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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. पीएम-केयर्स का ऑडिट नहीं: उच्चत्तम न्यायालय

2. सतलज यमुना लिंक नहर

3. नवोन्मेष उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (ARIIA) 2020

 

सामान्य अध्ययन-III

1. जीवन की डिजिटल गुणवत्ता सूचकांक 2020

2. निषिद्ध घोषित वन क्षेत्रों में कोयला खनन: रिपोर्ट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. आयुरक्षा (Ayuraksha)

2. मैसूर चिड़ियाघर में अफ्रीकी शिकारी चीते

3. निंजा यूएवी (Ninja UAVs)

4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ताओं की नियुक्ति

5. मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियां राज्य के निवासियों हेतु आरक्षित

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

पीएम-केयर्स का ऑडिट नहीं: उच्चत्तम न्यायालय


संदर्भ:

हाल ही में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा पीएम-केयर्स (PM CARES) फंड्स पर फैसला सुनाया गया है।

चर्चा का विषय

कुछ समय पूर्व, सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) नामक एक गैर सरकारी संगठन द्वारा उच्चत्तम न्यायालय में एक याचिका द्वारा दायर की गई थी। इस याचिका में केंद्र सरकार को पीएम-केयर्स फंड में प्राप्त राशि के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (National Disaster Response Fund-NDRF) में स्थानांतरित करने हेतु निर्देश देने की मांग की गयी थी।

निर्णय के प्रमुख बिंदु:

  • उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को कोविड-19 से लड़ने के लिए पीएम केयर्स फंड में मिली दान की राशि को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) में स्थानांतरित करने का निर्देश देने से इंकार करते हुये कहा कि दोनों कोष पूरी तरह से अलग अलग उद्देश्यों के लिये हैं।
  • पीएम केयर्स फंड, एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट है, अतः भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक द्वारा इसके लेखा परीक्षण की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • न्यायालय ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत एक नई राष्ट्रीय योजना के निर्माण को भी खारिज कर दिया।
  • न्यायालय ने कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 46(1)(b) के अनुसार, किसी व्‍यक्ति अथवा संस्‍था द्वारा राष्‍ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष में स्वैच्छिक अंशदान/अनुदान करने पर कोई वैधानिक प्रतिबंध नहीं है।”
  • न्यायालय ने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12  के तहत सरकार द्वारा जारी किये गए दिशा निर्देशों तथा ‘न्यूनतम राहत मानकों’ में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पीएम केयर्स फंड के बारे में:

  • PM CARES फंड की स्थापना 28 मार्च 2020 को ‘पंजीकरण अधिनियम, 1908’ के तहत एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में की गयी थी।
  • इस ट्रस्ट के लिए कोई बजटीय अनुदान अथवा कोई सरकारी सहायता प्राप्त नहीं होती है।
  • इसका गठन किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति जैसे COVID-19 महामारी से निपटने के लिए किया गया था।

फंड का प्रशासन कौन करता है?

प्रधानमंत्री, PM CARES फंड के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, भारत सरकार निधि के पदेन न्यासी होते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 266 बनाम 267
  2. सार्वजनिक खाता क्या है?
  3. पीएम केयर फंड का प्रबंधन कौन करता है?
  4. आरटीआई अधिनियम के दायरे से किन संगठनों को छूट दी गई है?
  5. भारत का समेकित कोष क्या है?
  6. एक धर्मार्थ ट्रस्ट क्या है?
  7. एनडीआरएफ के बारे में

मेंस लिंक:

आरटीआई अधिनियम के दायरे में PM CARES फंड क्यों लाया जाना चाहिए? चर्चा कीजिए ।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

सतलज यमुना लिंक नहर


संदर्भ:

हाल ही में एक बैठक के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को सतलुज-यमुना लिंक (Sutlej-Yamuna LinkSYL) नहर मुद्दे पर चेतावनी दी है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा है कि यदि सतलुज-यमुना लिंक नहर का निर्माण पूरा होता है तो हरियाणा के साथ पानी साझा करने का विवाद राष्ट्रीय समस्या का रूप ले सकता है।

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा 28 जुलाई को केंद्र सरकार के लिए दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थता करने के लिए बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया गया था।

सतलज यमुना लिंक नहर का देश की सुरक्षा से संबंध

पाकिस्तान द्वारा लगातार रूप से उपद्रव भड़काने के प्रयास किये जा रहे है, तथा वह प्रतिबंधित ‘सिख्स फॉर जस्टिस आर्गेनाइजेशन’ के माध्यम से अलगाववादी आन्दोलन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहा है। सतलज यमुना लिंक नहर के पानी का मुद्दा राज्य में अस्थिरता उत्पन्न कर सकता है।

