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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 August

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. अवनींद्र नाथ टैगोर

2. हिरोशिमा परमाणु बमबारी की 75 वीं वर्षगांठ

 

सामान्य अध्ययन-II

1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)

2. EWS आरक्षण मामला संवैधानिक पीठ को भेजा गया

 

सामान्य अध्ययन-III

1. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL)

2. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

3. UNESCO-IOC सुनामी तैयारी मान्यता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2020

2. किसान रेल

3. पेंगोलिन

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

अवनींद्र नाथ टैगोर


(Abanindranath Tagore)

संदर्भ:

राष्ट्रीय आधुनीक कला संग्रहालय (National Galary of Modern Art) नई दिल्ली 7 अगस्त 2020 को अवनींद्र नाथ टैगोर की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘द ग्रेट मेस्ट्रो : अवनींद्र नाथ टैगोर’ (The Great Maestro: Abanindranath Tagore) नामक एक आभासी यात्रा (वर्चुअल टूर) का आयोजन कर रहा है।

अवनींद्र नाथ टैगोर के बारे में:

रबींद्रनाथ टैगोर के भतीजे, अवनींद्र नाथ टैगोर, भारत में बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट के सबसे प्रमुख कलाकारों में से एक थे। वह भारतीय कला में स्वदेशी मूल्यों के पहले प्रमुख समर्थक थे।

भारतीय कला और संस्कृति में अवनींद्र नाथ टैगोर का योगदान

बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट:

  1. उन्होंने पहले इंडियन सोसाइटी ऑफ़ ओरिएंटल आर्ट का गठन किया तथा इसके पश्चात ‘बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट’ की स्थापना की।
  2. उनका मानना ​​था कि भारतीय कला और इसके कला रूप आध्यात्मिकता को महत्व देते है, इसके विपरीत पश्चिम की कला में भौतिकवाद पर जोर दिया जाता है। अतः उन्होंने कला की पश्चिम में प्रचलित कला रूपों को अस्वीकार कर दिया।
  3. मुगल एवं राजपूत चित्रकला को आधुनिक बनाने के उनके विचार ने अंततः आधुनिक भारतीय चित्रकला को जन्म दिया। जिसका विकास बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ।
  4. उनका अधिकांश कार्य हिंदू-दर्शन से प्रेरित है।
  5. अवनींद्र नाथ ने अपने बाद के कार्यों में, चीनी और जापानी सुलेख रूपांकन परंपराओं को अपनी शैली में एकीकृत करना शुरू कर दिया था। इसकी पीछे उनका उद्देश्य सम्पूर्ण एशियाई आधुनिक कला परंपरा तथा पूरब की कलात्मक और आध्यात्मिक संस्कृति के सामान्य तत्वों का समामेलन करना था।

प्रसिद्ध चित्र:

भारत माता, शाहजहाँ (1900), मेरी माँ (1912–13), परीलोक चित्रण (1913), यात्रा का अंत (1913)।

साहित्य:

  • एक चित्रकार के साथ-साथ वे बंगाली बाल साहित्य के प्रख्यात लेखक भी थे।
  • वे ‘अबन ठाकुर’ के नाम से प्रसिद्ध थे और उनकी पुस्तकें जैसे राजकहानी, बूड़ो अंगला, नलक, खिरेर पुतुल बांग्ला बाल-साहित्य में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।
  • अरेबियन नाइट्स श्रृंखला उनकी उल्लेखनीय कृतियों में से एक थी।
  • विलियम रोथेंस्टीन (William Rothenstein) ने रवींद्रनाथ टैगोर को ‘गीतांजलि’ को अंग्रेजी में प्रकाशित करने में सहायता की।

Abanindranath_Tagore

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इंडियन सोसायटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट- उद्देश्य
  2. बंगाल स्कूल ऑफ आर्ट के बारे में
  3. अवनींद्र नाथ टैगोर चित्रों के विषय
  4. साहित्यिक रचनाएँ
  5. उनके प्रसिद्ध चित्र

मेंस लिंक:

बंगाल स्कूल ऑफ़ आर्ट के विकास तथा मुख्य विशेषताओं का परीक्षण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।

हिरोशिमा परमाणु बमबारी की 75 वीं वर्षगांठ


(Japan marks 75th anniversary of Hiroshima atomic bombing)

संदर्भ:

जापान में 6 अगस्त को, विश्व के पहले परमाणु बम हमले की 75वीं वर्षगांठ मनाई गयी कोरोनावायरस महामारी के कारण परमाणु हमले के शिकार हुए लोगों की स्मृति में किये जाने वाले कार्यक्रमों को काफी सीमित रखा गया।

इतिहास में 6 अगस्त

6 अगस्त, 1945 को, अमेरिका द्वारा जापानी शहर हिरोशिमा पर एक परमाणु बम गिराया गया तथा इसके तीन दिन पश्चात्, 9 अगस्त को, अमेरिका ने एक अन्य शहर नागासाकी पर दूसरा परमाणु बम गिराया। इन विस्फोटों से लाखों लोग मारे गए तथा विस्फोटों के उपरांत हुई ‘ब्लैक रेन’ तथा विकिरण भारी संख्या में लोग प्रभावित हुए।

हिरोशिमा तथा नागासाकी पर अमेरिकी बमबारी का कारण

वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम दौर में, जापान और अमेरिका के बीच संबंध खराब हो गए। जापानी सेनाओं द्वारा ईस्ट-इंडीज के तेल-समृद्ध क्षेत्रों पर कब्जा करने के इरादे से इंडोचाइना पर निशाना साधा गया, इससे अमेरिका और कुपित हो गया। इसके परिणाम स्वरूप, अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान को आत्मसमर्पण करने पर विवश करने के लिए परमाणु बमों के उपयोग की मंजूरी दे दी। इन परमाणु हमलों के पश्चात् जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया।

परमाणु बम का विकास

परमाणु बम ब्रिटिश और अमेरिकी वैज्ञानिक ज्ञान और प्रगति का एक परिणाम था तथा इसे अमेरिका के दो संयंत्रों में विकसित किया गया था, इसके अलावा एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में अलग से कार्य किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया को मैनहट्टन प्रोजेक्ट (Manhattan Project) का कोड नाम दिया गया था।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम का नाम ‘लिटिल बॉय’ था।
  • नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम को ‘फैट मैन’ नाम दिया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मित्र राष्ट्र और धुरी राष्ट्र
  2. द्वितीय विश्व युद्ध के कारण।
  3. मैनहट्टन परियोजना किससे संबंधित है?
  4. युद्ध के परिणाम
  5. WW2 के दौरान महत्वपूर्ण घटनाएं तथा प्रमुख लड़ाइयाँ
  6. मिडवे की लड़ाई (battle of midway) क्या है?
  7. पर्ल हार्बर पर हमले का क्या कारण था?

मेंस लिंक:

द्वितीय विश्व युद्ध ने उपनिवेशों में राष्ट्रवादी आंदोलनों को जोरदार प्रोत्साहन दिया। विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)


(Comptroller and Auditor General of India)

हाल ही में  जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू को भारत के नए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के रूप में नियुक्त किया गया है।

CAG के बारे में:

  • भारत के संविधान के भाग V के अंतर्गत अध्याय V में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के एक स्वतंत्र पद का प्रावधान किया गया है।
  • भारत के संविधान में CAG का उल्लेख अनुच्छेद 148 – 151 के तहत किया गया है।
  • यह भारतीय लेखा परीक्षण तथा लेखा विभाग के प्रमुख होते हैं।
  • यह लोक वित्त के संरक्षक तथा देश की संपूर्ण वित्तीय व्यवस्था के नियंत्रक होते हैं। इसका नियंत्रण राज्य एवं केंद्र दोनों स्तरों पर होता है।
  • इसका कर्तव्य भारत के संविधान एवं संसद की विधियों के तहत वित्तीय प्रशासन को बनाए रखना है।

नियुक्ति एवं कार्यकाल

  • भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
  • CAG का कार्यकाल 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।

कर्तव्य:

  1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारत की संचित निधि, प्रत्येक राज्य की संचित निधि तथा प्रत्येक संघ शासित प्रदेश, जहाँ विधान सभा हो, से सभी व्यय संबंधी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
  2. वह भारत की संचित निधि और भारत के लोक लेखा सहित प्रत्येक राज्य की आकस्मिक निधि तथा लोक लेखा से सभी व्यय की लेखा परीक्षा करता है।
  3. वह केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के किसी भी विभाग द्वारा सभी ट्रेडिंग, विनिर्माण, लाभ और हानि खातों, बैलेंस शीट और अन्य अनुषंगी लेखाओं की लेखा परीक्षा करता है।
  4. वह केंद्र और प्रत्येक राज्य द्वारा अनुदान प्राप्त सभी निकायों और प्राधिकरणों की प्राप्तियों और व्यय की लेखा परीक्षा करता है, इसके साथ ही संबध नियमों द्वारा आवश्यक होने पर सरकारी कंपनियों, अन्य निगमों एवं निकायों का भी लेखा परीक्षण करता है।
  5. वह किसी कर अथवा शुल्क की शुद्ध आगमों का निर्धारण एवं प्रमाणन करता है और इन मामलों में उसका प्रमाणपत्र अंतिम होता है।

प्रतिवेदन

  • भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, केंद्र और राज्य के खातों से संबंधित अपनी लेखा प्रतिवेदन राष्ट्रपति और राज्यपाल को सौंपते है, जिसे वे क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं।
  • CAG राष्ट्रपति को तीन लेखा प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है: विनियोग लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट, वित्त लेखाओं पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट तथा सार्वजनिक उपक्रमों पर लेखा परीक्षा रिपोर्ट।

CAG और लोक लेखा समिति (PAC)

  • CAG, संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee PAC) के मार्गदर्शक, मित्र और दार्शनिक के रूप में कार्य करता है।
  • CAG अपने अधिदेशित विनियामक और लेखा परीक्षा दायित्वों के अतिरिक्त कार्यकारिणी द्वारा लोक वित्त के समुचित व्यय किये जाने की भी निगरानी करता है।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्वतंत्रता एवं सुरक्षा हेतु संवैधानिक प्रावधान

  1. CAG को कार्यकाल की सुरक्षा प्रदान की गई है। इसे केवल राष्ट्रपति द्वारा संविधान में उल्लिखित कार्यवाही के जरिये हटाया जा सकता है। इस प्रकार, वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर नहीं रहता है, यद्यपि इसकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की होती है।
  2. यह अपना पद त्याग करने के पश्चात किसी अन्य पद, चाहे वह केंद्र सरकार का हो अथवा राज्य सरकार का, ग्रहण नहीं कर सकता।
  3. इसका वेतन एवं अन्य सेवा शर्तें संसद द्वारा निर्धारित की जाती हैं। वेतन सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर होता है।
  4. इसके वेतन में तथा अनुपस्थिति, छुट्टी, पेंशन या सेवानिवृत्ति की आयु के संबंध में और उसके अधिकारों में उसकी नियुक्ति के बाद कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
  5. भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में कार्य करने वाले लोगों की सेवा शर्तें तथा CAG की प्रशासनिक शक्तियों को राष्ट्रपति द्वारा CAG के परामर्श के बाद निर्धारित किया जाता है।
  6. CAG के कार्यालय के प्रशासनिक व्यय, जिसके अंतर्गत उस कार्यालय में सेवारत व्यक्तियों के सभी वेतन, भत्ते और पेंशन आते है, भारत की संचित निधि पर भारित होंगे। अतः इन पर संसद में मतदान नहीं हो सकता।
  7. इसके अलावा, कोई भी मंत्री संसद के दोनों सदनों में CAG का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है और किसी भी मंत्री को उसके द्वारा किए गए कार्यों के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं ले सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत के संचित निधि तथा आकस्मिक निधि में अंतर।
  2. लोक लेखा समिति के बारे में
  3. CAG द्वारा राष्ट्रपति को सौंपी गई रिपोर्ट
  4. CAG की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
  5. CAG की नियुक्ति तथा पदत्याग

मेंस लिंक:

CAG संसद के प्रति वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में कार्यकारणी की जवाबदेही तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समझाइये।

CAG की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले संवैधानिक प्रावधानों को सूचीबद्ध कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

EWS आरक्षण मामला संवैधानिक पीठ को भेजा गया


(EWS quota challenge referred to Constitution Bench)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए 10% आरक्षण देने की संवैधानिकता संबंधी ‘महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न’ पर निर्णय करने के लिए मामले को पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ के लिए भेज दिया गया है। इसके साथ ही यह पीठ, EWS  आरक्षण मामले में न्यायालय द्वारा निर्धारित आरक्षण पर 50% की सीमा के उल्लंघन पर भी विचार करेगी।

