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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 03 September

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. श्री नारायण गुरु

 

सामान्य अध्ययन-II

1. “मिशन कर्मयोगी” – राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS)

2. रेड बुल की ‘ट्रेडमार्क’ संबंधी याचिका खारिज

3. वैश्विक नवाचार सूचकांक 2020

4. चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध

5. रिहाइशी उद्यमी कार्यक्रम

6. आरे फॉरेस्ट के 600 एकड़ को आरक्षित वन घोषित

7. स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चर्चित स्थल: चुशूल (Chushul)

2. प्रश्नकाल (Question Hour)

3. जम्मू-कश्मीर के लिए तीन और आधिकारिक भाषाएँ

4. मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port)

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

श्री नारायण गुरु


संदर्भ:

दो सितंबर को श्री नारायण गुरु की 164 वीं जयंती मनाई गई।

कौन थे श्री नारायण गुरु?

नारायण गुरु (1856 – 1928) भारत के महान संत एवं समाजसुधारक थे। उन्हें तत्कालीन केरल के सामाजिक ताने-बाने को बदलने तथा केरलवासियों की मान्यताओं को बदलने का श्रेय दिया जाता है।

उनका जन्म एक एझावा परिवार हुआ था, उस समय इस समुदाय के लोगों को अवर्ण माना जाता था तथा जातिवाद से ग्रसित केरल के समाज में इन्हें सामाजिक अन्याय का अत्याधिक सामना करना पड़ा।

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 योगदान / उपलब्धियाँ

सामाजिक सुधार आंदोलन:

  • उन्होंने केरल में समाज सुधार आंदोलन का नेतृत्व किया तथा जातिवाद को खारिज करते हुए आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के नए मूल्यों को बढ़ावा दिया।
  • उन्होंने दलित वर्गों के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान की आवश्यकता पर बल दिया तथा अपने प्रयासों से कई मंदिरों तथा शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की।
  • इसी क्रम में उन्होंने रूढ़िवादी हिंदू समाज में व्याप्त अंधविश्वासों का खंडन किया।
  • उन्होंने जाति और संप्रदाय की सीमाओं से परे मानवजाति के ‘ऐक्य’ होने का उपदेश दिया।
  • वर्ष 1888 में, उन्होंने केरल के अरविप्पुरम (Aravippuram) में एक शिव मूर्ति की स्थापना की, और यह साबित किया कि, भगवान की मूर्ति का प्रतिष्ठापन केवल ब्राह्मणों का अधिकार नहीं है। इसे अरविप्पुरम आंदोलन के रूप में जाना जाता है।
  • उन्होंने एक मंदिर में कलावनकोड (Kalavancode) की प्रतिष्ठापना की, जिसमे उन्होंने मूर्तियों के स्थान पर दर्पण को रखा। इससे उन्होंने संदेश दिया कि परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर निवास करता है।
  • उन्होंने कालाडी में ‘अद्वैत आश्रम’ की भी स्थापना की।
  • उन्होंने वायकोम सत्याग्रह (1924–25) में अपना असहयोग दिया, इसका उद्देश्य त्रावणकोर में मंदिर में निम्न जातियों के लिए प्रवेश दिलाना था। इस दौरान महात्मा गांधी की नारायण गुरु से भेंट हुई।

महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्य:

उन्होंने कई महत्वपूर्ण साहित्यिक रचनाओं की रचना की, जिनमे से वर्ष 1897 में रचित आत्मोपदेश सतकाम  सबसे प्रभावशाली हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्री नारायण गुरु किस राज्य के थे?
  2. अरविप्पुरम आंदोलन किससे संबंधित है?
  3. कलादी में अद्वैत आश्रम की स्थापना किसने की?
  4. वायकोम सत्याग्रह किसने शुरू किया था? उद्देश्य क्या थे?
  5. श्री नारायण गुरु से मिलने वाले महत्वपूर्ण नेता।
  6. आत्मोपदेश सतकाम की रचना किसने की?

मेंस लिंक:

भारत में हुए सामाजिक सुधारों में श्री नारायण गुरु की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

मिशन कर्मयोगी” – राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB)


(Mission Karmayogi- National Programme for Civil Services Capacity Building)

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा “मिशन कर्मयोगी” – राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम को अनुमोदित किया गया।

यह क्या है?

