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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 05 September

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. डॉ. राधाकृष्णन

 

सामान्य अध्ययन- II

1. न्यायिक निरर्हता अथवा ‘सुनवाई से इंकार’

2. ‘युवा बाल परिणाम सूचकांक’ एवं युवा बाल पर्यावरण सूचकांक

3. ब्रिक्स के संस्कृति मंत्रियों की बैठक

4. उत्तर अटलांटिक संधि संगठन

5. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ‘एक्ट ऑफ गॉड’ किसे माना जाता है?

2. राष्ट्रीय उद्यान क्या हैं?

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इंद्र नेवी (Indra Navy)

2. यानोमामी जनजाति तथा ब्लड गोल्ड

3. रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 144(2)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन


संदर्भ:

भारत में ‘शिक्षक दिवस’ प्रतिवर्ष 5 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन को भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन की जन्मदिवस पर मनाया जाता है।

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में:

  • इनका जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के थिरुथानी (Thiruthani) में हुआ था।
  • वह भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे।

radhakrishnan

उनका दर्शन एवं साहित्यिक कार्य:

  • उनकी पुस्तक, ‘द फिलॉसफी ऑफ़ रवींद्रनाथ टैगोर’ ने भारतीय दर्शन पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया।
  • उनका दर्शन अद्वैत वेदांत पर आधारित था।
  • उन्होंने, ‘अनभिज्ञ पश्चिमी आलोचना’ से हिंदू धर्म का बचाव किया और समकालीन हिंदू पहचान स्थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाई।
  • उनकी अन्य रचनाओं में भारतीय दर्शन, (1923-27), द फिलॉसफी ऑफ़ द उपनिषद (1924), एन आइडियलिस्ट व्यू ऑफ़ लाइफ (1932), पूर्वी धर्म और पश्चिमी विचार (1939), और पूर्व और पश्चिम: कुछ प्रतिबिंब (1955) सम्मिलित हैं।

पुरस्कार और सम्मान:

  • उन्हें वर्ष 1954 में भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था।
  • उन्हें वर्ष 1931 में नाइटहुड तथा वर्ष 1963 में ब्रिटिश रॉयल ऑर्डर ऑफ़ मेरिट की मानद सदस्यता प्रदान की गयी।
  • वर्ष 1948 में इन्हें यूनेस्को के कार्यकारी बोर्ड का अध्यक्ष चुना गया था।
  • वह हेल्पेज इंडिया (Helpage India) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। यह जो भारत में सुविधाहीन वृद्धों के लिए एक प्रसिद्ध गैर सरकारी संगठन है।
  • उन्होंने स्वतंत्रता पूर्व अवधि में घनश्याम दास बिड़ला और कुछ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ कृष्णार्पण चैरिटी ट्रस्ट का भी गठन किया था।
  • वह ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘द स्पाल्डिंग प्रोफेसर ऑफ़ ईस्टर्न रिलिजन एंड एथिक्स’ (1936-1952) पीठ पर नियुक्त होने वाले पहले भारतीय थे।
  • उन्हें, वर्ष 1930 में, शिकागो विश्वविद्यालय में तुलनात्मक धर्म में हास्केल प्राध्यापक (Haskell lecturer) नियुक्त किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शिक्षक दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
  2. डॉ राधाकृष्णन द्वारा धारित पद
  3. पुरस्कार और सम्मान
  4. उनका दर्शन
  5. महत्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ
  6. उनके द्वारा भाग लिए जाने वाले महत्वपूर्ण आंदोलन
  7. उसके द्वारा स्थापित संस्थान तथा वह किससे संबद्ध है?
  8. अद्वैत वेदांत क्या है?

मेंस लिंक:

अद्वैत सिद्धांत से आप क्या समझते हैं? अद्वैत के नैतिक पहलुओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

न्यायिक निरर्हता अथवा ‘सुनवाई से इंकार’


(What is Judicial Disqualification or Recusal)

चर्चा का कारण

हाल ही में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश ने वर्ष 1991 में एक व्यक्ति के लापता होने और उसकी हत्या के मामले में पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) सुमेध सिंह सैनी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

न्यायाधीश ने सुनवाई से खुद को अलग करते हुए मामले को सूचीबद्ध करने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया।

सुनवाई से इंकार’ (Recusal) क्या होता है?

