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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. चंद्र शेखर आज़ाद

2. बाल गंगाधर तिलक

3. भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. 24% राज्यसभा सदस्यों पर आपराधिक मामले

2. सामान्य वित्तीय नियम

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारतीय शैक्षिक मूल्यांकन परीक्षण (Ind-SAT)

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

चंद्रशेखर आजाद

संदर्भ:

23 जुलाई- जन्मोत्सव।

चन्द्र शेखर आज़ाद के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

  • इनका जन्म 23 जुलाई, 1906 को, वर्तमान मध्य प्रदेश के भावरा गाँव, अलीराजपुर जिले में हुआ था।
  • 15 वर्ष की आयु में इन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
  • वर्ष 1922 में गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को स्थगित करने के उपरान्त, चंद्र शेखर आजाद हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (Hindustan Republican AssociationHRA) में सम्मिलित हो गए।
  • वर्ष 1928 में HRA को हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी (Hindustan Socialist Republican ArmyHSRA) के रूप में पुनर्गठित किया गया।
  • वर्ष 1925 में हुई प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना ‘काकोरी षड्यंत्र’ में आजाद ने भाग लिया था।
  • 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के आज़ाद पार्क में उनका निधन हो गया।
  • इसके अतिरिक्त, चंद्र शेखर आजाद, वर्ष 1926 में वायसराय की ट्रेन को विस्फोट से उड़ाने के प्रयास तथा 1928 में जे पी सॉन्डर्स हत्याकांड में सम्मिलित थे। लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए क्रांतिकारियों द्वारा सॉन्डर्स की हत्या की गयी थी।

इन्हें ‘आज़ाद’ क्यों कहा जाता है?

चंद्र शेखर को, 15 वर्ष की अल्पावस्था में असहयोग आंदोलन में भाग लेने पर गिरफ्तार किया गया था। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने पर, इन्होने गर्व से अपना नाम ’आज़ाद’, अपने पिता का नाम ‘स्वतंत्र’ तथा निवास-स्थान ‘जेल’ बताया। उस समय से इन्हें ‘आजाद’ के नाम से जाना जाने लगा।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

बाल गंगाधर तिलक

संदर्भ:

23 जुलाई- जन्मोत्सव।

प्रमुख बिंदु:

  • बाल गंगाधर तिलक ने ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और इसे मै लेकर रहूँगा’ की प्रसिद्ध उद्घोषणा की, इस नारे में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के लिए एक प्रेरणा-श्रोत के रूप में कार्य किया।
  • ब्रिटिश सरकार ने इन्हें ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहा तथा उनके अनुयायियों ने उन्हें लोकमान्य की उपाधि दी, जिसका अर्थ होता है ‘लोगों द्वारा सम्मानित’।

विचारधारा:

  • बाल गंगाधर तिलक वर्ष 1890 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सम्मिलित हुए। शीघ्र ही उन्होंने पार्टी के ‘स्व-शासन’ पर उदारवादी दृष्टिकोण का प्रबल विरोध आरम्भ कर दिया।
  • इनके अनुसार, अंग्रेजों के खिलाफ ‘साधारण संवैधानिक आंदोलन’ व्यर्थ है। इसके उपरान्त वह प्रमुख कांग्रेस नेता गोपाल कृष्ण गोखले’ के विरुद्ध खड़े हो गए।
  • वह अंग्रेजों को देश से बाहर निकालने के लिए एक सशस्त्र विद्रोह के पक्षधर थे। लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन के पश्चात, तिलक ने स्वदेशी आंदोलन तथा ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का पूर्णतयः समर्थन किया।
  • दृष्टिकोण में इस बुनियादी भिन्नता के कारण, तिलक और उनके समर्थकों को कांग्रेस के ‘चरमपंथी गुट’ के रूप में जाना जाने लगा।
  • तिलक के प्रयासों को बंगाल के राष्ट्रवादी बिपिन चंद्र पाल तथा पंजाब के लाला लाजपत राय ने समर्थन दिया।
  • वह एक महान सुधारक थे और उन्होंने जीवन-पर्यंत महिला शिक्षा तथा महिला सशक्तीकरण के लिए कार्य किये।
  • तिलक ने गणेश चतुर्थीऔर शिवाजी जयंती पर भव्य समारोहों का आरम्भ किया। इन समारोहों के माध्यम से उन्होंने समस्त भारतीयों में एकता तथा राष्ट्रवादी भावना को जाग्रत करने की परिकल्पना की।

