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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. पुन्नपारा वायलार विद्रोह

2. विश्व धर्म महासभा

3. श्री विश्वनाथ सत्यनारायण

 

सामान्य अध्ययन-II

1. विधायिका के विशेषाधिकार का हनन

2. फाइव स्टार गांव योजना:

3. सरोद-पोर्ट्स का आरंभ

4. अमेरिकी विदेशी एजेंट अधिनियम।

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ईज़ 2.0 बैंकिंग सुधार सूचकांक’

2. केबल टीवी नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘परिचय पत्र’ (letter of credence- लेटर ऑफ क्रेडेंस) क्या होता है?

2. हाल ही में भारत ने किस देश के साथ आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए?

3. पीएसबी द्वारा डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएं

4. प्रोजेक्ट 1619

5. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

पुन्नपारा वायलार विद्रोह


 (Punnapara-Vayalar revolt)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) की एक रिपोर्ट में भारत के स्वतंत्रता संग्राम शहीदों की सूची से पुन्नपारा-वायलार (Punnapra-Vayalar), करिवेलूर (Karivelloor) और कवुम्बयी (Kavumbayi) के कम्युनिस्ट शहीदों को अलग करने का सुझाव दिया गया है।

कारण:

ICHR का कहना है, इन कम्युनिस्ट आंदोलनों को स्वतंत्रता संघर्ष के आंदोलन के रूप में नहीं गिना जा सकता, क्योंकि यह आन्दोलन जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार द्वारा सत्ता संभालने के पश्चात हुए थे। ये विद्रोह मूल रूप से तत्कालीन अंतरिम सरकार के खिलाफ थे।

पुन्नपारा-वायलार विद्रोह के बारे में:

यह, ब्रिटिश भारत में, त्रावणकोर रियासत के प्रधानमंत्री  सी. पी. रामास्वामी अय्यर तथा रियासत के खिलाफ एक संगठित श्रमिक वर्ग का विद्रोह था।

विद्रोह के उद्देश्य:

  1. त्रावणकोर के शोषक दीवान को पद से हटाना।
  2. श्रमिक वर्ग को अन्यायपूर्ण कराधान और शासन के शोषण से मुक्त करना।

इस विद्रोह का महत्व:

  • यह अपनी तरह का एक अनोखा आंदोलन था, जिसमे मजदूर वर्ग सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया।
  • इस आंदोलन में सभी वर्गों के लोगों ने एक अत्याचारी के खिलाफ विद्रोह में भाग लिया, और वर्ग और धर्म के भेद को मिटाते हुए लोगों को एक होने के लिए प्रेरित किया।
  • इस विद्रोह के फलस्वरूप, क्षेत्र में लोकतंत्र की स्थापना हुई और राज्य की राजनीति को एक निर्णायक मोड़ दिया गया।

विद्रोह के निहितार्थ:

  • इतिहासकारों का मानना हैं कि, यह तत्कालीन त्रावणकोर से स्वतंत्र त्रावणकोरकी स्थापना हेतु एक विशिष्ट संघर्ष था।
  • इस आंदोलन के एक नेता टी के वर्गीज वैद्यन ने अधिकारिक रूप से कहा था, कि यह आंदोलन ‘कम्युनिस्ट इंडिया’ की स्थापना के उद्देश्य हेतु एक बड़ी क्रांति के लिए पूर्वाभ्यास था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपर्युक्त विद्रोह किससे संबंधित है?
  2. इसमें किन लोगों ने भाग लिया?
  3. विद्रोह की मुख्य मांग क्या थी?
  4. ICHR के बारे में।

मेंस लिंक:

पुन्नपारा-वायलार विद्रोह के महत्व और संबधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

Punnapara-Vayalar

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

विश्व धर्म महासभा


(Parliament of World’s Religions)

संदर्भ:

स्वामी विवेकानंद द्वारा शिकागो में आयोजित धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण की 127वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।

विवरण:

  • वर्ष 1893 में पहली बार 11 सितंबर से 27 सितंबर तक विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया, इसमें एक ही मंच पर पहली बार दुनिया भर की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया।
  • स्वामी विवेकानंद ने पहले 11 सितंबर को दर्शकों को संबोधित किया और उसके बाद 27 सितंबर को समापन भाषण दिया।
  • उन्होंने विश्व सद्भाव पर जोर दिया, इसके साथ ही विभिन्न धर्मो को, एक दूसरे के साथ सह-असि तत्व में रहते हुए, अपने वैशिष्ट्य के संरक्षण तथा विकास संबंधी सिधांतो के बारे में बताया।

