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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 July

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. रूस-भारत-चीन समूह (RIC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वर्तमान दिवालियापन व्यवस्था में ‘प्री-पैक’ क्या हैं?

2. यमुना के जल में अमोनिया का उच्च स्तर

3. ग्रीन-एजी परियोजना

4. वैश्विक बाघ दिवस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. एस्ट्रोजन परियोजना

2. नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR)

3. चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध

4. राफेल फाइटर जेट्स

5. पम्पा नदी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

रूस-भारत-चीन समूह (RIC)

(Russia, India and China (RIC) grouping)

संदर्भ:

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव के दौरान प्रमुख लोगों द्वारा भारत की विदेश नीति को निर्णायक रूप से पश्चिम की ओर परिवर्तित करने का सुझाव दिया गया था।

हालांकि, पिछले महीने, भारत द्वारा रूस-भारत-चीन (RussiaIndia China: RIC) समूह के विदेश मंत्रियों के (वर्चुअल) सम्मलेन में भाग लेने का फैसला किया गया। इन परिस्थितियों में यह सम्मलेन अनुपयुक्त प्रतीत हो रहा है।

RIC क्या है?

  • रूस-भारत-चीन समूह (Russia-India-China- RIC) की परिकल्पना वर्ष 1998 में तत्कालीन रूसी विदेश मंत्री येवगेनी प्रिमकोव (Yevgeny Primakov) द्वारा की गई थी।
  • इस समूह की स्थापना का उद्देश्य ‘अमेरिका द्वारा निर्देशित विदेश नीति को समाप्त करना’, तथा भारत के साथ पुराने संबंधों को नवीनीकृत करना और चीन के साथ नई दोस्ती को बढ़ावा देना था।

RIC समूह के गठन का कारण

  1. 2000 के शुरुआती दशक में, ‘रूस, भारत तथा चीन’, तीनों देश एकध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था से बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन करने हेतु खुद को तैयार कर रहे थे।
  2. RIC समूह के देश वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में कुछ गैर-पश्चिम (पश्चिम-विरोधी से भिन्न) दृष्टिकोणों को साझा करते है, जिनमे से ‘संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर जोर’, ‘सामाजिक नीतियों पर बाहरी दबाव का विरोध’ तथा ‘सत्ता-परिवर्तन में बाहरी हस्तक्षेप’ आदि प्रमुख हैं।
  3. RIC समूह के देशों द्वारा वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संरचना के लोकतंत्रीकरण के समर्थन के मद्देनजर ब्राजील को सम्मिलित करके ब्रिक (BRIC) की स्थापना की गयी।

RIC समूह का महत्व तथा क्षमताएं

  • RIC देशों का, संयुक्त रूप से क्षेत्रफल वैश्विक भू-भाग के 19 प्रतिशत से अधिक है तथा संयुक्त रूप से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 33 प्रतिशत से अधिक का योगदान करते हैं।
  • इस समूह के तीनों देश परमाणु शक्ति संपन्न है तथा इसके दो देश, रूस और चीन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के स्थायी सदस्य हैं, जबकि भारत UNSC की सदस्यता के लिए प्रयासरत है।
  • ये तीनो देश एक नयी वैश्विक आर्थिक संरचना के निर्माण में योगदान करने में सक्षम हैं। यह समूह आपदा राहत और मानवीय सहायता हेतु एक साथ काम कर सकता है।

वर्तमान स्थिति:

हाल के दिनों में काफी परिवर्तन हुए हैं;