न्यायालय की बड़ी पीठ के लिए भेजने का अर्थ

किसी मामले को न्यायालय की बड़ी पीठ के लिए भेजने का अर्थ होता है, कि संबंधित मामले में महत्वपूर्ण कानूनी चुनौतियाँ हैं।

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 145(3) के अनुसार, किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित विधि का सारवान प्रश्न होने पर, मामले की सुनवाई के लिये संवैधानिक पीठ का गठन किया जाएगा जिसमें कम-से-कम पाँच न्यायाधीश होंगे।
  • उच्चत्तम न्यायालय द्वारा वर्ष 2013 में जारी किये गए नियमों के अनुसार, मूल अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित याचिकाओ पर, जिनमे विधि से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न नही होने तक, दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा सुनवाई की जायेगी। विधि से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न होने पर मामले की सुनवाई पांच न्यायाधीशों वाली पीठ करेगी।

EWS आरक्षण को चुनौती के आधार

इस कानून को मुख्य रूप से दो आधारों पर चुनौती दी गयी है।

  • पहला, यह क़ानून संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन करता है। यह तर्क के पीछे की अवधारणा है कि सामाजिक रूप से पिछड़े समूहों को प्रद्दत विशेष सुरक्षा संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।103 वां संशोधन के माध्यम से आर्थिक स्थिति के एकमात्र आधार पर विशेष सुरक्षा प्रदान करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है। हालांकि, यद्यपि मूल संरचना क्या होती है, इसकी कोई विस्तृत सूची नहीं है, लेकिन इसका उल्लंघन करने वाले किसी भी कानून को असंवैधानिक माना जाता है।
  • दूसरा, यह इंद्र साहनी एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले, 1992 में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का उल्लंघन करता है, जिसमें मंडल रिपोर्ट को बरकरार रखा गया तथा आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% की गयी। अदालत ने कहा था कि पिछड़े वर्ग की पहचान के लिए आर्थिक पिछड़ापन एकमात्र मानदंड नहीं हो सकता है।

विवाद का विषय

आर्थिक आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करके प्रदान किया गया था तथा इसमें एक परिच्छेद जोड़ा गया जिसके द्वारा राज्य सरकारों को आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण प्रदान करने की शक्ति प्रदान की गयी।

  • संवैधानिक संशोधन की वैधता को चुनौती देते हुए कहा गया कि 50% कोटा सीमा संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
  • तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने 10% आरक्षण प्रदान करने वाले संविधान (103 वां संशोधन) अधिनियम के कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

केंद्र सरकार का पक्ष

  • केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि राज्य सरकार की नौकरियों में तथा राज्य द्वारा संचालित शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण प्रदान करना प्रत्येक राज्य का विशेषाधिकार है। सम्मिलित किये गए नए अनुच्छेद 15 (6) और 16 (6) के प्रावधानों के अनुसार राज्य सरकार की नौकरियों में तथा राज्य द्वारा संचालित शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों को आरक्षण देना या नहीं देना राज्य सरकारों द्वारा तय किया जाएगा।
  • सरकार ने यह भी तर्क दिया कि संविधान में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अंतर्गत अनुच्छेद 46 के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है।
  • संशोधन द्वारा इंद्रा साहनी सिधांतो का उल्लंघन करने के आरोप के जबाव में केंद्र सरकार ने ‘अशोक कुमार ठाकुर बनाम भारत संघ’ मामले में न्यायालय के वर्ष 2008 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें उच्चत्तम न्यायालय ने OBC के लिए 27% कोटा बरकरार रखा था। सरकार का तर्क था कि अदालत ने OBC की परिभाषा में जाति को पिछड़ेपन की एकमात्र कसौटी नहीं माना, बल्कि जाति और आर्थिक कारकों के मिश्रण को पिछड़ेपन का आधार माना था। यह साबित करता है, आरक्षण देने के मात्र एक मानदंड होना आवश्यक नहीं है।

संविधान पीठ क्या होती है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 145(3) के अनुसार, किसी मामले में संविधान की व्याख्या से संबंधित विधि का सारवान प्रश्न होने पर, मामले की सुनवाई के लिये अथवा अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा उच्चत्तम न्यायालय से परामर्श संबंधी मामला होने पर संवैधानिक पीठ का गठन किया जाएगा जिसमें कम-से-कम पाँच न्यायाधीश होंगे।