पंजाब की मांग

प्रस्तावित अंतर राज्य नदी जल विवाद अधिनियम के अंतर्गत एक नए न्यायाधिकरण की स्थापना में उपयुक्त संशोधन किए जाने चाहिए, ताकि पंजाब को ‘अपनी कुल आवश्यकताओं तथा आने वाली पीढ़ियों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त और न्यायसंगत तरीके से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके’।

सतलज यमुना लिंक (SYL) नहर तथा संबंधित विवाद

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  1. वर्ष 1966 में पुराने (अविभाजित) पंजाब से हरियाणा को अलग किया गया, इसके साथ ही हरियाणा को नदियों के पानी का हिस्सा देने की समस्यायें उत्पन्न हुई।
  2. पंजाब द्वारा नदी या नाले या प्राकृतिक जल धारा के तट से संबंधित सिधान्तों का हवाला देते हुए रावी और ब्यास के पानी को हरियाणा के साथ साझा करने का विरोध किया गया। पंजाब का कहना है, कि इसके पास किसी अन्य राज्य के साथ साझा करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है।
  3. हालांकि, केंद्र द्वारा वर्ष 1976 में, अविभाजित पंजाब के 7.2 मिलियन एकड़ फीट (MAF) में से 3.5 MAF पानी हरियाणा को आवंटित किये जाने संबंधी अधिसूचना जारी की गयी।
  4. उच्चत्तम न्यायालय के न्यायाधीश वी. बालकृष्ण इराडी की अध्यक्षता में वर्ष 1986 में जल विवाद के समाधान के लिये इराडी प्राधिकरण का गठन किया गया। प्राधिकरण ने वर्ष 1987 में पंजाब और हरियाणा को मिलने वाले पानी के हिस्से में क्रमशः 5 मिलियन एकड़ फीट और 3.83 मिलियन एकड़ फीट की बढ़ोतरी की सिफारिश की।

सतलज यमुना लिंक नहर

  • हरियाणा को सतलुज और उसकी सहायक ब्यास नदी के जल के अपने हिस्से का उपयोग करने में सक्षम बनाने हेतु यमुना तथा सतलुज को जोड़ने वाली एक नहर की योजना बनाई गई थी।
  • इस संबंध में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मध्य एक त्रिपक्षीय समझौते पर वार्ता भी हुई थी।
  • सतलुज यमुना लिंक नहर, सतलुज और यमुना नदियों को जोड़ने के लिए 214 किलोमीटर लंबी एक प्रस्तावित नहर है। हालांकि, इस परियोजना में कई बाधाएं आईं तथा यह मामला उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है।

हरियाणा की मांग

हरियाणा अपने हिस्से के 3.5 मिलियन एकड़ फीट पानी के लिए सतलज यमुना लिंक नहर को पूरा करने की मांग कर रहा है। इसका कहना है, कि पंजाब को इस संबंध में 2002 और 2004 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए। वर्तमान में हरियाणा को रावी-ब्यास नदी का 1.62 मिलियन एकड़ फुट का पानी प्राप्त हो रहा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सतलज यमुना लिंक (SYL) नहर का अवलोकन
  2. सतलज और यमुना- सहायक नदियाँ
  3. संविधान के अनुच्छेद 262 का अवलोकन
  4. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956- प्रमुख प्रावधान

मेंस लिंक:

ऐसा कहा जाता है कि पंजाब और हरियाणा के बीच सतलुज-यमुना लिंक जैसे पानी के साझा करने संबंधी निर्णय और समझौते आम तौर पर राजनीतिक रूप से प्रेरित होते हैं, और इसलिए यह लागू नहीं हो पाते है। क्या आपको लगता है कि नदी के पानी का बंटवारा ज़मीनी वास्तविकताओं, विशेषकर भौगोलिक कारकों पर आधारित होना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

नवोन्मेष उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (ARIIA) 2020


(Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements)

 संदर्भ:

हाल ही में उपराष्ट्रपति द्वारा नवोन्मेष उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (Atal Ranking of Institutions on Innovation Achievements- ARIIA) 2020 जारी की गई है।

ARIIA क्या है?

