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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 30 July

विषय- सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति

2. अयोध्या में मस्जिद बनाने हेतु ट्रस्ट का गठन

3. एंटीबायोटिक प्रतिरोध

4. नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICCPR)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER)

2. तुर्की में नए सोशल मीडिया कानून को मंजूरी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता पाने के लिए सबसे बड़ा प्रवासी समूह

2. चर्चित स्थल- पोर्ट लुइस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education PolicyNEP) 2020 को स्वीकृति प्रदान की गयी है। यह 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है तथा यह 34 साल पुरानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 1986 को प्रतिस्थापित करेगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुकूल स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को अधिक समग्र, लचीला बनाते हुए भारत को एक ज्ञान आधारित जीवंत समाज तथा ज्ञान की वैश्विक महाशक्ति में बदलना और प्रत्येक छात्र में निहित अद्वितीय क्षमताओं को सामने लाना है।

पृष्ठभूमि:

प्रख्यात वैज्ञानिक, ISRO  के पूर्व-प्रमुख, पद्म विभूषण डॉ के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे के लिए एक समिति का गठन किया गया था, जिसने दिसंबर 2018 में सरकार के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2019 का मसौदा सौंप दिया। मई 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद इस मसौदे को जनता की राय हेतु सार्वजनिक किया गया था।

नई शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. केंद्र तथा राज्यों द्वारा शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को GDP के 6% तक बढ़ाया जायेगा।
  2. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाएगा।

डिजिटल शिक्षा:

  1. सीखने, मूल्यांकन करने, योजना बनाने, प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए, प्रौद्योगिकी का उपयोग करने पर विचारों का मुक्त आदान-प्रदान करने हेतु एक मंच प्रदान करने के लिए एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (National Educational Technology ForumNETF) का निर्माण किया जाएगा।
  2. डिजिटल शिक्षा संसाधनों को विकसित करने हेतु एक प्रौद्योगिकी यूनिट (Technology Unit) का गठन किया जायेगा। यह नयी यूनिट, डिजिटल अवसंरचना, सामग्री तथा क्षमता-निर्माण को समन्वित करेगी।

अध्यापक शिक्षण:

  1. वर्ष 2030 तक, शिक्षण कार्य करने के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड डिग्री की जायेगी।
  2. शिक्षा में डिजिटल-विभाजन को पाटने में सहायता करने के लिए शिक्षकों को भारतीय स्थितियों के अनुकूल ऑनलाइन शैक्षणिक विधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

स्कूली शिक्षा:

  1. 3 वर्ष 6 वर्ष की आयु तक प्री-प्राइमरी शिक्षा को वर्ष 2025 तक सार्वभौमिक किया जायेगा।
  2. वर्ष 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100 नामाकंन के साथ पूर्व-विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा के सार्वभौमिकरण का लक्ष्य।
  3. स्कूलों में छठे ग्रेड से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी और इसमें इंटर्नशिप शामिल होगी।
  4. कक्षा 5 तक बच्चे की मातृभाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में उपयोग किया जाएगा।
  5. एक नयी पाठयक्रम संरचना लागू की जायेगी, जिसमें तीन साल की आंगनवाड़ी / प्री स्कूलिंग को सम्मिलित किया जायेगा।
  6. बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’ की स्थापना की जायेगी, जिसके अंतर्गत राज्‍य वर्ष 2025 तक सभी प्राथमिक स्कूलों में कक्षा 3 तक सभी विद्यार्थियों द्वारा सार्वभौमिक बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करने हेतु एक कार्यान्वयन योजना तैयार करेंगे।
  7. बोर्ड परीक्षाओं के आसान बनाने के लिए उन्हें फिर से डिजाईन किया जायेगा। परीक्षा में तथ्यों को रटने के बजाय मुख्य दक्षताओं का परीक्षण किया जायेगा, जिसमे सभी छात्रों को दो बार परीक्षा देने की अनुमति होगी।
  8. स्कूली प्रशासन में परिवर्तन किया जायेगा, इसके लिए एक नयी स्कूल गुणवत्ता आकलन एवं प्रत्यायन संरचना तथा सार्वजनिक और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों को विनियमित करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण का गठन किया जायेगा।