इसका अर्थ यह नहीं है कि संवैधानिक पीठ पाँच से अधिक न्यायाधीश भी हो सकते हैं। उदहारण के लिए- केशवानंद भारती मामले में गठित संवैधानिक पीठ में 13 न्यायाधीश थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 143 और 145 (3) किससे संबंधित हैं?
  2. संविधान के अनुच्छेद 15 (6) तथा 16 (6)।
  3. अशोक कुमार ठाकुर बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया केस किससे संबंधित है?
  4. संविधान की मूल संरचना क्या है?
  5. इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

मेंस लिंक:

क्या “सामान्य श्रेणी” के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10% कोटा निर्धारित करने वाली यह आरक्षण नीति आनुभविक रूप से उचित है? आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL)


(Priority Sector Lending)

संदर्भ:

हल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भारत के स्टार्टअप क्षेत्र को ऋण प्राप्त करने हेतु प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र अर्थात प्रॉयरिटी सेक्टर लेंडिंग (Priority Sector LendingPSL) का दर्जा प्रदान किया गया है।

इस कदम का महत्व

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा स्टार्टअप्स के लिए ऋण प्रदान करने के लिए वित्त उपलब्ध कराना एक बहुत ही सकारात्मक कदम है। स्टार्टअप्स के लिए ऋण प्राप्त करना आसान नहीं है, तथा इनके सामने पारंपरिक ऋणदाताओं के समक्ष ऋण पात्रता साबित करने की मुश्किल रहती है। रिज़र्व बैंक का यह निर्णय, स्टार्टअप्स के लिए सस्ते और आसान ऋण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

चूंकि भारतीय उद्यमियों के सामने, पर्याप्त वित्त तथा उपभोक्ताओं दवारा स्वीकरण, दो प्रमुख चुनौतियां रहती है, आरबीआई का यह कदम इनके लिए बूस्टर साबित होगा।

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण क्या होते है?

इसका अर्थ उन क्षेत्रों से है, जिन्हें भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक देश की बुनियादी जरूरतों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं तथा इन्हें अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्राथमिकता दी जाती है। बैंकों को इन क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त और समय पर ऋण देने के लिए आज्ञापित किया जाता है।

PSL हेतु अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को आरबीआई के दिशानिर्देश

  1. वाणिज्यिक बैंकों द्वारा प्रदान किये गए कुल शुद्ध ऋण का 40% प्राथमिकता क्षेत्र को देना आवश्यक है।
  2. प्राथमिकता क्षेत्र के अग्रिमों का 10% या कुल शुद्ध बैंक ऋण का 10%, जो भी अधिक हो, कमजोर वर्ग को दिया जाना चाहिए।
  3. कुल शुद्ध बैंक ऋण का 18% कृषि अग्रिमों के रूप में दिया जाना चाहिए। कृषि के लिए ऋणों के 18 प्रतिशत के लक्ष्‍य के अंतर्गत लघु और सीमांत किसानों के लिए, समायोजित कुल बैंक ऋण (Adjusted Net Bank Credit- ANBC) का 8 प्रतिशत का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।
  4. ANBC के 7.5 प्रतिशत अथवा बैलेंस शीट से इतर एक्सपोजर की सममूल्य राशि (Credit Equivalent Amount of Off-Balance Sheet Exposure), इनमें से जो भी अधिक हो, का ऋण सूक्ष्म उद्यमों को लिए दिया जाना चाहिए।

प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में निम्नलिखित श्रेणियां शामिल हैं:

  1. कृषि
  2. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME)
  3. निर्यात ऋण
  4. शिक्षा
  5. आवास
  6. सामाजिक अवसंरचना
  7. अक्षय ऊर्जा
  8. अन्य

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रमाण पत्र (PSLCs)

प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण प्रमाण पत्र (Priority Sector Lending Certificates- PSLC), बैंकों को प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार देने के लक्ष्‍य और उप-लक्ष्‍यों को प्राप्‍त‍ करने में सक्षम करने हेतु कमी आने पर इन लिखतों (PSLCs) की खरीद और साथ ही अधिशेष वाले बैंकों को प्रोत्‍साहन देते हुए अंततोगत्वा प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र के अंतर्गत श्रेणियों को अधिक उधार देने में सक्षम बनाते है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PSLC क्या हैं? उन्हें कौन जारी करता है?
  2. प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों में कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
  3. समायोजित नेट बैंक क्रेडिट (ANBC) क्या है?
  4. प्राथमिकता क्षेत्र ऋणों पर आरबीआई के दिशानिर्देश।

