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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत

 

सामान्य अध्ययन-II

1. लोकायुक्त

2. अविश्वास प्रस्ताव

3. एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB)

4. विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020

5. जाति आधारित प्रोफाइलिंग हेतु डीएनए विधेयक के दुरुपयोग की संभावना: पैनल ड्राफ्ट रिपोर्ट

6. ग्लैंडर्स बीमारी

 

सामान्य अध्ययन-III

1. गूगल पे पर नियमों के उल्लंघन का आरोप

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (DFCCIL)

2. गुवाहाटी में भारत का सबसे लंबा नदी रोपवे

3. चर्चित व्यक्ति: बोंडा जनजाति

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत


संदर्भ:

पर्यटन मंत्रालय के द्वारा ‘देखो अपना देश’ वेबिनार सीरीज के 50वें सत्र में “हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत” (Cultural heritage of Hyderabad) का आयोजन किया गया।

‘देखो अपना देश’ सीरीज क्या है?

‘देखो अपना देश’ वेबिनार सीरीज का आयोजन पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है – इसमें उन पर्यटन स्थलों के बारे में बताया जाता है जो अपेक्षाकृत कम चर्चित हैं, तथा लोगों को उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं है।

इसके तहत एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी प्रोत्साहित किया जाता है।

नोट: इस PIB लेख में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया गया है। उल्लेखित तथ्य आपके प्रीलिम्स के साथ-साथ मेन्स के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

प्रमुख तथ्य:

  • हैदराबाद “मोतियों के शहर” और “निजाम के शहर” के रूप में लोकप्रिय है तथा कुतुबशाही राजवंश द्वारा स्थापना के बाद से एक जीवंत ऐतिहासिक विरासत का केन्द्र रहा है।
  • मुहम्मद कुली कुतुब शाह ने गोलगुंडा किले से आगे राजधानी के विस्तार के लिए 1591 में हैदराबाद की स्थापना की थी।
  • वर्ष 1687 में शहर पर मुगलों का कब्जा हो गया। 1724 में मुगल शासक निजाम आसफ जाह-1 ने अपनी सम्प्रभुता का ऐलान किया और आसफ जाही राजवंश की स्थापना की, जिसे निजाम के नाम से भी जाना जाता है।
  • हैदराबाद 1769 से 1948 के बीच आसफ जाही की शाही राजधानी रहा।
  • वर्ष 1947 में भारत के आजाद होने से पहले तक हैदराबाद रियासत की राजधानी के रूप में शहर में ब्रिटिश रेजिडेंसी और कैंटोनमेंट भी था।

इस सत्र में हैदराबाद के निम्नलिखित प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों का उल्लेख किया गया है:

  1. गोलकोंडा किला, हैदराबाद: 13 वीं शताब्दी में काकतीय राजवंश द्वारा निर्मित।
  2. चौमहला पैलेस: एक समय आसफजही वंश की गद्दी रहा चौमहला पैलेस का निर्माण हैदराबाद में किया गया था और यह प्रसिद्ध स्मारक चारमीनार और लाड बाजार के पास स्थित था।
  3. चारमीनार: जब कुली कुतुब शाह ने गोलकुंडा की जगह हैदराबाद को अपनी राजधानी बनाया तो इस स्मारक का निर्माण किया गया।
  4. मक्का मस्जिद: भारत की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिदों में से एक यह मस्जिद हैदराबाद के भव्य ऐतिहासिक स्थलों में से एक है, जिसका निर्माण 1693 में औरंगजेब ने पूरा कराया था।
  5. वारंगल किला: यह किला कम से कम 12वीं सदी से अस्तित्व में है, जब यह काकतीय राजवंश की राजधानी हुआ करता था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘देखो अपना देश’ श्रृंखला किसके द्वारा आयोजित की जाती है?
  2. एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के बारे में।
  3. किस शहर को लोकप्रिय रूप से “मोतियों का शहर” कहा जाता है।
  4. हैदराबाद शहर की स्थापना किसने की?
  5. हैदराबाद के सभी राजवंश।
  6. चौमहला पैलेस किसने बनवाया था?
  7. चारमीनार का निर्माण किसने कराया था?
  8. काकतीय राजवंश के बारे में।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

लोकायुक्त


संदर्भ:

हाल ही में नागालैंड राज्य द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपने लोकायुक्त को हटाये जाने के संदर्भ में एक याचिका दायर की गयी थी। इस याचिका पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लोकायुक्त के लिए अपनी शक्तियों और कार्यों के प्रयोग को बंद करने तथा अपने सभी कार्यों को उप-लोकायुक्त को हस्तांतरित करने का नोटिस जारी किया है।

राज्य द्वारा दायर याचिका में न्यायालय से लोकायुक्त की संस्थागत अखंडता को बनाए रखने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करने का निवेदन किया गया।

लोकायुक्त क्या है?

