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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. बुद्ध की नागरिकता: भारत और नेपाल में शब्द-युद्ध

2. हिमालय क्षेत्र में भूतापीय जल-स्रोतों से कार्बन डाइऑक्‍साइड का उत्‍सर्जन: अध्ययन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)

2. अंतःसमुद्रीय संचार केबल

3. विश्व जैव ईंधन दिवस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘सुरक्ष्या’ (Surakhsya)

2. विकलांग आरक्षण के संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा संघ लोक सेवा आयोग को नोटिस

3. कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

बुद्ध की नागरिकता: भारत और नेपाल में शब्द-युद्ध


(Citizenship of Buddha: India and Nepal in war of words)

संदर्भ:

कुछ समय से, गौतम बुद्ध के मूल स्थान को लेकर भारत और नेपाल के बीच वाकयुद्ध जारी है।

विवाद का विषय

हाल ही में, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा बौद्ध धर्म के संस्थापक को सर्वकालीन महान भारतीय के रूप में वर्णित किया गया था। इसके तुरंत बाद काठमांडू में नेपाल के विदेश मंत्रालय द्वारा दावा किया गया कि, नेपाल भगवान बुद्ध की जन्म भूमि है।

इतिहास की दृष्टि से:

गौतम बुद्ध शाक्य गणराज्य के एक राजकुमार थे, जो भारत और नेपाल की वर्तमान सीमाओं में विस्तारित था।

  • इसकी राजधानी कपिलवस्तु थी। इतिहासकारों के मध्य कपिलवस्तु की अवस्थिति को लेकर मतैक्य नहीं है।
  • गौतम बुद्ध के पिता शाक्य गणराज्य के प्रमुख शुद्धोधन तथा माता मायामाया थी। इनके जन्म के समय तक शाक्य गणराज्य, कोसल राज्य के अधीन था।
  • बौद्ध ग्रंथों में, शाक्य प्रमुख के परिवार का संबंध इक्ष्वाकु वंश से बताया गया है। भगवान राम भी इक्ष्वाकु वंश के राजा थे।
  • कोसल राज्य के अधीन अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश के वंशज निवास करते थे, और इस वंश की शाखाएं नेपाल और भारत में फ़ैली हुई थी, तथा उस समय दोनों देशों के मध्य आज की भांति सीमायें निर्धारित नहीं थी।
  • बौद्ध ग्रंथों के अनुसार, गौतम बुद्ध का जन्म के समय उनकी मां महामाया यात्रा कर रही थीं। उनका जन्म नेपाल के लुंबिनी नामक स्थान पर एक बगीचे में हुआ था।
  • लुंबिनी को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया है तथा यह स्थान बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत की दृष्टि से:

  • गौतम बुद्ध का पालन-पोषण कपिलवस्तु में हुआ, तथा कपिलवस्तु की अवस्थिति की पहचान निश्चयात्मक रूप से नहीं की जा सकी है।
  • उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में कपिलवस्तु त्याग कर दिया तथा बिहार में स्थित राजगृह आकर ठहरे। वह इस समय तक राजकुमार गौतम थे।
  • यह निश्चित रूप से ज्ञात तथ्य है कि गौतम बुद्ध को भारत के बोधगया में ज्ञान की प्राप्त हुई। इसी स्थान पर वह गौतम बुद्ध कहलाये।
  • उन्होंने अपने जीवन के चार दशकों तक भारत-नेपाल की सीमाओं में फैले नगरों और गांवों में भ्रमण किया।
  • गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी के निकट दिया। ऊन्होने अपने जीवन काल में अधिकाँश भ्रमण मगध राज्य के विस्तृत साम्राजय में किया।
  • बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ था, जो कि वर्तमान उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित है।

निष्कर्ष:

