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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 8 August

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. पिंगली वेंकैया

 

सामान्य अध्ययन-II

1. भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राइफेड)

2. राष्ट्रीय स्वछता केंद्र

3. इतालवी मरीन केस: क्षतिपूर्ति के पश्चात ही सुनवाई समाप्त होगी- उच्चत्तम न्यायालय

 

सामान्य अध्ययन-III

1. फूड सिस्टम विजन पुरुस्कार

2. दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति

3. तेंदुओं पर TRAFFIC द्वारा अध्ययन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. के वी कामथ समिति

2. कारोबार विश्वास सूचकांक

3. लोया जिरगा (Loya Jirga)

4. कवकाज़ (Kavkaz) 2020

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

पिंगली वेंकैया


(Pingali Venkayya)

सदर्भ:

जन्मोत्सव- 2 अगस्त।

  • पिंगली वेंकैया का जन्म 2 अगस्त, 1876 को आंध्र प्रदेश में हुआ था।
  • इन्हें उन्हें झंडा वेंकैया के नाम से भी जाना जाता है।

पिंगली वेंकैया कौन थे?

पिंगली वेंकैया एक प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तथा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अभिकल्पक (Designer) थे। वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज, इनके द्वारा तैयार किये गए प्रारूप पर आधारित है।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास

  • द्वितीय बोअर युद्ध के दौरान दक्षिण अफ्रीका में वेंकैया की पहली बार महात्मा गांधी से मुलाकात हुई। उस समय पिंगली ब्रिटिश सेना में शामिल थे।
  • वर्ष 1918 से 1921 के मध्य, वेंकैया, कांग्रेस के प्रत्येक सत्र में भारत का एक धवज होने का मुद्दा उठाते रहे। उस समय, वह मछलीपट्टनम में आंध्र नेशनल कॉलेज में प्रवक्ता के रूप में अध्यापन कार्य कर रहे थे।
  • उन्होंने महात्मा गांधी से विजयवाड़ा में पुनः मुलाकात की और उन्हें अपने द्वारा तैयार किये गए ध्वज की विभिन्न डिजाइनों को दिखाया। गांधी जी ने राष्ट्रीय ध्वज की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, वेंकय्या से वर्ष 1921 में राष्ट्रीय कांग्रेस के होने वाले सम्मलेन के लिए ध्वज की एक नयी डिजाइन तैयार करने के लिए कहा।
  • प्रारंभ में, वेंकय्या द्वारा तैयार किये गए ध्वज के प्रारंभिक स्वरूप में भगवा और हरे रंग की दो पट्टियाँ थी, बाद में इसमें एक सफ़ेद रंग की पट्टी तथा इसके केंद्र में चरखा की आकृति को जोड़ा गया। (ध्वज के मध्य में चरखे का सुझाव लाला हंसराज ने दिया था- यह भारतीयों की आत्मनिर्भरता का प्रतीक के रूप में माना गया था।)
  • इस ध्वज को आधिकारिक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा 1931 में अपनाया गया था।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. एंग्लो बोअर युद्ध के बारे में
  2. वेंकैया द्वारा डिज़ाइन किया गया झंडा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा आधिकारिक तौर पर कब स्वीकार किया गया था?
  3. संविधान सभा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को कब अपनाया गया
  4. भारतीय धवज संहिता- अवलोकन
  5. भारत में राष्ट्रीय ध्वज को कौन निर्मित करता है?