  • लोकायुक्त एक भ्रष्टाचार-रोधी प्राधिकरण अथवा लोकपाल होता है – सरकार द्वारा जनता के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त एक अधिकारी।
  • यह लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार और कु-प्रशासन के आरोपों की जांच करता है तथा इसका कार्य लोक शिकायतों के त्वरित निवारण करना है।

लोकायुक्त का उद्भव

वर्ष 1966 में स्वर्गीय मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक सुधार आयोग ने लोकायुक्त संस्था की स्थापना की सिफारिश की।

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013,  जिसे आमतौर पर लोकपाल अधिनियम के नाम से जाना जाता है, भारत की संसद द्वारा दिसंबर 2013 में पारित किया गया था।

  • इस अधिनियम में ‘लोक सेवकों के आचरण से संबंधित आरोपों या शिकायतों की जांच और रिपोर्ट करने के लिए’ लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • इसके अंतर्गत केंद्रीय स्तर पर लोकपाल की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।

लोकायुक्त के रूप में किसे नियुक्त किया जाता है?

लोकायुक्त आमतौर पर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश होते हैं और उनका निश्चित कार्यकाल होता है।

लोकायुक्त का चयन:

  • मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, विधान सभा के अध्यक्ष, विधान परिषद के अध्यक्ष, विधान सभा में विपक्ष के नेता और विधान परिषद में विपक्ष के नेता के परामर्श के बाद लोकायुक्त के रूप में किसी व्यक्ति का चयन करता है।
  • लोकायुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • नियुक्त होने के बाद, लोकायुक्त को सरकार द्वारा हटाया या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है, तथा केवल राज्य विधानसभा द्वारा महाभियोग प्रस्ताव पारित करके पदमुक्त किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किन राज्यों ने लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है?
  2. लोकायुक्त नियुक्त करने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा था?
  3. लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
  4. शक्तियाँ और कार्य।
  5. पात्रता।
  6. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 का अवलोकन।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

अविश्वास प्रस्ताव


(No-Confidence Motion)

चर्चा का कारण

हाल ही में, केरल विधानसभा में विपक्ष के द्वारा पिनराई विजयन सरकार के विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 40 के मुकाबले 87 मतों से पराजित हो गया है। इसके पश्चात विधानसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है।

अविश्वास प्रस्ताव क्या होता है?

अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) एक संसदीय प्रस्ताव है जिसे लोकसभा में मंत्रि परिषद के विरुद्ध पेश किया जाता है। इसमें विपक्ष द्वारा दावा किया जाता है, कि मंत्रिपरिषद के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है, तथा वह निर्धारित दायित्वों को पूरा करने में अक्षम है। अतः यह जिम्मेदारी युक्त पदों को धारण करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए पूर्व कारण बताना आवश्यक नहीं होता है।

‘अविश्वास प्रस्ताव’ की प्रक्रिया:

सरकार के खिलाफ ‘अविश्वास प्रस्ताव’ का प्रस्ताव केवल लोकसभा में नियम 198 के तहत पेश किया जा सकता है।

भारत के संविधान में ‘विश्वास प्रस्ताव’ अथवा ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के बारे में उल्लेख नहीं किया गया है। हालाँकि, अनुच्छेद 75 में यह कहा गया है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होगी।