किसी पीठासीन न्यायायिक अधिकारी अथवा प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हितों के टकराव के कारण किसी न्यायिक सुनवाई अथवा आधिकारिक कार्रवाई में भागीदारी से इंकार करने को न्यायिक निरर्हता (Judicial disqualification), ‘सुनवाई से इंकार’ करना अथवा ‘रिक्युजल’ (Recusal) कहा जाता है।

‘रिक्युजल’ के लिए सामान्य आधार:

किसी न्यायाधीश अथवा अन्य निर्णायक को किसी मामले की सुनवाई से अलग करने संबंधी प्रस्ताव के विभिन्न आधार होते है।

आमतौर पर, इन प्रस्तावों का आधार इस प्रकार के दावे होते हैं जिनमे कहा जाता है कि, न्यायाधीश किसी एक पक्षकार के प्रति सद्भाव रखता है, अथवा अन्य पक्षकार के प्रति द्वेषपूर्ण है, या यदि किसी तर्कशील निष्पक्ष पर्यवेक्षक को लगता है, कि न्यायाधीश किसी के प्रति पक्षपाती हो सकता है।

इन प्रस्तावों में सुनवाई हेतु नियुक्त न्यायाधीश को निम्नलिखित अन्य आधारों पर भी चुनौती दी जाती है:

  1. न्यायाधीश का मामले में व्यक्तिगत हित है अथवा वह मामले में व्यक्तिगत हित रखने वाले किसी व्यक्ति से संबंध रखता है।
  2. न्यायाधीश की पृष्ठभूमि अथवा अनुभव, जैसे कि न्यायाधीश के वकील के रूप में किये गए पूर्व कार्य।
  3. मामले से संबंधित तथ्यों अथवा पक्षकारों से व्यक्तिगत तौर पर परिचय।
  4. वकीलों या गैर-वकीलों के साथ एक पक्षीय संवाद।
  5. न्यायाधीशों के अधिनिर्णय, टिप्पणियां अथवा आचरण।

इस संदर्भ में विधान

न्यायाधीशों द्वारा ‘सुनवाई से इंकार’ करने संबंधी कोई निश्चित नियम नहीं हैं।

  • जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2015) मामले में अपनी राय दी थी कि ’जहां भी किसी न्यायाधीश के आर्थिक हित प्रतीत होते है, वहां पक्षपात संबंधी किसी ‘वास्तविक खतरे’ अथवा ‘तर्कपूर्ण संदेह’ की जांच की आवश्यकता नहीं है।
  • इसके अलावा, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के पद की शपथ लेने के समय, न्याय प्रदान करने के लिए ‘बिना किसी डर या पक्षपात, लगाव या वैमनस्य के’ अपने कर्तव्यों को निभाने का वादा करते हैं ।

समय की मांग:

  1. इस संबंध में स्पष्ट व निश्चित नियम बनाए जाने चाहिए।
  2. न्यायाधीशों को ‘सुनवाई से इंकार’ करते हुए लिखित रूप में अपना निर्णय व्यक्त करना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. न्यायिक निरर्हता के लिए आधार।
  2. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शपथ कौन दिलाता है?
  3. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 127 और 128 किससे संबंधित हैं?

मेंस लिंक:

‘सुनवाई से इंकार’ (Recusal), सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए नैतिकता की एक चयनात्मक पुकार बन गया है। चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

‘युवा बाल परिणाम सूचकांक’ एवं युवा बाल पर्यावरण सूचकांक


(The young child outcomes index and the young child environment index released)

क्या है यह?