नवोन्मेष उपलब्धियों पर संस्थानों की अटल रैंकिंग (ARIIA) पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) (शिक्षा मंत्रालय) की एक पहल है, जिसके तहत नवाचार से संबंधित संकेतकों के आधार पर देश में उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों को प्रणालीबद्ध रूप से रैंक प्रदान की जाती है

ARIIA रैंकिंग में मुख्य रूप से छह प्रमुख मानकों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है:

  1. बौद्धिक सम्पदा अधिकार (IPR), नवाचार, स्टार्ट-अप और उद्यमिता पर कार्यक्रम और गतिविधियाँ।
  2. प्री इंक्यूबेशन और इन्क्यूबेशन अवसंरचना।
  3. नवाचार एवं उद्यमिता गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु वार्षिक व्यय।
  4. नवाचार, आईपीआर और उद्यमिता विकास पर विभिन्न पाठ्यक्रम।
  5. बौद्धिक संपदा (IP), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और व्यावसायीकरण।
  6. नवाचार और स्टार्ट-अप के लिए वित्तीयन।

इस वर्ष, ARIIA में दो विस्‍तृत श्रेणियों और छह उप श्रेणियों में संस्थानों का वर्गीकरण किया गया है।

  1. सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित संस्थान:

उप श्रेणियाँ:

  1. राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, केंद्रीय विश्वविद्यालय और केंद्रीय वित्तपोषित प्रौद्योगिकी संस्थान।
  2. राज्य विश्वविद्यालय और डीम्ड विश्वविद्यालय (सरकार और सरकार द्वारा सहायता प्राप्त)
  3. सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेज / संस्थान।
  4. निजी या स्व-वित्तपोषित संस्थान:

उप श्रेणियां:

  1. निजी अथवा स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालय
  2. निजी अथवा स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय / संस्थान

पहली बार ARIIA, 2020 में केवल महिलाओं वाले उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए विशेष पुरस्कार श्रेणी सम्मिलित की गयी है।  यह छठी उप-श्रेणी होगी।

उच्चत्तम प्रदर्शन करने वाले विभिन्न संस्थान

  1. आईआईटीमद्रास ने राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और केंद्र द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों की श्रेणी में शीर्ष स्थान हासिल किया;
  2. इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी, मुंबई को सरकार और सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के तहत शीर्ष स्थान मिला;
  3. सरकार और सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के अंतर्गत इंजीनियरिंग कॉलेज, पुणे को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है;
  4. कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, निजी या स्व-वित्तपोषित विश्वविद्यालयों के तहत भुवनेश्वर को शीर्ष स्थान, तथा
  5. निजी या स्व-वित्तपोषित कॉलेजों के तहत वारंगल को प्रथम स्थान पर घोषित किया गया।
  6. अविनाशीलिंगम इंस्‍टीट्यूट फॉर होम साइंस एंड हायर एजुकेशन फॉर वुमन द्वारा विशिष्ट रूप से महिलाओं के लिए शिक्षा संस्थानों में शीर्ष स्थान हासिल किया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ARIIA का आरंभ किसके द्वारा किया गया है?
  2. रैंकिंग मापदंड
  3. श्रेणियाँ
  4. विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

जीवन की डिजिटल गुणवत्ता सूचकांक 2020


(Digital Quality of Life Index)

संदर्भ:

हाल ही में, ब्रिटिश वर्जिन द्वीप समूह में स्थित एक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (Virtual Private Network- VPN) प्रदाता सर्फशार्क (Surfshark) द्वारा जीवन की डिजिटल गुणवत्ता सूचकांक (Digital Quality of Life Index) 2020 तैयार किया गया है।

इस सूचकांक में इंटरनेट क्षमता और गुणवत्ता, और इलेक्ट्रॉनिक अवसंरचना, सुरक्षा एवं सरकार मापदंडो के आधार पर देशों को रैंकिंग दी गयी है। इसमें सभी मापदंडों को समान भारांक प्रदान किया गया है।

विभिन्न देशों का प्रदर्शन:

  1. सूचकांक में स्कैंडिनेवियाई देश डेनमार्क और स्वीडन तथा कनाडा क्रमशः शीर्ष तीन स्थानों पर रहे।
  2. इज़राइल में इंटरनेट सबसे सस्ते दामों में उपलब्ध कराया जाता है।
  3. कुल देशों में से 75% देशों में इंटरनेट का व्यय वहन करने के लिए वैश्विक औसत से अधिक काम करना पड़ता है।
  4. सिंगापुर, यूके और अमेरिका का ई-गवर्नमेंट संकेतक पर सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा ।
  5. यूके, फ्रांस और लिथुआनिया साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा प्रदर्शन में शीर्ष स्थान पर रहे।
  6. सर्वश्रेष्ठ इंटरनेट गुणवता में सिंगापुर, स्वीडन और नीदरलैंड ने सर्वोच्च प्रदर्शन किया।
  7. सर्वाधिक विकसित ई-इन्फ्रास्ट्रक्चर में संयुक्त अरब अमीरात, स्वीडन और डेनमार्क का क्रमशः शीर्ष तीन स्थानों पर रहे।

