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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 August

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. माउंट सिनाबंग

 

सामान्य अध्ययन-II

1. असम समझौते का परिच्छेद-6

2. हिंदू महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर उच्चत्तम न्यायालय का निर्णय

3. नागा फ्रेमवर्क समझौता 2015 का विवरण

4. टिक-बोर्न वायरस

 

सामान्य अध्ययन-III

1. छात्र उद्यमिता कार्यक्रम

2. स्पेसएक्स का SN5 स्टारशिप प्रोटोटाइप

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. स्पुतनिक वी (Sputnik V)

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ।

माउंट सिनाबंग


(Mount Sinabung)

अवस्थिति: उत्तरी सुमात्रा, इंडोनेशिया।

चर्चा का कारण

इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर स्थित माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी फिर से भड़क हो उठा है। लगभग 400 वर्षों की निष्क्रियता के बाद यह ज्वालामुखी वर्ष 2010 से सक्रिय है।

पृष्ठभूमि:

इंडोनेशिया में, ‘रिंग ऑफ़ फायर’ अथवा परिप्रशांत महासागरीय मेखला (Circum-Pacific Belt) में अवस्थिति होने के कारण, कई सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं।

  • परिप्रशांत महासागरीय मेखला, प्रशांत महासागर के चारो ओर विस्तृत क्षेत्र है तथा निरंतर होने वाली भूकंपीय घटनाओं तथा ज्वालामुखियों के लिए जाना जाता है।
  • ‘रिंग ऑफ़ फायर’ में विश्व के लगभग 75 प्रतिशत ज्वालामुखी पाए जाते है तथा कुल भूकंपीय घटनाओं में से 90 प्रतिशत भूकंप इस क्षेत्र में आते हैं।

ज्वालामुखी विस्फोट का कारण

कोई ज्वालामुखी सक्रिय, सुप्त अथवा या मृत अवस्था में हो सकता है।

  • ज्वालामुखी का उद्गार, भूगार्भिक क्रियाओं के कारण पृथ्वी की मेंटल परत के पिघलने से निर्मित मैग्मा के सतह तक ऊपर उठने पर होता है।
  • चूंकि, मैग्मा, ठोस शिलाओं की तुलना में हल्का होता है, जिस कारण यह छिद्रों तथा दरारों से होकर पृथ्वी की सतह तक पहुँच जाता है। सतह पर स्फुटित होने के पश्चात इसे लावा कहा जाता है।

विस्फोटक प्रकार के ज्वालामुखी

सभी ज्वालामुखी उद्गार विस्फोटक नहीं होते हैं। ज्वालामुखी में विस्फोट की तीव्रता मैग्मा की संरचना पर निर्भर करती है।

  • जब मैग्मा पतला तथा तरल अवस्था में होता है, इसके साथ उपस्थित गैसें आसानी से निकल जाती है, तथा लावा सतह पर प्रवाहित हो जाता है।
  • दूसरी ओर, मैग्मा के गाढ़ा तथा सघन होने पर, इसके साथ उपस्थित गैसें बच कर नहीं निकल पाती हैं, जिससे पृथ्वी की आंतरिक सतह में दबाव निर्मित हो जाता है।
  • भूगार्भिक हलचलों के कारण जिस स्थान पर भूपर्पटी कमजोर हो जाती है, वहां, आंतरिक भाग में उपस्थिति मैग्मा तथा गैसों के दबाव के कारण तेजी से ज्वालामुखी विस्फोट होता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. कुछ ज्वालामुखी विस्फोटक प्रकार के क्यों होते हैं?
  2. प्रशांत महासागरीय रिंग ऑफ फायर की अवस्थिति
  3. अधिकतर ज्वालामुखी कहाँ पाए जाते हैं?
  4. अभिसारी और अभिसरण प्लेट सीमाएँ क्या हैं?
  5. ज्वालामुखियों के प्रकार
  6. ज्वालामुखी विस्फोटों द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ

मेंस लिंक:

जटिल ज्वालामुखी (Complex Volcano) क्या होते हैं? उपयुक्त चित्रण के साथ मुख्य विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

असम समझौते का परिच्छेद-6


(Clause 6 of the Assam Accord)

संदर्भ:

गत फरवरी माह में, असम समझौते के परिच्छेद-6 के कार्यान्वयन हेतु गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गयी थी। परिच्छेद-6 असम समझौते का एक प्रमुख प्रावधान है, तथा यह दशकों से विवादास्पद है। हाल ही में, सरकार द्वारा समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • उच्च स्तरीय समिति का गठन वर्ष 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा किया गया था।
  • इसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बिप्लब कुमार सरमा ने की थी।
  • इसका कार्य ‘असमिया लोगों’ (Assamese people) को परिभाषित करना तथा उनके अधिकारों हेतु सुरक्षात्‍मक उपायों से संबंधित उपाय सुझाना था।

असम समझौते का परिच्छेद-6 क्या है?

