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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. इस्तांबुल अभिसमय

 

सामान्य अध्ययन-II

1. न्यायालय की अवमानना

2. राजस्थान राजनीतिक संकट और राज्यपाल की शक्तियां

3. किफायती एवं मध्‍यम आय आवास के लिए स्‍पेशल विंडो (SWAMIH)

4. सशस्त्र ड्रोनों की बिक्री पर अमेरिकी नियमों में ढील

 

सामान्य अध्ययन-III

1. वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कारगिल विजय दिवस

2. नाग नदी

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

इस्तांबुल अभिसमय

(Istanbul Convention)

संदर्भ:

हाल ही में, पोलैंड द्वारा, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को रोकने से संबंधित ‘इस्तांबुल कन्वेंशन’ से अलग होने का निर्णय लिया गया है।

चर्चा का विषय

पोलैंड के इस सन्धि से अलग होने का कारण संधि के प्रति इसका नया दृष्टिकोण है, इसके अनुसार पोलैंड यह मानता है, कि यह संधि हानिकारक है, क्योंकि इसके अंतर्गत स्कूलों में लैंगिक विषमता के बारे पढ़ने को अनिवार्य किया गया है।

इसके अतिरिक्त पोलैंड का कहना है कि, यह संधि, ‘जैविक लैंगिकता के विपरीत सामजिक-सांस्कृतिक लैंगिकता’ के निर्माण का प्रयास करती है।

उदाहरण के लिए, इस कन्वेंशन के कुछ प्रावधानों के तहत बच्चों तथा किशोरों को समलैंगिक परिवारों के निर्माण करने संबंधी शिक्षा देने की बात कही गयी है।

 इस्तांबुल कन्वेंशन क्या है?

इसे, ‘महिलाओं और घरेलू हिंसा के विरुद्ध हिंसा की रोकथाम तथा उससे निपटने हेतु यूरोपीय समझौता परिषद’ (Council of Europe Convention on preventing and combating violence against women and domestic violence) भी कहा जाता है।

  • यह संधि महिलाओं के खिलाफ हिंसा की रोकथाम करने और निपटने के लिए विश्व का पहला बाध्यकारी उपकरण है।
  • इस व्यापक वैधानिक ढाँचे में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा, घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, महिला जननांग अंगभंग (female genital mutilation- FGM), तथा सम्मान-आधारित हिंसा (honour-based violence) और बलात विवाह को रोकने के लिए प्रावधान किये गए है।
  • इस अभिसमय में, महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने हेतु सरकारों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित किये गए है।
  • किसी देश की सरकार के द्वारा अभिसमय के पुष्टि किये जाने के पश्चात वह इस संधि का पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हैं।
  • मार्च 2019 तक, इस संधि पर 45 देशों तथा यूरोपीय संघ द्वारा हस्ताक्षर किये गए है।
  • इस अभिसमय को 7 अप्रैल 2011 को यूरोपीय परिषद की ‘कमेटी ऑफ़ मिनिस्टर्स’ द्वारा अपनाया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इस्तांबुल- अवस्थिति
  2. इस्तांबुल अभिसमय किससे संबंधित है?
  3. यह कब हस्ताक्षरित किया गया था?
  4. अभिसमय में हस्ताक्षर करने वाला पहला देश?
  5. हाल ही में, किस देश ने अभिसमय से बाहर निकलने का फैसला किया?
  6. यूरोपीय परिषद क्या है?

मेंस लिंक:

इस्तांबुल कन्वेंशन पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

न्यायालय की अवमानना

(Contempt of Court)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के उच्चत्तम न्यायालय द्वारा स्व-प्रेरणा से (suo motu) एक विधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना ​​का मामला दर्ज किया गया था।

चर्चा का विषय:

हाल ही में, प्रशांत भूषण द्वारा पिछले दो माह में किये गए दो ट्वीट्स का हवाला देते हुए उच्चत्तम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी, अदालत ने इसी याचिका को संज्ञान में लेते हुए अवमानना का नोटिस जारी किया।

  • अपने ट्वीट में, अधिवक्ता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे तथा पिछले चार मुख्य न्यायाधीशों के अधीन अदालत के सामान्य कामकाज के बारे में टिप्पणी की थी।
  • उच्चत्तम न्यायालय ने ट्वीट्स को प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना ​​का दोषी पाया है।

अवमानना (Contempt) क्या है?

