HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
इनवर्टेड यील्ड वक्र (inverted yield curve) के साथ किसी अर्थव्यवस्था में होता है:
- जब लंबी अवधि के बॉन्ड की तुलना में अल्प अवधि के बॉन्ड पर निवेश किया जाता है तो यह अधिक लाभदायक होता है।
- सरकारी बॉन्ड सदैव कॉर्पोरेट बॉन्ड की तुलना में अधिक लाभ प्रदान करेंगे।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
- यील्ड वक्र (yield curve) एक ग्राफ होता है जो विभिन्न अवधि के लिए उधार पर अर्जित ब्याज दरों के बीच के संबंध को दर्शाता है।
- आम तौर पर, कोई व्यक्ति जो एक वर्ष (एक वर्ष की सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदकर) के लिए सरकार या निगम को उधार देता है, पांच या दस वर्षों के लिए उधार देने वाले व्यक्ति की तुलना में कम ब्याज दर प्राप्त करने की उम्मीद करता है, जिससे यील्ड वक्र ऊपर की और झुका हुआ (upward-sloping) होता है।
- एक इनवर्टेड यील्ड वक्र (inverted yield curve) की स्थिति तब होती है जब लंबी अवधि के बॉन्ड की तुलना में अल्प अवधि के बॉन्ड पर किए गए निवेश पर अधिक लाभ प्राप्त होता है। यह एक असामान्य स्थिति है जो अक्सर एक आसन्न मंदी का संकेत देती है।
- कथन 2: इस पर उधारकर्ता / ऋणदाता का कोई प्रभाव नहीं होता है।
Incorrect
उत्तर: a)
- यील्ड वक्र (yield curve) एक ग्राफ होता है जो विभिन्न अवधि के लिए उधार पर अर्जित ब्याज दरों के बीच के संबंध को दर्शाता है।
- आम तौर पर, कोई व्यक्ति जो एक वर्ष (एक वर्ष की सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदकर) के लिए सरकार या निगम को उधार देता है, पांच या दस वर्षों के लिए उधार देने वाले व्यक्ति की तुलना में कम ब्याज दर प्राप्त करने की उम्मीद करता है, जिससे यील्ड वक्र ऊपर की और झुका हुआ (upward-sloping) होता है।
- एक इनवर्टेड यील्ड वक्र (inverted yield curve) की स्थिति तब होती है जब लंबी अवधि के बॉन्ड की तुलना में अल्प अवधि के बॉन्ड पर किए गए निवेश पर अधिक लाभ प्राप्त होता है। यह एक असामान्य स्थिति है जो अक्सर एक आसन्न मंदी का संकेत देती है।
- कथन 2: इस पर उधारकर्ता / ऋणदाता का कोई प्रभाव नहीं होता है।
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Question 2 of 5
2. Question
बैंकों का राष्ट्रीयकरण भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। यह निम्नलिखित में से किसके साथ संपन्न हुआ:
Correct
उत्तर: d)
- 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत की गई थी।
- सहकारी बैंकों और RRBs के कार्यों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए 1982 में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) का गठन किया गया था।
- अप्रैल 1956 में भारतीय संसद द्वारा औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 (IPR 1956) को अपनाया गया था। यह भारत के औद्योगिक विकास पर पहला व्यापक वक्तव्य था।
Incorrect
उत्तर: d)
- 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण भारतीय बैंकिंग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की स्थापना 1935 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत की गई थी।
- सहकारी बैंकों और RRBs के कार्यों के विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए 1982 में नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) का गठन किया गया था।
- अप्रैल 1956 में भारतीय संसद द्वारा औद्योगिक नीति प्रस्ताव 1956 (IPR 1956) को अपनाया गया था। यह भारत के औद्योगिक विकास पर पहला व्यापक वक्तव्य था।
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Question 3 of 5
3. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCDs) ऋण उपकरण होते हैं जिन्हें कंपनियों द्वारा पूंजी
अपनी आवश्यकताओं के लिए धन जुटाने के लिए निवेशकों को जारी किया जाता है।
- सरकार ने सभी सूचीबद्ध कंपनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को अपने बकाया बॉन्ड के लिए डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व (DRR) का गठन करना अनिवार्य कर दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
- सरकार द्वारा आशंकित बॉन्ड बाजार को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में किए गए उपायों में से एक यह था कि सभी सूचीबद्ध कंपनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को अपने बकाया बॉन्ड के लिए डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व (DRR) का गठन करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
- नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCDs) ऋण उपकरण होते हैं जिन्हें कंपनियों द्वारा पूंजी