  • गौतम बुद्ध के समय में नागरिकता की अवधारणा राज्य की राजनीतिक सीमाओं से बंधी हुई नहीं थी। राज्यों की सीमायें समय-समय पर बदलती रहीं। उनका जीवन ‘मानवता के नागरिक’ का प्रतिरूप था।
  • गौतम बुद्ध के नेपाली नागरिक होने या गौतम बुद्ध को नेपाली पहचान देने का नेपाल का दावा अनुचित प्रतीत होता है। सामान्य तौर पर बुद्ध के रूप में, गौतम ने भारत के निवासी के रूप में अपना जीवन व्यतीत किया। उनका जन्म नेपाल में हुआ था, उस समय उनकी गर्भवती माँ यात्रा कर रही थी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. बुद्ध के जीवन से जुड़े पवित्र स्थान
  2. चार महान सत्य
  3. आष्टांगिक मार्ग क्या है?
  4. इक्ष्वाकु वंश के बारे में
  5. जातक कथाएँ क्या हैं?
  6. महायान सूत्र क्या हैं?
  7. हीनयान और महायान बौद्ध धर्म के बारे में
  8. बौद्ध धर्म के बारे में

मेंस लिंक:

गौतम बुद्ध द्वारा बताये गए बौद्ध धर्म के नैतिक सिद्धांतों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

हिमालय क्षेत्र में भूतापीय जल-स्रोतों से कार्बन डाइऑक्‍साइड का उत्‍सर्जन: अध्ययन


(Geothermal springs in Himalayas release large amount of carbon dioxide: Study)

संदर्भ:

हाल ही में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी (WIHG) के वैज्ञानिकों द्वारा हिमालय क्षेत्र में भूतापीय जल-स्रोतों पर एक अध्ययन किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. भूतापीय जल-स्रोत (Geothermal springs) हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र में लगभग 10,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले हुए हैं।
  2. हिमालय क्षेत्र में विभिन्न तापमान और रासायनिक स्थितियों वाले लगभग 600 गर्म पानी के सोते हैं, और वे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का बड़ी मात्रा में उत्सर्जन करते हैं।
  3. इन तापीय जल-स्रोतों के लिए कार्बन डाइऑक्‍साइड की प्राप्ति, हिमालय क्षेत्र के कोर में मौजूद कार्बोनेट चट्टानों के मेटामोर्फिक डेकार्बोनाइजेशन तथा ग्रेफाइट के मैग्मा में परिवर्तित होने और इसका ऑक्सीकरण होने से होती है।
  4. अधिकांश तापीय जल-स्रोतों में बड़े पैमाने पर वाष्पीकरण होता है, इसके पश्चात सिलिकेट चट्टानों का अपक्षय होता है।

भूतापीय जल-स्रोत क्या हैं?

भू-गर्भ में स्थित जल के भूतापीय प्रक्रियाओं द्वारा गर्म होकर पृथ्वी की सतह पर बाहर निकलने से उत्पन्न जल-स्रोत को भूतापीय जल-स्रोत कहा जाता है

भूतापीय जल के पीछे विज्ञान:

  1. जैसा कि हम जानते हैं, पृथ्वी की गहराई में जाने पर तापमान बढ़ता जाता है और पृथ्वी की बाहरी कोर में मैग्मा की प्राप्ति होती है। इस मैग्मा (8001300 ° C) के चारो ओर पृथ्वी की विभिन्न परतें होती हैं।
  2. पृथ्वी की परतों में भूगार्भिक संचालनों के कारण दरार या भ्रंश उत्पन्न होने पर, पृथ्वी की मैग्मा परत से ऊपर की ओर भारी मात्रा में ऊष्मा का प्रवाह होता है।
  3. यह ऊष्मा भ्रंशो/दरारों के माध्यम से पृथ्वी की सतह की ओर स्थानांतरित होती है तथा भू-गर्भ में स्थित जल को गर्म करती है।
  4. जैसे-जैसे पानी का तापमान बढ़ता है, इसका घनत्व कम हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप भ्रंशो से होकर तप्त पानी ऊपर उठकर सतह पर गर्म झरनों के रूप स्फुटित होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. गर्म जल-स्रोत (हॉट स्प्रिंग्स) क्या हैं?
  2. गर्म जल-स्रोत के पीछे विज्ञान
  3. भारत में गर्म जल-स्रोतों के उदाहरण
  4. हिमालय का विभाजन
  5. हिमालय के गढ़वाल क्षेत्र का अवलोकन

मेंस लिंक:

ऊर्जा के विभिन्न गैर-पारंपरिक स्रोत कौन से हैं? क्या आपको लगता है कि भारत में इनका पर्याप्त उपयोग किया गया है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC)


(International Finance Corporation)

संदर्भ:

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (International Finance Corporation– IFC) द्वारा ‘एंडिया पार्टनर्स’ फंड-II (Endiya Partners Fund II) में $ 10 मिलियन डॉलर का निवेश करने की घोषणा की गयी है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम (IFC) के बारे में:

  • यह एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान है जो विकासशील देशों में निजी क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए निवेश, सलाहकार और संपत्ति प्रबंधन सेवाएं प्रदान करता है।
  • यह विश्व बैंक समूह का सदस्य है और इसका मुख्यालय संयुक्त राज्य अमेरिका के वाशिंगटन, डी.सी. में है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1956 में विश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्रक शाखा के रूप में की गयी थी, तथा इसका उद्देश्य गरीबी को कम करने तथा विकास को बढ़ावा देने हेतु केवल लाभ-कारी तथा व्यावसायिक परियोजनाओं में निवेश करके आर्थिक विकास को आगे बढ़ाना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम का स्वामित्व तथा प्रशासन सदस्य देशों द्वारा किया जाता है, किंतु इसके कार्य-संचालन के लिए इसका निजी कार्यकारी कार्यालय तथा कर्मचारी हैं।
  • यह एक निगम है जिसके शेयरधारक सदस्य देशों की सरकारें होती हैं। ये सदस्य देश निवेश हेतु राशि प्रदान करते है, तथा इन्हें अंतर्राष्ट्रीय वित्त निगम से संबंधित विषयों पर मतदान का अधिकार है।
  • वर्ष 2009 से, IFC ने नए विकास लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित किया है, जिन्हें इसकी परियोजनाओं द्वारा पूरा किया जायेगा। इसका लक्ष्य संवहनीय कृषि के अवसरों को बढ़ाना, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में सुधार, माइक्रोफाइनेंस, अवसंरचना निर्माण, छोटे व्यवसायों की राजस्व वृद्धि तथा जलवायु स्वास्थ्य में निवेश करने में सहायता करना है।
  • यह विभिन्न प्रकार के ऋण तथा इक्विटी फाइनेंसिंग सेवायें प्रदान करता है और कंपनियों को ऋण जोखिम का सामना करने में सहायता करता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व बैंक समूह के तहत संस्थाएँ
  2. IDA और IBRD के मध्य अंतर
  3. IDA द्वारा ऋण के प्रकार
  4. IFC के बारे में
  5. विश्व बैंक के महत्वपूर्ण संस्थानों का मुख्यालय

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)


(National Infrastructure Pipeline)

संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्री द्वारा राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure PipelineNIP) के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड का शुभारम्भ किया गया।

प्रमुख बिंदु:

  • ऑनलाइन डैशबोर्ड की परिकल्पना, नये भारत में आधारभूत परियोजनाओं से संबंधित जानकारियों को प्राप्त करने हेतु सभी हितधारकों के लिए वन स्टॉप समाधान के रूप में की गई है।
  • यह डैशबोर्ड इंडिया इन्वेस्टमेंट ग्रिड (IIG) (indiainvestmentgrid.gov.in) पर कार्य कर रहा है।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के बारे में:

2019-20 के बजट भाषण में वित्त मंत्री द्वारा अगले 5 साल में अवसंरचना परियोजनाओं के लिए 100 लाख करोड़ रुपये के व्यय की घोषणा की गयी थी।

  1. NIP देश भर में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में अपनी तरह की एक अनूठी पहल है।
  2. इससे परियोजना की तैयारी में सुधार होगा, तथा अवसंरचना में निवेश (घरेलू और विदेशी दोनों) आकर्षित होगा। साथ ही यह वित्त वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अहम होगा।
  3. NIP में आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना परियोजना दोनों को सम्मिलित किया गया है।

कार्य बल रिपोर्ट:

  • मई 2020 में अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) पर एक कार्य बल (Task force) का गठन किया गया था।
  • उच्च स्तरीय कार्य बल ने वित्त वर्ष 2020-25 के दौरान 111 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित बुनियादी ढांचा निवेश के साथ राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर एक अंतिम रिपोर्ट जमा की थी।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु तथा महत्वपूर्ण सिफारिशें

