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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु

2. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन

3. तीस्ता नदी जल विवाद

4. अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013

2. भारतीय मानक ब्यूरो के ‘पेयजल आपूर्ति’ मानक

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. जनसंख्या और विकास पर भारतीय संसदीय संगठन (IAPPD)

2. नुआखाई जुहार (Nuakhai Juhar)

3. ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद

4. फ्लेवोनॉइड (flavonoids)

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु


संदर्भ:

स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार द्वारा महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र पर पुनर्विचार करने के लिए एक समिति गठित की गयी है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र द्वारा निर्णय लिया जायेगा।

विवाह की न्यूनतम आयु, विशेषकर महिलाओं के लिए, एक विवादास्पद मुद्दा रहा है।

पृष्ठभूमि:

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा जया जेटली की अध्यक्षता में, माँ बनने की उम्र से संबंधित मामलों की जांच करने, मातृ मृत्यु दर को कम करने हेतु अनिवार्यताओं तथा महिलाओं में पोषण स्तर के सुधार के संबंध में सुझाव  देने हेतु एक समिति का गठन किया गया है।

वैधानिक प्रावधान

  • वर्तमान में, कानून के अनुसार, पुरुष तथा महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु क्रमशः 21 और 18 वर्ष निर्धारित है।
  • विवाह हेतु निर्धारित न्यूनतम आयु, व्यस्क होने की आयु से भिन्न है। वयस्कता, लैंगिक रूप से तटस्थ होती है।
  • भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के अनुसार, कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर ‘व्यस्क’ हो जाता है।
  • हिंदुओं के लिए, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5 (iii), में वधू न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा वर के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। बाल विवाह गैरकानूनी नहीं है किंतु विवाह में किसी नाबालिग (वर अथवा वधू) के अनुरोध पर विवाह को शून्य घोषित किया जा सकता है।
  • इस्लाम में, नाबालिग के यौवन प्राप्त कर लेने के पश्चात विवाह को मुस्लिम पर्सनल लॉ, के तहत वैध माना जाता है।
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत क्रमशः महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह के लिए सहमति की न्यूनतम आयु के रूप में 18 और 21 वर्ष निर्धारित की गयी है।

इस कानून पर पुनर्विचार की आवश्यकता

महिलाओं में प्रारंभिक गर्भावस्था के जोखिमों को कम करने तथा लैंगिक-तटस्थता लाने हेतु महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाने के पक्ष में कई तर्क दिए जाते रहे हैं।

  • प्रारंभिक गर्भावस्था का संबंध बाल मृत्यु दर में वृद्धि से होता है तथा यह माँ के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
  • विवाह के लिए न्यूनतम आयु की अनिवार्यता तथा नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाने को अपराध घोषित किये जाने के बाद भी, देश में बाल विवाह का काफी प्रचलन है।
  • इसके अलावा, एक अध्ययन के अनुसार, किशोर माताओं (10-19 वर्ष) से जन्म लेने वाले बच्चों में युवा-वयस्क माताओं (20-24 वर्ष) से पैदा होने वाले बच्चों की तुलना में 5 प्रतिशत तक कद में बौने रह जाने की संभावना होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जया जेटली समिति का गठन किस उद्देश्य के लिए किया गया था?
  2. भारत में पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानूनी प्रावधान
  3. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रमुख प्रावधान
  4. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का अवलोकन

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु सीमा में वृद्धि की जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन


(National Digital Health Mission)

संदर्भ:

स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का आरंभ किया गया है, इस मिशन के अंतर्गत प्रत्येक भारतीय को राष्ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य पहचान पत्र प्रदान किये जाएंगे।

इस योजना को प्रारंभिक तौर पर चंडीगढ़, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप, केंद्र शासित प्रदेशों में आरंभ किया जाएगा।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन क्या है?

