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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 09 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. ‘पंजाब- एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य’: ‘देखो अपना देश’ वेबिनार श्रृंखला

2. ODF+ एवं ODF++

 

सामान्य अध्ययन-II

1. राज्यसभा का उप सभापति

2. “लाभ का पद”

3. ‘हेल्थ इन इंडिया’ रिपोर्ट

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पहला विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (WSTS)

2. अवसंरचना निवेश न्यास मॉडल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पत्रिका गेट, जयपुर

2. अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

3. हाल ही में चर्चित ‘रियल मैंगो’ क्या है?

4. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)

5. मानद राजदूत (Honorary Consul)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

पंजाब- एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य‘: देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला


संदर्भ:

हाल ही में, पर्यटन मंत्रालय की देखो अपना देश वेबिनार श्रृंखला में ‘पंजाब-एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य’  शीर्षक से पंजाब की विरासत का प्रदर्शन किया गया।

‘देखो अपना देश’ वेबिनार श्रृंखला ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत भारत की समृद्ध विविधता को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है।

पंजाब के बारे में:

पंजाब का अर्थ पांच नदियों- झेलम, चिनाब, रावी, सतलज और ब्यास की भूमि है।

  • पंजाब राज्य को तीन भागों में बांटा गया है- माजा, दोआबा और मालवा।
  • 19वीं शताब्दी की शुरुआत में ज्यादातर सीमांत इलाकों पर महाराजा रणजीत सिंह का शासन था, जिन्हें शेर-ए-पंजाब कहा जाता है और बाद में 1849 में पंजाब पर ईस्ट इंडिया कंपनी का कब्जा हो गया।

पंजाब के प्रमुख त्योहार:

पंजाब के कई त्यौहार- तीज, लोहड़ी, बसंत पंचमी, बैसाखी और होला महल्ला ऐसे हैं जो खेती के लोकाचार को दर्शाते हैं।

स्वर्ण मंदिर:

सिख तीर्थस्थलों में सबसे पवित्र स्वर्ण मंदिर दुनियाभर के भक्तों के लिए एक प्रमुख धार्मिक केंद्र और साथ ही एक लोकप्रिय पर्यटन आकर्षण भी है।

  • अमृतसरोवर का निर्माण तीसरे गुरु, गुरु अमर दास ने 1570 में शुरू कराया था और चौथे गुरु, गुरु राम दास द्वारा इसे पूरा कराया गया।
  • उनके उत्तराधिकारी गुरु अर्जन देव ने 1588 में हरिमंदिर साहिब या दरबार साहिब के भवन की आधारशिला रखने के लिए सूफी संत मियां मीर को आमंत्रित करने के बाद काम शुरू कराया।
  • सिख धर्म के भाईचारे और सभी समावेशी लोकाचार के मूल सिद्धांत को प्रदर्शित करने वाले स्वर्ण मंदिर में सभी दिशाओं से पहुंचा जा सकता है।

प्रमुख धरोहर स्थल:

  • फतेहगढ़ साहिब शहर का सिखों के लिए विशेष महत्व है।
  • ‘फतेहगढ़’ शब्द का अर्थ है ‘विजय नगर’ और ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि 1710 में बाबा बंदा सिंह बहादुर के नेतृत्व में सिखों ने इस क्षेत्र पर विजय प्राप्त की थी और मुगल किले को नष्ट कर दिया था।
  • बंदा सिंह बहादुर ने नगर में सिख शासन की स्थापना की और मुगल शासन के अत्याचार की समाप्ति की घोषणा की जिसमें आतंक और अन्याय का बोलबाला था।
  • विरासत-ए-खालसा संग्रहालय: इसमें हस्तनिर्मित कलाकृतियों और नवीनतम तकनीक के प्रयोग से पंजाब और सिख धर्म की संस्कृति और परंपरा के 550 वर्षों को दर्शाया गया है। यह वास्तुशिल्प का उत्कृष्ट नमूना है।
  • विभाजन संग्रहालय स्वर्ण मंदिर से 5 मिनट की दूरी पर स्थित है। भारत का विभाजन उपमहाद्वीप के इतिहास में सबसे बड़ी घटनाओं में से एक रहा है। यह मानव इतिहास में सबसे बड़ा पलायन था और इससे 20 मिलियन लोग प्रभावित हुए थे।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. पंजाब को ‘पांच नदियों की भूमि’ क्यों कहा जाता है?
  2. ‘शेर-ए-पंजाब’ के नाम से किसे जाना जाता है?
  3. ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्ज़ा कब किया था?
  4. लोहड़ी का महत्व
  5. अमृतसरोवर का निर्माण किसने किया था?
  6. मियां मीर कौन थे?
  7. भारत के किस शहर को “विजय नगर” के नाम से जाना जाता है?

