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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 31 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. वास्तुकला की प्रतिहार शैली

2. विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस

 

सामान्य अध्ययन-II

1. 10वीं अनुसूची के तहत राजनीतिक दलों का विलय

2. राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (CHRI)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. PERSEVERANCE: नासा का मंगल मिशन

2. एरियल सीडिंग क्या है?

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. संविधान का अनुच्छेद 239A (4)

2. गांधी- किंग स्कॉलरली एक्सचेंज इनीशिएटिव एक्ट

3. AIM-iCREST

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

वास्तुकला की प्रतिहार शैली

(Pratihara style of architecture)

संदर्भ:

राजस्थान के एक मंदिर से चोरी हुई और तस्करी के माध्यम से ब्रिटेन पहुंची भगवान शिव की नौवीं शताब्दी की एक दुर्लभ पाषाण प्रतिमा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India– ASI) को सौपी जायेगी।

प्रमुख बिंदु:

  • ‘जटा-मुकुट तथा त्रिनेत्र’ सहित चतुर्भुज रूप में नटराज/ नटेश की यह पाषाण प्रतिमा लगभग चार फीट ऊँची है, तथा यह भगवान् शिव का प्रतिहार शैली में दुर्लभ चित्रण है।
  • यह बलुआ पत्थर से निर्मित दुर्लभ प्रतिमा है।
  • मूल रूप से यह प्रतिमा राजस्थान के बरोली में घाटेश्वर मंदिर में स्थापित थी।

Ghateswara

प्रतिहार साम्राज्य:

  • गुर्जर-प्रतिहारों के राज्य क्षेत्र को प्रतिहार साम्राज्य के नाम से भी जाना जाता है। इन्होने सातवीं सदी के मध्य से ग्यारहवीं सदी तक, उत्तर भारत के अधिकाँश क्षेत्र पर शासन किया।
  • इन्होने अरबी सेनाओं को सिंधु नदी के पूर्व में बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • नागभट्ट प्रथम ने खलीफा शासनकाल में भारत पर हुए आक्रमणों के दौरान जुनैद और तामिन के नेतृत्व वाली अरब सेना को पराजित किया।

वास्तुकला:

  • गुर्जर-प्रतिहार, आकर्षक मूर्तियों, नक्काशीदार पट्टिकाओं तथा खुले मंडप के मंदिरों के निर्माण के लिए जाने जाते हैं।
  • प्रतिहार शैली की उत्कृष्टता का सबसे बड़ा उदहारण खजुराहो के मंदिर है। यह मंदिर अब यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में सूचीबद्ध है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रतिहारों के बारे में- कालक्रम, राज्य क्षेत्र एवं महत्वपूर्ण शासक
  2. प्रतिहार वास्तुकला- प्रमुख विशेषताएं
  3. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बारे में
  4. खजुराहो के मंदिर
  5. यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

भारतीय समाज पर भूमंडलीकरण का प्रभाव।

विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस

(World Day Against Trafficking in Persons)

विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस प्रतिवर्ष 30 जुलाई को में मनाया जाता है।

  • इसे वर्ष 2013 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एक प्रस्ताव द्वारा स्वीकृत किया गया था।
  • विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस 2020 की थीम: ‘उद्देश्य के लिए समर्पित: मानव तस्करी की समाप्ति के लिए सबसे आगे कार्यरत’ (Committed To The Cause: Working On The Frontline To End Human Trafficking) है।
  • इस वर्ष की थीम मानव तस्करी के लिए प्रारंभिक उत्तरदाताओं (First Responders) पर केंद्रित है।

‘प्रारंभिक उत्तरदाता’ कौन होते हैं?

प्रारंभिक उत्तरदाताओं (First Responders) वे लोग होते है, जो मानव तस्करी के शिकार व्यक्तियों की पहचान करने, उनकी सहायता करने, परामर्श देने तथा उनके लिए न्याय दिलाने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करते हैं, इसके अतिरिक्त ‘प्रारंभिक उत्तरदाता’ तस्करों के सजा दिलवाने की चुनौतियों से भी निपटते हैं।

COVID-19 महामारी के दौरान, प्रारंभिक उत्तरदाताओं की अनिवार्य भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, विशेष रूप से महामारी के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों ने उनके काम को और भी कठिन बना दिया है। फिर भी, प्रारंभिक उत्तरदाताओं के योगदान को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

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प्रमुख तथ्य:

  • मानव तस्करी, मुख्य रूप से यौन शोषण, बलात श्रम, जबरन भीख मंगवाने, बलात विवाह, बच्चों को बेचने तथा बाल-सैनिकों के रूप में भर्ती करने, और मानव अंगों को निकालने के लिए की जाती है।
  • मानव तस्करी के शिकार कुल व्यक्तियों में 49% महिलायें तथा 23% लड़कियां होती हैं।
  • यौन शोषण, मानव तस्करी का सबसे आम कारण है, तथा लगभग 59% मानव तस्करी यौन शोषण के लिए की जाती है, इसके बाद बलात श्रम (34%) का स्थान आता है;
  • अधिकाँश मानव तस्करी देश की सीमाओं के भीतर होती है, इसके आलावा, मानव तस्करी के शिकार कुछ व्यक्तियों को धनी देशों में भेजा जाता है।

संयुक्त राष्ट्र का ब्लू हार्ट अभियान (Blue Heart Campaign of UN):

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा, मानव तस्करी और समाज पर इसके प्रभाव के बारे वैश्विक जागरूकता फ़ैलाने के लिए ब्लू हार्ट अभियान का आरंभ किया गया है।
  • इसका उद्देश्य, इस जघन्य अपराध को रोकने तथा इसके विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए सरकारों, नागरिक समाज, कॉर्पोरेट क्षेत्र और आम नागरिकों को प्रोत्साहित करना है।
  • इसके तहत, मानव तस्करी के शिकार व्यक्तियों के साथ एकता दिखाने तथा अभियान का प्रसार करने हेतु कार्यकर्ता ब्लू हार्ट छपे हुए कपडे पहनते हैं।

 भारत में मानव तस्करी से संबंधित संवैधानिक एवं विधायी प्रावधान

  • भारतीय संविधान में अनुच्छेद 23 (1) के तहत मानव तस्करी को निषिद्ध किया गया है।
  • अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 [The Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 (ITPA)]व्यवसायिक यौन शोषण के लिए तस्करी की रोकथाम के लिए प्रमुख कानून है।
  • आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013 के द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 370 और 370A के तहत मानव तस्करी के खतरे से निपटने के लिए व्यापक प्रावधान किये गए है।
  • यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012, के अंतर्गत बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए विशेष क़ानून बनाया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IPC की धारा 370 और 370A किससे संबंधित हैं?
  2. संविधान का अनुच्छेद 23 (1)
  3. संयुक्त राष्ट्र का ब्लू हार्ट अभियान किससे संबंधित है?
  4. प्रारंभिक उत्तरदाता कौन होते हैं?
  5. विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस के बारे में।

मेंस लिंक:

भारत में मानव तस्करी से संबंधित संवैधानिक एवं विधायी प्रावधानों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: UN

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

10वीं अनुसूची के तहत राजनीतिक दलों का विलय

(Merger of political parties under 10th schedule)

संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा विधानसभा अध्यक्ष, राज्य विधानसभा सचिव तथा छह विधायकों को नोटिस जारी किया गया है। इन विधायकों ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और फिर सभी कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

चर्चा का विषय:

पिछले विधान सभा चुनाव में बहुजन समाजवादी पार्टी राजस्थान में छह सीटें जीतीं, लेकिन बसपा के सभी विधायक पिछले वर्ष सितंबर में कांग्रेस में सम्मिलित हो गए।

  • परन्तु, अब राष्ट्रीय स्तर पर बसपा का कहना है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी की राज्य इकाई का किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय नहीं हो सकता, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विलय होना आवश्यक है।
  • इसके अलावा, बसपा के राष्ट्रीय सचिव ने छह विधायकों को व्हिप जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि बहुमत परीक्षण होने पर वे कांग्रेस के विरुद्ध मतदान करें।

 बसपा का विषय किन तर्कों पर आधारित है?

