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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. अपने विचारों अथवा वेदना की अभिव्यक्ति, न्यायालय की अवमानना के समान ​​नहीं है: उच्चत्तम न्यायालय में प्रशांत भूषण का उत्तर

2. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019

3. रक्षा उत्पादन एवं निर्यात सवंर्द्धन नीति 2020 मसौदा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कृषि तथा किसानों संबंधी अध्यादेशों को वापस लेने की मांग

2. स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन

3. भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तेंदुए की गणना संबंधी रिपोर्ट

4. अरावली क्षेत्र में वृक्षों को बांधी गयी राखियाँ

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चर्चित स्थल: गैलापागोस द्वीपसमूह

2. जॉन ह्यूम (John Hume)

3. इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN)

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

अपने विचारों अथवा वेदना की अभिव्यक्ति, न्यायालय की अवमानना के समान ​​नहीं है: उच्चत्तम न्यायालय में प्रशांत भूषण का उत्तर

(Expression of opinion or anguish is not contempt amounting to scandalising the court: Prashant Bhushan tells SC)

संदर्भ:

हाल ही में, प्रतिष्ठित सिविल राइट्स अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उनके द्वारा किये गए ट्वीट्स के आधार पर शुरू की गई स्व-प्रेरित (suo motu) अवमानना ​​कार्रवाई में उच्चत्तम न्यायालय में अपना उत्तर दिया है।

चर्चा का विषय:

कुछ समय पूर्व प्रशांत भूषण ने दो ट्वीट किए थे- इनमे से एक ट्वीट मोटरसाइकिल पर भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद ए. बोबड़े की फोटो तथा दूसरा ट्वीट पिछले छह वर्षों में चार मुख्य न्यायाधीशों के अधीन उच्चत्तम न्यायालय के कामकाज के संदर्भ में था।

  • इसके पश्चात, न्यायालय द्वारा 22 जुलाई को प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना ​​नोटिस जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि ट्वीटस के द्वारा न्यायालय तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पद की गरिमा तथा अधिकार का हनन किया गया है।

प्रशांत भूषण द्वारा अपने बचाव में रखा गया पक्ष

  1. अपने विचारों अथवा वास्तविक वेदना की अभिव्यक्ति, मुखर, अप्रिय अथवा अरुचिकर हो सकती है, परन्तु, इसे न्यायालय की अवमानना के समान नहीं माना जा सकता है।
  2. मुख्य न्यायाधीश, न्यायालय नहीं हैं, और न्यायालय की छुट्टियों के दौरान CJI द्वारा किये गए आचरण के तरीकों के संबंध में चिंता व्यक्त करना, न्यायालय का अपमान करने के समान नहीं है।
  3. इसके अलावा, चार मुख्य न्यायाधीशों द्वारा मास्टर ऑफ द रोस्टर के रूप में शक्तियों के प्रयोग करने के तरीकों अथवा शक्तियों के प्रयोग करने में विफल रहते हुए निरंकुशता, बहुलतावाद, असहमति का दमन, व्यापक रूप से राजनीतिक बंदीकरण की अनुमति देने के संदर्भ में गंभीर प्रवृत्ति के मामलों को उठाना, न्यायालय का अपमान करने के समान नहीं है।

इस प्रकार के मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के पूर्व निर्णय

मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सी. एस. कर्णन के विरूद्ध अवमानना ​​मामले में उच्त्तम न्यायालय ने टिप्पणी की थी, कि ‘अवमानना ​​का कानून, जनमत के प्रति संवेदनशील हो जाने वाले न्यायाधीशों की सुरक्षा के लिए नहीं बनाया गया है। न्यायाधीशों से दृढ़ और धैर्यवान व्यक्ति होने की अपेक्षा की जाती है, जो विषम जलवायु में भी कामयाब होने में सक्षम होते हैं’।