विरोध और कारावास:

  • तिलक ने पुणे तथा आसपास के क्षेत्रों में फ़ैली प्लेग महामारी के दौरान ब्रिटिश सरकार के दमनकारी रवैये के विरोध में अपने समाचार पत्रों में उत्तेजनात्मक लेख लिखे।
  • इनके लेखों से प्रेरित होकर ‘चापेकर बंधुओं’ ने 22 जून, 1897 को कमिश्नर रैंड और लेफ्टिनेंट अयेर्स्ट की हत्या को अंजाम दिया। परिणामस्वरूप तिलक को हत्या के लिए भड़काने तथा राजद्रोह के आरोप में 18 महीने के कारावास की सजा दी गयी।
  • तिलक ने वर्ष 1908 में युवा क्रांतिकारी खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी द्वारा मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट की हत्या के प्रयासों का खुलकर समर्थन किया।
  • कारावास के दौरान इन्होने लिखना जारी रखा, इस अवधि में इनके द्वारा प्रिसिद्ध पुस्तक ‘गीता रहस्य’ की रचना की गयी।

तिलक और ऑल इंडिया होम रूल लीग:

  1. अपने राष्ट्रवादी साथियों को पुनः एकत्र करने के उद्देश्य से तिलक ने वर्ष 1916 में जोसेफ बैप्टिस्टा, एनी बेसेंट तथा मुहम्मद अली जिन्ना के साथ ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना की।
  2. वह कांग्रेस में फिर से सम्मिलित हुए, परन्तु विपरीत विचारधारा वाले गुटों के मध्य सामंजस्य नहीं बना सके।

समाचार पत्र:

  • राष्ट्रवादी लक्ष्यों को समर्पित, बाल गंगाधर तिलक ने दो समाचार पत्रों – ‘मराठा’ (अंग्रेजी) तथा ‘केसरी‘ (मराठी) का प्रकाशन किया।
  • तिलक ने अकाल और प्लेग महामारी के प्रकोप तथा ब्रिटिश सरकार द्वारा अकाल राहत कोष के संदर्भ में उदासीनता तथा गैर-जिम्मेदार रवैये में निडरता पूर्वक रिपोर्ट्स प्रकाशित की।

शिक्षा:

  • बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1884 में ‘दक्कन एजुकेशन सोसायटी’ की स्थापना की।
  • सोसाइटी द्वारा माध्यमिक शिक्षा से आगे की पढाई के लिए वर्ष 1885 में फर्ग्यूसन कॉलेज की स्थापना की गयी। तिलक ने फर्ग्यूसन कॉलेज में गणित का अध्यापन कार्य किया।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

(Govt sanctions permanent commission to women officers in Indian Army)

संदर्भ:

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent CommissionPC) प्रदान करने के लिए औपचारिक सरकारी स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है।

  • इस आदेश के माध्यम से भारतीय सेना के सभी दस वर्गों में शॉर्ट सर्विस कमीशन (Short Service CommissionedSSC) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने को निर्दिष्ट किया गया है।
  • भारतीय सेना के दस वर्ग: जज एवं एडवोकेट जनरल (JAG), आर्मी एजुकेशनल काप्र्स (AEC), आर्मी एयर डिफेंस (AAD), सिग्नल्स, इंजीनियर्स, आर्मी ऐवियेशन, इलेक्ट्रोनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME), आर्मी सर्विस काप्र्स (ASC), आर्मी आर्डनेंस काप्र्स (AOC) तथा इंटेलीजेंट काप्र्स (Intelligence Corps) है।

पृष्ठभूमि:

जुलाई माह के आरम्भ में, उच्चत्तम न्यायालय ने, सभी सेवारत शॉर्ट सर्विस कमीशन प्राप्त (SSC)  महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने संबधी फैसले को लागू करने हेतु केंद्र सरकार के लिए एक और महीने की अनुमति दी थी। इसके पूर्व केंद्र सरकार ने कोविड -19 महामारी का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत के निर्णय को लागू करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था।

