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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकेतक (STI), 2018

2. स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट, 2020

 

सामान्य अध्ययन-II

1. संसदीय स्थायी समितियाँ

2. भारत में सीरो सर्वे परिणामों के निहितार्थ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति: 2020-2025

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. नमथ बसई (Namath Basai)

2. ट्राइफूड परियोजना

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकेतक (STI), 2018


(Science and Technology Indicators)

संदर्भ:

विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकेतक (Science and Technology Indicators- STI), 2018 भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की स्थिति का एक आवधिक संकलन है। इसे हाल ही में जारी किया गया था।

यह रिपोर्ट किसके द्वारा तैयार की जाती है?

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकेतक (STI) को विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली के एक विभाग द्वारा तैयार किया गया है।
  • यह देश भर में स्थित विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत में सरकारी वित्त-पोषित प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों की अपेक्षा निजी क्षेत्र की शोध कंपनियों द्वारा मुख्य अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अधिक महिलाओं को नौकरी दी जाती है।
  • STI 2018 के संकेतक, भारत के विज्ञान क्षेत्र में पुरुषों की बहुलता संबंधी ऐतिहासिक प्रवृत्ति को दोहराते हैं।

रिपोर्ट के अन्य प्रमुख बिंदु

कुल मिलाकर, कई वैज्ञानिक संगठनों की तुलना में निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा महिला वैज्ञानिकों को भर्ती, पदोन्नति और मूल्यांकन प्रक्रियाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्धता दिखाई गयी है।

डॉक्टरेट और पेशेवर चरणों के बीच महिलाओं की संख्या में कमी के निम्नलिखित कारण प्रतीत होते हैं:

  • महिलाओं पर परिवार बनाने के लिए सामाजिक दबाव अधिक होता है, जो कि एक पेशेवर कैरियर के साथ मेल नहीं खाता है।
  • काम पर रखने के दौरान पितृसत्तात्मक रवैया: अधिकाँश महिलाओं को इस स्तर पर भेदभाव किया जाता है। साथ ही संस्थान के प्रशासक स्वयं ही यह निर्णय कर लेते हैं कि महिलाओं के करियर की अपेक्षा परिवार का विकल्प चुनना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विज्ञान और प्रौद्योगिकी संकेतक क्या है?
  2. रिपोर्ट कौन तैयार करता है?
  3. प्रमुख निष्कर्ष

मेंस लिंक:

भारत में सरकारी वित्त-पोषित प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों की अपेक्षा निजी क्षेत्र की शोध कंपनियों द्वारा मुख्य अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अधिक महिलाओं को रोजगार देती प्रतीत होती हैं। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट 2020


संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 की रिपोर्ट जारी की गई है।

  • स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में 4,242 शहरों, 62 छावनी बोर्ड तथा 92 गंगा- शहरों को सम्मिलित किया गया है। यह सर्वेक्षण 28 दिनों में पूरा किया गया।
  • इस वर्ष मंत्रालय द्वारा नगरों की समग्र रैंकिंग के स्थान पर, शहरों के जनसंख्या वर्गीकरण के आधार पर रैंकिंग जारी की गयी है

विभिन्न शहरों का प्रदर्शन

  1. शीर्ष 3 सबसे स्वच्छ शहर (1 लाख से अधिक जनसंख्या): इंदौर, सूरत और नवी मुंबई (इंदौर ने लगातार चौथे वर्ष अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा)।
  2. 100 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों (Urban Local Bodies- ULB) श्रेणी में छत्तीसगढ़ ने भारत के सबसे स्वच्छ राज्य का प्रतिष्ठित खिताब जीता है।
  3. अहमदाबाद भारत का सबसे स्वच्छ मेगा शहर है।
  4. नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) सबसे स्वच्छ राजधानी नगर है।
  5. छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर सबसे साफ सुथरा सबसे छोटा शहर है
  6. बेंगलुरु को मेगा सिटी श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ आत्मनिर्भर पुरस्कार जीता।
  7. झारखंड को 100 से कम शहरी स्थानीय निकायों (ULB) श्रेणी में भारत का सबसे स्वच्छ राज्य घोषित किया गया है।
  8. सर्वाधिक स्वच्छ छावनी नगर: जालंधर कैंट, पंजाब।
  9. गंगा नदी के किनारे सबसे स्वच्छ शहर: वाराणसी।
  10. एक लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में, महाराष्ट्र के कराड़ को सर्वाधिक स्वच्छ शहर घोषित किया गया है।
  11. शहर के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने में अधिकतम नागरिक भागीदारी – शाहजहाँपुर।
  12. 40 लाख से अधिक जनसंख्या के साथ सबसे स्वच्छ मेगासिटी – अहमदाबाद (गुजरात)।
  13. स्वच्छता के मामले में सबसे तेज चलने वाला शहर – जोधपुर (राजस्थान)।
  14. स्वच्छता के मामले में आत्म- संधारणीय शहर (10 लाख से अधिक जनसंख्या) – राजकोट (गुजरात)।
  15. स्वच्छता के मामले में आत्म- संधारणीय शहर (10 लाख से कम जनसंख्या) – मैसूर (कर्नाटक)।