विश्व धर्म महासभा के बारे में:

  • अभी तक, विश्व धर्म महासभा (Parliament of the World’s Religions) के नाम से कई सभाएँ हुईं है जिनमें सन् 1893 की शिकागो की विश्व धर्म महासभा सर्वाधिक उल्लेखनीय है जिसमें विश्व के सभी धर्मों के बीच में संवाद बनाने की कोशिश की गयी।
  • वर्ष 1993 में शिकागो विश्व धर्म महासभा की शताब्दी पर एक और विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया था।
  • अब तक, छह अंतरराष्ट्रीय आधुनिक धर्म महासभाओं का आयोजन किया जा चुका है।
  • विश्व धर्म संसद के शताब्दी वर्ष को चिह्नित करने तथा विश्व धर्म संसद की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए 1988 में एक संगठन को शामिल किया गया था।
  • विश्व धर्म संसद परिषद का मुख्यालय शिकागो में स्थित है। इसके बोर्ड ऑफ ट्रस्टी विभिन्न धर्म समुदायों से चुने जाते हैं।

पहली महासभा में भाग लेने वाली प्रमुख हस्तियाँ:

  1. जैन उपदेशक वीरचंद गांधी।
  2. बौद्ध उपदेशक अंगारिक धर्मपाल।
  3. अमेरिका में ‘ज़ेन मत’ के प्रथम प्रवर्तक, ‘सोयेन शकु’।
  4. हिंदू धर्म के स्वामी विवेकानंद।
  5. ईसाई धर्म के जी. बोनेट मौर।
  6. इस्लाम धर्म के मोहम्मद अलेक्जेंडर रसेल वेब।
  7. ब्रह्म समाज के प्रताप चंद्र मजूमदार।
  8. थियोसोफिकल सोसायटी के विलियम क्वान जज तथा एनी बेसेंट।

Punnapara-Vayalar

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व धर्म संसद, 1893 के बारे में
  2. मुख्य प्रतिभागी
  3. हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किसने किया?
  4. विश्व धर्म संसद परिषद का मुख्यालय।
  5. अब तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आधुनिक धर्म संसद।

मेंस लिंक:

स्वामी विवेकानंद, पश्चिम में ‘भारतीय ज्ञान के दूत’  किस प्रकार बन गए। चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

विश्वनाथ सत्यनारायण


संदर्भ:

हाल ही में श्री विश्वनाथ सत्यनारायण की 125वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया।

विश्वनाथ सत्यनारायण कौन थे?

  • ये रामायण को एक सच्चा तेलुगु रूप प्रदान करने वाले पहले लेखक हैं।
  • श्री विश्वनाथ को उनके मौलिक कार्य ‘रामायण कल्पवृक्ष’ के लिए प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ प्रदान किया गया था।
  • उन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से उन्होंने मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने, संस्कृति का संरक्षण करने और प्रकृति की रक्षा करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
  • श्री विश्वनाथ के साहित्यिक कैनवास में उपन्यास, महत्वपूर्ण कार्य, कवितायें, महाकाव्य, नाटक, गीत और छंद आदि सम्मिलित थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रामायण कल्पवृक्षम् किसने लिखा था?
  2. विश्वनाथ सत्यनारायण किस राज्य के हैं?
  3. उनकी महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियाँ

Sri_Viswanatha

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

विधायिका के विशेषाधिकार का हनन


(What constitutes a breach of legislature’s privilege?)

चर्चा का कारण

हाल ही में, महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में अर्नब गोस्वामी और कंगना रनौत के खिलाफ विशेषाधिकार उल्लंघन के प्रस्ताव पेश किये गए।

विशेषाधिकार क्या होते हैं?