  • निवेश की आवश्यकता: अवसंरचना परियोजनाओं के निर्माण तथा आर्थिक विकास में वृद्धि हेतु अगले पांच वर्षों (2020-2025) में 111 लाख करोड़ ₹ का निवेश।
  • कुल परियोजनाओं में ऊर्जा, सड़क, रेलवे और शहरी क्षेत्रों की परियोजनाएं सबसे अधिक है, जिन पर कुल राशि का लगभग 70% व्यय अनुमानित है।
  • इन परियोजनाओं में केंद्र (39 प्रतिशत) और राज्य (40 प्रतिशत) की साझेदारी होगी, जबकि निजी क्षेत्र की 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
  • परिसंपत्तियों की बिक्री हेतु आक्रामक रवैया।
  • अवसंरचना परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण।
  • विकास वित्त संस्थानों की स्थापना।
  • नगरपालिका बांड बाजार को मजबूत करना।

कार्य बल ने निम्नलिखित तीन समितियों की स्थापना की सिफारिश की है:

  1. NIP प्रगति की निगरानी हेतु समिति
  2. क्रियान्वयन प्रक्रिया अनुपालन हेतु मंत्रालय स्तर पर संचालन समिति
  3. NIP हेतु वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए ‘आर्थिक मामलों के विभाग’ (DEA) की एक संचालन समिति।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. NIP क्या है? इसे कब लॉन्च किया गया था?
  2. NIP के तहत शामिल परियोजनाएं
  3. NIP पर अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में कार्य बल द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें
  4. कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार प्रस्तावित तीन समितियां
  5. भारत निवेश ग्रिड क्या है?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के महत्व और विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

अंतःसमुद्रीय संचार केबल


(What is Submarine communications cable?)

संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा चेन्नई से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को जोड़ने वाली अंतःसमुद्रीय ऑप्टिकल फाइबर केबल (Optical Fibre CableOFC) की शुरुआत की गयी।

इस परियोजना की आधारशिला पोर्ट ब्लेयर में दिसंबर 2018 को रखी गयी थी।

प्रमुख बिंदु:

  • केंद्र शासित प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए लगभग 2,300 किलोमीटर की अंतःसागरीय ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) विछाने में लगभग 1,224 करोड़ रुपये की लागत आयी है।
  • इस परियोजना के तहत चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर और सात अन्य द्वीपों – स्वराज दीप (हैवलॉक), लॉन्ग आईलैंड, रंगत, हटबे (लिटिल अंडमान), कामोर्ता, कार निकोबार और कैंपबेल बे (ग्रेट निकोबार) के लिए बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान की जायेगी।
  • इस परियोजना को सरकार द्वारा संचार मंत्रालय के अधीन यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund) के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है।

इस परियोजना से लाभ

  • इस क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी से टेलीमेडिसिन और टेली-एजुकेशन जैसी ई-गवर्नेंस सेवाएं मिलने में भी आसानी होगी।
  • ई-कॉमर्स में अवसरों से छोटे उद्यमों को फायदा होगा, जबकि शिक्षण संस्थान ई-लर्निंग और ज्ञान को साझा करने में बैंडविड्थ की बढ़ी हुई उपलब्धता का उपयोग करेंगे।
  • बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग सेवाएं और अन्य मध्यम एवं बड़े उद्यम भी बेहतर कनेक्टिविटी से लाभान्वित होंगे।
  • परियोजना के शुरू होने के बाद, अंडमान और निकोबार में इंटरनेट बिल में भी काफी कमी आएगी।

अंतःसागरीय संचार केबल क्या होती है?

  • यह समुद्र तल पर विछाई गयी ऑप्टिकल फाइबर केबल होती है, जिसके माध्यम से मुख्य भूमि तथा सागरों तथा महासागरों में स्थित स्थलीय भागों के मध्य दूरसंचार संकेतों को भेजा जाता है।
  • ऑप्टिकल फाइबर के तत्वों को विशिष्ट प्रकार से प्लास्टिक की परतों का लेप चढ़ाया जाता है तथा पर्यावरण के लिए उपयुक्त एक सुरक्षात्मक ट्यूब में अंतर्विष्‍ट किया जाता है।

अंतःसागरीय फाइबर केबल के प्रकार:

  • अंतःसागरीय फाइबर केबल दो प्रकार के होते हैं: गैर-आवर्तक (unrepeatered) तथा आवर्तक (repeatered)।
  • छोटे केबल मार्गों में गैर-आवर्तक केबल को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि इसमें आवर्तकों की आवश्यकता नहीं होती है, जिसे लागत कम हो जाती है; हालाँकि, इस प्रकार की केबल में अधिकतम संचरण दूरी सीमित होती है।

