विषय – सूची:
सामान्य अध्ययन-I
1. बाल गंगाधर तिलक की 100 वीं पुण्यतिथि
2. गोरखा सैनिकों संबंधी 1947 का त्रिपक्षीय समझौता
सामान्य अध्ययन-II
1. सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम
सामान्य अध्ययन-III
1. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु ‘उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन’ (PLI) योजना
2. बेइदोऊ नेविगेशन सिस्टम
3. नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS)
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
1. स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2020:
2. भारत एयर फाइबर सेवाएँ
3. ढोल (एशियाई जंगली कुत्ता)
4. मैंडारिन भाषा (Mandarin)
5. चर्चित स्थल: बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र
6. चर्चित स्थल: अगत्ती द्वीप समूह
7. ब्रिटेन के द्वारा महात्मा गांधी के सम्मान में सिक्का जारी करने की योजना
सामान्य अध्ययन-I
विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
बाल गंगाधर तिलक की 100 वीं पुण्यतिथि
संदर्भ:
महान स्वतंत्रता सेनानियों में से एक तथा ‘पूर्ण स्वराज’ के प्रबल समर्थक, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 100 वीं पुण्यतिथि 1 अगस्त को मनाई गयी।
विरासत:
- लाल-बाल-पाल (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल) की त्रिमूर्ति में से एक बाल गंगाधर तिलक को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों द्वारा ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहा जाता था।
- जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें ‘भारतीय क्रांति का जनक’ कहा था।
- महात्मा गांधी ने तिलक को ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ बताया।
प्रसिद्ध उद्घोष:
उन्होंने ‘स्वराज मेरा जन्म अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा’ का नारा दिया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य किया।
ध्यान दें:
बाल गंगाधर तिलक की जयंती 23 जुलाई को मनाई गयी थी। इस विषय पर विस्तृत लेख 24 जुलाई को प्रकाशित किया गया है।
प्रीलिम्स लिंक:
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरमपंथी तथा नरमपंथी
- ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना किसने की? उद्देश्य क्या थे?
- तिलक द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र
- डेक्कन एजुकेशन सोसायटी के साथ तिलक का संबंध
- गीता रहस्य के बारे में
- तिलक को “आधुनिक भारत का निर्माता” किसके द्वारा कहा गया?
मेंस लिंक:
बाल गंगाधर तिलक ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण और प्रमुख भूमिका निभाई। चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू
विषय: स्वतंत्रता के पश्चात् देश के अंदर एकीकरण और पुनर्गठन।
गोरखा सैनिकों संबंधी 1947 का त्रिपक्षीय समझौता
संदर्भ:
हाल ही में नेपाल के विदेश मंत्री द्वारा गोरखा सैनिकों की सैन्य सेवाओं से संबंधित सन 1947 में नेपाल, भारत और ब्रिटेन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते को निरर्थक बताया गया है।
गोरखा सैनिकों संबंधी समझौते के बारे में:
- वर्ष 1814-16 में हुए एंग्लो-नेपाली युद्ध के पश्चात वर्ष 1815 में अंग्रेजों द्वारा सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती करने का फैसला किया गया।
- वर्ष 1947 में भारत की आजादी के समय ब्रिटिश सेना में गोरखा सैनिकों की 10 रेजिमेंट्स थी, इनके बटबारे को लेकर ब्रिटेन-भारत-नेपाल के मध्य त्रिपक्षीय समझौता किया गया था।
- इस समझौते के तहत ब्रिटिश साम्राज्य की गोरखा रेजिमेंट्स को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बांट दिया गया।
- इसमें यह भी आश्वासन दिया गया, कि गोरखा सैनिकों को दोनों सेनाओं में भारतीय और ब्रिटिश सैनिकों की भांति ही वेतन, भत्ते, सुविधाएं और पेंशन दी जायेगी।
वर्तमान विवाद का विषय
- पिछले कुछ समय से, सेवानिवृत्त गोरखा सैनिक ब्रिटेन पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगा रहे हैं।
- हाल ही में कालापानी क्षेत्र को लेकर हुए नेपाल-भारत क्षेत्रीय विवाद की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना में सेवारत गोरखाओं के संदर्भ में नेपाल द्वारा प्रमुखता से आपत्तियों को उठाया गया है।
नेपाल द्वारा उठाये गए कदम
- नेपाल द्वारा गोरखा सैनिकों के सुरक्षित भविष्य के संबंध में यूनाइटेड किंगडम से 1947 के समझौते की समीक्षा करने के लिए पत्र लिखा है।
