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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 04 सितम्बर 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

1. अपनी मांगों की दृष्टि से सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन मौलिक रूप से भिन्न कैसे थे? स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: आधुनिक भारतीय इतिहास: बिपिन चंद्र

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दोनों आंदोलनों की भूमिका को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

दोनों आन्दोलनों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

समझाइये कि दोनों आन्दोलन परस्पर भिन्न कैसे थे।

निष्कर्ष:

उनके महत्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

2. भारत में सामाजिक सुधारों में श्री नारायण गुरु के योगदानों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: Times now News 

निर्देशक शब्द: 

चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

नारायण गुरु के बारे में बताते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारत में सामाजिक सुधारों में उनके योगदानों को सूचीबद्ध कीजिए; उन्होंने केरल में एक सुधार आंदोलन का नेतृत्व किया, जातिवाद का विरोध किया, और आध्यात्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समानता के नवीन मूल्यों को बढ़ावा दिया, उन्होंने मानवता की ‘एकता’ का प्रचार किया, जाति और पंथ की सीमाओं को पार करते हुए, उन्होंने वायकोम सत्याग्रह के लिए अपना समर्थन दिया, जिसका सम्बन्ध त्रावणकोर में निम्न जातियों के लिए मंदिर प्रवेश की अनुमति से था। महात्मा गांधी इस दौरान गुरु से मिले आदि।

 निष्कर्ष:

आधुनिक भारत को सामाजिक रूप से सुधारने में ऐसी महान हस्तियों के महत्व पर प्रकाश डा

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: स.अ.2– सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

स.अ.3– संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

3. “देश में जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी और सामान्य जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका है।” उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Down to Earth

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

भारत के समक्ष जल उपलब्धता की समस्या को आवश्यक तथ्यों के साथ समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

जल प्रबंधन और शासन के महत्व को समझाइये।

चर्चा कीजिए कि जल संकट से निपटने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है। समझाइये कि देश में जल संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी और सामान्य जागरूकता की आवश्यकता क्यों है।

जल संरक्षण से सम्बंधित सरकार के उन अभियानों और कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए, जो सामुदायिक भागीदारी पर बेहद निर्भर करते हैं। संदर्भित लेख की सहायता से समाधान सुझाएं।

 निष्कर्ष: 

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

4. “भारत में कृषि पर निर्भर 28 लोग प्रतिदिन आत्महत्या से मरते हैं” आज भी भारतीय किसानों के द्वारा कौन सी समस्याओं का सामना किया जाता है? भारत में किसानों की आत्महत्या के मुद्दे का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Down to Earth 

  निर्देशक शब्द:

आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत में कृषि क्षेत्र से संबंधित आत्महत्याओं के संदर्भ में आवश्यक तथ्य बताते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

उन राज्यों का उल्लेख कीजिए, जहाँ आत्महत्या की दर उच्च है ।

कृषि प्रणाली को समझाते हुए उसकी कमियों का भी वर्णन कीजिए, जिनके कारण किसान आत्महत्या जैसे कठोर निर्णय लेते हैं।

किसानों की आत्महत्या के कारणों की व्याख्या कीजिए – लागतों में वृद्धि, ऋण संकट, प्रत्यक्ष बाजार एकीकरण का अभाव, जागरूकता की कमी, जल संकट, जलवायु परिवर्तन, त्रुटिपूर्ण आर्थिक नीतियां आदि।

 निष्कर्ष:

समाधान के उपाय बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: स.अ.2– सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

स.अ.3– विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और दैनिक जीवन पर इसका प्रभाव।

5. गोपालकृष्णन समिति की रिपोर्ट में सरकारी डेटा सेटों से सम्बंधित शासन तंत्र को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है; क्या आपको लगता है कि इसने एक अवसर छोड़ दिया है? उपयुक्त औचित्य के साथ अपनी राय प्रस्तुत कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu  

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्रश्न की पृष्ठभूमि को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समिति की प्रमुख अनुशंसाओं को विस्तार से समझाइये।

रिपोर्ट से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा कीजिए। 

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिये कि इसने सरकारी डेटा सेटों से सम्बंधित शासन तंत्र को पर्याप्त रूप से संबोधित करने के अवसर को छोड़ दिया है। कुछ सबसे महत्वपूर्ण गैर-व्यक्तिगत डेटा सेट सरकार द्वारा रक्षित किए जाते हैं, या करदाता निधिकरण के परिणामस्वरूप प्राप्त होते हैं। इस तरह के डेटा सार्वजनिक नीति तैयार करने या नई सेवाएं प्रदान करने में उपयोगी हो सकते हैं।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: उद्धरण आधारित प्रश्न; अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि; सामाजिक प्रभाव और धारण।

6. निम्नलिखित उद्धरण से आप क्या समझते हैं। विस्तार से समझाइये।यह एक नैतिक ब्रह्मांड है और ब्रह्मांड के नैतिक नियम हैं, जिनका पालन भौतिक नियमों की भांति ही किया जाना चाहिए।” – मार्टिन लूथर किंग जूनियर (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

उद्धरण नैतिक कानूनों की अपरिहार्यता और महत्व को इंगित करता है। यह भौतिक कानूनों की अपरिहार्यता के साथ तुलना करके उसी को चित्रित करने की कोशिश करता है।

 विषय वस्तु:

समझाइये कि ब्रह्मांड हमारे आसपास की वस्तुओं और घटनाओं की संपूर्ण सामूहिकता है।

भौतिक नियमों के साथ नैतिक नियमों की तुलना का कारण बताते हुए इसके महत्त्व पर भी प्रकाश डालिये।

मानव अस्तित्व के लिए नैतिकता के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

 निष्कर्ष:

इसके महत्त्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

7. “अरस्तु एवं बुद्ध का नीतिशास्त्र औपचारिक रूप से समान है: दोनों संयम का समर्थन करते हैं”। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

उत्तरकीसंरचना:

परिचय:

अरस्तु एवं बुद्ध दोनों के नीतिशास्त्र को परिभाषित कीजिए।

विषयवस्तु:

“संयम” पर दोनों के विचारों का वर्णन कीजिए।

इस विचारों में समानता के तत्वों की पहचान कीजिए।

निष्कर्ष:

यह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए कि अरस्तु और बुद्ध बहुत समान निष्कर्ष पर पहुँचे कि हमें अपने जीवन का संचालन कैसे करना चाहिए, यदि हम मनुष्य के रूप में खुशी और तृप्ति की कामना करते हैं । हालाँकि, अरस्तु के लिए संयम, सद्गुण प्राप्त करने की एक विधि थी, लेकिन बुद्ध के मध्यम मार्ग ने जीवन के एक शांतिपूर्ण तरीके का उल्लेख किया, जो कठोर तप और चरम सुख के मध्य की एक राह है।


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