  • यह सिविल सेवा क्षमता विकास के लिए नई राष्ट्रीय अवसंरचना है।
  • यह दक्षतापूर्ण सार्वजनिक सेवा प्रदान करने के लिए व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया के स्तरों पर क्षमता विकास व्यवस्था में व्यापक सुधार है।

संस्थागत ढांचा और कार्यक्रम का कार्यान्वयन:

  1. सिविल सेवा क्षमता विकास योजनाओं को अनुमोदन प्रदान करने एवं निगरानी करने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मानव संसाधन परिषद (Public Human Resources Council)।
  2. क्षमता विकास आयोग (Capacity Building Commission) द्वारा प्रशिक्षण मानकों में सामंजस्य बनाना, साझा संकाय और संसाधन बनाना तथा सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लिए पर्यवेक्षी भूमिका निभाना
  3. ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफार्म के स्वामित्व और संचालन तथा विश्वस्तरीय लर्निंग विषयवस्तु बाजार स्थल को सुविधाजनक बनाने के लिए पूर्ण स्वामित्व वाला विशेष प्रयोजन वाहन (Special Purpose VehicleSPV)
  4. मंत्रिमंडल सचिव की अध्यक्षता में समन्वयन इकाई (Coordination Unit)

कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत निम्नलिखित होंगे:

  1. मानव संसाधन प्रबंधन के नियम आधारित’ से ‘भूमिका आधारित’ प्रबंधन में परिवर्तन को सहयोग प्रदान करना। सिविल सेवकों को उनके पद की आवश्यकताओं के अनुसार आवंटित कार्य को उनकी क्षमताओं के साथ जोड़ना।
  2. ‘ऑफ साइट सीखने की पद्धति’ को बेहतर बनाते हुए ‘ऑन साइट सीखने की पद्धति’ पर बल देना।
  3. शिक्षण सामग्री, संस्थानों तथा कार्मिकों सहित साझा प्रशिक्षण अवसंरचना परितंत्र का निर्माण करना।
  4. सिविल सेवा से संबंधित सभी पदों को भूमिकाओं, गतिविधियों तथा दक्षता के ढांचे (Framework of Roles, Activities and CompetenciesFRACs) संबंधी दृष्टिकोण के साथ अद्यतन करना और प्रत्येक सरकारी निकाय में चिन्हित FRAC के लिए प्रासंगिक अधिगम विषय-वस्तुर का सृजन करना और प्रदान करना।
  5. सभी सिविल सेवकों को आत्म-प्रेरित एवं अधिदेशित सीखने की प्रक्रिया पद्धति में अपनी व्यवहारात्मक, कार्यात्मक और कार्यक्षेत्र से संबंधित दक्षताओं को निरंतर विकसित एवं सुदृढ़ करने का अवसर उपलब्ध कराना।
  6. प्रत्येक कर्मचारी के लिए वार्षिक वित्तीय अंशदान के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया के साझा एवं एक समान परिवेश तंत्र के सृजन और साझाकरण के लिए अपने-अपने संसाधनों को सीधे तौर पर निवेश करने हेतु सभी केन्द्रीय मंत्रालयों और विभागों तथा उनके संगठनों को समर्थ बनाना।
  7. सार्वजनिक प्रशिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, स्टार्ट-अप और एकल विशेषज्ञों सहित सीखने की प्रक्रिया संबंधी सर्वोत्तम विषय-वस्तु् के निर्माताओं को प्रोत्साहित करना और साझेदारी करना।
  8. क्षमता विकास, विषय-वस्तु निर्माण, उपयोगकर्ता फीडबैक और दक्षताओं की मैपिंग एवं नीतिगत सुधारों के लिए क्षेत्रों की पहचान संबंधी विभिन्न-पक्षों के संबंध में आईगॉट-कर्मयोगी द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करना।

आईगॉट- कर्मयोगी (iGOT Karmayogi) प्लेटफार्म क्या है?

प्लेटफॉर्म भारत में दो करोड़ से भी अधिक कार्मिकों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए व्यापक और अत्याधुनिक संरचना सुलभ कराएगा।

  • इस प्लेटफॉर्म के विषय-वस्तु (कंटेंट) के लिए एक आकर्षक एवं विश्व स्तरीय बाजार के रूप में विकसित होने की उम्मीद है जहां सावधानीपूर्वक व्यवस्थित और पुनरीक्षित डिजिटल ई–लर्निंग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
  • क्षमता विकास के अलावा, सेवा मामलों जैसे कि परिवीक्षा अवधि के बाद पुष्टीकरण या स्थायीकरण, तैनाती, कार्य निर्धारण और रिक्तियों की अधिसूचना इत्यादि को अंतत: प्रस्तावित दक्षता या योग्यता संरचना के साथ एकीकृत कर दिया जाएगा।

विभिन्न प्रस्तावित निकायों के कार्य:

क्षमता विकास आयोग (Capacity Building Commission)