मेंस लिंक:

भारतीय धवज संहिता, 2002 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राइफेड)


(Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India- TRIFED)

संदर्भ:

जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (Tribal Cooperative Marketing Development Federation of India- TRIFED) द्वारा 6 अगस्त, 2020 को 33वें स्थापना दिवस मनाया गया।

TRIFED के बारे में

  • TRIFED की स्थापना अगस्त 1987 में भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्था के रूप में बहु-राज्य सहकारी समितियों अधिनियम, 1984 के तहत की गई थी।
  • यह जनजातीय मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • इसका उद्देश्य लघु वनोत्पादों (Minor Forest ProduceMFP) तथा अधिशेष कृषि उत्पादों (Surplus Agricultural ProduceSAP) के व्यापार को संस्थागत रूप से एकत्रित / संवर्धित करके देश के आदिवासियों के सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायता करना है।

प्रमुख कार्य

  • TRIFED, संधारणीय बाजार का सृजन करने और सेवा प्रदाता दोनों की दोहरी भूमिका निभाता है। यह आदिवासियों की कार्य-प्रणालियों को ज्ञान और उपकरणों के माध्यम से व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से बेहतर बनाता है तथा आदिवासियों के विपणन दृष्टिकोण को विकसित करने में उनकी सहायता करता है।
  • यह जागरूकता तथा स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups- SHGs) के गठन के माध्यम से आदिवासियों की क्षमता निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्यरत है।
  • संगठन, आदिवासियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इनके उत्पादों के विपणन के लिए अवसरों की खोज तथा अवसरों के निर्माण करने में सहायता करता है।

TRIFED द्वारा हाल ही में शुरू की गयी पहलें

  1. हाल ही में ट्राइफेड द्वारा वन धन समाजिक दूरी जागरूकता अभियान, शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य COVID-19 महामारी के दौरान गैर-काष्ठ वन उत्पादों (Non Timber Forest ProduceNTFP) के एकत्रीकरण में लगे आदिवासियों को सामाजिक दूरी, होम क्वारंटाइन, स्वच्छता आदि जैसे प्रमुख निवारक व्यवहारों के लिए आदिवासियों को शिक्षित करना है।
  2. वन धन स्वयं सहायता समूहों के लिए, उनके सुरक्षित रूप से कार्य-संचालन के लिए आवश्यक, सुरक्षा मास्क और स्वच्छता उत्पाद (साबुन, कीटाणुनाशक इत्यादि) प्रदान करने के लिए पहल की गई हैं।
  3. आदिवासियों की आजीविका में वृद्धि तथा सुरक्षा हेतु लघु वनोत्पादों (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को फिर से निर्धारित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
  4. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, जनजातीय मामलों के मंत्रालय और TRIFED के द्वारा संयुक्त रूप से ट्राईफ़ूड योजना (TRIFOOD Scheme ) का आरंभ किया गया है।
  5. ट्राइफेड द्वारा MSME मंत्रालय के सहयोग से “आदिवासियों के लिए तकनीक” (Tech for Tribals) पहल का आरम्भ किया गया है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री वन धन योजना (PMVDY) के अंतर्गत पंजीकृत वन्य-उत्पाद संग्राहक आदिवासियों का क्षमता विकास और उनमें उद्यमशीलता कौशल विकसित करना है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘आदिवासियों के लिए तकनीक’ – लक्ष्य
  2. प्रधान मंत्री वनधन योजना (PMVDY) के बारे में
  3. TRIFOOD योजना
  4. लघु वनोत्पादों (MFP) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)
  5. वन धन समाजिक दूरी जगरूकता अभियान- उद्देश्य
  6. ट्राइफेड के बारे में

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स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विकास प्रक्रिया तथा विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, विभिन्न समूहों और संघों, दानकर्ताओं, लोकोपकारी संस्थाओं, संस्थागत एवं अन्य पक्षों की भूमिका।

राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र


संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र का उद्घाटन किया गया।

यह क्या है?