  • वर्ष 1985-85 के असम आंदोलन के बाद असम समझौते के परिच्छेद-6 पर वर्ष 1985 में हस्ताक्षर किये गए थे। इसमें, असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक, भाषायी पहचान और धरोहर का संरक्षण करने तथा उसे बढ़ावा देने के लिये उचित संवैधानिक, विधायी तथा प्रशासनिक उपाय करने का प्रावधान किया गया है।
  • इस परिच्छेद को असम के मूल निवासियों’ के सामाजिक-राजनीतिक अधिकारों तथा संस्कृति की सुरक्षा के लिए सम्मिलित किया गया था।

असम समझौता क्या है?

(What is Assam Accord?)

  • यह भारत सरकार तथा असम आंदोलन के नेताओं के मध्य नई दिल्ली में 15 अगस्त 1985 को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (Memorandum of Settlement- MoS) था।
  • समझौते के अंतर्गत, असम में विस्थापित हुए सभी लोगों को पूर्ण नागरिकता देने के लिए 24 मार्च 1971 को कटऑफ तारीख के रूप में तय किया गया था। अर्थात, निर्धारित तिथि के पश्चात असम में आए सभी बांग्लादेशी नागरिकों को यहाँ से जाना होगा।

उच्च स्तरीय समिति द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें

परिच्छेद- 6 की उद्देश्य पूर्ति हेतु समिति ने असमिया लोगों के रूप में मान्यता दिए जाने के लिए निम्नलिखित सिफारिशें की है:

भारत के सभी नागरिक, जो:

  1. 1 जनवरी, 1951 को या उससे पहले असम राज्य क्षेत्र में बसने वाले असमिया समुदाय का भाग हो;
  2. 1 जनवरी, 1951 को या उससे पहले असम राज्य क्षेत्र में बसने वाले असमिया जनजातीय समुदाय का भाग हो;
  3. 1 जनवरी, 1951 को या उससे पहले असम राज्य क्षेत्र में बसने वाले किसी अन्य असमिया मूल समुदाय का भाग हो;
  4. 1 जनवरी, 1951 को या उससे पहले असम राज्य क्षेत्र में बसने वाले भारत के अन्य सभी नागरिक; तथा
  5. उपरोक्त श्रेणियों के वंशज।

समिति की सिफारिशों के निहितार्थ एवं प्रभाव

  • परिच्छेद-6 का उद्देश्य असमिया लोगों के लिए कुछ संरक्षोपाय (safeguards) प्रदान करना है, तथा इसमें वर्ष 19511971 के मध्य असम में आए प्रवासियों को सम्मिलित नहीं किया गया था।
  • समिति की सिफारिशें स्वीकार किये जाने पर, वर्ष 1951-1971 के मध्य असम में आए प्रवासियों को ‘असम समझौते’ तथा राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizens- NRC) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की जायेगी, किंतु इन्हें ‘असमिया लोगों’ के लिए प्राप्त संरक्षोपाय अधिकार नहीं दिए जायेंगे।

संरक्षोपायों के अंतर्गत प्राप्त लाभ

  • असम की संसदीय सीटों, विधानसभा सीटों, तथा स्थानीय निकाय चुनावों में ‘असमिया लोगों’ के लिए 80 से 100% तक आरक्षण प्रदान किया जायेगा।
  • केंद्र सरकार और अर्ध-केंद्र सरकार / केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों / निजी क्षेत्र के अधीन असम राज्य के भीतर ग्रुप सी और डी स्तर के पदों में 80 से 100% तक आरक्षण प्रदान किया जायेगा।
  • असम सरकार तथा राज्य सरकार के उपक्रमों की नौकरियों में 80 से 100% तक आरक्षण; तथा निजी भागीदारी वाले उपक्रमों में 70 से 100% तक आरक्षण प्रदान किया जायेगा।
  • असमिया लोगों के लिए भूमि अधिकार प्राप्त होंगे, जिसके अंतर्गत ‘असमिया लोगों’ के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को भूमि हस्तांतरित करने पर प्रतिबंध होगा।
  • समिति की कई अन्य सिफारिशें भाषा, सांस्कृतिक और सामाजिक अधिकारों से संबंधित हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. असम समझौता क्या है? इसे कब हस्ताक्षरित किया गया था?
  2. असम आंदोलन क्या था?
  3. समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता
  4. समझौते का परिच्छेद-6
  5. बिप्लब कुमार सरमा समिति किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