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के संबधों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जिसमे व्यापार और निवेश, सिविल परमाणु समझौता, तथा रक्षा संबधों में वृद्धि को सम्मिलित किया जा सकता है। अमेरिका के साथ रक्षा-उपकरण खरीददारी संबधों में वृद्धि से भारत की रूस पर निर्भरता काफी हद तक कम हुई है।
  2. चीन ने वर्ष 2005 में किये गए समझौते को दरकिनार करते हुए, अपने अपने पड़ोस में भारत के प्रभाव को कम करने के लिए, ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे’ (China-Pakistan Economic CorridorCPEC) की शुरुआत की है तथा इसके साथ ही हिंद महासागर में अपनी सैन्य और आर्थिक उपस्थिति का महत्वपूर्ण विस्तार किया है।
  3. वर्ष 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया के राज्य-हरण/अधिग्रहण के पश्चात, अमेरिका तथा रूस के मध्य संबंधों में दरार पड़ गयी। इसके पश्चात रूस तथा अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान मामलों में महत्वपूर्ण भूमिकायें निभाई तथा पाकिस्तान को तालिबान की सहायता करने के लिए सूचीबद्ध किया गया।

भारत के लिए RIC का महत्व

  1. रूस-भारत-चीन (RIC), शंघाई सहयोग संगठन ( Shanghai Cooperation Organisation- SCO) के आधार का निर्माण करते है।
  2. भारत, भू-सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थिति में अवस्थित है।
  3. सागरीय और महाद्वीपीय, दोनों क्षेत्रों में चीन के आधिपत्य को चुनौती देने हेतु भारत के लिए यह समूह काफी महत्वपूर्ण है।
  4. पाकिस्तान की शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में सदस्यता तथा इसमें संभावित सदस्य के रूप में ईरान तथा अफगानिस्तान का प्रवेश भारत के लिए SCO को काफी महत्वपूर्ण बनाता है।

आगे की राह:

  1. भारत के लिए इस क्षेत्र में रूस-चीन संबधों को अधिकतम सीमा तक आकार देना काफी महत्वपूर्ण है। मध्य एशियाई देशों ने रूस-चीन के द्वयाधिकार (duopoly) को समाप्त करने के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।
  2. पश्चिमी भारत से ईरान-अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए समुद्री / सड़क / रेल लिंक हेतु भारत-ईरान-रूस परियोजना, मध्य एशिया में रूस तथा चीन के साथ भारत की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
  3. रूस के साथ भारत की साझेदारी के रक्षा और ऊर्जा स्तंभ मजबूत बने हुए हैं। रूस के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच हमारी सुरक्षा-आपूर्ति में वृद्धि करने में सहायक हो सकती है – COVID-19 के दौरान इसका महत्व स्पष्ट हो चुका है।
  4. चीन के साथ भी हमें प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था तथा सीमा पर अपने हितों की रक्षा करते हुए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय रूप से विभिन्न मुद्दों पर कार्य करना चाहिए।
  5. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र आर्थिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र है, जिसमें किसी भी बाहरी शक्ति के प्रभुत्व को रोकने के लिए एक सहयोगी व्यवस्था होनी चाहिए।

निष्कर्ष:

वर्तमान भारत-चीन स्टैंड-ऑफ ने भारत तथा अमेरिका के मध्य प्रबल साझेदारी की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है। यह निरपवाद रूप से एक उद्देश्य हो सकता है, परन्तु यह बहुत हितकारी नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा को पूरी तरह से आउटसोर्स नहीं किया जा सकता है। कार्रवाई की स्वायत्तता के लिए भारत के विचार भौगोलिक वास्तविकताओं, ऐतिहासिक विरासत और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर आधारित है, न कि अवशिष्ट शीत युद्ध मानसिकता पर।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. RIC समूह क्या है?
  2. विश्व व्यापार संगठन- स्थापना और उद्देश्य
  3. G20 क्या है?
  4. पेरिस समझौता क्या है?

मेंस लिंक:

RIC समूह के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

वर्तमान दिवालियापन व्यवस्था में ‘प्री-पैक’ क्या हैं?

(What are pre-packs under the present insolvency regime?)

संदर्भ:

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs- MCA) ने दिवाला और दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code– IBC) के अंतर्गत शीघ्र दिवालियापन समाधान प्रदान करने हेतु वर्तमान दिवालियापन व्यवस्था में ‘प्री-पैक’ कहे जाने वाले उपाय को सम्मिलित किये जाने की संभावना पर विचार करने हेतु एक कमेटी गठित की है।

प्री-पैक क्या है?