संसदीय विशेषाधिकार, मूलतः सदन के सदस्यों को प्राप्त अधिकार और उन्मुक्ति को संदर्भित करते है। इन अधिकारों के तहत  सदन के सदस्यों के विरुद्ध अपने विधायी दायित्वों को पूरा करने के दौरान किये गए कृत्यों अथवा दिए गए व्यक्तव्यों के लिए किसी प्रकार की सिविल अथवा आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

विशेषाधिकार संबंधी संवैधानिक प्रावधान

  • संविधान के अनुच्छेद 105 के अंतर्गत भारतीय संसद, इसके सदस्यों तथा समितियों को प्राप्त विशेषाधिकार उन्मुक्तियों का उल्लेख किया गया है।
  • संविधान का अनुच्छेद 194, राज्य विधानसभाओं, इसके सदस्यों तथा समितियों को प्राप्त, शक्तियों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों से संबंधित है।

विशेषाधिकार हनन क्या होता है?

विशेषाधिकार हनन निर्धारित करने तथा उसके लिए दंड के संबंध में कोई स्पष्ट, अधिसूचित नियम नहीं हैं।

  • सामान्यतः, ऐसा कोई कार्य जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, संसद के किसी सदन के काम में बाधा या अड़चन डालता है अथवा संसद के किसी सदस्य या अधिकारी के कर्त्तव्य निर्वहन में बाधा उत्पन्न करता है, विशेषाधिकार हनन के रूप में माना जाता है।
  • सदन, उसकी समितियों या सदस्यों पर आक्षेप लगाने वाले भाषण, अध्यक्ष के कर्त्तव्यों के पालन में उसकी निष्पक्षता या चरित्र पर प्रश्न करना, सदन में सदस्यों के आचरण की निंदा करना, सदन की कार्यवाहियों का झूठा प्रकाशन करना आदि सदन के विशेसधिकारों का हनन तथा अवमानना होगा।

विधायिका के कथित विशेषाधिकार हनन संबंधी मामलों में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया

सदन के अध्यक्ष अथवा सभापति द्वारा एक विशेषाधिकार समिति का गठन किया जाता है, जिसमें  निचले सदन में 15 सदस्य होते हैं तथा उच्च सदन में 11 सदस्य होते हैं।

  • समिति के सदस्यों को सदन में दल की संख्या के आधार पर नामित किया जाता है।
  • अध्यक्ष अथवा सभापति द्वारा सर्वप्रथम प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाता है।
  • प्रथम दृष्टया, विशेषाधिकार हनन अथवा अवमानना पाए जाने पर अध्यक्ष अथवा सभापति द्वारा, निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेज दिया जाता है।
  • समिति, आरोपी व्यक्ति द्वारा दिए गए बयानों से राज्य विधायिका और उसके सदस्यों की अवमानना तथा जनता के सामने छवि पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच करेगी।
  • समिति को अर्ध-न्यायिक शक्तियां प्राप्त होती हैं तथा वह सभी संबंधित व्यक्तियों से स्पष्टीकरण की मांग कर सकती है, तथा परीक्षण करने के उपरान्त अपने निष्कर्षों के आधार पर राज्य विधायिका के विचारार्थ सिफारिश देगी।

विशेषाधिकार हनन के दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के लिए सजा

आरोपी व्यक्ति को विधायिका के विशेषाधिकार हनन अथवा अवमानना का दोषी पाए जाने पर समिति उसके लिए सजा की सिफारिश कर सकती है।

  • सजा के तौर पर, अपराधी को राज्य विधायिका की अप्रसन्नता के बारे में सूचित करना, अपराधी को सदन के समक्ष बुलाना और चेतावनी देना तथा अपराधी को कारवास भेजा जा सकता है।
  • मीडिया के मामले में, राज्य विधायिका द्वारा प्रद्दत प्रेस सुविधाओं को वापस लिया जा सकता है, और सार्वजनिक माफी की मांग की जा सकती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

फाइव स्टार गांव योजना:


संदर्भ:

  • डाक विभाग ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख डाक योजनाओं का सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, फाइव स्टार गांवों के नाम से एक योजना शुरू की है।
  • यह योजना महाराष्ट्र में प्रारंभिक आधार पर शुरू की जा रही है।

फाइव स्टार योजना के अंतर्गत आने वाली योजनाओं में शामिल हैं:

  1. बचत बैंक खाते, आवर्ती जमा खाते, एनएससी/केवीपीप्रमाण पत्र,
  2. सुकन्या समृद्धि खाते / पीपीएफखाते,
  3. वित्त पोषित डाकघर बचत खाता भारतीय डाक पेमेंट बैंक खाते,
  4. पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी / ग्रामीण डाक जीवन बीमा पॉलिसी और
  5. प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना खाता / प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना खाता।