- इसके अतिरिक्त, नेपाल वर्ष 1947 में किये गए इस समझौते को समाप्त करने की योजना बना रहा है।
ब्रिटिश सेना में गोरखा सैनिक:
- वर्तमान में, ब्रिटिश सेना में गोरखाओं की संख्या 3% है तथा वर्ष 2015 में गोरखाओं को ब्रिटिश सेना में 200 वर्ष पूरे हो गए।
- ब्रिटिश सेना में गोरखाओं को खूँखार और वफादार के रूप में जाने जाते है तथा उच्च सम्मान दिया जाता है। सेना में गोरखाओं को पैदल सेना (Infantry) के अलावा इंजीनियरिंग कोर तथा लोजिस्टिक कोर में भी भर्ती किया जाता है।
- उनका प्रसिद्ध हथियार, खुखरी, अपनी आकृति तथा ऐतिहासिक उपयोगिता के लिए विख्यात है, तथा यह ब्रिटेन के साथ-साथ भारत में भी गोरखा रेजिमेंट के प्रतीक चिन्ह का एक भाग है।
- ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ द्वितीय की सुरक्षा दो निजी गोरखा अधिकारियों की जाती है।
इंस्टा फैक्ट्स:
भारतीय सेना प्रमुख को नेपाल की सेना में जनरल का मानद पद प्रदान किया जाता है।
प्रीलिम्स लिंक:
- 1814-16 के एंग्लो-नेपाली युद्ध के कारण और परिणाम
- सुगौली की संधि के बारे में
- गोरखा सैनिकों संबंधी 1947 के समझौते का अवलोकन
- कालापानी कहां है?
- नाकु ला (Naku La) कहाँ है?
- डोकलाम कहां है?
मेंस लिंक:
भारतीय सेना में गोरखाओं के योगदान तथा भारत-नेपाल संबंधों पर उनकी सेवाओं के निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू
सामान्य अध्ययन-II
विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।
सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA)
(Public Safety Act)
चर्चा का कारण
पिछले वर्ष 5 अगस्त को जम्मू और कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया गया था। इसके लगभग एक साल के बाद भी, जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय पार्टियों के दो दर्जन से अधिक प्रमुख नेता अपने घरों में नजरबंद हैं।
इसके पूर्व राज्य को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा प्राप्त था, विशेष दर्जे की समाप्ति के साथ ही अनुच्छेद 35A को भी निरसित कर दिया गया।
इस प्रकार के उपायों से संबंधित चिंताएं:
- बिना किसी प्रशासनिक आदेश के गृह-नजरबंदी अवैध है।
- यह मानव अधिकारों तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।
- यहां तक कि अदालतों में भी नजरबंद कश्मीरी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हुई है, और इन्हें सरकार की दया छोड़ दिया गया है।
अब तक कितने लोग गिरफ्तार किए गए हैं?
जम्मू और कश्मीर, गृह विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 5 अगस्त की कार्यवाही के पश्चात से अनुमानतः 500 से अधिक लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।
- हिरासत में लिए गए लोगों में, पथराव करने वाले, वकील, हुर्रियत के अलगाववादी नेता तथा भारत समर्थक दलों के नेता भी सम्मिलित थे।
- हिरासत में लिए गए लगभग, 250 कश्मीरी अभी भी केंद्र शासित प्रदेश के बाहर की जेलों में बंद हैं।
- 6 अगस्त, 2019 से, श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर, केंद्र शासित प्रदेश के माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष छह सौ से अधिक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर की गई हैं परन्तु, जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय द्वारा आज तक इन मामलों के 1% का भी फैसला नहीं किया गया है।
कार्यवाही की आवश्यकता
- एक वर्ष से अधिक समय तक नजरबंद रहने वाले नेताओं की सशर्त रिहाई।
- इन्टरनेट के 4 जी नेटवर्क की बहाली।
- शांतिपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों से प्रतिबंध हटाना।
- 5 अगस्त के निर्णय से प्रभावित लोगों के साथ एक बहुस्तरीय संवाद।
- कश्मीरी किसानों और व्यापारियों को उनके आर्थिक नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति।
सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सरकार की शक्तियां:
- सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) को ‘जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम’, 1978 भी कहा जाता है।
- यह एक निवारक निरोध कानून (Preventive Detention Law) है, जिसके तहत ‘राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने’ के लिए किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की आशंकापूर्ण गतिविधि करने से रोकने हेतु हिरासत में लिया जाता है।
इसे क्यों लागू किया गया था?