न्यायालय द्वारा अवमानना ​​शक्ति का प्रयोग

  1. वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संविधान में स्थापित मूल्यों के ‘मुख्य संरक्षक’ है। इसलिए, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा अवमानना ​​शक्तियों का प्रयोग आवश्यक रूप से, ‘तर्कसंगत प्रतिबंधो’ से परे नहीं किया जाना चाहिए।
  2. अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना ​​की शक्ति का उपयोग न्याय प्रशासन में सहायता के लिए किया जाना चाहिए।
  3. उच्चत्तम न्यायालय की कार्यप्रणाली तथा अन्य संबधित विषयों की जानकारी रखने वाले प्रवुद्ध नागरिकों द्वारा की गयी आलोचनात्मक टिप्पणियों को दबाने हेतु अवमानना क़ानून का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

निष्कर्ष:

  • लोकतंत्र में नागरिकों को किसी संस्थान से संबंधित मामलों में स्वतंत्र तथा निष्पक्ष रूप से चर्चा करने और संस्थान में सुधार करने हेतु जनमत बनाने का पूरा अधिकार है।
  • हालांकि, प्रत्येक आलोचना जिम्मेदारी सहित की जानी चाहिए तथा इसका सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

नोट: इस संबंध में एक विस्तृत लेख 27 जुलाई को कवर किया जा चुका है:

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 129 किससे संबंधित है?
  2. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  4. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  5. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  6. 1971 की अवमानना अधिनियम की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019

(Code on Social Security, 2019)

संदर्भ:

हाल ही में, श्रम संबंधी संसदीय स्थायी समिति द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 पर अपनी रिपोर्ट पेश की गयी है।

लोक सभा द्वारा, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 के परीक्षण के लिए पिछले वर्ष दिसंबर में बीजू जनता दल के वरिष्ठ सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता में श्रम संबंधी संसदीय स्थायी समिति का गठन किया गया था।

समिति की मुख्य सिफारिशें:

  1. नियोजन की समाप्ति के बाद कर्मचारी को ग्रेच्युटी (Gratuity) भुगतान की समय सीमा वर्तमान पांच साल की निरंतर सेवा से घटाकर एक साल की जानी चाहिए।
  2. ग्रेच्युटी से संबंधित प्रावधान, सभी प्रकार के कर्मचारियों, जैसे ठेका मजदूर, आवधिक कामगार, नियतकालिक श्रमिक, तथा दैनिक / मासिक वेतन कर्मचारी आदि तक विस्तृत किये जाने चाहिए।
  3. ‘अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों’ को संहिता में एक अलग श्रेणी के रूप में उल्लिखित किया जाना चाहिए।
  4. अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिकों के लिए विशेष रूप से एक कल्याण कोष गठित किया जाना चाहिए। इस कोष में, श्रमिकों के मूल राज्यों, रोजगार देने वाले राज्यों, ठेकेदारों, प्रमुख नियोक्ताओं तथा पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों द्वारा आनुपातिक रूप से योगदान किया जाना चाहिए।
  5. इस कोष का उपयोग विशेष रूप से उन श्रमिकों / कर्मचारियों के लिए किया जाना चाहिए, जो किसी अन्य कल्याणकारी सहायता के अंतर्गत रक्षित नहीं हैं।
  6. पंजीकृत प्रतिष्ठानों, प्रवासी श्रमिकों तथा भवन एवं अन्य विनिर्माण श्रमिकों के डेटाबेस के लिए एक केंद्रीय ऑनलाइन पोर्टल बनाया जाना चाहिए।
  7. पंजीकरण: कृषि, गैर-कृषि, आनुबंधिक कार्यो, तथा स्व-रोजागर सहित सभी प्रतिष्ठानों के श्रमिकों को विभिन्न संगठनों के स्थान पर एक निकाय के तहत पंजीकृत कराना आवश्यक किया जाना चाहिए। यह निकाय देश में सभी प्रकार के श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा हेतु उत्तरदायी होगा।
  8. सहिंता में राज्यों के मध्य भवन एवं विनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष की पोर्टेबिलिटी के लिए एक सक्षम प्रणाली को सम्मिलित किया जाना चाहिए, जिससे लाभार्थियों को किसी भी राज्य में धनराशि का भुगतान किया जा सके।

पृष्ठभूमि:

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 को पिछले वर्ष दिसंबर माह में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, किंतु इसके कुछ प्रमुख प्रावधानों पर विशेष चिंताएं उठाई गईं, जिसके कारण विधेयक को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था।
  • यह संहिता, सामाजिक सुरक्षा से संबंधित वर्तमान में लागू नौ कानूनों को प्रतिस्थापित करेगी और इसका उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा एवं संबंधित मुद्दों से संबंधित कानूनों में संशोधन तथा उनका समेकन करना है।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • भवन एवं विनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष में योगदान हेतु किसी भी विनिर्माण कार्य पर कुल लागत का 1 प्रतिशत उपकर लगाया जाता है।
  • यह कोष भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, (BOCW Act),1996, का एक भाग है, जिसके अंतर्गत निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण एवं कल्याणकारी योजनाओं के प्रावधान किये गए है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भवन एवं विनिर्माण श्रमिक कल्याण कोष के बारे में।
  2. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 द्वारा कितने कानूनों को प्रतिस्थापित किया जाएगा?
  3. संहिता में प्रमुख प्रस्ताव।
  4. संहिता की प्रयोज्यता।
  5. संसदीय स्थायी समितियाँ- रचना, स्थापना और कार्य।

मेंस लिंक:

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 पर एक टिप्पणी लिखिए।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

रक्षा उत्पादन एवं निर्यात सवंर्द्धन नीति 2020 मसौदा

(Draft Defence Production and Export Promotion Policy 2020)

संदर्भ;

हाल ही में, रक्षा मंत्रालय द्वारा रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति 2020 (Draft Defence Production and Export Promotion Policy- DPEPP 2020) का प्रारूप तैयार किया है।

DPEPP 2020 को रक्षा उत्पादन क्षमताओं में वृद्धि तथा आत्मनिर्भर बनने और देश को रक्षा उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु रक्षा मंत्रालय (MoD) का अति महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में परिकल्पित किया गया है।

DPEPP 2020 में निम्नलिखित लक्ष्यों और उद्देश्यों को निर्धारित किया गया है:

  1. वर्ष 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा वस्तुओं और सेवाओं में 35,000 करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,75,000 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य।
  2. गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एयरोस्पेस एवं नैसैनिक पोत निर्माण उद्योग सहित एक गतिशील, मजबूत और प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग विकसित करना।
  3. आयात पर निर्भरता कम करने तथा घरेलू डिजाइन और विकास के माध्यम से “मेक इन इंडिया” पहल को आगे बढ़ाना।
  4. रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक रक्षा मूल्य श्रृंखलाओं का हिस्सा बनना।
  5. अनुसंधान एवं विकास को बढावा देने, नवाचारों को पुरुस्कृत करने, भारतीय बौद्धिक संपदा स्वामित्व बनाना तथा एक मजबूत आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने वाले परिवेश का निर्माण करना।
  6. कुल रक्षा खरीद में घरेलू खरीद का हिस्सा लगभग 60% है। घरेलू उद्योगों से खरीद बढ़ाने के लिए, वर्ष 2025 तक वर्तमान खरीद को 70,000 करोड़ से बढाकर दोगुना अर्थात 1,40,000 करोड़ तक करना।

DPEPP 2020 के अंतर्गत विशेष ध्यान दिए जाने वाले क्षेत्र:

  1. खरीद सुधार
  2. MSMEs / स्टार्टअप का स्वदेशीकरण तथा सहायता
  3. अनुकूलतम संसाधन आवंटन
  4. निवेश संवर्धन, FDI तथा व्यापार करने में आसानी
  5. नवाचार तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D)
  6. DPSUऔर OFB
  7. गुणवत्ता आश्वासन और परीक्षण अवसंरचना
  8. निर्यात संवर्धन

नीति के अन्य प्रमुख अंश:

  1. नीति में, बार्षिक रूप से क्रमानुसार ‘हथियारों तथा प्लेटफॉर्म्स’ की एक नकारात्मक सूची जारी की जायगी, जिसके तहत दी गयी तिथियों से अधिसूचित हथियारों तथा प्लेटफॉर्म्स से आयात प्रतिबंधित किया जायेगा।
  2. एक प्रौद्योगिकी मूल्यांकन प्रकोष्ठ (Technology Assessment CellTAC) का गठन किया जायेगा। यह देश के प्रमुख उद्योगों के अलावा, बख्तरबंद वाहनों, पनडुब्बियों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और राडार जैसी प्रमुख प्रणालियों के उत्पादन के लिए डिजाइन, विकास तथा उत्पादन हेतु औद्योगिक क्षमता का आकलन करेगी।
  3. एक परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management UnitPMU) की स्थापना की जायेगी, जिसमे उपकरणों तथा हथियार प्रणालियों के रखरखाव के लिए जरूरतों आदि का आकलन किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नीति के तहत प्रस्तावित प्रौद्योगिकी मूल्यांकन प्रकोष्ठ के कार्य।
  2. ‘हथियारों तथा प्लेटफॉर्म्स’ की एक नकारात्मक सूची किसके द्वारा जारी की जायेगी?
  3. नीति के अंतर्गत प्रस्तावित लक्ष्य
  4. अन्य प्रमुख प्रस्ताव

मेंस लिंक:

रक्षा उत्पादन और निर्यात संवर्धन नीति 2020 मसौदे के उद्देश्यों तथा महत्व पर चर्चा कीजिए।

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स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

कृषि तथा किसानों संबंधी अध्यादेशों को वापस लेने की मांग

(Centre should repeal ordinances: farmers)

संदर्भ:

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (All India Kisan Sangharsh Coordination CommitteeAIKSCC) द्वारा ‘कृषि तथा किसानों से संबंधित मुद्दों पर केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लागू किये गए अध्यादेशों के खिलाफ 9 अगस्त को देश भर में ‘कॉर्पोरेट्स खेती छोड़ो’ आंदोलन की घोषणा की गयी है।

चर्चा का विषय:

जून 2020 में, केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार करने हेतु तीन अध्यादेश जारी किये गए थे। ये अध्यादेश निम्नलिखित है:

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश 2020
  2. कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020
  3. मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020

परंतु, किसान कार्यकर्ताओं को इन अध्यादेशों से निराशा हुई है, इनका कहना है, कि यह सुधार पैकेज किसानों की समस्याओं को हल करने के बजाय इनकी समस्याओं में और वृद्धि करेंगे।

संबंधित चिंताएँ:

  1. ये अध्यादेश किसान विरोधी हैं, तथा इसके परिणामस्वरूप किसानों के लिए फसलों की कीमतें घटेंगी तथा बीज सुरक्षा समाप्त हो जायेगी।
  2. सरकार का हस्तक्षेप समाप्त होने से खाद्य सुरक्षा भी ख़त्म हो जायेगी।
  3. ये अध्यादेश, भारतीय खाद्य और कृषि प्रणालियों पर कॉर्पोरेट नियंत्रण को बढ़ावा देते हैं।
  4. ये किसानों के शोषण तथा जमाखोरी और कालाबाजारी को भी बढ़ावा देंगे।

अब हम क्रमशः अध्यादेशों पर चर्चा करते हैं;

  1. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020:

मुख्य प्रावधान: इस संशोधन के अंतर्गत अकाल, युद्ध, आदि जैसी असामान्य परिस्थितियों के कारण कीमतों में अत्याधिक वृद्धि तथा प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में कुछ निर्दिष्ट कृषि उपजों की आपूर्ति, भंडारण तथा कीमतों को नियंत्रित किये जाने का प्रावधान किया गया है।

संबंधित चिताएं:

  1. इस अध्यादेश के अंतर्गत कृषि उपजों की मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव काफी विषम है (बागवानी उपजों की खुदरा कीमतों में 100% की वृद्धि तथा शीघ्र ख़राब नहीं होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतों में 50% की वृद्धि)।
  2. इसके तहत किसी कृषि उपज के मूल्‍य श्रृंखला (वैल्‍यू चेन) प्रतिभागी की स्‍थापित क्षमता स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेगी।
  3. निर्यातक, वस्तुओं की मांग दिखाने पर, स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेंगे।
  4. कृषि उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सुविधा) अध्‍यादेश 2020:

मुख्य प्रावधान: इसके तहत, कृषि उपज बाज़ार समिति (Agricultural Produce Market Committees-APMC) बाजारों की उपेक्षा करते हुए निजी स्थल पर अथवा APMC द्वारा निर्धारित बाजार-स्थलों के बाहर व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान की गयी है।

संबंधित चिताएं:

  1. इस अध्यादेश से इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो जाती है, जिसमे किसानों को स्थानीय बाजार में अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने से कोई खरीददार नहीं मिलता है।
  2. चूंकि, अधिकांश किसान छोटे अथवा सीमांत कृषि-भूमि के मालिक होते हैं, और इनके पास अपनी उपज को दूर की बाजारों में बेचने हेतु परिवहन के लिए साधन नहीं होते है।
  3. अतः, इन किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाजार में ही न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमतों पर कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
  4. मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश 2020:

मुख्य प्रावधान: इसके अंतर्गत भारत में अनुबंध कृषि (Contract Farming) के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार किये जाने का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ दो वृहत् चिंताएं जुड़ी हैं:

  1. पहली चिंता का कारण अनुबंध कृषि में किसानों तथा कार्पोरेट्स के मध्य समझौता करने की शक्ति से संबंधित है। इसमें एक किसान अपनी पैदावार के लिय उचित मूल्य तय करने में कॉर्पोरेट अथवा बड़े व्यवसायिक प्रायोजकों के साथ समझौता करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं होता है।
  2. दूसरे, अध्यादेश में कहा गया है, कि गुणवत्ता मानकों को समझौते में दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से तय किया जा सकता है। लेकिन, कॉरपोरेट्स के द्वारा उपज की गुणवत्ता के संदर्भ में एकरूपता मामलों को शामिल करने पर, गुणवत्ता पहलू काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि, देश में कृषि-पारिस्थितिक विविधता में असमानता होने कारण गुणवत्ता में एकरूपता संभव नहीं होगी।

निष्कर्ष:

यह तीनों अध्यादेश, संबंधित राज्यों पर सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों के आधार पर दूरगामी और अलग-अलग प्रभाव डालेंगे।

  • केंद्र के द्वारा इस प्रकार के साहसिक और एकतरफा कदम, विभिन्न राज्यों के अन्दर भूमि विविधता, फसलों के पैटर्न, कृषि बाजारों के ऐतिहासिक कामकाज आदि, तथा देश की विशाल विविधता को समाहित करने में विफल रहे हैं।
  • इसलिए, आशंका यह है कि यह तीनों अध्यादेश किसानों की मदद करने के बजाय देश में लाखों छोटे और सीमांत किसानों के लिए संकट का कारण बन सकते हैं। इस प्रकार के उदाहरण, पिछले विमुद्रीकरण (demonetization) तथा COVID-19 के कारण अनियोजित लॉकडाउन संबंधित मामलों में देखे जा सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. APMC क्या हैं? उनका नियमन कैसे किया जाता है?
  2. मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम का अवलोकन
  3. सरकार द्वारा जारी किये गए अध्यादेश कौन से है?
  4. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 में मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव की अनुमति।
  5. आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के तहत स्टॉक सीमा विनियमन किसके लिए लागू नहीं होगा?

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत कृषि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित सुधार किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन

(What is the SpaceX Crew Dragon?)

संदर्भ:

2 अगस्त, 2020 को स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन (SpaceX Crew Dragon) अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष यात्रियों डग हर्ले (Doug Hurley) और बॉब बेहेनकेन (Bob Behnken) के साथ मेक्सिको की खाड़ी में सफलतापूर्वक उतर गया।

स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन क्या है?

