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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 August

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. सचेतक (व्हिप) क्या होता है?

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ग्रामोद्योग विकास योजना

2. स्मॉग टॉवर क्या हैं?

3. सीसा विषाक्तता पर यूनिसेफ की रिपोर्ट

4. मुल्लापेरियार बांध विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. युवा वैज्ञानिक पुरस्कार

2. स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड

3. (SKOCH अवार्ड्स के बारे में:

4. महात्मा गांधी सेतु:

5. मुस्लिम महिला अधिकार दिवस

6. संयुक्त राष्ट्र यूरोपीय आर्थिक आयोग (UNECE)

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

सचेतक (व्हिप) क्या होता है?

(What is a whip?)

संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) द्वारा बागी विधायकों की अयोग्यता की कार्यवाही में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुये शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की गयी है। उच्च न्यायालय ने इन विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्थगित रखने का विधानसभा अध्यक्ष को आदेश दिया था

विवाद का विषय

मुख्य सचेतक के अनुसार, 24 जुलाई को उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश ‘किहोतो होलोहान (Kihoto Hollohan) प्रकरण’,1992 में उच्चत्तम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले का उल्लंघन करता है।

उच्चत्तम न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अदालतों को विधानसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय से पहले अयोग्यता की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अयोग्यता कार्यवाही की न्यायिक समीक्षा भी काफी सीमित की गयी थी।

हालांकि, उच्च न्यायालय द्वारा, इस मामले में,  अयोग्यता कार्यवाही के नोटिस चरण में ही हस्तक्षेप किया गया है।

सचेतक क्या होता है?

सचेतक (Whip), किसी राजनीतिक दल का एक अधिकारी होता है जो संसद सदन अथवा विधान सभा के अंदर दल के प्रवर्तक(Enforcer) के रूप में कार्य करता है।

  • राजनीतिक पार्टियां, सदन के अंदर व्हिप जारी करने के लिए अपने सदस्यों में से वरिष्ठ सदस्य को नियुक्त करती हैं – इस सदस्य को मुख्य सचेतक (Chief Whip) कहा जाता है, तथा इसकी सहायता के लिए पार्टियों द्वारा अतिरिक्त सचेतक भी नियुक्त किये जाते है।
  • भारत को व्हिप की अवधारणा ब्रिटिश संसदीय प्रणाली से विरासत में प्राप्त हुई है।

(नोट: संसदीय भाषा में व्हिप, सदन में होने वाले किसी मतदान में उपस्थित रहने तथा किसी विशेष तरीके से मतदान में भाग लेने के लिए, राजनीतिक पार्टी द्वारा अपने सदस्यों को जारी किया गया लिखित आदेश भी होता है।)

सचेतक की भूमिका:

पार्टी सचेतक/व्हिप, सदन में अपनी पार्टी की आधिकारिक नीति के अनुसार, अपने दल के सदस्यों द्वारा मतदान सत्र में भाग लेने और मतदान करने को सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं।

व्हिप के उल्लंघन करने पर स्थिति

  • सदन में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने पर सदन के सदस्य को अयोग्यता कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है। यदि, सदन में किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते है, उन्हें दल-बदल क़ानून के तहत अयोग्यता कार्यवाही से छूट प्राप्त होती है।
  • सदस्यों की अयोग्यता का निर्धारण सदन के अध्यक्ष द्वारा किया जाता है।

सचेतक की सीमा:

राष्ट्रपति निर्वाचन, जैसे कुछ मामलों में सचेतक/व्हिप किसी संसद सदस्य अथवा विधान सभा सदस्य को किसी विशेष प्रकार से मतदान करने का निर्देश नहीं दे सकते।

व्हिप के प्रकार:

राजनीतिक पार्टी द्वारा तीन प्रकार के व्हिप अथवा निर्देश जारी किए जाते हैं:

  1. वन लाइन व्हिप (One-line whip): इसे पार्टी के सदस्यों को मतदान के बारे में सूचित करने के लिए जारी किया जाता है। इस प्रकार की व्हिप में सदस्य, पार्टी की नीति से सहमत नहीं होने पर मतदान में अनुपस्थित रह सकते हैं।
  2. टू लाइन व्हिप (Two-line whip): इसके द्वार सदस्यों को मतदान के समय सदन में उपस्थित रहने का निर्देश जारी किया जाता है।
  3. थ्री लाइन व्हिप (Three-line whip): इसके द्वारा सदस्यों को पार्टी नीति के अनुसार मतदान करने का निर्देश जारी किया जाता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय संविधान की 10 वीं अनुसूची किससे संबंधित है?
  2. सचेतक (Whip) क्या है?
  3. मुख्य सचेतक कौन होता है?
  4. किहोतो होलोहान प्रकरण’,1992 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अवलोकन
  5. व्हिप के उल्लंघन करने पर स्थिति
  6. व्हिप की सीमा
  7. व्हिप के प्रकार

मेंस लिंक:

सचेतक (Whip) क्या होता है? सरकार द्वारा निचले सदन में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने पर सहेतक की भूमिकाओं और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

ग्रामोद्योग विकास योजना

(Gramodyog Vikas Yojana)

संदर्भ:

हाल ही में, सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय (MSME) द्वारा ग्रामोद्योग विकास योजना’ (एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में) के अंतर्गत अगरबत्ती-निर्माण में संलग्न कारीगरों की भलाई के लिए एक कार्यक्रम को मंजूरी दी गयी है।

प्रमुख बिंदु:

  • ग्रामोद्योग विकास योजना के आरंभ में, चार पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे, जिनमें से एक प्रोजेक्ट पूर्वोत्तर भारत में आरंभ किया जायेगा।
  • कारीगरों के प्रत्येक लक्षित समूह को लगभग 50 स्वचालित अगरबत्ती बनाने की मशीन और 10 मिक्सिंग मशीने उपलब्ध करायी जायेंगी।
  • खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) इस क्षेत्र में काम करने वाले कारीगरों को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करेगा।

 महत्व:

कार्यक्रम का उद्देश्य देश में ‘अगरबत्ती’ उत्पादन में वृद्धि करना तथा पारंपरिक कारीगरों के लिए स्थायी रोजगार तथा उनकी आय में वृद्धि करना है। यह योजना देश में घरेलू अगरबत्ती उद्योग को बढ़ावा देने तथा अगरबत्ती आयात को कम करने में सहायक होगी।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

स्मॉग टॉवर क्या हैं?

(What are Smog towers?)

स्मॉग टॉवर, किसी बड़े क्षेत्र के लिए वायु शोधक (Air Purifier) के रूप में कार्य करने हेतु निर्मित एक संरचना होते हैं।

कार्यविधि

  • स्मॉग टॉवर में फिल्टर्स की कई परतें लगी होती हैं, जो इनसे आस-पास की प्रदूषित हवा तथा हवा में लटकते धूल कणों को अवशोषित कर लेते हैं।
  • टॉवर के शीर्ष पर लगे पंखो से वातावरण की हवा को खींच कर फिल्टर्स के माध्यम से शोधित किया जाता है, इसके पश्चात शुद्ध हवा को जमीन के पास छोड़ दिया जाता है।

चर्चा का कारण

उच्चतम न्यायालय द्वारा पिछले वर्ष दिल्ली सरकार तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board– CPCB) के अधिकारियों को राजधानी में ‘स्मॉग टॉवर’ लगाने हेतु एक विस्तृत योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।

  • इसके बाद, जनवरी में, अदालत ने प्रायोगिक परियोजना के रूप में अप्रैल माह तक राजधानी में दो स्मॉग टॉवर लगाए जाने का निर्देश दिया।
  • परन्तु, किसी भी निर्देश को समय पर पूरा नहीं किया गया।

क्या स्मॉग टॉवर कारगर है?

हाँ, हाल के वर्षों में नीदरलैंड, चीन, दक्षिण कोरिया और पोलैंड के शहरों में स्मॉग टावर्स को प्रायोगिक तौर पर स्थापित किया गया है। इस तरह का पहला टॉवर वर्ष 2015 में, रॉटरडैम, नीदरलैंड में स्थापित किया गया था (यह अपने आस-पास प्रति घंटे 30,000 क्यूबिक मीटर हवा को फ़िल्टर कर सकता है)।

विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉग टॉवर, शहर में ‘स्वच्छ वायु क्षेत्र’ (Clean Air Zones) बनाते हैं। एक टॉवर, हवा की दिशा में एक किमी तक तथा अपने चारो उर हवा की विपरीत दिशा में 200 मीटर तक पर्टिकुलेट मैटर (Particulate Matter), हवा में लटकते हुए धूल के सूक्ष्म कणों, की मात्रा को 50 % तक कम कर देता है।

दिल्ली में स्मॉग टॉवर की आवश्यकता का कारण

  • राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण काफी समय से चिंता का विषय रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 2014 में दिल्ली को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया था, इसके बाद से दिल्ली तथा इसके उपनगरो को विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार किया जाता है।
  • दिल्ली में प्रदूषण का स्तर सर्दियों के दौरान नाटकीय रूप से बढ़ जाता है। इस दौरान, कुछ दिनों के लिए प्रदूषण, WHO द्वारा निर्धारित सीमा से लगभग 10 गुना अधिक हो जाता है, जिससे कमजोरों का साथ-साथ स्वस्थ आबादी के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है।

उच्च प्रदूषण स्तर का कारण?

  • शहर के अंदर तथा इसके आस-पास होने वाला निर्माण कार्य, औद्योगिक तथा वाहन प्रदूषण।
  • सर्दियों की शरुआत में, दिल्ली के उत्तरी-पश्चिमी राज्यों में कृषि-अपशिष्टों को जलाये जाने से धुएं से प्रदूषण की मात्रा में काफी वृद्धि हो जाती है
  • इसके अतिरिक्त, प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों, जैसे शांत हवाओं, कम तापमान और कम धूप वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है।

प्रदूषण नियंत्रण हेतु किए गए उपाय:

  • पंजाब और हरियाणा में किसानों को कृषि-अपशिष्टों को जलाने के स्थान पर यांत्रिक विकल्पों का उपयोग करने के लिए तैयार किया गया है।
  • दिल्ली में थर्मल पावर स्टेशनों को बंद किया गया है।
  • उद्योगों के लिए पाइप द्वारा प्राकृतिक गैस के उपयोग को अनिवार्य किया गया है।
  • प्रदूषण स्तर के बढ़ने पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (Graded Response Action Plan- GRAP) के तहत नियंत्रण के उपाय किये जाते हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के बारे में
  2. राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक कौन जारी करता है?
  3. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की संरचना और कार्य
  4. प्राकृतिक गैस क्या है?
  5. ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का अवलोकन

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए आवश्यक उपायों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

सीसा विषाक्तता पर यूनिसेफ की रिपोर्ट

(Report on lead poisoning by UNICEF)

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children’s FundUNICEF) तथा प्रदूषण संबंधी मुद्दों पर केंद्रित एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन, ‘प्योर अर्थ’ (Pure Earth) द्वारा एक रिपोर्ट जारी की गए है, जिसका शीर्षक है: विषाक्त सच: बच्चों का सीसा-प्रदूषण से संपर्क, एक समूची पीढ़ी की क्षमताओं को नष्ट करता है’ (The Toxic Truth: Children’s exposure to lead pollution undermines a generation of potential)।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • सीसा विषाक्तता (Lead poisoning), बच्चों को ‘अब तक अज्ञात और व्यापक स्तर’ पर प्रभावित कर रही है।
  • वैश्विक स्तर पर 800 मिलियन बच्चों में लगभग प्रत्येक 3 में से 1 बच्चे के रक्त में सीसे का स्तर 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर (µg/dL) अथवा इससे अधिक है, इस स्तर पर शीघ्र कार्यवाही करना आवश्यक हो जाता है।
  • इनमें से लगभग आधे बच्चे दक्षिण एशिया के निवासी हैं।

सीसा, बच्चों को किस प्रकार प्रभावित करता है?

सीसा (Lead) एक शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन (Potent Neurotoxin) होता है जो बच्चों के दिमाग को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।

  • यह विशेष रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के शिशुओं और बच्चों के लिए घातक होता है, क्योंकि यह उनके मस्तिष्क को पूरी तरह से विकसित होने से पूर्व ही क्षति पहुंचाता है, जिससे उन्हें आजीवन तंत्रिका-तंत्र संबंधी (Neurological), संज्ञानात्मक (Cognitive) तथा शारीरिक विकलांगता होने का संकट रहता है।
  • बचपन में सीसा-विषाक्तता से संक्रमित होने का संबध मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी समस्याओं तथा अपराध और हिंसा में वृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।
  • बड़े होने पर बच्चों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं, जिसमें उनके लिए गुर्दा फेल होने तथा हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