  • ये दोनों सूचकांक भारत की स्टेट ऑफ द यंग चाइल्ड रिपोर्ट का हिस्सा हैं।
  • इस रिपोर्ट को एक गैर-सरकारी संगठन मोबाइल क्रेच (Mobile Creches) द्वारा तैयार किया गया है।

‘युवा बाल परिणाम सूचकांक’ के बारे में:

‘युवा बाल परिणाम सूचकांक’ (Young Child Outcomes Index) में ‘शिशु मृत्यु दर’, ‘वृद्धि-रोध’ या बौनापन (Stunting) तथा प्राथमिक विद्यालय स्तर पर कुल उपस्थिति, जैसे संकेतकों की मदद से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और संज्ञानात्मक विकास को मापा जाता है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • शीर्ष पांच राज्य: केरल, गोवा, त्रिपुरा, तमिलनाडु और मिजोरम, बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण की दृष्टि से शीर्ष पांच राज्यों में सम्मिलित हैं।
  • सूचकांक में राष्ट्रीय औसत से कम प्रदर्शन करने वाले आठ राज्य: असम, मेघालय, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार।

युवा बाल पर्यावरण सूचकांक के बारे में:

युवा बाल पर्यावरण सूचकांक (young child environment index) का उद्देश्य बच्चों के कल्याण को प्रभावित करने वाली नीतियों और पर्यावरण का अध्ययन करना है।

इसे किस प्रकार तैयार किया जाता है?

इसमें, गरीबी उन्मूलन, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को सशक्त करना, शिक्षा के स्तर में सुधार, सुरक्षित जल आपूर्ति, लैंगिक समता को बढ़ावा देना, जैसे बच्चों के कल्याण को प्रभावित करने वाले पांच नीति प्रवर्तकों का उपयोग किया जाता है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • शीर्ष पांच राज्य: केरल, गोवा, सिक्किम, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने युवा बाल पर्यावरण सूचकांक शीर्ष पांच स्थान हासिल किए है।
  • ‘युवा बाल परिणाम सूचकांक’ में औसत से कम प्रदर्शन करने वाले आठ राज्य इस सूचकांक में भी निम्न स्थानों पर रहे हैं।

रिपोर्ट द्वारा दिए गए सुझाव:

भारत सरकार द्वारा वर्ष 2018 में बाल पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य आवश्यक सुरक्षा सेवाओं पर प्रति बालक ₹1,723 व्यय किये गए। यह राशि काफी कम है तथा समूची पात्र आबादी तक पहुचने में विफल रही है। अतः, समय की मांग है, कि बच्चों पर किये जाने वाले सार्वजनिक व्यय में वृद्धि की जाए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में ‘स्टेट ऑफ द यंग चाइल्ड’ रिपोर्ट को किसके द्वारा जारी किया जाता है?
  2. इस रिपोर्ट में प्रयुक्त विभिन्न सूचकांक।
  3. इन सूचकांकों के तहत विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन।

मेंस लिंक:

भारत में ‘बाल स्वास्थ्य एवं कल्याण’ से संबंधित मुद्दे पर चर्चा कीजिए। बालकों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तथा उनके ‘स्वास्थ्य एवं कल्याण’ को सुनिश्चित करने हेतु उपायों को सूचीबद्ध कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

ब्रिक्स के संस्कृति मंत्रियों की बैठक


(BRICS Culture Ministers’ Meeting)

संदर्भ:

हाल ही में, रूसी फेडेरेशन की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) के संस्कृति मंत्रियों की पांचवीं बैठक आयोजित की गयी।

BRICS के बारे में प्रमुख तथ्य:

ब्रिक्स (BRICS) दुनिया की पाँच अग्रणी उभरती अर्थव्यवस्थाओं- ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के लिये एक संक्षिप्त शब्द  है।

  • वर्ष 2001 में ब्रिटिश अर्थशास्री जिम ओ’ नील (Jim O’Neill) द्वारा ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के लिये एक रिपोर्ट में BRIC शब्द की चर्चा की गई थी।
  • वर्ष 2006 में BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक में इस ‘समूह’ को औपचारिक रूप दिया गया।
  • दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका को BRIC में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया और इसके बाद से इस समूह को BRICS कहा जाने लगा।

अन्य प्रमुख बिंदु:

  • BRICS फोरम की अध्यक्षता प्रतिवर्ष B-R-I-C-S अक्षरों के क्रमानुसार सदस्य देशों के द्वारा की जाती है।
  • ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
  • वर्ष 2014 में फोर्टालेजा, ब्राज़ील में हुए छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान BRICS नेताओं द्वारा न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की स्थापना के लिये समझौते पर हस्ताक्षर किये गए, तथा ब्रिक्स आकस्मिक रिज़र्व व्यवस्था (Contingent Reserve ArrangementCRA) बनाने पर सहमति जताई गयी।

 सदस्यों के मध्य सहयोग:

  1. ट्रैक I: राष्ट्रीय सरकारों के मध्य औपचारिक राजनयिक जुड़ाव।
  2. ट्रैक II: सरकार से संबद्ध संस्थानों के माध्यम से संबंध, जैसे कि राज्य के स्वामित्व वाले उद्यम और व्यापार परिषद।
  3. ट्रैक III: सिविल सोसायटी और पीपल-टू-पीपल संपर्क।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. BRICS- उत्पत्ति, दक्षिण अफ्रीका कब सम्मिलित हुआ?
  2. न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के बारे में
  3. भारत में NDB द्वारा वित्त पोषित परियोजनाएं कौन सी हैं?
  4. फोर्टालेजा घोषणा किससे संबंधित है?
  5. ब्रिक्स आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था क्या है?

मेंस लिंक:

न्यू डेवलपमेंट बैंक और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के क्या उद्देश्य है? जांच करें कि क्या NDB और AIIB के आने से पश्चिमी वित्त पोषित बहुपक्षीय वित्त पोषण संस्थानों के विकास वित्तपोषण नियमों में बदलाव होगा?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO)


(North Atlantic Treaty Organization)

चर्चा का कारण

हाल ही में ग्रीस द्वारा नाटो द्वारा मध्यस्थता के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। ग्रीस का कहना है, कि उसके देश की जलीय सीमा से तुर्की जहाजों के वापस जाने के पश्चात ही ‘युद्ध की तीव्रता में कमी’ (de-escalation) होगी।

विवाद का कारण

हाल के कुछ हफ्तों से, पूर्वी भूमध्यसागरीय जल क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है। इसका कारण, प्रथमदृष्ट्या ऊर्जा संसाधनों पर एक सामान्य प्रतिस्पर्धा प्रतीत होता है।

  1. तुर्की इस क्षेत्र में आक्रामक रूप से गैस अन्वेषण में लगा हुआ है, तथा इसके अनुसंधान पोत की सुरक्षा में तुर्की नौसेना के युद्धपोतों तैनात है।
  2. इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी ग्रीक जहाजों तथा नाटो (NATO) समूह के देश, फ्रांस के साथ तुर्की की मुठभेड़ हो चुकी है। फ्रांस ने प्रतिस्पर्धा में ग्रीस का पक्ष लिया है।
  3. इस क्षेत्र में उत्पन्न हुए तनाव से एक और परिवर्तन उजागर हुआ हैं – अमेरिकी वर्चस्व में कमी।

इस तनाव के कारण:

तुर्की तथा ग्रीस के मध्य तनाव बढ़ता जा रहा है, इसका कारण तुर्की द्वारा भूमध्यसागर में स्थित द्वीपीय देश ‘साइप्रस’ के नजदीक की जा रही ‘ड्रिलिंग गतिविधियाँ’ है।

  1. ‘साइप्रस’, ग्रीस की भांति यूरोपीय संघ का सदस्य है।
  2. तुर्की, साइप्रस के विभाजित द्वीप को एक राज्य के रूप में मान्यता नहीं देता है तथा साइप्रस के अनन्य आर्थिक क्षेत्र के 44 प्रतिशत पर अपने अधिकार का दावा करता है।
  3. वर्ष 1974 में साइप्रस के ग्रीस में सम्मिलित होने के समर्थकों द्वारा तख्तापलट को रोकने हेतु तुर्की द्वारा आक्रमण किया गया तथा साइप्रस जातीय आधार पर विभाजित हो गया था।

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के बारे में:

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty OrganizationNATO) एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है।