इस कदम का महत्व:

इस निर्णय से संगठन में बड़ी भूमिकाओं के निर्वहन के लिए महिला अधिकारियों को अधिकारसंपन्न बनाने का रास्ता प्रशस्त हो गया है।

नोट: इस विषय को विस्तार से 8 जुलाई के कर्रेंट अफेयर्स में कवर किया गया है:

https://www.insightsonindia.com/2020/07/08/insights-

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

24% राज्यसभा सदस्यों पर आपराधिक मामले

संदर्भ:

हाल ही में, ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (Association for Democratic Reforms– ADR) द्वारा राज्यसभा सांसदों के निर्वाचन स्वं-शपथ पत्रों का विश्लेषण करने के उपरान्त एक रिपोर्ट जारी की गयी है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 233 राज्यसभा सदस्यों में से 229 सदस्यों के डेटा का विश्लेषण किया गया है।

  • इससे ज्ञात हुआ है कि कुल 54 सांसदों अथवा 24% सदस्यों ने अपने ऊपर चल रहे आपराधिक मामलों को घोषित किया है।
  • 229 सदस्यों में से 28 अथवा 12% सदस्यों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है।
  • 229 सांसदों में से 203 अथवा 89% सदस्यों ने 1 करोड़ से अधिक की निजी संपत्ति घोषित की है।

इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के प्रयास:

  1. पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2018): इस मामले में सभी राजनीतिक दलों को अपने उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों को घोषित करने और प्रकाशित करने के लिए अनिवार्य किया गया।
  2. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) बनाम भारतीय संघ (2002): इस मामले में, सभी उम्मीदवारों को रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष, उनके खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सूचना देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने के लिए अनिवार्य किया गया।
  3. PUCL बनाम भारत संघ (2013): इस मामले में उच्चत्तम न्यायलय ने चुनाव में नेगेटिव वोट डालने हेतु नागरिकों के संवैधानिक अधिकार को बरकरार रखा।
  4. लिली थॉमस बनाम भारत संघ (2013): इस मामले में, जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) को असंवैधानिक घोषित किया गया, इस धारा में दोषी सांसदों को उच्च न्यायालय में दोष-सिद्धि के विरूद्ध अपील दायर करने तथा सजा पर स्टे प्राप्त करने के लिए तीन महीने की अवधि की अनुमति दी गई थी।
  5. पब्लिक इंटरेस्ट एंड अदर्स बनाम भारत संघ (2014): इस मामले में, सभी अधीनस्थ न्यायालयों को निर्देश दिया गया कि वे एक साल के भीतर सांसदों/विधायकों से संबंधित मामलों पर निर्णय दें, अथवा निर्णय ने दे पाने की स्थिति में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को कारण बताएं।
  6. फरवरी 2020 में, उच्चत्तम न्यायलय ने सभी राजनीतिक दलों के लिए ‘अपराधिक पृष्ठिभूमि के उम्मेदवारो को चुनने तथा गैर-अपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मेदवारों के नहीं चुनने के कारणों को स्पष्ट करने के निर्देश दिया था।’ राजनीतिक दलों द्वारा उपरोक्त सूचनाये प्रदान करने में विफल होने पर इसे न्यायालय की अवमानना समझा जायेगा।

इस विषय पर ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RPA) के प्रावधान

  • वर्तमान में, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People- RPA) 1951 के तहत, किसी आपराधिक मामले में सजा-युक्त होने के पश्चात चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।
  • जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अंतर्गत, किसी भी आपराधिक मामले में दो अथवा दो से अधिक वर्षो के सजायाफ्ता व्यक्ति को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। परन्तु, जिन व्यक्तियों का मामला अदालत में विचारधीन है, वे चुनाव में भाग ले सकते हैं।

