HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
भारत शासन अधिनियम 1858 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया।
- इसने भारत में पहले से प्रचलित सरकार के संपूर्ण ढांचे को परिवर्तित कर दिया।
- अधिनियम के अनुसार, भारत सरकार का इंग्लैंड द्वारा निगरानी और नियंत्रण किया जाना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: c)
इस महत्वपूर्ण अधिनियम को 1857 के विद्रोह के मद्देनजर लागू किया गया था। इस अधिनियम को भारत की बेहतर सरकार के लिए अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया, और ब्रिटिश क्राउन के अधीन सरकार, क्षेत्र और राजस्व की शक्तियों को स्थानांतरित कर दिया गया।
अधिनियम की विशेषताएं
- अब गवर्नर-जनरल, भारत में ताज के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने लगा। इसने भारत के गवर्नर-जनरल के पदनाम को भारत के वायसराय में बदल दिया। वह (वायसराय) भारत में ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि था। इस प्रकार लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
- इसने बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को समाप्त करके द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त कर दिया।
- इसने भारत सचिव नामक एक नये पद का सृजन किया, जिसे भारतीय प्रशासन पर पूर्ण अधिकार और नियंत्रण प्रदान किया गया। राज्य सचिव ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था और अंततः ब्रिटिश संसद के प्रति जिम्मेदार था।
- इसने भारत के राज्य सचिव की सहायता के लिए भारत की 15 सदस्यीय परिषद की स्थापना की। परिषद एक सलाहकारी निकाय थी। राज्य के सचिव को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया था।
- भारत राज्य सचिव एक निगम निकाय (Corporate Body) घोषित किया गया, जिस पर इंग्लैंड एवं भारत में दावा किया जा सकता था अथवा जो दावा दायर कर सकता था।
- हालाँकि, 1858 का अधिनियम मुख्यतः प्रशासनिक मशीनरी के सुधार तक ही सीमित था, भारत सरकार का इंग्लैंड द्वारा निगरानी और नियंत्रण किया जाना था। इसने भारत में प्रचलित किसी भी पर्याप्त तरीके से सरकार की प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया था।
Incorrect
उत्तर: c)
इस महत्वपूर्ण अधिनियम को 1857 के विद्रोह के मद्देनजर लागू किया गया था। इस अधिनियम को भारत की बेहतर सरकार के लिए अधिनियम के रूप में जाना जाता है। इसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया, और ब्रिटिश क्राउन के अधीन सरकार, क्षेत्र और राजस्व की शक्तियों को स्थानांतरित कर दिया गया।
अधिनियम की विशेषताएं
- अब गवर्नर-जनरल, भारत में ताज के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने लगा। इसने भारत के गवर्नर-जनरल के पदनाम को भारत के वायसराय में बदल दिया। वह (वायसराय) भारत में ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि था। इस प्रकार लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने।
- इसने बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को समाप्त करके द्वैध शासन व्यवस्था को समाप्त कर दिया।
- इसने भारत सचिव नामक एक नये पद का सृजन किया, जिसे भारतीय प्रशासन पर पूर्ण अधिकार और नियंत्रण प्रदान किया गया। राज्य सचिव ब्रिटिश कैबिनेट का सदस्य था और अंततः ब्रिटिश संसद के प्रति जिम्मेदार था।
- इसने भारत के राज्य सचिव की सहायता के लिए भारत की 15 सदस्यीय परिषद की स्थापना की। परिषद एक सलाहकारी निकाय थी। राज्य के सचिव को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया था।
- भारत राज्य सचिव एक निगम निकाय (Corporate Body) घोषित किया गया, जिस पर इंग्लैंड एवं भारत में दावा किया जा सकता था अथवा जो दावा दायर कर सकता था।
- हालाँकि, 1858 का अधिनियम मुख्यतः प्रशासनिक मशीनरी के सुधार तक ही सीमित था, भारत सरकार का इंग्लैंड द्वारा निगरानी और नियंत्रण किया जाना था। इसने भारत में प्रचलित किसी भी पर्याप्त तरीके से सरकार की प्रणाली में कोई बदलाव नहीं किया था।
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Question 2 of 5
2. Question
निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समितियों की अध्यक्षता, अध्यक्ष (Speaker) द्वारा नहीं की जाती है?
- लोक लेखा समिति
- व्यापार सलाहकार समिति
- प्राक्कलन समिति
- नियम समिति
- सरकारी उपक्रमों संबंघी समिति
- सामान्य प्रयोजन समिति
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
- अध्यक्ष (Speaker) द्वारा लोकसभा की सभी संसदीय समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है और उनके कामकाज का पर्यवेक्षण करता है। वह स्वयं व्यवसाय सलाहकार समिति, नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति का अध्यक्ष होता हैं।
Incorrect
उत्तर: b)
- अध्यक्ष (Speaker) द्वारा लोकसभा की सभी संसदीय समितियों के अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है और उनके कामकाज का पर्यवेक्षण करता है। वह स्वयं व्यवसाय सलाहकार समिति, नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति का अध्यक्ष होता हैं।
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Question 3 of 5
3. Question
निर्वाचन आयोग द्वारा उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के खिलाफ निम्नलिखित में से कौनसी संभावित कार्रवाई की जा सकती है/हैं?