मेंस लिंक:

स्वर्ण मंदिर के सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

 ODF+ एवं ODF++


चर्चा का कारण

हाल ही में, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने कहा है कि:

  • हरियाणा में सभी शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies – ULBs) को खुले में शौच मुक्त (Open Defecation Free- ODF), 21 ULB को ODF+ और 13 ULB को ODF++ प्रमाणित किया गया है।
  • पंजाब के सभी शहरों को ODF प्रमाणित किया गया है, 33 शहरों को ODF+ और 17 शहरों को ODF++ प्रमाणित किया गया है।

ODF टैग क्या होता है?

मार्च 2016 में जारी किये गए मूल ODF प्रोटोकॉल में कहा गया है कि, यदि, किसी भी दिन के किसी भी समय, कोई भी व्यक्ति खुले में शौच नहीं करता है तो उस शहर / वार्ड को ODF शहर/ वार्ड के रूप में अधिसूचित किया जायेगा।”

ODF+ तथा ODF++ क्या है?

स्वच्छ भारत मिशन- शहरी (Swachh Bharat Mission Urban: SBM-U) के पहले चरण में ODF दर्जा  प्राप्त करने के बाद शहरों द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने और उन्हें जारी रखने के लिए अगस्त 2018 में ODF + और ODF ++ की शुरुआत की गयी थी।

पात्रता: ODF प्रोटोकॉल के आधार पर को शहर को कम से कम एक बार ODF अधिसूचित हो चुके हैं, उन्हें SBM-ODF+  एवं ODF ++ घोषित किया जा सकता है।

ODF+ क्या है?

ODF + प्रोटोकॉल के अनुसार – ‘यदि किसी दिन किसी भी व्यक्ति को खुले में शौच और/या पेशाब करते हुए नहीं पाया जाता है और सभी सामुदायिक तथा सार्वजनिक शौचालय कार्यात्मक अवस्था में एवं सुव्यवस्थित हैं, तो उस शहर, वार्ड या कार्यक्षेत्र को ODF+ घोषित किया जा सकता है।’

ODF++ क्या है?

ODF ++ प्रोटोकॉल में यह शर्त जोड़ी गयी है कि “मल कीचड़/ सेप्टेज (Faecal sludge/Septage) और नालियों का सुरक्षित रूप से प्रबंधन और उपचार किया जाए, जिसमें किसी प्रकार के अनुपचारित कीचड़/सेप्टेज और नालियों का प्रवाह किसी जल निकाय अथवा खुले क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए।“

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ODF+ तथा ODF++ मानदंड
  2. SBM चरण 1 बनाम चरण2
  3. SBM शहरी और ग्रामीण, का कार्यान्वयन
  4. निर्मल भारत अभियान बनाम SBM

मेंस लिंक:

‘स्वच्छ भारत मिशन अभियान, भागीदारी और परिवर्तनकारी विकास के लिए वैश्विक बेंचमार्क बन गया है।‘ प्रकाश डालिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

राज्यसभा का उप सभापति


चर्चा का कारण

हाल ही में,  कांग्रेस की रणनीति समूह की बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि राज्यसभा के उप- सभापति के चुनाव के लिए विपक्ष की तरफ से साझा उम्मीदवार खड़ा किया जाएगा।