आगे की राह

  • राजनीतिक दलों को स्वतः दागियों को टिकट देने से इनकार कर देना चाहिए।
  • जिन व्यक्तियों के विरुद्ध जघन्य प्रकृति के मामले लंबित है, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन कर ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
  • फास्ट-ट्रैक अदालतों में दोषी विधायकों संबंधी मामलों की शीघ्र सुनवाई कर निर्णय दिए जाने चाहिए।
  • चुनाव-अभियानों में धन-प्रयोग को अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
  • भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के लिए राजनीतिक दलों के वित्तीय खातों के ऑडिट की शक्ति प्रदान की जानी चाहिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

सामान्य वित्तीय नियम (GFR)

(General Financial Rules)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत सरकार द्वारा प्रतिरक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत के साथ स्थलीय-सीमा साझा करने वाले देशों के बोली लगाने वालों (bidders) के लिए सार्वजनिक खरीद पर प्रतिबंध लगाते हुए सामान्य वित्तीय नियमों, 2017 में संशोधन किया गया है।

केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को सभी सार्वजनिक खरीद हेतु इस आदेश को लागू करने का निर्देश दिया है।

संशोधन के अनुसार:

  • भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों के किसी भी ‘बोली लगाने वाले’ को वस्तु, सेवाओं (परामर्श सेवाओं और गैर-परामर्श सेवाओं सहित) अथवा कार्य से सम्बंधित किसी भी सरकारी खरीद में बोली लगाने के लिए, ‘सक्षम प्राधिकरण’ के साथ पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।
  • पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकरण, उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal TradeDPIIT) द्वारा गठित पंजीकरण समिति होगी।
  • इसके साथ ही, विदेश और गृह मंत्रालय से क्रमशः राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य होगी।

अपवाद:

  • 31 दिसंबर 2020 तक कोविड-19 वैश्विक महामारी की रोकथाम के लिए चिकित्सा आपूर्ति की खरीद सहित कुछ सीमित मामलों में छूट प्रदान की गई है।
  • एक अलग आदेश द्वारा उन देशों को पूर्व पंजीकरण की आवश्यकता से छूट दी गई है, जिन्हें भारत सरकार ऋण सुविधा (लाइन ऑफ़ क्रेडिट) देती है या विकास सहायता प्रदान करती है।

पृष्ठभूमि:

  • ये उपाय भारत में चीनी उत्पादों और निवेशों की आमद को रोकने के लिए हाल के महीनों में उठाए गए कदमों में से एक हैं।
  • 23 जून को, सरकार द्वारा विक्रेताओं के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर नए उत्पादों को पंजीकृत करते समय माल की उत्पत्ति के देश को स्पष्ट करने के लिए अनिवार्य बना दिया गया है।
  • अप्रैल में, सरकार द्वारा भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों में निवेश के लिए पूर्व अनुमोदन को अनिवार्य करते हुए FDI नियमों में संशोधन किया गया।

सामान्य वित्तीय नियम (GFR) क्या हैं?

सामान्य वित्तीय नियम, लोक-वित्त मामलों से संबंधित नियमों का समूह होता है।

  • इन नियमों को पहली बार वर्ष 1947 में जारी किया गया था तथा इनके माध्यम से सभी मौजूदा आदेशों को एकीकृत किया गया।
  • ये नियम वित्तीय मामलों से संबंधित निर्देश होते हैं।
  • ‘सामान्य वित्तीय नियम’, मंत्रालयों / विभागों के लिए, अधिग्रहण विभाग द्वारा जारी तथा विभिन्न परिस्थितियों में नम्यता को बनाये रखते हुए, वस्तुओं व सेवाओं की खरीद हेतु निर्धारित विस्तृत नियमों का समूह होते हैं।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारतीय शैक्षिक मूल्यांकन परीक्षण (Ind-SAT)

(Indian Scholastic Assessment (Ind-SAT) Test)

  • हाल ही में, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अपने ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत देश में पहली बार प्रतिभा आकलन के लिए इंड-सेट (Ind-SAT) 2020 परीक्षा का आयोजन किया गया।
  • इंड-सैट, स्टडी इन इंडिया कार्यक्रम के तहत चुनिंदा भारतीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन के इच्छुक विदेशी छात्रों को छात्रवृत्ति और दाखिला देने के लिए कराई जाने वाली एक परीक्षा है।

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