  • इसकी स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को वाशिंगटन संधि द्वारा की गयी थी।
  • मुख्यालय – ब्रुसेल्स, बेल्जियम।
  • अलाइड कमांड संचालन मुख्यालय – मॉन्स (Mons), बेल्जियम।

नाटो का महत्व:

नाटो, सामूहिक रक्षा प्रणाली का गठन करता है, जिसके तहत इसके स्वतंत्र सदस्य देश किसी भी बाहरी आक्रमण की स्थिति में सामूहिक रक्षा प्रदान करने के लिए तैयार होते हैं।

संरचना:

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 12 संस्थापक सदस्यों द्वारा की गयी थी, वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 30 हो गयी है। मैसेडोनिया’ इस समूह में सम्मिलित होने वाला सबसे नवीनतम देश है, इसे नाटो में 27 मार्च 2020 को सम्मिलित किया गया।

नाटो की सदस्यता ‘इस संधि के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने तथा उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा में योगदान देने में सक्षम किसी भी अन्य यूरोपीय देश’ के लिए खुली है।

उद्देश्य:

राजनीतिक – नाटो लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देता है तथा सदस्य देशों को समस्याओं को हल करने, परस्पर विश्वास बनाने और संघर्ष रोकने हेतु रक्षा एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर परामर्श और सहयोग करने में सक्षम बनाता है।

सैन्य – नाटो विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो इसके पास संकट-प्रबंधन कार्यवाही करने की सैन्य शक्ति है। इन कार्यवाहियों को ‘NATO’ की संस्थापक संधि (वाशिंगटन संधि) के सामूहिक रक्षा परिच्छेद (अनुच्छेद 5) के तहत कार्यान्वित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नाटो- उत्पत्ति और मुख्यालय
  2. नाटो एलाइड कमांड ऑपरेशन क्या है?
  3. नाटो का सदस्य कौन बन सकता है?
  4. वाशिंगटन संधि का अवलोकन
  5. उत्तरी अटलांटिक महासागर के समीपवर्ती देश
  6. नाटो का सबसे नया सदस्य।

मेंस लिंक:

नाटो के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)


चर्चा का कारण

हाल ही में, ईरान द्वारा वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में संभावित अघोषित परमाणु गतिविधियों से संबधित दो साईटो में से एक साईट के निरीक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)  के निरीक्षकों को अनुमति दी गयी है।

विवाद का विषय

ईरान ने 2015 में अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और रूस के साथ परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन’ या JCPOA के रूप में जाना जाता है, तथा इसके तहत ईरान को केवल 202.8 किलोग्राम (447 पाउंड) का भंडार रखने की अनुमति दी गयी थी।

हालांकि, IAEA की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने समझौते में निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करते हुए समृद्ध यूरेनियम का भंडार ने वृद्धि की है।

निरीक्षण की आवश्यकता

  1. ईरान द्वारा परमाणु हथियार मशीन अथवा परमाणु हथियार परीक्षण हेतु न्यूट्रॉन चालक (Neutron Initiator) के निर्माण पर काम किये जाने के संकेत मिले है
  2. ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार में लगभग 50% तक की वृद्धि हुई है तथा यह 1,572 किलोग्राम तक हो चुका है। वर्ष 2015 के परमाणु समझौते में ईरान के लिए समृद्ध यूरेनियम भंडार की सीमा 202.8 किलोग्राम निर्धारित की गयी थी।
  3. 1,000 किलोग्राम निम्न-समृद्ध यूरेनियम (low-enriched uranium) को पुनः समृद्ध करने पर ईरान पास परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त सामग्री हो जायेगी। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस प्रक्रिया में तीन महीने से कम समय लग सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ के रूप की गयी थी। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।

  • इसका उद्देश्य विश्व में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। यह परमाणु ऊर्जा के सैन्य उपयोग को किसी भी प्रकार रोकने में प्रयासरत रहती है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स

  • 22 सदस्य राज्यों (प्रत्येक द्वारा निर्धारित भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व) – सामान्य सम्मेलन द्वारा निर्वाचन (प्रत्येक वर्ष 11 सदस्य) – 2 वर्ष का कार्यकाल
  • कम से कम 10 सदस्य देश – निवर्तमान बोर्ड द्वारा नामित