इस अधिनियम को, ‘लकड़ी की तस्करी को रोकने तथा तस्करों को ‘स्वतन्त्र घूमने’ से रोकने के लिए एक कड़े कानून के रूप में लागू किया गया था।
प्रयोज्यता (Applicability):
- इस कानून के अंतर्गत सरकार को 16 साल से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को बिना सुनवाई के दो साल तक हिरासत में रखने की शक्ति प्रदान की गयी है।
- इसके तहत, किसी व्यक्ति की गतिविधियों से ‘राज्य की सुरक्षा’ को खतरे की आशंका होने पर दो साल तक के लिए प्रशासनिक हिरासत, तथा ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ में खतरे की आशंका होने पर एक वर्ष तक के लिए प्रशासनिक हिरासत में रखने की अनुमति दी गयी है।
इसे किस प्रकार लागू किया जाता है?
- इस अधिनियम को संभागीय आयुक्त या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रशासनिक आदेश पारित कर लागू किया जाता है।
- हिरासत में लेने वाले अधिकारी के लिए किसी व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने संबंधी कारण बताना आवश्यक नहीं है, क्योंकि कारणों का स्पष्टीकरण सार्वजनिक हित के विरुद्ध हो सकता है।
प्रवर्तक अधिकारियों को सुरक्षा:
अधिनियम की धारा 22 के तहत, प्रवर्तक अधिकारियों को ‘अच्छे उद्देश्य’ के साथ की गई किसी भी कार्रवाई के लिए सुरक्षा प्रदान की गयी है: ‘इस अधिनयम के प्रावधानों के अनुकरण में ‘अच्छे उद्देश्यों’ के लिए की गयी किसी भी कार्यवाही के लिए संबधित व्यक्ति पर कोई कानूनी कार्यवाही, सुनवाई, अथवा मुकदमा नहीं किया जायेगा।‘
इस संबंध में नियम बनाने का अधिकार
- अधिनियम की धारा 23 के तहत, सरकार को ‘इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप, उद्देश्य-सिद्धि के लिए आवश्यकतानुसार नियम बनाने का अधिकार प्रदान किया गया है’।
- हालांकि, सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के प्रावधानों के कार्यान्वयन हेतु प्रक्रियाओं को निर्धारित करने के लिए अभी तक कोई नियम नहीं बनाए गए हैं।
कानून से संबधित विवाद
- इसके तहत, बिना सुनवाई के हिरासत में रखने की अनुमति दी गयी है।
- हिरासत में लिए गए व्यक्ति को जमानत हेतु याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है।
- इस अधिनियम के अंतर्गत हिरासत में लेने संबधी कारणों की भरमार है।
- मामूली और गंभीर प्रकृति के अपराधों के बीच कोई अंतर स्पष्ट नहीं किया गया है।
न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप
- इस अधिनियम के तहत, प्रशासनिक निवारक निरोध के आदेश को केवल हिरासत में लिए गए व्यक्ति के रिश्तेदारों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के माध्यम से न्ययालय में चुनौती दी जा सकती है।
- इस प्रकार की याचिकाओं पर केवल उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय सुनवाई कर सकते है।
- यदि न्यायालय सरकार के प्रशासनिक निवारक निरोध आदेश को निरस्त कर देती है, तो सरकार, दोबारा से व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में ले सकती है।
इंस्टा फैक्ट्स:
अनुच्छेद 22 (3) – यदि किसी व्यक्ति को ‘निवारक निरोध’ के तहत गिरफ्तार अथवा हिरासत में लिया गया है तो उसे अनुच्छेद 22(1) और 22(2) के तहत प्राप्त ‘गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ संरक्षण’ का अधिकार प्राप्त नहीं होगा।
प्रीलिम्स लिंक:
- अनुच्छेद 370 तथा 35A किससे संबंधित हैं?
- भारतीय संविधान के अंतर्गत निवारक निरोध से संबंधित प्रावधान
- सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम कब और क्यों लागू किया गया था?
- पब्लिक सेफ्टी एक्ट के सेक्शन 22 और 23 किससे संबंधित हैं?
- अधिनियम के प्रावधानों को कौन लागू करता है?
मेंस लिंक:
जम्मू और कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) की प्रमुख विशेषताओं पर चर्चा कीजिए। इसे अक्सर ‘बेरहम’ (draconian) कानून के रूप में क्यों जाना जाता है?