अंतःसागरीय केबलों का महत्व:

  • वर्तमान में पार-महासागरीय 99 प्रतिशत डेटा ट्रैफ़िक, अंतःसागरीय केबलों के द्वारा होता है।
  • अंतःसागरीय केबलों की विश्वसनीयता काफी अधिक होती है, तथा कभी केबल टूटने की स्थिति होने पर डेटा संचार के अन्य कई रास्ते उपलब्ध हो जाते हैं।
  • अंतःसागरीय केबलों की डेटा संचरण क्षमता प्रति सेकंड टेराबाइट्स में होती है, जबकि उपग्रहों द्वारा आमतौर पर प्रति सेकंड केवल 1,000 मेगाबाइट्स की गति से डेटा का संचरण करते हैं और इनमे विलंबता-दर अधिक होती है।

चुनौतियां:

एक विशिष्ट अधिक टेराबाईट क्षमता युक्त, पार-समुद्रीय अंतःसागरीय केबल प्रणाली के निर्माण में कई सौ मिलियन डॉलर का व्यय होता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑप्टिकल फाइबर के बारे में
  2. अंतःसागरीय फाइबर केबल के प्रकार
  3. चेन्नई-अंडमान और निकोबार द्वीप अंतःसागरीय संचार केबल के बारे में।
  4. यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड की प्रमुख विशेषताएं

मेंस लिंक:

चेन्नई-अंडमान और निकोबार द्वीप अंतःसागरीय संचार केबल पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

  

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विश्व जैव ईंधन दिवस


(World Biofuel day)

संदर्भ:

विश्‍व जैव ईंधन दिवस प्रति वर्ष 10 अगस्‍त को मनया जाता है। इसका उद्देश्य परम्‍परागत जीवाश्म ईंधन के एक विकल्‍प के रूप में गैर-जीवाश्म ईंधनों के महत्‍व के बारे में जागरूकता पैदा करना है।

  • यह दिवस सर रुडोल्फ क्रिश्चियन कार्ल डीजल (डीजल इंजन के आविष्कारक) के शोध प्रयोगों के सम्मान में मनाया जाता है, इन्होने वर्ष 1893 में मूंगफली के तेल से एक इंजन चलाया था।
  • भारत में, विश्‍व जैव ईंधन दिवस का आयोजन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा वर्ष 2015 से प्रतिवर्ष किया जा रहा है।
  • भारत में 2020 विश्व जैव ईंधन दिवस का विषय जैव ईंधन की ओर आत्‍मनिर्भर भारत।” है।

जैव ईंधन क्या हैं?

कोई भी हाइड्रोकार्बन ईंधन, जो किसी कार्बनिक पदार्थ (जीवित अथवा मृत पदार्थ) से कम समय (दिन, सप्ताह या महीने) में निर्मित होता है, जैव ईंधन माना जाता है।

जैव ईंधन प्रकृति में ठोस, तरल या गैसीय हो सकते हैं।

  1. ठोस: लकड़ी, पौधों से प्राप्त सूखी हुई सामग्री, तथा खाद
  2. तरल: बायोएथेनॉल और बायोडीजल
  3. गैसीय: बायोगैस

जैव ईंधन का वर्गीकरण:

पहली पीढ़ी के जैव ईंधन: को पारंपरिक जैव ईंधन भी कहा जाता है। वे चीनी, स्टार्च, या वनस्पति तेल आदि जैसी चीजों से निर्मित होते हैं। ध्यान दें कि ये सभी खाद्य उत्पाद हैं। खाद्य-सामग्री से निर्मित किसी भी जैव ईंधन को मानव भोजन के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है तथा इसे पहली पीढ़ी का जैव ईंधन माना जाता है।

दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन: संवहनीय फीडस्टॉक से उत्पादित होते हैं। फीडस्टॉक की संवहनीयता, इसकी उपलब्धता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर इसके प्रभाव, भूमि उपयोग पर इसके प्रभाव तथा इसकी खाद्य आपूर्ति को खतरे में डालने की क्षमता से परिभाषित होती है।

दूसरी पीढ़ी का कोई जैव ईंधन खाद्य फसल नहीं होता है, हालांकि कुछ खाद्य उत्पाद, जब वे उपभोग योग्य नहीं बचते है, तब दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन बन सकते हैं। दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन को अक्सर “उन्नत जैव ईंधन” कहा जाता है।