राज्यसभा में उप-सभापति का पद, हरिवंश नारायण सिंह का संसद सदस्य के रूप में कार्यकाल के समाप्त होने के बाद खाली हो गया है। वह उच्च सदन में बिहार से सदस्य के रूप में चुने गए थे।

राज्यसभा के उप सभापति के बारे में:

राज्यसभा के उप सभापति का संविधान के अनुच्छेद 89 के अंतर्गत उल्लेख किया गया है, तथा यह एक संवैधानिक पद है। इसके अनुसार- राज्यसभा द्वारा, पद रिक्त होने की स्थिति में, अपने किसी एक सांसद को उपसभापति के रूप में चुना जायेगा।

उपसभापति हेतु अहर्ता:

  1. उपसभापति का चुनाव राज्य सभा द्वारा उच्च सदन के सदस्यों में से किया जाता है।
  2. उपसभापति का पद रिक्त होने पर, राज्यसभा रिक्त स्थान को भरने के लिए किसी अन्य सदस्य का चुनाव करती है।

उपसभापति के पद पर रिक्ति:

उप सभापति निम्नलिखित तीन मामलों में अपना पद त्याग करता है:

  • राज्य सभा के सदस्य के रूप के कार्यकाल की समाप्ति होने पर;
  • सभापति के लिए लिखित में त्यागपत्र देने पर;
  • राज्य सभा सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा हटाये जाने पर उप सभापति का पद रिक्त होता है। इस तरह के प्रस्ताव के लिए 14 दिनों की अग्रिम सूचना देना अनिवार्य होता है।

उपसभापति के कार्य:

  • उपसभापति सदन में सभापति का पद रिक्त होने पर सभापति के रूप में कार्य करता है।
  • सभापति की अनुपस्थिति में भी वह बतौर सभापति कार्य करता है। दोनों ही स्थितियों में उसके पास सभापति की सारी शक्तियां होती हैं।
  • सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए उपसभापति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

शक्तियां:

  • उपसभापति, सभापति के अधीनस्थ नहीं होता है, वह राज्यसभा के पार्टी सीधे उत्तरदायी होता है।
  • जब सभापति, राज्यसभा की अध्यक्षता करता है तो उपसभापति, एक साधारण सदस्य की तरह होता है।
  • सभापति की भांति, उपसभापति भी नियमित वेतन व भत्तों का अधिकारी होता है, तथा उसके वेतन व भत्तों का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है, जो भारत की संचित निधि पर भारित होता है।

निर्वाचन प्रक्रिया:

  1. उपसभापति के निर्वाचन हेतु कोई भी राज्यसभा सांसद इस संवैधानिक पद के लिए किसी सहयोगी के नाम का प्रस्ताव पेश कर सकता है। इस प्रस्ताव को दूसरे सांसद द्वारा समर्थित होना चाहिए।
  2. इसके अतिरिक्त, प्रस्तावकर्ता सदस्य को, उपसभापति पद के लिए प्रस्तावित सांसद द्वारा हस्ताक्षरित घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होता है, जिसमे वह घोषित करता है, कि उक्त सांसद निर्वाचित होने पर उप सभापति के रूप में कार्य करने के लिए तैयार है। प्रत्येक सांसद को केवल नाम प्रस्तावित करने की अनुमति होती है।
  3. इसके पश्चात, सदनमें बहुमत द्वारा उप सभापति का निर्वाचन किया चुना जाता है।
  4. यद्यपि, राजनीतिक दलों में सर्वसम्मति होने पर भी किसी सांसद उप सभापति चुना जा सकता है।

उपाध्यक्ष्यों का पैनल:

  • सभापति, समय-समय पर, अधिकतम छह उपाध्यक्ष्यों के पैनल को सदन के सदस्यों में से नामित करेगा। इनमे से एक उपाध्यक्ष, सभापति तथा उपसभापति की अनुपस्थिति में सदन का संचालन करेगा।
  • संसदीय उप-नियम(1) के तहत नामित एक उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष्यों का नया पैनल नामित होने तक पद धारण करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राज्य सभा के उपसभापति के पद हेतु पात्रता
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 89 किससे संबंधित है?
  3. उपसभापति का पद रिक्त होने की स्थितियां
  4. शक्तियाँ और कार्य
  5. उपाध्यक्षों के पैनल के बारे में

मेंस लिंक:

राज्यसभा के उपसभापति के निर्वाचन प्रक्रिया पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

 ‘लाभ का पद’ (Office of Profit)


चर्चा का कारण

हाल ही में, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा वाईएसआर कांग्रेस नेता वी विजयसई रेड्डी की राज्यसभा सांसद के रूप में सदस्यता रद्द किये जाने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी गयी है। याचिका में, सांसद को राष्ट्रीय राजधानी में आंध्रप्रदेश सरकार का विशेष प्रतिनिधि बनाये जाने को ‘लाभ का पद’ मानते हुए अयोग्य ठहराये जाने का आधार बनाया गया था।

राष्ट्रपति का निर्णय, निर्वाचन आयोग द्वारा जून माह में दी गयी राय पर आधारित है।

चर्चा का विषय:

  • कुछ समय पूर्व, संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में विजयसई रेड्डी को अयोग्य घोषित करने के लिए एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सांसद, आंध्र प्रदेश भवन में आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष प्रतिनिधि का पद पर कार्यरत है, जो कि एक ‘लाभ का पद’ है।
  • यद्यपि, निर्वाचन आयोग ने कहा है, कि चूंकि उक्त कार्यालय से रेड्डी को कोई भी मौद्रिक लाभ प्राप्त नहीं हुआ, तथा विशेष प्रतिनिधि के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए आंध्र प्रदेश की अपनी यात्रा के दौरान ‘राज्य अतिथि’ के दर्जे के अतिरिक्त किसी अन्य भत्ते या पारिश्रमिक के हकदार नहीं थे। अतः, उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 102(1) (a) के तहत अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता है।

किसी सांसद या विधायक को अयोग्य घोषित करने के लिए आधारिक मानदंड:

किसी सांसद के लिए आधारिक अयोग्यता मानदंड संविधान के अनुच्छेद 102 में तथा किसी विधायक के लिए आधारिक अयोग्यता मानदंड अनुच्छेद 191 में उल्लिखित हैं।

इन्हें निम्नलिखित स्थितियों में अयोग्य ठहराया जा सकता है:

  • भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करने पर;
  • मानसिक रूप से बीमार होने पर;
  • अभुक्त दिवालिया (undischarged insolvent) होने पर;
  • यदि वह भारत का नागरिक न हो अथवा उसके पास किसी विदेशी राष्ट्र की स्वेच्छा से ग्रहण की गई नागरिकता हो।

‘लाभ का पद’ से तात्पर्य:

यदि कोई सांसद/विधायक किसी लाभ के पद पर आसीन होता है तथा उस पद से लाभ प्राप्त करता है, तो उस पद को ‘लाभ का पद’ कहा जाता है।

किसी सांसद/विधायक को केंद्र या राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद धारण करने पर सदस्यता हेतु अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। इसके लिए संसद अथवा विधानसभा द्वारा पारित नियम के तहत निर्धारित पदों पर आसीन होने से सांसद/विधायक अयोग्य घोषित नहीं किये जा सकते।

अयोग्यता मानदंड के रूप में लाभ के पदको सम्मिलित करने के निहितार्थ:

  • संविधान निर्माताओं का मानना था, कि विधि-निर्माताओं को किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होना चाहिए, ताकि वे विधायी कार्यों का निर्वहन करते समय किसी से प्रभावित नहीं हो सकें।
  • दूसरे शब्दों में, किसी सांसद या विधायक को किसी भी प्रकार के सरकारी दबाव के बिना अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए। अर्थात, निर्वाचित सदस्य के कर्तव्यों और हितों के बीच कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए।
  • ‘लाभ के पद’ संबंधी प्रावधान संविधान में वर्णित- विधायिका और कार्यपालिका के मध्य शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत को लागू करने का एक प्रयास है।