  • वार्षिक क्षमता विकास योजनाओं का अनुमोदन करने में पीएम सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद की सहायता करना।
  • सिविल सेवा क्षमता विकास से जुड़े सभी केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों का कार्यात्मक पर्यवेक्षण करना।
  • आंतरिक एवं बाह्य संकाय और संसाधन केंद्रों सहित साझा शिक्षण संसाधनों को सृजित करना।
  • हितधारक विभागों के साथ क्षमता विकास योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए समन्वय और पर्यवेक्षण करना।
  • प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, शिक्षण शास्त्र और पद्धति के मानकीकरण पर सिफारिशें पेश करना।
  • सभी सिविल सेवाओं में करियर के मध्‍य में सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए मानदंड निर्धारित करना।
  • सरकार को मानव संसाधन के प्रबंधन और क्षमता विकास के क्षेत्रों में आवश्यक नीतिगत उपाय सुझाना।

पूर्ण स्वामित्व वाला विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी):

इसे कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत स्थापित किया जाएगा।

यह एक ‘गैर-लाभ अर्जक’ (not-for-profit) कंपनी होगी।

यह ‘iGOT-Karmayogi’ प्लेटफॉर्म का स्वामित्व रखेगी और प्रबंधन करेगी।

  • SPV विषय-वस्तु बाजार का निर्माण और संचालन करेगी और यह विषय-वस्तु वैधीकरण, स्वतंत्र निरीक्षण आकलन एवं टेलीमिट्री डेटा उपलब्धता से संबंधित आईगॉट-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म की प्रमुख व्यावसायिक सेवाओं का प्रबंधन करेगी।
  • यह SPV ही भारत सरकार की ओर से सभी बौद्धिक संपदा अधिकारों का स्वामित्व रखेगी।

सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद (Public Human Resources Council):

  • इसमें प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में चयनित केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रख्यात सार्वजनिक मानव संसाधन पेशेवरों, विचारकों, वैश्विक विचारकों और लोक सेवा प्रतिनिधियों को सम्मिलित किया जायेगा।
  • सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद शीर्ष निकाय के तौर पर कार्य करेगी जो सिविल सेवा-सुधार कार्य और क्षमता विकास को कार्यनीतिक दिशा प्रदान करेगी।

इस कार्यक्रम का महत्व:

‘मिशन कर्मयोगी’ का लक्ष्य भारतीय सिविल सेवकों को और भी अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, प्रोफेशनल, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना है। विशिष्ट भूमिका-दक्षताओं से युक्त सिविल सेवक उच्चतम गुणवत्ता मानकों वाली प्रभावकारी सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने में समर्थ होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित के संरचना और कार्य:

  1. सार्वजनिक मानव संसाधन परिषद।
  2. क्षमता विकास आयोग
  3. विशेष प्रयोजन वाहन

समन्वय इकाई का प्रमुख कौन होगा?

IGOT कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का स्वामित्व और संचालन किसके पास होगा?

कार्यक्रम के तहत, भारत सरकार की ओर से सभी बौद्धिक संपदा अधिकारों का मालिक कौन होगा?

मेंस लिंक:

मिशन कर्मयोगी की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS)


चर्चा का कारण

हाल ही में, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) के तहत उपलब्‍ध कुल लाभों की उच्‍चतम सीमा लागू की गई है।

लगाई गई सीमाएं (परीक्षा के लिए इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। हालांकि, किये गए परिवर्तनों पर एक संक्षिप्त अवलोकन किया जा सकता है):

  • इस योजना के तहत किसी आयात निर्यात कोड (IEC) धारक को दिए जाने वाला कुल लाभ 01.09.2020 से 31.12.2020तक की अवधि के दौरान किए गए निर्यातों के प्रति IEC पर 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा।
  • कोई भी IEC धारक जिसने 01.09.2020 से पहले एक वर्ष की अवधि के दौरान कोई निर्यात नहीं किया है या एक सितंबर या उसके बाद नई IEC प्राप्‍त की है, वे MEIS के तहत कोई भी दावा प्रस्तुत करने के लिए हकदार नहीं होंगे।

MEIS के बारे में- यह क्या है?

मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (Merchandise Exports from India Scheme MEIS),   भारतीय विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy of IndiaFTP) 2015-20, के ‘भारत से निर्यात’ कार्यक्रम के तहत शुरू की गयी योजनाओं में से एक है। इस कार्यक्रम की दूसरी योजना ‘सर्विस एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम’ (Service Exports from India SchemeSEIS) है ।

  • इस योजना के तहत निर्यातकों को लाभ शुल्क ऋण प्रतिभूति पत्र (duty credit scrips) के माध्यम से दिए जाते हैं।
  • MEIS को विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade- DGFT) द्वारा अधिसूचित किया जाता है तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।

योजना का उद्देश्य:

भारत में उत्पादित / निर्मित, विशेष रूप से अधिक निर्यात क्षमता तथा रोजगार संभावना वाले, और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा बढाने वाली वस्तुओं तथा उत्पादों के लिए अवसंरचनात्मक अक्षमताओं और संबंधित लागतों में संतुलन करने के लिए इस योजना को शुरू किया गया है।

MEIS ने विदेश व्यापार नीति 2009-14 में मौजूद अन्य पाँच समान प्रोत्साहन योजनाओं को प्रतिस्थापित किया है:

  1. फोकस प्रोडक्ट स्कीम (FPS)
  2. फोकस मार्केट स्कीम (FMS)
  3. मार्केट लिंक्ड फोकस प्रोडक्ट स्कीम (MLFPS)
  4. अवसंरचना प्रोत्साहन योजना
  5. विशेश कृषि ग्रामीण योजना (VKGUY)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत का विदेशी व्यापार नीति (FTP 2015-20) का उद्देश्य
  2. भारतीय विदेश व्यापार नीति, 2015-20 के तहत शुरू की गयी योजनाएं
  3. MEIS को किसके द्वारा अधिसूचित किया जाता है?
  4. MEIS किसके द्वारा लागू किया जाता है?
  5. MEIS द्वारा प्रतिस्थापित योजनाएं
  6. शुल्क ऋण प्रतिभूति पत्र क्या हैं?
  7. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के बारे में

मेंस लिंक:

मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (MEIS) की प्रमुख विशेषताओं तथा महत्व के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

रेड बुल की ‘ट्रेडमार्क’ संबंधी याचिका खारिज


संदर्भ:

हाल ही में, एक एनर्जी ड्रिंक बनाने वाली कंपनी ‘रेड बुल’ द्वारा डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज लिमिटेड के नाम से पंजीकृत ट्रेडमार्क को हटाने के लिए दायर की गयी याचिका को ‘बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड’ (Intellectual Property Appellate Board- IPBA) ने खारिज कर दिया है।

विवाद का विषय:

  • रेड बुल का एक प्रचार वाक्य (Tagline) है- “गिव्स यू विंग्स” (Gives You Wings)। रेड बुल का कहना है, कि इसके द्वारा व्यापक प्रचार किये जाने के कारण, ‘रेड बुल एनर्जी ड्रिंक पीने के बाद एक जानवर / मानव को पंख लग जाने की कल्पना’ विशेष रूप से इसके साथ जुड़ गई है।
  • तथापि, एक और ट्रेडमार्क “योर विंग्स टू लाइफ” (Your Wings to Life) टैगलाइन के साथ, डॉ रेड्डीज लेबोरेटरीज लिमिटेड के नाम नवंबर 2001 में पंजीकृत किया गया था।
  • रेड बुल ने इस ट्रेडमार्क को रद्द करने की मांग की थी।

बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) का वक्तव्य

  • प्रतिद्वंद्वी ट्रेडमार्क, न तो भ्रामक रूप से एक जैसे हैं और न ही एक समान हैं। आवेदक का मार्क ‘योर विंग्स टू लाइफ’ उसका मुख्य मार्क नहीं है, बल्कि उप-ब्रांड है।
  • इसलिए, आवेदक द्वारा अभिकथित ‘ख़्याति और प्रतिष्ठा’, मुख्य मार्क ‘रेड बुल’ से संबंधित नहीं है। इसके आलावा, दोनों ट्रेडमार्क एक समान नहीं हैं।

ट्रेडमार्क क्या होता है?

आम आदमी की भाषा में, यह एक दृश्य प्रतीक होता है, जिसे किसी उत्पाद या सेवा प्रदाता द्वारा अन्य समान प्रकार के उत्पादों या सेवाओं से भिन्न दिखाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। ट्रेडमार्क, किसी शाब्दिक हस्ताक्षर, नाम, चिंह, लेबल, अंको अथवा रंगों के संयोजन आदि के रूप में हो सकता है।

अधिनियम के तहत ट्रेडमार्क पंजीकृत कराने के लिए कानूनी आवश्यकताएं

  • चयनित चिह्न को सुचित्रित रूप से अंकित किये जाने योग्य होना चाहिए।
  • किसी उत्पाद अथवा सेवा के लिए चयनित चिह्न को अन्य वस्तुओं या सेवाओं को स्पष्ट रूप से पृथक करने योग्य होना चाहिए।
  • इसका उपयोग या प्रस्तावित उपयोग, वस्तुओं या सेवाओं के व्यापार हेतु एक निशान के रूप में किया जाता है, तथा वस्तुओं या सेवाओं से संबंधित व्यक्ति को बिना अपनी पहचान जाहिर किये हुए, ‘चिह्न’ के उपयोग करने का अधिकार होता है।