बसपा का तर्क है कि उसकी पार्टी के विधायकों का विलय अवैध एवं असंवैधानिक है क्योंकि किसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए, इस प्रकार का विलय राष्ट्रीय स्तर पर होता है।

अपने तर्क के पक्ष में बसपा ने उच्चत्तम न्यायालय के दो निर्णयों का हवाला दिया है:

  1. जगजीत सिंह बनाम हरियाणा राज्य, 2006 का निर्णय:

इस वाद में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा एकल सदस्यीय पार्टियों (Single-Member Parties) के चार विधायकों को अयोग्य घोषित करते हुए विधानसभा की सदस्यता निरस्त कर दी गयी थी, ये विधायक चुनाव जीतने के पश्चात कांग्रेस में सम्मिलित हो गए थे। न्यायालय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को बरकरार रखा।

  1. राजेंद्र सिंह राणा और अन्य बनाम स्वामी प्रसाद मौर्य, 2007 का निर्णय:

वर्ष 2003 में उत्तरप्रदेश में बसपा की सरकार गिर जाने के बाद, बसपा के 37 विधायक (पार्टी की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई), समाजवादी पार्टी को समर्थन देने के लिए, अपनी पार्टी से अलग हो गए थे। उच्चत्तम न्यायलय ने निर्णय दिया कि, इस विभाजन को मान्यता नहीं दी सकती है, क्योंकि सभी विधायक एक साथ पार्टी से अलग नहीं हुए हैं।

परन्तु, ये निर्णय वर्तमान में प्रासंगिक क्यों नहीं हो सकते?

इन मामलों में, पार्टी से अलग होने वाले विधायकों की संख्या, पार्टी की कुल सदस्य संख्या के एक-तिहाई के बराबर अथवा उससे अधिक है, अतः दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 3 के अनुसार, इन्हें अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता ।

  • हालांकि, वर्ष 2003 में, 91वें संवैधानिक संशोधन द्वारा दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 3 को निरसित कर दिया गया।
  • इस संशोधन का उद्देश्य, विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा ‘एक-तिहाई विभाजन’ नियम का, अन्य दलों को विभाजित करने तथा ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ करने हेतु किये जाने वाले दुरूपयोग को रोकना था।
  • किसी पार्टी के एक-तिहाई सदस्यों को उनकी पार्टी से अलग करना एक आसान लक्ष्य के रूप में माना जाता था, इसे देखते हुए अब किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा अन्य दल में विलय करने पर दलबदल क़ानून में छूट प्रदान की गयी है।

क्या संविधान के अंतर्गत ‘विलय’ की अनुमति है?

  • संविधान में दसवीं अनुसूची के अंन्तर्गत, ’सरकारों को स्थिर रखने हेतु ‘दलबदल’ (Defection) को प्रतिबंधित किया गया है’ परन्तु इसमें ‘विलय’ (Mergers) पर रोक नहीं लगायी गयी है।
  • दसवीं अनुसूची के अनच्छेद 4 (2) में विलय से संबंधित प्रावधान किये गए है, इसके अनुसारयदि किसी पार्टी के ‘दो-तिहाई’ सदस्य, किसी अन्य दल में ‘विलय’ के लिए सहमत होते हैं, तो उन्हें अयोग्य घोषित नहीं किया जायेगा’।

 क्या राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विलय किए बिना, किसी राष्ट्रीय पार्टी की राज्य इकाई का किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय किया जा सकता है?

दसवीं अनुसूची में राज्य इकाइयों तथा राष्ट्रीय इकाइयों के मध्य इस द्विभाजन को चिन्हित किया गया है।

  • अनुच्छेद 4 (2) के अनुसार, किसी पार्टी के “विलय” का तात्पर्य उस सदन के एक विधायी दल का विलय है।
  • राजस्थान के मामले में, बसपा की राजस्थान विधायी इकाई का विलय होगा, न कि राष्ट्रीय स्तर पर बसपा का।

पार्टी ‘व्हिप’ का प्रभाव

  • बसपा के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा छह विधायकों को जारी किए गए व्हिप (whip) का कोई असर नहीं होगा, क्योंकि इस प्रकार के निर्देश केवल सदन में मतदान होने की स्थिति में जारी किये जाते हैं।
  • दलबदल विरोधी कानून के संदर्भ में किसी पार्टी के राष्ट्रीय नेता के निर्देश को व्हिप नहीं माना जा सकता है।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

दलबदल विरोधी कानून के अंतर्गत दल-परिवर्तन के आधार पर ‘अयोग्य’ घोषित करने के लिए निम्नलिखित स्थितियों को सूचीबद्ध किया गया है:

  1. यदि कोई सांसद या विधायक “स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता का त्याग करता है” [अनुच्छेद 2 (1) (ए)], अथवा
  2. यदि वह अपनी पार्टी द्वारा जारी किए गए किसी भी निर्देश के विपरीत सदन में मतदान करता है, अथवा मतदान में भाग नहीं लेता है, अर्थात, यदि वह सदन में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करता है [अनुच्छेद 2 (1) (बी)]।
  3. चुनाव के पश्चात यदि कोई निर्दलीय उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है।
  4. यदि कोई नामित सदस्य विधायिका के सदस्य बनने के छह महीने पश्चात किसी पार्टी में शामिल होता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (CHRI)