  • इसे प्री-पैकेज्ड दिवालियापन (pre-packaged insolvency) भी कहा जाता है तथा यह किसी संकटग्रस्त कंपनी के ऋण समाधान के लिए किया गया समझौता होता है।
  • इसे संकटग्रस्त कंपनी के ऋण शोधन हेतु सार्वजनिक बोली प्रक्रिया के बजाय ‘रक्षित लेनदारों’ (secured creditors) तथा निवेशकों के मध्य एक समझौते के माध्यम से किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया को 90 दिनों के भीतर पूरा करना आवश्यक है ताकि सभी हितधारकों का इस व्यवस्था में विश्वास बना रहे।

प्री-पैक के लाभ:

  • तीव्र (Faster): यह प्रक्रिया संभवतः पारंपरिक कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (corporate insolvency resolution processCIRP) की तुलना में शीघ्रता से पूरी होगी। CIRP के अंतर्गत संकटग्रस्त कंपनी के लेनदारों को अहर्ता प्राप्त निवेशकों (Qualified Investors) के माध्यम से संकटग्रस्त कंपनी की नीलामी के लिए खुली बोली लगाने की अनुमति दी जाती है।
  • यह CIRP के स्थान पर महत्वपूर्ण वैकल्पिक ऋण शोधन तंत्र के रूप में कार्य करेगा तथा राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (National Company Law TribunalNCLP) के बोझ को कम करने में सहायक होगा।
  • प्री-पैक्स के मामले में, अंतिम समझौता होने तक कंपनी पर उसके वर्तमान प्रबंधकों का नियंत्रण रहता है यह व्यवस्था इसलिए आवश्यक है, क्योंकि CIRP प्रक्रिया में कंपनी का नियंत्रण, वर्तमान प्रबंधको से लेकर दिवालियापन पेशेवरों (insolvency professional) को सौंप दिया जाता है, जिससे व्यवसाय में गड़बड़ियां होने लगती है, तथा उच्च-स्तरीय मानव संशाधनों एवं परिसंपत्तियों का नुक्सान होता है।
  • इसके अलावा, आर्थिक रूप से संकटग्रस्त कंपनी औपचारिक रूप से दिवालिया घोषित होंने से पूर्व तक बिना प्रतिष्ठा खोये तथा मूल्य क्षरण के बिना अपने कार्यों को जारी रख सकती है।

प्री-पैक की कमियां

  • कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) की तुलना में ‘प्री-पैक’ प्रक्रिया कम पारदर्शी है। प्री-पैक प्रक्रिया में खुली बोली प्रक्रिया के बजाय वित्तीय लेनदार (फाइनेंशियल क्रेडिटर्स) किसी संभावित निवेशक से निजी तौर पर समझौता कर सकते हैं।
  • इससे संकटग्रस्त कंपनी के आपरेशनल क्रेडिटर्स तथा अन्य हितधारक, फाइनेंशियल क्रेडिटर्स द्वारा देनदारियों को कम करते हुए समझौता किये जाने पर ‘उचित-व्यवहार’ नहीं किये जाने का मुद्दा उठा सकते हैं।
  • CIRP व्यवस्था में संकटग्रस्त कंपनी की अधिकतम कीमत बोली के माध्यम से तय की जाती है, इसके विपरीत ‘प्री-पैक’ मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLP) केवल लेनदारों तथा निवेशकों द्वारा पेश किये गए ऋण-शोधन समाधान योजना का मूल्यांकन करेगा।

प्री-पैक की आवश्यकता

  • दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के अंतर्गत संकटग्रस्त कंपनियों के ऋणशोधन में CIRP व्यवस्था के धीमी गति से कार्य करना क्रेडिटर्स के लिए परेशानी का कारण है।
  • 2,170 मामलों में से 738 दिवालियापन समाधान प्रक्रियाएं मार्च के अंत तक 270 दिनों से अधिक का समय ले चुकी हैं।
  • IBC के तहत, हितधारकों के लिए दिवालियापन समाधान कार्यवाही के आरम्भ होने से 330 दिनों के भीतर CIRP को पूरा करना आवश्यक है।

दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) को 8 जून के करेंट अफेयर्स में विस्तार से कवर किया गया है

https://www.insightsonindia.com

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दिवाला और दिवालियापन क्या है?
  2. IBC कोड के तहत स्थापित विभिन्न संस्थाएं
  3. राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT)- संरचना तथा कार्य
  4. ऋण वसूली न्यायाधिकरण क्या हैं?
  5. IBC की धारा 7, 9 और 10

मेंस लिंक:

दिवाला प्रक्रिया कार्यवाहियों के निलंबन से कोविड -19 के प्रकोप से प्रभावित कंपनियों को किस प्रकार सहायता मिलेगी। चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

यमुना के जल में अमोनिया का उच्च स्तर

(High levels of ammonia in Yamuna water)

संदर्भ:

हाल ही में, यमुना नदी के जल में अमोनिया के उच्च स्तर (3 ppm) का पता चला है। इस कारण से  दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को जल उत्पादन क्षमता में 25 प्रतिशत की कमी करनी पड़ी है।

जल में अमोनिया की स्वीकार्य सीमा

भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 0.5 ppm है।

अमोनिया के बारे में प्रमुख तथ्य

अमोनिया एक रंगहीन गैस है और इसका उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक, सिंथेटिक फाइबर, रंजक और अन्य उत्पादों के उत्पादन में औद्योगिक रसायन के रूप में किया जाता है।

  • यह हाइड्रोजन तथा नाइट्रोजन से मिलकर बनती है। द्रव अवस्था में इसे अमोनियम हाइड्रॉक्साइड कहा जाता है।
  • यह तीक्ष्ण गंध-युक्त एक अकार्बनिक यौगिक है।
  • अमोनिया, प्राकृतिक रूप से वातावरण में जैविक अपशिष्ट पदार्थ के विघटन से निर्मित होती है।
  • यह हवा की तुलना में काफी हल्की होती है।

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संदूषण (Contamination):

  • यह औद्योगिक अपशिष्टों अथवा सीवेज संदूषण के माध्यम से मृदा अथवा सतही जल स्रोतों में पहुँच जाती है।
  • जल में अमोनिया की मात्रा 1 ppm से अधिक होने पर, जल मछलियों के लिए विषाक्त हो जाता है।
  • मनुष्यों द्वारा 1 ppm या उससे अधिक के अमोनिया के स्तर वाले जल को लंबे समय तक लेने से आंतरिक अंगों को नुकसान हो सकता है।

यमुना में अमोनिया

यमुना नदी में अमोनिया की अधिक मात्रा के लिए, हरियाणा के पानीपत और सोनीपत जिलों में डाई यूनिट, डिस्टिलरी से निकले अपशिष्ट व संदूषित पदार्थों तथा नदी के इस भाग में कुछ बिना सीवर वाली कालोनियों द्वारा अशोधित गंदे पानी का प्रवाह को मुख्य कारण माना जाता है।

समय की मांग

  • यमुना नदी में हानिकारक अपशिष्टों को डालने अथवा प्रवाहित करने के खिलाफ दिशानिर्देशों का सख्ती से कार्यान्वयन किया जाना आवश्यक है
  • अशोधित गंदे पानी के यमुना में प्रवाह पर रोक सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • सतत न्यूनतम प्रवाह, जिसे पारिस्थितिक प्रवाह भी कहा जाता है, को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। पानी की इस न्यूनतम मात्रा को नदी के पूरे विस्तार में जलीय तथा ज्वारनदमुखीय परितंत्रो एवं मानव-आजीविका के वहन हेतु सदैव प्रवाहित होना चाहिए।

चुनौतियां:

  • दिल्ली, पानी की 70 प्रतिशत आवश्यकताओं के लिए हरियाणा पर निर्भर है।
  • हरियाणा में बड़ी संख्या में लोग कृषि-कार्यों में सलंग्न हैं तथा इससे हरियाणा के पास पानी की अपनी समस्या है।
  • दोनों राज्यों के मध्य यमुना में सदैव 10 क्यूमेक्स (क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) प्रवाह बनाए रखने के पीछे अक्सर विवाद रहता है।
  • पिछले एक दशक में दोनों राज्य, जल-बटवारे के लिए कई बार अदालतों में निर्णय के लिए अपील कर चुके है।
  • नदी में न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह की कमी होने से अन्य प्रदूषकों का संचय होता है। यमुना के अशोधित पानी को उत्तरी पूर्वी दिल्ली में शोधित किया जाता है, इस क्षेत्र से काफी मात्रा में अनुपचारित सीवेज तथा घरों से निकाला गंदा पानी, गंदे नाले तथा गैर-कानूनी कारखानों से संदूषित पदार्थ युमना में प्रवाहित होते है।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • यमुना नदी, गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
  • इसकी उत्पत्ति उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बंदरपूँछ शिखर के पास यमुनोत्री नामक ग्लेशियर से निकलती है।
  • यह उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से प्रवाहित होने के बाद उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा नदी से मिलती है।
  • इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा और केन हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

ग्रीन-एजी परियोजना

(Green – Ag Project)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा कृषि से होने वाले उत्सर्जन को कम करने तथा संवहनीय कृषि पद्धतियों को सुनिश्चित करने हेतु मिजोरम राज्य में ग्रीन-एजी परियोजना (Green-Ag Project) की शुरुआत की गयी है।

‘ग्रीन-एजी परियोजना’ को पांच राज्यों लागू किया जायेगा। मिजोरम के अतिरिक्त अन्य राज्य, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा और उत्तराखंड हैं।

परियोजना के बारे में:

ग्रीन-एजी परियोजना को वैश्विक पर्यावरण सुविधा (Global Environment FacilityGEF) द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है तथा, ‘कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग’ (Department of Agriculture, Cooperation, and Farmers’ Welfare- DAC&FW) इस परियोजना के लिए राष्ट्रीय कार्यान्वयन एजेंसी है।

  • इस परियोजना को खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agricultre OrganizationFAO) तथा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF & CC) के सहयोग से लागू किया जायेगा।
  • इस परियोजना का उद्देश्य, भारतीय कृषि में जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन और स्थायी भूमि प्रबंधन उद्देश्यों तथा पद्धतियों को एकीकृत करना है।

पायलट परियोजना:

  • यह पायलट परियोजना सभी राज्यों में 31 मार्च, 2026 तक जारी रहेगी।
  • इस परियोजना के अंतर्गत, राज्य के 35 गांवों को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा इसमें दो संरक्षित क्षेत्रों – डंपा बाघ अभयारण्य (Dampa Tiger Reserve) तथा थोरंगटलांग वन्यजीव अभयारण्य (Thorangtlang Wildlife Sanctuary) को भी सम्मिलित किया गया है।

ग्रीन-एजी परियोजना के लक्ष्य:

  1. पांचो भू-प्रदेशों की कम से कम 8 मिलियन हेक्टेयर (हेक्टेयर) भूमि में मिश्रित भूमि-उपयोग पद्धतियों से विभिन्न वैश्विक पर्यावरणीय लाभों को प्राप्त करना।
  2. कम से कम 104,070 हेक्टेयर कृषि-भूमि को सतत भूमि और जल प्रबंधन के अंतर्गत लाना।
  3. संवहनीय भूमि उपयोग तथा कृषि पद्धतियों के उपयोग से 49 मिलियन कार्बन डाइऑक्साइड का पृथकीकरण (CO2eq) सुनिश्चित करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ग्रीन- एजी परियोजना किन राज्यों में लागू की जायेगी?
  2. लक्ष्य?
  3. FAO के बारे में
  4. GEF के बारे में?
  5. GEF का प्रबंधन कौन करता है?

