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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 5 August

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. अयोध्या के राम मंदिर की नागर वास्तुकला

 

सामान्य अध्ययन-II

1. उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (HEFA)

2. आंध्र प्रदेश हेतु तीन राजधानियाँ

3. शिक्षा पर महामारी के प्रभाव पर संयुक्त राष्ट्र की नीति

4. H1B वीजा धारकों के संघीय अनुबंधों में नियोजन के खिलाफ ट्रम्प का कार्यकारी आदेश

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. परिवार पहचान पत्र

2. चर्चित स्थल: बेरूत

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

अयोध्या के राम मंदिर की नागर वास्तुकला

(Nagara Architecture of Ayodhya’s Ram Mandir)

संदर्भ:

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण मंदिर वास्तुकला की नागर शैली के अनुसार किया जायेगा।

मंदिर वास्तुकला की नागर शैली

  • मंदिर वास्तुकला की नागर शैली उत्तर भारत में पाई जाती है।
  • नागर शैली में मंदिरों का निर्माण मुख्यतः ऊँची वेदी (मंच/चबुतरा) पर किया जाता है, जिसे जगती (Jagati) कहा जाता है। इन मंदिरों में गर्भगृह के सामने मंडपों का निर्माण किया जाता है।
  • गर्भगृह तथा मंडपों के उपर शिखर स्थापित किये जाते है, गर्भगृह के उपर का शिखर सबसे ऊँचा होता है।
  • नागर शैली में आमतौर पर विस्तृत चाहरदीवारी अथवा प्रवेश द्वार नहीं होते हैं।
  • गर्भगृह के चारों ओर एक रिक्त स्थान होता है जो प्रदक्षिणा पथ कहलाता है, जो प्रायः ढका हुआ होता है।

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हिंदू मंदिर के मूल रूप में निम्नलिखित वास्तु रचनाएँ सम्मिलित होती हैं:

  1. गर्भगृह – यह मंदिर का वह छोटा कक्ष होता है जिसमे मंदिर के मुख्य देवी / देवता निवास करते हैं।
  2. मंडप – मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप एक हालनुमा कक्ष होता है, जिसे प्रायः बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा विभिन्न कार्य करने हेतु बनाया जाता है।
  3. शिखर – यह पर्वत की चोटी के समान रचना होती है, जिसे प्रायः गर्भगृह के ऊपर स्थापित किया जाता है, यह आकार में पिरामिड की आकृति से लेकर वक्राकार तक विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं।
  4. वाहन – यह मुख्य देवता की वाहन होता है, जिसे सामान्यतः गर्भगृह की सीध में स्थापति किया जाता है।

नागर शैली की उप-शैलियाँ

नागर शैली को विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर ओडिशा, खजुराहो, सोलंकी आदि प्रकार की उप-शैलियों में विभाजित किया गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. नागर शैली की स्थापत्य कला में गर्भगृह कहाँ स्थित होता है?
  2. नागर तथा द्रविड़ शैली की वास्तुकला के मध्य प्रमुख अंतर
  3. नागर शैली में चारदीवारी तथा प्रवेश द्वार
  4. नागरा शैली के मंदिरों के उदाहरण
  5. द्रविड़ शैली के मंदिरों के उदाहरण।
  6. वास्तुकला की वेसरा शैली क्या है?

मेंस लिंक:

प्राचीन भारतीय मंदिर वास्तुकला सदियों में साधारण रॉक-कट गुफा मंदिरों से व्यापक रूप से अलंकृत मंदिरों तक विकसित हुई है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (HEFA)

(Higher Education Financing Agency)

 संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) के अधीन उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (Higher Education Financing Agency-HEFA)  द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) को  नए शैक्षणिक भवनों, छात्रावासों, तथा अनुसंधान केंद्रों के निर्माण के लिए 455.02 करोड़ रु. का अनुदान प्रदान किया गया है।

उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी

  • उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजेंसी (Higher Education Financing Agency- HEFA) को वर्ष 2017 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार और केनरा बैंक के संयुक्त उपक्रम के रूप में आरंभ किया गया था, जिसमे MHRD तथा केनरा बैंक की भागीदारी क्रमशः 91% तथा 09.09% है।
  • HEFA कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत एक केंद्र सरकार की कंपनी तथा RBI के साथ जमाराशियाँ न स्वीकार करने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC-ND) के रूप में पंजीकृत है।
  • इसका उद्देश्य: भारत के प्रमुख शिक्षण संस्थानों को वैश्विक स्तर की अनुसंधान एवं विकास (R&D) अवसंरचना के लिए वित्तपोषण प्रदान कर वैश्विक रैंकिंग में उत्कृष्ट स्थान हासिल करने तथा शीर्ष पर पहुंचने में सक्षम बनाना है।

कार्य:

  • HEFA संसाधनों को बाजार से निजी/ कॉर्पोरेट इक्विटी के माध्यम से जुटाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर बांड जारी करके वित्त का प्रबंध करेगी।
  • यह भारत के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) तथा शैक्षिक अवसरंचना के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
  • अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं के विकास के माध्यम से उच्च गुणवत्ता युक्त अनुसंधान हेतु वैज्ञानिक और तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करती है।
  • उच्च शिक्षा के उन्नयन हेतु विभिन्न योजनाओं के लिए कंपनियों तथा अनुदान द्वारा CSR योगदान का उपयोग करती है।

HEFA की कार्यविधि

HEFA के अंतर्गत वित्तपोषण, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भारत सरकार द्वारा वर्तमान में प्रदान की जा रही अनुदान सहायता को प्रतिस्थापित करेगा

  • विभिन्न मंत्रालयों द्वारा स्थापित / वित्तपोषित सभी शैक्षणिक संस्थान अपने पूंजीगत व्यय हेतु HEFA से वित्तपोषण के लिए पात्र होंगे।
  • HEFA अनुदान पद्धति की तुलना में संस्थानों को अधिक क्षेत्रों में वित्त पोषण करने में सक्षम होगा।
  • इसके अंतर्गत उच्च स्तर का अवसंरचना निर्माण शीघ्रता से किया जा सकता है, जिससे देश में जनसांख्यिकीय क्षमता का तत्काल सदुपयोग किया जा सकेगा।

RISE 2022

  • शिक्षा में अवसंरचना और प्रणालियों को मजबूती प्रदान करना (Revitalising Infrastructure and Systems in EducationRISE), 2022, को वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में भारत सरकार की एक मुख्य पहल के रूप में स्थान दिया गया था।
  • RISE के अंतर्गत HEFA का दायरा, चुनिंदा उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं के वित्तपोषण से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रु. की वित्तीय सहायता प्रदान करने तक किया गया है।
  • इसके अंतर्गत, अगले 4 वर्षों के अंदर इन संस्थानों में 1,00,000 करोड़ रु. तक के निवेश में वृद्धि करने का प्रस्ताव किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. HEFA क्या है?
  2. इसे कब स्थापित किया गया था?
  3. HEFA में भागीदार
  4. HEFA के कार्य
  5. RISE 2 क्या है?
  6. कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) क्या है?

मेंस लिंक:

HEFA के कार्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आंध्र प्रदेश हेतु तीन राजधानियाँ

(Three capitals for Andhra Pradesh)

संदर्भ:

हाल ही में, वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) सरकार द्वारा राज्य के लिए तीन राजधानियों के गठन पर अधिसूचना जारी की गयी थी, जिस पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 14 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गयी है।

चर्चा का विषय

  • सरकार द्वारा जारी किये गए दो अधिनियमों पर रोक लगाने तथा प्रदेश के लिए तीन राजधानियों के गठन संबंधी अधिसूचना के विरोध में उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गयीं हैं।
  • इन याचिकाओं के प्रत्युत्तर में, अदालत ने राजपत्रित अधिसूचना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है तथा राज्य सरकार से 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