भारत में पंजीकृत होने वाले विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क:

  1. कोई भी नाम (आवेदक नाम अथवा उपनाम या पूर्व व्यवसाय या व्यक्ति के हस्ताक्षर सहित), जिसे किसी व्यवसाय हेतु ‘चिह्न’ के रूप में प्रयुक्त किया जा सकता हो।
  2. कोई एक नया गढ़ा गया शब्द अथवा किसी शब्दकोश से लिए गया कोई भी स्वैच्छिक शब्द अथवा वस्तु / सेवा की विशेषताओं से प्रत्यक्षतः असंबंधित शब्द।
  3. किसी प्रकार अक्षरों अथवा अंकों का संयोजन।
  4. ट्रेडमार्क के स्वामित्व का अधिकार, अधिनियम के तहत पंजीकरण द्वारा अथवा इसे विशेष वस्तुओं या सेवाओं के संबंध में उपयोग करके प्राप्त किया जा सकता है।
  5. चिह्न, फैंसी चिह्न अथवा प्रतीक।
  6. मोनोग्राम।
  7. रंगों का संयोजन अथवा किसी रंग व शब्दों का संयोजन।
  8. किसी वस्तु की आकृति या उसकी पैकेजिंग।
  9. त्रि-आयामी चिन्ह।
  10. चित्रित अथवा शब्दों सहित ध्वनि चिह्न।

रजिस्ट्रार:

पेटेंट, डिज़ाइन एवं ट्रेडमार्क महानिदेशक (Controller General of Patents, Designs and Trade Marks), ट्रेडमार्क  रजिस्ट्री कार्यालयों तथा ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार के रूप में कार्य करते हैं।

बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) क्या है?

बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) को भारत सरकार द्वारा 15 सितंबर, 2003 को गठित किया गया था, इसका उद्देश्य भारतीय ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 और वस्तु भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के तहत रजिस्ट्रार के निर्णयों के खिलाफ अपील सुनना और इनका समाधान करना था।

  • 2 अप्रैल, 2007 से, IPAB को पेटेंट अधिनियम के तहत पेटेंट नियंत्रक द्वारा पारित किए गए अधिकांश निर्णयों, आदेशों या निर्देशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई तथा निर्णय देने के लिए अधिकृत किया गया है।
  • इसलिए, भारतीय उच्च न्यायालयों में पेटेंट अधिनियम के तहत लंबित सभी अपीलों को बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया गया।

बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड की पीठ का गठन:

IPAB की प्रत्येक बेंच में एक न्यायिक सदस्य और एक तकनीकी सदस्य शामिल होते हैं। IPAB के तकनीकी सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए योग्यता का उल्लेख ट्रेडमार्क एक्ट और पेटेंट अधिनियम में किया गया है।

अधिकार-क्षेत्र:

बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) में अपील को पेटेंट नियंत्रक के निर्णय/ आदेश की तिथि से तीन माह के भीतर अथवा IPAB द्वारा निर्धारित की गयी सीमा के भीतर,  उचित शुल्क के साथ, की जानी चाहिए।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. IPAB- संरचना और अधिकार क्षेत्र
  2. बौद्धिक संपदा अधिकार क्या होते है?
  3. ट्रेडमार्क क्या होता है?
  4. ट्रेडमार्क रजिस्ट्रार के कार्य?
  5. भारत में पंजीकृत होने वाले विभिन्न प्रकार के ट्रेडमार्क
  6. भारत में ट्रेडमार्क पंजीकृत कराने के लिए कानूनी आवश्यकताएँ?

मेंस लिंक:

भारत में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) नीति के प्रावधान। इसके सामने चुनौतियां क्या हैं? इसमें पारदर्शिता तथा सुरक्षा हेतु उपायों को सुझाइए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

वैश्विक नवाचार सूचकांक 2020


(Global Innovation Index)

संदर्भ:

हाल ही में ‘वैश्विक नवाचार सूचकांक’ (Global Innovation IndexGII) का तेहरवां संस्करण जारी किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  1. यह सूचकांक किसी अर्थव्यवस्था के नवाचार प्रदर्शन को मापने हेतु एक प्रमुख संदर्भ है।
  2. वैश्विक नवाचार सूचकांक (GII) को कॉर्नेल विश्वविद्यालय, INSEAD और संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी ‘विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’ (WIPO) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया जाता है। 

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देशों की रैंकिंग कैसे की जाती है?