‘राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र’, स्वच्छ भारत मिशन पर एक परस्पर संवादात्‍मक (Interactive) अनुभव केंद्र  है।

  • महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि के तहत राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र (RSK) को पहली बार प्रधानमंत्री द्वारा गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के अवसर पर 10 अप्रैल 2017 को घोषित किया गया था।
  • राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र (RSK) में डिजिटल और आउटडोर इंस्टॉलेशन के संतुलित मिश्रण से स्वच्छता एवं संबंधित पहलुओं के बारे में विभिन्‍न सूचनाएं, जागरूकता और जानकारियां प्राप्‍त होंगी।

RSK की भूमिकाएँ और कार्य:

  1. याह आगामी पीढी के लिए भारत की स्वच्छता की गाथा – दुनिया के इतिहास में सबसे बड़े व्यवहार परिवर्तन अभियान की सफल यात्रा से परिचित कराएगा।
  2. RSK, संवादात्‍मक एलईडी पैनलों, होलोग्राम बॉक्स, इंटरएक्टिव गेम, इत्‍यादि के माध्यम से गांधी जी के ‘स्वच्छ भारत’ विजन को साकार करने के लिए किए गए विभिन्‍न उल्‍लेखनीय कार्यों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएगा।
  3. यह मिशन की सफलता के मुख्य अवयवों और देश के सत्याग्रह से लेकर स्वच्छाग्रह तक भारत की यात्रा के उपाख्यानों का प्रदर्शन करेगा।
  4. यह स्वछता और संबंधित पहलुओं पर सूचनायें, जागरूकता और शिक्षा प्रदान करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वच्छ भारत मिशन (SBM) और इसके उद्देश्य
  2. SBM- शहरी के तहत प्राप्त लक्ष्य
  3. राष्ट्रीय स्वछता केंद्र के बारे में
  4. विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ‘खुले में शौच मुक्त’ (ODF) स्थिति

मेंस लिंक:

स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

इतालवी मरीन केस: क्षतिपूर्ति के पश्चात ही सुनवाई समाप्त होगी- उच्चत्तम न्यायालय


(Italian marines case: will close trial only after victims’ kin get ‘hefty’ compensation, says SC)

संदर्भ:

हाल ही में, फरवरी 2012 में की गयी भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपों का सामना कर रहे दो इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ मामलों को बंद करने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा है, कि पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा मिलने के बाद ही सुनवाई समाप्त होगी।

न्यायालय की टिप्पणी

  • उच्चत्तम न्यायालय ने कहा है, कि वह पीड़ितों के परिवारों को सुने बिना कोई आदेश पारित नहीं करेगा।
  • पीडितो के परिवारजनों को पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए, इसके बाद ही भारत में इतालवी नौसैनिकों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमे को समाप्त किया जायेगा।

पृष्ठभूमि:

3 जुलाई को, केंद्र सरकार द्वारा शीर्ष न्यायालय में दो इतालवी नौसैनिकों के खिलाफ भारत में न्यायिक कार्यवाही बंद करने की मांग की गई थी।

केंद्र सरकार का कहना है, कि इस मामले में  भारत सरकार ने हेग स्थित ‘स्थायी मध्यस्थता न्यायालय’ (Permanent Court of ArbitrationPCA) द्वारा दिए गए निर्णय को स्वीकार कर लिया है। इसके अनुसार, भारत इस मामले में मुआवजा पाने के लिए हकदार है, किंतु इतालवी नौसैनिकों को ‘आधिकारिक प्रतिरक्षा’ प्राप्त होने के कारण इन पर मुकदमा चलाना भारत के अधिकार-क्षेत्र में नहीं है।

स्थायी मध्यस्थता न्यायालय का निर्णय  

  • नौसैनिक, राज्य की ओर से नियुक्त तथा कार्यरत थे, अतः उन्हें प्रतिरक्षा की आधिकारिक छूट प्राप्त है।
  • नौसनिकों के प्रतिरक्षा-अधिकार पर निर्णय करने का अधिकार इटली का होगा। अतः भारत उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकता है।
  • इटली ने ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के तहत भारत की नौवहन स्वतंत्रता का उल्लंघन किया।
  • UNCLOS के प्रावधानों के तहत भारतीय अधिकारियों ने समुद्री कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अतः इटली, भारत को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है।

