HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- पहली लोकसभा की बैठक का आयोजन प्रथम गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर किया गया था।
- भारत ने संविधान को अपनाने के तुरंत बाद ही ब्रिटिश आधिपत्य को समाप्त कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
- पहली लोकसभा की बैठक का आयोजन 1952 में जीवी मावलंकर की अध्यक्षता में किया गया था।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ने भारत को ब्रिटिश डोमिनियन में परिवर्तित कर दिया था। 26 जनवरी 1950 के बाद इसका प्रभुत्व समाप्त हो गया।
- 1952 तक, संविधान सभा ने ही कानून बनाने वाली संस्था के रूप में कार्य किया।
- प्रथम आम चुनाव के बाद पहली बार 17 अप्रैल 1952 को लोकसभा का विधिवत गठन किया गया था।
Incorrect
उत्तर: a)
- पहली लोकसभा की बैठक का आयोजन 1952 में जीवी मावलंकर की अध्यक्षता में किया गया था।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 ने भारत को ब्रिटिश डोमिनियन में परिवर्तित कर दिया था। 26 जनवरी 1950 के बाद इसका प्रभुत्व समाप्त हो गया।
- 1952 तक, संविधान सभा ने ही कानून बनाने वाली संस्था के रूप में कार्य किया।
- प्रथम आम चुनाव के बाद पहली बार 17 अप्रैल 1952 को लोकसभा का विधिवत गठन किया गया था।
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Question 2 of 5
2. Question
अनुसूचित जनजातियों (STs) के संरक्षण और कल्याण के संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कार्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- वन क्षेत्रों में निवास करने वाले STs को मामूली वन उपज के संबंध में मालिकाना हक देने के लिए उपाय करना।
- स्थानांतरण कृषि की पारंपरिक पद्धति को बढ़ावा देने के लिए उपाय करना।
- जल संसाधनों पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए उपाय करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: c)
2005 में, राष्ट्रपति ने अनुसूचित जनजातियों (STs) के संरक्षण, कल्याण और विकास और उन्नति के संबंध में आयोग के निम्नलिखित कार्यों को निर्दिष्ट किया:
(i) वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों के लिए लघु वन उपज के संबंध में स्वामित्व अधिकारों के लिए किए जाने वाले उपाय।
(ii) कानून के अनुसार, खनिज संसाधनों, जल संसाधनों आदि पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए जाने वाले उपाय।
(iii) आदिवासियों के विकास के लिए और अधिक व्यवहार्य आजीविका रणनीतियों के लिए काम करने के लिए उपाय।
(iv) विकास परियोजनाओं द्वारा विस्थापित आदिवासी समूहों के लिए राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावकारिता में सुधार के लिए किए जाने वाले उपाय।
(v) भूमि से जनजातीय लोगों के हस्तान्तरण को रोकने संबंधी उपाय करना और ऐसे व्यक्तियों को प्रभाव पूर्ण तरीके से पुनर्स्थापित करना जिनके मामले में हस्तान्तरण प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है।
(vi) वनों का संरक्षण करने और सामाजिक वनरोपण का दायित्व लेने के लिए जनजाति समुदायों का अधिकतम सहयोग प्राप्त करने तथा उन्हें शामिल करने के लिए उपाय करना।
(vii) पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित) अधिनियम, 1996 (1996 का 40) के उपबंधों के सम्पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय करना।
(viii) जनजातीय व्यक्यों द्वारा स्थानांतरण कृषि की प्रथा को पूर्णतः समाप्त करने तथा कम करने के उपाय करना जिससे भूमि और पर्यावरण लगातार कमजोर एवं क्षय होता है।
Incorrect
उत्तर: c)
2005 में, राष्ट्रपति ने अनुसूचित जनजातियों (STs) के संरक्षण, कल्याण और विकास और उन्नति के संबंध में आयोग के निम्नलिखित कार्यों को निर्दिष्ट किया:
(i) वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजातियों के लिए लघु वन उपज के संबंध में स्वामित्व अधिकारों के लिए किए जाने वाले उपाय।
(ii) कानून के अनुसार, खनिज संसाधनों, जल संसाधनों आदि पर आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए जाने वाले उपाय।
(iii) आदिवासियों के विकास के लिए और अधिक व्यवहार्य आजीविका रणनीतियों के लिए काम करने के लिए उपाय।
(iv) विकास परियोजनाओं द्वारा विस्थापित आदिवासी समूहों के लिए राहत और पुनर्वास उपायों की प्रभावकारिता में सुधार के लिए किए जाने वाले उपाय।