असम समझौते का परिच्छेद-6 विवादास्पद क्यों है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

हिंदू महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर उच्चत्तम न्यायालय का निर्णय


(Supreme Court verdict on Hindu women’s inheritance rights)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा हिंदू महिला के अधिकार को पुरुष उत्तराधिकारी के बराबर करने का निर्णय सुनाया गया। न्यायालय के अनुसार, हिंदू महिला, पैतृक संपत्ति में पुरुष उत्तराधिकारी के बराबर की हकदार होगी तथा संयुक्त रूप से कानूनी वारिस होगी।

न्यायालय का निर्णय:

  • हिंदू महिला का पैतृक संपत्ति में संयुक्त उत्तराधिकारी होने का अधिकार जन्म से है।
  • यह इस तथ्य पर निर्भर नहीं करता है, कि वर्ष 2005 में कानून लागू होने के समय उसके पिता जीवित थे अथवा नहीं।
  • न्यायालय के इस निर्णय ने वर्ष 2015 तथा अप्रैल 2018 में दिए गए फैसलों को पलट दिया है।

विवाद का विषय

  • हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1965 में वर्ष 2005 में संशोधन किया गया था। इसके अंतर्गत पैतृक संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का हिस्सा दिए जाने संबंधी प्रावधान किये गए थे।
  • किंतु, इस क़ानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया था, कि क्या यह कानून पूर्वव्यापी रूप से लागू किया जाएगा? तथा क्या महिलाओं का पैतृक संपत्ति संबंधी अधिकार पिता के जीवित होने पर निर्भर करता है?

हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के बारे में

  • इस अधिनियम के द्वारा हिंदू महिलाओं को पुरुष उत्तराधिकारी के समान सह समांशभागी (Coparcener) अथवा संयुक्त कानूनी वारिस होने का अधिकार प्रदान किया गया।
  • संशोधित अधिनियम में बेटी को पुत्र की भांति जन्म से सह-समांशभागी (Coparcener)/ सहदायिक अधिकार प्रदान किये गए।
  • इस अधिनियम में बेटी को पैतृक संपति में समान अधिकारों के साथ समान देनदारियों की जिम्मेवारी भी प्रदान की गयी।

कानून की प्रयोज्यता: यह क़ानून पैतृक संपत्ति तथा बिना वसीयत की गयी व्यक्तिगत संपत्ति- जहाँ उत्तराधिकार क़ानून के अनुसार तय होता है, वसीयत के अनुसार नहीं- के उत्तराधिकार के संदर्भ में लागू होता है।

विषय की पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय की विभिन्न पीठों और विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा इस मुद्दे पर परस्पर विरोधी विचार प्रकट किये गए हैं।

  • प्रकाश बनाम फूलवती मामला (2015) में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संशोधित अधिनियम के तहत दिए गए अधिकार 9 सितंबर, 2005 को जीवित पिताओं की जीवित बेटियों पर लागू होते हैं। अर्थात यदि 9 सितंबर, 2005 से पहले पिता की मौत हो गई है तो बेटी को संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलेगा।
  • फरवरी 2018 में, 2015 के फैसले के विपरीत, न्यायालय ने कहा कि 2001 में पिता की मृत्यु हो जाने के बाद भी पैतृक संपत्ति का हिस्सा वर्ष 2005 के कानून के अनुसार बेटियों को सहदायिक के रूप में दिया जायेगा।
  • उसी वर्ष अप्रैल में, अदालत ने पुनः वर्ष 2015 में दिए गए निर्णय को दोहराया।

समान शक्ति प्राप्त पीठों द्वारा दिए गए परस्पर विरोधी विचारों के कारण वर्तमान मामले को तीन-न्यायाधीशों की पीठ में भेजा गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के प्रमुख प्रावधान
  2. इस कानून की प्रयोज्यता
  3. सर्वोच्च न्यायालय की विभिन्न पीठ
  4. समीक्षा याचिका क्या है? सर्वोच्च न्यायालय में समीक्षा याचिका कौन दायर कर सकता है?

