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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. मधुबनी चित्रकारी

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ग्राम पंचायत प्रशासक के रूप में सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति

2. ई-कॉमर्स वेब साइटों के लिए ‘उत्पादक-देश’ की घोषणा अनिवार्य

3. अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. काकरापार परमाणु संयंत्र द्वारा ‘क्रांतिकता’ प्राप्ति

2. लोनार झील के गुलाबी होने का कारण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. वृक्षारोपण अभियान

2. इंडियन बुलफ्रॉग

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

मधुबनी चित्रकारी

(Madhubani Paintings)

संदर्भ:

देश में, COVID-19 संक्रमण की रोकथाम के उपायों में ‘मधुबनी चित्रकारी’ से सजे फेस-मास्क की काफी मांग बढी है।

मधुबनी चित्रकारी के बारे में:

  • मधुबनी का शाब्दिक अर्थ है, ‘मधु का वन’ अर्थात ‘शहद का जंगल’।
  • यह लोक चित्रकारी की एक पुरानी शैली है जिसका उल्लेख प्राचीन भारतीय ग्रंथों, जैसे रामायण आदि में मिलता है।
  • इसकी उत्पत्ति बिहार के मिथिला क्षेत्र से हुई है, अतः इसे ‘मिथिला-चित्रकारी’ भी कहा जाता है।
  • मधुबनी चित्रों में परंपरागत रूप से उंगलियों तथा वृक्षों की छोटी-छोटी टहनियों का उपयोग किया जाता है, हाल के दिनों में इस चित्रकला शैली में माचिस की तीलियों जैसी वस्तुओं का प्रयोग किया जाने लगा है।
  • चित्रकला की यह शैली पारंपरिक रूप से क्षेत्र की महिलाओं द्वारा की जाती है, हालांकि वर्तमान में इसकी मांग को पूरा करने के लिए पुरुष भी चित्रकारी करने लगे हैं।
  • यह चित्रकला, जनजातीय रूपांकनों तथा चमकीले मिट्टी के रंगों के उपयोग के कारण लोकप्रिय हैं।

Madhubani_paintings

 स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

ग्राम पंचायत प्रशासक के रूप में सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति

(Appointment of Government Servants as Gram Panchayat Administrator)

संदर्भ:

हाल ही में, बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा एक अंतरिम आदेश में, महाराष्ट्र में स्थानीय प्राधिकरणों के सरकारी कर्मचारियों को ग्राम पंचायतों के प्रशासक के रूप नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।

विषय के बारे में:

कुछ समय पूर्व, महाराष्ट्र सरकार के राज्य ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी द्वारा जारी किये गए ‘सरकारी प्रस्तावों’ (Government Resolutions– GRs) तथा महाराष्ट्र ग्रामीण पंचायत (संशोधन) अध्यादेश, 2020 के विरोध में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने याचिकाएं दायर की गयी थी। इन याचिकाओं की सुनवाई करने के दौरान उच्च न्यायालय द्वारा एक अंतरिम आदेश पारित किया गया है।

  • ग्राम पंचायतों के प्रशासक के रूप में निजी व्यक्तियों की नियुक्ति से संबंधित ‘सरकारी प्रस्तावों’ (GRs) तथा अध्यादेश को विभिन्न आधारों पर चुनौती दी गई है।
  • याचिकाकर्ताओं ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा 151 में संशोधन करने वाले अध्यादेश को भी चुनौती दी है। इस सशोधन में प्राकृतिक आपदा, महामारी आपातकाल, वित्तीय आपातकाल या प्रशासकीय आपातकाल के कारण राज्य चुनाव आयोग चुनाव (State Election CommissionSEC) द्वारा चुनाव नहीं कराये जाने पर प्रशासकों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है

याचिकाकर्ताओं के तर्क:

  • निजी प्रशासकों की नियुक्तियां कानून द्वारा विधि-सम्मत नहीं है, तथा इस प्रकार की व्यापक नियुक्तियों से स्थानीय शासन पर स्थायी प्रभाव पड़ेगा।
  • याचिकाकर्ताओं का कहना है कि, ग्राम पंचायतों में, राज्य तथा स्थानीय प्राधिकरणों के विभिन्न विभागों के अधिकारी प्रशासक के रूप में नियुक्त किये जा सकते हैं, परन्तु सरकार द्वारा यह निर्णय कुछ राजनीतिक लाभ प्राप्त करने हेतु लिया गया है।

 राज्य सरकार के तर्क:

  • महामारी के कारण राज्य में ग्राम-पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया बाधित हुई है, तथा पंचायतों के परिचालन हेतु प्रशासकों की तत्काल आवश्यकता है।
  • राज्य में ग्राम पंचायतों की काफी अधिक संख्या है, तथा सरकारी कर्मचारियों पर पहले से ही काफी अधिक कार्यभार हैं। अतः, इन्हें प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाना मुश्किल है।

न्यायालय का निर्णय:

  • अंतरिम उपाय के रूप में, अध्यादेश और सरकारी प्रस्तावों के अंतर्गत नियुक्त किया जाने वाले प्रशासक, सरकारी कर्मचारी या स्थानीय प्राधिकरण के अधिकारी होने चाहिए।
  • सरकारी कर्मचारी के उपलब्ध नहीं होने तथा निजी व्यक्ति की नियुक्ति किये जाने पर प्रत्येक आदेश में सरकारी कर्मचारी की अनुपलब्धता के कारणों को दर्ज किया जायेगा।
  • प्रशासकों के लिए, मापदंड के रूप में ’गाँव का निवासी तथा मतदाता सूची में सम्मिलित होना’ अनिवार्य नहीं है।
  • प्रशासक के रूप में नियुक्ति के लिए, स्थानीय प्राधिकारी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

ई-कॉमर्स वेब साइटों के लिए ‘उत्पादक-देश’ की घोषणा अनिवार्य

प्रसंग:

हाल ही में, केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया गया है, कि अमेज़ॅन, फ्लिपकार्ट और स्नैपडील सहित सभी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए इनकी वेबसाईट पर विक्री किये जाने वाले आयातित उत्पादों के ‘उत्पादक-देश’ की जानकारी की सूचना देना अनिवार्य है।

विवाद का विषय

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी, जिसमे कहा गया था, कि यदि ‘ई-कॉमर्स वेबसाइटों द्वारा अपनी वेबसाइटों पर उत्पादों के निर्माणक-देश अथवा उत्पादक-देश का उल्लेख नहीं किये जाने पर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुचेगा।‘ केंद्र सरकार द्वारा इसी याचिका की प्रतिक्रिया में उच्च न्यायालय में शपथपत्र दिया गया था।

इस संदर्भ में विधिक प्रावधान:

  • इस मामले से संबंधित कानून, विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 (Legal Metrology Act, 2009) तथा विधिक मापविज्ञान (डिब्बा बंद वस्तु) नियम, 2011 [Legal Metrology (Packaged Commodities) Rules, 2011] के अंतर्गत अधिनियमित किए गए हैं।
  • अधिनियम तथा नियमों के प्रावधानों को लागू करने का दायित्व राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को सौपा गया है।
  • अधिनियम तथा नियमों के उल्लंघन किये जाने पर राज्यों / संघ शासित प्रदेशों के विधिक मापविज्ञान अधिकारियों द्वारा क़ानून के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 द्वारा भी ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा ‘उत्पादक-देश’ का उल्ल्लेख किये जाने को अनिवार्य किया गया है।

वर्तमान विवाद तथा चुनौतियाँ

अधिकाँश ई-कॉमर्स वेबसाइटों का कहना है, वे बाज़ार-आधारितई-कॉमर्स मॉडल (Marketplace-Based’ E-Commerce Model) के रूप में कार्य करते हैं, जिसमें उनकी भूमिका केवल मध्यस्थ(Intermediary’) की होती है।

