HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
‘वार्ली पेंटिंग (Warli Paintings)’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इसका अभ्यास मुख्य रूप से तमिलनाडु- केरल सीमा पर निवास करने वाले देशज लोगों द्वारा किया जा रहा है।
- मानव आकृतियों का निरूपण करने के लिए त्रिभुज, वृत्त और वर्ग जैसी ज्यामितीय आकृतियों का उपयोग किया जाता है।
- पेंटिंग में सफेद रंग का उपयोग किया जाता है, जिसे गोंद और चावल पाउडर के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
‘वार्ली पेंटिंग (Warli Paintings)’:
- इस पेंटिंग का नाम उन लोगों के नाम रखा गया है जो इस पेंटिंग परंपरा का 2500-3000 ईसा पूर्व से अभ्यास कर रहे हैं। इन्हें वार्लिस (Warlis) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से गुजरात-महाराष्ट्र सीमा पर निवास करने वाले स्वदेशी लोग हैं। इन चित्रों की मध्यप्रदेश के भीमबेटका के भित्ति चित्रों से घनिष्ठ समानता है। ये चित्र प्रागैतिहासिक काल के हैं।
- इन कर्मकांडीय चित्रों में चौकट या चौका (chaukat or chauk) का मुख्य रूप से रूपांकन किया गया है, जो चारो ओर से मछली पकड़ने, शिकार, कृषि, नृत्य, जानवरों, पेड़ों और त्योहारों को चित्रित करने वाले दृश्यों से घिरा हुआ है। देवी-देवताओं में पालघाट देवी (प्रजनन की देवी) का चित्रण किया गया है और पुरुष देवताओं में उन आत्माओं का चित्रण किया गया है, जो मानव रूप प्राप्त कर चुके हैं।
- परंपरागत रूप से, इन चित्रों का चित्रण अति सामान्य ग्राफिक शब्दावली का उपयोग करके दीवारों पर किया जाता है, जिसमें एक त्रिभुज, एक वृत्त और एक वर्ग शामिल हैं। ये आकृतियाँ प्रकृति से प्रेरित हैं, अर्थात् सूर्य या चंद्रमा से वृत्त, शंक्वाकार आकार के पेड़ों या पहाड़ों से त्रिभुज और पवित्र प्रांगण या भूमि के खण्डों से वर्ग। एक मानव या जानवर को चित्रित करने के लिए, दो त्रिभुजों के शीर्ष कोणों को परस्पर जोड़ा जाता है, जिसमें वृत्त सिर को प्रदर्शित करता है। आधार (base) को मिट्टी, टहनियों और गोबर के मिश्रण से तैयार किया जाता है जो इसे एक लाल गेरुआ रंग प्रदान करता है। पेंटिंग के लिए केवल सफेद रंग का उपयोग किया जाता है, जिसे गोंद और चावल पाउडर के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
Incorrect
उत्तर: b)
‘वार्ली पेंटिंग (Warli Paintings)’:
- इस पेंटिंग का नाम उन लोगों के नाम रखा गया है जो इस पेंटिंग परंपरा का 2500-3000 ईसा पूर्व से अभ्यास कर रहे हैं। इन्हें वार्लिस (Warlis) कहा जाता है, जो मुख्य रूप से गुजरात-महाराष्ट्र सीमा पर निवास करने वाले स्वदेशी लोग हैं। इन चित्रों की मध्यप्रदेश के भीमबेटका के भित्ति चित्रों से घनिष्ठ समानता है। ये चित्र प्रागैतिहासिक काल के हैं।
- इन कर्मकांडीय चित्रों में चौकट या चौका (chaukat or chauk) का मुख्य रूप से रूपांकन किया गया है, जो चारो ओर से मछली पकड़ने, शिकार, कृषि, नृत्य, जानवरों, पेड़ों और त्योहारों को चित्रित करने वाले दृश्यों से घिरा हुआ है। देवी-देवताओं में पालघाट देवी (प्रजनन की देवी) का चित्रण किया गया है और पुरुष देवताओं में उन आत्माओं का चित्रण किया गया है, जो मानव रूप प्राप्त कर चुके हैं।
- परंपरागत रूप से, इन चित्रों का चित्रण अति सामान्य ग्राफिक शब्दावली का उपयोग करके दीवारों पर किया जाता है, जिसमें एक त्रिभुज, एक वृत्त और एक वर्ग शामिल हैं। ये आकृतियाँ प्रकृति से प्रेरित हैं, अर्थात् सूर्य या चंद्रमा से वृत्त, शंक्वाकार आकार के पेड़ों या पहाड़ों से त्रिभुज और पवित्र प्रांगण या भूमि के खण्डों से वर्ग। एक मानव या जानवर को चित्रित करने के लिए, दो त्रिभुजों के शीर्ष कोणों को परस्पर जोड़ा जाता है, जिसमें वृत्त सिर को प्रदर्शित करता है। आधार (base) को मिट्टी, टहनियों और गोबर के मिश्रण से तैयार किया जाता है जो इसे एक लाल गेरुआ रंग प्रदान करता है। पेंटिंग के लिए केवल सफेद रंग का उपयोग किया जाता है, जिसे गोंद और चावल पाउडर के मिश्रण से तैयार किया जाता है।
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Question 2 of 5
2. Question
बौद्ध धर्म के प्रारंभिक चरण के दौरान, बुद्ध को प्रतीकात्मक रूप में निम्नलिखित में से किनके द्वारा दर्शाया गया है
- पदचिह्न
- स्तूप
- कमल सिंहासन
- चक्र
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
- बौद्ध धर्म के प्रारंभिक चरण के दौरान, बुद्ध को पदचिह्न, स्तूप, कमल सिंहासन, चक्र आदि के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। यह या तो सामान्य पूजा, या सम्मान या कई बार जीवन की घटनाओं के इतिहासकरण को दर्शाता है।
Incorrect
उत्तर: d)
- बौद्ध धर्म के प्रारंभिक चरण के दौरान, बुद्ध को पदचिह्न, स्तूप, कमल सिंहासन, चक्र आदि के माध्यम से प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है। यह या तो सामान्य पूजा, या सम्मान या कई बार जीवन की घटनाओं के इतिहासकरण को दर्शाता है।