तीसरी पीढ़ी के जैव ईंधन: शैवाल से प्राप्त जैव ईंधन हैं। इन जैव ईंधन को इनकी विशिष्ट उत्पादन प्रणाली तथा पहली और दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन की अधिकांश कमियों में कमी करने की क्षमता के कारण अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।

चौथी पीढ़ी के जैव ईंधन: इन ईंधनों के उत्पादन में, जिन फसलों को अधिक मात्रा में कार्बन सोखने के लिए आनुवंशिक रूप से इंजीनियरिंग करके तैयार किया जाता हैं, उन्हें बायोमास के रूप में उगाया और काटा जाता है। इसके पश्चात इन फसलों को दूसरी पीढ़ी की तकनीकों का उपयोग करके ईंधन में परिवर्तित किया जाता है।

जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार की पहलें:

वर्ष 2014 से भारत सरकार ने कई ऐसी पहले की हैं जिनसे अन्य ईंधनों में जैव-ईंधनों को मिलाने की मात्रा को बढ़ाया जा सके।

  1. मुख्य पहलों में शामिल हैं: एथेनोल के लिये नियंत्रित मूल्य प्रणाली, तेल विपणन कंपनियों के लिये प्रक्रिया को सरल बनाना, 1951 के उद्योग (विकास एवं नियमन) अधिनियम में संशोधन तथा एथेनोल की खरीद के लिये लिग्नोसेलुलोसिक तरीके को अपनाना।
  2. सरकार ने जून 2018 में राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति – 2018 को मंजूर किया है। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक 20% एथेनोल और 5% जैव डीजल मिश्रित करना है।
  3. अन्य कामों के अलावा इस नीति ने एथेनोल उत्पादन के लिये कच्चे माल के दायरे को व्यापक बनाया है साथ ही उच्च कोटि के जैव-ईंधनों के उत्पादन को लाभकारी बनाया है।
  4. सरकार ने शीरे पर आधारित सी-तत्व की प्रचुरता वाले एथेनोल का मूल्य में वृद्धि की है, ताकि एथेनोल मिश्रण के कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा सके।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. जैव ईंधन क्या है?
  2. जैव ईंधन का वर्गीकरण।
  3. जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति का अवलोकन।
  4. इथेनॉल क्या है? इसका उत्पादन कैसे होता है?

मेंस लिंक:

भारत के लिए जैव ईंधन के महत्व पर चर्चा करें? क्या जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति भारत को जैव ईंधन क्षमता को मुक्त करने में सहायक होगी? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘सुरक्ष्या’ (Surakhsya)


  • ‘सुरक्ष्या’ मानव हाथी टकराव पर एक राष्ट्रीय पोर्टल है।
  • यह वास्तविक समय पर जानकारी के संग्रह और सही समय पर मानव-हाथी टकरावों को निपटाने के लिए आंकड़ा संग्रह प्रोटोकॉल, डेटा ट्रांसमिशन, और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन टूल सेट करने में मदद करेगा।

विकलांग आरक्षण के संदर्भ में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा संघ लोक सेवा आयोग को नोटिस


हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय में सिविल सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए जारी की गयी प्रारंभिक परीक्षा अधिसूचना में विकलांगों को दिए जाने वाले न्यूनतम आरक्षण की अवहेलना करने पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अधिसूचना को चुनौती दी गयी। इस संदर्भ में न्यायालय ने UPSC को नोटिस जारी किया है।

  • याचिका में दावा किया गया है कि UPSC के नोटिस में 796 रिक्तियों के लिए आवेदन मांगे गए, जिसमे विकलांग लोगों के लिए मात्र 24 रिक्तियां निर्धारित की गयी हैं।
  • यह विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (Rights of Persons with DisabilitiesRPwD Act), 2016 की धारा 34 के तहत चार प्रतिशत अनिवार्य आरक्षण से कम है।

कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन


(sub mission on agricultural mechanization)

इस मिशन को अप्रैल 2014 में उत्पादकता बढ़ाने हेतु कृषि यंत्रीकरण के समावेशी विकास के उद्देश्य से पेश किया गया था।

यह योजना कृषि मशीनीकरण के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु सभी राज्यों में कार्यान्वित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को उपकरणो की खरीद पर 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी प्रदान की जाती है।


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