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गांवों की रेटिंग:

यदि कोई गाँव उपरोक्त सूची में से चार योजनाओं के लिए सार्वभौमिक कवरेज प्राप्त करता है, तो उस गाँव को फोर-स्‍टार दर्जा मिल जाएगा; यदि कोई गाँव तीन योजनाओं को पूरा करता है, तो उस गाँव को थ्री-स्‍टार दर्जा दिया जाएगा।

योजना कार्यान्वयन दल

  • इस योजना को पांच ग्रामीण डाक सेवकों की टीम द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा जिन्हें डाक विभाग के सभी उत्पादों, बचत और बीमा योजनाओं के विपणन के लिए एक गाँव सौंपा जाएगा।
  • इस टीम का नेतृत्व संबंधित शाखा कार्यालय के शाखा पोस्ट मास्टर करेंगे।
  • डाक निरीक्षक दैनिक आधार पर टीम की प्रगति पर व्यक्तिगत निगरानी रखेंगे।
  • टीमों का नेतृत्व और निगरानी संबंधित प्रभागीय प्रमुख, सहायक अधीक्षक डाक और निरीक्षक पदों द्वारा की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उपर्युक्त योजना किसके द्वारा शुरू की गई है?
  2. इसके अंतर्गत आने वाली योजनाएँ
  3. योजना के तहत गांवों का मूल्यांकन कैसे किया जाता है?
  4. योजना का कार्यान्वयन

मेंस लिंक:

फाइव स्टार गांवों योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

सरोद-पोर्ट्स का आरंभ


(SAROD-Ports launched)

प्रमुख बिंदु:

सरोद-पोर्ट्स, (SAROD-Ports) का पूरा नाम ‘Society for Affordable Redressal of Disputes – Portsहै।

  • इसे केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया।
  • सरोद–पोर्ट्स, खर्च और समय की बचत करते हुए निष्पक्ष और न्यायपूर्ण तरीके से विवादों को हल करेंगे।
  • यह सरोद-पोर्ट्स’ समुद्री क्षेत्र के सभी प्रकार के विवादों के लिए एक किफायती समाधान तंत्र है।
  • सरोद-पोर्ट्स की स्थापना सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत की गयी है।

उद्देश्य:

  1. न्यायपूर्ण तरीके से विवादों का किफायती और समयबद्ध समाधान
  2. मध्यस्थों के रूप में तकनीकी विशेषज्ञों के पैनल के साथ विवाद समाधान तंत्र का संवर्धन।

संरचना:

सरोद-पोर्ट्स में इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन (IPA) और इंडियन प्राइवेट पोर्ट्स एंड टर्मिनल्स एसोसिएशन (IPTTA) के सदस्य शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना किसके द्वारा शुरू की गई है?
  2. उद्देश्य
  3. सरोद-पोर्ट्स की संरचना

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिकी विदेशी एजेंट अधिनियम


(U.S. Foreign Agents Act)

संदर्भ:

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के अधीन, विदेशी एजेंट्स पंजीकरण अधिनियम (Foreign Agents Registration ActFARA) 1938  के तहत ओवरसीज़ फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (OFBJP) के पंजीकृत होने के बाद भारतीय जनता पार्टी, संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी संगठन के विदेशी प्रमुख के रूप में नाम दर्ज कराने वाली भारत की भारत की पहली मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी बन गई है।

U.S. Foreign Agents Act

निहितार्थ:

  • पंजीकरण के बाद, OFBJP को अमेरिकी सांसदों से बैठक, कार्यक्रमों के आयोजन, अमेरिकी समूहों से वित्तपोषण की घोषणा करनी होगी।
  • अमेरिकी चुनावों के दौरान OFBJP सदस्य संगठनात्मक सहयोग का प्रयोग नहीं कर सकते, ऐसा करने पर इसे विदेशी हस्तक्षेप के रूप में देखा जाएगा।

FARA के बारे में:

विदेशी एजेंट्स पंजीकरण अधिनियम (FARA) को वर्ष 1938 में संयुक्त राज्य अमेरिका में फासीवादी के प्रसार को रोकने के लिए लागू किया गया था।