विवाद का कारण:

  • ‘लाभ के पद’ को संविधान अथवा ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम’, 1951 में परिभाषित नहीं किया गया है।
  • ‘लाभ के पद’ सिद्धांत के महत्व और अर्थ की न्यायालय द्वारा व्याख्या की गयी है। न्यायालय ने समय-समय पर विशिष्ट तथ्यात्मक स्थितियों के संदर्भ इस मामले पर अपने निर्णय दिए हैं।
  • भारतीय संविधान में अनुच्छेद 102(1) तथा अनुच्छेद 191(1) में लाभ के पद का उल्लेख किया गया है, जिनमे केंद्रीय और राज्य स्तर पर विधि-निर्माताओं द्वारा सरकारी पदों को स्वीकार करने पर प्रतिबंधित किया गया है।

लाभ के पद को परिभाषित करने में न्यायपालिका की भूमिका:

प्रद्योत बोरदोलोई बनाम स्वपन रॉय (2001) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने किसी व्यक्ति के लाभ के पद पर आसीन होने अथवा नहीं होने संबंधी जांच करने हेतु चार सिद्धांतों का निर्धारण किया:

  1. क्या सरकार, ‘पद’ पर नियुक्ति, निष्कासन तथा इसके कार्यों पर नियंत्रण रखती है?
  2. क्या सरकार उस पद से संबंधित पारिश्रमिक को निर्धारित करती है?
  3. क्या पद के मूल निकाय में सरकारी शक्तियां निहित हैं (धन जारी करना, भूमि आवंटन, लाइसेंस देना आदि)?
  4. क्या उस पद को धारण करने वाला व्यक्ति संरक्षण के माध्यम से किसी निर्णय को प्रभावित करने में सक्षम है?

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘लाभ के पद’ क्या है? क्या इसे संविधान में परिभाषित किया गया है?
  2. किसी सांसद या विधायक को अयोग्य ठहराने हेतु आधारिक मापदंड क्या हैं?
  3. संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 किससे संबंधित हैं?
  4. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति के लाभ के पद पर आसीन होने अथवा नहीं होने संबंधी जांच करने हेतु निर्धारित चार सिद्धांत कौन से है?

मेंस लिंक:

‘लाभ के पद’ की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। अयोग्यता मानदंड के रूप में ‘लाभ के पद’ को सम्मिलित करने के निहितार्थो पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

हेल्थ इन इंडिया’ रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (National Statistical OrganisationNSO) दवारा ‘हेल्थ इन इंडिया’ रिपोर्ट का प्रकाशन किया गया है।

यह रिपोर्ट स्वास्थ्य संबंधी पारिवारिक सामाजिक उपभोग पर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (जुलाई 2017-जून 2018) के 75वें दौर के आंकड़ों पर आधारित है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. देश भर में, पाँच वर्ष से कम आयु के मात्र 59.2% बच्चे पूरी तरह से प्रतिरक्षित (Immunised) हैं।
  2. मोटे तौर पर, प्रति पांच में से दो बच्चों का प्रतिरक्षण टीकाकरण कार्यक्रम पूरा नहीं होता है।
  3. देश भर में लगभग 97% बच्चों का कम से कम एक टीकाकरण हो पाता है, जिसमे अधिकतर BCG और / अथवा जन्म के समय OPV की पहली खुराक सम्मिलित होती है।
  4. केवल 67% बच्चे ही खसरे से सुरक्षित हैं।
  5. केवल 58% को उनकी पोलियो बूस्टर खुराक दी गयी, जबकि 54% बच्चों को डीपीटी बूस्टर खुराक दी गयी है।
  6. राज्यों में, मणिपुर (75%), आंध्र प्रदेश (73.6%) और मिजोरम (73.4%) में पूर्ण टीकाकरण की उच्चतम दर दर्ज की गई।
  7. नागालैंड में, केवल 12% बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया, इसके बाद पुदुचेरी (34%) और त्रिपुरा (39.6%) का स्थान रहा।

टीकाकरण क्या है?

टीकाकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति को किसी संक्रामक बीमारी के विरुद्ध, एक वैक्सीन / टीका के द्वारा प्रतिरक्षा या प्रतिरोधी बनाया जाता है। टीके के द्वारा शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्प्रेरित किया जाता है, जिससे बाद में संक्रमण अथवा बीमारी से व्यक्ति को सुरक्षा प्राप्त होती है।

पूर्ण टीकाकरण क्या है?

पूर्ण टीकाकरण के अंतर्गत, किसी बच्चे को जीवन के पहले वर्ष में आठ टीकों की खुराक दी जाती है।

प्रस्तावित टीकाकरण की आवश्यकता:

  • वर्तमान में, भारत में टीका-निरोध्य (vaccine-preventable) बीमारियों के कारण 5 लाख लोगों की मृत्यु होती है। यह वार्षिक रूप से होने वाली कुल अनुमानित शिशुओं की मौतों के आधे से अधिक है।
  • भारत में, हर साल अधिकांश शिशु मृत्यु, खसरा-रूबेला, डायरिया, निमोनिया और इस तरह से होने वाली बीमारियों से होती हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक टीकाकरण कवरेज में सुधार होने पर वैश्विक रूप से कुल 1.5 मिलियन मौतों को टाला जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NSSO के बारे में
  2. CSO के बारे में
  3. पूर्ण टीकाकरण क्या है?
  4. ‘हेल्थ इन इंडिया’ रिपोर्ट में नवीनतम निष्कर्ष।
  5. वैक्सीन क्या है? यह किस प्रकार कार्य करते है?

मेंस लिंक:

पूर्ण टीकाकरण क्या है? इस संबंध में नवीनतम ‘हेल्थ इन इंडिया’ रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

पहला विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (WSTS)


(First World Solar Technology Summit)

संदर्भ: 8 सितंबर, 2020 को पहले विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (WSTS) को आयोजन किया गया था।

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance- ISA), ग्लोबल लीडरशिप टास्क फोर्स का नवाचार संयोजक है, जो इस शिखर सम्‍मेलन को आयोजित करने के लिए ISA के साथ मिलकर काम कर रहा है।

सम्मलेन में निम्नलिखित चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये गए:

सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) ने चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये, जो सौर ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के इरादे को दर्शाते हैं।

  1. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के बीच एक एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड (One World, One Sun, One Grid) पर एक साझेदारी समझौता।
  2. ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के मध्य एक मिलियन सौर पंपों के संवर्धन हेतु साझेदारी।
  3. इंटरनेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ रेफ्रिजरेशन, पेरिस तथा अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के मध्य एक समझौता ज्ञापन।
  4. अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और राष्ट्रीय ताप विद्युत् निगम (NTPC) के बीच 47 परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर भागीदारी समझौता।

इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) द्वारा प्रौद्योगिकी पत्रिका, सोलर कंपास 360 भी लॉन्च की गयी।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन सौर ऊर्जा से संपन्न देशों का एक संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन है। यह एक भारतीय पहल है, जिसकी शुरुआत, 30 नवंबर, 2015 को भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति, एच.ई. फ्रांस्वा ओलांद द्वारा, पेरिस  फ्रांस में हुए COP-21 संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के दौरान की गयी थी।

ISA असेंबली इस गठबंधन की मुख्य निर्णय कर्ता निकाय है तथा यह विभिन्न प्रशासनिक, वित्तीय और कार्यक्रम से संबंधित मुद्दों पर निर्णय लेती है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का कार्य

एक क्रिया-उन्मुख संगठन के रूप में, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), वैश्विक मांग में वृद्धि हेतु सौर क्षमता समृद्ध देशों को एक साथ लाता है, जिससे ऊर्जा की थोक खरीद से कीमतों में कमी आती है तथा मौजूदा सौर प्रौद्योगिकियों को विस्तार सुविधा प्राप्त होती है। इसके अलावा सौर अनुसंधान एवं विकास में सहयोग तथा क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करता है।

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अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौता कब से प्रभावी हुआ?