यह एक डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक को एक यूनिक स्‍वास्‍थ्‍य पहचान पत्र दिया जायेगा जिसमे व्यक्ति के सभी डॉक्टरों के साथ-साथ नैदानिक परीक्षण और निर्धारित दवाओं का अंकीकृत स्वास्थ्य रिकॉर्ड (Digitised Health Records) सम्मिलित होगा।

  • इस मिशन का उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सेवाओं में दक्षता और पारदर्शिता लाना है।
  • यह नई योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत शुरू की जायेगी।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • इस योजना के छह प्रमुख घटक हैं – स्‍वास्‍थ्‍य पहचान पत्र (HealthID), डिजीडॉक्टर (DigiDoctor), स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड, ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन।
  • देश में इस मिशन के डिजाइन, निर्माण, तथा कार्यान्वयन का दायित्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) को सौंपा गया है।
  • मिशन के मुख्य घटकों, हेल्थ आईडी, डिजीडॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री को भारत सरकार के स्वामित्व में रखा जाएगा तथा इनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी भारत सरकार की होगी।
  • निजी साझेदारों को बाजार के लिए अपने उत्पादों का निर्माण करने व समन्वय करने के लिए समान अवसर दिया जाएगा। हालांकि, मुख्य गतिविधियों तथा सत्यापन प्रक्रिया का अधिकार केवल सरकार के पास रहेगा।
  • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत, प्रत्येक भारतीय को एक हेल्थ आईडी कार्ड दिया जाएगा जो हेल्थ अकाउंट के रूप में कार्य करेगा जिसमें व्यक्ति की पिछली चिकित्सा स्थितियों, उपचार और निदान के बारे में भी जानकारी सम्मिलित होंगी।

मिशन की आवश्यकता

इस मिशन का उद्देश्य नागरिकों के लिए सही डॉक्टरों को खोजने, मुलाकात के समय, परामर्श शुल्क का भुगतान करने, चिकत्सीय नुख्सों के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाना है। इसके साथ ही यह लोगों के लिए सर्वोत्तम संभव स्वास्थ्य सुविधायें प्राप्त करने के लिए एक सुविज्ञ निर्णय लेने में सक्षम बनायेगा।

पृष्ठभूमि:

इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन को नीति आयोग  द्वारा वर्ष 2018 में प्रस्तावित किया गया था। इसके तहत व्यक्ति की सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को एक जगह पर रखा जाएगा।

केंद्रीकृत स्वास्थ्य रिकॉर्ड प्रणाली संबंधित वैश्विक उदाहरण

वर्ष 2005 में, यूनाइटेड किंगडम द्वारा इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड सिस्टम सहित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (National Health Service– NHS) की शुरुआत की गयी, जिसका उद्देश्य वर्ष 2010 तक सभी रोगियों के लिए एक केंद्रीकृत इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार करना था। इस प्रणाली के तहत विभिन्न अस्पतालों को रोगियों का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तो उपलब्ध कराया जाता था, किंतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा सूचना का आदान प्रदान नहीं किया जाता था।

इस कार्यक्रम की लागत लगभग 12 बिलियन पाउंड से अधिक थी, जो यूनाइटेड किंगडम के राजकोष पर भारित थी। अत्याधिक महंगे होने के कारण इस कार्यक्रम को अंततः समाप्त कर दिया गया था, तथा इसे सबसे महंगी हेल्थकेयर आईटी विफलताओं में से एक माना जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन का अवलोकन
  2. मिशन के घटक
  3. प्रस्तावित राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहचान पत्र
  4. स्वास्थ्य पहचान पत्र कौन जारी कर सकता है?
  5. राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 की प्रमुख बिंदु।

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

तीस्ता नदी जल विवाद


(Teesta river dispute)

संदर्भ:

भारत और बांग्लादेश के मध्य तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। दोनों देशों के मध्य मौजूदा तनाव को बढ़ाते हुए, बांग्लादेश, तीस्ता नदी परियोजना के व्यापक प्रबंधन तथा नवीनीकरण के लिए चीन से लगभग 1 अरब डॉलर के ऋण हेतु वार्ता कर रहा है।

