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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 August

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. पाकिस्तान का नया मानचित्र

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘मानहानि’ क्या है?

2. त्रिपुरा में गैर-ब्रू समुदायों द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास-स्थल ब्रू जनजातियों द्वारा खारिज

3. फ्लोरोसिस

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भूजल के व्यावसायिक उपयोग हेतु राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा कड़ी शर्तें

2. अमोनियम नाइट्रेट तथा बेरुत विस्फोट

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. MyGov क्या है?

2. चावल की पोक्कली प्रजाति

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।

पाकिस्तान का नया मानचित्र


(Pakistan’s new map)

संदर्भ:

हाल ही में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा एक नये राजनीतिक मानचित्र का अनावरण किया गया, जिसमें जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, सर क्रीक तथा जूनागढ़ को पाकिस्तान का भाग दर्शाया गया है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री का कहना है, कि यह नया मानचित्र उनके देश की जनता की आकांक्षाओं को दर्शाता है।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने इस मानचित्र को ‘बेबकूफी की कवायद’ बताते हुए खारिज कर दिया। इस प्रकार के हास्यास्पद दावों का ना तो कोई कानूनी आधार है और ना ही अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता।

भारत ने साथ में यह भी कहा है, कि इस प्रकार के मानचित्र के जारी करने से पाकिस्तान द्वारा क्षेत्रीय सीमा के विस्तार की सनक की भी पुष्टि होती है, जिसे वह सीमा-पार आतंकवाद की सहायता से पूरा करने की मंशा रखता है।

मानचित्र जारी करने का समय

इस मानचित्र को, भारत सरकार द्वारा पिछले वर्ष 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लिए जाने तथा राज्य को दो संघ-शासित प्रदेशों में विभाजित किये जाने की वर्षगांठ के एक दिन पूर्व जारी किया गया।

भारत सरकार द्वारा पिछले वर्ष 2 नवम्बर को एक मानचित्र जारी किया गया था, जिसमे पाक-अधिकृत कश्मीर को संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का भाग तथा गिलगित- बाल्टिस्तान को लद्दाख का भाग दिखाया गया था। पाकिस्तान का यह कदम, भारत के मानचित्र के जबाव में, उठाया गया प्रतीत होता है।

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 सर क्रीक कहाँ है?

सर क्रीक (Sir Creek), कच्छ के रण की दलदली भूमि में भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित पानी की एक 96 किलोमीटर लंबी पट्टी है।

  • इस जल-धारा को मूल रूप से बाण गंगा के नाम से जाना जाता था, बाद में एक ब्रिटिश अधिकारी के नाम पर इसका नाम ‘सर क्रीक’ रख दिया गया।
  • सर क्रीक की यह धारा गुजरात के कच्छ क्षेत्र से पाकिस्तान के सिंध प्रांत को विभाजित करती हुई अरब सागर में जाकर गिरती है।

संबंधित विवाद

सर क्रीक रेखा विवाद वस्तुतः कच्छ और सिंध के बीच समुद्री सीमा रेखा की अस्पष्ट व्याख्या में निहित है।

  • पाकिस्तान, इस पूरे क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जबकि भारत का कहना है कि सीमा-रेखा इस क्षेत्र के मध्य से गुजरनी चाहिए।
  • भारत अपने समर्थन में, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून में वर्णित थालवेग सिद्धांत (Thalweg Doctrine) का हवाला देता है, जिसमें कहा गया है कि किसी जल-निकाय के नौगम्य होने पर दो राज्यों के मध्य सीमा को नदी की धारा के बीच से विभाजित किया जा सकता है।

जूनागढ़ विवाद

जूनागढ़, गुजरात के तटीय क्षेत्र में स्थित है तथा यह काठियावाड़ क्षेत्र का एक हिस्सा था।

जूनागढ़ रियासत ने विभाजन के समय 1947 में भारत में शामिल होने का निर्णय लिया, जिसे 1948 में जनमत संग्रह के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया। जिसे उस समय पाकिस्तान द्वारा स्वीकार नहीं किया गया, तो सरदार पटेल ने 1 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ में भारतीय सेना भेज दी। इसके बाद उसी साल दिसंबर में वहां जनमत संग्रह कराया गया जिसमें 99 फीसदी लोगों ने भारत में शामिल होने के लिए मतदान किया। इस प्रकार, जूनागढ़ भारत का अभिन्न अंग बन गया।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत और उसके पड़ोसियों के बीच विवादित क्षेत्र
  2. इन स्थानों की अवस्थिति
  3. भारत की स्थलीय तथा समुद्री सीमा
  4. खराई ऊंट (Kharai camels)
  5. कच्छ के रण में प्रवाहित होने वाली नदियाँ
  6. विश्व में सबसे बड़ा मछली उत्पादक
  7. समुद्री कानूनों पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय
  8. इस संबंध में सीमा समझौता
  9. जनमत संग्रह क्या है?