सीसा विषाक्तता से आर्थिक क्षत्ति

बचपन में सीसा-विषाक्तता से संक्रमित होने से निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में लगभग $ 1 ट्रिलियन अमरीकी डालर का नुकसान होता है, क्योंकि इन बच्चों की जीवन भर के लिए आर्थिक क्षमता समाप्त हो जाती है।

सीसा विषाक्तता करने वाले कारक:

  • लेड-एसिड बैटरियों का अविधिवत तथा घटिया पुनर्चक्रण (Recycling)।
  • वाहन बैटरी रीसाइक्लिंग विनियमन और अवसंरचना के बिना वाहनों की विक्री में वृद्धि।
  • अक्सर अवैध और खतरनाक रीसाइक्लिंग कार्यों में लगे अप्रशिक्षित कारीगर बैटरियों को खुले में तोड़ते हैं, जिससे तेज़ाब और सीसे की धूल (lead dust) मिटटी में मिल जाती है और अंततः जसल स्रोतों में पहुँच जाती है।
  • अवशिष्ट सीसे को कच्ची और खुली भट्टियों में गलाया जाता है, जिससे आसपास की हवा विषाक्त हो जाती है।

समय की मांग:

निम्नलिखित क्षेत्रों में एक समन्वित और ठोस दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है:

  • उचित निगरानी और रिपोर्टिंग।
  • रोकथाम और नियंत्रण के उपाय।
  • प्रबंधन और उपचार।
  • जन जागरूकता और व्यवहार में परिवर्तन।
  • क़ानून और नीतियां।
  • वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई।

निष्कर्ष:

रिपोर्ट में संकलित साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि सीसा विषाक्तता बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अब तक समझे जाने वाले खतरे से बहुत अधिक खतरनाक है। हालाँकि अभी और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है, किंतु तत्काल निर्णायक कार्रवाई आरंभ करने के लिए के लिए पर्याप्त आंकड़े मिल चुके हैं।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • मनुष्य के शरीर में सीसा (Lead) मस्तिष्क, यकृत, गुर्दे और हड्डियों में पाया जाता है। यह दांतों और हड्डियों में जमा होता है, जहां यह समय के साथ इकठ्ठा हो जाता है।
  • गर्भावस्था के दौरान हड्डियों में पाया जाने वाला सीसा रक्त में स्रावित हो जाता है, जिससे विकासशील भ्रूण को सीसा-संक्रमण का खतरा हो सकता है।
  • WHO ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्रमुख 10 रसायनों में सीसे को शामिल किया है।
  • WHO ने सीसयुक्त पेंट निर्माण की समाप्ति के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के साथ वैश्विक गठबंधन किया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. WHO द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घोषित प्रमुख 10 रसायन
  2. सीसयुक्त पेंट निर्माण की समाप्ति के लिए वैश्विक गठबंधन के बारे में
  3. सीसा मुख्य रूप से किस उद्योग में प्रयुक्त किया जाता है?
  4. सीसे के सबसे बड़े प्राथमिक उत्पादक
  5. भारत में सीसा उत्पादन और खपत

मेंस लिंक:

सीसा विषाक्तता और इसे रोकने के तरीकों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

मुल्लापेरियार बांध विवाद

(Mullaperiyar Dam Issue)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय द्वारा मानसून के दौरान मुल्लापेरियार बांध में पानी के स्तर को कम करने की मांग वाली याचिका पर 24 अगस्त को विचार करने का फैसला किया गया है।

पृष्ठभूमि:

कुछ समय पूर्व, केरल के इडुक्की जिले के एक निवासी ने उच्चत्तम न्यायालय में मुल्लापेरियार बांध के जलस्तर को 130 फीट तक कम करने के लिए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता का कहना है, राज्य में मानसून जारी होने के कारण क्षेत्र में भूकंप तथा बाढ़ आने का खतरा है।

मुल्लापेरियार बांध- महत्वपूर्ण तथ्य:

  • यद्यपि, मुल्लापेरियार बांध केरल में स्थित है, किंतु, वर्ष 1886 में त्रावणकोर के महाराजा तथा भारत के राज्य सचिव के मध्य, पेरियार सिंचाई कार्यों के लिए 999 वर्षों के लिए पट्टा अनुबंधपत्र (lease indenture), जिसे पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट भी कहा जाता है, पर हस्ताक्षर करने के बाद से इसका परिचालन तमिलनाडु द्वारा किया जाता है।
  • इसका निर्माण वर्ष 1887 और 1895 के मध्य किया गया था, इस बाँध से अरब सागर की बहने वाली नदी की धारा को मोड़कर बंगाल की खाड़ी की ओर प्रवाहित किया गया था, इसका उद्देश्य मद्रास प्रेसीडेंसी में मदुरई शुष्क वर्षा क्षेत्र को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराना था।
  • यह बांध केरल के इडुक्की ज़िले में मुल्लायार और पेरियार नदियों के संगम पर स्थित है।

विवाद का विषय

  • वर्ष 1970 में, तमिलनाडु और केरल दोनों राज्यों द्वारा पेरियार लेक पट्टा समझौते का नवीनीकरण किया गया था, जिसके अंतर्गत बाँध की भूमि तथा पानी के अधिकार के अलावा बाँध स्थल पर जल विद्युत परियोजनाओं को विकसित करने का अधिकार भी तमिलनाडु को दिया गया। इसके बदले में, तमिलनाडु, केरल के लिए एक निश्चित राशि किराये के तौर पर चुकता है।
  • वर्ष 1979 में एक साधारण से भूकंप से मुल्लापेरियार बांध में दरारें पड़ गयी, इसके पश्चात समझौते को लेकर पहली बार विवाद उत्पन्न हो गया।
  • भारत सरकार के अधीन केंद्रीय जल आयोग द्वारा इस बांध का अध्ययन किया गया तथा इसने बांध के जलाशय में संग्रहीत पानी का स्तर को 142 फीट से घटाकर 136 फीट तक कम करने की सिफारिश की।
  • सुनिश्चित उपायों के लागू किये जाने के बाद ही तमिलनाडु प्रशासन, इस बांध की पूर्ण क्षमता 152 फीट तक जल स्तर को बढ़ा सकता है।

तमिलनाडु का पक्ष:

तमिलनाडु का कहना है कि, बाँध को बांध को मजबूत करने के उपाय किए जा चुके हैं, किंतु केरल सरकार जलाशय के जल स्तर को बढ़ाने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर रही है, जिससे मदुरै के किसानों को नुकसान हो रहा है।

केरल का पक्ष:

केरल,  बाँध के प्रवाह की दिशा में स्थिति इडुक्की के भूकंप-प्रवण जिले के निवासियों द्वारा तबाही की आशंकाओं को लेकर चिंतित है।

वैज्ञानिकों का कहना है, कि इस क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर छह माप से ऊपर भूकंप आने पर, तीन मिलियन से अधिक लोगों का जीवन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

उच्चत्तम न्यायालय का निर्णय:

  • वर्ष 2006 में उच्चत्तम न्यायालय ने तमिलनाडु को जल स्तर 142 फीट तक बढ़ाने के लिए कानूनी मंजूरी प्रदान की।
  • इसके प्रत्युत्तर में, केरल सरकार द्वारा वर्ष 2003 में केरल सिंचाई एवं जल संरक्षण अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसके तहत मुल्लापेरियार बाँध का अधिकतम जल स्तर 136 फीट निर्धारित कर दिया गया।
  • हालांकि वर्ष 2012 में, शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त एक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बांध ‘संरचनात्मक और हाइड्रोलॉजिकल रूप से सुरक्षित’ है, और तमिलनाडु सरकार बाँध के जल स्तर 142 फीट तक बढ़ा सकती है।
  • वर्ष 2014 में, न्यायलय द्वारा ‘केरल सिंचाई और जल संरक्षण अधिनियम’, 2003 संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए निरसित कर दिया गया।
  • उच्चत्तम न्यायालय द्वारा आपदा की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार तथा केरल और तमिलनाडु की सरकारों को आकस्मिक योजना तैयार करने के लिए तीन पैनल गठित करने का भी निर्देश दिया गया है।

निष्कर्ष:

वर्षों के इन फैसलों के बाद भी,  हाल के नवीनतम घटनाक्रम से पता चलता है कि मुल्लापेरियार बांध केरल और तमिलनाडु के बीच विवाद की हड्डी बना हुआ है। वर्ष 1886 के समझौते की सत्यता से लेकर बाँध की सुरक्षा, तथा इसके उपयोग और नियंत्रण के संबंध में अलग-अलग कई व्याख्याएं की जा रही है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. मुल्लायार और पेरियार नदियो की अवस्थिति
  2. मुल्लापेरियार बांध की अवस्थिति?
  3. बांध का प्रबंधन कौन करता है?
  4. पेरियार लेक लीज एग्रीमेंट, 1886 के बारे में।
  5. अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 (IRWD अधिनियम) के बारे में।

मेंस लिंक:

मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा तमिलनाडु और केरल के बीच विवाद का कारण क्यों बन गया है, परीक्षण कीजिए। क्या केंद्र सरकार इस मुद्दे को हल करने में मदद कर सकती है? परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


युवा वैज्ञानिक पुरस्कार

(Young Scientist Award)

  • इस पुरस्कार को ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (Council of Scientific and Industrial ResearchCSIR) द्वारा प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार, CSIR के विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले वैज्ञानिकों को, जैविक विज्ञान, रासायनिक विज्ञान, पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर और भूमण्डलीय विज्ञान, इंजीनियरिंग और भौतिक विज्ञान में उनकी उपलब्धियों के लिए दिया जाता है।
  • इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार और एक पट्टिका प्रदान की जाती है।

स्कॉच गोल्ड अवॉर्ड

(SKOCH Gold Award)

संदर्भ: जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal AffairsMoTA) को मंत्रालय के छात्रवृत्ति प्रभाग की आईटी सक्षम छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से आदिवासियों के सशक्तीकरण के लिए SKOCH (स्कॉच) गोल्ड अवॉर्ड प्रदान किया गया है।

SKOCH अवार्ड्स के बारे में:

  • वर्ष 2003 में स्थापित, यह किसी स्वतंत्र संगठन द्वारा प्रदान किया जाने वाला देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।
  • यह पुरस्कार भारत को बेहतर राष्ट्र बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने वाले व्यक्तियों, परियोजनाओं तथा संस्थानों को प्रदान किया जाता है।
  • यह पुरस्कार डिजिटल, वित्तीय और सामाजिक समावेशन; प्रशासन; समांवेशी विकास; प्रौद्योगिकी और अनुप्रयोगों में उत्कृष्टता; परिवर्तन प्रबंधन; कॉर्पोरेट नेतृत्व; निगम से संबंधित शासन प्रणाली; नागरिक सेवा; क्षमता निर्माण; सशक्तिकरण आदि क्षेत्रों में दिया जाता है।
  • यह पुरस्कार संस्थानों / संगठनों और व्यक्तियों दोनों को प्रदान किया जाता है।

महात्मा गांधी सेतु:

  • महात्मा गांधी सेतु, बिहार राज्य में पटना तथा हाजीपुर के मध्य गंगा नदी पर उत्तर-दक्षिण की दिशा में बना एक पुल है।
  • इसकी लंबाई 5,750 मीटर है और यह भारत का तीसरा सबसे लंबा नदी पुल है।

चर्चा का कारण

हाल ही में, महात्मा गांधी सेतु के पश्चिमी किनारे को यातायात के लिए फिर से खोला गया है।

मुस्लिम महिला अधिकार दिवस

  • मुस्लिम महिला अधिकार दिवस 1 अगस्त को मनाया जाता है।
  • इसे तीन बार तलाक (ट्रिपल तलाक) को समाप्त करने के लिए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम कानून लागू किये जाने के उपलक्ष्य में मनाया गया।
  • पिछले वर्ष इस दिन राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किये थे।

संयुक्त राष्ट्र यूरोपीय आर्थिक आयोग (UNECE)

(United Nations Economic Commission for Europe)

  • इसे वर्ष 1947 में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तथा सामाजिक परिषद (ECOSOC) द्वारा स्थापित किया गया था।
  • यह संयुक्त राष्ट्र के पाँच क्षेत्रीय आयोगों में से एक है।
  • UNECE का प्रमुख उद्देश्य संपूर्ण-यूरोपीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है।
  • इसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के 56 सदस्य देश सम्मिलित हैं।

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