  • इन वेब साइट्स के अनुसार, इनके प्लेटफॉर्म पर ‘उत्पादक-देश’ संबधी डेटा-फील्ड उपलब्ध करा दिया गया है, जिसे विक्रेता द्वारा एक नए उत्पादों की सूची जारी करते समय भरा जा सकता है।
  • परंतु, इस सूचना को भरने के लिए अनिवार्य नहीं किया गया है, क्योंकि संबधित क़ानून में ‘भारत-निर्मित’ वस्तुओं के संदर्भ में ‘उत्पादक-देश/ निर्माता-देश/ संयोजक-देश’ संबधी जानकारी देने के लिए अनिवार्यता का प्रावधान नहीं करता है।
  • कई मामलों में, विभिन्न देशों से तैयार माल को किसी अन्य देश में एकत्रित कर पैक अथवा संयोजित (assemble) किया जाता है इसके पश्चात भारत में विक्री हेतु भेजा जाता है।
  • अतः, वर्तमान नियमों के अनुसार, निर्यातक देश को ‘उत्पादक-देश’ नहीं माना जा सकता है, इसके लिए क़ानून में स्पष्ट प्रावधान किये जाने की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC)

(International Union of Railways)

संदर्भ:

हाल ही में, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के महानिदेशक अरुण कुमार को अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ के उपाध्यक्ष के रूप में नामित किया गया है।

अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC) के बारे में:

UIC (यूनियन इंटरनेशनेल देस शिमन्स- Union Internationale Des Chemins) एक फ्रेंच शब्द है जिसका अर्थ अंग्रेजी में इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे है।

अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ (UIC), विभिन्न रेलवे प्रणालियों का एक वैश्विक मंच है। यह रेलवे के अंतर-परिचालन तथा समस्त विश्व में रेलवे के लिए समान तकनीकी मानकों को विकिसित करने के साथ-साथ ‘रेल-कूटनीति’ (Rail Diplomacy) को सशक्त बनाने का कार्य रहा है।

गठन: अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ का गठन 97 वर्ष पूर्व 17 अक्टूबर, 1922 को किया गया था।

उद्देश्य: वैश्विक स्तर पर रेल परिवहन को बढ़ावा देना तथा गतिशीलता एवं सतत विकास संबधी चुनौतियों का सामना करना।

मुख्यालय: इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

सदस्य: वर्तमान में, अंतर्राष्ट्रीय रेलवे संघ में अंतर्गत भारत सहित 144 सदस्य हैं

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

काकरापार परमाणु संयंत्र द्वारा ‘क्रांतिकता’ प्राप्ति

(Kakrapar Atomic Plant achieves Criticality)

संदर्भ: हाल ही में गुजरात स्थित काकरापार परमाणु ऊर्जा संयत्र की तीसरी इकाई (Kakrapar Atomic Power Project: KAPP-3) ने पहली बार क्रांतिकता (Criticality) प्राप्त की है।

इंस्टा फैक्ट्स:

  1. इस संयंत्र में 220 मेगावाट के पहले ‘दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर’ (Pressurized Heavy Water Reactor- PHWR) का निर्माण 6 मई 1993 को आरंभ किया गया था, तथा समान क्षमता की दूसरी इकाई का निर्माण 1 सितंबर, 1995 को शुरू किया गया था। यह दोनों इकाइयाँ कनेडियन (Canadian) तकनीकी पर आधारित हैं।
  2. भारत में, वर्तमान में विकसित की जा रही 700 मेगावाट PHWR की 16 स्वदेशी परियोजनाओं की श्रंखला में काकरापार की तीसरी परमाणु संयत्र ईकाई विकास क्रम में सबसे आगे है।
  3. वर्तमान में, 700 मेगावाट क्षमतायुक्त परमाणु रिएक्टर की चार इकाइयों का निर्माण, काकरापार (KAPP-3 एवं 4) तथा रावतभाटा (RAPS-7 एवं 8) में किया जा रहा है।
  4. ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2020 के अंत तक भारत में कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता 3,68,690 मेगावाट थी, जिसमे परमाणु ऊर्जा का योगदान 2% से कम है।

क्रांतिकता (Criticality) क्या होती है?