मेंस लिंक:

सर क्रीक कहाँ अवस्थित है? इससे संबंधित विवादों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

मानहानि क्या है?


(What is defamation?)

संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की एक याचिका पर दिल्ली पुलिस और जी न्यूज से जवाब देने को कहा गया है। याचिका में सांसद ने न्यूज चैनल और उसके संपादक द्वारा दाखिल मानहानि के मामले में सम्मन भेजे जाने तथा उनके खिलाफ आरोप तय किये जाने को चुनौती दी है।

चर्चा का विषय

  • यह मामला सुश्री मोइत्रा के 25 जून, 2019 को संसद में सेवन साइन्स ऑफ़ फ़ासिज्म’ पर दिए गए भाषण तथा समाचार चैनल द्वारा चलाये गए एक टीवी शो एवं बाद के अन्य घटनाक्रमों से संबंधित है।
  • ज़ी न्यूज़ द्वारा सुश्री मोइत्रा के खिलाफ चैनल के खिलाफ मीडिया में कथित रूप से बयान देने पर मानहानि का केस दायर किया गया है।

‘मानहानि’ क्या होती है?

मानहानि, किसी व्यक्ति, व्यवसाय, उत्पाद, समूह, सरकार, धर्म अथवा राष्ट्र की प्रतिष्ठा को हानि पहुचाने वाले गलत व्यक्तव्यों का संप्रेषण होती है।

  • भारत में, मानहानि सिविल और क्रिमिनल दोनों प्रकार की होती है। मानहानि के दोनों प्रकारों में अंतर उनके उद्देश्यों में निहित होता है।
  • सिविल प्रकार की मानहानि में अपराधी को निवारण के रूप में क्षतिपूर्ति देनी पड़ती है तथा क्रिमिनल प्रकार की मानहानि के सन्दर्भ में अपराधी को दण्डित किया जाता है, और इस प्रकार दूसरों को इस तरह का कार्य न करने का संदेश दिया जाता है।

विधिक प्रावधान:

आपराधिक मानहानि को, विशेष रूप से, भारतीय दंड संहिता (the Indian Penal CodeIPC) की धारा 499 के तहत अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है।

सिविल मानहानि, अपकृत्य क़ानून (Tort law) पर आधारित है। अपकृत्य क़ानून: यह कानून का वह क्षेत्र है, जो किसी गलती को परिभाषित करने के लिए किसी विधान अथवा क़ानून पर निर्भर नहीं होता है, परन्तु, ‘क्या करना गलत हो सकता है?’ इसकी व्याख्या करने के लिए विभिन्न कानूनों का उपयोग करता है।

  • IPC की धारा 499 के अनुसार, मानहानि, बोले गए अथवा पढ़े जाने योग्य शब्दों के माध्यम से, संकेतों के माध्यम से तथा दृश्यमान अभिव्यक्ति के माध्यम से भी हो सकती है।
  • धारा 499 में अपवादों का भी हवाला दिया गया है। इनमें ‘लोक हित’ में आवश्यक ‘सत्य बात का लांछन’ लगाया जाना या प्रकाशित किया जाना मानहानि के अंतर्गत नहीं आता है।
  • मानहानि के लिए सजा के संबंध में आईपीसी की धारा 500, के अनुसार, किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की मानहानि करने पर, दो वर्ष तक का साधारण कारावास या जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है।

मानहानि कानून का दुरुपयोग तथा संबंधित चिंताएँ:

  • इसके अंतर्गत, आपराधिक प्रावधानों को प्रायः विशुद्ध रूप से उत्पीड़न के माध्यम में रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
  • भारतीय विधिक प्रक्रियाओं की बोझिल प्रकृति को देखते हुए, मामले की गंभीरता पर ध्यान दिए बिना ही, प्रक्रिया ही सजा के समान हो जाती है।
  • आलोचकों का तर्क है कि मानहानि कानून वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों से टकराते हैं।
  • आपराधिक मानहानि का समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है: उदाहरण के लिए, राज्य इसे, मीडिया और राजनीतिक विरोधियों को आलोचना करने से रोकने तथा अनुचित संयम अपनाने के लिए विवश करता है।

