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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 13 अगस्त 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन1


 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

1. “भारत की स्वतंत्रता केवल औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के अंत से ही सम्बंधित नहीं थी। यह लगभग 1,000 वर्षों के उस अंधकारमयी युग पर भी पर्दा डालती है, जो महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण के साथ 1001 ई. में प्रारम्भ हुआ था। विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ:  Indian Express 

निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

समझाइए कि किस प्रकार भारत की स्वतंत्रता केवल औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के अंत से ही सम्बंधित नहीं है।

 विषय वस्तु:

संक्षेप में बताएं कि भारतीय अतीत का वह समय कैसा था, जब आक्रमणकारियों, व्यापारियों और उपनिवेशवादियों की एक नियमित धारा द्वारा भारत की अंतर्निहित निर्बलता का शोषण किया गया।

समझाइए कि इस लंबी अंधकारमयी अवधि का भारत पर क्या प्रभाव पड़ा।

निष्कर्ष:

भारत के अतीत के महत्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 


सामान्य अध्ययन3


 

विषय: साइबर सुरक्षा का आधारभूत ज्ञान।

2. लड़कियों और महिलाओं के साथ साइबर अपराध और साइबर बुलिंग (बदमाशी) के उदाहरणों के प्रकाश में, इससे जुड़ी चुनौतियों की विवेचना कीजिए और इसे संबोधित करने के लिए उपयुक्त उपाय भी सुझाएं। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 विवेचना कीजिए – ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न के सभी पक्षों की तार्किक व्याख्या कीजिये।

  उत्तर की संरचना: 

परिचय:

साइबर अपराध और साइबर बुलिंग (बदमाशी) के कारण महिलाओं और लड़कियों की निराशाजनक स्थिति को महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ प्रस्तुत कीजिए।

 विषय वस्तु:

इससे संबंधित चिंताओं को विस्तार से समझाइये।

सोशल मीडिया के उपयोग के रूप में डिजिटल उपस्थिति की बढ़ती प्रवृत्ति पर चर्चा कीजिए।

इससे सम्बंधित मुद्दों का भी उल्लेख कीजिए। 

निष्कर्ष:

इसके निवारण के लिए उपाय बताते हुए आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

3. अन्य सेवा प्रदाता (OSP) किसे कहते हैं? सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों की वृद्धि एवं विकास के लिए उनकी प्रासंगिकता को समझाइये। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: Hindustan Times 

निर्देशक शब्द: 

समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्रश्न के संदर्भ में कुछ प्रासंगिक तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

अन्य सेवा प्रदाता (OSP) किसे कहते हैं, समझाइये।

उनके संचालन की प्रक्रिया, उनकी कार्यप्रणाली और उन्हें नियंत्रण करने में सरकार की भूमिका को संक्षेप में समझाइये।

सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों की वृद्धि एवं विकास के लिए उनकी प्रासंगिकता को समझाइये।

 निष्कर्ष:

वर्तमान तकनीकी युग में सूचना एवं प्रौद्योगिकी और अन्य सम्बंधित क्षेत्रों के महत्त्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

4. प्राथमिक कृषि साख समिति के महत्व पर चर्चा कीजिए। आपको क्यों लगता है कि इसे मान्यता देना हमारे लिए महत्वपूर्ण है? (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Financial Express 

निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्राथमिक कृषि साख समिति को संक्षेप में परिभाषित कीजिए।

विषय वस्तु:

प्राथमिक कृषि साख समितियों के कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उनके उद्देश्य, भारत में उनकी वर्तमान स्थिति और उन्हें मान्यता देने की आवश्यकता को समझाइये

उनके विकास और उनकी कार्यप्रणाली से संबंधित मुद्दों और चिंताओं पर चर्चा कीजिए। 

निष्कर्ष:

प्राथमिक कृषि साख समितियों से सम्बंधित चिंताओं के निवारण के उपाय और उनके सशक्तिकरण के लिए आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

5. कृषि औद्योगिकीकरण की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए। इसे प्राप्त करने के लिए द्वितीयक कृषि पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता क्यों है? (250 शब्द)

सन्दर्भ: Financial Express 

 निर्देशक शब्द:

स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्रासंगिक तथ्यों के साथ कृषि औद्योगिकीकरण की अवधारणा को समझाइये।

 विषय वस्तु:

प्राथमिक से द्वितीयक कृषि तक विकास करने के महत्व पर चर्चा कीजिए; हमारे पास उपलब्ध विकल्पों की भी व्याख्या कीजिए।

भारत के लिए द्वितीयक कृषि की आवश्यकता को स्पष्ट कीजिए।

कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में तेजी से प्रगति के लिए एक प्रगतिशील नीति की अनिवार्यता का उल्लेख करते हुए इस दिशा में आवश्यक उपाय भी सुझाइये।

 निष्कर्ष:

आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

6. अनुसंधान में सुधार और नवोन्मेषी विचारों को लाने के लिए सरकार द्वारा किये गए विभिन्न प्रयासों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: Outlook India

निर्देशक शब्द: 

चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

अनुसंधान की दिशा में भारत की प्रगति को अतीत से लेकर वर्तमान तक एक समयरेखा (टाइमलाइन) के माध्यम से संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए।

 विषय वस्तु:

अनुसंधान के क्षेत्र में भारत के समक्ष चुनौतियों को संक्षेप में बताते हुए इस दिशा में सरकार द्वारा की गयी प्रमुख पहलों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

अटल इनोवेशन मिशन, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) जैसे प्रयासों और उनकी हाल की उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन4


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।

7. “समस्या समाधान कौशल” की तुलना में “समस्या-निवारण मूल्यों” का अधिक महत्व है। क्या आप सहमत हैं? उपयुक्त उदाहरण के साथ अपने विचारों की पुष्टि कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

उत्तरकीसंरचना:

परिचय:

“समस्या समाधान कौशल” और “समस्या-निवारण मूल्यों” से आप क्या समझते हैं, संक्षेप में समझाइये।

विषयवस्तु:

दोनों की तुलनात्मक व्याख्या करते हुए कथन के संदर्भ में अपनी सहमति के कारणों का उल्लेख कीजिए।

प्रासंगिक उदाहरणों के साथ अपने उत्तर की पुष्टि भी कीजिए।

निष्कर्ष:

ऐसे मूल्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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