वर्तमान स्थिति

  • स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) द्वारा दिया गया निर्णय, भारतीय उच्चत्तम न्यायालय के वर्ष 2013 में सुनाये गए के फैसले के विपरीत है। इस फैसले में उच्चत्तम न्यायालय ने इतालवी नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के लिए भारत सरकार संघ के अधिकार को बरकरार रखा था।
  • अतः, यदि कोई अंतरराष्ट्रीय निर्णय, भारतीय कानूनों के विरुद्ध होता है, तो इसे, भारत के ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) पर हस्ताक्षरकर्ता होने के बाद भी, तभी लागू किया जा सकता है जब इसे संविधान के अनुच्छेद 253 के अंतर्गत कानून बनाया जाए।

अगला कदम

  1. अदालत ने केंद्र सरकार से इटली के साथ ‘भारी’ मुआवजे पर बातचीत करने के लिए कहा है।
  2. न्यायालय ने केंद्र को एक सप्ताह के भीतर पीड़ितों के परिवारों को मामले में अभियोजित करने का आदेश दिया है।

इतालवी नौसैनिकों के मामले का अवलोकन

वर्ष 2012 में, एक इतालवी पोत ‘एनरिका लेक्सी’ पर सवार दो इतालवी नौसैनिकों ने भारतीय पोत ‘सेंट एंथोनी’ पर सवार दो भारतीय मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी।

घटना के समय मछली पकड़ने का पोत भारतीय जल क्षेत्र की सीमा के भीतर था, अतः यह अपराध भारत के कानूनों के तहत गिरफ्तारी तथा अभियोजन के अंतर्गत आता है।

  • अंततः, नौसैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया। परन्तु, बाद में नौसैनिकों को भारत से रिहा कर इटली भेज दिया गया।
  • उस समय, भारत ने उच्चत्तम न्यायालय के निर्देशानुसार, अधिकार क्षेत्र की प्रयोज्यता का निर्धारण करने के लिए एक विशेष अदालत गठित की थी।
  • इस बीच, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (National Investigation Agency-NIA) ने ‘नौ-परिवहन सुरक्षा विधिविरुद्ध कार्य दमन अधिनियम’ (Suppression of Unlawful against Safety of Maritime Navigation) तथा ‘फिक्स्ड प्लेटफॉर्म्स ऑन कॉन्टिनेंटल शेल्फ एक्ट’, 2002 को लागू कर दिया।
  • इतालवी नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के अधिकार को लेकर भारत और इटली के मध्य विवाद की सुनवाई अंतरार्ष्ट्रीय ‘स्थायी मध्यस्थता न्यायालय’ (PCA) में चल रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PCA- रचना, कार्य और सदस्य
  2. UNCLOS क्या है?
  3. UNCLOS के अनुच्छेद 87, 90 और 100 किससे संबंधित हैं?
  4. इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के बारे में
  5. NIA क्या है?
  6. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के बारे में
  7. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 253

मेंस लिंक:

PCA के कार्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

फूड सिस्टम विज़न पुरस्कार


(Food System Vision Prize)

  • यह विश्व भर के संगठनों के लिए वर्ष 2050 तक एक पुनर्योजी (Regenerative) और पौष्टिक खाद्य प्रणाली की परिकल्पना विकसित करने के लिए एक आमंत्रण है।
  • इसके अंतर्गत $ 200,000 अमरीकी डालर का नकद प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता है।
  • इसे अमेरिका की ‘द रॉकफेलर फाउंडेशन’ (The Rockefeller Foundation) तथा अन्य दो संगठनों – सेकंडम्यूज (SecondMuse) तथा ओपनआईडीईओ (OpenIDEO)- की भागीदारी में शुरू किया गया था।

फूड सिस्टम विजन क्या है?