- निर्वाचन आयोग उम्मीदवारों या नेताओं को किसी निर्दिष्ट अवधि के लिए प्रचार करने से रोक नहीं सकता है।
- निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले ‘आदर्श आचार संहिता‘ के अनुपालन की निगरानी करता है।
- यह किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में चुनावों को स्थगित कर सकता है, पहले से अधिसूचित चुनाव को रद्द कर सकता है, लेकिन पहले से ही संपन्न हो चुके चुनाव को निरस्त या रद्द नहीं कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के खिलाफ निर्वाचन आयोग निम्नलिखित संभावित कार्रवाई कर सकता है?
- निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले ‘आदर्श आचार संहिता’ के अनुपालन की निगरानी करता है।
- यदि उल्लंघन निर्वाचन कानून और आपराधिक कानून के तहत भी अपराध हैं, तो निर्वाचन आयोग के पास इन अपराधियों के खिलाफ मामले दर्ज करने की सिफारिश करने की शक्ति है।
- हालांकि, कुछ उल्लंघनों के लिए निर्वाचन आयोग के पास मामलों को दर्ज को निर्देशित करने के अलावा, उम्मीदवारों को सलाह देने या रोकने की शक्ति है। जैसे जब मतदान पर रोक हो, उस अवधि के दौरान वोटों के लिए प्रचार करना, जब MCC लागू हो, तो आधिकारिक घोषणाएं करना और मतदाताओं से संप्रदाय के आधार पर अपील करना।
- कुछ मामलों में, जैसा कि हाल की घटनाओं में देखा गया है, निर्वाचन आयोग उम्मीदवारों या नेताओं को निर्दिष्ट अवधि के लिए प्रचार करने से रोक सकता है।
- व्यक्तियों को निर्वाचन क्षेत्र छोड़ने या कुछ क्षेत्रों में प्रवेश करने से वर्जित करने की अन्य शक्तियां हैं। ये शक्तियाँ आवश्यक रूप से कानून के किसी भी प्रावधान के अधीन नहीं हैं, लेकिन आम तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संविधान के तहत निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी के व्यापक और पूर्ण प्रकृति के कारण अंतर्निहित माना जाता है।
- इसकी शक्तियां किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव स्थगित करने, पहले से अधिसूचित चुनाव को रद्द करने और यहां तक कि पहले से संपन्न चुनाव को निरस्त या रद्द कर सकता है।
Incorrect
उत्तर: c)
- उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के खिलाफ निर्वाचन आयोग निम्नलिखित संभावित कार्रवाई कर सकता है?
- निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों द्वारा किए जाने वाले ‘आदर्श आचार संहिता’ के अनुपालन की निगरानी करता है।
- यदि उल्लंघन निर्वाचन कानून और आपराधिक कानून के तहत भी अपराध हैं, तो निर्वाचन आयोग के पास इन अपराधियों के खिलाफ मामले दर्ज करने की सिफारिश करने की शक्ति है।
- हालांकि, कुछ उल्लंघनों के लिए निर्वाचन आयोग के पास मामलों को दर्ज को निर्देशित करने के अलावा, उम्मीदवारों को सलाह देने या रोकने की शक्ति है। जैसे जब मतदान पर रोक हो, उस अवधि के दौरान वोटों के लिए प्रचार करना, जब MCC लागू हो, तो आधिकारिक घोषणाएं करना और मतदाताओं से संप्रदाय के आधार पर अपील करना।
- कुछ मामलों में, जैसा कि हाल की घटनाओं में देखा गया है, निर्वाचन आयोग उम्मीदवारों या नेताओं को निर्दिष्ट अवधि के लिए प्रचार करने से रोक सकता है।
- व्यक्तियों को निर्वाचन क्षेत्र छोड़ने या कुछ क्षेत्रों में प्रवेश करने से वर्जित करने की अन्य शक्तियां हैं। ये शक्तियाँ आवश्यक रूप से कानून के किसी भी प्रावधान के अधीन नहीं हैं, लेकिन आम तौर पर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संविधान के तहत निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी के व्यापक और पूर्ण प्रकृति के कारण अंतर्निहित माना जाता है।
- इसकी शक्तियां किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव स्थगित करने, पहले से अधिसूचित चुनाव को रद्द करने और यहां तक कि पहले से संपन्न चुनाव को निरस्त या रद्द कर सकता है।
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Question 4 of 5
4. Question
‘व्हिप (whip)’ के पद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इस पद को संसद के प्रत्येक सदन में कार्य संचालन के नियमों द्वारा स्थापित किया गया है।
- केवल सत्तारूढ़ दल को संसद के प्रत्येक सदन में व्हिप की अनुमति प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
- ‘व्हिप (whip)’ के पद का उल्लेख न तो भारत के संविधान में है और न ही सदन के नियमों में और न ही संसदीय क़ानून में किया गया है। इसे संसदीय सरकार की परिपाटी से सृजित किया गया है।