कार्य:

  • IAEA गतिविधियों और बजट पर जनरल कॉन्फ्रेंस की सिफारिशें
  • IAEA मानकों को प्रकाशित करने के लिए जिम्मेदार
  • IAEA की अधिकांश नीतियों के निर्माण हेतु जिम्मेदार
  • जनरल कॉन्फ्रेंस अनुमोदन के अधीन महानिदेशक की नियुक्त

कार्यक्रम

  1. कैंसर थेरेपी के लिए कार्रवाई का कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. अभिनव परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. IAEA के सदस्य
  5. IAEA के कार्यक्रम।
  6. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  7. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

एक्ट ऑफ गॉडकिसे माना जाता है?


(What counts as ‘Act of God’?)

चर्चा का कारण

हाल ही में, जीएसटी संग्रह में होने वाली कमी के लिए कोविड-19 को कारण ठहराते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, कि अर्थव्यवस्था एक्ट ऑफ गॉडजैसी स्थिति का सामना कर रही है।

इसी वर्ष फरवरी में भी, वित्त मंत्रालय ने कहा था कि इस महामारी को ‘प्राकृतिक आपदा’ समझा जाना चाहिए तथा उचित समझे जाने पर ‘प्राकृतिक आपदा प्रावधान’ (Force Majeure clause-FMC) को लागू किया जा सकता है ।

‘प्राकृतिक आपदा प्रावधान’ (FMC) क्या है?

‘प्राकृतिक आपदा’ (Force Majeure) अथवा ‘एक्ट ऑफ गॉड’ (Act of God) प्रावधान नेपोलियन कोड (Napoleonic Code) से लिए गए है।

  • FMC प्रावधान, अधिकांश वाणिज्यिक अनुबंधों में सम्मिलित किये जाते है तथा यह संकटकालीन स्थिति का सामना करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयार की गई कानूनी व्यवस्था है।
  • ‘प्राकृतिक आपदा प्रावधान’ (Force majeure clauseFMC), किसी अनुबंध को भंग किए बिना दोनों पक्षों को अनुबंध के दायित्त्व या बाध्यताओं से मुक्त करता है।
  • व्यय विभाग द्वारा जारी किए गए ‘सामानों की खरीद के लिए मैनुअल’, 2017 में ‘प्राकृतिक आपदा प्रावधान’ (FMC) का उल्लेख किया गया है।
  • इसके अलावा, ‘प्राकृतिक आपदा’ से संबंधित नियम ‘भारतीय संविदा अधिनियम, 1872’ (Indian Contract Act, 1872) के तहत निर्धारित किये गए हैं।

‘एक्ट ऑफ गॉड’ तथा और ‘प्राकृतिक आपदा’ के मध्य अंतर:

आमतौर पर, ‘एक्ट ऑफ गॉड’ के तहत केवल प्राकृतिक अप्रत्याशित परिस्थितियों को सम्मिलित किया जाता है, जबकि प्राकृतिक आपदा’ (force majeure) का दायरा काफी विस्तृत होता है, और इसमें प्राकृतिक रूप से होने वाली घटनाओं तथा मानव-जनित घटनाओं को भी सम्मिलित किया जाता है।

‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधानों को कानूनी तौर पर लागू करने हेतु परिस्थितियां

‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधानों को लागू करने के लिए, युद्ध, दंगे, प्राकृतिक आपदाएँ या ‘एक्ट ऑफ गॉड’, हड़तालें, व्यापारिक प्रतिवंध लागने वाली सरकार की नयी नीतियां, बहिष्कार, महामारी का प्रकोप आदि स्थितियाँ सूचीबद्ध हैं।

न्यायालय की दृष्टि में यह प्रावधान:

न्यायालय ने अपने फैसलों में यह स्थापित किया है, कि ‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधानों को किसी अनुबंध के परिपालन में कठिनाई होने पर लागू नहीं किया जा सकता है, इसे केवल असंभवता वाली स्थितियां उत्पन्न होने पर लागू किया जायेगा।