मेंस लिंक:

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम फैसले के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

नागा फ्रेमवर्क समझौता 2015 का विवरण


(NSCN-IM releases details of 2015 Naga framework agreement)

संदर्भ:

हाल ही में, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-आईएम (NSCN-IM) द्वारा पहली बार नागा फ्रेमवर्क समझौता 2015 का विवरण जारी किया गया है।

NSCN-IM ने वार्ताकार आर.एन. रवि पर मूल दस्तावेज़ से महत्वपूर्ण शब्द हटाने तथा अन्य नागा समूहों के साथ दस्तावेज़ का संशोधित संस्करण साझा करने का आरोप लगाया है।

विवाद का विषय

NSCN-IM द्वारा जारी किये गए ‘समझौते’ में कहा गया है; कि ‘संप्रभु सत्ता को साझा किया जाएगा’ तथा ‘दो इकाईयों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के समावेशी नए संबंधों’ का प्रावधान किया जायेगा।

हालांकि, यह आरोप लगाया जाता है कि नागालैंड के गवर्नर आर.एन. रवि ने ‘चतुराई पूर्वक मूल दस्तावेज से ‘नए’ शब्द को हटा दिया’ तथा इसे नागा नेशनल पॉलिटिकल ग्रूप्स (NNPGs) सहित अन्य नागा समूहों में प्रसारित कर दिया।

NSCN-IM की मांगें

NSCN का कहना है, कि ‘नया शब्द राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह दो इकाइयों (दो संप्रभु शक्तियों) के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के अर्थ को परिभाषित करता है तथा यह स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के दायरे से बाहर का संकेत देता है।

NSCN की मांग है कि, केंद्र सरकार वचन देते हुए यह स्पष्ट करे कि फ्रेमवर्क समझौता अभी भी अपने मूल रूप में जीवित है तथा इस समझौते को ‘आर एन रवि’ के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को सौंपा जाये, जो पिछले 23 वर्षो की अवधि में प्राप्त की गयी उपलब्धियों को समझता हो और उनका सम्मान करता हो।

पृष्ठभूमि:

कुछ समय पूर्व, NSCN-IM द्वारा वर्तमान वार्ताकार को उनके पद से हटाने की मांग की गयी है, जिससे नागा-वार्ता में अवरोध उत्पन्न हो गया है।

  • NSCN-IM, ग्रेटर नागालैंड’ या नागालिम (Nagalim) के लिए संघर्ष कर रहा है – यह विद्रोही संगठन 2 मिलियन नागाओं को एकजुट करने हेतु पड़ोसी राज्यों असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के नागा-बाहुल्य क्षेत्रों को शामिल करके नागालैंड की सीमाओं का विस्तार करना चाहता है।
  • केंद्र सरकार का कहना है, कि निकटवर्ती राज्यों में बसी हुई नागा बस्तियों को नागालैंड के साथ विलय करने के लिए असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर का कोई विघटन नहीं किया जाएगा।

नागा राजनीति का संक्षिप्त इतिहास

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया गया तथा वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से चले जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National CouncilNNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. NNC ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड का समर्थन किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ नगालिम (NSCN) का गठन

  • वर्ष 1975 में नागा नेशनल कौंसिल (NNC) ने सरकार के साथ शिलांग समझौते पर हस्ताक्षर किये थे, तथा भारतीय संविधान को स्वीकार कर लिया।
  • NNC के निर्णय से नाराज होकर थ्यूइंगालेंग मुइवा तथा खपलांग ने मिलकर वर्ष 1980 में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड (NSCN) का गठन किया।
  • वर्ष 1988 में, हिंसक झड़प के बाद NSCN, NSCN (IM) और NSCN (K) में विभाजित हो गया।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

टिक-बोर्न वायरस


(What is the new tick-borne virus?)

