HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
प्रथम विधि आयोग लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में निम्नलिखित किस अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था, जिसने दंड संहिता और आपराधिक प्रक्रिया संहिता के संहिताकरण की सिफारिश की थी,
Correct
उत्तर: b)
- प्राचीन काल में कानून सुधार अनौपचारिक था, संस्थागत नहीं।
- हालाँकि, उन्नीसवीं सदी के तीसरे दशक के बाद से, सरकार द्वारा समय-समय पर विधि आयोगों का गठन किया गया था।
- प्रथम विधि आयोग को चार्टर एक्ट 1833 के तहत 1834 में स्थापित किया गया था।
- इसके बाद, 1853, 1861 और 1879 में क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे विधि आयोगों का गठन किया गया, जिन्होंने अंग्रेजी कानूनों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाने में सहायता की।
- भारतीय नागरिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम आदि पहले चार विधि आयोगों के परिणाम हैं।
- स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि आयोग की स्थापना 1955 में भारत के तत्कालीन अटॉर्नी-जनरल, श्री एम. सी. सीतलवाड़ की अध्यक्षता में की गई थी।
Incorrect
उत्तर: b)
- प्राचीन काल में कानून सुधार अनौपचारिक था, संस्थागत नहीं।
- हालाँकि, उन्नीसवीं सदी के तीसरे दशक के बाद से, सरकार द्वारा समय-समय पर विधि आयोगों का गठन किया गया था।
- प्रथम विधि आयोग को चार्टर एक्ट 1833 के तहत 1834 में स्थापित किया गया था।
- इसके बाद, 1853, 1861 और 1879 में क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे विधि आयोगों का गठन किया गया, जिन्होंने अंग्रेजी कानूनों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाने में सहायता की।
- भारतीय नागरिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम आदि पहले चार विधि आयोगों के परिणाम हैं।
- स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि आयोग की स्थापना 1955 में भारत के तत्कालीन अटॉर्नी-जनरल, श्री एम. सी. सीतलवाड़ की अध्यक्षता में की गई थी।
-
Question 2 of 5
2. Question
भारत के संविधान के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए?
- यह लिखित नियमों का एक समुच्चय है जिसे किसी देश में एक साथ रहने वाले सभी लोगों द्वारा स्वीकार किया जाता है।
- यह निर्दिष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे किया जाएगा और उसमें निर्णय लेने की शक्ति का वितरण कैसे होगा।
- यह एक बेहतर समाज के निर्माण के बारे में लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
- संविधान सर्वोच्च कानून है जो नागरिकों के बीच तथा नागरिकों और सरकार के बीच संबंधों को निर्धारित करता है।
- यह विभिन्न प्रकार के लोगों के एक साथ रहने के लिए आवश्यक विश्वास और समन्वय स्थापित करता है;
- यह निर्दिष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे किया जाएगा, उदा. लोकतांत्रिक चुनावों द्वारा।
- यह सरकार की शक्तियों पर सीमा आरोपित करता है और हमें बताता है कि नागरिकों के अधिकार क्या हैं; तथा
- यह लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है, उदाहरण के लिए प्रस्तावना और DPSP द्वारा।
Incorrect
उत्तर: d)
- संविधान सर्वोच्च कानून है जो नागरिकों के बीच तथा नागरिकों और सरकार के बीच संबंधों को निर्धारित करता है।
- यह विभिन्न प्रकार के लोगों के एक साथ रहने के लिए आवश्यक विश्वास और समन्वय स्थापित करता है;
- यह निर्दिष्ट करता है कि सरकार का गठन कैसे किया जाएगा, उदा. लोकतांत्रिक चुनावों द्वारा।
- यह सरकार की शक्तियों पर सीमा आरोपित करता है और हमें बताता है कि नागरिकों के अधिकार क्या हैं; तथा
- यह लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता है, उदाहरण के लिए प्रस्तावना और DPSP द्वारा।
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Question 3 of 5
3. Question
“अधिकार पृच्छा (QUO WARRANTO)” रिट निम्नलिखित में से किसको संबोधित करने के लिए जारी की जा सकती है?
