HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का पिता कहा जाता है।
- राममोहन राय ने वेदों और पाँच उपनिषदों को बंगाली में अनुवाद किया।
- ब्रह्म समाज का उद्देश्य हिंदू धर्म का शुद्धिकरण, एकेश्वरवाद का प्रचार करना और एक नए धर्म की स्थापना करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: b)
- राजा राममोहन राय (1772-1833), जिन्हें अक्सर भारतीय पुनर्जागरण का पिता और आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। राममोहन राय आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय गरिमा एवं सामाजिक समानता के सिद्धांतों में विश्वास करते थे।
- वे एकेश्वरवाद के दृढ समर्थक थे। उन्होंने ‘गिफ्ट टू मोनोथेस्ट (1809)’ की रचना की और वेदों एवं पांच उपनिषदों का बंगाली में अनुवाद करके यह सिद्ध किया कि प्राचीन हिंदू ग्रंथ एकेश्वरवाद का समर्थन करता है।
- अगस्त 1828 में राजा राममोहन राय ने ब्रह्म सभा की स्थापना की; बाद में इसका नाम बदलकर ब्रह्म समाज कर दिया गया। राममोहन राय एक नया धर्म स्थापित नहीं करना चाहते थे। वह केवल उन हिंदू धर्म को दुष्ट प्रथाओं से मुक्त करना चाहते थे।
Incorrect
उत्तर: b)
- राजा राममोहन राय (1772-1833), जिन्हें अक्सर भारतीय पुनर्जागरण का पिता और आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। राममोहन राय आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय गरिमा एवं सामाजिक समानता के सिद्धांतों में विश्वास करते थे।
- वे एकेश्वरवाद के दृढ समर्थक थे। उन्होंने ‘गिफ्ट टू मोनोथेस्ट (1809)’ की रचना की और वेदों एवं पांच उपनिषदों का बंगाली में अनुवाद करके यह सिद्ध किया कि प्राचीन हिंदू ग्रंथ एकेश्वरवाद का समर्थन करता है।
- अगस्त 1828 में राजा राममोहन राय ने ब्रह्म सभा की स्थापना की; बाद में इसका नाम बदलकर ब्रह्म समाज कर दिया गया। राममोहन राय एक नया धर्म स्थापित नहीं करना चाहते थे। वह केवल उन हिंदू धर्म को दुष्ट प्रथाओं से मुक्त करना चाहते थे।
-
Question 2 of 5
2. Question
‘सहायक संधि (Subsidiary alliance)’ की शर्तों के अनुसार, भारतीय शासकों को-
- अपने स्वतंत्र सशस्त्र बल रखने की अनुमति नहीं थी
- उन्हें रियासतों में ब्रिटिश प्रतिनिधियों की रक्षा करनी होती थी
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
- ‘सहायक संधि (Subsidiary alliance)’ की शर्तों के अनुसार, भारतीय शासकों को अपने स्वतंत्र सशस्त्र बल रखने की अनुमति नहीं थी। उन्हें कंपनी द्वारा संरक्षित किया जाना था, लेकिन कंपनी को “सहायक बलों” के लिए भुगतान करना होता था जिन्हें कंपनी द्वारा अपनी सुरक्षा के उद्देश्य के लिए रखा जाता था। यदि भारतीय शासक भुगतान करने में विफल हो जाते थे, तो उनके क्षेत्र का हिस्सा दंड के रूप में ले लिया गया।
- उदाहरण के लिए, जब रिचर्ड वेलेजली गवर्नर-जनरल (1798-1805) थे, तो अवध के नवाब को 1801 में अपने क्षेत्र का आधा हिस्सा कंपनी को देने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि वह “सहायक बलों” के लिए भुगतान करने में विफल रहा। हैदराबाद को भी इसी तरह से मजबूर किया गया था।
Incorrect
उत्तर: b)
- ‘सहायक संधि (Subsidiary alliance)’ की शर्तों के अनुसार, भारतीय शासकों को अपने स्वतंत्र सशस्त्र बल रखने की अनुमति नहीं थी। उन्हें कंपनी द्वारा संरक्षित किया जाना था, लेकिन कंपनी को “सहायक बलों” के लिए भुगतान करना होता था जिन्हें कंपनी द्वारा अपनी सुरक्षा के उद्देश्य के लिए रखा जाता था। यदि भारतीय शासक भुगतान करने में विफल हो जाते थे, तो उनके क्षेत्र का हिस्सा दंड के रूप में ले लिया गया।
- उदाहरण के लिए, जब रिचर्ड वेलेजली गवर्नर-जनरल (1798-1805) थे, तो अवध के नवाब को 1801 में अपने क्षेत्र का आधा हिस्सा कंपनी को देने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि वह “सहायक बलों” के लिए भुगतान करने में विफल रहा। हैदराबाद को भी इसी तरह से मजबूर किया गया था।
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Question 3 of 5
3. Question
1859 के “इंडिगो या नील विद्रोह” के पीछे निम्नलिखित में से कौन-से कारण थे?