(Commonwealth Human Rights Initiative)

हाल ही में, राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (Commonwealth Human Rights Initiative- CHRI) तथा एक अंतर्राष्ट्रीय दासता-विरोधी संगठन ‘वॉक फ़्री’ (Walk Free) द्वारा विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस के अवसर पर ‘दासता’ (Slavery) पर एक रिपोर्ट जारी की गई ।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. पूरे विश्व में आधुनिक दासता की स्थितियों में रहने वाले लोगों की 40% संख्या राष्ट्रमंडल देशों में निवास करती है।
  2. राष्ट्रमंडल देश वर्ष 2030 तक आधुनिक दासता के उन्मूलन हेतु कार्यवाहियों में पिछड़ रहे हैं।
  3. एक अनुमान के अनुसार, राष्ट्रमंडल देशों में रहने वाले प्रति 150 व्यक्तियों में 1 आधुनिक गुलामी की स्थिति में रह रहा है।
  4. एक तिहाई राष्ट्रमंडल देशों ने बलात विवाह को अपराध घोषित किया है, तथा 23 देशों ने बच्चों के व्यावसायिक यौन शोषण को अभी तक अपराध घोषित नहीं किया है।
  5. 54 राष्ट्रमंडल देशों में से, मात्र चार देश आपूर्ति श्रृंखलाओं के अन्वेषण व्यवसाय से जुड़े हैं
  6. सभी राष्ट्रमंडल देश पीड़ित सहायता कार्यक्रमों में पिछड़े हुए हैं।

भारत-संबंधी निष्कर्ष:

  1. भारत के समन्वय संबंधी मामलों में सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। देश में कोई भी राष्ट्रीय समन्वय संस्था अथवा राष्ट्रीय समन्वय कार्य योजना नहीं है।
  2. भारत द्वारा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के घरेलू कामगार अभिसमय (Domestic Workers Convention), 2011 अथवा बलात श्रम प्रोटोकॉल 2014 की अभिपुष्टि नहीं की गयी है।
  3. विश्व में कुल बाल वधुओं (Child Brides) की एक तिहाई संख्या भारत में है।
  4. क्षेत्र में सबसे बड़ा देश होने के बाद भी ‘राष्ट्रीय समन्वय’ के स्तर पर सबसे पिछड़ा हुआ है।

राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल के बारे में:

राष्ट्रमंडल मानवाधिकार पहल (Commonwealth Human Rights Initiative- CHRI)  मानवाधिकार क्षेत्र में काम करने वाला एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी, गैर-पक्षपातपूर्ण, अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है।

  • CHRI की स्थापना वर्ष 1987 में, राष्ट्रमंडल के कई पेशेवर संगठनों द्वारा की गयी थी, क्योंकि 53 देशों के राष्ट्रमंडल संघ में मानवाधिकारों पर काफी कम ध्यान दिया जा रहा था।
  • भूमिकाएँ और कार्य: CHRI मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, राष्ट्रमंडल के हरारे सिद्धांतों तथा और अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार नियमों के पालन करने पर जोर देता है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रमंडल- रचना और उद्देश्य।
  2. CHRI- स्थापना और उद्देश्यों के बारे में
  3. CHRI का मुख्यालय
  4. बलात श्रम प्रोटोकॉल के बारे में

मेंस लिंक:

आधुनिक गुलामी क्या है? पूरे विश्व देश इस समस्या से किस प्रकार लड़ रहे हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

PERSEVERANCE: नासा का मंगल मिशन

संदर्भ:

हाल ही में, नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) द्वारा यूनाइटेड लॉन्च एलायंस के शक्तिशाली रॉकेट एटलस-5 (Atlas V) से  मंगल 2020 पर्सविरन्स (PERSEVERANCE) रोवर को प्रक्षेपित किया गया है।

  • इस मिशन को फ्लोरिडा के केप कैनावेरल एयर फोर्स स्टेशन से लांच किया गया।
  • यह, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहले मंगल मिशन ‘होप’ तथा चीन के तियानवेन –1 अंतरिक्ष यान के बाद इस महीने मंगल ग्रह के लिए तीसरा अभियान है।

 प्रमुख तथ्य:

  • पर्सविरन्स रोवर, मंगल की सतह पर 18 फरवरी, 2021 को उतरेगा।
  • इस मिशन को कम से कम एक मंगल वर्ष तक जारी रखने की योजना है, जो कि पृथ्वी पर लगभग 687 दिनों की अवधि के बराबर होता है (मंगल को सूर्य की परिक्रमा करने में अधिक समय लगता है)।
  • लैंडिंग साइट: जेज़ेरो क्रेटर (Jezero Crater)।
  • पर्सविरन्स रोवर को मिशन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए सात उपकरणों से लैस किया गया है।

Perseverance

इस मिशन का महत्व

  • पर्सविरन्स रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर पहली बार कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)
  • इस मिशन पर एक हेलीकॉप्टर, इंजेन्युटी (Ingenuity)’ भी भेजा गया है, यह मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर होगा।
  • यह मंगल ग्रह की सतह से पृथ्वी पर परिष्कृत प्रयोगशालाओं में विश्लेषण हेतु चट्टानों के नमूने लाने के लिए पहला योजनाबद्ध कदम है: इसका उद्देश्य ग्रह पर जैव-उपस्थिति की खोज करना है।

मिशन के प्रमुख उद्देश्य:

  1. प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के खगोलीय साक्षयों की खोज करना।
  2. पृथ्वी पर वापसी के लिए मंगल ग्रह की सतह से चट्टानों तथा धूल के नमूने एकत्र करना।
  3. एक प्रयोगात्मक हेलीकाप्टर उतारना।
  4. मंगल ग्रह की जलवायु और भूविज्ञान का अध्ययन करना।
  5. भविष्य के मंगल अभियानों हेतु प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन।

मंगल ग्रह संबंधी अभिरुचि के कारण

  • मंगल ग्रह पृथ्वी के निकट स्थित है (लगभग 200 मिलियन किमी दूर)।
  • यह एक ऐसा ग्रह है, जिस पर मनुष्य घूमने अथवा लंबी अवधि तक ठहरने की आकांक्षा कर सकते हैं।
  • मंगल पर अतीत काल में बहता हुआ पानी तथा वातावरण और जीवन होने का अनुमान किया जाता है।
  • निकट अवधि में, मंगल ग्रह संबंधी अभिरुचि में वृद्धि का कारण, एलन मस्क (Elon Musk) द्वारा मंगल ग्रह की व्यावसायिक यात्रा की योजना है।

पृष्ठभूमि:

  • नासा, वर्ष 1997 में मार्स पाथफाइंडर मिशन के आरंभ से मंगल ग्रह पर रोवर्स भेज रहा है।
  • मिशन के सफलता के बाद, नासा ने साक्ष्य खोजने हेतु मंगल कार्यक्रम जारी रखने का निर्णय लिया।
  • दूसरी बार, नासा ने वर्ष 2003 में मंगल पर जुड़वां रोवर्स, स्पिरिट तथा अपार्चुनिटी भेजे।
  • नासा ने तीसरी बार वर्ष 2012 में क्यूरियोसिटी रोवर भेजा था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

एरियल सीडिंग क्या है?

(What is aerial seeding?)

संदर्भ:

हरियाणा वन विभाग द्वारा प्रायोगिक रूप से राज्य भर में हवाई बीजारोपण (Aerial Seeding) आरंभ किया गया है।

  • इस तकनीक से अरावली के दुर्गम क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण किया जा सकेगा।
  • यह प्रायोगिक परियोजना, इस तकनीक तथा बीज-प्रकीर्णन क्रियाविधि की प्रभावशीलता को निर्धारित करने में मदद करेगी।

हवाई बीजारोपण क्या है?

हवाई बीजारोपण (Aerial Seeding) वृक्षारोपण की एक तकनीक है, जिसमें मिट्टी, खाद, और अन्य आवश्यक तत्त्वों के मिश्रण से ढंके हुए बीजों का, गोले बनाकर, हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर या ड्रोन आदि हवाई उपकरणों का उपयोग करके जमीन पर छिड़काव किया जाता है।

 इस तकनीक की क्रियाविधि

  • नीची उड़ान भरने वाले ड्रोन अथवा अन्य हवाई उपकरणों द्वारा बीजों के गोलों को एक लक्षित क्षेत्र में बिखेरा जाता है।
  • ये बीज के गोलों पर मिट्टी, खाद, और अन्य आवश्यक तत्त्वों के मिश्रण का लेप चढ़ा रहता है, जिससे बीज हवा में उड़ने की बजाय भूमि पर निर्धारित क्षेत्र में गिरते है।
  • इन बीज के गोलों से पर्याप्त वर्षा होने पर अंकुर निकल आयेंगे, तथा इनमे पहले से मौजूद पोषक तत्व शुरुआती विकास में सहायता प्रदान करेंगे।