भारत की चिंता का कारण

हाल ही में भारत की चीन के साथ लद्दाख में मुठभेड़ हुई है, और ऐसे समय में चीन द्वारा बांग्लादेश को भारी मात्रा में ऋण प्रदान करने संबधी वार्ताएं भारत के लिए चिंता का विषय है।

बांग्लादेश-चीन संबंधो का विकास

  • चीन बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है तथा आयात का सबसे बड़ा स्रोत है।
  • हाल ही में, चीन द्वारा बांग्लादेश से होने वाले 97% आयात शुल्क ‘शून्य’ घोषित किया गया है। बांग्लादेश के लिए यह छूट, चीन की अल्प विकसित देशों के लिए ‘आयात शुल्क मुक्त’, कोटा मुक्त कार्यक्रम के तहत दी जा रही है।
  • चीन, बांग्लादेश में सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता देश है।

तीस्ता नदी के बारे में:

  • तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश से होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। ब्रह्मपुत्र नदी को बांग्लादेश में ‘जमुना’ के नाम से जाना जाता है।
  • इसका उद्गम हिमालय में सिक्किम के निकट चुन्थांग (Chunthang) नामक स्थान से होता है, तथा यह बांग्लादेश में प्रवेश करने से पहले असम तथा पश्चिम बंगाल से होकर बहती है।
  • तीस्ता बैराज बांध ऊपरी पद्मा तथा जमुना के मध्य मैदानों के लिए सिंचाई हेतु जल प्रदान करता है।

विवाद सुलझाने के प्रयास

तीस्ता नदी जल बटवारे को लेकर भारत-बंगलादेश के मध्य वर्ष 1983 से वार्ता जारी है।

  • दोनों देशों के मध्य वर्ष 2011 में 15 वर्षो के लिए एक अंतरिम समझौता किया गया था, जिसके तहत तीस्ता नदी के पानी का 42.5 प्रतिशत भारत द्वारा तथा 37.5 प्रतिशत बांग्लादेश के द्वारा उपयोग किया जाना निर्धारित किया गया था।
  • बंगाल ने इस समझौते का विरोध किया तथा इस पर हस्ताक्षर करने से माना कर दिया। इस प्रकार यह समझौता कभी लागू नहीं हो पाया।
  • बांग्लादेश, भारत से गंगा जल संधि 1996 की तर्ज पर तीस्ता जल के उचित और समान वितरण करने की माँग कर रहा है।
  • इस संधि के अंतर्गत फरक्का बैराज के सतही पानी का दोनो देशों की सीमा के नजदीकी क्षेत्रों में उपयोग किये जाने संबधी समझौता किया गया है।
  • वर्ष 2015 में भारतीय प्रधान मंत्री की ढाका यात्रा से इस विवाद के सुलझने की उम्मीदें बढी थी, किंतु अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।
  • भारत में, राज्यों को सीमा-पार समझौतों पर महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं, जिससे नीति निर्धारण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होती है।
  • पश्चिम बंगाल, तीस्ता समझौते के प्रमुख हितधारकों में से एक है और इसके द्वारा इस समझौते पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किये गए है।

तीस्ता नदी का महत्व:

बांग्लादेश के लिए:

बांग्लादेश के कुल फसली क्षेत्र का लगभग 14% तीस्ता नदी के अपवाह क्षेत्र के अंतर्गत आता है तथा इसकी लगभग 73% आबादी को प्रत्यक्ष रूप से आजीविका के अवसर प्रदान करता है।

पश्चिम बंगाल के लिए:

तीस्ता नदी को उत्तरी बंगाल की जीवन रेखा माना जाता है तथा पश्चिम बंगाल के लगभग आधा दर्जन जिले तीस्ता नदी के पानी पर निर्भर हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तीस्ता नदी- उद्गम, सहायक नदियाँ और राज्य जिनसे होकर यह प्रवाहित होती है।
  2. फरक्का बैराज कहां है?
  3. गंगा जल संधि 1996 के बारे में
  4. भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली नदियाँ
  5. ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियाँ

मेंस लिंक:

तीस्ता नदी के भूगोल और भारत और बांग्लादेश के बीच इसके पानी के बंटवारे के कारणों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

meghalaya

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया


संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National Company Law Tribunal– NCLT) द्वारा अनिल अंबानी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया गया है। अनिल अंबानी पर  भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के 1,200 करोड़ रुपये बकाया हैं, इस ऋण राशि को उनकी दो कम्पनियाँ चुकाने में विफल रही हैं।

अनिल अंबानी ने अगस्त 2016 में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इंफ्राटेल को दिये गये ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

व्यक्तिगत दिवालियापन (Personal insolvency):

  • यह किसी प्रमुख व्यापारिक समूह के मुखिया के दिवालिया होने से संबंधित पहला मामला है, अतः काफी महत्वपूर्ण है।
  • व्यक्तिगत दिवालियापन कार्यवाही संबंधी नियमों को पिछले साल दिसंबर में अधिसूचित किया गया था।

व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही

  • मामले में NCLT द्वारा अंतरिम समाधान पेशेवर (Interim Resolution Professional IRP) की नियुक्ति की अनुमति देने ले पश्चात भारतीय स्टेट बैंक अंबानी द्वारा व्यक्तिगत गारंटी के रूप में प्रदान की गई परिसंपत्तियों की सूची के साथ अंतरिम समाधान पेशेवर (IRP) से संपर्क करेगी।
  • बैंकों द्वारा निजी गारंटी पर ऋण प्रदान करने के मामले में, गारंटी देने वाले को ऋण राशि की समान कीमत वाली परिसंपत्तियों की सूची प्रस्तुत करनी होती है।
  • ऋण चुकाने में विफल रहने पर गारंटी में दी जाने वाली परिसंपत्तियों से ऋण की वसूली की जा सकती है।

दिवाला कार्यवाही पूरी होने के पश्चात अनिल अंबानी पर स्थिति

  • कॉरपोरेट दिवाला प्रक्रियाओं की तरह, एक व्यापारी व्यक्तिगत दिवालापन कार्यवाही पूरी होने के बाद पुनः नए सिरे से कोई भी व्यापार करने के लिए स्वतंत्र है।
  • ऋणदाता केवल संपार्श्विक जमा (collateral deposited) अथवा उस व्यक्ति से संबंधित व्यक्तिगत संपत्ति से अपना बकाया वसूल कर सकते हैं।
  • हालांकि, ऋण मंजूरी के समय प्रदान की गई गारंटी सूची में उल्लिखित किसी भी या सभी परिसंपत्तियों को, भले ही इन्हें किसी और को हस्तांतरित कर दिया गया हो, संलग्न किया जा सकता है और बेचा जा सकता है।
  • अंबानी अन्य व्यवसायों को, जो दिवालिया घोषित नहीं है, चलाने के लिए स्वतंत्र होंगे, वह उन व्यवसायों को भी चला सकते है, जो समय पर अपने ऋण और दायित्वों को पूरा करने में सक्षम हैं।

दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के विवरण के लिए 8 जून का समसमायिकी  देखें।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दिवाला और दिवालियापन क्या है?
  2. IBC कोड के तहत स्थापित विभिन्न संस्थाएं
  3. राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT)- संरचना तथा कार्य
  4. ऋण वसूली न्यायाधिकरण क्या हैं?
  5. IBC की धारा 7, 9 और 10

मेंस लिंक:

दिवाला प्रक्रिया कार्यवाहीयों के निलंबन से कोविड-19 के प्रकोप से प्रभावित कंपनियों को किस प्रकार सहायता मिलेगी। चर्चा कीजिए

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013


(National Food Security Act)

संदर्भ:

हाल ही में, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security ActNFSA) 2013 के अंतर्गत सभी पात्र दिव्यांगों को शामिल करने के लिए राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किए गए हैं।