(v) भूमि से जनजातीय लोगों के हस्तान्तरण को रोकने संबंधी उपाय करना और ऐसे व्यक्तियों को प्रभाव पूर्ण तरीके से पुनर्स्थापित करना जिनके मामले में हस्तान्तरण प्रक्रिया पहले ही हो चुकी है।
(vi) वनों का संरक्षण करने और सामाजिक वनरोपण का दायित्व लेने के लिए जनजाति समुदायों का अधिकतम सहयोग प्राप्त करने तथा उन्हें शामिल करने के लिए उपाय करना।
(vii) पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित) अधिनियम, 1996 (1996 का 40) के उपबंधों के सम्पूर्ण कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के उपाय करना।
(viii) जनजातीय व्यक्यों द्वारा स्थानांतरण कृषि की प्रथा को पूर्णतः समाप्त करने तथा कम करने के उपाय करना जिससे भूमि और पर्यावरण लगातार कमजोर एवं क्षय होता है।
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Question 3 of 5
3. Question
कार्यपालिका के प्रति विधायिका की वित्तीय जवाबदेही के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- CAG द्वारा राष्ट्रपति को लेखापरीक्षा रिपोर्ट सौंपना।
- लोक लेखा समिति द्वारा CAG रिपोर्टों की जांच करना।
- लोक लेखा समिति द्वारा CAG की लेखापरीक्षा रिपोर्ट की यथोचित जांच करने के बाद राष्ट्रपति को प्रस्तुत करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- CAG द्वारा राष्ट्रपति को तीन लेखापरीक्षा रिपोर्ट सौपी जाती हैं – विनियोग खातों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट, वित्त खातों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट और सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- राष्ट्रपति इन रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखता है। इसके बाद, लोक लेखा समिति इनकी जांच करती है और संसद को रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
- विनियोग खाते, विनियोग अधिनियम के माध्यम से संसद द्वारा अनुमोदित व्यय के साथ वास्तविक व्यय की तुलना प्रतुत करते हैं, जबकि वित्त खाते वार्षिक रसीद और केंद्र सरकार के संवितरण को दर्शाते हैं।
Incorrect
उत्तर: c)
- CAG द्वारा राष्ट्रपति को तीन लेखापरीक्षा रिपोर्ट सौपी जाती हैं – विनियोग खातों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट, वित्त खातों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट और सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखापरीक्षा रिपोर्ट।
- राष्ट्रपति इन रिपोर्टों को संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखता है। इसके बाद, लोक लेखा समिति इनकी जांच करती है और संसद को रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
- विनियोग खाते, विनियोग अधिनियम के माध्यम से संसद द्वारा अनुमोदित व्यय के साथ वास्तविक व्यय की तुलना प्रतुत करते हैं, जबकि वित्त खाते वार्षिक रसीद और केंद्र सरकार के संवितरण को दर्शाते हैं।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 16 (4) के तहत आरक्षण केवल सरकारी सेवा में प्रवेश के समय प्रदान किया जा सकता है, लेकिन पदोन्नति के मामलों में नहीं।
- नागराज मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य पदोन्नति में SCs और STs के लिए आरक्षण देने के लिए बाध्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ और एम नागराज मामला:
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के अपने 1992 के ऐतिहासिक निर्णय में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के तहत आरक्षण केवल सरकारी सेवा में प्रवेश के समय प्रदान किया जा सकता है, लेकिन पदोन्नति के मामलों में नहीं।
- इसमें कहा गया है कि सिद्धांत केवल भविष्यलक्षी प्रभाव से लागु होगा और पहले से किए गए पदोन्नति मामले को प्रभावित नहीं करेगा तथा जो पदोन्नति में पहले से ही आरक्षण प्रदान किया गया है वह निर्णय की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी रहेगा। इसने यह भी निर्णय दिया कि क्रीमी लेयर को बाहर रखा जा सकता है।
- 17 जून, 1995 को, संसद ने, सत्तरवें संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 16 में धारा (4A) को शामिल किया ताकि SCs और STs के लिए पदोन्नति में आरक्षण को सक्षम बनाया जा सके। संविधान में सत्तरहवें और अस्सीवें संशोधन की वैधता और उन संशोधनों के अनुरूप बनाए गए कानून को नागराज मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी।