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Question 3 of 5
3. Question
इंडो-सारासैनिक (Indo-Saracenic) वास्तुकला के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह एक मिश्रित स्थापत्य शैली थी।
- भारत की मध्यकालीन इमारतों के गुंबद और छत्रियां इससे प्रभावित थे।
- गेटवे ऑफ इंडिया को इसी शैली में निर्मित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
- बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में एक नई मिश्रित वास्तुकला शैली विकसित हुई जिसने भारतीय को यूरोपीय के साथ जोड़ा। सार्वजनिक वास्तुकला में भारतीय और यूरोपीय शैलियों को एकीकृत करके, ब्रिटिश यह सिद्ध करना चाहते थे कि वे भारत के वैध शासक थे। इसे इंडो-सारासैनिक (Indo-Saracenic) वास्तुकला कहा जाता था।
- इस शैली से भारत की मध्यकालीन इमारतों के गुंबद, छत्रियां, जलियां और मेहराब प्रभावित थे।
- 1911 में किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी का भारत में स्वागत करने के लिए पारंपरिक गुजराती शैली में निर्मित गेटवे ऑफ इंडिया इस शैली का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
Incorrect
उत्तर: d)
- बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में एक नई मिश्रित वास्तुकला शैली विकसित हुई जिसने भारतीय को यूरोपीय के साथ जोड़ा। सार्वजनिक वास्तुकला में भारतीय और यूरोपीय शैलियों को एकीकृत करके, ब्रिटिश यह सिद्ध करना चाहते थे कि वे भारत के वैध शासक थे। इसे इंडो-सारासैनिक (Indo-Saracenic) वास्तुकला कहा जाता था।
- इस शैली से भारत की मध्यकालीन इमारतों के गुंबद, छत्रियां, जलियां और मेहराब प्रभावित थे।
- 1911 में किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी का भारत में स्वागत करने के लिए पारंपरिक गुजराती शैली में निर्मित गेटवे ऑफ इंडिया इस शैली का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।
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Question 4 of 5
4. Question
यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूचि में शामिल ‘ठठेरा (Thatheras) और इनकी हस्तकला‘ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह पीतल और तांबे के बर्तनों के निर्माण की पारंपरिक तकनीक है।
- इसकी उत्पत्ति पश्चिम बंगाल राज्य से हुई थी।
- शिल्प और निर्माण की प्रक्रिया एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से प्रसारित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
- जंडियाला गुरु की ठठेरा हस्तकला पंजाब में पीतल और तांबे के बर्तनों के निर्माण की एक पारंपरिक तकनीक है।
- यह एक मौखिक परंपरा है जिसे ठठेरा समुदाय में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रसारित किया जाता है। इसमें धातुओं को गर्म किया जाता है और उसे घुमावदार आकृतियों के साथ पतली प्लेटों में ढाला जाता है।
- इन्हें कई आयुर्वेद ग्रंथों में औषधीय प्रयोजनों के लिए अनुशंसित किया गया है। इसे 19वीं शताब्दी में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा संरक्षण और प्रोत्साहित किया गया था।
- ये बर्तनों अनेक प्रकार के हैं जिनका उपयोग घरेलू के साथ-साथ सिख गुरुद्वारों की सामुदायिक रसोई (लंगर) में भी किया जाता है।
Incorrect
उत्तर: c)
- जंडियाला गुरु की ठठेरा हस्तकला पंजाब में पीतल और तांबे के बर्तनों के निर्माण की एक पारंपरिक तकनीक है।
- यह एक मौखिक परंपरा है जिसे ठठेरा समुदाय में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में प्रसारित किया जाता है। इसमें धातुओं को गर्म किया जाता है और उसे घुमावदार आकृतियों के साथ पतली प्लेटों में ढाला जाता है।
- इन्हें कई आयुर्वेद ग्रंथों में औषधीय प्रयोजनों के लिए अनुशंसित किया गया है। इसे 19वीं शताब्दी में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा संरक्षण और प्रोत्साहित किया गया था।
- ये बर्तनों अनेक प्रकार के हैं जिनका उपयोग घरेलू के साथ-साथ सिख गुरुद्वारों की सामुदायिक रसोई (लंगर) में भी किया जाता है।
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Question 5 of 5
5. Question
कुतुब मीनार का निर्माण निम्नलिखित में से किसकी स्मृति में किया गया था
Correct
उत्तर: c)
- कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार के नाम के बाद कुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया। इसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा कराया।
- कुतुब मीनार तत्कालीन समय के सूफीवाद के प्रभाव को भी प्रदर्शित करती है।
Incorrect
उत्तर: c)
- कुतुबुद्दीन ऐबक ने एक प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार के नाम के बाद कुतुब मीनार का निर्माण शुरू करवाया। इसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा कराया।
- कुतुब मीनार तत्कालीन समय के सूफीवाद के प्रभाव को भी प्रदर्शित करती है।










