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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 7 अगस्त 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन1


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

1. मंदिर वास्तुकला, भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण भाग है, इस संदर्भ में भारत में मंदिर वास्तुकला के विभिन्न प्रकारों पर प्रकाश डालिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: कला और संस्कृति: नितिन सिंघानिया

 निर्देशक शब्द:

प्रकाश डालिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

मंदिर निर्माण के संदर्भ में संक्षेप में बताते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिये।

 विषय वस्तु:

भारतीय मंदिर वास्तुकला और मूर्तिकला का विस्तार से वर्णन कीजिये। हिंदू मंदिर, जैन मंदिर और बौद्ध मंदिर के मूल रूपों, उनकी संरचनाओं और अन्य संबद्ध वास्तु कारकों की व्याख्या कीजिये। देश के महत्वपूर्ण मंदिरों को मानचित्र की सहायता से दर्शायें।

निष्कर्ष:

उनके महत्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 


सामान्य अध्ययन2


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

2. समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों को संविधान में स्पष्ट रूप से क्यों जोड़ा गया? इन आदर्शों का क्या अर्थ है और इनको संविधान में कैसे परिलक्षित किया गया है? समझाइये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint 

 निर्देशक शब्द:

 समझाइये-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये। 

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

समाजवाद और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को परिभाषित कीजिये।

 विषय वस्तु:

समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को संक्षेप में समझाते हुए भारतीय सन्दर्भ में इन दोनों पदों को परिभाषित कीजिये। संविधान में इन शब्दों को शामिल किये जाने के कारणों का उल्लेख कीजिये। उन संवैधानिक प्रावधानों का भी उल्लेख कीजिए जो इन दोनों आदर्शों को दर्शाते हैं।

 निष्कर्ष:

भारतीय संविधान में इन दो आदर्शों के महत्त्व को स्पष्ट करते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय। केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

3. मंडल आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर चर्चा करें, जिसमें उच्च जातियों के वर्गों द्वारा भयंकर विद्रोह किया गया था। क्या आपको लगता है कि देश में आरक्षण की सम्पूर्ण प्रणाली को समीक्षा की आवश्यकता है? उपयुक्त उदाहरणों के साथ अपने तर्कों का समर्थन करें और इस मामले का समाधान भी सुझाएँ। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Hindustan Times 

निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

मंडल आयोग और उसके खिलाफ विरोध को संक्षेप में समझाइये। 

विषय वस्तु:

समझाइये कि मंडल आयोग को उच्च जातियों के वर्गों के भयंकर विद्रोह का सामना क्यों करना पड़ा। भारत में आरक्षण व्यवस्था पर इसके प्रभावों की चर्चा कीजिये। आरक्षण की वर्तमान प्रणाली में सुधार करने के लिए आवश्यक उपाय सुझाएं। 

निष्कर्ष:

समुदाय सशक्तिकरण में मंडल आयोग का महत्व और आरक्षण प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

4. विश्व के विभिन्न देशों में बढ़ते परमाणुकरण से सम्बंधित सुरक्षा चिंताओं का विवेचन कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

निर्देशक शब्द:

विवेचन कीजिये-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न के सभी पक्षों की तार्किक व्याख्या कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

प्रश्न की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को संक्षेप में समझाइए।

 विषय वस्तु:

परमाणु हथियारों से होने वाली संभावित क्षति की चर्चा कीजिये। वैश्विक स्तर पर इस प्रकार के हथियारों के उत्पादन में वृद्धि के कारण उत्पन्न अशांति एवं असुरक्षा के वातावरण का उल्लेख कीजिए। 

निष्कर्ष:

इस प्रकार की सुरक्षा चिंताओं के समाधान के लिए आवश्यक उपायों को बताते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 


सामान्य अध्ययन3


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी। संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

5. सिंचाई के जल का अवैज्ञानिक उपयोग, भारत में कई प्रकार की पारिस्थितिक समस्याओं को जन्म दे रहा है। स्पष्ट कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Wire 

निर्देशक शब्द:

स्पष्ट कीजिये-

ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

भारत में सिंचाई के वर्तमान परिदृश्य पर संक्षेप में प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिये।

 विषय वस्तु:

तथ्यों के माध्यम से कृषि और अन्य आवश्यक क्षेत्रों में जल के उपभोग की मात्रा का उल्लेख कीजिये। भारत में सिंचाई के जल के अवैज्ञानिक रूप से उपयोग के कारणों को बताते हुए इससे सम्बंधित समस्याओं को भी बताइये। इससे उत्पन्न पारिस्थितिकी खतरों को भी सूचीबद्ध कीजिए।

निष्कर्ष:

उपयुक्त समाधान के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन4


 

विषय: मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

6. गांधीजी के “साधन एवं साध्य” के दर्शन पर विस्तार से चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

साधन एवं साध्य को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

साधन एवं साध्य के दर्शन पर गांधी जी के विचारों को विस्तार से समझाएं। अपने उत्तर की पुष्टि करने के लिए प्रासंगिक उदाहरणों का भी उल्लेख कीजिये।

 निष्कर्ष:

गांधी जी के दर्शन का महत्व और वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।

7. भारत में सिविल सेवाओं की संवैधानिक स्थिति को समझाइये। क्या आपको लगता है कि सिविल सेवाओं में पार्श्व प्रवेश इसकी तटस्थता को कम कर सकता है? टिप्पणी कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

टिप्पणी कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

सिविल सेवाओं के उद्देश्य को बताते हुए सिविल सेवाओं के संवैधानिक आधारों का उल्लेख कीजिये।

 विषय वस्तु:

महत्वपूर्ण अनुच्छेदों का उल्लेख करते हुए भारत में सिविल सेवाओं की संवैधानिक स्थिति को विस्तार से समझाइये। सिविल सेवाओं में पार्श्व प्रवेश को समझाते हुए इसके गुण एवं अवगुण दोनों पर चर्चा कीजिये।

 निष्कर्ष:

पार्श्व प्रवेश के सन्दर्भ में तटस्थता से संबंधित चिंताओं के समाधान के लिए उपाय बताते हुए आगे की राह के साथ निष्कर्ष निकालिये।


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