उच्च शिक्षा:

  1. विविध प्रवेश तथा निकास विकल्पों के साथ चार-वर्षीय स्नातक डिग्री का आरंभ किया जायेगा।
  2. एम.फिल डिग्री को समाप्त कर दिया जाएगा।
  3. चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त उच्च शिक्षा के लिए एकल अति महत्वपूर्ण व्यापक निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग (Higher Education Commission of IndiaHECI) का गठन किया जाएगा।
  4. विभिन्न संस्थानों के मध्य अकादमिक क्रेडिटों को अंतरित एवं गणना को आसान करने के लिए एक एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना की जायेगी।
  5. महाविद्यालयों को 15 वर्षों में चरणबद्ध स्वायत्तता के साथ संबद्धता प्रणाली समाप्त की जाएगी, जिससे प्रत्येक महाविद्यालय एक स्वायत्त डिग्री देने वाली संस्था अथवा विश्वविद्यालय के एक घटक कॉलेज के रूप में विकसित हो सकेगा।
  6. NEP 2020 का लक्ष्य व्यवसायिक शिक्षा सहित उच्चतर शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 3 प्रतिशत (2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है। उच्चतर शिक्षा संस्थानों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी।

पारंपरिक ज्ञान (Traditional knowledge):

  1. जनजातीय तथा देशज ज्ञान सहित भारतीय ज्ञान पद्धतियों को पाठ्यक्रम में परिशुद्ध तथा वैज्ञानिक तरीके से सम्मिलित किया जाएगा।

समान और समावेशी शिक्षा:

  1. आकांक्षी जिले जैसे क्षेत्रों, जहाँ बड़ी संख्या में छात्रों को आर्थिक, सामाजिक या जातिगत बाधाओं का सामना करना पड़ता है, को विशेष शैक्षिक क्षेत्र के रूप में नामित किया जाएगा।
  2. सभी लड़कियों तथा ट्रांसजेंडर छात्रों को समान गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए, केंद्र सरकार ‘लैंगिक समावेशी कोष’ (Gender Inclusion Fund) की स्थापना करेगी।

वित्तीय सहायता:

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित समूहों से संबंधित मेधावी छात्रों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

संभावित चुनौतियां:

चूंकि शिक्षा एक समवर्ती सूची का विषय है तथा अधिकांश राज्यों के अपने स्कूल बोर्ड हैं। अतः, इस नीति के वास्तविक कार्यान्वयन के लिए सभी राज्य सरकारों को एक साथ लाना होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नई शैक्षणिक संरचना के अंतर्गत 5 + 3 + 3 + 4 डिजाइन का अवलोकन।
  2. नई नीति के अनुसार ‘विशेष शैक्षिक क्षेत्र’ क्या हैं?
  3. पॉलिसी के अनुसार ‘लैंगिक समावेशी कोष’ की स्थापना कौन करेगा?
  4. प्रस्तावित अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट की भूमिका।
  5. उच्च शिक्षा में ‘सकल नामांकन अनुपात’ लक्ष्य?
  6. प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच’ के बारे में।

मेंस लिंक:

हाल ही में घोषित नई शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

अयोध्या में मस्जिद बनाने हेतु ट्रस्ट का गठन

(Trust set up to build Mosque in Ayodhya)

संदर्भ:

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन करने का भी आदेश दिया गया था। इसी आदेश के अनुसार एक ट्रस्ट का गठन किया गया है।

इस ट्रस्ट को इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (Indo Islamic Cultural Foundation) नाम दिया गया है।

ट्रस्ट की स्थापना का कारण

  1. उच्चत्तम न्यायालय द्वारा 9 नवंबर को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में फैसला सुनाया गया था।
  2. फैसले के अनुसार, अयोध्या में विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण के अनुमति दी गयी, तथा उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ का एक अन्य भूखंड सौंपने का आदेश दिया गया। इसी के अनुसार, वक्फ बोर्ड द्वारा ‘ट्रस्ट’ का गठन किया गया है।

ट्रस्ट के बारे में:

  • इस ट्रस्ट में 15 सदस्य सम्मिलित किये जायेंगे।
  • ‘उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड’ इस ट्रस्ट का संस्थापक ट्रस्टी होगा, तथा ट्रस्ट के सचिव, आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में भी कार्य करेंगे।

ट्रस्ट के कार्य:

  1. ट्रस्ट, मस्जिद का निर्माण करेगा तथा इसके साथ ही आम जनता की भलाई के लिए अन्य सुविधाओं का निर्माण करेगा।
  2. ट्रस्ट, स्थानीय जनता के लिए चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधाओं तथा सामुदायिक रसोई सहित अन्य सामुदायिक सेवाएँ प्रदान करेगा।
  3. यह एक शोध केंद्र, संग्रहालय, पुस्तकालय तथा एक प्रकाशन घर के माध्यम से भारतीय समाज पर भारत-इस्लामी सांस्कृतिक प्रभावों को स्पष्ट करने तथा प्रोत्साहन देने के लिए एक केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  • इस ट्रस्ट गठन किसके द्वारा किया गया है?
  • वक्फ बोर्ड क्या है? संरचना?
  • बाबरी मस्जिद मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अवलोकन।
  • वैधानिक इकाइयाँ क्या हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध

(Antibiotic resistance)

संदर्भ:

हाल ही में, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (Centre for Science and EnvironmentCSE) द्वारा डेयरी क्षेत्र में एंटीबायोटिक के उपयोग पर एक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है।

चिंता के बिंदु:

  • डेयरी क्षेत्र में एंटीबायोटिक्स का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है, तथा इसके अवशेष दूध में काफी हद तक अपरीक्षित (untested) रहते है। जबकि, दूध, भारतीय आहार तथा बिशेष रूप से बच्चों के आहार का अभिन्न अंग है।
  • महामारी का संकट– वर्तमान में हमारे खाद्य उत्पादों की प्रक्रिया में रसायनों का प्रचुरता से उपयोग किया जाता है, जिससे एंटीबायोटिक्स-प्रतिरोध में काफी वृद्धि हुई है, और यह कभी भी एक महामारी का संकट खड़ा कर सकती है।
  • पशु के उपचार जारी रहने पर भी अक्सर उनका दूध बेचा जाता है, जिससे दूध में एंटीबायोटिक अवशेष रह जाने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं को सीधे बेचे जाने वाले दूध का परीक्षण नहीं किया जाता है, तथा उम्मीद के विपरीत, पैकेट में बिकने वाले प्रसंस्कृत दूध में भी काफी हद तक एंटीबायोटिक अवशेषों की जांच नहीं की जाती है।

 

एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में वृद्धि का कारण

दुधारू पशुओं में होने वाली ‘मैस्टाइटिस’ (Mastitis)/ थनैला- थनों की सूजन, जैसी बीमारियों के उपचार के लिए पशु-मालिक अंधाधुंध एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं।

  • इन दवाओं में अक्सर मनुष्य के लिए अति महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स (critically important antibioticsCIAs) होती है- WHO इन दवाओं के लिए एंटीबायोटिक्स प्रतिरोध के बढ़ते संकट को देखते हुए संरक्षित किये जाने संबंधी चेतावनी दे चुका है।
  • दुरूपयोग किये जाने वाले यह एंटीबायोटिक्स, इसके विरुद्ध क़ानून होने के बाद भी, किसी पंजीकृत पशुचिकित्सक के पर्चे के बिना भी आसानी से मिल जाते है।

पृष्ठभूमि:

भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है – वर्ष 2018-19 में भारत में 188 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ।

  • शहरी क्षेत्रों में 52% दूध की खपत होती हैं, जिसमें 60% उपभोक्ताओं के लिए स्थानीय दूध विक्रेताओं तथा ठेकेदारों द्वारा आपूर्ति की जाती है;
  • शेष मांग को संगठित क्षेत्र की डेयरी सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा पूरा किया जाता है।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध क्या है?

एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic resistance), सूक्ष्मजीवों (जैसे बैक्टीरिया, वायरस और कुछ परजीवियों) द्वारा विकसित की गयी दवा प्रतिरोधी क्षमता होती है, जिसके द्वारा ये सूक्ष्मजीव अपने खिलाफ काम करने वाले रोगाणुरोधियों (जैसे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और एंटी-मलेरिया) आदि को अप्रभावी कर देते है। परिणामस्वरूप, मानक उपचार अप्रभावी हो जाते हैं तथा संक्रमण जारी रहता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध क्या है?
  • एंटीबॉडी क्या हैं?
  • भारत में दुग्ध उत्पादन और खपत
  • गंभीर रूप से महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक्स (CIA) क्या हैं?

मेंस लिंक:

एंटीबायोटिक प्रतिरोध 21 वीं सदी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICCPR)

(International Covenant on Civil and Political Rights)

संदर्भ:

हाल ही में, मानवाधिकार समिति के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा ‘शांतिपूर्ण सम्मलेन का अधिकार’ (Right of Peaceful Assembly) की एक नयी व्याख्या प्रकाशित की गयी है, जिसमे यह ‘कहाँ और किस प्रकार लागू होती है’ इस बारे में व्यापक कानूनी सलाह प्रदान की गयी है तथा साथ ही सरकार के दायित्वों को रेखांकित किया गया है।

पृष्ठभूमि:

मानवाधिकार समिति को सदस्य देशों द्वारा ‘नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय’ (International Covenant on Civil and Political Rights– ICCPR) के कार्यान्वयन की निगरानी का दायित्व सौंपा गया था। ICCPR के अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण सम्मलेन के अधिकार की गारंटी प्रदान की गयी है।

 चर्चा का विषय  

विश्व के विभिन्न भागों में राजनीतिक अधिकारों तथा नस्लीय न्याय संबंधी मांगों को लेकर हो रहे बड़ी संख्या में आन्दोलनों से अधिकारी जूझ रहे हैं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की आवाज़ को दबाने के लिए बल-प्रयोग किया जा रहा है।

  • इस कारण से, शांतिपूर्ण सम्मलेन का अधिकार चर्चा में आ गया है।
  • इसके समर्थकों का मानना ​​है कि, ऑनलाइन अथवा व्यक्तिगत रूप से शांतिपूर्वक विरोधप्रदर्शन करना, एक मूलभूत मानव अधिकार है।

मानवाधिकार समिति द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  1. किसी भी सार्वजानिक अथवा निजी स्थान पर, खुले स्थल पर अथवा किसी भवन के अंदर, या ऑनलाइन, किसी खुशी को मनाने अथवा विरोध प्रदर्शन के लिए, शांतिपूर्वक सम्मलेन करना, एक ‘मूलभूत मानव अधिकार’ है।
  2. बच्चे, विदेशी नागरिक, महिलायें, प्रवासी श्रमिक, शरण चाहने वाले और शरणार्थियों सहित हर कोई शांतिपूर्वक सम्मलेन के अधिकार का उपयोग कर सकता है।
  3. सरकारें ‘सार्वजनिक व्यवस्था या सार्वजनिक सुरक्षा, अथवा संभावित हिंसा के अनिर्दिष्ट जोखिम’ का सामान्यीकृत हवाला देकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन को नहीं रोक सकती हैं।
  4. इसके अलावा, सरकारें, किसी भी वेबसाईट अथवा इंटरनेट नेटवर्क को, शांतिपूर्वक सम्मलेन के आयोजन अथवा उसमे कोई भूमिका होने कारण, बंद नहीं कर सकती है
  5. रिपोर्ट में, किसी भी शांतिपूर्वक सम्मलेन अथवा हिंसक तथा गैरकानूनी प्रदर्शन की निगरानी व रिकॉर्ड करने के लिए पत्रकारों तथा मानवाधिकार कर्मियों के अधिकार पर भी जोर दिया गया है।

प्रभाव:

मानवाधिकार समिति द्वारा की गयी ‘शांतिपूर्ण सम्मलेन के अधिकार’ की यह व्याख्या विश्व के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय न्यायालयों में न्यायाधीशों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन का कार्य करगी। यह व्याख्या क़ानून की भाषा में ‘सॉफ्ट लॉ’ का भाग बन गयी है।

ICCPR के बारे में:

  1. ICCPR, संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General AssemblyUNGA) द्वारा अपनाई गई एक बहुपक्षीय संधि है।
  2. इसके कार्यान्वयन की संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति द्वारा निगरानी की जाती है।
  3. यह संधि, सभी सदस्य देशों को व्यक्तियों के नागरिक और राजनीतिक अधिकारों का सम्मान करने तथा जीवन का अधिकार, धर्म, वाक्, एवं सम्मलेन की स्वतंत्रता, चुनावी अधिकार तथा निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध करती है।
  4. ICCPR, अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार अभिसमय (International Covenant on Economic, Social and Cultural Rights– ICESCR) तथा मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (Universal Declaration of Human RightsUDHR) के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार विधेयक का भाग है।
  5. यह संधि वर्ष 1976 में प्रभावी हुई थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार विधेयक क्या है?
  2. मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (UDHR) क्या है?
  3. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति के बारे में
  4. ICCPR कब प्रभावी हुआ?
  5. क्या भारत ने ICCPR पर हस्ताक्षर किए हैं?
  6. ICCPR का अनुच्छेद 21

मेंस लिंक:

किसी भी सार्वजानिक अथवा निजी स्थान पर, खुले स्थल पर अथवा किसी भवन के अंदर, या ऑनलाइन, किसी खुशी को मनाने अथवा विरोध प्रदर्शन के लिए, शांतिपूर्वक सम्मलेन करना, एक ‘मूलभूत मानव अधिकार’ है। वर्तमान में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER)

(International Thermonuclear Experimental Reactor)

संदर्भ:

हाल ही में, भारी एवं विशालकाय इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (International Thermonuclear Experimental Reactor– ITER) ने अपने वर्षो लंबे असेंबली चरण में प्रवेश किया है।

ITER के अनुसार, 35 वर्षों के बौद्धिक चिंतन, योजनाओं तथा तैयारियों के पश्चात ITER असेंबली की आज से शुरुआत हो रही है तथा इसमें पांच वर्ष का समय लगेगा

ITER क्या है?

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु संलयन अनुसंधान और इंजीनियरिंग मेगाप्रोजेक्ट है, तथा यह विश्व का सबसे बड़ा ‘चुंबकीय परिरोध प्लाज्मा भौतिकी प्रयोग’ (Magnetic Confinement Plasma PhysicsExperiment) होगा।
  • यह एक प्रयोगात्मक ‘टोकोमकपरमाणु संलयन रिएक्टर’ (Tokamak Nuclear Fusion Reactor) है जिसे दक्षिणी फ्रांस में बनाया जा रहा है।
  • ITER का उद्देश्य शांतिपूर्ण उपयोग के लिए संलयन ऊर्जा की वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता का प्रदर्शन करना है।

ITER का महत्व:

  1. ITER शुद्ध ऊर्जा उत्पादन करने वाला पहला संलयन उपकरण होगा।
  2. ITER लंबे समय तक संलयन को स्थिर रखने वाला पहला संलयन उपकरण होगा।
  3. ITER संलयन-आधारित विद्युत् के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए आवश्यक एकीकृत प्रौद्योगिकियों, सामग्रियों और भौतिकी सिद्धांतों का परीक्षण करने वाला पहला संलयन उपकरण होगा।

ITER परियोजना सात सदस्य संस्थाओं द्वारा वित्त पोषित तथा संचालित की जा रही है:

यूरोपीय संघ, चीन, भारत, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका।

ITER के कार्य

  1. 500 मेगावाट संलयन ऊर्जा का उत्पादन
  2. संलयन ऊर्जा संयंत्र (fusion power plant) के लिए प्रौद्योगिकियों के एकीकृत परिचालन का प्रदर्शन
  3. ड्यूटेरियम-ट्रिटियम प्लाज्मा को हासिल करना, जिसमें आंतरिक ताप के माध्यम से सतत अभिक्रिया होती है।
  4. ट्रिटियम ब्रीडिंग का परीक्षण
  5. संलयन उपकरण की सुरक्षा विशेषताओं का प्रदर्शन।

संलयन क्या होता है?