  • लोक सभा में अविश्वास प्रस्ताव को पेश करने के लिए सदन में न्यूनतम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होता है।
  • प्रस्ताव की प्रक्रिया से संतुष्ट होने के पश्चात अध्यक्ष द्वारा सदन से अविश्वास प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए पूछा जाता है।
  • नियम 198(3) के तहत अध्यक्ष अनुमति मिलने के बाद इस पर चर्चा के लिये एक या अधिक दिन या किसी दिन के एक भाग को निर्धारित करते हैं।
  • यदि अविश्वास प्रस्ताव सदन में पारित हो जाता है, तो सरकार पद-त्याग करने के लिए बाध्य होती है।
  • सदन में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए इसके पक्ष में बहुमत की आवश्यकता होती है।
  • यदि कोई सदस्य अथवा दल मतदान में भाग नहीं लेता है, तो उनकी संख्या को सदन की कुल संख्या से हटा दिया जाता है, इसके पश्चात शेष संख्या के आधार पर बहुमत की गणना की जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अविश्वास प्रस्ताव क्या है?
  2. इसे कौन पेश कर सकता है?
  3. प्रक्रिया
  4. क्या इसे राज्यसभा में पेश किया जा सकता है?
  5. अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यकता
  6. अनुच्छेद 75 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

अविश्वास प्रस्ताव पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB)


संदर्भ:

भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार, मुंबई रेलवे विकास निगम और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) ने मुंबई में उपनगरीय रेलवे प्रणाली की नेटवर्क क्षमता, सेवा गुणवत्ता और सुरक्षा में सुधार के लिए आज 500 मिलियन डॉलर की मुंबई शहरी परिवहन परियोजना- III के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

AIIB क्या है?

एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) एक बहुपक्षीय विकास बैंक है। यह एशिया और उसके बाहर के सामाजिक और आर्थिक परिणामों में सुधार के लिये एक मिशन के रूप में कार्य करता है।

  • इसका मुख्यालय बीजिंग में है।
  • AIIB ने जनवरी 2016 में कार्य करना शुरू किया और वर्तमान में इसके 103 अनुमोदित सदस्य हैं।

AIIB में नए सदस्यों की भर्ती

  • एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक एक खुली और समावेशी बहुपक्षीय वित्तीय संस्था है।
  • अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक‘ (International Bank for Reconstruction and Development -IBRD) अथवा एशियाई विकास बैंक के सदस्यों को AIIB की सदस्यता प्रदान की जाती है।
  • अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों (Multilateral Development Bank- MDB) के विपरीत, AIIB गैर-संप्रभु संस्थाओं को- जिनके मूल देश IBRD अथवा ADB के सदस्य हैं, सदस्यता के लिए अवसर प्रदान करता है।

AIIB परियोजनाओं हेतु विशेष निधि:

  • AIIB परियोजनाओं की तैयारी के लिए जून 2016 में विशेष फंड का गठन किया गया था, यह एक बहु-दाता सुविधा है।
  • इसका मुख्य उद्देश्य पात्र एआईआईबी सदस्यों, विशेष रूप से अल्प-आय वाले सदस्य देशों को बुनियादी ढांचा परियोजनाएं तैयार तैयार करने में वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
  • इस विशेष निधि के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तैयार करने के लिए तकनीकी सहायता अनुदान प्रदान किया जाता है। इन अनुदानों से, सहायता-प्राप्त देश परियोजना निर्माण के लिए आवश्यक विशेषज्ञों और सलाहकारों को नियुक्त कर सकते हैं।

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक के विभिन्न अंग:

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स: गवर्नर्स बोर्ड में प्रत्येक सदस्य देश द्वारा नियुक्त एक गवर्नर तथा एक वैकल्पिक गवर्नर होते हैं।

निदेशक मंडल: बैंक के सामान्य संचालन के लिए गैर-निवासी निदेशक मंडल (Non-resident Board of Directors) जिम्मेदार होता है, इस निदेशक मंडल को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा सभी शक्तियां प्रदान की जाती है। इनके कार्यों में बैंक की रणनीति बनाना, वार्षिक योजना और बजट को मंजूरी देना, नीति-निर्माण; बैंक संचालन से संबंधित निर्णय लेना; और बैंक के प्रबंधन और संचालन की देखरेख और एक निगरानी तंत्र स्थापित करना आदि सम्मिलित है।

अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार पैनल: AIIB द्वारा बैंक की रणनीतियों तथा नीतियों के साथ-साथ सामान्य  परिचालन मुद्दों पर बैंक के अध्यक्ष और शीर्ष प्रबंधन की सहायता हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार पैनल (International Advisory Panel- IAP) का गठन किया गया है।

एआईआईबी का महत्व:

संयुक्त राष्ट्र द्वारा एआईआईबी की शुरुआत को वैश्विक आर्थिक प्रशासन के संबंध में ‘सतत विकास हेतु वित्तपोषण में वृद्धि’ की क्षमता के रूप में संबोधित किया गया है। बैंक की कुल पूंजी $ 100 बिलियन है, जो एशियाई विकास बैंक की पूंजी के 2 /3 के बराबर है तथा विश्व बैंक की लगभग आधी पूंजी के बराबर है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. AIIB बनाम ADB बनाम विश्व बैंक
  2. एआईआईबी के सदस्य
  3. शीर्ष शेयरधारक
  4. मतदान की शक्तियां
  5. भारत में एआईआईबी समर्थित परियोजनायें

मेंस लिंक:

एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2020


(Electricity Amendment Bill)

संदर्भ:

हाल ही में आम आदमी पार्टी ने सदन के अध्यक्ष से केंद्र सरकार के कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों तथा विद्युत् संशोधन विधेयक-2020 को निरस्त करने के लिए प्रस्ताव पेश करने की अनुमति मांगी है।

आम आदमी पार्टी का तर्क है कि ये कानून राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं तथा ये  देश के संघीय ढांचे के विपरीत हैं।

नोट: कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों के बारे में हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं। अधिक विवरण के लिए, कृपया 4 अगस्त का समसामयिकी देखें:

इस लेख में, हम विद्युत संशोधन विधेयक, 2020 के बारे में चर्चा करेंगे।

विद्युत संशोधन विधेयक, 2020 के विवादास्पद बिंदु:

सबसे पहले, कुछ राज्यों ने केंद्र पर राज्यों से परामर्श नहीं करने का आरोप लगाया है क्योंकि बिजली समवर्ती सूची का विषय है। अन्य मुद्दे निम्नलिखित हैं:

इस विधेयक का उद्देश्य सब्सिडी समाप्त करना है। किसानों सहित सभी उपभोक्ताओं को शुल्क का भुगतान करना होगा, और सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से उनके खाते में भेजी जाएगी।

राज्य इस प्रावधान से आशंकित हैं क्योंकि:

  • इसका अर्थ होगा कि लोगों को बिजली शुल्क के रूप में एक बड़ी राशि का भुगतान करना पड़ेगा, जबकि उन्हें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से सहायता बाद में प्राप्त होगी।
  • इससे लोगों को अक साथ बड़ी राशि चुकाने में दिक्कत होगी तथा न चुका सकने की स्थति में दंड भुगतना पड़ेगा और उनका बिजली कनेक्शन भी काटा जा सकता है।
  • इस विधेयक में राज्यों को शुल्क निर्धारित करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है, तथा इसका दायित्व केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त प्राधिकरण को सौपा गया है।
  • यह भेदभावपूर्ण है, क्योंकि इसके द्वारा केंद्र सरकार मनमाने ढंग से शुल्क को बढ़ा सकती है।
  • विधेयक के एक अन्य प्रावधान के अंतर्गत राज्य की बिजली कंपनियों के लिए केंद्र द्वारा निर्धारित अक्षय ऊर्जा का न्यूनतम प्रतिशत क्रय करना अनिवार्य किया गया है।
  • यह प्रावधान कम-नकद पूंजी वाली पॉवर फर्मों के लिए हानिकारक होगा।

विधेयक की अन्य प्रमुख विशेषताएं

  • नवीकरणीय ऊर्जा: यह केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के परामर्श से “अक्षय स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए” एक राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा नीति तैयार करने और अधिसूचित करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • सीमा पार व्यापार: केंद्र सरकार को विद्युत् के सीमा पार व्यापार की अनुमति देने तथा सुविधा देने हेतु नियमों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  • विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (Electricity Contract Enforcement Authority) का गठन: मसौदे में उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक ‘केंद्रीय प्रवर्तन प्राधिकरण’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।
  • इस प्राधिकरण के पास विद्युत उत्पादन और वितरण से जुड़ी हुई कंपनियों के बीच बिजली की खरीद, बिक्री या हस्तांतरण से संबंधित अनुबंधों की लागू करने के लिये दीवानी अदालत के बराबर अधिकार होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APMC क्या हैं? उनका नियमन कैसे किया जाता है?
  2. मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम का अवलोकन
  3. सरकार द्वारा जारी किये गए अध्यादेश कौन से है?
  4. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 में मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव की अनुमति।
  5. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के तहत स्टॉक सीमा विनियमन किसके लिए लागू नहीं होगा?

