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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. वारली चित्रकारी

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ब्रिक्स नवाचार संचालन केंद्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सिन गुड्स एवं सिन टैक्स

2. भारत की एस्ट्रोसैट दूरबीन द्वारा एक सबसे पुरानी आकाशगंगा की खोज

3. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA)

2. हनी मिशन (Honey Mission)

3. कृषि ऋण हेतु ICICI बैंक दवारा उपग्रहों का उपयोग

4. आईएनएस विराट

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

वारली चित्रकारी


(Warli Painting)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय लोक कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, उर्वरक विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के एक उपक्रम नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड (NFL) द्वारा नोएडा स्थित अपने कॉर्पोरेट कार्यालय की बाहरी दीवारों को महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वरली पेंटिंग से सजाया गया है।

वारली’ कौन हैं?

  1. वारली (Warlis), महाराष्ट्र-गुजरात सीमा पर पहाड़ी एवं तटीय इलाकों में रहने वाली एक एक देशी जनजाति है।
  2. इनकी बोली ‘वारली’ है, इस बोली की कोई लिपि नही है, अर्थात यह अलिखित भाषा है और इसका संबंध भारत के दक्षिणी क्षेत्र की इंडो-आर्यन भाषाओं से है।

वारली चित्रकारी:

  1. महाराष्ट्र अपनी वारली लोक-चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
  2. वारली चित्रकारी के चित्र भीमबेटका की शैल गुफाओं के चित्रों के समान हैं।
  3. यह मनुष्य और प्रकृति के बीच घनिष्ठ संबंध को दर्शाती है।
  4. इसमें केंद्रीय विषय के रूप में शिकार, मछली पकड़ने, खेती, त्योहारों और नृत्यों, पेड़ों और जानवरों को चित्रित करने वाले दृश्यों का उपयोग किया जाता है।
  5. वारली चित्रकारी मुख्यतः महिलाओं द्वारा की जाती है।

अनूठी विशेषताएं:

इन भित्तिचित्रों में वृत्त, त्रिकोण तथा वर्ग की भांति एक बहुत ही मौलिक चित्रात्मक शब्दावली का उपयोग किया जाता है।

Warli_Painting

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वारली पेंटिंग के विषय
  2. वारली जनजाति के बारे में
  3. भीमबेटका के शैल गुफाओं के चित्रों के बारे में
  4. पट्ट-चित्र के बारे में
  5. मधुबनी पेंटिंग- प्रमुख विशेषताएं

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

ब्रिक्स नवाचार संचालन केंद्र


(BRICS innovation base)

संदर्भ:

चीन, ब्रिक्स के साथ क्रियात्मक सहयोग को मजबूत करने हेतु चीन में ब्रिक्स नवाचार संचालन केंद्र (BRICS innovation base) की स्थापना करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है

उद्देश्य: इसका उद्देश्य पाँचों BRICS  देशों में 5G तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence– AI) सहयोग को आगे बढ़ाना है।

प्रस्ताव का तर्काधार:

ब्रिक्स देशों में 5G को बढ़ावा देने में चीन की रुचि का कारण तकनीकी दिग्गज हुआवे (Huawei) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना हो सकता है- ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में नेटवर्क स्थापित करने के लिए हुआवे का नाम भी एक दावेदार के रूप में आया है, हालांकि, यह कंपनी अन्य कई देशों  में विवादों में उलझी हुई है।

ब्रिक्स देशों की प्रतिक्रिया

  • रूस ने चीन के साथ 5G पर कार्य करने के लिए हामी भरी है।
  • चीनी दूरसंचार फर्म हुआवे, दक्षिण अफ्रीका में 5G नेटवर्क की स्थापना के लिए तीन दूरसंचार ऑपरेटरों को सेवाएं प्रदान कर रही है।
  • ब्राज़ील ने इसके परीक्षणों में भाग लेने की अनुमति दी है, किंतु अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
  • मगर, ब्रिक्स समूह में भारत एकमात्र देश है जिसने अपने राष्ट्रीय 5G नेटवर्क के शुरू करने में चीनी भागीदारी को अभी तक वहिष्कृत किया हुआ है।

भारत के लिए आगे की राह:

भारत द्वारा 5G में चीनी भागीदारी की अनुमति दिए जाने की संभावना नहीं के बराबर है। बल्कि भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया हुआ है तथा चीनी निवेश पर कड़ा रूख अपनाया हुआ है।

