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[इनसाइट्स सिक्योर – 2020] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 6 अगस्त 2020

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन1


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव।

1. भारत में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मृदाओं (मिट्टियों) के वितरण पर एक लेख लिखिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: भारत का भूगोलमाजिद हुसैन

 निर्देशक शब्द:

लेख लिखिए-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

सर्वप्रथम मृदा के वर्गीकरण को संक्षेप में समझाइये और भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् का उल्लेख कीजिये। 

विषय वस्तु:

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद निर्मित मृदा के वर्गीकरण और उसके वितरण को मानचित्र की सहायता से समझाइये। याद रहे की मानचित्र आधिकाधिक सूचना उपलब्ध कराने वाला हो।

निष्कर्ष:

क्षेत्रीय विशेषताओं और अन्य भू-वैज्ञानिक कारकों के कारण मृदा की किस्मों में विविधता के महत्व को महत्त्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 


सामान्य अध्ययन2


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

2. क्या आपको लगता है कि त्रि-भाषा सूत्र, देश की भाषाई विविधता, जिसमें कई क्षेत्रीय भाषाएं भी शामिल हैं, का ’समरूपकरण’करने का एक प्रयास है? विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

 निर्देशक शब्द: 

विश्लेषण कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

त्रि-भाषा सूत्र की संकल्पना के उद्भव को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

त्रि- भाषा सूत्र के पक्ष और विपक्ष में तर्क प्रस्तुत कीजिये। चर्चा कीजिये कि त्रि-भाषा सूत्र के आलोचकों ने क्यों आरोप लगाया है कि इसका क्रियान्वयन देश की भाषाई विविधता, जिसमें कई क्षेत्रीय भाषाएं भी शामिल हैं, का ‘समरूपकरण’ करने का एक प्रयास है।

 निष्कर्ष:

राज्यों की चिंताओं के समाधान के लिए उपाय बताते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

3. सभी संविधान अतीत के उत्तराधिकारी और भविष्य के वसीयतकर्ता हैं। भारतीय संविधान के सन्दर्भ में यह कितना सही है? टिप्पणी कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: shodhganga.inflibnet.ac.inभारतीय राजव्यवस्था: एम. लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

टिप्पणी कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

संविधान और इसके महत्व को संक्षेप में समझाइये।

 विषय वस्तु:

भारतीय संविधान सहित सभी संविधान अतीत के उत्तराधिकारी और भविष्य के वसीयतकर्ता कैसे हैं, वर्तमान प्रासंगिक उदाहरणों के साथ इस कथन पर चर्चा कीजिये।

 निष्कर्ष:

इसका महत्व बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

4. दल-बदल विरोधी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से सम्बंधित मुद्दों की जाँच कीजिये। क्या यह कानून, दल-बदल को हतोत्साहित करते हुए स्वस्थ अंतर-दलीय वाद-विवाद और मतभेद की पराजय का कारण बनता है? विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: prsindia.orgHindustan Times 

निर्देशक शब्द:

जाँच कीजिये-

ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 विश्लेषण कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

सर्वप्रथम दल- बदल विरोधी कानून को समझाइये।

 विषय वस्तु:

दल- बदल विरोधी कानून के महत्व, कार्यप्राणाली, इसके दुरूपयोग और सम्बंधित मुद्दों का वर्णन कीजिये।

अंतर-दलीय वाद-विवाद और मतभेद के महत्व और एक स्वस्थ लोकतंत्र पर दल- बदल विरोधी कानून के प्रभावों को भी बताइये।

जहाँ भी आवश्यक हो, अपने पक्ष की पुष्टि के लिए प्रासंगिक न्यायालय के निर्णयों को भी प्रस्तुत करें।

 निष्कर्ष:

दल- बदल विरोधी कानून की स्पष्ट परिभाषा और कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

5. सभी खेलों के लिए एक मजबूत रूपरेखा का निर्माण करते हुए भारत में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने के महत्व का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  pib.gov.in 

 निर्देशक शब्द:

विश्लेषण कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

भारत की वर्तमान खेल संस्कृति पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

 विषय वस्तु:

अतीत से वर्तमान तक भारत की खेल संस्कृति में परिवर्तन को दर्शाते हुए इस दिशा में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों का उल्लेख कीजिये और साथ ही खेल से सम्बंधित कुछ कार्यक्रमों के नाम भी लिखिए। खेलों से संबंधित चिंताएं और चुनौतियों को बताते हुए इनके समाधान के लिए उपाय भी बताइये।

 निष्कर्ष:

भारत में खेल संस्कृति की आवश्यकता और महत्त्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिये।

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय। आपदा और आपदा प्रबंधन।

6. वैश्विक शिक्षा प्रणाली पर कोविड -19 के प्रभाव की विस्तार से चर्चा कीजिये। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: Hindustan Times 

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये-

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

कोविड-19 महामारी का वैश्विक शिक्षा प्रणाली पर प्रभाव के सन्दर्भ में कुछ तथ्यों/ डाटा के साथ उत्तर प्रारम्भ कीजिये।

 विषय वस्तु:

कोविड-19 महामारी द्वारा उत्पन्न मुद्दों की व्याख्या कीजिये।

क्या किया जाना चाहिए, इस पर चर्चा करें और भारत और इसकी शिक्षा प्रणाली का एक ‘केस स्टडी’ प्रस्तुत करें, जो कोविड-19 के प्रभाव और इस दिशा में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों से सम्बंधित हो।

 निष्कर्ष:

समाधान और आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

7. भारत में ई-शासन की संभावनाओं का विश्लेषण कीजिये। (250 शब्द)

सन्दर्भ: नीतिशास्त्र: लेक्सिकन प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

विश्लेषण कीजिये

ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना: 

परिचय:

सर्वप्रथम ई-शासन को परिभाषित कीजिये।

 विषय वस्तु:

सरकार द्वारा ई-शासन की दिशा में उठाये गए कदमों का वर्णन करते हुए भारत में ई-शासन की संभावनाओं पर प्रकाश डालिए।

भारत में ई-शासन की क्षमताओं को सीमित करने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख कीजिये।

 निष्कर्ष:

भारत में सामाजिक-आर्थिक और कल्याणकारी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ई-शासन की आवश्यकता और महत्त्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिये।


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