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सुधार किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जाति आधारित प्रोफाइलिंग हेतु डीएनए विधेयक के दुरुपयोग की संभावना: पैनल ड्राफ्ट रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में कांग्रेस नेता जयराम रमेश की अध्यक्षता में गठित विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति द्वारा डीएनए विधेयक पर कुछ चिंताएं व्यक्त की गयी हैं। इनमे से प्रमुख चिंताएं निम्नलिखित है:

  • डीएनए डेटा का जाति अथवा समुदाय-आधारित प्रोफाइलिंग के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है।
  • विधेयक के कई प्रावधानों में ‘सहमति’ का उल्लेख किया गया है, किंतु प्रत्येक में, मजिस्ट्रेट आसानी से सहमति पर अध्यारोहण (Override) कर सकता है, इससे सहमति का प्रभाव महत्वहीन हो जाता है।
  • विधेयक में मजिस्ट्रेट द्वारा ‘सहमति’ के अध्यारोहण करने हेतु कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए गए है, ऐसी स्थिति में यह काफी हानिकारक हो सकता है।
  • विधेयक में अपराध स्थल पर पाए गए डीएनए को हमेशा के लिए संग्रहीत करने की अनुमति दी गयी है, भले ही अभियुक्त को बाद में दोषमुक्त करार दे दिया गया हो।
  • विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि नागरिक मामलों के लिए तैयार की गयी डीएनए प्रोफाइल भी डेटा बैंकों में संग्रहीत की जाएगी, किंतु इसके लिए कोई स्पष्ट और अलग सूची का प्रावधान नहीं किया गया है।

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक–2019:

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक–2019 का प्राथमिक उद्देश्‍य देश की न्‍याय प्रणाली को सहायता और मजबूती प्रदान करने के लिए डीएनए आधारित फोरेंसिक प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग का विस्‍तार करना है।

  • इसका उद्देश्य एक राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय डीएनए डेटा बैंक की स्थापना करना है।
  • इसके तहत प्रत्येक डेटा बैंक में, अपराध स्थल सूची, संदिग्धों अथवा अभियुक्तों की सूची, अपराधियों की सूची, लापता व्यक्तियों तथा अज्ञात मृतक व्यक्तियों आदि की सूची संग्रहीत की जायेगी।
  • विधेयक में एक डीएनए रेगुलेटरी बोर्ड के गठन का प्रस्ताव किया गया है। यह बोर्ड डीएनए प्रयोगशालाओं को स्थापित करने की प्रक्रिया का निर्धारण और उनके लिये मानक तय करेगा तथा ऐसी प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान करेगा।
  • विधेयक में व्यक्तियों के डीएनए नमूनों के संग्रह से पहले उनकी लिखित सहमति प्राप्त करने का भी प्रस्ताव है। हालांकि, सात साल से अधिक कैद या मौत की सजा प्राप्त अपराधों के मामले में सहमति की आवश्यकता नहीं है।
  • इसमें पुलिस रिपोर्ट फाइल करने या न्यायालय के आदेश पर संदिग्ध व्यक्तियों के डीएनए प्रोफाइल को हटाने का प्रावधान किया गया है। न्यायालय के आदेश पर विचाराधीन कैदियों के प्रोफाइल भी हटाए जा सकते हैं, जबकि अपराध स्थल से संबंधित प्रोफाइल्स और लापता व्यक्तियों की सूची लिखित अनुरोध पर हटाए जा सकेंगे।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ग्लैंडर्स बीमारी


(Glanders Disease)

चर्चा का कारण

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने नगर निकायों से घोड़ों तथा अन्य जानवरों में होने वाली ग्लैंडर्स (Glanders) बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाने को कहा है, इसके साथ ही ‘पेटा’ इण्डिया (People for the Ethical Treatment of Animals– PETA) के आवेदन पर दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी किया है।

पृष्ठभूमि:

पेटा ने अपने आवेदन में घोड़ों, खच्चरों, टट्टूओं और गधों में होने वाली बीमारी ‘ग्लैंडर्स’ के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए पशुओं में संक्रामक एवं संसर्गजन् य रोगों के नियंत्रण तथा रोकथाम अधिनियम, 2009 (Prevention and Control of Infectious and Contagious Disease in Animal Act, 2009) तथा राष्ट्रीय कार्ययोजना क्रियान्वित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की थी।

ग्लैंडर्स के बारे में:

यह एक संक्रामक बीमारी है जो बैक्टीरियम बुर्खोल्डेरिया मल्ली (Bacterium Burkholderia Mallei) नामक जीवाणु के कारण फैलती है।

कौन संक्रमित हो सकता है?