भारतीय विधिक संदर्भ में अदालत की अवमानना संबंधी क़ानून सबसे विवादास्पद तत्वों में से एक है।

यद्यपि, अवमानना ​​कानून की मूल अवधारणा में अदालत के आदेशों का सम्मान नहीं करने वालों अथवा अवहेलना करने वालों को दंडित करना है, परन्तु, भारतीय संदर्भ में, अदालत की गरिमा को ठेस पहुचाने वाले व्यक्तव्यों तथा न्यायिक प्रशासन में बाधा पहुचाने के लिए भी दण्डित करने हेतु अवमानना क़ानून ​​का उपयोग किया जाता है।

न्यायालय की अवमानना के प्रकार

भारत में अदालत की अवमानना दो प्रकार की होती है:

  1. सिविल अवमानना: सिविल अवमानना को किसी भी फैसले, आदेश, दिशा, निर्देश, रिट या अदालत की अन्य प्रक्रिया या अदालत में दिए गए उपक्रम के जानबूझ कर किये गए उल्लंघन के रूप में परिभाषित किया गया है।
  2. आपराधिक अवमानना: आपराधिक अवमानना ​​को किसी भी विषय (चाहे मौखिक या लिखित शब्दों से, या संकेतों से, या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा, अथवा किसी अन्य प्रकार से) के प्रकाशन के माध्यम से अदालत की निंदा करने अथवा न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने अथवा बाधा डालने के प्रयास को सम्मिलित किया जाता है।

संबंधित प्रावधान:

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 और 215 में क्रमशः सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय को न्यायालय की अवमानना ​​के लिए दोषी व्यक्तियों को दंडित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  2. 1971 की अवमानना अधिनियम की धारा 10 में उच्च न्यायालय के लिए अपने अधीनस्थ न्यायालयों को अवमानना करने पर दंडित करने की शक्ति को परिभाषित किया गया है।
  3. संविधान में लोक व्यवस्था तथा मानहानि जैसे संदर्भो सहित अदालत की अवमानना के रूप में, अनुच्छेद 19 के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध को भी सम्मिलित किया गया है।

न्यायालयों के लिए अवमानना ​​शक्तियों की आवश्यकता

  • न्यायिक आदेशों को सुनिश्चित रूप से लागू करने के लिए।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्र प्रकृति को बनाए रखने के लिए।
  • न्यायपालिका द्वारा जारी किये गए आदेशों को सरकार अथवा निजी पक्षकारों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है। यदि अदालतें अपने आदेशों को लागू करने में असमर्थ हो जायेगी तो विधि का शासन संकट में पड़ जाएगा।

अवमानना क़ानून संबधी विवाद

  • संविधान का अनुच्छेद 19 (1) (ए) सभी नागरिकों को वाक् तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है। किंतु अदालती कार्यवाही के विरुद्ध बोलने पर ‘अवमानना ​​प्रावधानों’ के अंतर्गत वाक् तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।
  • अवमानना कानून काफी हद तक व्यक्तिपरक (subjective) है जिसका उपयोग न्यायपालिका द्वारा स्वैच्छिक ढंग से जनता द्वारा उसकी आलोचना को दबाने के लिए किया जा सकता है।

प्रशांत भूषण मामले का विश्लेषण:

प्रशांत भूषण के विरुद्ध उच्चत्तम न्यायालय की एक पीठ द्वारा आरंभ की गयी स्व-प्रेरित अवमानना कार्यवाही, न्यायालय के अवमानना ​​क्षेत्राधिकार का दुरूपयोग है। इसका उपयोग उचित कारणों के होने पर संयम तथा सावधानी से किया जाना चाहिए।