उच्चत्तम न्यायालय के विचार

  • सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ मामले 2014 में, न्यायालय द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) की संवैधानिक वैधता की अभिपुष्टि की गयी तथा यह कहा गया कि, किसी व्यक्ति के ‘गरिमा तथा सम्मान के साथ जीने के अधिकार’ को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा मात्र इसलिए भंग नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसको स्वतंत्रता प्राप्त है।
  • अगस्त 2016 में, न्यायालय ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता पर ‘लोकतंत्र का दम घोटने’ के लिए आपराधिक मानहानि कानून का दुरुपयोग करने के लिए सख्त आलोचना करते हुए कहा कि ‘सार्वजनिक हस्तियों’ को आलोचनाओं का सामना करना चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आपराधिक और सिविल मानहानि के मध्य अंतर
  2. आईपीसी की धारा 499 और 500 किससे संबंधित हैं?
  3. अपकृत्य क़ानून (Tort law) क्या है?
  4. .इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय
  5. धारा 499 के तहत अपवाद

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि भारत में मानहानि को गैर-अपराध घोषित किया जाना चाहिए? क्या मानहानि तथा अवमानना ​​कानून पुराने समय के क़ानून हो चुके है? उपयुक्त उदाहरणों सहित उचित साबित कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

त्रिपुरा में गैर-ब्रू समुदायों द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास-स्थल ब्रू जनजातियों द्वारा खारिज


(Brus reject resettlement sites proposed by Tripura non-Brus)

संदर्भ:

हाल ही में, मिजोरम राज्य से विस्थापित हुए ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले तीन संगठनों द्वारा, त्रिपुरा में गैर-ब्रू समुदायों की संयुक्त पुनर्वास समिति (Joint Movement Committee– JMC) द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास-स्थलों अस्वीकृत कर दिया गया है।

चर्चा का विषय:

गत 21 जुलाई को संयुक्त पुनर्वास समिति (JMC) द्वारा  त्रिपुरा सरकार के लिए एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें ब्रू-जनजातीय समुदायों के पुनर्वास के लिए उत्तरी त्रिपुरा जिले के कंचनपुर और पनिसागर उपखंडों में छह स्थानों को निर्दिष्ट किया गया था। JMC ने इन स्थानों पर 500 परिवारों को बसाने का प्रस्ताव किया है। मिजोरम में वर्ष 1997 से जातीय हिंसा जारी है, इससे बचने के लिए ब्रू-जनजातीय समुदायों ने त्रिपुरा में शरण ली है।

ब्रू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों ने JMC में गैर-ब्रू समुदायों की भागीदारी का विरोध किया है।

ब्रू समुदाय की मांग

ब्रू समुदाय की मांग है, कि इन्हें उत्तरी त्रिपुरा जिले तथा पड़ोस के धलाई जिले में इनकी पसंद की जगहों पर न्यूनतम 500 परिवारों की बस्ती के हिसाब से 6,500 परिवारों को बसाया जाए। इनका कहना है कि, संयुक्त पुनर्वास समिति (JMC) द्वारा सुझाए गयी जगहों तक सडक और बिजली की सुविधा नहीं है, तथा अस्पताल और स्कूल जैसी सुविधाओं से बहुत दूर हैं।

ब्रू जनजाति

  • ब्रू अथवा रेयांग (Bru or Reang) जनजातीय समुदाय है, जो पूर्वोत्तर भारत के मूल निवासी हैं तथा मुख्यतः त्रिपुरा, मिज़ोरम और असम में विस्तृत हैं।
  • त्रिपुरा में, इन्हें ‘विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह’ (Particularly Vulnerable Tribal Groups- PVTG) का दर्जा दिया गया है।
  • मिजोरम में, मिज़ो समुदायों के लोग ब्रू जनजाति के लोगों को बाहरी अथवा विदेशी मानते हैं, तथा इन्हें जातीय हिंसा का शिकार बनाते हैं।