भारत का प्रदर्शन

  1. 85 देशों की रैंकिंग में, भारत इंटरनेट सामर्थ्य संकेतक में नौवें तथा ई-गवर्नमेंट संकेतक में 15वें स्थान पर है।
  2. सूचकांक में भारत समग्र रूप से 57 वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  3. इंटरनेट लागत– भारत का इस संकेतक पर सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा है।
  4. ई-गवर्नमेंट संकेतक- भारत ने इस संकेतक पर नीदरलैंड, चीन और बेल्जियम को पीछे करते हुए 15 वां स्थान हासिल किया है।
  5. सुरक्षा- सुरक्षा की दृष्टि से भारत का प्रदर्शन काफी ख़राब रहा और 57 वें स्थान पर रहा।
  6. इंटरनेट गुणवत्ता– इंटरनेट गुणवत्ता में भारत को 78 वीं रैंक प्राप्त हुई और यह बांग्लादेश, नेपाल, नाइजीरिया और फिलीपींस जैसे देशों से पीछे रहा।
  7. इलेक्ट्रॉनिक अवसंरचना– सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ताओं और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी अपनाने की दर को देखते हुए – भारत पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल से पीछे रहा तथा सूचकांक में 79वां स्थान प्राप्त किया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सूचकांक के बारे में।
  2. विभिन्न मापदंडों पर भारत का प्रदर्शन
  3. वैश्विक परिदृश्य

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

निषिद्ध घोषित वन क्षेत्रों में कोयला खनन: रिपोर्ट


संदर्भ:

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (Centre for Science and Environment– CSE) के अनुसार:

  1. वर्ष 2015 से, 49 वन प्रखंडो को कोयला खनन के लिए साफ़ किया गया, इनमें से 9 प्रखंड निषिद्ध क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत थे। इन क्षेत्रों में पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अत्याधिक घने जंगल होने के कारण कोयला खनन प्रतिबंधित किया गया था।
  2. वर्ष 2020 में, 41 वन प्रखंडो क कोयला खनन हेतु नीलामी की गयी, इनमे से 21 प्रखंड मूल रूप से ‘निषिद्ध’ सूची (No-Go list) में वर्गीकृत थे।
  3. वर्तमान में भारत में मौजूदा खनन क्षमता का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जा रहा है: वर्ष 2015 के बाद से नीलाम की गई 67% खदानें अभी तक शुरू नहीं हुई हैं।

चर्चा का विषय

  • पर्यावरण मंत्रालय द्वारा घने वनावरण वाले क्षेत्रों में खनन पर प्रतिबंध लगाये जाने से इन क्षेत्रों में लाखों टन कोयला भंडार सुरक्षित हो गया है तथा इसका उत्खनन नहीं किया जा सकेगा।
  • विद्युत् मंत्रालय के अनुसार, कोयले की कमी से 17,000 मेगावॉट से अधिक कुल क्षमता की नई विद्युत् परियोजनाओं के परिचालन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। इससे खनन के लिए ‘निषिद्ध तथा खुले’ क्षेत्रों की अवधारणा पर कोयला, विद्युत् तथा इस्पात मंत्रालयों के बीच बहस आरंभ हो गई है।

कोयला खनन हेतु ‘निषिद्ध’ (No Go) क्षेत्र क्या हैं?

  • वर्ष 2009 में, पर्यावरण तथा कोयला मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से देश के वनाच्छादित क्षेत्रों को दो श्रेणियों – ‘खुले एवं निषिद्ध’ (Go and No-Go) क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया था, तथा पर्यावरणीय आधार पर ‘निषिद्ध’ क्षेत्रों में खनन को प्रतिबंधित किया गया था।
  • निषिद्ध’ (No-Go) क्षेत्र वे वन क्षेत्र होते हैं जिनमे भारित वन आवरण (Weighted Forest CoverWFC) 10 प्रतिशत से अधिक होता है, अथवा सकल वन आवरण (Gross Forest CoverGFC) 30 प्रतिशत से अधिक होता है।

