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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 08 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. केशवानंद भारती

2. सरकारी विज्ञापनों में विषय-वस्तु विनियमन समिति (CCRGA)

3. मध्याह्न भोजन योजना

4. वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत, हाइपरसोनिक मिसाइल क्लब में सम्मिलित

2. असम राइफल्स पर नियंत्रण संबंधी निर्णय

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अशासकीय व्यक्तियों को केंद्रीय सुरक्षा कवच

2. इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

3. इस सदी के दौरान अगस्त में दूसरी सर्वाधिक बारिश

4. गुरुप्रिया ब्रिज (Gurupriya Bridge)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

केशवानंद भारती


(Who was Kesavananda Bharati?)

चर्चा का कारण

हाल ही में, एक प्रसिद्ध मामले में याचिकाकर्ता के रूप में ख्यातिप्राप्त केशवानंद भारती का निधन हो गया।

केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य’ वाद में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा ‘मूल संरचना’ के सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए ऐतिहासिक निर्णय दिया गया था।

केशवानंद भारती कौन थे?

स्वामी केशवानंद भारती वर्ष 1961 से केरल के कासरगोड ज़िले में स्थित एडनीर मठ के प्रमुख संत थे।

उन्होंने वर्ष 1970 में केरल भूमि सुधार कानून को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक निर्णय में अपनी छाप छोड़ दी।

‘केशवानंद भारती वाद’ क्या था?

यह मामला मुख्य रूप से ‘संविधान में संशोधन’ के लिए संसद की शक्ति के विस्तार से संबंधित था।

  • ‘केशवानंद भारती वाद’ में, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा वर्ष 1967 में ‘गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य’ वाद में दिए गए निर्णय की समीक्षा की गयी। इस मामले में, अपने पूर्व निर्णयों को बदलते हुए न्यायालय ने फैसला दिया था, कि संसद के पास मूल अधिकारों को संशोधित करने की शक्ति नहीं है।
  • इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने कई अन्य संशोधनों की संवैधानिक वैधता संबंधी सवालों पर निर्णय दिए। उस समय किये गए संवैधानिक संशोधनों के तहत, विशेष रूप से, संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों में से हटा दिया गया था।
  • संसद के लिए, संविधान के किसी भी भाग को संशोधित करने की शक्ति प्रदान की गयी थी तथा एक कानून पारित किया गया था, जिसके तहत न्यायालयों द्वारा इसकी समीक्षा नहीं की जा सकती थी।

राजनीतिक रूप से, यह वाद तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली संसद की सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए किये गए प्रयासों को दर्शाता है।

वाद की सुनवाई

  • इस मामले की सुनवाई के लिये उच्चत्तम न्यायालय द्वारा 13 न्यायाधीशों की एक खंडपीठ गठित की गयी, जो कि अब तक सबसे बड़ी खंडपीठ थी।
  • इस मामले की सुनवाई छह महीने तक चली तथा कुल 68 कार्यदिवसों में सुनवाई पूरी की गई थी। सुनवाई के दौरान बहुमत के साथ संविधान की ‘मूल संरचना’ का सिद्धांत विकसित किया गया था।

उच्चत्तम न्यायालय का निर्णय

न्यायालय ने, बहुमत के फैसले में, स्थापित किया कि, मूल अधिकारों को संविधान में संशोधन के माध्यम से समाप्त नहीं किया जा सकता है।

  • न्यायालय ने कहा कि हालांकि, संसद के पास संविधान में संशोधन करने के लिए व्यापक शक्तियां हैं, किंतु संविधान के कुछ हिस्से इतने अंतर्निहित और महत्त्वपूर्ण हैं कि उन्हें संसद द्वारा संशोधित नहीं किया जा सकता है।
  • हालांकि, न्यायालय के फैसले के अनुसार, ‘संसद द्वारा ‘मूल अधिकारों को भंग नहीं किया जा सकता है, फिर भी, न्यायालय ने संसद द्वारा ‘संपत्ति के मूल अधिकार’ को समाप्त करने वाले संशोधन को बरकरार रखा। इस संदर्भ में अदालत ने कहा कि, उक्त संशोधन संविधान की ‘मूल संरचना’ का उल्लंघन नहीं करता है।
  • वास्तविक रूप से केसवानंद भारती केस हार गए थे। परन्तु विधिवेत्ताओं के अनुसार सरकार भी इस मामले में जीत नहीं पाई थी।