मेंस लिंक:

प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के उद्देश्य क्या हैं? हाल ही में, RBI ने PSL प्रमाणपत्र जारी करने और व्यापार करने की अनुमति दी है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋणों (PSL) हेतु इस पहल के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना


संदर्भ:

हाल ही में, कृषि मंत्रालय द्वारा 2020-21 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के नवाचार और कृषि उद्यमिता घटक के अंतर्गत स्टार्ट-अप्स का वित्तपोषण करने का निर्णय लिया गया है

पृष्ठभूमि

  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत एक घटक के रूप में, नवाचार और कृषि उद्यमिता विकास कार्यक्रम शुरू किया गया है जिसको वित्तीय सहायता प्रदान करके और ऊष्मायन पारिस्थितिकी तंत्र को पोषित करके, नवाचार और कृषि उद्यमीता को बढ़ावा दिया जा सके।
  • ये स्टार्ट-अप्स विभिन्न श्रेणियों जैसे कृषि प्रसंस्करण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल कृषि, कृषि यंत्रीकरण, वेस्ट टू वेल्थ, डेयरी, मत्स्य पालन आदि में हैं।

इस योजना के निम्नलिखित घटक हैं:

  1. एग्रीप्रेन्योरशिप ओरिएंटेशन- 2 माह की अवधि के लिए 10,000 रुपये प्रति माह वजीफे के साथ वित्तीय, तकनीकी, आईपी मुद्दों आदि पर मेंटरशिप प्रदान की जाती है।
  2. आर-एबीआई इनक्यूबेट्स की सीड स्टेज फंडिंग – 25 लाख रुपये तक की फंडिंग (85% अनुदान और इनक्यूबेट से 15% योगदान)।
  3. एग्रीप्रेन्योर्स की आइडिया/ प्री-सीड स्टेज फंडिंग – 5 लाख रुपए तक की फंडिंग (90% अनुदान और इनक्यूबेट से 10% योगदान)।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के बारे में:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक छाता योजना के रूप में वर्ष 2007 में शुरू किया गया था।

  • यह योजना राज्यों को कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है।
  • भारत सरकार ने केन्‍द्रीय प्रायोजित स्‍कीम (राज्‍य योजना)- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) को राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र पुनरूद्धार हेतु लाभकारी दृष्‍टिकोण (RKVY-RAFTAAR) के रूप में जारी रखने के लिए मंजूरी दी है।
  • इसका लक्ष्‍य किसानों के प्रयासों के सुदृढ़ीकरण के माध्‍यम से कृषि को लाभकारी क्रियाकलाप बनाना, जोखिम प्रशमन और कृषि व्यवसाय उद्यमिता को बढ़ावा देना है।
  • RKVY-RAFTAAR के तहत, कृषि उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के अलावा कटाई पूर्व और कटाई पश्‍चात अवसंरचना पर मुख्‍य ध्यान दिया जाता है।

उद्देश्य:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का मुख्य उद्देश्य खेती को आर्थिक गतिविधि के मुख्य स्रोत के रूप में विकसित करना है। इसके प्रमुख उद्देश्यों निम्नलिखित हैं:

  1. कृषि- अवसंरचना का निर्माण करके कृषि-व्यवसाय उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों के प्रयासों को मजबूत प्रदान करना।
  2. सभी राज्यों को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजना बनाने में स्वायत्तता और लचीलापन प्रदान करना।
  3. उत्पादकता को प्रोत्साहित करके और मूल्य श्रृंखला से संबद्ध उत्पादन मॉडल को बढ़ावा देकर आय बढ़ाने में किसानों की मदद करना।
  4. मशरूम की खेती, एकीकृत खेती, फूलों की खेती, आदि के माध्यम से आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करके किसानों के लिए जोखिम को कम करना।
  5. विभिन्न कौशल विकास, नवाचार और कृषि-व्यवसाय मॉडल के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना।

वित्तीय अनुदान:

RKVY-RAFTAAR, के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा क्रमशः 60: 40 के अनुपात में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जायेगी। पूर्वोत्तर तथा अन्य पर्वतीय राज्यों में सहायता का अनुपात 90.10 रहेगा। केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा 100% अनुदान दिया जायेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना का आरम्भ?
  2. योजना के तहत अनुदान
  3. योजना के उद्देश्य।
  4. योजना के अंतर्गत विभिन्न घटक