विभाग ने सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी कि सभी दिव्यांग व्यक्तियों को  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम तथा प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अपने हक का खाद्यान्न कोटा प्राप्त होना चाहिए।

संबंधित प्रावधान:

  • इस अधिनियम की धारा 38 में कहा गया है कि केंद्र सरकार को इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समय-समय पर राज्य सरकारों को निर्देश देना चाहिए।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 10 के अंतर्गत अंत्योदय अन्न योजना के तहत लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार व्यक्तियों को सम्मिलित किये जाने तथा शेष परिवारों को संबंधित राज्य सरकार द्वारा निर्दिष्ट किये जाने के अनुसार प्राथमिकता-प्राप्त परिवारों को सम्मिलित किये जाने का प्रावधान किया गया है।
  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए ‘विकलांगता’ को भी एक मानदंड के रूप में सम्मिलित किया गया है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013:

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) 2013 का उद्देश्य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें मानव जीवन-चक्र दृष्‍टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है।

प्रमुख विशेषताऐं:

  1. लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Targeted Public Distribution SystemTPDS) के अंतर्गत कवरेज और पात्रता: TPDS के अंतर्गत 5 किलोग्राम प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह के एक-समान अधिकार सहित 75% ग्रामीण आबादी और 50% शहरी आबादी को कवर किया जाएगा। चूंकि, अंत्‍योदय अन्‍न योजना (AAY) में निर्धनतम परिवार सम्मिलित होते हैं और इस योजना के तहत इन परिवारों को वर्तमान में 35 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति परिवार प्रति माह प्रदान किया जाता है, अत: मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना में सम्मिलित परिवारों को, निर्धारित खाद्यान्‍न को दिया जाना जारी रखा जायेगा।
  2. टीपीडीएस के अंतर्गत छूट प्राप्त मूल्‍य और उनमें संशोधन: इस अधिनियम के लागू होने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि के लिए टीपीडीएस के अंतर्गत खाद्यान्‍न अर्थात् चावल, गेहूं और मोटा अनाज क्रमश: 3/2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के छूट प्राप्त मूल्‍य पर उपलब्‍ध कराया जाएगा।
  3. परिवारों की पहचान: टीपीडीएस के अंतर्गत प्रत्‍येक राज्‍य के लिए निर्धारित कवरेज के दायरे में पात्र परिवारों की पहचान संबंधी कार्य राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा किया जायेगा।
  4. महिलाओं और बच्‍चों को पोषण सहायता: गर्भवती महिलाएं और स्‍तनपान कराने वाली माताएं तथा 6 माह से लेकर 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्‍चे एकीकृत बाल विकास सेवाओं और मध्‍याह्न भोजन योजनाओं के अंतर्गत निर्धारित पोषण मानदण्‍डों के अनुसार भोजन के पात्र होंगे। 6 वर्ष की आयु तक के कुपोषित बच्‍चों के लिए उच्‍च स्‍तर के पोषण संबंधी मानदण्‍ड निर्धारित किए गए हैं।
  5. मातृत्‍व लाभ: गर्भवती महिलाएं और स्‍तनपान कराने वाली माताएं मातृत्‍व लाभ प्राप्‍त करने की भी हकदार होंगी, जो 6000 रूपए से कम नहीं होगा ।
  6. महिला सशक्‍तिकरण: राशन कार्ड जारी करने के प्रयोजनार्थ परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे बड़ी महिला को परिवार की मुखिया माना जाएगा।
  7. शिकायत निवारण तंत्र: जिला और राज्‍य स्‍तरों पर शिकायत निवारण तंत्र। राज्‍यों को मौजूदा तंत्र का उपयोग करने अथवा अपना अलग तंत्र गठित करने की छूट होगी ।
  8. खाद्यान्‍नों की राज्‍यों के भीतर ढुलाई तथा रख-रखाव संबंधी लागत और उचित दर दुकान डीलरों का लाभ: केंद्रीय सरकार राज्‍यों के भीतर खाद्यान्‍नों की ढुलाई, रख-रखाव और उचित दर दुकान के मालिकों के लाभ पर किए गए व्यय को पूरा करने के लिए, इस प्रयोजनार्थ बनाए जाने वाले मानदण्‍डों के अनुसार राज्‍यों को सहायता उपलब्‍ध कराएगी।
  9. पारदर्शिता और जवाबदेही: पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्‍चित करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित रिकार्डों को सार्वजनिक करने, सामाजिक लेखा परीक्षा करने और सतर्कता समितियों का गठन करने का प्रावधान किया गया है।
  10. खाद्य सुरक्षा भत्ता: हकदारी के खाद्यान्‍न अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं होने की स्‍थिति में पात्र लाभार्थियों के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ते का प्रावधान।
  11. दण्‍ड: जिला शिकायत निवारण अधिकारी द्वारा संस्‍तुत राहत का अनुपालन न करने के मामले में राज्‍य खाद्य आयोग द्वारा सरकारी कर्मचारी या प्राधिकारी पर दण्‍ड लगाए जाने का प्रावधान।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. टीपीडीएस के बारे में
  2. योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ता किसे मिलता है?
  3. अधिनियम के तहत दंड के प्रावधान
  4. मातृत्व लाभ संबंधित प्रावधान
  5. एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) योजना का अवलोकन
  6. मध्याह्न भोजन योजना का अवलोकन