- अनुच्छेद 16 (4A) की वैधता को सिद्ध करते हुए, न्यायालय ने कहा कि यह एक सक्षम प्रावधान है। “राज्य पदोन्नति में SCs और STs के लिए आरक्षण करने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन, यदि वह ऐसा करना चाहता है, तो उसे तीन पहलुओं पर मात्रात्मक डेटा एकत्र करना होगा – वर्ग का पिछड़ापन; सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता; और अनुच्छेद 335 द्वारा अनिवार्य सेवा की सामान्य दक्षता प्रभावित नहीं होनी चाहिए ”।
Incorrect
उत्तर: a)
इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ और एम नागराज मामला:
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ के अपने 1992 के ऐतिहासिक निर्णय में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुच्छेद 16 (4) के तहत आरक्षण केवल सरकारी सेवा में प्रवेश के समय प्रदान किया जा सकता है, लेकिन पदोन्नति के मामलों में नहीं।
- इसमें कहा गया है कि सिद्धांत केवल भविष्यलक्षी प्रभाव से लागु होगा और पहले से किए गए पदोन्नति मामले को प्रभावित नहीं करेगा तथा जो पदोन्नति में पहले से ही आरक्षण प्रदान किया गया है वह निर्णय की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी रहेगा। इसने यह भी निर्णय दिया कि क्रीमी लेयर को बाहर रखा जा सकता है।
- 17 जून, 1995 को, संसद ने, सत्तरवें संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 16 में धारा (4A) को शामिल किया ताकि SCs और STs के लिए पदोन्नति में आरक्षण को सक्षम बनाया जा सके। संविधान में सत्तरहवें और अस्सीवें संशोधन की वैधता और उन संशोधनों के अनुरूप बनाए गए कानून को नागराज मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी।
- अनुच्छेद 16 (4A) की वैधता को सिद्ध करते हुए, न्यायालय ने कहा कि यह एक सक्षम प्रावधान है। “राज्य पदोन्नति में SCs और STs के लिए आरक्षण करने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन, यदि वह ऐसा करना चाहता है, तो उसे तीन पहलुओं पर मात्रात्मक डेटा एकत्र करना होगा – वर्ग का पिछड़ापन; सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता; और अनुच्छेद 335 द्वारा अनिवार्य सेवा की सामान्य दक्षता प्रभावित नहीं होनी चाहिए ”।
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Question 5 of 5
5. Question
निर्वाचन आयोग की शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- निर्वाचन आयोग उन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर सकता है जिनके द्वारा चुनावी अनाचार किया जाता है।
- संविधान निर्वाचन आयोग को यह निर्धारित करने का अधिकार देता है कि वह किसी उम्मीदवार के लाभ का पद धारण करने पर उसे अयोग्य ठहरा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
निर्वाचन आयोग की शक्तियों की सीमाएँ?
- निर्वाचन आयोग उन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित नहीं कर सकता है जिनके द्वारा चुनावी अनाचार (electoral malpractices) किया जाता है। यह मामला दर्ज करने का निर्देश दे सकता है।
- निर्वाचन आयोग के पास किसी भी राजनीतिक दल को गैर-पंजीकृत करने की शक्ति नहीं है। हालांकि, संविधान निर्वाचन आयोग को यह निर्धारित करने का अधिकार देता है कि वह किसी उम्मीदवार के उपयुक्त सरकार के तहत लाभ का पद धारण करने या दिवालिया घोषित होने या किसी विदेशी राज्य की नागरिकता हासिल करने पर उसे अयोग्य ठहरा सकता है।
- जब यह मामला सामने आता है कि क्या कोई उम्मीदवार उपर्युक्त में से किसी भी
- आधार पर अयोग्य है, तो भारत के राष्ट्रपति या राज्यपाल को इसे निर्वाचन आयोग को संदर्भित करना होगा। इस पर पोल पैनल का निर्णय बाध्यकारी है।
Incorrect
उत्तर: b)
निर्वाचन आयोग की शक्तियों की सीमाएँ?
- निर्वाचन आयोग उन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित नहीं कर सकता है जिनके द्वारा चुनावी अनाचार (electoral malpractices) किया जाता है। यह मामला दर्ज करने का निर्देश दे सकता है।
- निर्वाचन आयोग के पास किसी भी राजनीतिक दल को गैर-पंजीकृत करने की शक्ति नहीं है। हालांकि, संविधान निर्वाचन आयोग को यह निर्धारित करने का अधिकार देता है कि वह किसी उम्मीदवार के उपयुक्त सरकार के तहत लाभ का पद धारण करने या दिवालिया घोषित होने या किसी विदेशी राज्य की नागरिकता हासिल करने पर उसे अयोग्य ठहरा सकता है।
- जब यह मामला सामने आता है कि क्या कोई उम्मीदवार उपर्युक्त में से किसी भी
- आधार पर अयोग्य है, तो भारत के राष्ट्रपति या राज्यपाल को इसे निर्वाचन आयोग को संदर्भित करना होगा। इस पर पोल पैनल का निर्णय बाध्यकारी है।