स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?

  • स्वच्छ सर्वेक्षण का आरंभ प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा जनवरी 2016 में किया गया था। सर्वेक्षण के प्रथम संस्करण में मैसूर को भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया था।
  • स्वच्छ सर्वेक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती पर शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के प्रदर्शन की निगरानी करना है।
  • इसका लक्ष्य भारत का सर्वाधिक स्वच्छ शहर बनने की दिशा में शहरों के मध्य स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न करना है

स्वच्छ सर्वेक्षण किसके द्वारा किया जाता है?

  • भारतीय गुणवत्ता परिषद् (Quality Council of IndiaQCI) को सर्वेक्षण में भाग लेने वाले शहरों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने का दायित्व दिया गया है।
  • यह एक स्वायत्त प्रमाणन संस्था है जिसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 1997 में प्रशासन सहित सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता आश्वासन प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वच्छ सर्वेक्षण क्या है?
  2. पहला सर्वेक्षण कब किया गया था?
  3. नवीनतम सर्वेक्षण में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले
  4. स्वच्छ भारत अभियान के बारे में
  5. भारतीय गुणवत्ता परिषद् के बारे में

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

संसदीय स्थायी समितियाँ


(Parliamentary Standing Committees)

संदर्भ:

हाल ही में, सोशल मीडिया में फेसबुक पर भाजपा के कुछ राजनेताओं की टिप्पणियों तथा लेखों पर ‘हेट-स्पीच’ संबंधी नियमों को लागू नहीं करने का दावा किया गया है। इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति ने 2 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के कथित दुरुपयोग के मुद्दे पर जबाव-तलब करने हेतु फेसबुक को बुलाया है।

संसदीय समितियाँ क्या होती हैं?

लोकसभा वेबसाइट के अनुसार, संसदीय समिति से तात्‍पर्य उस समिति से है, जो सभा द्वारा नियुक्‍त या निर्वाचित की जाती है अथवा अध्‍यक्ष द्वारा नाम-निर्देशित की जाती है तथा अध्‍यक्ष के निदेशानुसार कार्य करती है एवं अपना प्रतिवेदन सभा को या अध्‍यक्ष को प्रस्‍तुत करती है।

संसदीय समितियों के प्रकार

  1. स्थायी समितियाँ (Standing Committees): ये समितियां अनवरत प्रकृति की होती हैं अर्थात् इनका कार्य प्रायः निरंतर चलता रहता है। इस प्रकार की समितियों को वार्षिक आधार पर पुनर्गठित किया जाता है।
  • इन्हें वित्तीय समितियों और विभागों से संबद्ध स्‍थायी समितियों (Departmentally-Related Standing Committees- DRSCs) में विभाजित किया जाता है।
  • वित्तीय समितियों को विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है, तथा यह तीन प्रकार की होती हैं:  लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति एवं सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति।
  1. तदर्थ समितियां (Select Committees): तदर्थ समितियां किसी विशिष्‍ट प्रयोजन के लिए नियुक्‍त की जाती हैं और जब वे अपना काम समाप्‍त कर लेती हैं तथा अपना प्रतिवेदन प्रस्‍तुत कर देती हैं, तब उनका अस्‍तित्‍व समाप्‍त हो जाता है।

विभागों से संबद्ध स्‍थायी समितियों (DRSCs) की संरचना

विभागों से संबद्ध स्‍थायी समितियों की संख्‍या 24 है जिनके क्षेत्राधिकार में भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग आते हैं।