संदर्भ:

चीन में एक नए टिक बोर्न वायरस (Tick Borne Virus) के संक्रमण ने दस्तक दी है। इस वायरस के कारण ‘थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम सहित तेज बुखार’ (Severe Fever with Thrombocytopenia Syndrome- SFTS) नामक बीमारी से चीन में लगभग 7 लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है।

चिंता का विषय

  • हालांकि, यह बीमारी मनुष्यों में किलनी (टिक) जैसे कीड़े के काटने से फैलती है, चीनी वायरस विज्ञानियों के अनुसार इसके मनुष्य से मनुष्य में संक्रमित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
  • वर्तमान में इस प्रकार के संक्रमण में मामला मृत्यु दर(case fatality rate) लगभग 16 और 30 प्रतिशत के बीच है।
  • जिस दर से यह वायरस फैलता है और इसकी उच्च मृत्यु दर के कारण, SFTS वायरस को विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO) द्वारा शीर्ष 10 प्राथमिकता वाले रोगों की सूची में सूचीबद्ध किया गया है।
  • SARS-CoV-2 के विपरीत, यह पहली बार नहीं है जब SFTS वायरस ने लोगों को संक्रमित किया है। SFTS वायरस का संक्रमण इससे पहले वर्ष 2020 के आरंभ में चीन के जिआंगसू प्रांत में फैला था।

SFTS वायरस क्या है?

  • ‘थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम सहित तेज बुखार’ (Severe Fever with Thrombocytopenia Syndrome- SFTS) वायरस, बुन्यावायरस (Bunyavirus) परिवार से संबंधित है तथा टिक के काटने से मनुष्यों में प्रेषित होता है।
  • सबसे पहले इस वायरस की पहचान चीन में शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा एक दशक पहले की गयी थी।

यह किस प्रकार फैलता है?

  • एक एशियाई टिक (Asian Tick) जिसे ‘हेमाफिसलिस लॉन्गिकोर्निस’ (Haemaphysalis Longicornis) कहा जाता है, इस वायरस का प्राथमिक वाहक है।
  • वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस प्रायः बकरियों, मवेशियों, हिरणों और भेड़ों जैसे जानवरों से मनुष्यों में फैलता है।

SFTFS वायरस के लक्षण

  • वर्ष 2011 में चीनी शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, बीमारी की शुरुआत के बाद रोगोद्भवन अवधि (incubation period) सात से तेरह दिनों के बीच होती है।
  • इस बीमारी से पीड़ित रोगियों में आमतौर पर विभिन्न लक्षण पाए जाते है, जिनमें बुखार, थकान, ठंड लगना, सिरदर्द, लसीका तंत्र में समस्या (lymphadenopathy), क्षुधा-अभाव, मतली, , दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, मसूड़ों से रक्तस्राव, नेत्र रोग आदि सम्मिलित हैं।

SFTS का उपचार

हालाँकि इस बीमारी के उपचार हेतु अभी तक एक भी टीका सफलतापूर्वक विकसित नहीं किया गया है, लेकिन एंटीवायरल दवा रिबाविरिन (Ribavirin) को इस बीमारी के इलाज में प्रभावी माना जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम सहित तेज बुखार’ (SFTS) के बारे में
  2. यह किस प्रकार फैलता है?
  3. प्रभावित देश
  4. लक्षण क्या हैं?
  5. क्या इसके लिए कोई टीका है?
  6. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा शीर्ष 10 प्राथमिकता वाले रोगों का ब्लू प्रिंट।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

छात्र उद्यमिता कार्यक्रम


(Student Entrepreneurship Programme)

संदर्भ:

हाल ही में, अटल नवाचार मिशन (AIM) तथा नीति आयोग द्वारा डेल टेक्नोलॉजिज (Dell Technologies) के साथ भागीदारी में अटल टिंकरिंग लैब्स (Atal Tinkering Labs– ATLs) के युवा अन्वेषकों (innovators) के लिए विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 (Student Entrepreneurship Programme– SEP 2.0) का आरंभ किया गया है।

विद्यार्थी उद्यमशीलता कार्यक्रम 2.0 और इसका महत्व

  • SEP 2.0 से विद्यार्थी अन्वेषकों को डेल के कर्मचारियों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।
  • विद्यार्थी अन्वेषकों को संरक्षण; प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण सहयोग; अंतिम उपभोक्ता फीडबैक; विचारों, प्रक्रियाओं और उत्पादों का पेटेंट संरक्षण हासिल करने बौद्धिक संपदा पंजीकरण; विनिर्माण सहयोग तथा उत्पाद के बाजार में लॉन्च करने में सहयोग हासिल होगा।