इस समस्या का स्थायी समाधान

  • जनवरी 2020 में केंद्र सरकार द्वारा ब्रू शरणार्थियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  • यह समझौता केंद्र सरकार, त्रिपुरा सरकार, मिज़ोरम सरकार और ब्रू प्रतिनिधियों के मध्य किया गया था, जिसके तहत त्रिपुरा में शरणार्थी के रूप में रह रहे ब्रू-जनजातीय समुदायों को त्रिपुरा में ही बसाने की बात की गई थी।

समझौते की प्रमुख विशेषताएं:

  • इस समझौते के तहत, केंद्र सरकार द्वारा 600 करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की गयी।
  • समझौते के अनुसार ब्रू जनजातियों को त्रिपुरा में बसने के लिए जमीन प्रदान की जाएगी।
  • सरकारी सहायता राशि के रूप में प्रत्येक परिवार के लिए 4 लाख रु. की राशि उनके बैंक खातों में जमा की जायेगी, इस राशि को वे दो साल बाद निकाल सकेंगे।
  • प्रत्येक विस्थापित परिवार को 40 × 30 वर्ग फुट के आवासीय भूखंड प्रदान किये जाएंगे।
  • इसके अलावा, प्रत्येक परिवार को दो वर्ष तक प्रति माह 5,000 रु. की नकद राशि प्रदान की जायेगी।
  • इस समझौते में प्रत्येक विस्थापित परिवार को दो साल के लिए मुफ्त राशन तथा अपना घर बनाने के लिए 1.5 लाख रु. की सहायता राशि दी जायेगी।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. ब्रू कौन हैं?
  2. ब्रू समुदायों का संकट क्या है?
  3. इन्हें कहाँ बसाया जा रहा है?
  4. शांति समझौते की प्रमुख विशेषताएं क्या है?
  5. शांति समझौते पर हस्ताक्षरकर्ता

मेंस लिंक:

प्रत्यावर्तन और दीर्घकालिक समाधान के लिए मिजो और ब्रू समुदायों के बीच सुलह आवश्यक है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

फ्लोरोसिस (Fluorosis)


संदर्भ:

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के एक स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (Institute of Nano Science and Technology- INST) के वैज्ञानिकों ने पीने के पानी में फ्लोराइड आयन का पता लगाने का एक एक उपकरण मुक्त प्रौद्योगिकी को विकसित किया है।

इसे फ्लोरोसिस-आधारित विकारों से बचाने में घरेलू उपयोग के लिए विकसित किया गया है तथा इसके परिचालन के लिए किसी विशेषज्ञ की जरूरत नहीं होगी।

यह किस प्रकार कार्य करता है?

इस तकनीक में 2,3-डिस्बस्टिट्यूटेड 1,1,4,4-टेट्रेसीनो-1,3-ब्यूटाडाइन्स (TCBD) पर आधारित एक पुश-पुल क्रोमोफोर शामिल है जो फ्लोराइड आयन के संपर्क में आने पर रंग बदलता है।

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फ्लोरोसिस क्या है?

फ्लोरोसिस (Fluorosis) एक गंभीर किस्म की बीमारी होती है। यह लंबे समय तक पीने के पानी/खाद्य उत्पादों/ औद्योगिक प्रदूषण आदि के माध्यम से शरीर में फ्लोराइड की अधिक मात्रा पहुचने के कारण होती है। इसमें फ्लोराइड्स की अधिक मात्रा शरीर के कठोर और नरम ऊतकों में जम जाती है।

इसके परिणामस्वरूप, डेंटल फ्लोरोसिस, कंकाल फ्लोरोसिस और गैर-कंकाल फ्लोरोसिस बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है।

WHO के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.5mg प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

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स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भूजल के व्यावसायिक उपयोग हेतु राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा कड़ी शर्तें


(NGT brings strict conditions for commercial use of ground water)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green Tribunal-NGT)  द्वारा भूजल के व्यावसायिक उपयोग करने के लिए कड़ी शर्ते लागू की गयी हैं।

  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने यह निर्देश, देश में भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट को हेतु दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किये।
  • इसके साथ ही, NGT ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (Central Ground Water AuthorityCGWA) द्वारा वर्ष 2020 के दिशानिर्देशों को क़ानून के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया। इसके पूर्व, पिछले वर्ष NGT ने CGWA के वर्ष 2018 में जारी किये गए दिशानिर्देशों को भी रद्द कर दिया था।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा निर्धारित शर्तें:

  • व्यवसायिक गतिविधियों हेतु भूजल निकासी के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन किये जायेंगे। नयी प्रक्रिया में सभी शर्तों का अनुपालन करना सुनिश्चित किया जायेगा।
  • प्राधिकरण ने पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (Environment Impact AssessmentEIA) के बिना व्यवसायिक इकाइयों के लिए भूजल निकासी हेतु सामान्य अनुमति दिए जाने पर विशेष रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।
  • नए परमिट, पानी की निर्दिष्ट मात्रा के लिए जारी किये जायें तथा इसकी डिजिटल प्रवाह मीटर के माध्यम से निगरानी की जाए। इसके अतिरिक्त, प्रतिवर्ष तीसरे पक्ष द्वारा ऑडिट किया जाना चाहिए।
  • ऑडिट में फेल होने पर इकाइयों पर सख्त कार्यवाही की जाये तथा उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।
  • सभी, अतिशोषित (Overexploited), संकटपूर्ण तथा अर्द्ध- संकटपूर्ण इकाइयों के लिए जल-मानचित्रण करना अनिवार्य होगा।
  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण सभी अतिशोषित, संकटपूर्ण तथा अर्द्ध- संकटपूर्ण क्षेत्रों के लिए जल प्रबंधन योजना बनाने के लिए तीन महीने की समयावधि प्रदान की है।

निर्देशों से संबंधित चिंताएं

  • कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, इन कड़ी शर्तो से COVID-19 के कारण नुकसान में चल रहे व्यवसायों के लिए कठिनाई में डाल दिया है।
  • इन प्रतिबंधो से भूजल का उपयोग मुश्किल हो गया है।
  • NGT के इन निर्देशों से, जल शक्ति मंत्रालय के विधायी कार्यों में भी हस्तक्षेप होगा।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की इन शर्तों की आवश्यकता

  • केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा पिछले 23 वर्षों से किये जा रहे विनियमन के बाद भी भूजल स्तर के कोई सुधार नहीं हुआ है, और न ही CGWA द्वारा भविष्य के लिए कोई योजना पेश की गयी है।
  • जल गुणवत्ता सूचकांक में भारत 122 देशों के मध्य 120 वें स्थान पर था।
  • भारत के 54% भूजल कुओं के जल स्तर में गिरावट दर्ज की गयी है, वर्ष 2020 तक देश के 21 प्रमुख शहरों में भूजल की कमी हो जायेगी।
  • भारत में भूजल का सर्वाधिक दोहन किया जाता है। वैश्विक स्तर पर भूजल उपयोग की कुल मात्रा का 25% भारत द्वारा उपयोग किया जाता है तथा इसके उपयोग में लगातार वृद्धि हो रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अटल भूजल योजना का अवलोकन? इसे किन राज्यों में लागू किया जा रहा है?
  2. केंद्रीय जल आयोग के बारे में
  3. वैश्विक पेयजल गुणवत्ता सूचकांक के बारे में
  4. केंद्रीय भूजल प्राधिकरण- संरचना और कार्य
  5. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण – स्थापना, सदस्य और कार्य

मेंस लिंक:

भारत में भूजल का अतिदोहन, देश को इतिहास में सबसे खराब जल संकट की ओर ले जा रहा है। इसका परीक्षण कीजिए तथा सुधार के उपाय सुझाएं।

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स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

अमोनियम नाइट्रेट तथा बेरुत विस्फोट


(What is ammonium nitrate, which caused the massive explosion in Beirut?)

संदर्भ:

हाल ही में, लेबनान के बेरूत बंदरगाह पर भयावह विस्फोट हुआ था जिसका कारण वहां पर स्थित एक गोदाम में छह साल से रखी हुई 2,700 टन अमोनियम नाइट्रेट को बताया गया है।

अमोनियम नाइट्रेट के बारे में:

अपने मूल रूप में, अमोनियम नाइट्रेट (NH4NO3) एक सफेद, क्रिस्टलीय रसायन है, तथा यह जल में घुलनशील होता है।

उपयोग:

  • इसका आमतौर पर विनिर्माण तथा खनन के लिए विस्फोटक के रूप में उपयोग किया जाता है।
  • यह कृषि उर्वरकों में पाया जाने वाला सामान्य रासायनिक घटक है।
  • यह ‘अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल आयल’ (ANFO) नामक विस्फोटक सामग्री का प्रमुख घटक है।

अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक प्रकृति

  • शुद्ध अमोनियम नाइट्रेट अपने आप में विस्फोटक नहीं होता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा खतरनाक सामग्री के वर्गीकरण (United Nations classification of dangerous goods) के अंतर्गत अमोनियम नाइट्रेट को ऑक्सीकारक (ग्रेड 5.1) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • इसके किसी ईधन या ज्वलनशील पदार्थ की संपर्क में आने से भयानक तबाही मच सकती है। अत्याधिक गर्मी के संपर्क में आने पर भी इसमें विस्फोट हो सकता है।
  • जितनी बड़ी मात्रा में यह रसायन स्टोर होगा, धमाका होने पर उसकी तीव्रता भी उतनी ही अधिक होगी।

अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण हेतु शर्तें

इसे खुले और हवादार जगह पर स्टोर किया जाता है। जहां पानी या धूप सीधे इसके ऊपर न पड़े। स्टोर करने से पहले यह भी देखा जाता है कि इसके आसपास कोई ज्वलनशील पदार्थ न हो।

भारत में अमोनियम नाइट्रेट को किस प्रकार विनियमित किया जाता है?

  • भारत में अमोनियम नाइट्रेट के उपयोग को विस्फोटक अधिनियम 1884 के तहत अमोनियम नाइट्रेट नियम 2012 के अनुसार विनियमित किया जाता है।
  • इन नियमों के अनुसार, भारत में आबादी वाले क्षेत्रों में अमोनियम नाइट्रेट का बड़ी मात्रा में भंडारण गैर-कानूनी है।
  • अमोनियम नाइट्रेट के उत्पादन के लिए, औद्योगिक विकास और विनियमन अधिनियम, 1951 के तहत एक औद्योगिक लाइसेंस लेना आवश्यक है।
  • अमोनियम नाइट्रेट से संबंधित किसी भी गतिविधि के लिए अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के तहत एक लाइसेंस लेना आवश्यक है।

अमोनियम नाइट्रेट का स्वास्थ्य पर प्रभाव:

  • अमोनियम नाइट्रेट विस्फोट से नाइट्रोजन ऑक्साइड का भारी मात्रा में उत्पादन होता है। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) एक लाल, बदबूदार गैस होती है।
  • इसके संपर्क में आने से श्वसन तंत्र में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। इस प्रदूषक का उच्च स्तर श्वांस संबधी बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से हानिकारक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अमोनियम नाइट्रेट क्या है?
  2. इसका उपयोग कहाँ किया जाता है?
  3. भारत में इसे किस प्रकार विनियमित किया जाता है?
  4. इसे अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 के तहत किस रूप में परिभाषित किया गया है?
  5. संयुक्त राष्ट्र द्वारा खतरनाक सामग्री का वर्गीकरण

मेंस लिंक:

भारत में अमोनियम नाइट्रेट किस प्रकार विनियमित किया जाता है तथा यह नियम क्यों आवश्यक हैं।

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स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


 MyGov क्या है?

MyGov (mygov.in), भारत सरकार का नागरिक सहभागिता और लोगों के विचार जानने (क्राउडसोर्सिंग) का प्लेटफ़ॉर्म है।

  • इसे वर्ष 2014 में लॉन्च किया गया था।
  • इसका उद्देश्य शासन और नीति निर्धारण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है।
  • 26 जुलाई 2014 को अपने लॉन्च के बाद से, माईगॉव ने इंटरनेट, मोबाइल ऐप, एसएमएस आदि प्रणालियों का उपयोग करते हुए चर्चा, कार्य, नवाचार चुनौतियों, जनमत संग्रह, सर्वेक्षण, ब्लॉग, वार्ता, क्विज़ आदि विभिन्न तरीकों को अपनाया है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, गोवा MyGov नागरिक भागीदारी मंच में शामिल हुआ है। इससे पहले 12 अन्य राज्य MyGov प्लेटफार्म लॉन्च कर चुके हैं।

चावल की पोक्कली प्रजाति

(Pokkali variety of rice)

चावल की पोक्कली किस्म खारे जल के प्रतिरोध के लिये जानी जाती है और इसका उत्पादन केरल के तटीय ज़िलों में किया जाता है।

  • पोक्कली किस्म के चावल की विशिष्टता के कारण इसे भौगोलिक संकेत (Geographical Indication- GI) टैग प्रदान किया गया है और यह अनुसंधान का विषय बनी हुई है।
  • जैविक रूप से उगाई जाने वाली पोक्कली अपने विशिष्ट स्वाद तथा प्रोटीन की उच्च मात्रा के लिए प्रसिद्ध है।

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