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

  

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

UNESCO-IOC सुनामी तैयारी मान्यता


संदर्भ:

हाल ही में, ओडिशा राज्य ने आपदा प्रबंधन में एक और उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर, यूनेस्को-आईओसी ने, वेंकटरायपुर और नोलियाशाही, दोनों समुदायों को सुनामी तैयारी समुदाय के रूप में मान्यता प्रदान करने की है।

सुनामी तैयारी के बारे में:

  • सुनामी तैयारी (Tsunami Ready), एक सामुदायिक प्रदर्शन-आधारित कार्यक्रम है।
  • इस कार्यक्रम को यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission- IOC) द्वारा सार्वजनिक, सामुदायिक नेताओं और राष्ट्रीय और स्थानीय आपातकालीन प्रबंधन एजेंसियों के सक्रिय सहयोग के माध्यम से, सुनामी तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।

कार्यक्रम का उद्देश्य:

  • सूनामी आपातकाल स्थितियों के लिए तटीय समुदाय की तैयारियों में सुधार लाना।
  • जीवन और संपत्ति के नुकसान को कम करना।
  • सामुदायिक तैयारी में एक संरचनात्मक और व्यवस्थित दृष्टिकोण को सुनिश्चित करना।

अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग ( IOC) के बारे में:

  • यूनेस्को के अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (IOC-UNESCO) की स्थापना वर्ष 1960 में यूनेस्को के कार्यकारी स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी तथा यह संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत समुद्री विज्ञान के प्रति समर्पित एक प्रमुख संगठन है।
  • इस आयोग का उद्देश्य समुद्र और तटीय क्षेत्रों की प्रकृति और संसाधनों के बारे में शोध करने तथा प्रबंधन के सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और अनुसंधान, सेवाओं और क्षमता निर्माण में कार्यक्रमों का समन्वय करना है।
  • IOC को संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (UN Convention on the Law of the Sea-UNCLOS) द्वारा समुद्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान और स्थानांतरण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अन्तराष्ट्रीय संगठन के रूप में मान्यता प्राप्त है।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2020

(National Handloom Day)

  • वस्त्र मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का छठा संस्करण मनाया जायेगा।
  • पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस वर्ष 2015 में आयोजित किया गया था।

7 अगस्त का महत्व

  • 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में चुना गया है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1905 में, कलकत्ता के टाउन हाल में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी।
  • इसका उद्देश्य हथकरघा उद्योग के बारे में लोगों के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता पैदा करना और सामाजिक-आर्थिक विकास में इसके योगदान को रेखांकित करना है।

किसान रेल

भारतीय रेलवे 07 अगस्त 2020 से एक विशेष साप्ताहिक पार्सल ट्रेन ‘किसान रेल’ की शुरुआत करेगा जोकि देवलाली (महाराष्ट्र) से दानापुर (बिहार) के बीच चलेगी।

  • यह कदम वित्त मंत्री द्वारा केन्द्रीय बजट 2020-21 में की गई घोषणा के अनुरूप है।
  • यह उम्मीद की जाती है कि उम्मीद है कि यह ट्रेन जल्द खराब होने वाले उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला प्रदान करेगी, जिससे किसानों को बहुत मदद मिलेगी।

पैंगोलिन (Pangolin)

पैंगोलिन, पृथ्वी पर पाया जाने वाला एकमात्र सशल्क स्तनपायी जीव है।

  • CITES के अनुसार, पैंगोलिन ऐसा स्तनपायी जीव है जिसकी खाने और पारंपरिक दवाओं में इस्तेमाल के लिए सबसे अधिक अवैध तस्करी होती है।
  • दुनिया भर में पायी जाने वाली पैंगोलिन की आठ प्रजातियों में से दो भारत में पाई जाती हैं।
  • ये प्रजातियाँ है: चीनी पैंगोलिन तथा इन्डियन पैंगोलिन, ये अधिकतर पूर्वोत्तर भारत में पाए जाती हैं।

संरक्षण स्थिति

  • IUCN की रेड लिस्ट में चीनी पैंगोलिन को गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • भारतीय पैंगोलिन (Manis crassicaudata) को “संकटग्रस्त (endangered)” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • पैंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) के तहत एक परिशिष्ट I श्रेणी में सूचीवद्ध संरक्षित जीव है।

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