ISA फ्रेमवर्क समझौता 6 दिसंबर 2017 को प्रभावी हुआ था, इसके पश्चात से अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) कानूनी तौर पर संधि आधारित अंतर-सरकारी संगठन बन गया। इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में स्थित है।

सदस्यता:

  • हाल ही में संशोधित ISA फ्रेमवर्क समझौते के तहत संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल हो सकते हैं।
  • 30 जुलाई 2020 तक, 87 देशों ने ISA फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और इनमें से 67 देशों द्वारा अभिपुष्टि भी कर दी गयी है।

लक्ष्य:

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ने वर्ष 2030 तक 1TW सौर ऊर्जा का लक्ष्य रखा है।

इंस्टा फैक्ट्स:

भारत ने वर्ष 2022 और 2030 तक क्रमशः 100 GW और 300 GW  सौर ऊर्जा उत्पादित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रथम विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के परिणाम
  2. ISA का गठन कब किया गया था?
  3. सौर कम्पास 360 क्या है?
  4. ISA के लक्ष्य
  5. ISA की सदस्यता
  6. भारत का अक्षय ऊर्जा लक्ष्य
  7. ‘एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड’ पहल क्या है?

मेंस लिंक:

‘एक विश्व, एक सूर्य, एक ग्रिड’ परियोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: निवेश मॉडल।

अवसंरचना निवेश न्यास मॉडल


(Infrastructure Investment TrustInvIT)  

चर्चा का कारण

हाल ही में, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अवसरंचना निवेश न्यास मॉडल Infrastructure Investment TrustInvIT) के माध्यम से विद्युत मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की परिसंपत्तियों के मौद्रिकरण को मंजूरी प्रदान की गयी है।

यह पहली बार है जब विद्युत क्षेत्र में कोई सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSU) अवसरंचना निवेश न्यास मॉडल (InvITmodel) के माध्यम से अपनी परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण करके और नए व निर्माणाधीन पूंजीगत परियोजनाओं को निधि देने के लिए आय का उपयोग करके परिसंपत्ति रीसाइक्लिंग का कार्य करेगा।

अवसरंचना निवेश न्यास मॉडल (InvITmodel) क्या है?

  • यह एक म्यूचुअल फंड की भांति एक सामूहिक निवेश योजना है, जो अवसंरचना परियोजनाओं में निजी और संस्थागत निवेशकों से प्राप्त होने वाले धन का प्रत्यक्ष निवेश करके लाभ अर्जित करने में सक्षम बनाती है।
  • सेबी (इंफ़्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) विनियम, 2014 द्वारा InvITs को विनियमित किया जाता है।

पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बारे में:

  • यह भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है।
  • इसका व्यावसायिक संचालन वर्ष 1992-93 में शुरू हुआ था और आज, एक महारत्न कंपनी बन चुकी है जो बिजली पारेषण के व्यवसाय में लगी हुई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महारत्न कंपनी क्या होती है? ऐसी कंपनियों को कौन से लाभ प्राप्त होते हैं?
  2. मिनीरत्न दर्जा तथा नवरत्न दर्जा प्रदान करने हेतु मानदंड
  3. पॉवरग्रिड के बारे में
  4. InvIT मॉडल क्या है?

