HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
Quiz-summary
0 of 5 questions completed
Questions:
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
Information
Welcome to Insights IAS Static Quiz in HINDI. We have already outlined details of this New Initiative HERE.
You have already completed the quiz before. Hence you can not start it again.
Quiz is loading...
You must sign in or sign up to start the quiz.
You have to finish following quiz, to start this quiz:
Results
0 of 5 questions answered correctly
Your time:
Time has elapsed
You have reached 0 of 0 points, (0)
Categories
- Not categorized 0%
- 1
- 2
- 3
- 4
- 5
- Answered
- Review
-
Question 1 of 5
1. Question
मुद्रास्फीति का निम्नलिखित में से क्या परिणाम हो सकता/सकते है/हैं
- अधिक से अधिक लोग कार्यरत होने पर भी अर्थव्यवस्था की कुल उत्पादक क्षमता में कमी।
- अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की अत्यधिक आपूर्ति।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
- सरल शब्दों में, मुद्रास्फीति का आशय मूल रूप से अत्यधिक पैसे में अल्प वस्तुओं की प्राप्ति, या अत्यधिक मांग की स्थिति में भी आपूर्ति के निम्न बने रहने से है। इन दोनों स्थितियों में, वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत उपभोक्ताओं द्वारा बोली लगाने के कारण सामानों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
- अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति में कीमतों में कमी होने की संभावना होती है (न की बढ़ने की)।
- यदि आय में तेजी से वृद्धि होती है, तो वस्तुओं और सेवाओं की मांग में भी वृद्धि होगी। दूसरी ओर, यदि अर्थव्यवस्था बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ है, जैसे कि खराब अवसंरचना, उत्पादन में कमी आदि के कारण, तो उच्च आय के कारण कीमतों में वृद्धि होगी और इसके परिणामस्वरूप उच्च मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न होगी।
Incorrect
उत्तर: a)
- सरल शब्दों में, मुद्रास्फीति का आशय मूल रूप से अत्यधिक पैसे में अल्प वस्तुओं की प्राप्ति, या अत्यधिक मांग की स्थिति में भी आपूर्ति के निम्न बने रहने से है। इन दोनों स्थितियों में, वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत उपभोक्ताओं द्वारा बोली लगाने के कारण सामानों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
- अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति में कीमतों में कमी होने की संभावना होती है (न की बढ़ने की)।
- यदि आय में तेजी से वृद्धि होती है, तो वस्तुओं और सेवाओं की मांग में भी वृद्धि होगी। दूसरी ओर, यदि अर्थव्यवस्था बढ़ती मांग को पूरा करने में असमर्थ है, जैसे कि खराब अवसंरचना, उत्पादन में कमी आदि के कारण, तो उच्च आय के कारण कीमतों में वृद्धि होगी और इसके परिणामस्वरूप उच्च मुद्रास्फीति की स्थिति उत्पन्न होगी।
-
Question 2 of 5
2. Question
यदि अर्थव्यवस्था के कुल आकार में प्रतिवर्ष वृद्धि होती है, तो इसका आशय है कि
- जीडीपी वृद्धि में प्रतिवर्ष लगातार वृद्धि हो रही है।
- अर्थव्यवस्था में सकल पूंजी निर्माण में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- बाजार मूल्य पर जीडीपी के अंतर्गत बाजार मूल्य पर एक वर्ष के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य की गणना की जाती है।
- यदि इसमें वृद्धि होती है, तो इसका अर्थ है कि उद्यमियों द्वारा अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जा रहा है।
- यह वृद्धि समान मशीनरी और श्रम के साथ वास्तविक निवेश में वृद्धि के बिना भी हो सकती है।
- यदि अर्थव्यवस्था का आकार प्रत्येक वर्ष समानुपातिक रूप से बढ़ता है और विकास दर सकारात्मक होती है, तो इसमें आवश्यक रूप से वृद्धि नहीं होती है। इसलिए, कथन 1 गलत है।
Incorrect
उत्तर: c)
- बाजार मूल्य पर जीडीपी के अंतर्गत बाजार मूल्य पर एक वर्ष के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य की गणना की जाती है।
- यदि इसमें वृद्धि होती है, तो इसका अर्थ है कि उद्यमियों द्वारा अधिक वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन किया जा रहा है।
- यह वृद्धि समान मशीनरी और श्रम के साथ वास्तविक निवेश में वृद्धि के बिना भी हो सकती है।
- यदि अर्थव्यवस्था का आकार प्रत्येक वर्ष समानुपातिक रूप से बढ़ता है और विकास दर सकारात्मक होती है, तो इसमें आवश्यक रूप से वृद्धि नहीं होती है। इसलिए, कथन 1 गलत है।
-
Question 3 of 5
3. Question
विश्व के साथ होने वाले भारत के “चालू खाते (Current account)” लेनदेन में शामिल हैं
- वस्तुओं संबंधी निर्यात-आयात संतुलन
- विप्रेषण प्रवाह
- अदृश्य मदों का व्यापार
- विदेशी सरकारों द्वारा दिया गया ऋण
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
- चालू खाता में वस्तु एवं सेवाओं के निर्यात और आयात तथा भुगतान अंतरण का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- अदृश्य मदों (invisible trade) के व्यापार के रूप में निरूपित सेवाओं का व्यापार।
- भुगतान अंतरण संबंधी प्राप्तियां, जो किसी देश के निवासियों को ‘मुफ्त में’ प्राप्त होती हैं और जिसके बदले में किसी भी प्रकार का वर्तमान में या भविष्य में भुगतान नहीं किया जाता है।
- इसमें विप्रेषण, उपहार और अनुदान शामिल होता हैं। ये आधिकारिक या निजी हो सकते हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
- चालू खाता में वस्तु एवं सेवाओं के निर्यात और आयात तथा भुगतान अंतरण का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- अदृश्य मदों (invisible trade) के व्यापार के रूप में निरूपित सेवाओं का व्यापार।
- भुगतान अंतरण संबंधी प्राप्तियां, जो किसी देश के निवासियों को ‘मुफ्त में’ प्राप्त होती हैं और जिसके बदले में किसी भी प्रकार का वर्तमान में या भविष्य में भुगतान नहीं किया जाता है।
- इसमें विप्रेषण, उपहार और अनुदान शामिल होता हैं। ये आधिकारिक या निजी हो सकते हैं।
-
Question 4 of 5
4. Question
सरकार के राजस्व और पूंजीगत प्राप्तियों के बीच अंतर को स्पष्ट कीजिए?