  • क्योंकि, कुछ विधि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशांत भूषण के ट्वीट्स में ऐसा कुछ नहीं है जिससे अदालत की अवमानना ​​के रूप में माना जा सके।
  • प्रशांत भूषण के ट्वीट्स, अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार की सीमा में हैं, जिसके तहत वह भारत के मुख्य न्यायाधीश के एक निजी व्यक्ति के रूप में आचरण पर टिप्पणी तथा आलोचना करने को स्वतंत्र है।
  • इसके अतिरिक्त, प्रश्नगत ट्वीट्स, समझ एवं टिप्पणी के दायरे में आते हैं तथा अवमानना की सीमा का उल्लंघन नहीं करते हैं। अवमानना ​​का सामान्य सिद्धांत यह है कि व्यक्ति किसी निर्णय की आलोचना कर सकता है लेकिन निर्णय के लिए न्यायाधीश को अभिप्रेत नहीं किया जा सकता है।

निष्कर्ष:

  1. आपराधिक अवमानना ​​कानून हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ पूरी तरह से असंबद्ध है, जिसके अंतर्गत वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मूल अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है।
  2. ‘जनता के विश्वास की हानि’ के परीक्षण के साथ स्व-प्रेरित शक्तियों का व्यापक प्रयोग संयुक्त रूप से काफी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है, कि न्यायायिक संस्था, प्रत्यक्षतः कार्यवाहियों में खामियां होने के बाद भी, अपनी आलोचना सहन नहीं करेगा।
  3. इस तरीके से, न्यायपालिका कठोर कार्यान्वयन हेतु कानूनों के प्रयोग करने में खुद को कार्यपालिका के साथ अस्वाभाविक रूप से समान पा सकती है।

आगे की राह

  • आपराधिक अवमानना ​​पर कानून पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता के अतिरिक्त अवमानना ​​के लिए परीक्षण का मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
  • यदि इस प्रकार का कोई परीक्षण हो, तो उसमे इस तथ्य की जांच की जानी चाहिए कि, प्रश्नगत टिप्पणी किस प्रकार अदालती कार्यवाही में बाधा पंहुचा सकती है।
  • अवमानना ​​कानून को किसी संस्थान द्वारा आलोचनाओं को रोकने के लिए एक साधन के रूप में उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अन्य देशों में अवमानना कानून

विदेशी लोकतन्त्रों में अवमानना क़ानून व्यवहारिक रूप से अप्रचलित हो चुका है, इन देशों के न्यायालयों ने इसे बीते काल में उपयोग किये जाने वाला, प्राचीन क़ानून घोषित कर दिया गया है, जिसकी आवश्यकता तथा उपयोगिता काफी समय पूर्व ही समाप्त हो गयी थी।

  1. कनाडा ने अवमानना परीक्षण को प्रशासन के लिए वास्तविक, महत्वपूर्ण और तात्कालिक खतरा माना है।
  2. अमेरिकी अदालतें अब न्यायाधीशों या कानूनी मामलों पर टिप्पणियों के जवाब में अवमानना ​​कानून का उपयोग नहीं करती हैं।
  3. इंग्लैंड में, कानूनी संरचना बहुत अधिक विकसित हो गई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अवमानना के संदर्भ में उच्चत्तम न्यायालय तथा उच्च न्यायलय की शक्तियां
  2. इस संबंध में संवैधानिक प्रावधान
  3. न्यायलय की अवमानना (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा किये गए परिवर्तन
  4. सिविल बनाम आपराधिक अवमानना
  5. अनुच्छेद 19 के तहत अधिकार
  6. 1971 की अवमानना अधिनियम की धारा 10 किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

भारत में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अवमानना मामलों को किस प्रकार हल किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

राजस्थान राजनीतिक संकट और राज्यपाल की शक्तियां

संदर्भ:

राजस्थान में जारी राजनीतिक संकट के बीच राज्यपाल की शक्तियां और राज्य विधानमंडल के मामलों में उसकी भूमिका चर्चा के केंद्र में आ गयी है।

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन करने वाले कांग्रेसी विधायकों ने राज्यपाल पर दबाव के अंदर कार्य करने का आरोप लगाया है।
  • परन्तु, विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल क्या मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के लिए बाध्य होते है? तथा राज्यपाल किस सीमा तक अपने विवेकाधिकार का प्रयोग कर सकते है?