इस साल अप्रैल में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में ‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधान लागू करने की मांग खारिज कर दी थी। मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि, वह कोविड-19 से संबंधित लॉकडाउन के कारण स्टील की आपूर्ति के लिए किये गए एक अनुबंध को पूरा करने में सक्षम नहीं है, अतः उसे ‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधानों के तहत राहत प्रदान की जाए।

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वैश्विक उदाहरण:

  • चीन के सुप्रीम पीपुल्स कोर्ट द्वारा ‘2002 SARS’ के प्रकोप को ‘प्राकृतिक आपदा’ घटना के रूप में मान्यता दी गयी।
  • सिंगापुर ने महामारी के कारण अपने संविदात्मक दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ व्यवसायों को राहत देने के लिए अप्रैल में कोविड-19 (अस्थायी उपाय) अधिनियम (Covid-19 (Temporary Measures) Act) लागू किया।
  • जुलाई में, पेरिस की एक वाणिज्यिक अदालत ने निर्णय दिया कि, इस महामारी को ‘प्राकृतिक आपदा’ के समान माना जा सकता है।

‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधान पर आदर्श सहिंता:

इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (ICC) ने मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय प्रणालियों को सम्मिलित करते हुए ‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधान पर आदर्श सहिंता (Model Code on the force majeure clause) विकसित की है।

इस कोड में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदा’ प्रावधान को लागू करने के लिए, परिस्थितियों को याचिकाकर्ता के उचित नियंत्रण से बाहर होना चाहिए; तथा अनुबंध की शुरुआत के समय इन परिस्थितियों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता हो।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘प्राकृतिक आपदा’ क्या है? इसे कब लागू किया जा सकता है?
  2. ICC द्वारा विकसित किए गए ‘प्राकृतिक आपदा’ प्रावधान पर आदर्श सहिंता का अवलोकन।
  3. एक्ट ऑफ गॉड’ तथा और ‘प्राकृतिक आपदा’ के मध्य अंतर
  4. नेपोलियन कोड क्या है?

मेंस लिंक:

प्राकृतिक आपदा’ सिद्धांत क्या है? इसे कब लागू किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राष्ट्रीय उद्यान (National Park)


चर्चा का कारण

हाल ही में, असम सरकार द्वारा 884 वर्ग किलोमीटर में विस्तृत काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 30.53 वर्ग किमी (3,053 हेक्टेयर) क्षेत्र को सम्मिलित किये जाने हेतु स्वीकृति प्रदान की गयी है।

इस कदम का निहितार्थ एवं महत्व:

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सम्मिलित किया गया नया क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी के पार स्थित ओरांग और नामेरी राष्ट्रीय उद्यानों को जोड़ने में मदद करेगा, तथा इसके अतिरिक्त, इससे उद्यान के दक्षिण में स्थित कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों से भी सम्पर्क स्थापित होगा। ज्ञातव्य हो, कार्बी आंगलोंग की पहाड़ियों में गैंडे, बाघ, हिरण और अन्य जानवर बाढ़ के दौरान शरण लेते हैं।

राष्ट्रीय उद्यान क्या होते हैं?

भारतीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय उद्यान वह संरक्षित क्षेत्र होता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा किसी अभ्यारण्य के अंतर्गत अथवा बाहर के किसी क्षेत्र को पारिस्थितिक, पशु-पक्षी, वनस्पति, भू-आकृति, अथवा जैव संरचना के महत्व, संरक्षण तथा प्रसार के उद्देश्य से संरक्षित घोषित किया जा सकता है।

  • राष्ट्रीय उद्यान/ नेशनल पार्क में वन्यजीव अभयारण्य की तुलना में अधिक प्रतिबंध होते हैं।
  • इनकी सीमाएँ निर्धारित और परिभाषित होती हैं।
  • राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य उद्देश्य, किसी क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण करना है।