मई 2020 में, क्रू ड्रैगन नौ साल में अमेरिकी धरती से मनुष्यों को लॉन्च करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया।

  • इसका निर्माण, एलन मस्क के स्पेसएक्स द्वारा किया गया है, तथा यह नासा द्वारा निजी कंपनियों को अंतरिक्ष स्टेशन की उड़ानें सौंपने की योजना का हिस्सा है।
  • स्पेसएक्स को नासा के व्यवसायिक क्रू कार्यक्रम (Commercial Crew Program) के माध्यम से वित्तपोषित किया गया था, इस कार्यक्रम को वर्ष 2010 में अंतरिक्ष अन्वेषण हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।

पृष्ठभूमि:

क्रू ड्रैगन का निर्माण स्पेसएक्स द्वारा विकसित ड्रैगन 1 (Dragon 1) को उन्नत करके किया गया है। ड्रैगन 1 को मई 2012 तथा मार्च 2020 के मध्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाने के मिशन पर 20 बार लॉन्च किया जा चुका है।

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मिशन का महत्व:

  1. यह अन्तरिक्ष यात्राओं के इतिहास में पहली बार था कि अंतरिक्ष यात्रियों ने किसी निजी कंपनी द्वारा निर्मित और लॉन्च किए गए अंतरिक्ष यान का उपयोग किया था। इस मिशन को अंतरिक्ष अन्वेषण क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
  2. इस अंतरिक्ष यान को फाल्कन 9 नामक रॉकेट के द्वारा कक्षा में पहुंचाया गया, फाल्कन 9 राकेट का निर्माण भी स्पेसएक्स (SpaceX) द्वारा किया गया है।
  3. इस मिशन को डेमो –2 कहा गया है, क्योंकि यह एक प्रायोगिक तौर पर परीक्षण उड़ान’ थी, जिसके सफल होने पर आगामी महीनों में अन्तरिक्ष में अन्य मिशन भेजे जायेंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नासा का व्यवसायिक क्रू प्रोग्राम- भागीदार
  2. अंतरिक्ष शटल कार्यक्रम
  3. डेमो 1 तथा डेमो 2 मिशन
  4. ISS क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा तेंदुए की गणना संबंधी रिपोर्ट

(Report on leopard sightings)

चर्चा का कारण

भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India- WII) द्वारा वैश्विक बाघ गणना के भाग के रूप में, तेंदुओं (leopard) के देखे जाने संबंधी एक रिपोर्ट तैयार की गयी है, जिसे माह के अंत तक जारी किया जाएगा।

इंस्टा फैक्ट्स:

भारत में तेंदुए की अलग से गणना नहीं की जाती है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा प्रति चार वर्ष में किये जाने वाले बाघ सर्वेक्षण के दौरान कैमरा ट्रैप छवियों के आधार पर तेंदुए सहित अन्य वन्य जीवों की आबादी का भी अनुमान लगाया जाता है।

भारत में तेंदुओं की अनुमानित संख्या:

  • भारत के तेंदुओं की अंतिम औपचारिक गणना 2014 में आयोजित की गई थी जिसमें इस प्रजाति की आबादी 12,000 से 14,000 के मध्य आंकलित की गयी थी।
  • सर्वेक्षण में बाघ के निवास के आसपास के क्षेत्रों में 8,000 तेंदुए होने का अनुमान लगाया गया था।

गणना की वर्तमान पद्धति के साथ समस्याएं:

बाघ सर्वेक्षण के साथ-साथ तेंदुओं का सर्वेक्षण काफी कठिनाई भरा होता है क्योंकि तेंदुआ अक्सर जंगलों की बाहरी सीमा पर, मानव बस्ती के नजदीक रहने का अभ्यस्त होता है, जबकि बाघ एक चालाक जीव होता है, जो सामान्यतः जंगलों के बीच में रहता है। इससे तेंदुओं की सही संख्या का अनुमान लगाने में काफी गलतियाँ होती हैं।

तेंदुओं की गणना करने में समस्याएं:

  • तेंदुए, बाघ तथा मनुष्य दोनों के वास स्थलों में निवास करते हैं। ये संरक्षित क्षेत्रों में भी पाए जाते है, और साथ ही कृषि क्षेत्रों, झाड़ीयुक्त-प्रदेशों तथा नदीय इलाकों में भी निवास करते हैं। अतः, इस प्रकार की व्यापक रूप से बिखरी हुई आबादी की गणना करना कठिन कार्य है।
  • इसके अलावा, तेंदुए अभी पर्याप्त संख्या है तथा देश के सभी भागों में अच्छी तरह से वितरित हैं। अतः इनकी पृथक गणना करना आवश्यक भी नहीं है।