संवैधानिक स्थिति

संविधान के अनुच्छेद 163 और 174, विधानसभा सत्र बुलाने के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों के संदर्भ में प्रासंगिक हैं।

  • अनुच्छेद 163 के अनुसार, संविधान द्वारा राज्यपाल के लिए प्रदत्त विवेकाधिकार शक्तियों के प्रयोग के अतिरिक्त अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
  • अनुच्छेद 174 के अनुसार, राज्यपाल, समय-समय पर, राज्य के विधान मंडल के सदन या प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिए आहूत करेगा किन्तु उसके एक सत्र की अन्तिम बैठक और आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख के बीच छह मास से अधिक का अन्तर नहीं होगा।

इस सन्दर्भ में उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय

  • नबाम रेबिया बनाम उपसभापति मामले में वर्ष 2016 के सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि, राज्यपाल द्वारा सदन को आहूत व सत्रावसान करने तथा सदन को विघटन करने की शक्ति मंत्रिपरिषद् की सलाह के अनुरूप होनी चाहिए। तथा इसे राज्यपाल की इच्छानुसार नहीं होना चाहिए।
  • हालांकि, इसी निर्णय में यह भी कहा गया कि, यदि राज्यपाल के पास यह विश्वास करने का कारण है कि मंत्रिपरिषद सदन का विश्वास खो चुकी है, तो वह मुख्यमंत्री से बहुमत साबित करने के लिए कह सकता है।

निष्कर्ष:

  • राज्यपाल के पास विधानसभा के सत्र को आहूत करने की विवेकाधीन शक्तियां नहीं हैं, और वह मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य है।
  • परन्तु, राज्यपाल के पास मंत्रिपरिषद द्वारा सदन का विश्वास खो चुकने संबंधी कारण होने पर, वह मुख्यमंत्री को सदन में बहुमत साबित करने के लिये कह सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 163 और 174 का अवलोकन
  2. क्या राज्यपाल, विधानसभा सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के लिए बाध्य होता है?
  3. मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
  4. राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ
  5. राज्यपाल का कार्यकाल

मेंस लिंक:

राज्य के राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

किफायती एवं मध्‍यम आय आवास के लिए स्‍पेशल विंडो (SWAMIH)

(Special Window for Affordable and Mid Income Housing)

संदर्भ:

किफायती एवं मध्‍यम आय आवास के लिए स्‍पेशल विंडो (Special Window for Affordable and Mid Income HousingSWAMIH) निधि के अंतर्गत अब तक 81 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

SWAMIH निवेश फंड के अंतर्गत परियोजनाओ को मंजूरी दिए जाने से पूरे भारत में लगभग 60,000 घरों का निर्माण कार्य पूरा करना संभव हो जाएगा।

SWAMIH के बारे में:

नवंबर 2019 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा किफायती एवं मध्‍यम आय आवास के लिए स्‍पेशल विंडो (SWAMIH) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गयी थी।

  • SWAMIH निवेश कोष का गठन ‘पंजीकृत किफायती एवं मध्यम आय वर्ग की आवासीय परियोजनाओं’ को पूरा करने के लिए किया गया था, यह परियोजना धन के अभाव में रुकी हुई थी।
  • इस फंड को SEBI के अंतर्गत पंजीकृत कटेगरी- II AIF (वैकल्पिक निवेश कोष- Alternate Investment Fund) ऋण कोष के रूप में स्थापित किया गया था।
  • इस फंड का निवेश प्रबंधक SBICAP वेंचर्स है, जो एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
  • भारत सरकार की ओर से इस कोष के प्रायोजक वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव होते हैं।

फंड का निवेशक मंडल  

विशेष विंडो के अंतर्गत गठित किये गये/कोष उपलब्‍ध कराये गये वैकल्पिक निवेश कोष(AIF) सरकार और अन्‍य निजी निवेशकों से निवेश आकर्षित करेंगे। इनमें वित्‍तीय संस्‍थाएं, सोवेरन वेल्‍थ फंड, सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंक, घरेलू पेंशन और भविष्‍य निधि, वैश्विक पेंशन कोष और अन्‍य संस्‍थागत निवेशक सम्मिलित होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैकल्पिक निवेश कोष क्या है? प्रकार?
  2. SWAMIH फंड के निवेश प्रबंधक?
  3. फंड का प्रायोजक?
  4. कौन निवेश कर सकता है?
  5. इसका क्या उपयोग किया जाएगा?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