- संसद में प्रत्येक राजनीतिक दल, चाहे सत्ताधारी हो या विपक्ष, का अपना व्हिप होता है। उन्हें एक सहायक फ्लोर नेता के रूप में सेवा करने के लिए राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त किया जाता है।
- उन पर अधिकाधिक अपनी पार्टी के सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और किसी विशेष मुद्दे के पक्ष में उनके समर्थन को सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी होती है।
- वह संसद में उनके व्यवहार को नियंत्रित और निगरानी करता है। सदस्यों को व्हिप द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाना चाहिए अन्यथा, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
Incorrect
उत्तर: d)
- ‘व्हिप (whip)’ के पद का उल्लेख न तो भारत के संविधान में है और न ही सदन के नियमों में और न ही संसदीय क़ानून में किया गया है। इसे संसदीय सरकार की परिपाटी से सृजित किया गया है।
- संसद में प्रत्येक राजनीतिक दल, चाहे सत्ताधारी हो या विपक्ष, का अपना व्हिप होता है। उन्हें एक सहायक फ्लोर नेता के रूप में सेवा करने के लिए राजनीतिक दल द्वारा नियुक्त किया जाता है।
- उन पर अधिकाधिक अपनी पार्टी के सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने और किसी विशेष मुद्दे के पक्ष में उनके समर्थन को सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी होती है।
- वह संसद में उनके व्यवहार को नियंत्रित और निगरानी करता है। सदस्यों को व्हिप द्वारा दिए गए निर्देशों का अनुपालन किया जाना चाहिए अन्यथा, उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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Question 5 of 5
5. Question
संविधान द्वारा, राज्यपाल पद या राज्यपाल के चयन के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त/शर्तें निर्धारित की गई है/हैं?
- राज्यपाल को उस राज्य से संबंधित नहीं होना चाहिए जहां उसे नियुक्त किया गया है।
- राज्यपाल की नियुक्ति राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श करने के बाद की जानी चाहिए।
- एक सेवारत राज्यपाल संसद के किसी भी सदन या राज्य विधान सभा का सदस्य नहीं बन सकता है।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
भारत के संविधान के अनुच्छेद 157 और अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद के लिए पात्रता आवश्यकताएँ निर्दिष्ट की गई हैं। वे इस प्रकार हैं:
- एक राज्यपाल को:
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
- संसद के किसी भी सदन या राज्य विधायिका का का सदस्य नहीं चाहिए।
- लाभ का कोई पद धारण नहीं करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, वर्षों के दौरान दो परिपाटियाँ भी विकसित हुयी हैं।
- प्रथम, वह एक बाहरी व्यक्ति होना चाहिए, अर्थात, वह उस राज्य से संबंधित नहीं होना चाहिए जहां उसे नियुक्त किया गया है, ताकि वह स्थानीय राजनीति से मुक्त हो।
- दूसरा, राज्यपाल की नियुक्ति करते समय, राष्ट्रपति को संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श करने की आवश्यकता होती है, ताकि राज्य में संवैधानिक मशीनरी का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।
- हालाँकि, कुछ मामलों में दोनों परिपाटियों का उल्लंघन किया गया है
Incorrect
उत्तर: b)
भारत के संविधान के अनुच्छेद 157 और अनुच्छेद 158 में राज्यपाल के पद के लिए पात्रता आवश्यकताएँ निर्दिष्ट की गई हैं। वे इस प्रकार हैं:
- एक राज्यपाल को:
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए।
- संसद के किसी भी सदन या राज्य विधायिका का का सदस्य नहीं चाहिए।
- लाभ का कोई पद धारण नहीं करना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, वर्षों के दौरान दो परिपाटियाँ भी विकसित हुयी हैं।
- प्रथम, वह एक बाहरी व्यक्ति होना चाहिए, अर्थात, वह उस राज्य से संबंधित नहीं होना चाहिए जहां उसे नियुक्त किया गया है, ताकि वह स्थानीय राजनीति से मुक्त हो।
- दूसरा, राज्यपाल की नियुक्ति करते समय, राष्ट्रपति को संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श करने की आवश्यकता होती है, ताकि राज्य में संवैधानिक मशीनरी का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।
- हालाँकि, कुछ मामलों में दोनों परिपाटियों का उल्लंघन किया गया है