मेंस लिंक:

अवसरंचना निवेश न्यास मॉडल (InvITmodel) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पत्रिका गेट, जयपुर

  • इस गेट का निर्माण राजस्थान पत्रिका प्रकाशन समूहद्वारा किया गया है
  • इस गेट को जयपुर विकास प्राधिकरण के मिशन अनुपम के तहत एक स्मारक के रूप में जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर बनाया गया है।
  • इसमें राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत को दर्शाया गया है।

Patrika_Gate

 अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International Literacy Day– ILD) पूरे विश्व में प्रतिवर्ष 8 सितंबर को मनाया जाता है।

  1. अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के आयोजन की शुरूआत, सितंबर 1965 में तेहरान में निरक्षरता उन्मूलन पर शिक्षा मंत्रियों के वैश्विक सम्मेलन की सिफारिश के बाद हुई थी।
  2. यूनेस्को द्वारा नवंबर 1966 में पेरिस में आयोजित हुए महासम्मेलन के 14वें सत्र में औपचारिक रूप से 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया गया।
  3. 2020 के लिए थीम: ‘साक्षरता, शिक्षण और शिक्षा कोविड-19 संकट के दौरान और उसके बाद’।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने देश में वर्ष 2017-18 के लिए 7 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी लोगों के लिए राज्य-वार साक्षरता दर आंकड़े जारी किए हैं।

NSO के अनुसार:

  1. भारत की औसत साक्षरता दर 77.7% है।
  2. आंध्र प्रदेश की साक्षरता दर 66.4% भारत के सभी राज्यों में सबसे कम है और बिहार की साक्षरता दर (70.9%) से काफी कम है।
  3. केरल की साक्षरता दर (96.2%) देश में सबसे अधिक है। दिल्ली 88.7% साक्षरता दर के साथ दूसरे स्थान पर है।
  4. केरल में, पुरुष और महिला साक्षरता के बीच का अंतर केवल 2.2 प्रतिशत है। अखिल भारतीय स्तर यह अंतर 14.4 प्रतिशत है। अखिल भारतीय पुरुष साक्षरता 84.7% और महिला साक्षरता 70.3% है।
  5. शहरी और ग्रामीण साक्षरता दर के बीच का अंतर परिमाण, पुरुषों और महिलाओं की साक्षरता दर के अंतर के समान है। केरल में, एक बार फिर, 1.9 प्रतिशत अंकों के साथ सबसे कम अंतर दर्ज किया गया है।

हाल ही में चर्चित ‘रियल मैंगो’ क्या है?

यह एक अवैध सॉफ्टवेयर है जिसका उपयोग रेलवे आरक्षण की पुष्टि के लिए किया जाता है। यह आमतौर पर प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर भारतीय रेल टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया को तीव्र गति से संपादित करता है।

चर्चा का कारण

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान कंफर्म्ड ट्रेन आरक्षण टिकट हथियाने के लिए अवैध सॉफ्टवेयर ‘रीयल मैंगो’ का इस्तेमाल किये जाने का पता लगाया है।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)

यह ड्रग तस्करी से लड़ने और अवैध पदार्थों के दुरुपयोग के लिए भारत की नोडल ड्रग कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसी है।

  • इसे भारत सरकार द्वारा 1986 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत गठित किया गया था।
  • यह गृह मंत्रालय के तहत शीर्ष समन्वय एजेंसी है।
  • नशाखोरी नियंत्रण केंद्र सरकार की जिम्मेदारी होती है।

मानद राजदूत (Honorary Consul)

हाल ही में, लक्जमबर्ग के दूतावास ने सेतुरमण महालिंगम को चेन्नई में देश का नया मानद राजदूत नियुक्त करने की घोषणा की है। उनके अधिकार क्षेत्र में केरल और तमिलनाडु आएगा।

मानद राजदूत कौन होते हैं?

  1. मानद राजदूत अशासकीय व्यक्ति होते हैं जो बगैर पारिश्रमिक के अंशकालिक आधार पर अपने कार्यों को पूरा करते हैं।
  2. मानद राजदूत पासपोर्ट आवेदनों को स्वीकार नहीं करते हैं और न ही वे वीजा या निवास परमिट से संबंधित मामलों को संभालते हैं।
  3. मानद राजदूत, राजनयिक मिशनों के साथ-साथ आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देते है।

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