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारतीय मानक ब्यूरो के ‘पेयजल आपूर्ति’ मानक


(BIS’ draft standard for drinking water supply)

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards– BIS) द्वारा ‘पाइप के माध्यम से पेयजल आपूर्ति प्रणाली के लिए मानक’ मसौदा तैयार किया गया है। इसका शीर्षक है: ‘पेयजल आपूर्ति गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली – पाइप द्वारा पेयजल आपूर्ति सेवा के लिए आवश्यकताएं’।

इस मसौदे को बीआईएस की सार्वजनिक पेयजल आपूर्ति सेवा अनुभागीय समिति द्वारा तैयार किया गया है।

मसौदे के प्रमुख बिंदु:

  1. इसमें अपरिष्कृत जल स्रोतों से परिवारों के नलों तक जल आपूर्ति प्रक्रिया हेतु रूपरेखा तैयार की गयी है।
  2. इसमें, जल आपूर्तिकर्ता तथा जल उपयोज्यता के लिए पाइप पेयजल आपूर्ति सेवा के निर्माण, संचालन, रखरखाव और सुधार हेतु आवश्यकताओं को दर्शाया गया है।
  3. इसमें कहा गया है कि, जल परिष्करण प्रक्रिया की योजना इस प्रकार से निर्मित की जाए कि परिष्करण के बाद पीने का पानी बीआईएस द्वारा विकसित भारतीय मानक (आईएस) 10500 के अनुरूप होना चाहिए।
  4. इसमें, जल उपयोज्यता के शीर्ष प्रबंधन हेतु, जवाबदेही तथा उपभोक्ता हितों के संदर्भ में, उनकी सेवा गुणवत्ता नीति बनाने, आपूर्ति किये जाने वाले पानी की गुणवत्ता निगरानी करने तथा जल ऑडिट कराने संबधी, दिशा निर्देश सम्मिलित किये गए है।
  5. इसमें कहा गया है कि जहां भी संभव हो, जिला पैमाइश क्षेत्र (district metering areaDMA) की अवधारणा को अपनाया जाना चाहिए। DMA जल नेटवर्क में रिसाव को नियंत्रित करने हेतु एक अवधारणा होती है। जिसमे जल आपूर्ति क्षेत्र को अनिवार्य रूप से कई क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है, जिसे DMA कहा जाता है। इन क्षेत्रों में रिसाव पता लगाने के लिए बहाव मीटर लगाये किए जाते हैं।
  6. इसमें, गुणवत्ता मानकों की जांच के लिए प्रत्येक चार घंटे में जल-शोधन संयंत्र में पानी का नमूना लिया जाने का उल्लेख किया गया है। वितरण प्रणाली में, पानी के जलाशयों में प्रति आठ घंटे में पानी का नमूना लिया जाना चाहिए।