- राजस्व प्राप्तियां कुछ पूंजीगत प्राप्तियों के विपरीत गैर-विमोचनीय (non-redeemable) होती हैं।
- राजस्व प्राप्तियों के विपरीत पूंजीगत प्राप्तियां सदैव ऋण को बढ़ाने वाली होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
- राजस्व प्राप्तियों और पूंजी प्राप्तियों के बीच मुख्य अंतर यह है कि राजस्व प्राप्तियों के मामले में, सरकार पर राशि वापस करने का कोई भावी दायित्व नहीं होता है, अर्थात, वे गैर-विमोचनीय (non-redeemable) होती हैं। लेकिन पूंजीगत प्राप्तियों के मामले में जो ऋण के रूप में होती हैं, सरकार को ब्याज सहित राशि वापस लौटानी होती है।
- पूंजीगत प्राप्तियां ऋण उत्पन्न करने वाली या गैर-ऋण उत्पन्न करने वाली हो सकती हैं।
- ऋण प्राप्तियों के उदाहरण हैं- घरेलु स्तर पर सरकार द्वारा प्राप्त शुद्ध उधार, विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण, RBI से प्राप्त उधार। गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के उदाहरण हैं – ऋणों की वसूली, सार्वजनिक उद्यमों की बिक्री से अर्जित आय (यानी, विनिवेश), आदि। ये ऋण का सृजन नहीं करती हैं।
Incorrect
उत्तर: a)
- राजस्व प्राप्तियों और पूंजी प्राप्तियों के बीच मुख्य अंतर यह है कि राजस्व प्राप्तियों के मामले में, सरकार पर राशि वापस करने का कोई भावी दायित्व नहीं होता है, अर्थात, वे गैर-विमोचनीय (non-redeemable) होती हैं। लेकिन पूंजीगत प्राप्तियों के मामले में जो ऋण के रूप में होती हैं, सरकार को ब्याज सहित राशि वापस लौटानी होती है।
- पूंजीगत प्राप्तियां ऋण उत्पन्न करने वाली या गैर-ऋण उत्पन्न करने वाली हो सकती हैं।
- ऋण प्राप्तियों के उदाहरण हैं- घरेलु स्तर पर सरकार द्वारा प्राप्त शुद्ध उधार, विदेशी सरकारों से प्राप्त ऋण, RBI से प्राप्त उधार। गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों के उदाहरण हैं – ऋणों की वसूली, सार्वजनिक उद्यमों की बिक्री से अर्जित आय (यानी, विनिवेश), आदि। ये ऋण का सृजन नहीं करती हैं।
-
Question 5 of 5
5. Question
रुपया के मजबूत होने (Rupee Appreciation) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- देश में मजबूत विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के कारण रुपया मजबूत हो सकता है।
- रुपये को मजबूत होने से रोकने से घरेलू विनिर्माण उद्योग को बढ़ावा मिल सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- बाजार में अधिक प्रवाह के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले अधिक मजबूत हो सकता है।
- यदि हमें घरेलू विनिर्माण उद्योग को सुदृढ़ करना है तो हमें रुपये को मजबूत होने से बचना चाहिए। रुपये के मजबूत होने से आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी होती है,
- जिससे घरेलू उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
Incorrect
उत्तर: c)
- बाजार में अधिक प्रवाह के कारण रुपया डॉलर के मुकाबले अधिक मजबूत हो सकता है।
- यदि हमें घरेलू विनिर्माण उद्योग को सुदृढ़ करना है तो हमें रुपये को मजबूत होने से बचना चाहिए। रुपये के मजबूत होने से आयात में वृद्धि और निर्यात में कमी होती है,
- जिससे घरेलू उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।