‘मूल संरचना’ का सिद्धांत

संवैधानिक पीठ ने 7-6 से निर्णय दिया, कि संसद को संविधान की मूल संरचना में परिवर्तन करने से रोका जाना चाहिये।

  • उच्चत्तम न्यायालय के अनुसार, अनुच्छेद 368, जो संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्तियाँ प्रदान करता है, के तहत संविधान की मूल संरचना में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
  • यद्यपि उच्चत्तम द्वारा संविधान की मूल संरचनाको परिभाषित नहीं किया गया, किंतु संविधान की कुछ विशेताओं, संघवाद, पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र, मौलिक अधिकार, न्यायिक समीक्षा आदि को ‘मूल संरचना’ के रूप निर्धारित किया है। तब से न्यायालय द्वारा इस सूची का विस्तार किया जा रहा है।

‘केशवानंद भारती वाद’ के पश्चात मूल संरचना‘:

‘केशवानंद भारती वाद’ के बाद से संविधान की ‘मूल संरचना’ के सिद्धांत में ‘’संविधान की सर्वोच्चता, विधि का शासन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, शक्तियों के पृथक्करण का सिद्धांत, संघवाद, धर्मनिरपेक्षता, संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य, सरकार की संसदीय प्रणाली, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव, कल्याणकारी राज्य’’ इत्यादि को सम्मिलित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन
  2. संशोधन के प्रकार
  3. सीसंविधान संशोधन अधिनियम 25, 26, 39 और 41 के द्वारा किए गए प्रमुख परिवर्तन।
  4. सर्वोच्च न्यायालय की विभिन्न पीठ
  5. मूल संरचना की परिभाषा और महत्व
  6. मूल अधिकार बनाम नीति निदेशक सिद्धांत

मेंस लिंक:

‘केशवानंद भारती वाद’ में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के महत्व पर चर्चा कीजिए।

Kesavananda_Bharati

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

सरकारी विज्ञापनों में विषय-वस्तु विनियमन समिति (CCRGA)


(Committee on Content Regulation in Government Advertising)

चर्चा का कारण

हाल ही में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित ‘सरकारी विज्ञापनों में विषय-वस्तु विनियमन समिति’ (Committee on Content Regulation in Government Advertising CCRGA) की 19वीं बैठक आयोजित की गई।

CCRGA क्या है?

वर्ष 2015 में उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार भारत सरकार ने सरकारी विज्ञापन एजेंसियों द्वारा सभी मीडिया प्लेटफार्मों पर जारी विज्ञापनों की विषय वस्तु पर निगरानी रखने के लिए वर्ष 2016 में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।

  • उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, राज्यों के लिए भी सरकारी विज्ञापनों की विषयवस्तु की निगरानी हेतु तीन सदस्यीय समितियों का गठन अनिवार्य बनाया गया है।
  • कर्नाटक, गोवा, मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्य पहले ही इस तरह की समितियों का गठन कर चुके हैं।

शक्तियाँ

  • समिति को उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के संबंध में मिली जन शिकायतों को निबटाने तथा इस बारे में आवश्यकतानुसार सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।
  • समिति के नोटिस के जवाब में अनुचित देरी की स्थिति में यदि आवश्यक हो तो समिति विज्ञापन जारी करने वाली सरकारी एजेंसी के संबंधित अधिकारी को पेश होने के लिए भी कह सकती है।

उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देश:

उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार-

  • ‘सरकारी विज्ञापनों की सामग्री सरकार के संवैधानिक और कानूनी दायित्वों के साथ-साथ नागरिक अधिकारों के नजरिए से भी प्रासंगिक होनी चाहिए’,
  • विज्ञापनों की सामग्री को एक उद्देश्यपूर्ण, निष्पक्ष और सुलभ तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए और इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए ताकि वह अभियान के उद्देश्यों को पूरा करती हों,
  • विज्ञापन सामग्री उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए और किसी भी प्रकार से सत्ता पक्ष के राजनीतिक हितों को बढ़ावा देने वाली नहीं होनी चाहिए,
  • विज्ञापन अभियानों को न्यायसंगत और कुशल और प्रभावी तरीके से चलाया जाना चाहिए तथा
  • सभी सरकारी विज्ञापन कानूनी नियमों के अनुरूप होना चाहिए और इनके लिए वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. CCRGA की स्थापना कब की गयी थी?
  2. इसकी शक्तियाँ?
  3. CCRGA गठित करने वाले राज्य।
  4. सरकारी विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश

मेंस लिंक:

सरकारी विज्ञापनों में विषय-वस्तु विनियमन समिति (CCRGA) की भूमिकाओं और अधिदेश पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मध्याह्न भोजन योजना (MDM)


(Mid-day meal scheme)

चर्चा का कारण

हाल ही में, उपराष्ट्रपति, श्री एम वेंकैया नायडू ने बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए सुबह के नाश्ते अथवा मध्यान्ह भोजन योजना में दूध दिए जाने का सुझाव दिया है।

मध्याह्न भोजन योजना के बारे में:

यह योजना, सरकारी विद्यालयों, सहायता प्राप्त स्कूलों तथा समग्र शिक्षा के अंतर्गत सहायता प्राप्त मदरसों में सभी बच्चों के लिए एक समय के भोजन को सुनिश्चित करती है।

इस योजना के अंतर्गत, आठवीं कक्षा तक के छात्रों को एक वर्ष में कम से कम 200 दिन पका हुआ पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है।

  • इस योजना का कार्यान्वयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा किया जाता है।
  • इस योजना को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू किया गया था। इसे प्राथमिक शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पौषणिक सहायता कार्यक्रम (National Programme of Nutritional Support to Primary Education: NP– NSPE) के रूप में शुरू किया गया था। वर्ष 2004 में, इस कार्यक्रम को मिड डे मील योजना के रूप में फिर से शुरू किया गया था।

मध्याह्न भोजन योजना (MDM) नियम 2015:

  • बच्चों को केवल स्कूल में भोजन परोसा जाएगा।
  • खाद्यान्नों की अनुपलब्धता अथवा किसी अन्य कारणवश, विद्यालय में पढाई के किसी भी दिन यदि मध्याह्न भोजन उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो राज्य सरकार अगले महीने की 15 तारीख तक खाद्य सुरक्षा भत्ता का भुगतान करेगी।
  • भोजन को केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए मिड डे मील दिशानिर्देशों के अनुसार तैयार किया जाएगा।
  • मध्याह्न भोजन तैयार करने के लिए एगमार्क (AGMARK) गुणवत्ता वाली सामग्री की खरीद की जायेगी तथा बच्चों को परोसने से पहले, एक शिक्षक सहित स्कूल प्रबंधन समिति के दो या तीन वयस्क सदस्यों द्वारा भोजन के स्वाद की जांच की जायेगी।
  • निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत अधिदेशित स्कूल प्रबंधन समिति मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करेगी।
  • राज्य स्तरीय चालन-सह निगरानी समिति (State Steering-cum Monitoring CommitteeSSMC) पोषण मानकों तथा भोजन की गुणवत्ता के रखरखाव के लिए एक तंत्र की स्थापना करेगी तथा योजना के कार्यान्वयन की देखरेख करेगी।

पोषण संबंधी मानक

  • मध्याह्न भोजन योजना (MDM) दिशानिर्देशों के अनुसार, निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा एवं 12 ग्राम प्रोटीन दिए जायेंगे, तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन दिए जाने का प्रावधान है।
  • MHRD के अनुसार, प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के भोजन में, 100 ग्राम खाद्यान्न, 20 ग्राम दालें, 50 ग्राम सब्जियां और 5 ग्राम तेल और वसा सम्मिलित की जायेगी। उच्च-प्राथमिक स्कूलों के बच्चों के भोजन में, 150 ग्राम खाद्यान्न, 30 ग्राम दालें, 75 ग्राम सब्जियां और 7.5 ग्राम तेल और वसा को अनिवार्य किया गया है।