  • गलवान घाटी में चीन के साथ हुई झड़प के पश्चात ‘भारत की संप्रुभता तथा अखंडता का हवाला देते हुए यह प्रतिबंध लगाये गए थे।
  • भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार हुआवे सहित अन्य कई चीनी कंपनियों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीनी सेना के साथ संबंध होने की संभावना है।
  • भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव रहने तक चीन के साथ सामान्य स्थिति की वापसी संभव नहीं है।

UK- 5G क्लब द्वारा इसी प्रकार के प्रयास:

मई में, ब्रिटिश सरकार द्वारा 10 लोकतांत्रिक देशों का 5G क्लब बनाने की दृष्टि से अमेरिका से संपर्क किया गया।

  • इस प्रस्तावित क्लब में G7 देश – यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली, जर्मनी, फ्रांस, जापान और कनाडा – तथा ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और भारत सम्मिलित हैं।
  • इसका उद्देश्य चीन पर निर्भरता से बचने के लिए 5G उपकरणों तथा अन्य प्रौद्योगिकियों के वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं का निर्माण करना होगा।

5G नेटवर्क हेतु आधारभूत प्रौद्योगिकी

5G, OFDM (ऑर्थोगोनल फ्रिक्वेंसी-डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग) तकनीक पर आधारित है। OFDM, व्यवधान कम करने के लिए कई अलग-अलग चैनलों में डिजिटल सिग्नल को व्यवस्थित करने की एक विधि होती है।

  • 5G तकनीक में OFDM के सिद्धांतों के साथ 5G NR एयर इंटरफेस का उपयोग किया जाता है।
  • 5G में विस्तृत बैंडविड्थ प्रौद्योगिकियों जैसे Sub-6 गीगाहर्ट्ज और एमएमवेव का भी उपयोग किया जाता है।

पिछली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क 1G, 2G, 3G, तथा 4G हैं।

पहली पीढ़ी – 1G

1980 का दशक: 1G ने अनुरूपीय आवाज़ प्रदान की।

दूसरी पीढ़ी – 2G

आरंभिक 1990 का दशक: 2G ने डिजिटल आवाज (जैसे CDMA- Code Division Multiple Access) की शुरुआत की।

तीसरी पीढ़ी – 3G

आरंभिक 2000 का दशक: 3G मोबाइल डेटा (जैसे CDMA2000) का आरंभ।

चौथी पीढ़ी – 4G LTE

2010 का दशक: मोबाइल ब्रॉडबैंड के युग में 4G LTE की शुरुआत।

1G, 2G, 3G, और 4G सभी 5G की ओर ले जाते हैं, जिसे पहले से अधिक कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. यूके द्वारा प्रस्तावित 5G क्लब के सदस्य।
  2. ब्रिक्स के बारे में।
  3. ब्रिक्स नवाचार संचालन केंद्र का प्रस्ताव किसके द्वारा पेश किया गया है?
  4. दक्षिण अफ्रीका कब इस समूह में शामिल हुआ?
  5. न्यू डेवलपमेंट बैंक के बारे में।

मेंस लिंक:

प्रस्तावित ब्रिक्स नवाचार संचालन केंद्र के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

सिन गुड्स एवं सिन टैक्स


(Sin Goods and Sin Tax)

संदर्भ:

हाल ही में वित्त मंत्री द्वारा एक व्यक्तव्य में कहा गया, कि दोपहिया वाहन न ही विलासिता की वस्तु है और न ही पातक वस्तुएं (Sin Goods) है, और इसलिए, यह वाहन जीएसटी दर में संशोधन के पात्र है।

वर्तमान में दोपहिया वाहनों पर 28% जीएसटी लगती है।

सिन गुड्स (Sin Goods)

सिन गुड्स अतवा पातक वस्तुएं वे होती हैं, जिन्हें समाज के लिए हानिकारक माना जाता है।

सिन गुड्स के उदाहरण: शराब और तंबाकू, कैंडी, ड्रग्स, शीतल पेय, फास्ट फूड, कॉफी, चीनी, जुआ और पोर्नोग्राफी।

सिन टैक्स (Sin Tax)

‘सिन टैक्स’ अथवा ‘पातक कर’ उन वस्तुओं पर लगाया जाता है, जो जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जैसे तंबाकू और शराब।

इस प्रकार के कराधान को सही ठहराने के लिए तीन प्रमुख तर्क दिए जाते हैं:

  1. यह कीमतों में वृद्धि के माध्यम से इन वस्तुओं की खपत को कम कर सकता है।
  2. यह स्वास्थ्य सेवाओं की लागत में वृद्धि जैसी चीजों के लिए समाज को भरपाई कर सकता है।
  3. स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए संसाधनों में वृद्धि कर सकता है।