  • इसके अंतर्गत विदेशी एजेंटों को अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के तहत पंजीकृत कराना तथा अपनी गतिविधियों को जनता के सामने प्रकाशित करना अनिवार्य है।
  • इसके तहत, राजनीतिक अथवा अर्ध-राजनीतिक क्षमताओं के तहत विदेशी ताकतों में अपने हित रखने वाले विदेशी एजेंटों के लिए विदेशी सरकारों के साथ अपने संबंधों तथा वित्त संबंधी सूचनाओं को जाहिर करना आवश्यक है।

FARA के प्रयोग का कारण

FARA, संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी प्रभाव तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों की पहचान करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।

FARA का मुख्य उद्देश्य, संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर विदेशी प्रभाव के संबंध में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। इसके तहत अमेरिकी जनता की राय, नीति और कानूनों को प्रभावित करने का इरादा रखने वाले विदेशी एजेंटों के लिए अमेरिकी सरकार तथा अमेरिकी जनता को कुछ विशिष्ट जानकारियों को प्रदान करना सुनिश्चित किया जाता है।

कानून का उल्लंघन

कानून का ‘जानबूझ कर उल्लंघन’ करने पर पांच साल तक की जेल अथवा 250,000 डॉलर का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। क़ानून को कुछ सीमा तक उल्लंघन करने पर छह महीने से अधिक की जेल अवधि या $ 5,000 का जुर्माना दोनों का प्रावधान है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. US FARA कानून किससे संबंधित है?
  2. भारत की पहली राजनीतिक पार्टी ने खुद को संयुक्त राज्य में किसी संगठन का विदेशी प्रमुख नामित किया है।
  3. FARA के तहत किसी संगठन के विदेशी प्रमुख बनने के निहितार्थ।
  4. FARA के तहत किसे पंजीकरण कराना अनिवार्य है?
  5. FARA उल्लंघन पर दंड?

मेंस लिंक:

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के अधीन, विदेशी एजेंट्स पंजीकरण अधिनियम (FARA) 1938 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

ईज़ 2.0 बैंकिंग सुधार सूचकांक’


(EASE 2.0 Banking Reforms Index)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा मार्च 2018-2020 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks- PSBs) के प्रदर्शन पर ईज़ (Enhanced Access and Service Excellence EASE) 2.0 बैंकिंग सुधार सूचकांक जारी किया गया तथा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सम्मानित  किया गया।

EASE सुधार एजेंडा क्या है?

  • इसे जनवरी 2018 में सरकार और PSB द्वारा संयुक्त रूप से लॉन्च किया गया था।
  • इसे ‘भारतीय बैंक संघ’ (Indian Banks’ Association-IBA) और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (Boston Consulting Group- BCG) के सहयोग से तैयार किया जाता है।
  • EASE एजेंडा का उद्देश्य स्वच्छ एवं स्मार्ट बैंकिंग को संस्थागत बनाना है।
  • यह सूचकांक प्रत्येक पीएसबी के प्रदर्शन को छह विषयों के तहत 120 से अधिक विशिष्ट मापदंडों पर मापता है।

EASE 2.0 क्या है?

EASE 2.0 को EASE 1.0 की बुनियाद पर तैयार गया है तथा रिफॉर्म एक्शन प्वॉइंट्स का उद्देश्य छह विषयों में सुधार यात्रा को जारी रखना, प्रक्रियाओं एवं प्रणालियों को मजबूत करना और परिणामों को गति देना है।

EASE के छह विषय हैं:

  1. जिम्मेदार बैंकिंग
  2. ग्राहक अनुक्रियता (Customer Responsiveness)
  3. ‘ऋण वितरण’
  4. MSME के लिए उद्यमी मित्र के रूप में पीएसबी’
  5. वित्तीय समावेशन और डिजिटलकरण।
  6. प्रशासन एवं मानव संसाधन।

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EASE 2.0 सूचकांक पर PSB का प्रदर्शन:

  1. मार्च 2019 और मार्च 2020 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में 37% की वृद्धि देखी गई है साथ ही इसी दौरान PSBs का औसत ईज सूचकांक स्कोर 49.2 से बढ़कर 100 में से 67.4 हो गया है।
  2. सुधार एजेंडे के छह विषयों में उल्‍लेखनीय प्रगति दर्ज की गई और सबसे अधिक सुधार ‘जिम्‍मेदार बैंकिंग’, ‘प्रशासन एवं एचआर’, ‘एमएसएमई के लिए उद्यमी मित्रा के रूप में पीएसबी’ और ‘ऋण वितरण’ जैसे विषयों में देखा गया है।
  3. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने सभी क्षेत्रों में तकनीकी समर्थ, स्मार्ट बैंकिंग को अपनाया है। इसके अलावा डिजिटल उधारी के लिए PSBloansin59com और टीआरईडीएस यानी ट्रेड्स की स्‍थापना की गई है।
  4. ईज 2.0 सूचकांक के परिणाम के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय स्टेट बैंक और पूर्ववर्ती ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स को ‘शीर्ष प्रदर्शन वाले बैंक’ श्रेणी में शीर्ष तीन बैंक होने के लिए सम्मानित किया गया है।
  5. बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पूर्ववर्ती कॉर्पोरेशन बैंक को सुधार दर्ज करने वाले शीर्ष तीन बैंकों की से सम्मानित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. EASE सुधार एजेंडा किसके द्वारा तैयार किया गया है?
  2. EASE 1.0 तथा 2.0 तथा 3.0 में अंतर
  3. EASE 2.0 के विषय
  4. शीर्ष प्रदर्शन करने वाली श्रेणी में शीर्ष तीन बैंक
  5. सुधार दर्ज करने वाले शीर्ष तीन बैंक

मेंस लिंक:

EASE 2.0 बैंकिंग सुधार सूचकांक क्या है? PSB को किस प्रकार रैंकिंग दी जाती है?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995


संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा एक हिंदी चैनल ‘सुदर्शन न्यूज’ के लिए एक विवादित कार्यक्रम प्रसारित करने की अनुमति दी है, जिसमे चैनल ‘भारतीय सिविल सेवा में मुसलमानों द्वारा घुसपैठ करने की साजिश’ पर ‘खुलासा’ करना चाहता है।

सरकार का वक्तव्य

सूचना और प्रसारण (I&B) मंत्रालय ने कहा है कि, वह किसी कार्यक्रम को पूर्व-सेंसर नहीं कर सकता है, और न ही इसे प्रसारित करने से रोक सकता है।

क्योंकि, भारतीय प्रसारण नियमों के अनुसार, टीवी कार्यक्रमों और विज्ञापनों को पूर्व-सेंसर नहीं किया जा सकता है, अर्थात उन्हें प्रसारित होने से पहले प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है – तथा केवल फिल्म और फिल्म ट्रेलर को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा पूर्व-प्रमाणित किया जाता है।

विवाद का विषय:

सुदर्शन न्यूज चैनल प्रकरण, एक प्रमोशनल ट्रेलर जारी करने के बाद चर्चा में आया था, जिसमें ‘नौकरशाही जिहाद’ और ‘यूपीएससी जिहाद’ के नाम से कथित षड्यंत्र का पर्दाफाश करने की बात कही गयी थी। इस ट्रेलर की तत्काल व्यापक आलोचना हुई तथा जिसमे कई लोगों ने ‘हेट-स्पीच’ भरी सामग्री होने का आरोप लगाया।

इस प्रकरण को दिल्ली उच्च न्यायालय में भी चुनौती दी गई थी, जिसने इसके प्रसारण पर रोक लगा दी। जब सुदर्शन न्यूज ने कार्यक्रम पर लगी रोक हटाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो अदालत ने इस विषय पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय से निर्णय लेने को कहा।

भारतीय प्रसारण नियम

केबल टेलीविज़न नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 की धारा 20 के अनुसार, सरकार, किसी कार्यक्रम को, भारत में टेलीविजन सामग्री की देखरेख करने वाली ‘कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता’ के अनुरूप नहीं होने पर, उसके प्रसारण या पुन: प्रसारण को विनियमित या प्रतिबंधित कर सकती है।

  1. चूंकि, टेलीविज़न पर प्रसारित होने वाली सामग्री को पूर्व-प्रमाणित करने के लिए कोई निकाय नहीं है, अतः संभावित रूप से समस्यात्मक कार्यक्रम केवल प्रसारित किये जाने के बाद ही नोटिस किए जाते हैं।
  2. सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर (EMMC), निजी टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली सामग्री के ‘कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता’ के अनुरूप होने संबंधी निगरानी करता है।
  3. ‘कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता’ के उल्लंघन संबंधी विशिष्ट शिकायतों को एक अंतर-मंत्रालयी समिति (Inter-Ministerial CommitteeIMC) द्वारा जांच की जाती है।