‘खुले एवं निषिद्ध’ क्षेत्रों के वर्गीकरण की आवश्यकता

  • इस प्रक्रिया का उद्देश्य वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के तहत वन क्षेत्रों को प्राथमिकता देना है।
  • इसके अलावा, वनस्पतियों तथा जीव प्रजातियों से समृद्ध इन क्षेत्रों में कोयला खनन के लिए वन भूमि के परिवर्तन से ‘जंगलों तथा वन्यजीवों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव’ पड़ेगा।
  • वनीकरण तथा भूमि सुधार प्रक्रियाओं के साथ भी इन क्षेत्रों यदि खनन कार्य जारी रहता है, तब भी इन क्षेत्रों की जैव विविधता को पुनः बहाल करना संभव नहीं होगा।

इस नीति की आलोचना:

इस अवधारणा का कोई वैधानिक आधार नहीं है– इन्हें वन संरक्षण नियम, 2003 अथवा पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी किसी परिपत्र के तहत अनिवार्य नहीं किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


आयुरक्षा (Ayuraksha)

  • आयुरक्षा, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाला एक स्वायत्त संस्थान (All India Institute of AyurvedaAIIA) और दिल्ली पुलिस का एक संयुक्त उपक्रम है।
  • इसका उद्देश्य आयुर्वेद प्रतिरक्षा बढ़ाने के उपायों के माध्यम से दिल्ली पुलिस जैसे फ्रंटलाइन कोविड-19 योद्धाओं के स्वास्थ्य को बनाए रखना है।
  • इसके तहत, दिल्ली पुलिस के लगभग 80000 कर्मियों को आयुर्वेद दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

 मैसूर चिड़ियाघर में अफ्रीकी शिकारी चीते

हाल ही में, दक्षिण अफ्रीका के एन वान डाइक चीता केंद्र (Ann Van Dyke Cheetah Centre) से तीन चीता, मैसूर चिड़ियाघर में लाये गए हैं।

मैसूर चिड़ियाघर, भारत में शिकारी चीता रखने वाला दूसरा चिड़ियाघर है। इसके अतिरिक्त, हैदराबाद चिड़ियाघर में अफ्रीकी चीतों का एक जोड़ी पायी जाती है।

चीता के बारे में:

  1. चीता (Cheetah), एसिनोनिक्स जुबेटस, (Acinonyx jubatus) बिल्ली प्रजाति के सबसे पुराने सदस्यों में से एक है। इस प्रजाति के चिन्ह पांच मिलियन से अधिक वर्षों पूर्व मिओसीन युग में भी मिलते है।
  2. चीता दुनिया का सबसे तेज़ दौड़ने वाला स्थलीय स्तनपायी प्राणी है।
  3. यह अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध है।
  4. इसे वर्ष 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
  5. एशियाई चीता को IUCN रेड लिस्ट द्वारा ‘घोर-संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

निंजा यूएवी (Ninja UAVs)

हाल ही में भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा के लिए ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली ‘निंजा यूएवी’ (मानव रहित हवाई वाहन) का शुभारंभ किया है।

  • ये ड्रोन रियल टाइम ट्रैकिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग में सक्षम हैं और इन्हें ऑटोमैटिक फेल सेफ मोड पर संचालित किया जा सकता है।
  • एक ड्रोन कैमरा इतने बड़े क्षेत्र को कवर कर सकता है जिसके लिए 8-10 आरपीएफ कर्मियों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, यह सीमित जनशक्ति के उपयोग में पर्याप्त सुधार ला सकता है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ताओं की नियुक्ति

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा छह अधिवक्ताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनाया गया है।

संविधान के अनुच्छेद 217 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में किसी व्यक्ति की नियुक्ति के लिए मानदंड निर्धारित किये गए हैं।

इसके अंतर्गत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए व्यक्ति: कम से कम दस वर्षों के लिए भारत के राज्य क्षेत्र में न्यायिक पद पर कार्य किया हो; अथवा कम से कम दस वर्षों तक किसी उच्च न्यायालय का अधिवक्ता रहा हो।

नियुक्ति:

  • उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम द्वारा अनुमोदन पर, प्रस्तावित उम्मीदवारों के नाम विधि एवं न्याय मंत्रालय को भेजे जाते है, जिन्हें संबंधित मंत्री भारत के राष्ट्रपति को अग्रेषित किया जाता है।
  • तत्पश्चात, राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर के साथ नियुक्ति का आदेश जारी करते हैं।

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरियां राज्य के निवासियों हेतु आरक्षित

हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य में सरकारी नौकरियां अब केवल राज्य के युवाओं के लिए आरक्षित होंगी। इस संबंध में शीघ्र ही आवश्यक कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे।


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