राष्ट्रीय उद्यानों में गतिविधियाँ

  • राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किसी क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं।
  • पशुओं की चराई तथा व्यक्तिगत पट्टा अधिकारों की अनुमति नहीं होती है।
  • वन्यजीव अधिनियम की अनुसूचियों में सूचीबद्ध प्रजातियों के शिकार अथवा पकड़ने की अनुमति नहीं होती है।
  • कोई भी व्यक्ति किसी भी राष्ट्रीय उद्यान में किसी भी वन्यजीव को नुकसान नहीं पहुंचा सकता है, तथा किसी जंगली जानवर के आवास को नष्ट नहीं कर सकता है।
  • राष्ट्रीय उद्यान के रूप में घोषित किसी क्षेत्र को अभयारण्यकी स्थिति में निम्नीकृत नहीं किया जा सकता है।

राष्ट्रीय उद्यान की घोषणा

किसी क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान के रूप में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों दोनों के द्वारा घोषित किया जा सकता है। राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं में कोई परिवर्तन केवल राज्य विधानमंडल द्वारा पारित प्रस्ताव के द्वारा किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान- महत्वपूर्ण वनस्पति तथा प्राणी
  2. राष्ट्रीय उद्यान क्या होते है? इसे कौन घोषित कर सकता है?
  3. राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्यजीव अभयारण्य के मध्य अंतर
  4. राष्ट्रीय उद्यानों के अंदर क्या अनुमति नहीं है?
  5. ओरंग और नामेरी राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इंद्र नेवी (Indra Navy)

संदर्भ: हाल ही में, इंद्र नेवी नौसैनिक अभ्यास का 11वां संस्करण शुरू किया गया है।

  • यह भारतीय नौसेना और रूसी नौसेना के बीच द्विवार्षिक नौसैनिक अभ्यास है।
  • वर्ष 2003 से आरंभ किया गया, ‘इंद्र नेवी नौसैनिक अभ्यास’ दो नौसेनाओं के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है।

यानोमामी जनजाति तथा ब्लड गोल्ड

(Yanomami people and blood gold)

यानोमामी जनजाति के लोग, दक्षिण अमेरिका के वेनेज़ुएला एवं ब्राज़ील की सीमा पर अमेज़न वर्षावन में निवास करते हैं, तथा सर्वाइवल इंटरनेशनल के अनुसार यह दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी एकाकी जनजाति है।

  • यानोमामी जनजाति के लोग सामूहिक व्यवस्था में बड़े आकार के गोलाकार घर में रहते हैं, जिसे शाबोनोस (Shabonos) कहा जाता है तथा इसमें एक साथ 400 लोग तक रह सकते हैं।
  • यानोमामी में प्रथा परचलित है, जिसमे शिकारी, अपने द्वारा शिकार किये गए मांस को नहीं खाता है।
  • यानोमामी सभी लोगों को एक समान मानते हैं तथा इनमे कोई मुखिया नहीं होता है। इसके सभी निर्णय लंबी चर्चा और बहस के बाद सर्वसम्मति पर आधारित होते हैं।

चर्चा का कारण

1980 के दशक के बाद से, यनोमामी जनजाति को अवैध सोने की खानों के कारण होने वाले हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

  • यह माना जाता है, कि यानोमामी जनजाति के क्षेत्रों से अवैध रूप से खनन किया गया सोना वर्ष 2018 से भारत में लाया जा रहा है।
  • इस क्षेत्र से निकले सोने को ‘खूनी सोना’ (ब्लड गोल्ड) का नाम दिया गया है, तथा हाल ही में उन्होंने भारत सरकार से इस सोने की खरीद पर रोक लगाने के लिए कहा है।

Yanomami_people

रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 144(2)

इसके अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी रेल गाड़ी अथवा रेलवे स्टेशन पर भीख मांगता है, तो उसे एक वर्ष के लिए कारावास की सजा अथवा 2,000 रु. तक का जुर्माना या दोनों हो सकते है।

चर्चा का कारण

रेल मंत्रालय ने ट्रेनों या रेलवे परिसरों पर भीख मांगने को गैर-अपराध घोषित करने का प्रस्ताव दिया है। इस संबंध में, रेल मंत्रालय ने अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर टिप्पणी / सुझाव देने के लिए कहा है।


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