किसी परमाणु रिएक्टर द्वारा ‘क्रांतिकता’ (Criticality) प्राप्त करने का आशय उस अवस्था से होता है, जब रिएक्टर के अंदर परमाणु ईधन में एक सतत विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया (Fission Chain Reaction) का आरंभ हो जाता है, इसके अंतर्गत प्रत्येक विखंडन में पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रॉन निर्मुक्त होते है, जो सतत अभिक्रिया को जारी रखते हैं। ‘क्रांतिकता’ विद्युत् उत्पादन की दिशा में पहला चरण होती है।

सरल शब्दों में, क्रांतिकता’ (Criticality) प्राप्त करने पर ऊर्जा संयंत्र, रिएक्टर की सामान्य परिचालन अवस्था में पहुंच जाता है। यह इस बात का संकेत होता है कि अब संयंत्र विद्युत् उत्पादन के लिए तैयार है।

इस उपलब्धि का महत्व

KAPP-3 भारतीय घरेलू असैन्य परमाणु कार्यक्रम के लिये एक बड़ी उपलब्धि है। KAPP-3 भारत की पहली 700 मेगावाट विद्युत इकाई होने के साथ स्वदेशी तकनीक से विकसित सबसे बड़ी दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर’ (PHWR) इकाई है।

दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर’ (PHWR)

दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर’ (Pressurized Heavy Water Reactor- PHWR) वे परमाणु ऊर्जा रिएक्टर होते है, जिनमे सामान्यतः ईधन के रूप में गैर-समृद्ध प्राकृतिक यूरेनियम (Unenriched Natural Uranium) तथा मंदक एवं शीतलक के रूप में भारी जल (Deuterium OxideD2O) का का उपयोग किया जाता है।

  • एक विशिष्ट दबाव वाले पानी रिएक्टर में, भारी जल को शीतलक के रूप में ‘खौलने की सीमा से कम तापमान तक गर्म होने तक’ एक निश्चित दबाव के तहत रखा जाता है।
  • यद्यपि, भारी जल, साधारण जल की तुलना में काफी महंगा होता है, फिर भी यह न्यूट्रॉन उत्पादन प्रक्रिया में आर्थिक रूप से लाभप्रद परिणाम देता है।
  • यह रिएक्टर को ईंधन संवर्धन सुविधाओं के बगैर परिचालन की अनुमति प्रदान करता है, जिससे भारी जल पर व्यय होने वाली लागत पूंजी में कमी होती है तथा रिएक्टर के लिए वैकल्पिक ईधन चक्र के कुशल उपयोग हेतु सक्षम बनाता है।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

लोनार झील के गुलाबी होने का कारण

(Why Lonar Lake turned pink?)

संदर्भ:

इसी वर्ष जून माह में महाराष्ट्र में स्थित लोनार झील का रंग गुलाबी हो गया था। झील के इस रंग-परिवर्तन से वैज्ञानिकों सहित लाखों लोग आश्चर्यचकित हैं।

रंग-परिवर्तन का कारण

  • झील के रंग परिवर्तन का कारण लवणता-अनुकूलित बैक्टीरिया (एक रक्त-वर्णी आद्य जीवाणु, जिसे हेलोफिलिक आर्कीया (halophilic archaea) अथवा हेलोआर्कीया (haloarchaea) कहा जाता है) बताया जा रहा है। इसका संबंध उच्च लवणता तथा उच्च क्षारीयता (pH) से होता है।
  • पानी का गुलाबी रंग स्थायी नहीं था: प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान, सूक्ष्मजीवों के जैव-भार के तलहटी में बैठ जाने पर पानी का रंग पुनः पारदर्शी हो गया।