सशस्त्र ड्रोनों की बिक्री पर अमेरिकी नियमों में ढील

(U.S. Relaxes Rules on Sales of Armed Drones)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी प्रशासन द्वारा विशिष्ट प्रकार की मानवरहित हवाई प्रणालियों, जिन्हें आमतौर पर ड्रोन के रूप में जाना जाता है, पर निर्यात प्रतिबंधों में ढील प्रदान की गयी है। इससे अमेरिकी रक्षा ठेकेदारों को विदेशों में अपने उपकरणों की अधिक बिक्री करने में सहायता प्राप्त होगी।

नियमों में किये गए परिवर्तन:

नई नीति के तहत, 800 किलोमीटर प्रति घंटे से कम की गति से उड़ान भरने में सक्षम ‘मानवरहित हवाई प्रणाली, को बिक्री के लिए प्रतिबंधो से मुक्त किया गया है। यह प्रतिबंध, MQ-9 रीपर और RQ-4 ग्लोबल हॉक, जैसे ड्रोनों की अंतरराष्ट्रीय बिक्री को निषेध करते थे।

प्रभाव:

  • अब तक, मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (Missile Technology Control Regime-MTCR) के अंतर्गत अमेरिका ने कई देशो द्वारा 300 किग्रा से 500 किग्रा पेलोड को 300 किमी से अधिक दूरी तक ले जाने में सक्षम ‘कैटेगरी-1’ प्रणालियों की खरीद-मांग पर रोक लगाई हुई थी।
  • नए नियमों के तहत ‘ड्रोनों’ की बिक्री के लिए अन्य सैन्य उत्पादों के निर्यात की भांति विचार कर सकेंगे।

मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) के बारे में:

  • MTCR 35 देशों के मध्य एक अनौपचारिक और स्वैच्छिक साझेदारी है।
  • गठन: MTCR का गठन वर्ष 1987 में G-7 औद्योगिक देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूके और संयुक्त राज्य अमेरिका) द्वारा किया गया था।
  • इसका उद्देश्य 300 किमी से अधिक दूरी के लिए 500 किलोग्राम से अधिक पेलोड ले जाने में सक्षम मिसाइल और मानव रहित हवाई वाहन प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकना है।
  • यह सदस्य देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं है।

 MTCR का उद्देश्य

  • MTCR की शुरुआत समान विचार वाले देशों द्वारा परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए, इन सामूहिक विनाश के परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम प्रणालियों को प्रतिबंधित एवं नियंत्रित करने के लिए की गयी थी।
  • वर्ष 1992 में, MTCR का विस्तार परमाणु-हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों सहित अन्य सामूहिक विनाश के हथियारों (weapons of mass destructionWMD), अर्थात, परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलों के प्रसार को रोकने के लिए किया गया।

 भारत और MTCR:

  • भारत को 26 जून, 2016 को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR)  के 35वें पूर्ण सदस्य के रूप में मान्यता प्रदान की गयी।
  • चीन MTCR का सदस्य नहीं है, हालांकि चीन द्वारा मौखिक रूप से MTCR के मूल दिशानिर्देशों का पालन करने का वचन दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MTCR- उद्देश्य और सदस्य
  2. क्या भारत MTCR का हिस्सा है?
  3. MTCR का गठन किसके द्वारा किया गया था?
  4. MTCR के तहत प्रतिबंधित हथियार।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA)

(Global Forest Resources Assessment)

संदर्भ:

हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization– FAO) द्वारा वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (Global Forest Resources Assessment– FRA) रिपोर्ट 2020 जारी की गयी।

वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA) के बारे में:

  • FAO, वर्ष 1990 के बाद से प्रत्येक पाँच वर्ष में यह व्यापक आकलन करता है।
  • इस रिपोर्ट में सभी सदस्य देशों के वनों का स्तर, उनकी स्थितियों एवं प्रबंधन का आकलन किया जाता है।

FRA 2020 के अनुसार, 2010-2020 के दौरान वन क्षेत्रों से सर्वाधिक औसत वार्षिक शुद्ध लाभ (Average Annual Net Gains) दर्ज करने वाले शीर्ष 10 देश निम्नलिखित हैं:

  1. चीन
  2. ऑस्ट्रेलिया
  3. भारत
  4. चिली
  5. वियतनाम
  6. तुर्की
  7. संयुक्त राज्य अमेरिका
  8. फ्रांस
  9. इटली
  10. 10 रोमानिया

FRA 2020 के मुख्य निष्कर्ष:

  • वर्ष 2010-2020 की अवधि में एशियाई महाद्वीप ने वन क्षेत्र में सर्वाधिक शुद्ध वृद्धि दर्ज की है। एशियाई महाद्वीप में पिछले एक दशक के दौरान वनों में प्रति वर्ष 1.17 मिलियन हेक्टेयर की शुद्ध वृद्धि दर्ज की गई है।
  • दक्षिण-एशियाई उप-क्षेत्र में वर्ष 1990-2020 के दौरान शुद्ध वन हानि दर्ज की गई है।

भारत से संबंधित निष्कर्ष:

  • वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन के एक दशक के दौरान भारत ने औसतन प्रत्येक वर्ष 0.38 प्रतिशत वन लाभ अथवा 2,66,000 हेक्टेयर क्षेत्र की वन वृद्धि दर्ज की है।
  • रिपोर्ट में एशियाई महाद्वीप के अंर्तगत सामुदायिक प्रबंधित वन क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि के लिये सरकारों के संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम को श्रेय दिया है।
  • भारत में स्थानीय, आदिवासी एवं देशज़ समुदायों द्वारा प्रबंधित वन क्षेत्र वर्ष 1990 में शून्य से बढ़कर वर्ष 2015 में लगभग 25 मिलियन हेक्टेयर हो गया है।
  • हालाँकि आकलन के अनुसार, प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित वन दर (Naturally Regenerating Forest Rate) निराशाजनक है। 2010-20 के दौरान, प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित वन में वृद्धि की दर केवल 0.38 प्रतिशत थी।
  • भारत द्वारा विश्व में वानिकी क्षेत्र में अधिकतम रोज़गार उत्पन्न किये गए हैं। विश्व स्तर पर, 12.5 मिलियन लोग वानिकी क्षेत्र में कार्यरत थे। इसमें से 6.23 मिलियन अर्थात् लगभग 50% सिर्फ भारत में कार्यरत हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वैश्विक वन संसाधन मूल्यांकन (FRA) कौन जारी करता है?
  2. इसे कब जारी किया जाता है?
  3. 2010-2020 के दौरान वन क्षेत्र में अधिकतम औसत वार्षिक शुद्ध लाभ दर्ज करने वाले शीर्ष 5 देश
  4. विश्व में वानिकी क्षेत्र में सर्वाधिक रोजगार की सूचना देने वाला देश?
  5. भारत की प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित वन दर

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कारगिल विजय दिवस- 26 जुलाई

यह दिन भारतीय सेना द्वारा 1999 में कारगिल-द्रास सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों से भारतीय क्षेत्रों को वापस निकालने के लिए शुरू किए गए “ऑपरेशन विजय” की सफलता की स्मृति में मनाया जाता है।

  • पृष्ठभूमि: भारत-पाकिस्तान द्वारा शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किये गए थे, जिसमे कहा गया था कि निर्धारित नियंत्रण सीमा पर कोई सशस्त्र संघर्ष नहीं होगा। इसके बाबजूद भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं ने कारगिल और नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मई-जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध हुआ।
  • भारतीय वायु सेना का ऑपरेशन, ‘सफ़ेद सागर’, कारगिल युद्ध का एक प्रमुख हिस्सा था।

नाग नदी (Nag river)

  • नाग नदी महाराष्ट्र के नागपुर शहर से होकर बहने वाली नदी है।
  • इसके नाम पर ही शहर का नाम नागपुर पड़ा था।
  • नाग नदी का उद्गम वाडी के पास लावा पहाड़ियों से होता है, तथा यह कन्हान-पेंच नदी तंत्र का भाग है।

चर्चा का कारण

हाल ही में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने नाग नदी की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि, औद्योगीकरण ने नाग नदी को शापग्रस्त महिला में परिवर्तित कर दिया है।


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