इस तकनीक के लाभ

  • खडी ढलान वाले, खंडित, मार्ग रहित दुर्गम क्षेत्रों में पारंपरिक वृक्षारोपण अत्याधिक कठिन हो जाता है, इन क्षेत्रों में एरियल सीडिंग की सहायता से सरलतापूर्वक वृक्षारोपण किया जा सकता है।
  • इस तकनीक में बीजों के अंकुरण तथा वृद्धि एक विशिष्ट प्रक्रिया से होती है, कि इसमें बीजों के प्रकीर्णन के पश्चात ध्यान देने की आवश्यकता नहीं रह जाती है – यही कारण है कि बीज-गोलों के रोपण को ‘फेंको और भूल जाओं’ तरीके के रूप में जाना जाता है।
  • इस तकनीक में मिट्टी में जुताई और खुदाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, क्योंकि इसमें बीजों पर पहले से ही मिट्टी, खाद तथा पोषक तत्वों और सूक्ष्मजीवों का लेप लगा दिया जाता है।
  • बीजों के ऊपर मिट्टी तथा अन्य तत्वों का लेप इन्हें पक्षियों, चींटियों और चूहों से भी बचाता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


संविधान का अनुच्छेद 239A (4)

संदर्भ: दिल्ली पुलिस ने, कुछ महीने पूर्व दिल्ली में हुए दंगो संबंधी मामलों की उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के लिए वकीलों का एक पैनल नियुक्त किया था, जिसे दिल्ली सरकार ने खारिज कर दिया था। हाल ही में, उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा दिल्ली सरकार के फैसले को पलट दिया गया है।

  • दिल्ली सरकार की कैबिनेट के निर्णय को पलटने के लिए उपराज्यपाल द्वारा संविधान के अनुच्छेद 239A (4) के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग किया गया।
  • इस अनुच्छेद के तहत, दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य है।

गांधी- किंग स्कॉलरली एक्सचेंज इनीशिएटिव एक्ट

(Gandhi-King Scholarly Exchange Initiative Act)

संदर्भ: हाल ही में, अमेरिका सदन के एक पैनल दवारा महात्मा गांधी तथा मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विरासत को बढ़ावा देने के लिए एक विधेयक पारित किया गया है।

इस विधेयक को ‘जॉन लुईस’ (John Lewis) द्वारा लिखा गया था। ‘जॉन लुईस’ सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य तथा ‘सिविल राइट्स’ के अग्रणी नेता थे, पिछले सप्ताह इनका निधन हो गया था।

मुख्य प्रावधान:

  • इसके तहत, भारतीयों और अमेरिकियों के लिए वार्षिक रूप से स्कॉलर तथा छात्र विनिमय कार्यक्रम लागू किया जायेगा, जो दोनों नेताओं की विरासत का अध्ययन करेगा।
  • इस विधेयक में गांधी-किंग ग्लोबल एकेडमी, अहिंसा के सिद्धांतों पर आधारित एक संघर्ष समाधान पहल की स्थापना का प्रावधान किया गया है।
  • इस विधेयक में भारतीय कानूनों के तहत, S. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) और भारत सरकार द्वारा स्थापित संयुक्त राज्य-भारत गांधी-किंग डेवलपमेंट फाउंडेशन की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है।

AIM-iCREST

हाल ही में, नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन (AIM) द्वारा एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक इनक्यूबेटर क्षमता वृद्धि कार्यक्रम एआईएम-आईसीआरईएसटी (AIM-iCREST) का आरम्भ किया गया है, इसका उद्देश्य उच्च प्रदर्शन वाले स्टार्टअप का निर्माण करना है।

  • इस कार्यक्रम को, अटल इनोवेशन मिशन द्वारा बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से शुरू किया गया है।
  • इस पहल के तहत, अटल नवाचार मिशन (AIM) के इनक्यूबेटरों को अपग्रेड करने के लायक बनाया गया है और इनक्यूबेटर उद्यम अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अपेक्षित मदद प्रदान की गई है।
  • इसे प्रौद्योगिकी संचालित प्रक्रियाओं और विभिन्न मंचों के माध्यम से उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान करके पूरा किया जाएगा।

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