वर्तमान आवश्यकताएं:

भारत में तेंदुओं की आबादी पिछली सदी की तुलना में मात्र दस प्रतिशत के करीब होने का अनुमान है, तथा इनकी संख्या में कमी का प्रमुख कारण मानव दबाव है।

  • तेंदुओं की गणना करने के स्थान पर, यदि इनके संरक्षण को नीतिगत निर्णयों में प्राथमिकता दी जाये तो यह इस प्रजाति के लिए काफी भला होगा।
  • तेंदुओं की प्रतिशोधात्मक हत्या करने तथा इनके व्यापार के लिए अवैध शिकार पर प्रतिबंध लगाने हेतु एक सख्त नीति लागू की जानी चाहिए।
  • वर्तमान में इस प्रजाति के समक्ष, मनुष्यों के साथ संघर्ष, अवैध शिकार, शिकार की उपलब्धता, वास स्थानों की कमी आदि खतरों को देखते हुए ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की भांति एक पहल शुरू किये जाने की आवश्यकता है।

इंस्टा फैक्ट्स: तेंदुआ (Leopard)

  • वैज्ञानिक नाम- पैन्थेरा पार्डस (Panthera pardus)
  • भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध
  • CITES के परिशिष्ट-I में सम्मिलित
  • IUCN रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध
  • विश्व में तेंदुए की नौ उप-प्रजातियां पाई जाती है, तथा ये अफ्रीका और एशिया में वितरित है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. तेंदुए की IUCN स्थिति
  2. CITES क्या है?
  3. तेंदुए की उप-प्रजातियां
  4. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत विभिन्न अनुसूचियां
  5. भारत में बाघों की गणना किसके द्वारा की जाती है?
  6. IUCN की लाल सूची में श्रेणियां

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

अरावली क्षेत्र में वृक्षों को बांधी गयी राखियाँ

(Rakhis tied to trees in Aravalis)

संदर्भ:

रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर, महिलाओं और बच्चों ने, वृक्षों को पत्तियों की बेलों की राखी बांधी तथा अरावली जंगलों की रक्षा करने की शपथ ली। अरावली के जंगल गुरुग्राम तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में स्वच्छ हवा और पानी के लिए जीवन रेखा के समान भूमिका निभाते हैं।

पृष्ठभूमि:

अरवलियों के निरंतर क्षरण होने से गुरुग्राम और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जल सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। अरावली पहाड़ियों में पड़ने वाली प्राकृतिक दरारों से इस पर्वत श्रृंखला में भूजल के पुनर्भरण के लिए बेहतर स्थिति बन गयी है। वर्तमान में यह क्षेत्र जल-सनाक्त की दृष्टि से ‘रेड जोन’ में है, क्योंकि यह जल भराव की तुलना में जल-निष्कर्षण कई गुना अधिक होता है।

अरावली पर्वत श्रेणी

  • अरावली पर्वत श्रेणी उत्तर-पूर्व में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल्ली तथा पालनपुर, गुजरात के मध्य फ़ैली हुई है।
  • इसकी सबसे ऊँची चोटी ‘गुरु शिखर’ है, जिसकी ऊंचाई 1,722 मीटर (5,650 फीट) है।
  • ये विश्व के सबसे पुराने वलित पर्वतों में से एक है, तथा ये भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रंखला है।
  • कुछ भूगोलवेत्ताओं के अनुसार, अरावली की एक शाखा खंभात की खाड़ी से होती हुई लक्षद्वीप द्वीपसमूह तक विस्तृत है तथा दूसरी शाखा आंध्र प्रदेश और कर्नाटक तक फ़ैली हुई है।
  • अरावली श्रेणी के दक्षिण-पश्चिम छोर पर इसकी ऊंचाई 1,000 मीटर से अधिक हो जाती है तथा यहाँ पर माउंट आबू (1,158 मीटर) को बनास नदी की घाटी मुख्य श्रेणी से अलग करती है।
  • इस श्रेणी में पिपली घाट, दिवेर (Dewair) तथा देसुरी दर्रों से होकर सड़क और रेलवे यातायात विकसित किया गया है।
  • अरावली पर्वतश्रेणी भू-पर्पटी के दो प्राचीन खंडो, अरावली भाग तथा बुंदेलखंड भाग को जोडती है, जो भारतीय उपमहाद्वीप के वर्तमान आकार में निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अरावली श्रेणी की नदियां:

इस श्रेणी से तीन प्रमुख नदियाँ व उनकी सहायक नदियाँ निकलती है, जिनमे बनास तथा साहिबी (Sahibi) नदियाँ यमुना नदी में मिल जाती है, तथा ‘लूणी’ नदी कच्छ के रण में प्रवाहित होती है।

अरावली की ग्रेट ग्रीन वाल (Great Green wall of Aravalli):

यह गुजरात से दिल्ली के मध्य अरावली पर्वतश्रेणी के साथ 1,600 किमी लंबा और 5 किमी चौड़ा हरित पारिस्थितिकी गलियारा है।

  • इस गलियारे को शिवालिक पर्वत श्रेणी से जोड़ा जायेगा।
  • इस गलियारे को अफ्रीका के ‘ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ़ सहारा’ की अवधारणा पर बनाया जाएगा तथा यह प्रदूषण के खिलाफ एक बफर ज़ोन के रूप में कार्य करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अरावली के जंगल कितने राज्यों में फैले हुए हैं?
  2. शिवालिक श्रेणी कहाँ है?
  3. अरावली की ग्रेट ग्रीन दीवार क्या है।
  4. अरावली से होकर बहने वाली महत्वपूर्ण नदियाँ।
  5. महत्वपूर्ण दर्रे

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स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चर्चित स्थल: गैलापागोस द्वीपसमूह

गैलापागोस द्वीप समूह, लगभग 60,000 वर्ग किमी में विस्तृत है तथा इक्वाडोर का एक भाग है। यह द्वीपसमूह, दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप से लगभग 1,000 किमी की दूरी पर प्रशांत महासागर में स्थित हैं।

  • यहां पाए जाने वाले विशाल कछुओं- जिन्हें स्पेनिश में गैलापागोस कहा जाता है के नाम पर इस द्वीपसमूह का नामकरण किया गया है।
  • इक्वाडोर ने वर्ष 1935 में गैलापागोस को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया तथा यह अभयारण्य वर्ष 1959 में गैलापागोस राष्ट्रीय उद्यान के रूप में परिवर्तित हो गया। वर्ष 1978 में, यह द्वीपसमूह यूनेस्को का पहला विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया।
  • चार्ल्स डार्विन ने इस द्वीप समूह को ‘अपने आप में एक दुनिया’ के रूप में वर्णित किया था।

चर्चा का कारण

  • हाल ही में “फ्लोटिंग सिटी” कहे जाने वाले चीनी मछुआरों के जहाजी बेड़े को गैलापागोस द्वीपसमूह के पास देखा गया था, इसके बाद से इक्वाडोर सतर्क हो गया है।
  • चीनी मछुआरे प्रतिवर्ष इस मौसम में इक्वाडोर के जलीय क्षेत्र में अतिक्रमण करते है, क्योंकि इस समय इस क्षेत्र में ठंडी हम्बोल्ट धारा उच्च पोषक तत्वों को लाती है, जिससे समुद्री प्रजातियों की संख्या में काफी वृद्धि हो जाती है।

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जॉन ह्यूम (John Hume)

  • उत्तरी आयरलैंड में हिंसा समाप्त करने वाले समझौते के सूत्रधार तथा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दूरदर्शी राजनीतिज्ञ जॉन ह्यूम का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया है।
  • इन्हें उत्तरी आयरलैंड के 1998 के शांति समझौते के प्रमुख वास्तुकार के रूप में जाना जाता था।

इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (eVIN)

  • यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • eVIN का का लक्ष्य देश के सभी कोल्ड चेन पॉइंट्स पर वैक्सीन के भंडार तथा बाजार में उपलब्धता और भंडारण तापमान पर वास्तविक समय की जानकारी देना है।

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