वैश्विक नवाचार सूचकांक 2020 रैंकिंग, अनुसंधान और विकास निवेश तथा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट और ट्रेडमार्क आवेदनों जैसे पारंपरिक मापदंडो सहित 80 संकेतकों पर आधारित होती है।

भारत का प्रदर्शन:

  • इस वर्ष, भारत ने चार पायदान की छलांग लगाई और 48वें स्थान पर पहुंच गया है।
  • मध्य और दक्षिण एशियाई देशों में भारत इस सूचकांक में शीर्ष पर बना हुआ है।
  • वर्ष 2019 में भारत इस सूचकांक में 52वें स्थान पर था तथा वर्ष 2015 में 81वें स्थान पर रहा।
  • भारत, विश्व में निम्न मध्यम आय वर्ग में तीसरी सर्वाधिक नवोन्मेष वाली अर्थव्यवस्था बन गया है।
  • भारत, ICT (सूचना और संचार प्रौद्योगिकी) सेवाओं के निर्यात, सरकारी ऑनलाइन सेवाओं, विज्ञान और इंजीनियरिंग में स्नातक तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D)-गहन वैश्विक कंपनियों, जैसे संकेतकों में शीर्ष 15 देशों में सम्मिलित है।

वैश्विक परिदृश्य:

  • वैश्विक स्तर पर रैंकिंग में शीर्ष स्तर पर स्थिरता बनी हुई है, लेकिन नवाचार का केंद्र पूरब के देशों की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है। भारत, चीन, फिलीपींस और वियतनाम जैसे देश नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़े हैं।
  • शीर्ष 5: स्विट्जरलैंड, स्वीडन, अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड नवाचार रैंकिंग में क्रमशः शीर्ष स्थानों पर हैं।
  • दक्षिण कोरिया, रैंकिंग में पहली बार शीर्ष 10 देशों में शामिल हुआ है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैश्विक नवाचार सूचकांक किसके द्वारा जारी किया गया है?
  2. इसका पहला संस्करण कब प्रकाशित किया गया था?
  3. भारत सरकार का प्रदर्शन
  4. वैश्विक प्रदर्शन
  5. सूचकांक में शीर्ष 10 देश

मेंस लिंक:

वैश्विक नवाचार सूचकांक की विशेषताओं तथा महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध


संदर्भ:

हाल ही में सरकार द्वारा उन 118 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है जो भारत की संप्रभुता एवं अखंडता, भारत की रक्षा, राज्‍य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्‍यवस्‍था के लिए नुकसानदेह हैं।

किसके द्वारा प्रतिबंधित की गयी है? इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा।

कैसे? सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के अंतर्गत प्रदान की गई सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के उपयोग को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 के संबंधित प्रावधानों के तहत यह प्रतिबंध लगाये गए हैं।

क्यों? उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये ऐप्स उन गतिविधियों में सम्मिलित हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।

आवश्यकता (सरकार का तर्क):

  • सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को विभिन्न स्रोतों से कई प्रकार की शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि एंड्रॉइड और आईओएस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कई मोबाइल ऐप उनके डाटा का दुरुपयोग कर रहे हैं, इनमें विभिन्‍न प्रकार की रिपोर्टें भी शामिल हैं। उनका दुरुपयोग चोरी करने के लिए और उपयोगकर्ताओं के डेटा को अनधिकृत तरीके से उन सर्वरों पर प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है जो भारत के बाहर स्थित हैं।
  • इन आंकड़ों का संकलन और इनकी माइनिंग एवं प्रोफाइलिंग उन तत्वों द्वारा किया जा रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा और भारत की रक्षा के लिए खतरनाक हैं।
  • इस प्रकार से, उसका प्रभाव अंततः भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए नुकसानदेह है। यह बहुत ही गंभीर मामला है और यह तत्काल चिंता का विषय है जिसके लिए तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।
  • गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने भी इन दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को ब्‍लॉक करने से संबंधित विस्तृत सिफारिशें भेजी है।

पृष्ठभूमि:

यह मोबाइल ऐप्स पर सरकार द्वारा लगाये गए प्रतिबंधों का तीसरा दौर है। इसके अलावा, केंद्र द्वारा यह कदम वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव के मद्देनजर उठाया गया है।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) , पिछले चार महीनों से अधिक समय से लद्दाख में भारत के साथ लगने वाली अपनी सीमा को बदलने की कोशिश में लगा हुआ है।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 A, केंद्र सरकार को, भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की सुरक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों से मित्रवत संबंधों के ल‌िए या सार्वजनिक व्यवस्‍था के लिए हानिकारक ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने और साइबर अपराधी को गिरफ्तार करने का अधिकार देती है। यह कानून भारत में साइबर-अपराध और इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स के मुद्दों से निपटने के लिए प्राथमिक कानून है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 A किससे संबंधित है?
  2. भारतीय साइबर अपराध समन्वयन केंद्र- प्रशासनिक संरचना तथा कार्य।
  3. वास्तविक नियंत्रण रेखा क्या है।
  4. LAC बनाम LOC
  5. चुशूल घाटी कहाँ है?