तीन राजधानियाँ:

जनवरी 2020 में आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020 पारित किया गया था।

  • राज्य सरकार द्वारा 31 जुलाई को आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम, 2020 तथा आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (निरसन) अधिनियम, 2020 को अधिसूचित किया गया।
  • यह अधिनियम राज्य के लिए तीन राजधानियों का मार्ग प्रशस्त करता है।
  1. अमरावती- विधायी राजधानी।
  2. विशाखापत्तनम- कार्यकारी राजधानी।
  3. कुर्नूल – न्यायिक राजधानी।

तीन राजधानियों की आवश्यकता:

  • राज्य सरकार का कहना है कि वह राज्य के अन्य हिस्सों की उपेक्षा करते हुए एक विशाल राजधानी शहर बनाने के विरुद्ध है। प्रदेश की तीन राजधानियाँ होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का समान रूप से विकास सुनिश्चित होगा।
  • आंध्र प्रदेश की राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान का सुझाव देने के लिए गठित सभी प्रमुख समितियों की सिफारिशों में ‘विकेंद्रीकरण’ केंद्रीय विषय रहा है। इन समितियों में जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण समिति, के शिवरामकृष्णन समिति, तथा जी एन राव समिति आदि सम्मिलित हैं।

इस विचार को लागू करने में समस्या

  • समन्वय और क्रियान्वयन संबधी आशंका: अलग-अलग शहरों में स्थित विधायिका तथा कार्यपालिका का मध्य समन्वय स्थापित करना, कहने के लिए आसान परन्तु करने के लिए काफी मुश्किल साबित होगा, तथा, इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा इस संदर्भ में किसी योजना का विवरण नहीं दिया गया है, इससे अधिकारी तथा आम नागरिक सभी, इसके कार्यान्वयन को लेकर आशंकित हैं।
  • परिवहन लागत और समय: कार्यकारी राजधानी विशाखापत्तनम, न्यायिक राजधानी कुर्नूल से 700 किमी तथा विधायी राजधानी अमरावती से 400 किमी की दूरी पर स्थित है। अमरावती तथा कुर्नूल के मध्य 370 किमी की दूरी है। तीन राजधानियां होने से यात्रा में लगने वाला समय तथा लागत काफी महंगी साबित होगी।

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 एक से अधिक राजधानी वाले भारतीय राज्य

  1. महाराष्ट्र: की दो राजधानियाँ हैं- मुंबई तथा नागपुर (राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र)।
  2. हिमाचल प्रदेश: की शिमला और धर्मशाला (शीतकालीन) दो राजधानियाँ हैं।
  3. पूर्व राज्य जम्मू और कश्मीर की श्रीनगर तथा जम्मू (शीतकालीन) दो राजधानियाँ थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनहित याचिका याचिका क्या है?
  2. किन भारतीय राज्यों में एक से अधिक राजधानियाँ हैं?
  3. आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित राजधानियाँ
  4. भारतीय संविधान के तहत विभिन्न याचिकाएं

मेंस लिंक:

राज्य में कई राजधानियों की उपयुक्तता पर चर्चा कीजिए। यह किस प्रकार राज्य के शासन को प्रभावित कर सकती है? उपयुक्त उदाहरण सहित बताइए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

शिक्षा पर महामारी के प्रभाव पर संयुक्त राष्ट्र की नीति

(United Nation’s policy brief on the pandemic’s impact on education)

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शिक्षा पर महामारी के प्रभाव पर अपनी नीति के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गयी है।

नीति की मुख्य बातें:

  1. महामारी के कारण शिक्षा प्रणालियों में अव्यवस्था होने से संपूर्ण विश्व में 1.6 बिलियन से अधिक शिक्षार्थी प्रभावित हुए हैं।
  2. असमानताओं में वृद्धि: महामारी ने विश्व भर में व्याप्त असमानताओं को और अधिक बढाया है, निम्न-आय वर्ग वाले देशों में गरीब और निर्बल आबादी सबसे बुरी तरह प्रभावित हुई है।
  3. स्कूल से बाहर: COVID-19 के कारण आर्थिक गिरावट होने के कारण लगभग 24 मिलियन बच्चों के समक्ष अगले साल स्कूल में नहीं लौट सकने का संकट है।
  4. महामारी से लड़कियों तथा युवा महिलाओं के असंगत रूप से प्रभावित होने की संभावना है क्योंकि स्कूल बंद होने से इनके सामने बाल विवाह, शीघ्र गर्भधारण तथा लैंगिक हिंसा आदि का संकट हो सकता है।
  5. सीखने की क्षमता पर प्रभाव: जो शिक्षार्थी महामारी के बाद स्कूल जाने में सक्षम होंगे, उन्हें भी, विशेष रूप से प्रारंभिक कक्षाओं के छात्रों को, सीखने की क्षमता फिर से विकसित करनी पड़ सकती है।

महामारी का कुल प्रभाव:

अंतर्राष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम Programme for International Student Assessment– PISA) में भाग लेने वाले विकासशील देशों पर अध्ययन से निम्नलिखित संकेत मिलते है:

सीखने पर प्रभाव: लगभग तीन महीने स्कूलों के बंद रहने से कक्षा-3 के बच्चों की सीखने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, यदि इनके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गयी तो, इनमे से 72% छात्र तक पिछड़े रहेंगे अथवा स्कूल छोड़ देंगे या कुछ भी सीखने में सक्षम नहीं होंगे।

आर्थिक हानि: महामारी के कारण किसी छात्र के शैक्षिणक रूप से अक्षम हो जाने से उसके द्वारा अपने जीवनकाल में की जाने वाली संभावित कमाई के रूप में लगभग 16,000 डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। इस प्रकार वैश्विक स्तर पर गणना करने पर 10 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुक्सान हो सकता है।

वित्तीय अंतर में वृद्धि: 2020 की शुरुआत में, अल्प और मध्यम आय वाले देशों में शिक्षा बजट और गुणवत्ता युक्त शिक्षा संबंधी सतत विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए उपलब्ध धन के बीच $ 148 बिलियन का अंतर था। COVID-19 संकट से इस वित्तीय अंतराल में तीन गुना तक वृद्धि होने की संभावना है।

आगे की राह:शिक्षा बजट को संरक्षित करने और बढ़ाने की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के प्रयासों, ऋण प्रबंधन और प्रोत्साहन पैकेजों से लेकर वैश्विक मानवीय अपील और आधिकारिक विकास सहायता तक सभी स्तरों पर शिक्षा के केंद्र में रखना आवश्‍यक है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

H1B वीजा धारकों के संघीय अनुबंधों में नियोजन के खिलाफ ट्रम्प का कार्यकारी आदेश

(Trump signs executive order against hiring H1B visa holders for federal contracts)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संघीय एजेंसियों द्वारा H1B वीजा धारकों को नौकरी देने से रोकने संबंधी कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किये गए है। साथ ही राष्ट्रपति ने उनसे विशेष रूप से H1B वीजा धारक पेशेवरों के साथ कॉन्ट्रैक्ट और सब-कॉन्ट्रैक्ट करने से बचने को कहा है।

इसका प्रभाव

यह अमेरिका में नौकरी करने के इच्छुक भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पेशेवरों के लिए एक बड़ा झटका है। ट्रंप ने संघीय एजेंसियों को H1B वीजा धारकों तथा अन्य विदेशी श्रमिकों के स्थान पर अमेरिकियों को नौकरी देने का निर्देश दिया है।

H-1B वीजा क्या है?