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वित्त पोषण:

मध्याह्न भोजन योजना की लागत को केंद्र और राज्य सरकारों के मध्य साझा किया जाता है।

  • इस योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को मुफ्त अनाज प्रदान किया जाता है।
  • खाना पकाने, बुनियादी ढांचे के विकास, खाद्यान्न के परिवहन और रसोइयों और सहायकों को मानदेय का भुगतान केंद्र तथा राज्य सरकारों के मध्य साझा किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MDM योजना कब शुरू हुई?
  2. इसका नाम-परिवर्तन कब किया गया था?
  3. केंद्र प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के बीच अंतर?
  4. MDMS किस प्रकार की योजना है?
  5. योजना के तहत वित्त पोषण
  6. पोषक मानदंड निर्धारित
  7. योजना के तहत कवरेज
  8. योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता देने की जिम्मेदारी

मेंस लिंक:

मध्याह्न भोजन योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI)


(Multidimensional Poverty Index)

चर्चा का कारण

नीति आयोग, वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (Multidimensional Poverty IndexMPI) मापदण्ड डैशबोर्ड तथा ‘राज्य सुधार कार्य योजना (State Reform Action PlanSRAP) की तैयारियों के अंतिम चरण में है।

  • इस संदर्भ में, नीति आयोग को, वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) के निगरानी तंत्र का लाभ लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि सुधारों का संचालन किया जा सके। वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक के निगरानी तंत्र से सहायता प्राप्त होगी।
  • नीति आयोग, वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) के लिए नोडल एजेंसी है।

सुधार एवं विकास के संचालन के लिए वैश्विक सूचकांक (GIRG) प्रक्रिया:

ये वैश्विक MPI दरअसल 29 चुनिंदा वैश्विक सूचकांकों में देश के प्रदर्शन की निगरानी करने के भारत सरकार के फैसले का हिस्सा है।

  • ‘सुधार और विकास के संचालन के लिए वैश्विक सूचकांकों’ (Global Indices to Drive Reforms and GrowthGIRG) वाले इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मापदंडों पर भारत के प्रदर्शन को मापने और निगरानी करने की आवश्यकता को पूरा करना है।
  • इस प्रक्रिया का उद्देश्य, आत्म-सुधार के उपकरणों के तौर पर इन सूचकांकों के उपयोग को सक्षम करना है और सरकारी योजनाओं के अंतिम-मील तक के कार्यान्वयन में सुधार करते हुए नीतियों में सुधार लाना है।

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वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) क्या है?

  • वैश्विक MPI निर्धनता को लेकर 107 विकासशील देशों को कवर करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय उपाय है।
  • इसे पहली बार 2010 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मानव विकास रिपोर्ट के लिए ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (Oxford Poverty and Human Development InitiativeOPHI) और UNDP द्वारा विकसित किया गया था।

इसे कब जारी किया जाता है?

वैश्विक MPI को हर साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास संबंधी ‘उच्च-स्तरीय राजनीतिक फोरम’ (High-Level Political ForumHLPF) पर जारी किया जाता है।

देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

वैश्विक MPI की गणना प्रत्येक सर्वेक्षित घर को 10 मापदंडों पर आधारित अंक देकर की जाती है। इसमें पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास और घरेलू संपत्ति जैसे मानक शामिल हैं।

MPI 2020 में भारत एवं पड़ोसी देशों का प्रदर्शन:

  • वैश्विक MPI 2020 के अनुसार, NFHS 4 (2015/16) के आंकड़ों के आधार पर भारत 107 देशों में 62वें स्थान पर है और उसका MPI स्कोर 0.123 अंक है और प्रति व्यक्ति अनुपात 27.91 प्रतिशत है।
  • इस सूचकांक में भारत के पड़ोसी देशों, श्रीलंका (25वें), भूटान (68वें), नेपाल (65वें), बांग्लादेश (58वें), चीन (30वें), म्यांमार (69वें) और पाकिस्तान (73वें) रैंकिंग दी गई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MPI क्या है?
  2. इसे कौन जारी करता है?
  3. देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?
  4. भारत में MPI के लिए नोडल एजेंसी।
  5. सुधार एवं विकास के संचालन के लिए वैश्विक सूचकांक (GIRG) प्रक्रिया क्या है?
  6. MPI 2020 में भारत का प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

भारत, हाइपरसोनिक मिसाइल क्लब में सम्मिलित


संदर्भ:

हाल ही में, भारत द्वारा हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। इसके साथ ही, भारत हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने वाला अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा ऐसा देश बन गया है।

  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (Hypersonic Test Demonstrator Vehicle- HSTDV) का ओडिशा के व्हीलर द्वीप स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण केन्द्र से सफल प्रक्षेपण किया है।
  • इसके माध्यम से हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन किया गया।

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 इस परीक्षण उड़ान का महत्व एवं निहितार्थ

यह स्वदेशी तकनीक, ध्वनि की गति की छह गुना (Mach 6) गति से दूरी तय करने वाली मिसाइलों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (HSTDV)  क्या है?

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (HSTDV),  हाइपरसोनिक गति से उड़ान भरने हेतु मानव रहित स्क्रैमजेट प्रदर्शन विमान है।

क्रियाविधि:

  • हाइपरसोनिक क्रूज वाहन को एक ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग करके प्रक्षेपित किया गया जो इसे एक निश्चित ऊंचाई तक ले जायेगा, जहां हाइपरसोनिक गति के अनुरूप इसके वायुगतिकीय ताप कवच को अलग करने के पश्चात क्रूज़ वाहन प्रक्षेपण यान से अलग हो जायेगा।
  • इस दौरान ईंधन के रूप में हाइपरसोनिक दहन की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी जिससे यह अपने वांछित उड़ान पथ पर ध्वनि की गति से छह गुना यानी 2 किलोमीटर प्रति सेंकेंड की गति उड़ान भरेगा।

अनुप्रयोग:

  • इस प्रौद्योगिकी का उपयोग भविष्य की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों में किया जा सकता है।
  • इसका उपयोग कम लागत पर उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए किया जा सकता है।

क्रूज मिसाइल तथा बैलिस्टिक मिसाइल में अंतर

क्रूज़ मिसाइल:

क्रूज़ मिसाइल का लक्ष्य पहले से सेट किया जाता है या ये अपने लक्ष्य को नेविगेट करते है। यह प्रक्षेपास्त्र प्राय: जेट इंजन से चालित होते है।

  • क्रूज मिसाइलों को स्थलीय हमलों तथा जहाज रोधी उद्देश्यों के लिए स्थल, समुद्र या हवा से प्रक्षेपित किया जा सकता है, तथा यह सबसोनिक, सुपरसोनिक और हाइपरसोनिक गति से दूरी तय कर सकते हैं।
  • क्रूज़ मिसाइल पृथ्वी की सतह के समांनांतर चलते हैं और इसलिए एंटी-मिसाइल सिस्टम द्वारा आसानी से इनका पता नहीं लगाया जा सकता है। इन प्रक्षेपास्त्रों को मुख्य रूप से बड़े विस्फोटकों को लम्बी दुरी तक उच्च सटीकता से ले जाने के लिए बनाया जाता है।

बैलिस्टिक मिसाइल:

बैलिस्टिक मिसाइल को सीधे हवा में प्रक्षेपित किया जाता है, तथा यह एक अर्द्धचंद्राकार पथ (Ballistic Trajectory) का अनुसरण करती है।

  • वायुमंडल की ऊपरी परतों में पहुंचकर इनमें लगा हुआ वारहेड, मिसाइल से अलग होकर पूर्व निर्धारित लक्ष्य की ओर गिरता है।
  • वे रॉकेट-चालित स्व-निर्देशित हथियार प्रणाली होते हैं जो पारंपरिक अथवा परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम होते हैं। इन्हें विमान, जहाजों और पनडुब्बियों, तथा स्थल से प्रक्षेपित किया जा सकता है।

अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्या होते हैं?

अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल या ICBM, परमाणु और अन्य पेलोड ले जाने में सक्षम निर्देशित मिसाइलें होती हैं।

  • ICBM की न्यूनतम मारक क्षमता 5,500 किमी तथा अधिकतम मारक क्षमता 7,000 से 16,000 किमी तक होती है।
  • विश्व में केवल कुछ देशों, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, फ्रांस, भारत और उत्तर कोरिया के पास ICBM क्षमता हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. HSTDV को किसके द्वारा विकसित किया गया है?
  2. हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण करने वाले देश
  3. स्क्रैमजेट क्या है?
  4. ICBM क्या हैं?
  5. क्रूज मिसाइल क्या हैं?
  6. बैलिस्टिक मिसाइलें क्या हैं?

मेंस लिंक:

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (HSTDV) के सफल परीक्षण का भारत के लिए क्या महत्व है? चर्चा करें।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

असम राइफल्स पर नियंत्रण संबंधी निर्णय


चर्चा का कारण

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से असम राइफल्स पर गृह मंत्रालय (MHA) और रक्षा मंत्रालय (MoD) के दोहरे नियंत्रण संबंधी मामले पर निर्णय करने को कहा है।

पृष्ठभूमि:

कुछ समय पूर्व, असम राइफल्स पूर्व सैनिक वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी। याचिका में, सरकार के लिए, असम राइफल्स को एक नियंत्रण (भारतीय सेना- रक्षा मंत्रालय को प्राथमिकता) में लाने के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया था।

असम राइफल्स के बारे में:

असम राइफल्स जिसे नार्थ ईस्ट का प्रहरी भी कहा जाता है तथा यह भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल है।

  • असम राइफल्स गृह मंत्रालय (MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत छह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में से एक है।
  • असम राइफल्स का गठन 1835 में कछार लेवी नामक यूनिट के रूप में किया गया था। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर में शांति बनाए रखने में ब्रिटिश शासकों की सहायता करना था।
  • प्रख्यात मानवविज्ञानी वेरियर एल्विन (Verrier Elwin) द्वारा असम राइफल्स को ‘पहाड़ी लोगों के मित्र’ के रूप में वर्णित किया गया है।
  • असम राइफल्स ने दोनों विश्व युद्धों में भाग लिया।

असम राइफल्स के प्रमुख अधिदेश:

  • उपद्रव-रोधी (counter insurgency) तथा सीमा सुरक्षा अभियानों के माध्यम से सेना के नियंत्रण में आंतरिक सुरक्षा स्थापित करना।
  • आपातकाल के समय में नागरिकों की सहायता करना।
  • सुदूर क्षेत्रों में संचार, चिकित्सा सहायता और शिक्षा का प्रबंध करना।
  • युद्ध काल में, आवश्यकता पड़ने पर पृष्ठ क्षेत्रों की सुरक्षा हेतु युद्धक बल के रूप में कार्य करना।
  • वर्ष 2002 से असम राइफल्स 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार सीमा की रखवाली में तैनात है।

असम राइफल्स की विशेषताएं:

यह दोहरे नियंत्रण वाला एकमात्र अर्धसैनिक बल है।

  • असम राइफल्स का प्रशासनिक नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास है, जबकि परिचालन नियंत्रण रक्षा मंत्रालय के पास है।
  • इसका अर्थ है कि असम राइफल्स के लिए वेतन और बुनियादी सुविधाएँ गृह मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाती है, परन्तु, इसके कर्मियों की तैनाती, पोस्टिंग, स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति का निर्णय भारतीय सेना द्वारा लिया जाता है।

विवाद का कारण

  • असम राइफल्स पर दोहरे नियंत्रण वाली व्यवस्था में, असम राइफल्स के भीतर तथा गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय द्वारा, बल पर एकल नियंत्रण हेतु मांगों के दो सेट तैयार किये गए है।
  • बल के भीतर एक बड़ा वर्ग रक्षा मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आना चाहता है। इससे उन्हें गृह मंत्रालय के अधीन आने वाले अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की तुलना में बेहतर सुविधाएँ तथा सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त हो सकेंगे।

गृह मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय, दोनों असम राइफल्स पर पूर्ण नियंत्रण क्यों चाहते हैं?