मेंस लिंक:

केंद्र द्वारा हाल ही में 118 मोबाइल ऐप पर लगाये गए प्रतिबंध से ‘राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम डिजिटल अधिकार’ जैसे उलझे हुए सवाल फिर से सामने आ गए हैं। आप की इस विषय पर क्क्य राय है?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

रिहाइशी उद्यमी कार्यक्रम


(Entrepreneurs in ResidenceEIR)

संदर्भ:

हाल ही में, नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशंस (NIDHI) कार्यक्रम के तहत रिहाइशी उद्यमी कार्यक्रम (Entrepreneurs in Residence- EIR) पर एक विवरण पुस्तिका को लॉन्च किया गया था।

रिहाइशी उद्यमी (EIR) कार्यक्रम क्या है?

इस कार्यक्रम को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशन (NIDHI) के तहत शुरू किया गया है।

रिहाइशी उद्यमी (EIR) कार्यक्रम 18 महीने की अवधि के लिए एक आशाजनक तकनीकी व्यवसायिक विचारों को आगे बढ़ाने के लिए क्षमतावान या उभरते उद्यमियों का समर्थन करता है। इसके अंतर्गत अधिकतम 18 महीनों में प्रत्येक EIR को 3.6 लाख रुपये के अधिकतम समर्थन के साथ प्रति माह 30000 रुपये तक दिया जाता है।

NIDHI कार्यक्रम क्या है?

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा ज्ञान-आधारित और प्रौद्योगिकी संचालित नवाचारों एवं विचारों को लाभदायक स्टार्ट-अप में बदलने के उद्देश्य से निधि कार्यक्रम (नेशनल इनिशिएटिव फॉर डेवलपिंग एंड हारनेसिंग इनोवेशंस-NIDHI) शुरू किया गया है।

NIDHI कार्यक्रम के तहत, ‘प्रमोटिंग एंड एक्सेलेरेटिंग यंग एंड एस्पायरिंग इनोवेटर्स एंड स्टार्टअप्स’ (PRAYAS) कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसमें स्थापित टेक्नोलॉजी बिज़नेस इनक्यूबेटर्स (TBI) अन्वेषकों एवं उद्यमियों को ‘प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट’ और विकासशील प्रोटोटाइप के लिये अनुदान के साथ-साथ अन्य सहायता भी प्रदान करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रिहाइशी उद्यमी (EIR) कार्यक्रम के बारे में
  2. NIDHI कार्यक्रम क्या है?
  3. PRAYAS कार्यक्रम के बारे में
  4. रिहाइशी उद्यमी (EIR) कार्यक्रम किसके द्वारा शुरू किया गया है?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

आरे फॉरेस्ट के 600 एकड़ को आरक्षित वन घोषित


(State to declare 600 acres of Aarey as reserve forest)

संदर्भ:

हाल ही में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) के निकटवर्ती ‘आरे’ (Aarey) की 600 एकड़  भूमि को आरक्षित वन के रूप में घोषित किया गया है। उन्होंने यह दावा किया है, कि यह विश्व में किसी भी महानगर की सीमाओं के अंदर इतना बड़ा जंगल विकसित होने का पहला उदाहरण है

आरक्षित वन क्या होते है? यह संरक्षित वनों से किस प्रकार भिन्न होते है?

आरक्षित वन, वनों को दी जाने वाली एक निश्चित स्तर की सुरक्षा को व्यक्त करते है। इस शब्द का प्रयोग पहली बार ब्रिटिश भारत में भारतीय वन अधिनियम, 1927 के तहत किया गया था। इसमें आरक्षित वनों का उल्लेख ब्रिटिश भारत में ब्रिटिश ताज के तहत कुछ जंगलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया गया था।

  • भारत के राष्ट्रीय उद्यानों या वन्यजीव अभयारण्यों के विपरीत, आरक्षित वन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा घोषित किए जाते हैं।
  • वर्तमान में, आरक्षित वन और संरक्षित वन में एक महत्वपूर्ण अंतर होता हैं: आरक्षित वनों में विशेष आदेश के बगैर शिकार, चराई, आदि जैसी सभी गतिविधियां प्रतिबंधित होती हैं।
  • संरक्षित क्षेत्रों में, जंगल के किनारे रहने वाले समुदायों को शिकार और चराई जैसी गतिविधियों के अधिकार दिए जाते हैं, जिससे वे वन्य उत्पादों अथवा वन संसाधनों से अपनी आजीविका चलाते हैं।