हालांकि, यह बीमारी मनुष्यों में भी हो सकती है, लेकिन ग्लैंडर्स मुख्य रूप से घोड़ों में पायी जाने वाली बीमारी है। यह बीमारी गधों और खच्चरों को भी प्रभावित करती है तथा इन जानवरों के अतिरिक्त अन्य स्तनधारियों जैसे कि बकरियों, कुत्तों और बिल्लियों में भी स्वतः ही फ़ैल सकती है।

ग्लैंडर्स का प्रसरण:

  • संक्रमित जानवरों के ऊतकों अथवा इन जानवरों के किसी तरल पदार्थ के संपर्क में आने से ग्लैंडर्स बीमारी मनुष्यों में फ़ैल सकती है।
  • इसके बैक्टीरिया, शरीर में जख्म अथवा खरोचों के माध्यम से और आंखों और नाक जैसे श्‍लेष्मली अंगो के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं।
  • यह संक्रमित जानवरों की श्वास वायु तथा दूषित धूल के माध्यम से भी संचरित हो सकती है।

ग्लैंडर्स के सामान्य लक्षण:

  1. ठंड लगना और पसीना के साथ बुखार
  2. मांसपेशियों में दर्द
  3. सीने में दर्द।
  4. मांसपेशियों में जकड़न
  5. सिरदर्द
  6. नाक बहना
  7. प्रकाश संवेदनशीलता (कभी-कभी आंखों में अत्यधिक आंसू)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्लैंडर्स- कारण, संचरण, लक्षण और उपचार।
  2. कौन संक्रमित हो सकता है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

गूगल पे पर नियमों के उल्लंघन का आरोप


संदर्भ:

हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से डेटा स्थानीयकरण, भंडारण और साझाकरण मानदंडों से संबंधित केंद्रीय बैंक के दिशानिर्देशों का कथित रूप से उल्लंघन करने के लिए ‘गूगल पे’ (Google Pay) के खिलाफ कार्रवाई करने संबंधी याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी गयी है।

चर्चा का विषय:

कुछ समय पूर्व न्यायालय में ‘कंपनी’ द्वारा कानूनों के कथित उल्लंघन करने के लिए जुर्माना लगाने हेतु एक याचिका दायर की गई थी।

  • याचिका में दावा किया गया है कि कंपनी अक्टूबर 2019 के UPI प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों (UPI procedural guidelines) का उल्लंघन करते हुए संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा संग्रहीत कर रही है।
  • UPI प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों के तहत इस तरह के डेटा को केवल भुगतान सेवा प्रदाता (Payment Service ProviderPSP) बैंक प्रणालियों द्वारा संग्रहीत करने की अनुमति दी गयी है।

भुगतान डेटा के स्थानीयकरण हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक के निर्देश: घटनाक्रम

  • अप्रैल 2018: डेटा स्थानीयकरण परिपत्र: आरबीआई ने भारत में सभी भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों को भुगतान से संबंधित डेटा देश के भीतर संग्रहीत किये जाने को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया तथा इसके अनुपालन के लिए छह महीने का समय दिया गया।
  • जुलाई 2018: वित्त मंत्रालय का हस्तक्षेप: वित्त मंत्रालय ने विदेशी भुगतान फर्मों के लिए आरबीआई के निर्देशों में छूट प्रदान कर दी तथा यह कहा कि भारत में भुगतान डेटा की एक प्रति पर्याप्त होगी।
  • जुलाई में डेटा संरक्षण विधेयक द्वारा डेटा का अनिवार्य स्थानीयकरण: लंबे समय से प्रतीक्षित ड्राफ्ट डेटा संरक्षण विधेयक 2018 को सरकार के लिए पेश किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई। इस विधेयक द्वारा सभी क्षेत्रीय नियामकों और उनके सभी निर्देशों का अध्यारोहण कर लिया गया। इसमें सभी डेटा न्यासीय संस्थाओं को भारत में उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा की एक प्रति संग्रहीत करने के लिए अनिवार्य कर दिया गया।
  • सितंबर 2018, आरबीआई द्वारा डेटा के स्थानीय भंडारण पर अपडेट की मांग: आरबीआई ने भुगतान कंपनियों को भुगतान डेटा के स्थानीय भंडारण पर उनकी प्रगति के बारे में पाक्षिक अपडेट भेजने के लिए कहा।
  • अक्टूबर 2018, आरबीआई परिपत्र प्रभावी: भुगतान डेटा के स्थानीयकरण पर आरबीआई का परिपत्र प्रभावी हुआ।
  • फरवरी 2019: उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) दवारा एक ड्राफ्ट ई-कॉमर्स नीति जारी की गयी, जिसमें डेटा तक पहुंच को विनियमित करने, डेटा भंडारण आवश्यकताओं को अनिवार्य बनाने और सीमा-पार डेटा प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए रणनीति सम्मिलित थी।