केबल टीवी नेटवर्क नियम का नियम 6:

  • यह सुनिश्चित करना चैनल की जिम्मेवारी है, कि उसके द्वारा प्रसारित किये जाने वाला कोई भी कार्यक्रम, ‘केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 6’ द्वारा निर्धारित ‘कार्यक्रम संहिता’ का उल्लंघन न करे।
  • नियम 6 के उप-खंड ‘ग’ में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि जिन कार्यक्रमों में किसी धर्म या समुदाय पर हमले किये जाते हैं अथवा धार्मिक समुदायों की अवमानना ​​करने वाले शब्दों का उपयोग किया जाता हो, अथवा सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं, उन्हें केबल सेवा द्वारा प्रसारित नहीं किया जायेगा।

स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

‘परिचय पत्र’ (letter of credence– लेटर ऑफ क्रेडेंस) क्या होता है?

यह किसी पदाधिकारी, विशेषकर किसी देश के राजदूत का परिचय पत्र अथवा सिफारिश पत्र होता है।

चर्चा का कारण

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने एक वर्चुअल समारोह में सिंगापुर गणराज्‍य के उच्‍चायुक्‍त महामहिम श्री सामइन वोंग वाई क्‍यूएन का परिचय पत्र (लेटर ऑफ क्रेडेंस) स्‍वीकार किया।

हाल ही में भारत ने किस देश के साथ आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए?

  • भारत और जापान ने भारत के सशस्‍त्र बलों तथा जापान के आत्‍मरक्षा बलों के मध्‍य आपूर्ति और सेवाओं के पारस्‍परिक प्रावधान के संबंध में दोनों देशों के बीच अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए।
  • इस समझौते से भारत और जापान के सशस्‍त्र बलों के मध्‍य द्विपक्षीय प्रशिक्षण गतिविधियों संयुक्‍त राष्‍ट्र शान्ति स्‍थापना संचालनों, मानवतावादी अंतर्राष्‍ट्रीय राहत और पारस्‍परिक रूप से सहमत अन्‍य गतिविधियों में संलग्‍न रहते हुए आपूर्ति और सेवाओं के परस्‍पर प्रावधान में भारत और जापान दोनों देशों के सशस्‍त्र बलों के बीच घनिष्‍ठ सहयोग के लिए सक्षम ढांचा स्‍थापित होगा।

पीएसबी द्वारा डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएं

  • EASE सुधार के तहत डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं की परिकल्पना की गई है, ताकि ग्राहकों को कॉल सेंटर,वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के टच पॉइंट्स के जरिये उनके दरवाजे तक बैंकिंग सेवाओं की सुविधा प्रदान की जा सके।
  • देश भर के 100 केंद्रों पर चयनित सेवा प्रदाताओं द्वारा तैनात डोरस्टेप बैंकिंग एजेंटों द्वारा ये सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

प्रोजेक्ट 1619

वर्ष 2019 में शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स मैगज़ीन’ की एक विशेष पहल है। अगस्त 1619 में औपनिवेशिक वर्जीनिया के जेम्सटाउन में सबसे पहले अफ्रीकियों को ग़ुलाम बना कर लाये जाने के 400 साल पूरे होने पर शुरू किया गया था।

इस संस्करण में दासता के परिणामस्वरूप अमेरिका में विकसित हुई सामाजिक संरचनाएँ, वर्तमान कानूनों, नीतियों, प्रणालियों और संस्कृति की जाँच की गयी है, तथा साथ ही अमेरिका के राष्ट्र निर्माण में अश्वेत लोगों के योगदान के प्रभाव को रेखांकित किया गया है।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD)

चर्चा का कारण

अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद परेश रावल को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा सोसाइटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

प्रमुख तथ्य:

  • राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय विश्व के अग्रणी नाट्य प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक और भारत में अपनी तरह का एक मात्र संस्थान है।
  • इसकी स्थापना संगीत नाटक द्वारा उसकी एक इकाई के रूप में वर्ष 1959 में की गई।
  • वर्ष 1975 यह एक स्वतंत्र संस्था बनी व इसका पंजीकरण वर्ष 1860 के सोसायटी पंजीकरण धारा XXI के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था के रूप में किया गया। यह संस्था संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित है।

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