भारतीय वन अधिनियम 1927 में किसी क्षेत्र को आरक्षित वन, संरक्षित वन या ग्राम वन घोषित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को परिभाषित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आरक्षित वन क्या होते है?
  2. इसे कौन घोषित कर सकता है?
  3. यह संरक्षित वनों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?
  4. भारतीय वन अधिनियम, 1927 का अवलोकन
  5. राष्ट्रीय उद्यान तथा वन्यजीव अभ्यारण्य में अंतर

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF)


चर्चा का कारण

कुछ ख़बरों के अनुसार, विकास बटालियन के रूप जानी जाने वाली एक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (Special Frontier Force SFF) यूनिट, ने हाल ही में चीनी अतिक्रमण को रोकने के लिए लद्दाख में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual ControlLAC) पर कुछ प्रमुख पहाड़ियों पर कब्जा ज़माने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) क्या है?

SFF का गठन वर्ष 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के तत्काल बाद किया गया था।

यह एक खुफिया फोर्स है, जिसमें तिब्बतियों (वर्तमान में तिब्बतियों और गोरखाओं) को भर्ती किया गया था तथा इसे शुरू में इस्टैब्लिश्मन्ट 22 (टूटू) (Establishment 22) के नाम से जाना जाता था।

  • ‘स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स’ (SFF) सीधे कैबिनेट सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय से कंट्रोल होती है। इसका नेतृत्व एक महानिरीक्षक करता है जो मेजर जनरल के रैंक का एक सेना अधिकारी होता है।
  • ‘स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स’ की यूनिट्स को विकास बटालियन के रूप में जाना जाता है।
  • स्पष्ट शब्दों में, SFF यूनिट्स सेना का हिस्सा नहीं होती हैं, किंतु वे सेना के परिचालन नियंत्रण में कार्य करती हैं।
  • SFF यूनिट्स में महिला सैनिक भी होती है, जो विशेष कार्यो में दक्ष होती हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चर्चित स्थल: चुशूल (Chushul)

  • यह भारत में लद्दाख के लेह जिले में स्थित एक गाँव है।
  • यह दरबुक (Durbuk) तहसील में स्थित है, जिसे ’चुशुल घाटी’ के रूप में जाना जाता है।
  • चुशूल घाटी 4,360 मीटर की ऊंचाई पर रेज़ांग ला और पांगोंग त्सो झील के पास स्थित है।
  • चुशुल, भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच नियमित परामर्श और वार्ता के लिए बैठक हेतु आधिकारिक तौर पर तय किये गए पांच बिंदुओं में से एक है।

वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था।

Chushul

 प्रश्नकाल (Question Hour)

  • प्रत्येक संसदीय बैठक के पहले घंटे को प्रश्नकाल कहा जाता है।
  • यह सदन की प्रक्रिया के नियमों में उल्लिखित है।
  • इस दौरान, सदस्य प्रश्न पूछते हैं और आमतौर मंत्री पर उत्तर देते हैं।

प्रश्नकाल दोनों सदनों में सत्र के प्रत्येक दिन आयोजित किया जाता है। किंतु दो दिन इसके अपवाद होते हैं:

  1. जिस दिन राष्ट्रपति केन्द्रीय कक्ष में दोनों सदनों के सांसदों को संबोधित करते है, उस दिन कोई प्रश्नकाल नहीं होता है।
  2. जिस दिन वित्त मंत्री बजट पेश करते हैं उस दिन प्रश्नकाल नहीं होता है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, लोकसभा सचिवालय द्वारा 14 सितंबर से शुरू होने वाले मानसून संसद सत्र का आधिकारिक तौर पर शेड्यूल जारी कर दिया गया है, जिसमें प्रश्नकाल सम्मिलित नहीं किया गया है।

जम्मू-कश्मीर के लिए तीन और आधिकारिक भाषाएँ

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी, डोगरी और हिंदी को आधिकारिक भाषाओं के रूप शामिल करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी गयी है। पूर्ववर्ती राज्य में केवल अंग्रेजी और उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त था।

मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port)

यह कच्छ की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह है।

चर्चा का कारण

मुंद्रा पोर्ट टर्मिनल संबंधी सौदा, चीनी कंपनी के साथ संबंध होने कारण जांच के दायरे में आ गया है। इस संबंध में, सरकार अडानी पोर्ट्स के फ्रांसीसी संयुक्त उद्यम भागीदार CMA CGM और चाइना मर्चेंट्स ग्रुप के बीच एक समझौते की जांच कर रही है।

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