- अपनी आवश्यकताओं के लिए धन जुटाने के लिए निवेशकों को जारी किया जाता है।NCDs, नियमित रूप से परिपक्वता अवधि तक एक निश्चित अवधि के लिए निश्चित दर पर ब्याज प्रदान करती हैं। हालांकि, ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां NCDs के माध्यम से ब्याज की उच्च दरों पर धन जुटाने वाली कंपनियां अपना बकाया भुगतान करने में विफल रही हैं। ऐसे मामलों में खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए, कंपनी अधिनियम यह प्रावधान किया गया है कि कंपनियों को एक मोचन रिजर्व (redemption reserve) बनाए रखना चाहिए। कंपनी (शेयर कैपिटल एंड डिबेंचर) नियम 2014 के अनुसार, सभी सूचीबद्ध कंपनियां, NBFC, HFC और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को अपने लाभ में से बकाया डिबेंचर मूल्य का 25 प्रतिशत DRR के रूप में बनाए रखना चाहिए।
- DRR यह सुनिश्चित करता है कि एक कंपनी अपने मौजूदा मुनाफे के एक हिस्से को दीर्घकालिक NCDs के पुनर्भुगतान के लिए निर्धारित करती है।
- गैर-सूचीबद्ध कंपनियों (गैर-सूचीबद्ध एनबीएफसी और एचएफसी को छोड़कर) के लिए DRR {10 प्रतिशत (पूर्व की 25 प्रतिशत के मुकाबले) की निम्न दर पर} बनाए रखना आवश्यकता है।
Incorrect
उत्तर: a)
- सरकार द्वारा आशंकित बॉन्ड बाजार को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में किए गए उपायों में से एक यह था कि सभी सूचीबद्ध कंपनियों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFC) को अपने बकाया बॉन्ड के लिए डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व (DRR) का गठन करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
- नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (NCDs) ऋण उपकरण होते हैं जिन्हें कंपनियों द्वारा पूंजी
- अपनी आवश्यकताओं के लिए धन जुटाने के लिए निवेशकों को जारी किया जाता है।NCDs, नियमित रूप से परिपक्वता अवधि तक एक निश्चित अवधि के लिए निश्चित दर पर ब्याज प्रदान करती हैं। हालांकि, ऐसी घटनाएं हुई हैं जहां NCDs के माध्यम से ब्याज की उच्च दरों पर धन जुटाने वाली कंपनियां अपना बकाया भुगतान करने में विफल रही हैं। ऐसे मामलों में खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए, कंपनी अधिनियम यह प्रावधान किया गया है कि कंपनियों को एक मोचन रिजर्व (redemption reserve) बनाए रखना चाहिए। कंपनी (शेयर कैपिटल एंड डिबेंचर) नियम 2014 के अनुसार, सभी सूचीबद्ध कंपनियां, NBFC, HFC और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों को अपने लाभ में से बकाया डिबेंचर मूल्य का 25 प्रतिशत DRR के रूप में बनाए रखना चाहिए।
- DRR यह सुनिश्चित करता है कि एक कंपनी अपने मौजूदा मुनाफे के एक हिस्से को दीर्घकालिक NCDs के पुनर्भुगतान के लिए निर्धारित करती है।
- गैर-सूचीबद्ध कंपनियों (गैर-सूचीबद्ध एनबीएफसी और एचएफसी को छोड़कर) के लिए DRR {10 प्रतिशत (पूर्व की 25 प्रतिशत के मुकाबले) की निम्न दर पर} बनाए रखना आवश्यकता है।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘समायोजनकारी मौद्रिक नीति (Accommodative monetary policy)’ के बारे में सही है?
Correct
उत्तर: b)
- ‘समायोजनकारी मौद्रिक नीति (Accommodative monetary policy)’, जिसे लूज़ क्रेडिट या इजी मौद्रिक नीति (loose credit or easy monetary policy) के रूप में भी जाना जाता है, तब होती है जब एक केंद्रीय बैंक मंद विकास अवधि (जैसा कि जीडीपी द्वारा मापा जाता है) के दौरान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए समग्र मुद्रा आपूर्ति का विस्तार करने का प्रयास करता है। ये उपाय उधार को निम्न ब्याज दर पर उपलब्ध कराने और अधिक व्यय को प्रोत्साहित करने के लिए हैं।
Incorrect
उत्तर: b)
- ‘समायोजनकारी मौद्रिक नीति (Accommodative monetary policy)’, जिसे लूज़ क्रेडिट या इजी मौद्रिक नीति (loose credit or easy monetary policy) के रूप में भी जाना जाता है, तब होती है जब एक केंद्रीय बैंक मंद विकास अवधि (जैसा कि जीडीपी द्वारा मापा जाता है) के दौरान अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए समग्र मुद्रा आपूर्ति का विस्तार करने का प्रयास करता है। ये उपाय उधार को निम्न ब्याज दर पर उपलब्ध कराने और अधिक व्यय को प्रोत्साहित करने के लिए हैं।
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Question 5 of 5
5. Question
जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में 50 आधार अंकों की कटौती करता है, तो निम्नलिखित में से कौनसे होने की संभावना होती है?
Correct
उत्तर: c)
- रेपो दर में कमी का अर्थ है कि वाणिज्यिक बैंक RBI से सस्ती दर पर अधिक धन उधार ले सकते हैं, जिसका तात्पर्य है कि उपभोक्ताओं के लिए ऋण की दरें घट सकती हैं।
Incorrect
उत्तर: c)
- रेपो दर में कमी का अर्थ है कि वाणिज्यिक बैंक RBI से सस्ती दर पर अधिक धन उधार ले सकते हैं, जिसका तात्पर्य है कि उपभोक्ताओं के लिए ऋण की दरें घट सकती हैं।