भारत के लिए डेटा स्थानीयकरण क्यों आवश्यक है?

  • नागरिक डेटा की सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, डेटा संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के आर्थिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए।
  • प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा किया गया व्यापक डेटा संग्रह, उन्हें देश के बाहर भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को संसाधित और मुद्रीकृत (monetize) करने में सक्षम बनाता है। अतः व्यक्तिगत डेटा के अनियंत्रित और मनमाने ढंग से उपयोग के खतरों को कम करने के लिए, डेटा स्थानीयकरण आवश्यक है।
  • डिजिटल तकनीकें जैसे मशीन लर्निंग (machine learningML), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Internet of ThingsIoT), विभिन्न डेटा से प्रचुर कमाई कर सकते हैं। इसके लिए सीमायें स्थापित करना आवश्यक है, अन्यथा इसके परिणाम विनाशकारी हो सकता है।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग के आगमन के साथ, भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश की सीमाओं के बाहर पहुच जाता है, जिससे किसी भी विवाद के उत्पन्न होने पर अधिकार क्षेत्र संबधी संघर्ष होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. डेटा स्थानीयकरण क्या है?
  2. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) क्या है?
  3. निजी डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 का अवलोकन।
  4. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया- प्रमुख कार्य।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (DFCCIL)

(Dedicated Freight Corridor Corporation of India Limited)

  • रेल मंत्रालय के अधीन DFCCIL एक विशेष उद्देश्य संवाहक (Special Purpose Vehicle- SPV) है, जिसे तीन ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (DFC) परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है।
  • DFCCIL को कंपनी अधिनियम 1956 के तहत 30 अक्टूबर 2006 को कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है।
  • पहले चरण में DFCCIL पश्चिमी DFC (1504 किमी) और पूर्वी DFC (1856 किमी) का निर्माण कर रहा है, जिनकी कुल लंबाई 3360 किमी है।

ludhiana

गुवाहाटी में भारत का सबसे लंबा नदी रोपवे

असम के गुवाहाटी को देश का सबसे लंबा रिवर रोपवे मिल गया है।

  • इससे उत्तरी गुवाहाटी और शहर के मध्य हिस्सों के बीच यात्रा का समय घटकर आठ मिनट रह जाएगा।
  • यह रोपवे ब्रह्मपुत्र नदी के दो किनारों को आपस में जोड़ेगा।
  • यह रोपवे 1.8 किलोमीटर लंबा है. इस में दो केबिन हैं, हर केबिन में 30 यात्री बैठ सकते हैं।

चर्चित व्यक्ति: बोंडा जनजाति

यह ओडिशा में मलकानगिरी जिले की पहाड़ियों में रहने वाला आदिवासी समुदाय है।

  • यह विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह (a particularly vulnerable tribal groupPVTG) के अंतर्गत आते हैं।
  • उनकी आबादी लगभग 7,000 है।
  • बोंडा जनजाति को रेमो बोंडा अथवा बोंडो के नाम से भी जाना जाता है। बोडो भाषा में रेमो का अर्थ है ‘लोग’।
  • ऐसा माना जाता है कि बोंडा ऑस्ट्रो – एशियाटिक जनजातियाँ हैं, जो जंगली जयपुर पहाड़ियों के वंशज निवासी हैं।
  • बोंडा जाति की लड़कियों का विवाह कम आयु में ही हो जाता है और लड़के की आयु लड़की की आयु से दो-गुनी होना सही माना जाता है।

चर्चा का कारण

हाल ही में ओडिशा की बोंडा जनजाति (Bonda Tribe) के लोग COVID-19 से संक्रमित पाए गए हैं।


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