स्रोत: द हिंदू
सामान्य अध्ययन-III
विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हेतु ‘उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन’ (PLI) योजना
(What is the production linked incentive scheme for electronics manufacturers?)
संदर्भ:
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology– MeitY) की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए ‘उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन’ योजना के अंतर्गत मोबाइल फ़ोन तथा अन्य इलेक्ट्रोनिक कलपुर्जों के निर्माण के संबंध में सैमसंग, पेगाट्रॉन, फ्लेक्स और फॉक्सकॉन जैसे वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज सरकार के साथ वार्ता के अंतिम चरण में हैं।
उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना के बारे में:
उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (Production Linked Incentive– PLI ) योजना को राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के भाग के रूप में 1 अप्रैल को अधिसूचित किया गया था।
PLI के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रॉनिक घटकों के निर्माण में व्यापक निवेश को आकर्षित करने के लिये वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किये जाते है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं:
- इस योजना के तहत भारत में निर्मित और लक्षित क्षेत्रों में शामिल वस्तुओं की वृद्धिशील बिक्री (आधार वर्ष) पर पात्र कंपनियों को 5 वर्ष की अवधि के लिये 4-6 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। प्रोत्साहन राशि की गणना के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 को आधार वर्ष माना जायेगा।
- इस योजना के तहत आवेदन करने लिए शुरुआत में 4 महीने का समय दिया गया है, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है।
- इस योजना का कार्यान्वयन एक नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, यह नोडल एजेंसी एक परियोजना प्रबंधन एजेंसी (Project Management Agency– PMA) के रूप में कार्य करेगी तथा समय-समय पर MeitY द्वारा सौंपे गए सचिवीय, प्रबंधकीय और कार्यान्वयन सहायता प्रदान करने संबधी कार्य करेगी।
पात्रता:
- योजना के अनुसार, 15,000 रुपये अथवा उससे अधिक मूल्य के मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को इस प्रकार के भारत में निर्मित सभी मोबाइल फोन की बिक्री पर 6 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।
- इसी श्रेणी में, भारतीय नागरिकों के स्वामित्व में मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों को अगले चार वर्षों में 200 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जायेगी।
निवेश का प्रकार
- सभी भारतीय इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण कंपनियां अथवा भारत में पंजीकृत इकाईयां योजना के अंतर्गत आवेदन की पात्र होंगी।
- ये कंपनियां प्रोत्साहन राशि के लिए किसी नई इकाई का निर्माण कर सकती अथवा भारत में विभिन्न स्थानों पर कार्यरत अपनी मौजूदा इकाइयों के लिए प्रोत्साहन राशि की मांग कर सकती हैं।
- हालांकि, किसी परियोजना के लिए भूमि और इमारतों पर कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को प्रोत्साहन राशि के लिए गणना करते समय निवेश के रूप में नहीं माना जायेगा।
इस प्रकार की योजनाओं की आवश्यकता
भारत, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर विनिर्माण क्षेत्र में, अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में पिछड़ा हुआ है।
- इस क्षेत्र में, पर्याप्त अवसंरचना, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और लाजिस्टिक, उच्च वित्तीय लागत; ऊर्जा की अपर्याप्त आपूर्ति; सीमित डिजाइन क्षमताएं और उद्योगों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर अपेक्षाकृत का व्यय तथा कौशल विकास में कमी के कारण लगभग 8.5% से 11% का नुकसान होता है।
- अतः, भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) में एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए, देश में मुख्य कलपुर्जों को विकसित करने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण के निर्माण करना तथा प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
प्रीलिम्स लिंक:
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति के तहत प्रमुख प्रस्ताव।
- ‘उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन’ योजना- इसकी घोषणा कब की गई थी?
- इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि है?
- किस तरह के निवेश पर विचार किया जाएगा?
- योजना की अवधि
- इसे कौन कार्यान्वित करेगा?
मेंस लिंक:
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए ‘उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन’ योजना क्या है? चर्चा कीजिए।
स्रोत: द हिंदू
विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।
बेइदोऊ नेविगेशन सिस्टम
(BeiDou navigation system)
संदर्भ:
हाल ही में चीन द्वारा स्वदेशी बेइदोऊ नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम (BeiDou navigation satellites system) समूह को पूरा करने की घोषणा की गयी है।
‘बेईदोऊ’(BeiDou) नेविगेशन सिस्टम क्या है?