- किसानों को खाद्य फसल के बजाय नील की खेती करने के लिए बाध्य किया गया था।
- किसानों को नील की खेती के लिए “डैडोन” नामक ऋण प्रदान किया गया था जिस पर अत्यधिक ब्याज दर वसूली जाती थी।
- अपनी औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अंग्रेजों द्वारा खेत का अधिग्रहण करना
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
- 1777 की शुरुआत में बंगाल में नील की खेती शुरू हुई।
- जब ब्रिटिश शक्ति का विस्तार हुआ, तो यूरोप में ब्लू डाई की अधिक मांग के कारण नील की खेती पर जोर दिया गया था। उपर्युक्त कारणों के अलावा, अन्य हैं:
- नील की खेती करने वाले किसानों को उनकी फसलों के लिए बहुत कम लाभ प्राप्त होता था।
- नील की खेती के तहत भूमि अगली फसल की खेती के लिए अनुपजाऊ हो जाती थी।
- अनुबंध, जिसके तहत इंडिगो प्लांटर्स ने इसकी खेती करने वालों को बाध्य बनाए रखा था।
- ऋण ने लोगों को ऋणग्रस्त बना दिया और इसके परिणामस्वरूप विद्रोह हुआ।
Incorrect
उत्तर: a)
- 1777 की शुरुआत में बंगाल में नील की खेती शुरू हुई।
- जब ब्रिटिश शक्ति का विस्तार हुआ, तो यूरोप में ब्लू डाई की अधिक मांग के कारण नील की खेती पर जोर दिया गया था। उपर्युक्त कारणों के अलावा, अन्य हैं:
- नील की खेती करने वाले किसानों को उनकी फसलों के लिए बहुत कम लाभ प्राप्त होता था।
- नील की खेती के तहत भूमि अगली फसल की खेती के लिए अनुपजाऊ हो जाती थी।
- अनुबंध, जिसके तहत इंडिगो प्लांटर्स ने इसकी खेती करने वालों को बाध्य बनाए रखा था।
- ऋण ने लोगों को ऋणग्रस्त बना दिया और इसके परिणामस्वरूप विद्रोह हुआ।
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Question 4 of 5
4. Question
ब्रिटिश भारत में बकाश्त भूमि (Bakasht lands) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- बकाश्त भूमि वह भूमि थी जिसे अधिकांशत: अनुत्पादन (डिप्रेशन) के वर्षों के दौरान काश्तकारों द्वारा भूमिकर का भुगतान न किए जाने पर जमींदारों द्वारा जब्त कर किया जाता था।
- कांग्रेस के मंत्रियों द्वारा भूमिकर में कमी और बकाश्त भूमि की बहाली के लिए विधायी कार्यवाही शुरू की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- बकाश्त भूमि (Bakasht lands) मुद्दा बिहार प्रांतीय किसान सभा और कांग्रेस मंत्रियों के बीच विवाद का एक प्रमुख कारन बन गया।
- कांग्रेस मंत्रियों ने भूमिकर में कमी करने और बकाश्त भूमि की बहाली के लिए विधायी प्रक्रिया शुरू की।
- बकाश्त भूमि वह थी जिसे अधिकांश अनुत्पादन (डिप्रेशन) के वर्षों के दौरान काश्तकारों द्वारा भूमिकर का भुगतान न किए जाने पर जमींदारों द्वारा जब्त कर ली जाती थी और जो अक्सर शेयर-क्रॉपर्स के रूप में खेती करना जारी रखते थे।
- लेकिन जमींदारों के साथ एक समझौते के आधार पर आखिरकार कानून में शामिल किया गया फार्मूला किसान सभा के कट्टरपंथी नेताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया।
- कानून ने काश्तकारों को भूमि का एक निश्चित अनुपात इस शर्त पर दिया कि वे जमीन की नीलामी कीमत का आधा भुगतान करेंगे। इसके अलावा, कुछ श्रेणियों की भूमि को कानून से छूट दी गई थी।
Incorrect
उत्तर: c)
- बकाश्त भूमि (Bakasht lands) मुद्दा बिहार प्रांतीय किसान सभा और कांग्रेस मंत्रियों के बीच विवाद का एक प्रमुख कारन बन गया।
- कांग्रेस मंत्रियों ने भूमिकर में कमी करने और बकाश्त भूमि की बहाली के लिए विधायी प्रक्रिया शुरू की।
- बकाश्त भूमि वह थी जिसे अधिकांश अनुत्पादन (डिप्रेशन) के वर्षों के दौरान काश्तकारों द्वारा भूमिकर का भुगतान न किए जाने पर जमींदारों द्वारा जब्त कर ली जाती थी और जो अक्सर शेयर-क्रॉपर्स के रूप में खेती करना जारी रखते थे।
- लेकिन जमींदारों के साथ एक समझौते के आधार पर आखिरकार कानून में शामिल किया गया फार्मूला किसान सभा के कट्टरपंथी नेताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया।
- कानून ने काश्तकारों को भूमि का एक निश्चित अनुपात इस शर्त पर दिया कि वे जमीन की नीलामी कीमत का आधा भुगतान करेंगे। इसके अलावा, कुछ श्रेणियों की भूमि को कानून से छूट दी गई थी।
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Question 5 of 5
5. Question
माउंटबेटन योजना की परिणति थी
Correct
उत्तर: d)
- यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने फरवरी 1947 में घोषणा की कि:
- ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत को जून 1948 तक ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्व-शासन प्रदान करेगी,
- अंतिम हस्तांतरण की तिथि निर्धारित होने के बाद रियासतों का भविष्य निर्धारित किया जाएगा।
- इस अधिनियम को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों सहित यूके के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली और भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने एक साथ तैयार किया था। इस अधिनियम को 3 जून योजना या माउंटबेटन योजना के रूप में जाना जाता है।
Incorrect
उत्तर: d)
- यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने फरवरी 1947 में घोषणा की कि:
- ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत को जून 1948 तक ब्रिटिश सरकार से पूर्ण स्व-शासन प्रदान करेगी,
- अंतिम हस्तांतरण की तिथि निर्धारित होने के बाद रियासतों का भविष्य निर्धारित किया जाएगा।
- इस अधिनियम को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, मुस्लिम लीग और सिख समुदाय के प्रतिनिधियों सहित यूके के प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली और भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने एक साथ तैयार किया था। इस अधिनियम को 3 जून योजना या माउंटबेटन योजना के रूप में जाना जाता है।








