संक्षिप्त अवलोकन):

प्रत्येक सुधार क्षेत्र में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले राज्यों को अग्रणी (लीडर) के रूप में मान्यता दी गई है।

संस्थागत अग्रणी

  1. कर्नाटक
  2. केरल
  3. ओडिशा

विनियामकीय बदलाव चैम्पियन

  1. कर्नाटक
  2. केरल
  3. ओडिशा
  4. उत्तराखंड

खरीद में अग्रणी

  1. कर्नाटक
  2. केरल
  3. तेलंगाना

इनक्यूबेशन हब

  1. गुजरात
  2. कर्नाटक
  3. केरल

नवाचार की शुरुआत (सीडिंग इनोवेशन) में अग्रणी

  1. बिहार
  2. केरल
  3. महाराष्ट्र

परिमाण नवाचार (क्लेकिंग इनोवेशन) में अग्रणी

  1. गुजरात
  2. केरल
  3. महाराष्ट्र
  4. राजस्थान

जागरूकता और पहुंच (आउटरीच) में चैंपियन

  1. गुजरात
  2. महाराष्ट्र
  3. राजस्थान

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्टार्टअप पारितंत्र के समर्थन पर राज्यों की रैंकिंग के बारे में
  2. इसे किसने विकसित किया?
  3. राज्यों का वर्गीकरण
  4. फ्रेमवर्क के बारे में
  5. विभिन्न श्रेणियों में प्रमुख प्रदर्शनकर्ता

मेंस लिंक:

स्टार्टअप पारितंत्र को समर्थन के लिए राज्यों की रैंकिंग पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

जलवायु स्मार्ट शहरों का आकलन ढांचा (CSCAF) 2.0


(Climate Smart Cities Assessment Framework)

संदर्भ:

हाल ही में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री द्वारा जलवायु स्मार्ट शहर आकलन ढांचा (CSCAF) का शुभारंभ किया।

CSCAF क्या है?

  • जलवायु स्मार्ट शहरों का आकलन ढांचा (CSCAF) का उद्देश्य शहरों को निवेश समेत अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के दौरान सामने आने वाली जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए स्पष्ट खाका उपलब्ध कराना है।
  • CSCAF पहल का उद्देश्य शहरी योजना और विकास के लिए क्लाइमेट-सेंसिटिव दृष्टिकोण को अपनाना है
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA) के तहत शहरों के लिए जलवायु केंद्र CSCAF के कार्यान्वयन में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का समर्थन कर रहा है।

इस फ्रेमवर्क में पांच श्रेणियों में 28 संकेतक को शामिल किया है:

  1. ऊर्जा एवं हरित निर्माण,
  2. शहरी नियोजन, हरित क्षेत्रों और जैव विविधता,
  3. आवागमन तथा वायु गुणवत्ता,
  4. जल प्रबंधन, एवं
  5. अपशिष्ट प्रबंधन।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CSCAF किसके द्वारा शुरू किया गया है?
  2. क्रियान्वयन
  3. फ्रेमवर्क का अवलोकन

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज


(Streets for People Challenge)

क्या है यह?

  • स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज इसलिए शुरू किया गया ताकि हमारे शहरों की गलियों को पैदल चलने वालों के लिए और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
  • यह चैलेंज आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी उस एडवाइजरी पर आधारित है।

कार्यान्वयन:

इस चैलेंज को मदद करने के लिए युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत फिट इंडिया मिशन, परिवहन विकास एवं योजना संस्थान आईटीडीपी भी स्मार्ट सिटी मिशन में साझेदारी कर रहा हैं।

स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज का उद्देश्य

  • यह चैलेंज देशभर के शहरों को एक समान गलियों के निर्माण में मदद करेगा, जो विभिन्न पक्षकारों और नागरिकों से परामर्श पर आधारित होगा।
  • इसके लिए प्रतिस्पर्धी प्रारूप अपनाया जाएगा ताकि विभिन्न शहर अपने खुद के डिजाइन तैयार कर सकें और विभिन्न पेशेवर लोगों या संस्थाओं से कम कीमत वाले उपयोगी सर्वमान्य डिजाइन सामने आ सकें।
  • इसका उद्देश्य कम लागत वाले नए विचारों के साथ गलियों के निर्माण की शुरुआत है जो पैदल चलने वालों के अनुकूल हो।
  • इससे प्रतिस्पर्धा में शामिल होने वाले सभी शहरों को टेस्ट-लर्न-स्केल अप्रोच के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे महत्वाकांक्षी और आसपास के खाली पड़े क्षेत्रों में पैदल चलने वाले रास्तों को बेहतर किया जा सके।