यह चीन निर्मित सैटेलाइट नेवीगेशन प्रणाली है।
- इस प्रणाली में उपग्रहों के नेटवर्क का उपयोग किया जाता है, तथा यह दस मीटर की दूरी तक सटीक अवस्थिति प्रदान कर सकती है। (जीपीएस (GPS), 2 मीटर तक सटीक अवस्थिति प्रदान करता है)।
- चीन ने मत्स्य पालन, कृषि, विशेष देखभाल, लोक-बाजार अनुप्रयोगों, वानिकी और सार्वजनिक सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपने अनुप्रयोगों को एकीकृत करने के उद्देश्य से वर्ष 1994 में ‘बेईदोऊ’ (BeiDou) प्रोजेक्ट का आरम्भ किया था।
- BeiDou, सटीक अवस्थिति, नेविगेशन और समय के साथ-साथ संक्षिप्त संदेश संचार (short message communication) सेवाएं प्रदान करता है।
इस नेविगेशन सिस्टम में कितने उपग्रह हैं?
BeiDou नेविगेशन सिस्टम के अंतर्गत ‘मध्य भू कक्षा’ (Medium Earth orbit- MEO) में 27 उपग्रह, भूस्थैतिक कक्षा में पांच उपग्रह तथा आनत भू-समकालिक कक्षाओं (inclined geosynchronous orbits) में तीन उपग्रह स्थिति हैं।
चीन के लिए इसका महत्व
- चीन और अमेरिका के मध्य संबंध बिगड़े हुए है, अतः चीन के लिए अमेरिकी जीपीएस पर निर्भरता समाप्त करने के लिए अपना नेविगेशन सिस्टम तैयार करना आवश्यक हो गया।
- BeiDou प्राणाली के पूरे होने के पश्चात चीन के पास अब अपना नेविगेशन सिस्टम है, तथा यह अन्य देशों द्वारा विकसित नेविगेशन प्रणालियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो गया है।
- यह प्रणाली चीनी सेना को बेईदोऊ-निर्देशित पारंपरिक आक्रामक हथियारों (Beidou-guided conventional strike weapons) की तैनाती करने में सक्षम बनायेगी।
अन्य देशों द्वारा नेविगेशन प्रणालियों पर किया जा रहा कार्य
- जीपीएस (GPS) अमेरिकी सरकार की नेविगेशन प्रणाली है तथा इसे अमेरिकी वायु सेना द्वारा संचालित किया जाता है।
- रूस के पास अपना नेविगेशन सिस्टम ग्लोनास (GLONASS) है।
- यूरोपीय संघ (EU) के नेविगेशन सिस्टम का नाम गैलीलियो (GALILEO) है।
- भारत की नेविगेशन प्रणाली को नाविक- नैविगेशन विद इंडियन कौन्स्टेलेशन (NAVigation with Indian Constellation– NavIC) कहा जाता है।
प्रीलिम्स लिंक:
- पृथ्वी की निचली कक्षा, मध्य भू-कक्षा तथा भू-स्थैतिक कक्षा के बीच अंतर
- BeiDou नेविगेशन प्रणाली द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवायें
- यह अमेरिका के जीपीएस से किस प्रकार भिन्न है?