संलयन (Fusion, सूर्य तथा अन्य तारों का ऊर्जा स्रोत है। इन तारकीय निकायों के केंद्र में अत्याधिक ऊष्मा तथा गुरुत्वाकर्षण के कारण, हाइड्रोजन नाभिक परस्पर टकराते हैं, इसके परिणामस्वरूप हाइड्रोजन नाभिक संलयित होकर भारी हीलियम अणुओं का निर्माण करते हैं जिससे इस प्रक्रिया में भारी मात्रा में ऊर्जा निर्मुक्त होती हैं।

प्रयोगशाला में संलयन अभिक्रिया किस प्रकार की जाती है?

  • प्रयोगशाला में सर्वाधिक कुशलता से संपन्न की जाने वाली संलयन अभिक्रिया, हाइड्रोजन के दो समस्थानिकों, ड्यूटेरियम (deuteriumD) तथा ट्रिटियम (tritiumT) के मध्य होने वाली अभिक्रिया है।
  • D T संलयन अभिक्रिया ‘सबसे कम’ तापमान पर सर्वाधिक ऊर्जा उत्पन्न करती है।

प्रयोगशाला में संलयन अभिक्रिया के लिए आवश्यक तीन शर्तें:

  • बहुत उच्च तापमान (150,000,000 डिग्री सेल्सियस से अधिक)
  • उचित प्लाज्मा अणु घनत्व (अणुओं के परस्पर टकराव की संभावना में वृद्धि के लिए)
  • उपयुक्त परिरोध समय (प्लाज्मा को रोकने के लिए)

टोकामक क्या है?

टोकामक (Tokamak) संलयन ऊर्जा को नियंत्रित करने के लिए तैयार की गयी एक प्रायोगिक मशीन है।

  • एक टोकामक के अंदर, परमाणुओं के संलयन से उत्पादित ऊर्जा को एक विशाल बर्तन की दीवारों में ऊष्मा के रूप में अवशोषित किया जाता है।
  • पारंपरिक विद्युत् संयंत्रों की भांति, एक संलयन विद्युत् संयंत्र में इस ऊष्मा का उपयोग भाप, टरबाइन और जनरेटर के माध्यम से विद्युत् उत्पादन करने के लिए किया जायेगा।

टोकामक को पहली बार 1960 के दशक के अंत में सोवियत अनुसंधान के दौरान विकसित किया गया था, इसके बाद में इसे चुंबकीय संलयन उपकरण की सबसे आशाजनक तकनीक के रूप में पूरे विश्व द्वारा मान्यता प्रदान की गयी है। ITER विश्व का सबसे बड़ा टोकामक होगा– जो वर्तमान में कार्यरत सबसे बड़ी मशीन के आकार का दोगुना होगा तथा इसके प्लाज्मा चैंबर का आयतन दस गुना अधिक होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ITER कितने देशों द्वारा वित्त पोषित है? क्या भारत इसका एक हिस्सा है?
  2. टोकामक क्या है?
  3. पदार्थ की विभिन्न अवस्थाएं
  4. संलयन क्या है?
  5. संलयन और विखंडन के बीच अंतर।
  6. ITER का अवस्थिति तथा महत्व।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

तुर्की में नए सोशल मीडिया कानून को मंजूरी

संदर्भ:

तुर्की की संसद द्वारा एक नए सोशल मीडिया कानून को मंजूरी दी गयी है, जिसके तहत सेंसरशिप की बढ़ती चिंताओं के बावजूद अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया को विनियमित करने की अधिक शक्ति प्रदान की गयी है।

मुख्य प्रावधान:

  • नए क़ानून में, फेसबुक और ट्विटर जैसी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर प्रकाशित होने वाली सामग्री के विरुद्ध शिकायतों से निपटने हेतु तुर्की में प्रतिनधि कार्यालय स्थापित करना आवश्यक होगा।
  • यदि कोई सोशल मीडिया कंपनी अपने आधिकारिक प्रतिनिधि को नियुक्त करने से इनकार करती है, तो कानून में कठोर जुर्माना, विज्ञापन पर प्रतिबंध और बैंडविड्थ में कटौती का प्रावधान किया गया है।
  • अदालत के फैसले के अनुसार, नेटवर्क की बैंडविड्थ को आधा कर दिया जाएगा तथा आगे और कटौती की जायेगी बैंडविड्थ में कटौती होने से सोशल मीडिया नेटवर्क उपयोग करने के लिए बहुत धीमे हो जायेंगे।
  • सोशल मीडिया प्रतिनिधियों का कार्य गोपनीयता और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री के संबंध में निजी अनुरोधों पर 48 घंटे के भीतर हटाना होगा अथवा शिकायतों के अस्वीकरण संबंधी कारणों को बताना होगा।
  • यदि विवादित सामग्री को 24 घंटे के भीतर नहीं हटाया जाता है, तो नुकसान के लिए कंपनी को उत्तरदायी ठहराया जाएगा।
  • इस क़ानून में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए उपयोगकर्ताओं के डेटा को तुर्की में ही संग्रहीत करना आवश्यक होगा।

इस कानून की आवश्यकता- सरकार का पक्ष:

  • सरकार के अनुसार, इस कानून को ‘साइबर अपराधों’ से निपटने तथा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा हेतु लागू किया गया है।
  • सोशल मीडिया पर होने वाले महिलाओं के अपमान को रोकने तथा साइबर-दादागिरी (Cyberbullying) से निपटने के लिए इस कानून को लागू करना आवश्यक है।

संबंधित चिंताएं:

नए कानून को ‘सेंसरशिप कानून’ का नाम दिया जा रहा है। क्योंकि देश में मीडिया पहले से ही सरकार के सख्त नियंत्रण में है, तथा दर्जनों पत्रकार जेल में है, इसलिए लोगों में आशंका है कि, यह क़ानून आगे चल कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित कर देगा।

इस कानून का उपयोग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के बजाय सरकार की आलोचना करने वाली सामग्री को हटाने के लिए किया जाएगा। यह ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन है तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानकों का उल्लंघन करता है।

पृष्ठभूमि:

पिछले कुछ दिनों में, सोशल मीडिया में, COVID-19 महामारी पर, तुर्की सेनाओं द्वारा अत्याचार के विरोध में अथवा राष्ट्रपति रजब तैयब इरदुगान (Recep Tayyip Erdoğan) व अन्य अधिकारियों की आलोचना करने वाली पोस्ट करने पर सैकड़ों व्यक्तियों की जांच की गए है, तथा कईयों को गिरफ्तार किया गया है।

तुर्की द्वारा वर्ष 2019 की पहली छमाही में ट्विटर से सामग्री हटाने के लिए 6,000 से अधिक मांगे की गयी थी, और इस मामले में तुर्की विश्व में सबसे आगे है।

तुर्की में 408,000 से अधिक वेबसाइट्स को ब्लॉक किया गया है।

तुर्की में ऑनलाइन विश्वकोश विकिपीडिया लगभग तीन साल तक ब्लॉक था, इसे तुर्की की शीर्ष अदालत द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन घोषित किये जाने के पश्चात इसे वापस शुरू किया गया था।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता पाने के लिए सबसे बड़ा प्रवासी समूह

भारतीय, वर्ष 2019-2020 के दौरान, ऑस्ट्रेलिया में नागरिकता प्राप्त करने वाले सबसे बड़े प्रवासी समूह बन गए हैं।

  • वर्ष 2019-2020 में 38,000 से अधिक भारतीयों ने ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता प्राप्त की है।
  • भारतीयों द्वारा नागरिकता प्राप्त करने में पिछले वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • भारत के पश्चात क्रमशः ब्रिटिश (25,011 नागरिक), चीनी (14,764) तथा पाकिस्तानी (8821) का स्थान था।

चर्चित स्थल- पोर्ट लुइस

यह हिंद महासागर में अवस्थित मॉरीशस का राजधानी-नगर है। यह अपने फ्रांसीसी औपनिवेशिक वास्तुकला के लिए जाना जाता है

चर्चा का कारण

हाल ही में, संयुक्त रूप से, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तथा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनौथ (Pravind Jugnauth) द्वारा भारतीय अनुदान सहायता से निर्मित पोर्ट लुइस में नए सुप्रीम कोर्ट का उद्घाटन किया गया।

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