मेंस लिंक:

ग्रीन- एजी परियोजना पर एक टिप्पणी लिखना।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वैश्विक बाघ दिवस

(Global Tiger Day)

ग्लोबल टाइगर डे अथवा वैश्विक बाघ दिवस प्रतिवर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसकी घोषणा वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित टाइगर समिट में की गयी थी।

इस अवसर पर, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भारत के बाघ सर्वेक्षण- 2018 पर एक अद्यतन रिपोर्ट जारी की है।

प्रमुख बिंदु:

  1. भारत में बाघों की कुल आबादी अब 2967 है जो दुनिया भर में बाघों की आबादी का 70 प्रतिशत है।
  2. देश में बाघों की सर्वाधिक संख्या, मध्य प्रदेश (526) में है, इसके पश्चात क्रमशः कर्नाटक (524) तथा उत्तराखंड (442) का स्थान हैं।
  3. छत्तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्या में कमी हुई है जबकि ओडिशा में बाघों की संख्या स्थिर रही। अन्य सभी राज्यों में सकारात्मक वृद्धि हुई है।
  4. मध्य प्रदेश के पेंच बाघ अभ्यारणय में बाघों की सर्वाधिक संख्या दर्ज की गयी तथा, तमिलनाडु के सत्यामंगलम बाघ अभ्यारणय में वर्ष 2014 के पश्चात ‘अधिकतम सुधार’ दर्ज किया गया।

गिनीज रिकॉर्ड:

  • अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चक्र के परिणामों ने विश्व का ‘सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण’ होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।
  • कैमरा ट्रैप (मोशन सेंसर्स के साथ लगे हुए बाहरी फोटोग्राफिक उपकरण, जो किसी भी जानवर के गुजरने पर रिकॉर्डिंग शुरू कर देते हैं) को 141 ​​विभिन्न साइटों में 26,838 स्थानों पर रखा गया था और 1,21,337 वर्ग किलोमीटर के प्रभावी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया।

अखिल भारतीय बाघ आंकलन:

अखिल भारतीय बाघ आकलन को प्रति चार वर्ष मेंराष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के तकनीकी समर्थन से आयोजित किया जाता है तथा राज्य वन विभागों और अन्य भागीदारों द्वारा इसे कार्यान्वित किया जाता है।

वैश्विक तथा राष्ट्रीय स्तर पर जारी बाघ संरक्षण के प्रयास:

  1. भारत में वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी, जो वर्तमान में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों में, देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2.2% के बराबर क्षेत्रफल, में सफलतापूर्वक जारी है।
  2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) द्वारा वन- रक्षकों के लिए एक मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, M-STrIPESमॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स (Monitoring system for Tigers’ Intensive Protection and Ecological Status) लॉन्च किया गया है।
  3. वर्ष 2010 में आयोजित पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में, वैश्विक स्तर पर 13 बाघ रेंज वाले देशों के नेताओं ने T X 2’ नारा के साथ बाघों की संख्या को दोगुना करने हेतु अधिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
  4. विश्व बैंक ने अपने ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) कार्यक्रम, के माध्यम से, अपनी उपस्थिति और संगठन क्षमता का उपयोग करते हुए, बाघ एजेंडे को मजबूत करने हेतु वैश्विक साझेदारों को एक मंच पर एकत्रित किया है।
  5. इन वर्षों में, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) पहल, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव काउंसिल (GTIC) के संस्थागत रूप में स्थापित हो गयी है, तथा अब यह, – ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) तथा ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program)- के माध्यम से बाघ संरक्षण संबंधी कार्यक्रम चला रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

बाघों की विभिन्न प्रजातियाँ:

  • विश्व ने बाघों की कई प्रजातियाँ पाई जाती हैं – साइबेरियाई बाघ, बंगाल टाइगर, इंडो-चाइनीज़ बाघ, मलयन बाघ, सुमात्रान टाइगर और साउथ चाइना टाइगर।
  • बंगाल टाइगर, मुख्य रूप से भारत में पाए जाते है, इसके साथ ही बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार में भी कम संख्या में पाए जाते हैं। यह सभी बाघ प्रजातियों में सर्वाधिक है, तथा जंगलों में इनकी संख्या मात्र 2,500 के करीब बची है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र के मध्य अंतर।
  2. भारत में महत्वपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व।
  3. M-STREIPES किससे संबंधित है?
  4. GTIC क्या है?
  5. प्रोजेक्ट टाइगर कब लॉन्च किया गया था?
  6. NTCA- रचना और कार्य।
  7. अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चक्र को गिनीज रिकॉर्ड बुक में क्यों दर्ज किया गया है?
  8. सबसे ज्यादा बाघों वाला राज्य
  9.  उच्चतम बाघ घनत्व वाला राज्य

मेंस लिंक:

बाघ एजेंडे की केंद्रीयता हमारे पर्यावरण की संवहनीयता के लिए एक पारिस्थितिक आवश्यकता है। इस संदर्भ में, बाघों के संरक्षण के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों की विवेचना कीजिए?

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


एस्ट्रोजन परियोजना

(AstroGen project)

यह शिक्षाविदों के लिए एक वंशावली परियोजना है।

  • इसके अंर्तगत खगोल-विज्ञान संबंधी विषयों पर डॉक्टरेट प्राप्त करने वाले अथवा शोध प्रबंधो का निर्देशन करने वाले शिक्षाविदों की वंशावली तैयार की जायेगी।
  • हाल ही में, इस परियोजना को अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी (AAS) तथा इसके ऐतिहासिक खगोल विज्ञान प्रभाग द्वारा लॉन्च किया गया है।
  • इस परियोजना में शिक्षाविद अपने पूर्वजों के बारे में पता लगा सकते है। शैक्षणिक वंशावली में, किसी व्यक्ति के ‘माता-पिता’ ही उनके शोध सलाहकार होते हैं।

नागार्जुनसागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR)

(Nagarjunasagar Srisailam Tiger Reserve)

  • यह भारत का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
  • NSTR आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 5 ज़िलों में विस्तारित है।
  • इस अभ्यारण्य का अधिकाँश क्षेत्र नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित है।
  • कृष्णा नदी इस अभ्यारण्य में 130 किमी (81 मील) की दूरी तक बहती है तथा अभ्यारण्य को उत्तरी तथा दक्षिणी भागों में विभाजित करती है।

चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध

  • केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 47 नए ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के करीब एक महीने बाद लिया गया है।
  • इन प्रतिबंधित किये गए नए ऐप में से अधिकाँश पिछले महीने ब्लॉक किए गए ऐप की मूल कंपनी के प्रतिरूप हैं।

सरकार द्वारा इन ऐप्स को प्रतिबंधित किये जाने का कारण:

  • सरकार के लिए उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ये ऐप्स उन गतिविधियों में लगे हुए हैं जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।
  • संबंधित प्रावधान: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत दी गई सूचना प्रौद्योगिकी (जनता द्वारा सूचना के उपयोग को अवरुद्ध करने की प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम 2009 के अंतर्गत तथा खतरों की उभरती प्रकृति को देखते हुए इन ऐप्स को ब्लॉक करने का निर्णय लिया है।

राफेल लड़ाकू जेट

(Rafale fighter jets)

फ्रांस से भारत के लिए पांच राफेल लड़ाकू जेट अंबाला एयरबेस पर पहुंच गए है।

भारत ने 36 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिये फ़्रांस सरकार के साथ एक समझौते पर 23 सितंबर, 2016 को हस्ताक्षर किये थे।

राफेल जेट क्या है?

यह फ्रांस के डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित ट्विन-इंजन मल्टी-रोल फाइटर जेट है।

 पम्पा नदी

(Pampa River)

  • पम्पा नदी केरल में पेरियार और भरतपुझा के बाद तीसरी सबसे लंबी नदी है।
  • भगवान अयप्पा को समर्पित सबरीमाला मंदिर पम्पा नदी के तट पर स्थित है।
  • पम्पा नदी को दक्षिण भगीरथीतथा बारिस नदी (River Baris) के नाम से भी जाना जाता है।

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