- ग्लोनास और गैलीलियो नेविगेशन सिस्टम के बारे में
- NavIC के बारे में
मेंस लिंक:
नाविक- नैविगेशन विद इंडियन कौन्स्टेलेशन (NavIC) के उद्देश्यों और महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।
नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS)
(National Transit Pass System)
नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम, टिम्बर (लकड़ी), बांस और अन्य वन उपजों के लिए एक ऑनलाइन पारगमन पास जारी करने वाली प्रणाली है।
- इसे हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा आरंभ किया गया है।
- प्रारंभ में, नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम को प्रायोगिक परियोजना के रूप में मध्य प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा।
क्रियाविधि:
- इसके लिए आवेदक को सिस्टम में पंजीकरण कराना होता है, उसके बाद ट्रांजिट पास के लिए आवेदन किया जा सकता है।
- ऑनलाइन आवेदन संबंधित रेंज के वन कार्यालय में चला जाता है। इसके पश्चात राज्य विशिष्ट प्रक्रियानुसार सत्यापन करने के पश्चात ट्रांजिट पास जारी कर दिया जाएगा।
- आवेदक, को पास जारी होने संदेश भेजा जाएगा, और वह पारगमन पास को डाउनलोड कर सकता है।
महत्व:
यह प्रणाली, ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया तेजी लायेगी। इस सिस्टम से जारी किया गया पारगमन पास पूरे भारत में मान्य होगा, तथा इससे वनोपज के निर्बाध आवागमन में वृद्धि होगी।
स्रोत: पीआईबी
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन 2020:
- हैकाथॉन एक राष्ट्रव्यापी पहल है जो छात्रों को दैनिक जीवन में आने वाली कुछ दबावपूर्ण समस्याओं को हल करने हेतु एक मंच प्रदान करता है, और इस प्रकार नवाचार की संस्कृति तथा समस्याओं से निपटने की मानसिकता विकसित करता है।
- स्मार्ट इंडिया हैकथॉन का पहला संस्करण 2017 में आयोजित किया गया था।
- यह हैकथॉन मानव संसाधन विकास मंत्रालय, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), पर्सिस्टेंट सिस्टम्स और i4c द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
भारत एयर फाइबर सेवाएँ
(Bharat Air Fibre Services)
भारत एयर फाइबर सेवाएं बीएसएनएल द्वारा भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहलों के एक हिस्से के रूप में प्रदान की जायेंगी। इसका लक्ष्य बीएसएनएल की अवस्थिति से 20 किमी के दायरे में वायरलेस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है और इस प्रकार दूरदूराज के स्थान के ग्राहक भी लाभान्वित हो सकेंगे, क्योंकि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पाटनर्स (Telecom Infrastructure Partners -TIPs) की सहायता से बीएसएनएल सबसे सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराती है।
ढोल (एशियाई जंगली कुत्ता)
Dhole (Asiatic wild dog)
एक नए अध्ययन के अनुसार, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश, भारत में लुप्तप्राय ढोल (Dhole- एशियाटिक वाइल्ड डॉग, इंडियन वाइल्ड डॉग तथा रेड डॉग भी कहा जाता है) के संरक्षण में शीर्ष स्थान पर हैं।
प्रमुख तथ्य:
- ढोल, दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया के उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक जंगली मांसाहारी जानवर है।
- IUCN स्थिति: लुप्तप्राय (Endangered)
- CITES स्थिति: परिशिष्ट II में सूचीबद्ध
- वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची II में सूचीबद्ध
- अधिकांश क्षेत्रों में ढोल प्रजाति के कुत्तों की संख्या कम हो रही है जिसका मुख्य कारण इनके आवासों का नष्ट होना, शिकार की कमी, घरेलू कुत्तों से बीमारी का संचरण और अन्य प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा है।
मैंडारिन भाषा (Mandarin)
यह चीनी मुख्य भूमि तथा ताइवान में सरकारी तथा शिक्षा की भाषा है। जबकि, हांगकांग और मकाऊ प्रांतो में मैंडारिन भाषा के स्थान पर वहां की स्थानीय बोली कैंटोनीज़ (Cantonese) का अधिक उपयोग किया जाता है।
सन्दर्भ:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में शैक्षणिक पाठ्यक्रम से मैंडारिन भाषा को विदेशी भाषाओं की श्रेणी से हटा दिया गया है।
चर्चित स्थल: बाराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र
(Barakah Nuclear Energy Plant)
- हाल ही में, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र ने क्रांतिकता हासिल कर ली है, और यह सफलतापूर्वक आरंभ हो गया है।
- बाराकाह, जिसका अरबी में मतलब ‘आशीर्वाद’ होता है, संयुक्त अरब अमीरात का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
- बराकाह को कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के नेतृत्व में एक कंसोर्टियम द्वारा बनाया गया है।
चर्चित स्थल: अगत्ती द्वीप समूह
अगत्ती (Agatti) द्वीप, भारत के केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में अगत्ती एटोल (Agatti atoll) पर स्थित 7.6 किमी लंबा द्वीप है।
चर्चा का कारण:
हाल ही में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा अगत्ती द्वीप पर समुद्र तट के किनारे रोड बनाने के उद्देश्य से नारियल के पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी गयी है।
ब्रिटेन के द्वारा महात्मा गांधी के सम्मान में सिक्का जारी करने की योजना
ब्रिटेन, अश्वेत, एशियाई और अन्य अल्पसंख्यक नृजातीय समुदायों के योगदान को मान्यता देने के क्रम में महात्मा गांधी की स्मृति एक सिक्का जारी करने पर विचार कर रहा है।