ये एक गैर-प्रवासी वीजा होता है, जो किसी विदेशी नागरिक या कामगार को अमेरिका में काम करने के लिए 6 साल के लिए जारी किया जाता है। इस वीजा के लिए कर्मचारी को स्नातक होने के साथ-साथ किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञ भी होना आवश्यक है।

H-1B वीजा की लोकप्रियता का कारण

अमेरिका में संघीय एजेंसियां तथा अन्य विकसित देश, अपने कामों की लागत को कम रखने के लिए बड़ी संख्या में विदेशों से कार्मिकों की नियुक्ति करते है, अथवा विश्व भर में फ़ैली व्यवसायिक आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम में से अपने कार्य करवाते हैं। विकसित देशों में इस प्रकार की नौकरियों के लिए न्यूनतम पारिश्रमिक दिया जाता है, इस कारण से इन देशों के रोजगार खोजने वाले श्रमिक इन नौकरियों में रूचि नहीं लेते हैं।

इस निर्णय के निहितार्थ:

इस कार्यकारी आदेश में सभी संघीय एजेंसियों को आंतरिक ऑडिट करने तथा प्रतिस्पर्धी सेवाओं में केवल अमेरिका- निवासियों तथा नागरिकों को नियुक्त करने संबधी अनिवार्यताओं के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य किया गया है।

परिणामस्वरूप, अमेरिकी श्रम विभाग H-1B नियोक्ताओं द्वारा H-1B श्रमिकों को अन्य कार्यस्थलों पर भेजने तथा इन जगहों पर अमेरिकी श्रमिकों को प्रतिस्थापित करने से रोकने के लिए दिशानिर्देशों को अंतिम रूप देगा।

इस परिवर्तन का तात्कालिक कारण:

कुछ समय पूर्व, संघीय स्वामित्व वाली टेनेसी वैली अथॉरिटी (Tennessee Valley Authority– TVA) ने अपनी 20% प्रौद्योगिकी संबधी नौकरियों को विदेशों में स्थित कंपनियों से आउटसोर्स करने की घोषणा की थी।

राष्ट्रपति ट्रम्प का यह नया कार्यकारी आदेश इसी घोषणा के कारण लागू किया गया है। TVA के इस कदम से टेनेसी में कार्यरत 200 से अधिक उच्च कुशल अमेरिकी तकनीकी कार्मिकों की नौकरी समाप्त हो सकती है, और इनकी जगह पर कम वेतन पर काम करने वाले अस्थायी वीजा धारक विदेशी कर्मियों को नियुक्त किया जा सकता था।

ट्रम्प द्वारा दिए गए तर्क:

महामारी के दौरान लाखों अमेरिकी पहले ही अपनी नौकरियां गवां चुके है, और इस समय सैकड़ों श्रमिकों की आउटसोर्सिंग करना हानिकारक है।

राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा: वर्तमान में व्यापक स्तर पर बौद्धिक संपदा की चोरी के माहौल को देखते हुए, आईटी नौकरियों को आउटसोर्सिंग करना, जिसमें संवेदनशील जानकारी सम्मिलित होती है, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है।

इस आदेश से नियोक्ताओं द्वारा H-1B वीजा के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, H-1B वीजा का उद्देश्य कभी भी योग्य अमेरिकी श्रमिकों को कम वेतन में काम करने वाले विदेशी श्रमिकों के साथ प्रतिस्थापित करना नहीं था।

भारतीयों की चिंता

23 जून को ट्रम्प प्रशासन द्वारा, महत्वपूर्ण चुनावी वर्ष में अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा के लिए वर्ष 2020 के अंत तक H-1B तथा अन्य प्रकार के विदेशी श्रम वीजा को निलंबित कर दिया गया था। यह नया कार्यकारी आदेश उसी का एक भिन्न रूप है।

यह नया कार्यकारी आदेश, संघीय एजेंसियों के साथ अनुबंध पर कार्य कर रही भारतीय कंपनियों के कर्मचारियों को भी प्रभावित करेगा।

राज्य द्वारा संचालित बैंकों जैसी बड़ी संघीय एजेंसियां अपने डेटाबेस तथा अन्य सेवाओं की आपूर्ति एवं रखरखाव कार्य इंफोसिस, टीसीएस या विप्रो जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों से करवाती हैं।

यह आदेश अमेरिका को किस प्रकार प्रभावित करेगा?