  • 13 वीं लोकसभा तक प्रत्येक DRSC में 45 सदस्य होते थे – जिनमे से 30 सदस्यों को लोकसभा से तथा 15 सदस्यों को राज्यसभा से नाम-निर्दिष्‍ट किया जाता था।
  • जुलाई 2004 में विभागों से संबद्ध स्‍थायी समितियों के पुनर्गठन के पश्चात, इनमें से प्रत्‍येक समिति में 31 सदस्‍य होते हैं – 21 लोक सभा से तथा 10 राज्‍य सभा से जिन्‍हें क्रमश: लोक सभा के अध्‍यक्ष तथा राज्‍य सभा के सभापति द्वारा नाम-निर्दिष्‍ट किया जाता है।
  • इन समितियों को एक वर्ष की अधिकतम अवधि के लिए गठित किया जाता है और समितियों के पुनर्गठन में प्रतिवर्ष सभी दलों के सदस्यों को सम्मिलित किया जाता है।

वित्तीय समितियों की संरचना:

  • प्राक्कलन समिति में सदस्यों की संख्या 30 होती है तथा सभी सदस्य लोकसभा से नामित किये जाते हैं।
  • लोक लेखा समिति और सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति, दोनों में 22 सदस्य होते हैं – जिनमे से 15 सदस्य लोकसभा से तथा 7 सदस्य राज्यसभा से नामित किये जाते हैं।

शक्तियों का स्रोत

संसदीय समितियां, अनुच्छेद 105 (संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों पर) तथा अनुच्छेद 118 (संसदीय प्रक्रिया तथा कार्यवाही के संचालन के लिए नियम बनाने हेतु संसद की शक्ति) से अपनी शक्तियां प्राप्त करती हैं।

महत्व:

संसदीय समितियों की रिपोर्टें आमतौर पर विस्तृत होती हैं तथा शासन से संबंधित मामलों पर प्रामाणिक जानकारी प्रदान करती हैं। समितियों को संदर्भित विधेयक महत्वपूर्ण सुझावों के साथ सदन को वापस किये जाते हैं। हालांकि, संसद, इन समितियों की सिफारिशों से बाध्य नहीं होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय समिति तथा मंत्रिमंडलीय समिति के मध्य अंतर।
  2. स्थायी बनाम तदर्थ बनाम वितीय समितियां
  3. इन समितियों के अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
  4. मात्र लोकसभा सदस्यों से गठित की जाने वाली समितियां
  5. सदन के अध्यक्ष द्वारा अध्यक्षता की जाने वाली समितियां

मेंस लिंक:

संसदीय स्थायी समितियाँ क्या होती हैं? इनकी क्या आवश्यकता है? संसदीय स्थायी समितियों के महत्व को स्पष्ट करते हुए उनकी भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत में सीरो सर्वे परिणामों के निहितार्थ


(What the serosurvey results in India imply?)

संदर्भ:

पिछले दो महीनों के दौरान दिल्ली, बैंगलोर, मुंबई और पुणे सहित देश के विभिन्न शहरों में सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण किये गए है।

इन सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण के परिणाम से पता चलता है कि, Covid-19 का संक्रमण, वायरस परीक्षण में दिखाए गए परिणामों से कहीं ज्यादा व्यापक है।

मुख्य निष्कर्ष:

  • पुणे में सर्वेक्षण के दौरान जिन लोगों का परीक्षण किया गया उनमें से 51% से अधिक व्यक्तियों में नोवेल कोरोनोवायरस का प्रतिरोध करने वाली विशिष्ट एंटीबॉडीज पायी गयीं। इससे यह संकेत मिलता है कि, 4 मिलियन की आबादी वाले इस शहर में लगभग आधी आबादी पहले से ही संक्रमित हो सकती है।
  • दिल्ली में कुछ समय पूर्व किये गए सीरोलॉजिकल सर्वे के परिणामों के अनुसार, कोरोनोवायरस का वास्तविक प्रसार, अभिपुष्टि पुष्टि किए गए मामलों की संख्या से 40 गुना अधिक हो सकता है।
  • दिल्ली में ही किये गए दूसरे सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली की कुल आबादी के 29% में Covid-19 का प्रतिरोध करने वाली विशिष्ट एंटीबॉडीज उपस्थित हैं।
  • मुंबई में, सर्वेक्षण हेतु लिए गए सैंपल समूह में से लगभग 40 प्रतिशत व्यक्ति संक्रमित पाए गए।