यह वास्तव में भविष्य के बारे में एक कहानी है जो निम्नलिखित छह परस्पर अंतर्संबंधित विषयों को संबोधित करती है:

  1. पर्यावरण
  2. आहार
  3. अर्थशास्त्र
  4. संस्कृति
  5. प्रौद्योगिकी
  6. नीति

चर्चा का कारण

  • हाल ही में, रॉकफेलर फाउंडेशन (Rockefeller Foundation) द्वारा फूड सिस्टम विज़न 2050 पुरस्कार के लिये विश्व के शीर्ष 10 विज़नरीज़ (Visionaries) में से एक के रूप में हैदराबाद स्थित गैर-लाभकारी संगठन नंदी फाउंडेशन (Naandi Foundation) को चुना गया है।
  • नंदी फाउंडेशन को अपने ‘अराकुनोमिक्स’ (Arakunomics) मॉडल के लिए पुरुस्कृत किया गया है।

अराकुनोमिक्स मॉडल क्या है?

  • यह एक नया एकीकृत आर्थिक मॉडल है जो ‘पुनर्योजी कृषि’ (Regenerative Agriculture) के माध्यम से किसानों के लिये लाभ तथा उपभोक्ताओं के लिये गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
  • यह मॉडल अराकू (Araku) क्षेत्र के आदिवासी किसानों के लिए उपहार है। इस आर्थिक मॉडल के आधार पर आदिवासी किसानों ने अराकु क्षेत्र में विश्व स्तरीय कॉफ़ी का उत्पादन किया जिसे वर्ष 2017 में पेरिस में लॉन्च किया गया था। इसके साथ ही इन आदिवासी किसानों ने 955 से अधिक गाँवों में 25 मिलियन पेड़ लगाकर उच्च स्तर पर कार्बन उत्पादन करने वाले अराकू क्षेत्र का रूपांतरण कर दिया है।

नंदी फाउंडेशन के चुनाव के कारण

अराकू क्षेत्र में अराकुनोमिक्स मॉडल की सफलता से प्रेरित होकर वर्धा, महाराष्ट्र के कृषि समुदायों की आजीविका में सहयोग करने तथा इसके साथ ही दिल्ली में इस मॉडल को अपनाया गया है।

नंदी फाउंडेशन, पूरे भारत में दस लाख एकड़ से अधिक भूमि में कृषि का रूपांतरण करके हजारों कृषि रोजगार का निर्माण कर अपनी छाप छोड़ने का लक्ष्य रखता है।

इसके अलावा, अरकुनोमिक्स मॉडल ‘फूड विजन 2050’ के अनुरूप है। फूड विजन 2050, ABCDEFGH फ्रेमवर्क पर केंद्रित है:

  • कृषि (Agriculture)
  • जीवविज्ञान (Biology)
  • खाद (Compost)
  • विकेंद्रीकृत निर्णय (Decentralised decision-making)
  • उद्यमी (Entrepreneurs)
  • परिवार (Families)
  • वैश्विक बाजार (Global Markets)
  • धारा परिवर्तन नजरिया (Headstands or turning current approaches on their head)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अरकुनोमिक्स क्या है?
  2. फूड सिस्टम विज़न पुरस्कार के बारे में।
  3. पुरस्कार की घोषणा किसके द्वारा की जाती है?
  4. हाल ही में किस भारतीय संगठन को इस पुरस्कार के लिए चुना गया?

मेंस लिंक:

अरकुनोमिक्स पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

दिल्ली सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति


(Delhi government launches electric vehicle policy)

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी के लिए इलेक्ट्रिक वाहन नीति का आरंभ किया गया है। इस नीति से, सरकार का उद्देश्य दिल्ली की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और राजधानी में प्रदूषण के स्तर को कम करना है।

नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. इस नीति का लक्ष्य वर्ष 2024 राष्ट्रीय राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों को 25% तक करना है। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहन केवल 0.29% है।
  2. ई-वाहनों के लिए पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में छूट प्रदान की जायेगी।
  3. इसके अंतर्गत, दोपहिया वाहनों, ऑटो, ई-रिक्शा और मालवाहक वाहनों के लिए 30,000 रु. तक का तथा कारों के लिए 1.5 लाख तक की सब्सिडी दी जायेगी।
  4. सरकार इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल्स के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध करायेगी।
  5. नीति को लागू करने के लिए एक ‘ईवी सेल’ (EV Cell) को स्थापित किया जाएगा।
  6. सरकार एक ‘राज्य इलेक्ट्रिक वाहन बोर्ड’ का गठन करेगी।
  7. एक वर्ष में 200 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे ताकि इलेक्ट्रिक वाहन चालकों के लिए तीन किलोमीटर के दायरे में चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध सके।
  8. दिल्ली सरकार इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत ‘स्क्रैपिंग प्रोत्साहन’ देगी।
  9. युवाओं को रोजगार हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा। इस नीति के कार्यान्वयन के बाद, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को बड़े पैमाने पर प्रशक्षित युवाओं की आवश्यकता होगी।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

तेंदुओं पर TRAFFIC द्वारा अध्ययन


(TRAFFIC study on leopards) द्वारा

संदर्भ:

हाल ही में TRAFFIC इंडिया’ द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गयी है, जिसका शीर्षक है: ‘स्पॉटेड इन इल्लीगल वाइल्डलाइफ ट्रेड’- भारत में जारी तेंदुओं के अवैध शिकार तथा व्यापार पर एक नजर। (SPOTTED’ in Illegal Wildlife Trade: A Peek into Ongoing Poaching and Illegal Trade of Leopards in India’.)

यह ‘सामान्य तेंदुओं’ (Panthera pardus fusca) की अवैध पकड़ तथा इनकी होने वाली मौतों पर किया गया एक अध्ययन है।

रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएं:

  1. भारत में वर्ष 2015-2019 के दौरान हुई 747 तेंदुए की मौतों में से 596 अवैध वन्यजीव व्यापार और अवैध शिकार से जुड़ी गतिविधियों से संबंधित थी।
  2. उत्तराखंड और महाराष्ट्र राज्यों से सर्वाधिक अवैध शिकार की घटनाएं दर्ज की गईं।
  3. तेंदुओं की त्वचा के लिए सबसे अधिक शिकार किया जाता है। अवैध वन्यजीव व्यापार में पाए गए सभी अवयवों में, त्वचा सर्वाधिक मांग वाला उत्पाद रहा, इसके अतिरिक्त जबकि पंजे, दांत और हड्डियों जैसे अवयवों का भी कारोबार किया गया।

पृष्ठभूमि:

  • भारत के तेंदुओं की अंतिम औपचारिक गणना 2014 में आयोजित की गई थी जिसमें इस प्रजाति की आबादी 12,000 से 14,000 के मध्य आंकलित की गयी थी।
  • भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India- WII) द्वारा वैश्विक बाघ गणना के भाग के रूप में, तेंदुओं (leopard) के देखे जाने संबंधी एक रिपोर्ट तैयार की गयी है, जिसे माह के अंत तक जारी किया जाएगा।

निष्कर्ष:

  • देश भर में विभिन्न वन्यजीव प्रवर्तन कार्यक्रमों तथा समय-समय पर खोजी रिपोर्टों और अध्ययनों के माध्यम से अवैध वन्यजीव व्यापार में तेंदुओं की दुर्दशा को उजागर किया जाता है। हालांकि, यह कार्यक्रम तथा रिपोर्ट्स, वन्यजीव तस्करों को रोकने में विफल रहे है, तथा ये लगातार उच्च लाभ और कम जोखिम के कारण इस प्रजाति को निशाना बनाते रहते हैं।
  • इसलिए, विशेषज्ञों का सुझाव है कि तेंदुओं के संरक्षण पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।

TRAFFIC के बारे में:

  • अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार निगरानी संगठन ‘TRAFFIC’ का पूरा नाम (TRADE Record Analysis of Flora and Fauna In Commerce- TRAFFIC) है।
  • TRAFFIC, जैव विविधता और सतत विकास दोनों के संदर्भ में वन्य जीवों तथा पौधों के व्यापार के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर काम करने वाला प्रमुख गैर-सरकारी संगठन है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1976 में की गयी थी तथा यह विश्व वन्यजीव कोष (WWF) और अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) का एक संयुक्त कार्यक्रम है।

इंस्टा फैक्ट्स- तेंदुआ:

इंस्टा फैक्ट्स: तेंदुआ (Leopard)

  • वैज्ञानिक नाम- पैन्थेरा पार्डस (Panthera pardus)
  • भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध
  • CITES के परिशिष्ट-I में सम्मिलित
  • IUCN रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध
  • विश्व में तेंदुए की नौ उप-प्रजातियां पाई जाती है, तथा ये अफ्रीका और एशिया में वितरित है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. तेंदुए की IUCN स्थिति
  2. CITES क्या है?
  3. तेंदुए की उप-प्रजातियां
  4. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत विभिन्न अनुसूचियां
  5. भारत में बाघों की गणना किसके द्वारा की जाती है?
  6. IUCN की लाल सूची में श्रेणियां
  7. TRAFFIC के बारे में

 स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


के वी कामथ समिति:

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अवकाश प्राप्त बैंकर के वी कामथ की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसका कार्य COVID​​-19 के संबंध में तनावग्रस्त ऋणों के समाधान के लिए वित्तीय मानकों की सिफारिश करना है।
  • भारतीय बैंक संघ (Indian Banks’ AssociationIBA) समिति के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करेगा और यह समिति उपयुक्त समझने पर किसी भी व्यक्ति से परामर्श करने या उसे आमंत्रित करने के लिए पूरी तरह से सक्षम होगी।

कारोबार विश्वास सूचकांक

(Business confidence index)

  • भारत का प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक, नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) प्रति तीन माह पर सर्वेक्षण करता है तथा और कारोबार विश्वास सूचकांक (N-BCI) जारी करता है।
  • इस सर्वेक्षण में समग्र सूचकांक की गणना करने के लिए लगभग 600 भारतीय कंपनियों की व्यापारिक प्रवृत्तियों का पता लगाया जाता है।

लोया जिरगा (Loya Jirga)

  • यह अफगानिस्तान में विभिन्न जातीय, धार्मिक और जनजातीय समुदायों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाने वाली एक सामूहिक राष्ट्रीय सभा है।
  • यह एक अति सम्मानित सदियों पुरानी सलाहकारी संस्था है जिसे राष्ट्रीय संकट के समय अथवा राष्ट्रीय मुद्दों के निपटारे के लिए बुलाया जाता है।
  • अफगान संविधान के अनुसार, लोया जिरगा को अफगान लोगों की सर्वोच्च अभिव्यक्ति माना जाता है। यह एक आधिकारिक निर्णय लेने वाली संस्था नहीं है और इसके निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं।

चर्चा का कारण

हाल ही में, हत्या और अपहरण सहित गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 400 तालिबान लड़ाकों को मुक्त करने संबधी निर्णय लेने के लिए अफगानिस्तान में तीन दिवसीय लोया जिरगा-महासभा को बुलाया गया है।

कवकाज़ (Kavkaz) 2020

यह रूसी रणनीतिक कमांड-पोस्ट सैन्याभ्यास है।

चर्चा का कारण

  • भारत अगले महीने रूसी कवकाज़ 2020 रणनीतिक कमांड-पोस्ट सैन्याभ्यास में भाग लेगा।
  • अभ्यास के लिए आमंत्रित देशों में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के अन्य सदस्य-देशों के अलावा चीन और पाकिस्तान भी सम्मिलित हैं।

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