यह नया कार्यकारी आदेश, गलत धारणाओं तथा गलत सूचनाओं पर आधारित है। चूंकि सभी देशों में अनलॉकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ट्रम्प प्रशासन के द्वारा इस प्रकार के उपाय अमेरिका की रिकवरी प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।

यह आदेश विशेष रूप से ऐसे समय में लागू किया जा रहा है जब अमेरिका में STEM  स्किल्स की भारी कमी है, जिसे H-1B तथा L-1  वीजा धारक श्रमिकों के द्वारा पूरा किया जाता है।

इंस्टा फैक्ट्स:

प्रतिवर्ष स्वीकृत 65,000 नए वीज़ा आवेदनों में से, औसतन 1,800 से 2,000 वीजा अथवा  3% वीजा, H-1B प्रकार  के वीजा होते हैं जो संघीय एजेंसियों द्वारा नियोजित श्रमिकों को दिए जाते हैं।

कुल H-1B में से लगभग 70% वीजा भारतीय नागरिकों को दिए जाते हैं।

निष्कर्ष:

मि. ट्रम्प का कहना है, कि वह योग्यता आधारित आव्रजन प्रणाली के पक्षधर हैं, जिसमे उच्च स्तर के कुशल कार्मिकों के देश में लाया जाता है, तथा जो अमेरिका के अंदर रोजगार उत्पन्न करते हैं और अमेरिकियों की नौकरियां नहीं लेते हैं। इस संबंध में शीघ्र ही एक आव्रजन विधेयक लाया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. H1B, F1 और M1 के मध्य अंतर
  2. NRI और OCI कार्डधारक के बीच अंतर
  3. OCI और PIO का विलय कब किया गया था?
  4. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत किसे नागरिकता प्रदान की जाती है?
  5. भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

मेंस लिंक:

अमेरिकी वीजा नियमों में हाल के बदलावों से अमेरिका में भारतीय छात्रों पर प्रभाव के संबंध में चर्चा कीजिए।

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


परिवार पहचान पत्र (PPP)

हरियाणा सरकार ने नागरिकों को विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के ‘परिवार पहचान पत्र’ का आरंभ किया है।

प्रमुख विशेषताऐं:

परिवार पहचान पत्र (PPP) पूरे परिवार को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करेगा और इसमें शीर्ष पर परिवार के मुखिया का नाम होगा। परिवार में नए सदस्य का नाम उसके जन्म के ठीक बाद परिवार पहचान पत्र में जोड़ा जाएगा तथा लड़की की शादी के बाद उसका नाम उसके ससुराल के ‘परिवार पहचान पत्र’ स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

महत्व:

परिवार पहचान पत्र का उद्देश्य हरियाणा में सभी परिवारों का एक प्रामाणिक सत्यापित और विश्वसनीय डाटा बेस तैयार करना है। इसके साथ सभी कल्याणकारी योजनाओं को जोड़ा जाएगा, ताकि हर परिवार को सभी सरकारी योजनाओं के लाभ विश्वसनीयता के साथ मिलता रहे।

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चर्चित स्थल: बेरूत

  • यह लेबनान की राजधानी तथा देश का सबसे बड़ा शहर है।
  • लेबनान के भूमध्यसागरीय तट के केंद्र में स्थित बेरूत एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बंदरगाह है।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में हुए एक बड़े विस्फोट ने राजधानी बेरूत के बंदरगाह क्षेत्र को तबाह कर दिया है।
  • यह धमाका एक गोदाम में असुरक्षित तरीके से रखी 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट के कारण हुआ था।

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