इन निष्कर्षों का तात्पर्य

  • स्पर्शोन्मुख मामलों की अधिकता: सर्वेक्षण के परिणामों से इस सामान्य अवधारण की पुष्टि होती है कि, SARS-CoV2 संक्रमण स्पर्शोन्मुख (Asymptomatic) होता है (कुछ अनुमानों के अनुसार लगभग नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण 80 प्रतिशत तक स्पर्शोन्मुख हैं)। निःसंदेह, यह वायरस स्पर्शोन्मुखी संक्रमित व्यक्तियों के माध्यम से भी फ़ैल सकता है, खासकर परिवारों के भीतर।
  • अपर्याप्त परीक्षण: मार्च में इस महामारी की शुरुआत में प्रतिदिन सिर्फ कुछ सौ नमूनों की जांच करने की क्षमता से, अब प्रति दिन आठ लाख से अधिक परीक्षण किए जा रहे हैं। यह परीक्षण अवसंरचना में व्यापक स्तर की प्रगति को दर्शाता है। और फिर भी, सीरोलॉजिकल परीक्षण बताते हैं कि संक्रमित लोगों की एक बड़ी आबादी, विशेषकर जिन व्यक्तियों में लक्षण नहीं दिख रहे है, अभी भी परीक्षणों से छूटी हुई है।

क्या यह हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) की ओर अग्रसर है?

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि, इन परिणामों को आबादी के इस प्रतिशत को बीमारी के प्रति प्रतिरक्षित (Immune) हो सकने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सीरोलॉजिकल सर्वेक्षणों को मानव में ‘निष्प्रभावी’ अथवा ‘प्रतिरक्षक’ एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है।

  • सभी एंटीबॉडी ‘प्रतिरक्षक’ नहीं होती हैं। केवल ‘निष्प्रभावी’ एंटीबॉडी ही किसी व्यक्ति को रोग के प्रति प्रतिरक्षक बना सकती है।
  • इसके अलावा, वैज्ञानिक अभी तक इस बात का पता नहीं लगा सके हैं कि आबादी में किस स्तर का संक्रमण होने पर ‘हर्ड इम्युनिटी’ अपनी भूमिका निभाना शुरू करती है।

समय की मांग

  • महामारी के प्रसार को रोकने के लिए बनायी गयी रणनीतियों में पर्याप्त परीक्षणों का किया जाना अति महत्वपूर्ण है। यह संक्रमित व्यक्तियों और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करने और उन्हें पृथक करने का एकमात्र तरीका है।
  • जितने अधिक परीक्षण किये जायेंगे, संक्रमित लोगों का पता लगाने की संभावना उतनी ही अधिक होगी, इसके साथ ही स्पर्शोन्मुख व्यक्तियों का पता लगाया जा सकता है। संक्रमित तथा स्पर्शोन्मुखी व्यक्तियों को सही समय पर पृथक कर देने से वायरस के संचरण पर रोक लगायी जा सकती है।
  • अधिक संख्या में परीक्षणों का सीधा संबंध बीमारी के प्रसरण में कमी से होता है।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

सीरो सर्वे क्या है? यह क्या संकेत करता है?

सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण में, व्यक्तियों में वायरस का प्रतिरोध करने वाली विशिष्ट एंटीबाडीज की मौजूदगी का पता लगाकर आबादी में बीमारी की व्यापकता का आकलन किया जाता है।

सीरोलॉजिकल सर्वेक्षण निम्नलिखित तथ्यों का पता लगाने के लिए रक्त के नमूने एकत्र किये जाते हैं:

  1. क्या कोई व्यक्ति उपन्यास कोरोनावायरस से संक्रमित है।
  2. क्या व्यक्ति अतीत में कोरोनावायरस से संक्रमित था।
  3. COVID-19 का मुकाबला करने हेतु निर्मित होने वाली एंटीबॉडी की पहचान करना।

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति: 2020-2025


(National Strategy for Financial Education- NSFE)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति (National Strategy for Financial Education- NSFE) जारी की गयी है, जिसे अगले पांच वर्षों में लागू किया जायेगा।

इस बहु-हितधारक दृष्टिकोण का उद्देश्य वित्तीय रूप से जागरूक और सशक्त भारत का निर्माण करना है।

मूल उद्देश्य

इसके मूल उद्देश्यों में प्रासंगिक और उपयुक्त बीमा कवर के माध्यम से जीवन के विभिन्न चरणों में जोखिम का प्रबंधन करना तथा उपयुक्त पेंशन कवरेज के माध्यम से वृद्धावस्था तथा सेवानिवृत्ति योजना सम्मिलित है।

वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति को किसके द्वारा तैयार किया गया है?

वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति (NSFE) को चार वित्तीय क्षेत्रक नियामकों (भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) तथा पेंशन निधि विनियामक व विकास प्राधिकरण (PFRDA)) तथा अन्य संबंधित हितधारकों के परामर्श से राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (National Centre for Financial Education- NCFE) द्वारा तैयार किया गया है।

वित्तीय शिक्षण हेतु राष्ट्रीय कार्यनीति: 2020-2025 के प्रमुख बिंदु

  • सभी भारतीयों के वित्तीय हितों की प्राप्ति के लिए 5 C दृष्टिकोण– [Content (सामग्री), Capacity (क्षमता), Community (समुदाय), Communication (संचार) और (Collaboration) सहयोग] अपनाना।
  • इसमें स्कूली बच्चों (पाठ्यक्रम और सहशैक्षणिक सहित), शिक्षकों, युवा वयस्कों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांग व्यक्तियों, निरक्षर लोगों आदि के लिए वित्तीय साक्षरता सामग्री प्रदान किये जाने का सुझाव दिया गया है।
  • वित्तीय साक्षरता प्रदान करने की पहल में सम्मिलित हो सकने वाले विभिन्न बिचौलियों की क्षमता का विकास।
  • वित्तीय शिक्षा प्रदाताओं के लिए एक आचार संहिता विकसित करना।
  • वित्तीय साक्षरता के स्थायी रूप से प्रसरण हेतु सामुदायिक नेतृत्व वाले दृष्टिकोण का विकास किया जाना चाहिए।
  • व्यापक / केंद्रित स्तर पर वित्तीय साक्षरता संदेशों को प्रसारित करने के लिए वर्ष में एक विशिष्ट अवधि नियत की जानी चाहिए।
  • कौशल मिशन और बी.एड. / एम.एड कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली पाठ्यक्रम, विभिन्न व्यावसायिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा प्रायोजित) में वित्तीय शिक्षा सामग्री को से एकीकृत करना।
  • कार्यनीति के तहत की गई प्रगति का आकलन करने के लिए एक सशक्त ‘निगरानी और मूल्यांकन रूपरेखा’ अपनायी जानी चाहिए।

महत्व तथा अपेक्षित परिणाम

  • इस कार्यनीति का उद्देश्य ऋण शिक्षण विकसित करना और आवश्यकता के अनुसार औपचारिक वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • इसके साथ ही इसके अंतर्गत वित्तीय लक्ष्यों और उद्देश्यों को पूरा करने के लिए वित्तीय बाजारों में भागीदारी को प्रोत्साहित तथा सुरक्षित और निःशंक तरीके से डिजिटल वित्तीय सेवाओं के उपयोग में सुधार किया जायेगा ।
  • इसमें प्रासंगिक और उपयुक्त बीमा कवर के माध्यम से जीवन के विभिन्न चरणों में जोखिम का प्रबंधन तथा उपयुक्त पेंशन उत्पादों के कवरेज के माध्यम से वृद्धावस्था और सेवानिवृत्ति की योजना प्रदान की जायेगी ।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


नमथ बसई (Namath Basai)

यह केरल सरकार का आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने का अनूठा कार्यक्रम है।

इसे समग्र शिक्षा केरल (SSK) के द्वारा लागू किया गया है।

  • SSK द्वारा विशेष रूप से नमथ बसई के लिए 50 लैपटॉप वितरित किए गए हैं। इसमें यू-ट्यूब चैनल के माध्यम से प्री-रिकॉर्डेड कक्षाएं भी प्रदान की जाती हैं।
  • इस कार्यक्रम ने सैकड़ों आदिवासी बच्चों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा प्रदान कर ऑनलाइन कक्षाओं में नियमित रूप से उपस्थित रखने में सफलता हासिल की है।

ट्राइफूड परियोजना

संदर्भ: हाल में ही, केंद्रीय जनजातीय मामले मंत्री द्वारा महाराष्ट्र के रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में ट्राइफेड की ट्राइफूड परियोजना के तृतीयक प्रसंस्करण केंद्रों का आरंभ किया गया है।

परियोजना का विवरण:

  • ट्राइफूड परियोजना का कार्यान्वयन खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से ट्राइफेड, जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • इस परियोजना का लक्ष्य जनजातीय वन संग्रहकर्ताओं द्वारा संग्रहित एमएफपी के बेहतर उपयोग एवं मूल्य वर्धन के जरिये जनजातीयों की आय को बढ़ाना है।
  • इसे अर्जित करने के लिए, आरंभ में, दो गौण वन ऊपज (MFP) तृतीयक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

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