गृह मंत्रालय का तर्क:

गृह मंत्रालय का कहना है कि, सभी सीमा रक्षक बल, इसके परिचालन नियंत्रण में आते हैं और इसलिए ‘असम राइफल्स’ के भी गृह मंत्रालय के नियंत्रण में आने से सीमा सुरक्षा के लिए विस्तृत तथा एकीकृत तंत्र प्राप्त होगा।

सेना का तर्क:

  • असम राइफल्स ने भारतीय सेना के समन्वय में अच्छा कार्य किया है तथा इसने सशस्त्र बलों को कई जिम्मेदारियों से मुक्त किया है।
  • इसके अलावा, असम राइफल्स हमेशा एक सैन्य बल रहा है। यह पुलिस बल नहीं है और न ही पुलिस के रूप में इसे गठित किया गया है। इसलिए, इसका नियंत्रण गृह मंत्रालय को देने अथवा इसे किसी अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के साथ विलय करने पर असम राइफल्स के लिए भ्रम की स्थिति उत्पन्न करेगा और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CAPF क्या हैं?
  2. असम राइफल्स से संबंधित दोहरा नियंत्रण क्या है?
  3. असम राइफल्स का गठन
  4. असम राइफल्स के प्रमुख अधिदेश

मेंस लिंक:

असम राइफल्स से संबंधित दोहरा नियंत्रण समस्या क्या है? इसे किस प्रकार हल किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अशासकीय व्यक्तियों को केंद्रीय सुरक्षा कवच

  • खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर गृह मंत्रालय द्वारा अशासकीय व्यक्तियों को केंद्रीय सुरक्षा देने का निर्णय लिया जाता है।
  • भारत में छह प्रकार के केंद्रीय सुरक्षा कवच हैं: एक्स, वाई, वाई प्लस, जेड, जेड प्लस और एसपीजी।
  • विशेष सुरक्षा दल (Special Protection Group- SPG) केवल प्रधान मंत्री की सुरक्षा करता है, जबकि अन्य सुरक्षा कवच केंद्र के आकलन के आधार पर किसी को भी प्रदान किये जा सकता है।

चार्चा का कारण

हाल ही में, अभिनेत्री कंगना रानौत को वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।

इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति वर्ष 1986 में एक ट्रस्ट द्वारा की गयी थी। इसमें एक प्रशस्ति पत्र के साथ 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

योग्यता: यह पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय शांति और विकास सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है।

चर्चा का कारण

मशहूर प्रकृतिवादी और प्रसारक सर डेविड एटनबरो को सोमवार को 2019 के इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इस सदी के दौरान अगस्त में दूसरी सर्वाधिक बारिश

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अगस्त में बारिश वर्ष 1926 के बाद सर्वाधिक, 32.7 सेमी हुई है, जोकि इस महीने में सामान्य से लगभग 27% अधिक है। अगस्त 1926 में 34.8 सेमी वर्षा दर्ज की गई थी।

गुरुप्रिया ब्रिज (Gurupriya Bridge)

  • यह ओडिशा में गुरुप्रिया नदी के पर निर्मित है तथा इसका वर्ष 2018 में उद्घाटन किया गया था।
  • यह पुल, चित्रकोण्डा ब्लाक की नौ पंचायतों के 151 गांवों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। इस क्षेत्र को कभी कट-ऑफ क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता था, किंतु इस पुल के कारण अब स्वाभिमान अचल के रूप में जाना जाता है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, ओडिशा के माओवादी ‘स्वाभिमान आंचल’ को मोबाइल संपर्क सुविधा प्रदान की गयी है।


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