Correct
उत्तर: b)
- “अधिकार पृच्छा (QUO WARRANTO)” का अर्थ है “किस वारंट द्वारा”? इसका अर्थ यह है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय उस रिट को जारी कर सकते हैं जो उस व्यक्ति या प्राधिकरण को किसी कार्यालय में कार्य करने के लिए रोकती है, जिसके लिए वह हकदार नहीं है।
- यह रिट केवल सार्वजनिक कार्यालयों पर लागू होती है, न कि निजी कार्यालयों पर।
Incorrect
उत्तर: b)
- “अधिकार पृच्छा (QUO WARRANTO)” का अर्थ है “किस वारंट द्वारा”? इसका अर्थ यह है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय उस रिट को जारी कर सकते हैं जो उस व्यक्ति या प्राधिकरण को किसी कार्यालय में कार्य करने के लिए रोकती है, जिसके लिए वह हकदार नहीं है।
- यह रिट केवल सार्वजनिक कार्यालयों पर लागू होती है, न कि निजी कार्यालयों पर।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- भारत में संसद के किसी भी सदन के सदस्यों के लिए कोई आचार संहिता नहीं है।
- यूके और यूएस के अलावा, किसी भी अन्य देश में सांसदों के लिए आचार संहिता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- राज्यसभा के सदस्यों के लिए आचार संहिता 2005 से लागू है; लोकसभा के लिए ऐसी कोई संहिता नहीं है।
- उच्च संवैधानिक अधिकारियों और लोगों के प्रतिनिधियों के लिए आचार संहिता पर लंबे समय से चर्चा की गई है। 1964 में केंद्रीय मंत्रियों के लिए एक संहिता को अपनाया गया था, और राज्य सरकारों को भी इसे अपनाने की सलाह दी गई थी। 1999 में मुख्य न्यायाधीशों के एक सम्मेलन ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए एक आचार संहिता अपनाने का संकल्प लिया गया। यह 15-सूत्रीय ‘न्यायिक जीवन में मूल्यों की पुन: स्थापना’ ने सिफारिश की कि सेवारत न्यायाधीशों को अपने आधिकारिक और व्यक्तिगत जीवन को “पृथक-पृथक” बनाए रखना चाहिए।
- ब्रिटेन में, सांसदों के लिए आचार संहिता “19 जुलाई 1995 के सदन के प्रस्ताव के अनुसार तैयार की गई थी”। कनाडाई हाउस ऑफ कॉमन्स में किसी अन्य सदस्य के अनुरोध पर या सदन के प्रस्ताव पर या स्वयं की पहल पर हितों के संघर्ष की जांच करने के लिए शक्ति संपन्न हित संघर्ष और नैतिकता आयुक्त (Conflict of Interest and Ethics Commissioner) की स्थापना की गई है। जर्मनी में 1972 से बुंडेस्टाग के सदस्यों के लिए एक आचार संहिता की स्थापना की गई है; अमेरिका में 1968 से एक आचार संहिता की स्थापना की गई है। पाकिस्तान में सीनेट के सदस्यों के लिए आचार संहिता की स्थापना की गई है।
Incorrect
उत्तर: c)
- राज्यसभा के सदस्यों के लिए आचार संहिता 2005 से लागू है; लोकसभा के लिए ऐसी कोई संहिता नहीं है।
- उच्च संवैधानिक अधिकारियों और लोगों के प्रतिनिधियों के लिए आचार संहिता पर लंबे समय से चर्चा की गई है। 1964 में केंद्रीय मंत्रियों के लिए एक संहिता को अपनाया गया था, और राज्य सरकारों को भी इसे अपनाने की सलाह दी गई थी। 1999 में मुख्य न्यायाधीशों के एक सम्मेलन ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए एक आचार संहिता अपनाने का संकल्प लिया गया। यह 15-सूत्रीय ‘न्यायिक जीवन में मूल्यों की पुन: स्थापना’ ने सिफारिश की कि सेवारत न्यायाधीशों को अपने आधिकारिक और व्यक्तिगत जीवन को “पृथक-पृथक” बनाए रखना चाहिए।