भारत में विनियमन:

वर्तमान जीएसटी दर संरचना के अनुसार, सिगरेट, पान मसाला तथा वायवीय पेय पदार्थो जैसी सिन गुड्स पर सिन टैक्स लगाया जाता है। सिन गुड्स के आलावा, कार जैसे लक्जरी उत्पादों पर उपकर (Cess) का प्रावधान है।

वैश्विक उदाहरण:

  • यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन और कनाडा जैसे देशों में तम्बाकू और शराब से लेकर लॉटरी और जुआ जैसे उत्पादों व सेवाओं पर सिन टैक्स लगाया जाता है, जिससे काफी बड़ी मात्रा में राजस्व प्राप्ति होती है।
  • मेक्सिको में वर्ष 2013 से सोडा टैक्स लगाया जाता है।

महत्व:

  1. तंबाकू तथा शराब जैसे द्रव्यों के अत्याधिक सेवन से कैंसर, हृदय रोग और मोटापे जैसे स्वास्थ्य जोखिमों में वृद्धि होती है। इस तथ्य को डाक्टरों द्वारा अच्छी तरह स्थापित किया जा चुका है।
  2. सिन टैक्स लगाने वाले अन्य देशों के उदाहरणों से पता चलता है कि नए कर के बाद से सिगरेट और शीतल पेय की खपत में काफी गिरावट आई है।
  3. भारत के कई राज्यों में शराब की बिक्री (और करों) से भारी राजस्व अर्जित होता है। सिन टैक्स इन राज्यों के लिए एक बोनस साबित हो सकते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सिन टैक्स क्या है?
  2. कौन सा देश सोडा टैक्स लगाता है?
  3. पिगोवियन टैक्स (Pigovian tax) क्या है?
  4. मेरिट गुड्स (merit goods) क्या हैं?

मेंस लिंक:

सिन टैक्स क्या है? सिन गुड्स कौन सी होती? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

भारत की एस्ट्रोसैट दूरबीन द्वारा एक सबसे पुरानी आकाशगंगा की खोज


(India’s AstroSat telescope discovers one of the earliest galaxies to have formed)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के मल्टी वेवलेंथ दूरबीन ‘एस्ट्रोसैट’ (AstroSat) ने AUDFs01 नामक एक आकाशगंगा से निकलने वाले तीव्र-पराबैगनी (Ultraviolet- UV) प्रकाश की खोज की है।

यह आकाशगंगा पृथ्वी से 9.3 बिलियन प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित है।

प्रमुख बिंदु:

  • यह खोज भारत, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, अमेरिका, जापान और नीदरलैंड के खगोलविदों द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत की गयी।
  • यह पहली बार है कि अति-पराबैगनी वातावरण में तारों का निर्माण करने वाली आकाशगंगा को देखा गया है।

इस खोज का विवरण

खोजी टीम द्वारा इस आकाशगंगा को आकाश के ‘हबल एक्सट्रीम डीप फील्ड’ (Hubble eXtreme Deep fieldXDF) नामक क्षेत्र में खोजा गया।

  • यह आकाशगंगा ‘हबल अल्ट्रा डीप फील्ड’ (Hubble Ultra Deep FieldHUDF) के केंद्र में स्थित है।
  • HUDF फोर्नेक्स (Fornax) तारामंडल में एक छोटा सा क्षेत्र है, जिसे वर्ष 2003 से 2004 तक हबल स्पेस टेलीस्कोप डेटा का उपयोग करके निर्धारित किया गया है।
  • XDF नामक इस क्षेत्र में लगभग 5,500 आकाशगंगाएँ हैं।
  • एस्ट्रोसैट द्वारा अक्टूबर, 2016 में 28 घंटे के लिए एक्सडीएफ के एक हिस्से को देखा गया था। किंतु इसका विश्लेषण करने में वैज्ञानिकों को दो साल से ज्यादा लग गए
  • चूंकि, पराबैंगनी विकिरण का वातावरण मे अवशोषण हो जाता है, अतः इस उपलब्धि को केवल अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा की हासिल किया जा सकता था।

एस्ट्रोसैट के बारे में:

  • एस्ट्रोसैट भारत की पहली समर्पित बहु तरंगदैर्घ्य अंतरिक्ष वेधशाला (multi-wavelength space telescope) है। इसमें पांच दूरबीन लगे हुए है, जिनके माध्यम से एस्ट्रोसैट एक ही समय में ऑप्टिकल, पराबैंगनी, निम्न और उच्च ऊर्जा विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के एक्स-रे क्षेत्रों में ब्रह्मांड का अवलोकन करता।
  • एस्ट्रोसैट में लगा हुआ पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (UltraViolet Imaging TelescopeUVIT), दृश्य, पराबैंगनी और सुदूर पराबैंगनी विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम के क्षेत्रों के पास आकाश को अवलोकन करने में सक्षम है।
  • एस्ट्रोसैट को 28 सितंबर 2015 को इसरो (ISRO) द्वारा पृथ्वी के निकट भू-स्थिर कक्षा में प्रक्षेपित किया गया था।
  • यह एक बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना है, जिसमें IUCAA, इसरो, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) मुंबई, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (बेंगलुरु), और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (अहमदाबाद) शामिल हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अब तक किन देशों द्वारा अंतरिक्ष दूरबीनों को लॉन्च किया गया है?
  2. एस्ट्रोसैट किसके द्वारा प्रक्षेपित किया गया था?
  3. पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के बारे में।
  4. हबल अल्ट्रा डीप फील्ड (HUDF) के बारे में।
  5. हबल एक्सट्रीम डीप फील्ड (XDF) के बारे में।
  6. फोरनेक्स तारामंडल के बारे में।

astrosat

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम


National Clean Air Programme (NCAP)

संदर्भ:

हाल ही में, पर्यावरण और वन मंत्रालय (MoEF) द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air ProgrammeNCAP) एक रिपोर्ट जारी की गयी है, जिसमे वर्ष 2024 तक वायु प्रदूषण में 20-30% तक कमी लाने का प्रस्ताव किया गया है।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green TribunalNGT) द्वारा पर्यावरण और वन मंत्रालय की इस रिपोर्ट पर नाराजगी जताई गयी है।

विवाद का विषय:

हाल ही में पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) को सूचित किया गया कि एक समिति ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत प्रदूषकों में 20-30% कमी को  उचित बताया है।

  • मंत्रालय के अनुसार, एक सीमा के आगे प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।
  • हालाँकि, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने पर्यावरण और वन मंत्रालय के इस जबाव को खारिज कर दिया और कहा कि यह अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है तथा इसके अलावा यह विधिक प्रावधानों के भी खिलाफ है।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा की गयी टिप्पणी:

  1. ‘स्वच्छ वायु के अधिकार’ को ‘जीवन के अधिकार’ के एक भाग के रूप में मान्यता दी गयी है, तथा वायु प्रदूषण की समस्या को हल करने में विफलता ‘जीवन के अधिकार’ का उल्लंघन है।
  2. संवहनीय विकास’ तथा ‘लोक विश्वास’ के सिद्धांतों को लागू करने तथा अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अंतर्गत अधिदेशों को प्रभावी बनाने के लिए कड़े उपाय किये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए ‘पर्यावरणीय (संरक्षण) अधिनियम’, 1986 तथा अन्य क़ानून बनाये गए है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के अंतर्गत अधिदेश

NCAP के तहत, 10 वर्षों में सभी मानदंडों को प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमे पहले तीन सालों में प्रदूषण के भार में 35% की कमी की जायेगी तथा उसके बाद शेष प्रदूषण को समाप्त किया जायेगा।

  • इसका तात्पर्य है, कि दस वर्षों तक प्रदूषण की समस्या बनी रहेगी, जोकि जीवन के अधिकार के तहत स्वच्छ वायु से वंचित रहने के लिए काफी लंबी अवधि है।
  • इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस अवधि में किस प्रकार के प्रदूषकों को कम किया जाएगा।
  • इसके अलावा, 2019 में, ‘नॉन एटेनमेंट सिटीज‘ (non-attainment’ cities) की संख्या 102 से 122 हो गई है।
  • ‘नॉन एटेनमेंट सिटीज’ उन शहरों को कहा जाता है, जो लगातार पाँच वर्ष तक PM10 अथवा नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के लिये राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (National Ambient Air Quality Standards-NAAQS) को पूरा करने में विफल रहते हैं।

समय की मांग

  1. वायु प्रदूषण के निर्धारित स्तर के उल्लंघन के परिणामस्वरूप होने वाली बड़ी संख्या में मौतों तथा बीमारियों के शीघ्र समाधान की आवश्यकता है।
  2. प्रदूषण भार में कमी के लक्षित समय को कम करने की आवश्यकता है और योजनाबद्ध कदमों को सतह पर सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के बारे में:

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया था।
  • इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम अथवा किसी अन्य अधिनियम के तहत अधिसूचित नहीं किया गया था।
  • वायु प्रदूषण से निपटने हेतु राज्यों और केंद्र को एक रूपरेखा प्रदान करने की योजना के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम परिकल्पना की गई है।
  • इसका प्रमुख लक्ष्य वर्ष 2024 तक वायुमंडल में कम से कम 20% लघु तथा सूक्ष्म कणों की मात्रा को कम करना है।
  • यह एक पंचवर्षीय कार्यक्रम है, इसके द्वारा PM10 तथा PM 5 में 2024 तक 20-30% की कमी लायी जायेगी। इसके लिए 2017 को आधार वर्ष माना जायेगा।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में सहभागिता

उद्योग और शिक्षाविदों के अलावा, इस कार्यक्रम में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, नीति आयोग तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहभागी होंगे।

2024

किन शहरों में लागू किया जायेगा?

इस कार्यक्रम में 23 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के 102 नॉन-अटेनमेंट शहरों  को शामिल किया गया है। नॉन-अटेनमेंट शहरों की सूची में दिल्ली, वाराणसी, भोपाल, कलकत्ता, नॉएडा, मुजफ्फरपुर और मुंबई ऐसे बड़े शहर शामिल हैं।

  • इन शहरों का चुनाव केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2011 से 2015 के बीच की वायु गुणवत्ता के आधार पर किया है।
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा शहरों को चुना गया है

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCAP कब लॉन्च किया गया था?
  2. NCAP में प्रतिभागी।
  3. नॉन-अटेनमेंट शहर क्या हैं?
  4. NCAP के तहत निर्धारित लक्ष्य।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA)

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority- APEDA) की स्थापना दिसंबर, 1985 में संसद द्वारा पारित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा की गई।

  • इस प्राधिकरण के द्वारा ‘प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात संवर्धन परिषद (PFEPC) को प्रतिस्थापित कर दिया गया।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारत से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करता है।
  • इसे अनुसूचित उत्पादों, जैसे फल, सब्जियां और उनके उत्पाद, मांस और मांस उत्पाद आदि के निर्यात संवर्धन और विकास का दायित्व सौंपा गया है।
  • इसके अलावा, APEDA चीनी के आयात पर भी नजर रखने का कार्य करता है।

हनी मिशन (Honey Mission)

  • इस योजना को वर्ष 2017 में खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) द्वारा शुरू किया गया था।
  • इसका उद्देश्य भारत के शहद उत्पादन को बढ़ाते हुए आदिवासियों, किसानों, बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को मधुमक्खी पालन में लगाकर रोजगार सृजन करना है।

कृषि ऋण हेतु ICICI बैंक दवारा उपग्रहों का उपयोग

  1. हाल ही में निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक ICICI बैंक द्वारा कृषि क्षेत्र में अपने ग्राहकों की साख का आकलन करने के लिए उपग्रहों से सैटेलाइट डेटा-इमेजरी का उपयोग करने की घोषणा की गयी है।
  2. ICICI बैंक सैटेलाइट डेटा-इमेजरी का उपयोग करने वाला देश का पहला बैंक बन गया है।
  3. इस प्रयोग से किसानों को अपनी मौजूदा साख बढ़ाने में मदद मिलेगी, पहली बार ऋणदाताओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।

आईएनएस विराट

  • आईएनएस विराट को मूल रूप से एच.एम.एस. हर्मस (HMS Hermes) के रूप में 18 नवंबर, 1959 को ब्रिटिश नौसेना में तैनात किया गया था।
  • इस विमान वाहक पोत द्वारा वर्ष 1982 में फ़ॉकलैंड द्वीप युद्ध में भाग लिया गया था।
  • भारत द्वारा इस ब्रिटिश विमान वाहक पोत को वर्ष 1986 में खरीदा गया तथा इसे आईएनएस विराट के रूप में भारतीय नौसेना में सम्मिलित किया गया।
  • आईएनएस विराट विश्व में सबसे अधिक समय तक सेवारत रहने वाला युद्धपोत है।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में, धातु स्क्रैप व्यापार निगम लिमिटेड (MSTC) द्वारा विमान-वाहक पोत आईएनएस विराट को ई-नीलामी के माध्यम से गुजरात के ‘श्री राम ग्रीन शिप रीसाइक्लिंग इंडस्ट्रीज़’ को बेच दिया गया है।
  • यह भारत में पिछले छह वर्षों की अवधि विखंडित किया जाने वाला दूसरा विमान वाहक पोत है। 2014 में, आईएनएस विक्रांत, जिसने पाकिस्तान के साथ ऐतिहासिक 1971 के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, मुंबई में तोडा गया था।

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