छात्र उद्यमिता कार्यक्रम के बारे में

SEP 1.0 की शुरुआत जनवरी, 2019 में हुई थी।

  • 10 महीने लंबे कठिन कार्यक्रम के माध्यम से एक देशव्यापी प्रतियोगिता- ATL मैराथन के शीर्ष छह दलों को नवीन प्रोटोटाइप्स को पूरी तरह कार्यशील उत्पादों में परिवर्तित करने का मौका मिला, जो अब बाजार में उपलब्ध हैं।
  • इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सामुदायिक चुनौतियों की पहचान की और ATL के अंतर्गत जमीनी स्तर पर नवाचार और समाधान तैयार किए गए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ATLs को कौन स्थापित कर सकता है?
  2. ATL की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता
  3. ‘टिंकर फ्रॉम होम’ अभियान के उद्देश्य
  4. नीति आयोग के अध्यक्ष
  5. छात्र उद्यमिता कार्यक्रम के बारे में

मेंस लिंक:

अटल टिंकरिंग लैब्स के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

स्पेसएक्स का SN5 स्टारशिप प्रोटोटाइप


(What is SpaceX’s SN5 Starship prototype?)

यह स्पेसएक्स के बिना चालक दल वाले ‘मार्स शिप’ का एक प्रोटोटाइप है। यह एक स्टेनलेस स्टील परीक्षण है। यह स्टारशिप अंतरिक्षयान का एक हिस्सा है।

चर्चा का कारण

हाल ही में इस प्रोटोटाइप द्वारा अपनी पहली परीक्षण उड़ान पूरी की गयी है। इसने लगभग 60 सेकंड तक 500 फीट से अधिक ऊँचाई तक सफलतापूर्वक उड़ान भरी।

स्टारशिप क्या है?

स्पेसएक्स द्वारा डिज़ाइन किया गया, स्टारशिप एक अंतरिक्षयान तथा सुपर-हैवी बूस्टर रॉकेट है। जिसे पृथ्वी की कक्षाओं, चंद्रमा और मंगल ग्रह पर चालक दलों तथा आवश्यक वस्तुओं को पहुचाने के लिए पुन: प्रयोज्य परिवहन प्रणाली (reusable transportation system) के रूप में विकसित किया जा रहा है।

स्पेसएक्स द्वारा स्टारशिप को ‘विश्व का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण वाहन’ बताया जा रहा है, तथा यह पृथ्वी की कक्षा में 100 मीट्रिक टन से अधिक ले जाने में सक्षम है।

स्टारशिप की क्षमता

  • कार्यशील होने के उपरान्त, स्टारशिप अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के वायुमंडल में 7.5 किमी प्रति सेकंड की गति से प्रवेश करने में सक्षम होगा।
  • स्टारशिप, उपग्रहों को, स्पेसएक्स के फाल्कन प्रक्षेपण वाहन की तुलना में काफी कम लागत में तथा अधिक दूरी तक प्रक्षेपित कर सकता है तथा यह चालक दलों तथा आवश्यक वस्तुओं की खेप, दोनों को, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (SS) तक पहुंचा सकता है।
  • विकसित होने के बाद, स्टारशिप, मानव अंतरिक्ष यात्रा के विकास और अनुसंधान के लिए चंद्रमा तक बड़ी मात्रा में उपकरणों तथा अन्य वस्तुओं के ले जाने में सहायक होगा।
  • इस अंतरिक्ष यान को, चंद्रमा से परे, अंतर-ग्रहीय अभियानों (interplanetary missions) के लिए चालक दल तथा अन्य वस्तुओं को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नासा का कमर्शियल क्रू प्रोग्राम- प्रतिभागी
  2. अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम
  3. स्टारशिप प्रोजेक्ट के बारे में
  4. SN5 स्टारशिप प्रोटोटाइप के बारे में

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


स्पुतनिक वी (Sputnik V)

  • यह रूस द्वारा निर्मित एक नयी कोरोनावायरस वैक्सीन है।
  • इसे इस प्रकार का विश्व की पहली वैक्सीन कहा जा रहा है।
  • वर्तमान में, विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा रूसी स्वास्थ्य अधिकारी ‘स्पुतनिक वी’ वैक्सीन के लिए WHO- अनुमोदन प्रक्रिया पर वार्ता कर रहे हैं।
  • इस वैक्सीन का नाम ‘स्पूतनिक v’, वर्ष 1957 में सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित किए गए पहले उपग्रह के नाम पर रखा गया है।

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