- ब्रिटेन में, सांसदों के लिए आचार संहिता “19 जुलाई 1995 के सदन के प्रस्ताव के अनुसार तैयार की गई थी”। कनाडाई हाउस ऑफ कॉमन्स में किसी अन्य सदस्य के अनुरोध पर या सदन के प्रस्ताव पर या स्वयं की पहल पर हितों के संघर्ष की जांच करने के लिए शक्ति संपन्न हित संघर्ष और नैतिकता आयुक्त (Conflict of Interest and Ethics Commissioner) की स्थापना की गई है। जर्मनी में 1972 से बुंडेस्टाग के सदस्यों के लिए एक आचार संहिता की स्थापना की गई है; अमेरिका में 1968 से एक आचार संहिता की स्थापना की गई है। पाकिस्तान में सीनेट के सदस्यों के लिए आचार संहिता की स्थापना की गई है।
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Question 5 of 5
5. Question
राज्यपाल की विधायी शक्तियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यदि राज्य विधायिका द्वारा पारित एक विधेयक राज्य उच्च न्यायालय की स्थिति के समक्ष खतरा उत्पन्न करता है, तो राज्यपाल को राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक को आरक्षित करना चाहिए।
- यदि राज्य विधानमंडल के पुनर्विचार के लिए राज्यपाल द्वारा भेजा गया कोई विधेयक बिना संशोधनों के पुन: पारित कर दिया जाता है, तो राज्यपाल पर विधेयक पर अपनी सहमति देने के लिए कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
जब राज्य विधायिका द्वारा पारित होने के बाद कसी विधेयक को राज्यपाल को भेजा जाता है, तो वह:
(a) विधेयक पर अपनी सहमति दे सकता है, या
(b) विधेयक पर अपनी सहमति रोक सकता है, या
(c) राज्य विधायिका के पुनर्विचार के लिए विधेयक (यदि यह धन विधेयक नहीं है) लौटा सकता है। हालाँकि, यदि विधेयक को राज्य विधानसभा द्वारा संशोधनों या बिना संशोधनों के पुन: पारित कर दिया जाता है, तो राज्यपाल को विधेयक के लिए अपनी सहमति देना अनिवार्य होता है, या
(d) राष्ट्रपति के विचार के लिए विधेयक को आरक्षित कर सकता है। एक मामले में ऐसा आरक्षण अनिवार्य है, अर्थात् जहां राज्य विधायिका द्वारा पारित विधेयक राज्य उच्च न्यायालय की स्थिति के समक्ष खतरा उत्पन्न करता हो।
इसके अलावा, राज्यपाल विधेयक को आरक्षित कर सकता है यदि वह निम्न प्रकृति का हो:
(i) अल्ट्रा-वायर्स, यानी संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध।
(ii) राज्य नीति के निर्देशक तत्वों के विरुद्ध।
(iii) देश के व्यापक हित के विरुद्ध।
(iv) गंभीर राष्ट्रीय महत्व।
(v) संविधान के अनुच्छेद 31A के तहत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से सम्बंधित।
Incorrect
उत्तर: a)
जब राज्य विधायिका द्वारा पारित होने के बाद कसी विधेयक को राज्यपाल को भेजा जाता है, तो वह:
(a) विधेयक पर अपनी सहमति दे सकता है, या
(b) विधेयक पर अपनी सहमति रोक सकता है, या
(c) राज्य विधायिका के पुनर्विचार के लिए विधेयक (यदि यह धन विधेयक नहीं है) लौटा सकता है। हालाँकि, यदि विधेयक को राज्य विधानसभा द्वारा संशोधनों या बिना संशोधनों के पुन: पारित कर दिया जाता है, तो राज्यपाल को विधेयक के लिए अपनी सहमति देना अनिवार्य होता है, या
(d) राष्ट्रपति के विचार के लिए विधेयक को आरक्षित कर सकता है। एक मामले में ऐसा आरक्षण अनिवार्य है, अर्थात् जहां राज्य विधायिका द्वारा पारित विधेयक राज्य उच्च न्यायालय की स्थिति के समक्ष खतरा उत्पन्न करता हो।
इसके अलावा, राज्यपाल विधेयक को आरक्षित कर सकता है यदि वह निम्न प्रकृति का हो:
(i) अल्ट्रा-वायर्स, यानी संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध।
(ii) राज्य नीति के निर्देशक तत्वों के विरुद्ध।
(iii) देश के व्यापक हित के विरुद्ध।
(iv) गंभीर राष्ट्रीय महत्व।
(v) संविधान के अनुच्छेद 31A के तहत संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से सम्बंधित।