यह निष्कर्ष ‘अगरकर रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (Agharkar Research Institute -ARI) द्वारा किये गए अध्ययन पर आधारित हैं। ARI, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Science &Technology- DST) के अधीन पुणे स्थित स्वायत्त संस्थान है।

झील के रंग-परिवर्तन संबंधी अन्य कारक:

  • वर्षा की कमी, उच्च तापमान तथा मानवीय हस्तक्षेप की कमी आदि से अधिक मात्रा में वाष्पीकरण होने से झील की लवणता तथा pH मान में काफी वृद्धि हुई।
  • लवणता तथा pH मान में वृद्धि से हेलोफिलिक जीवाणुओं, विशेषकर हेलोआर्कीया (haloarchaea) की वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण हुआ।

 फ्लेमिंगो (Flamingo) संबंधी निष्कर्ष:

परीक्षण के दौरान, शोधकर्ताओं के लिए, झील में प्रवास करने वाले फ्लेमिंगो पक्षियों संबंधी कुछ महत्वपूर्ण निष्कर्ष पता लगे।

  • फ्लेमिंगो पक्षियों का गुलाबी अथवा लालिमायुक्त रंग का कारण कैरोटीनॉयड (carotenoids) समृद्ध भोजन लेने के कारण होता है।
  • यह पक्षी, गुलाबी पिगमेंट्स का उत्पादन करने वाले जीवाणुओं का भक्षण करने है, जिससे इन्हें कैरोटीनॉयड समृद्ध भोजन की प्राप्ति होती है, जो अंततः इनके पंखो का रंग गुलाबी कर देता है।

इंस्टा फैक्ट्स:

  • वर्ष 1823 में, लोनार क्रेटर झील की CJE अलेक्जेंडर नामक एक ब्रिटिश अधिकारी द्वारा एक अद्वितीय भौगोलिक स्थल के रूप में पहचान की गई थी।
  • यह महाराष्ट्र के लोनार में स्थित एक क्रेटर झील (Crater-Lake) है।
  • इसका निर्माण प्लीस्टोसिन काल (Pleistocene Epoch) में उल्कापिंड के गिरने से हुआ माना जाता है।
  • यह बेसाल्टिक चट्टानों से निर्मित है।
  • इसका व्यास 1.85 किमी. तथा गहराई 500 फीट है।
  • लोनार क्रेटर को वर्ष 1979 में एक भू-विरासत स्थल का दर्जा प्रदान किया गया था।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


वृक्षारोपण अभियान

  • कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है
  • इस व्यापक वृक्षारोपण अभियान में सभी कोयला / लिग्नाइट PSU को सम्मिलित किया गया है।
  • इसके अंतर्गत कोयला / लिग्नाइट पीएसयू की खदानों, कॉलोनियों और अन्य उपयुक्त इलाकों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा।

इंडियन बुलफ्रॉग

(Indian Bullfrog)

  • वैज्ञानिक नाम: ‘होप्लाबत्राचुस टाइगरीनस’ (Hoplobatrachus Tigerinus)।
  • IUCN स्थिति: कम चिंताजनक (Least Concern) की श्रेणी में सूचीबद्ध।
  • वास स्थान: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया।
  • यह भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला सबसे बड़ा मेंढक है।
  • मानसून के मौसम में इनका प्रजनन काल शुरू होता है, इस समय ये अपने रंग को परिवर्तित कर लेते हैं।
  • यह ज़ोरदार टर्र-टर्र (croaking) की आवाज से मादा को आकर्षित करता है, परन्तु इसी के साथ शिकारियों को भी इसकी स्थिति का पता चल जाता है।
  • इसे भारतीय वन्यजीव अधिनियम, 1972 अनुसूची-IV में सूचीबद्ध किया गया है।

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नोट: 24 और 25 जुलाई के करंट अफेयर्स शीघ्र ही अपलोड किए जाएंगे।


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