ड्राफ्ट का महत्व और आवश्यकता:

भारतीय मानक ब्यूरो के ‘पेयजल आपूर्ति’ मानक, पाइप जलापूर्ति की प्रक्रिया को एक समान बनाने के लिए बहुत आवश्यक है। देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में, जहाँ जल आपूर्ति तंत्र विभिन्न सरकारी आदेशों तथा परिपत्रों द्वारा नियमित होता है, सुनिश्चित ‘पेयजल आपूर्ति’ करने के लिए यह मानक अति महत्वपूर्ण है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


जनसंख्या और विकास पर भारतीय संसदीय संगठन (IAPPD)

  • जनसंख्या और विकास पर भारतीय संसदीय संगठन (Indian Association of Parliamentariants on Population and DevelopmentIAPPD),वर्ष 1978 में स्थापित एक राष्ट्रीय स्तर का गैर-सरकारी संगठन है।
  • विकास की धारा को सुचारू रूप से जारी रखने हेतु जनसंख्या वृद्धि की गति को नियंत्रित करने के लिए इस संगठन का गठन किया गया था।

नुआखाई जुहार (Nuakhai Juhar)

नुआखाई जुहार कृषि त्यौहार है जिसे नुआखाई परब या नुकाही भेटघाट भी कहा जाता है।

  • नुआखाई दो शब्दों का एक संयोजन है जो नए चावल को खाने का प्रतीक है क्योंकि ‘नुआ’ का अर्थ है नया और ‘खई’ का अर्थ है खाना।
  • इस दिन, लोग अन्न की पूजा करते हैं और विशेष भोजन तैयार करते हैं। ओडिशा के संबलपुर जिले की प्रसिद्ध ‘देवी’ देवी समलेश्वरी को किसान अपनी ज़मीन से पहली उपज देते हैं।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद

हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन किया गया है।

संरचना: राष्ट्रीय परिषद के अध्यक्ष सामाजिक न्याय मंत्री होंगे तथा इसमें दस केंद्रीय विभागों, पांच राज्यों तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रतिनिधि सदस्यों के रूप में सम्मिलित होंगे।

यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए भारत की पहली परिषद् है तथा इसका गठन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत किया गया है।

परिषद के पांच मुख्य कार्य हैं – केंद्र सरकार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के संबंध में नीतियों, कार्यक्रमों, कानून और परियोजनाओं के निर्माण पर सलाह देना; ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की समानता और पूर्ण भागीदारी प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन की गई नीतियों और कार्यक्रमों के प्रभाव की निगरानी और मूल्यांकन; सभी विभागों की गतिविधियों की समीक्षा और समन्वय करना; ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की शिकायतों का निवारण; और केंद्र द्वारा निर्धारित ऐसे अन्य कार्य करना।

फ्लेवोनॉइड (flavonoids)

फ्लेवोनोइड्स फाइटोन्यूट्रिएंट्स का एक समूह होता है जो लगभग सभी सब्जियों और फलों में मौजूद होता है।

  • वे कैरोटीनॉयड के साथ, फलों और सब्जियों के विविध रंगों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • फ्लेवोनॉइड्स से भरपूर आहार हमें दिल, जिगर, गुर्दा, मस्तिष्क से संबंधित और अन्य संक्रामक रोगों से बचाता है।
  • चूंकि फ्लेवोनॉइड्स रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं इसलिए फ्लेवोनॉइड-समृद्ध आहार का सुझाव दिया जाता है।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान अघारकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पुणे के वैज्ञानिकों ने तपेदिक और चिकनगुनिया के उपचार से संबंधित फ्लेवोनॉइड अणुओं के निर्माण के लिए पहला सिंथेटिक मार्ग खोजा है।
  • कोविड-19 की संभावित उपचार प्रतिक्रिया के संबंध में इसमें प्रारंभिक संकेत देखे गए हैं।

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