चैलेंज के तहत हस्तक्षेप

इसमें ऊंचे पैदल रास्ते, फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़े क्षेत्र, ऐसे स्थान जिनका इस्तेमाल किसी भी कार्य के लिए नहीं हो रहा है, में पैदल चलने के लिए संपर्क मार्गों को बनाकर संस्थानों और पार्कों को जोड़ा जाए।

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स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV)


(Net Present Value)

संदर्भ:

हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय ने केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा वन्य क्षेत्रों में पूर्वेक्षण तथा अन्वेषण हेतु ‘शुद्ध वर्तमान मूल्य’ (Net Present Value- NVP) शुल्क को माफ किये जाने की मांग को खारिज कर दिया है।

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है, कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, इस तरह की छूट देना ‘अनुचित’ होगा।

छूट मांग का कारण

  • अन्वेषण के लिये चुने गए सभी क्षेत्रों को खदानों में परिवर्तित नहीं किया गया है, बल्कि इनमें से मात्र 1% पर ही खनन के लिए परिवर्तित किया गया है। इसे देखते हुए NPV को एक परिहार्य व्यय (avoidable expenditure) के रूप में देखा जाता है, जिसे समाप्त किया जाना चाहिये।
  • खनन कंपनियों को अन्वेषण के लिये पट्टे/लीज़ पर दी गई वन भूमि पर NVP का 2-5% राशि जमा करना एक मुख्य चुनौती है, जो कि अन्वेषण / संभावित गतिविधियों में डेरी का कारण बनती है।

शुद्ध वर्तमान मूल्य (NPV) क्या है?

शुद्ध वर्तमान मूल्य से आशय उस मूल्य के मौद्रिक सन्निकटन (monetary approximation) से है जो वन भूमि के किसी भाग को नष्ट किये जाने के कारण खो दिया जाता है। यह किसी वन और उसके पारिस्थितिक तंत्र को अवसंरचना परियोजनाओं के कारण होने वाली क्षति की भरपाई और इसके संरक्षण के प्रयासों हेतु किया जाने वाला अग्रिम भुगतान होता है।

  • NPV की गणना सेवाओं और पारिस्थितिक मूल्य के आधार पर की जाती है और इसके लिए निर्धारित सूत्र हैं, जो वन भूमि के स्थान और प्रकृति तथा इसे खनन में परिवर्तित करने वाले औद्योगिक उद्यम के प्रकार पर निर्भर करता है।
  • NPV को आर्थिक विकास संस्थान के प्रोफेसर कंचन गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति द्वारा विकसित किया गया था।

इसे कब लागू किया गया था?

उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2002 में गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिये वन भूमि के उपयोग परिवर्तन को विनियमित करने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने भूमि परिवर्तन पर उच्च ‘शुद्ध वर्तमान मूल्य’ (NPV) शुल्क लागू किया था और इसमें बहुत ही सीमित छूट की अनुमति है।

प्रीलिम्स और मेन्स लिंक:

NPV क्या है? इसकी गणना कैसे की जाती है? इसे कब पेश किया गया था?

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


टाइफून हैशेन (Typhoon Haishen)

हाल ही में, जापान एवं इसके आसपास के क्षेत्र में शक्तिशाली टाइफून हैशेन ने काफी क्षति पहुँचाई है।

  • टाइफून हैशेन को श्रेणी-4 के तूफ़ान के रूप में वर्गीकृत किया गया है क्योंकि इस तूफान में हवाओं की गति लगभग 230 किमी./घंटा थी।
  • टाइफून ‘हैशेन’ का नामकरण चीन द्वारा किया गया था। ‘हैशेन’ को चीनी भाषा में ‘समुद्री देवता’ के रूप में जाना जाता है।

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