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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. ज्योतिराव फुले

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ क्या है एवं किस प्रकार कार्य करती है?

2. राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. मेगा फूड पार्क

2. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ChAdOx1 Covid-19 वैक्सीन

3. RAISE पहल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बाथिनोमस रक्सासा

2. मनोदर्पण (Manodarpan)

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

ज्योतिराव फुले

संदर्भ:

हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘महात्मा ज्योतिराव फुले ऋण माफी योजना’ के तहत कुल पात्र किसानों में से 83% किसानों का ऋण माफ कर दिया है। इस योजना के तहत 17,646 करोड़ रु. का ऋण माफ़ किया गया है।

योजना के प्रमुख बिंदु:

  • महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘महात्मा ज्योतिराव फुले ऋण माफी योजना’ की घोषणा दिसंबर 2019 में की गयी थी।
  • इस योजना का उद्देश्य किसानों के 2 लाख रुपये तक के फसली ऋण को माफ़ करना था।
  • ऋण माफी की अवधि: इस ऋण के लिए 1 अप्रैल, 2015 से 31 मार्च, 2019 के मध्य लिया गया हो तथा जिसे 30 सितंबर, 2019 तक चुकाया नहीं गया है।

महात्मा ज्योतिराव फुले के बारे में:

  • इनका जन्म वर्ष 1827 में महाराष्ट्र के सतारा जिले हुआ था।
  • फुले को महात्मा की उपाधि महाराष्ट्र के सामाजिक कार्यकर्ता विट्ठलराव कृष्णजी वांडेकर द्वारा 11 मई, 1888 को प्रदान की गयी थी।

 सामाजिक सुधार और महत्वपूर्ण योगदान

  1. महात्मा ज्योतिराव फुले का कार्य मुख्य रूप से अस्पृश्यता और जाति व्यवस्था का उन्मूलन, महिलाओं की मुक्ति और सशक्तिकरण, हिंदू पारिवारिक जीवन में सुधार से संबंधित है।
  2. इने अपनी पत्नी, सावित्रीबाई फुले के साथ, भारत में महिलाओं की शिक्षा का अग्र-दूत माना जाता है।
  3. यह दंपति पुणे, महाराष्ट्र में लड़कियों के लिए अगस्त 1848 में भारत का पहला स्वदेशी स्कूल खोलने वाले पहले भारतीय थे।
  4. इसके बाद फुले दंपति ने ‘महार और मंग’ जैसी अछूत जातियों के बच्चों के लिए स्कूल आरंभ किए।
  5. वर्ष 1863 में, ज्योतिबा फुले ने गर्भवती ब्राह्मण विधवाओं के लिए सुरक्षित प्रसव हेतु एक ‘गृह’ का आरंभ किया।
  6. उन्होंने शिशुहत्या से बचाव के लिए एक अनाथालय खोला। इस संबंध में, उन्हें दुर्भाग्यशाली बच्चों के लिए अनाथालय शुरू करने वाला पहला हिंदू माना जाता है।
  7. वर्ष 1868 में, ज्योतिराव ने अपने घर के बाहर एक सामूहिक स्नानागार का निर्माण करने का फैसला किया, जिससे उनका सभी मनुष्यों के प्रति अपनत्व की भावना प्रदर्शित होती है, इसके साथ ही सभी जातियों के सदस्यों के साथ भोजन करने की शुरुआत की।
  8. वर्ष 1873 में, फुले ने दलित वर्गों के अधिकारों हेतु, जाति व्यवस्था की निंदा करने तथा तर्कसंगत विचारधारा का प्रसार करने के लिए ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की।

उनकी प्रसिद्ध रचनाएँ:

तृतीय रत्न (1855), गुलामगिरि (1873), शेतकरायचा आसुद, या कल्टीवेटर व्हिपकॉर्ड (1881), सत्यशोधक समाजोत्कल मंगलाष्टक सर्व पूजा-विधि (1887)।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. महात्मा फुले की महत्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ।
  2. उन्हें फुले की उपाधि किसने दी?
  3. सत्यशोधक समाज के उद्देश्य।
  4. किस राज्य ने ज्योतिराव फुले पर एक योजना शुरू की है और यह किससे संबंधित है?
  5. सावित्रीबाई फुले का उल्लेखनीय योगदान।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ क्या है एवं किस प्रकार कार्य करती है?

(What is plea bargaining and how does it work?)

संदर्भ:

हाल ही में, तबलीगी जमात के कई विदेशी सदस्यों को ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ (Plea Bargaining) के माध्यम से न्यायायिक मामलों से रिहाई प्रदान की गयी।

‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ क्या है?

  1. इसके अंतर्गत, किसी आपराधिक मामले में आरोपित व्यक्ति, अभियोजन पक्ष से सजा कम करने के लिए समझौता करता है। इसमें आरोपित व्यक्ति कम-गंभीर प्रकृति के अपराध के लिए दोषी स्वीकार करने पर, क़ानून द्वारा दिए जाने वाले दंड की मांग करता है।
  2. यह मुख्य रूप से अभियुक्त और अभियोजक के बीच मामले की सुनवाई से पूर्व समझौता किया जाता है। इस प्रकार के समझौतों में आरोप कम करने अथवा सजा कम करने के लिए सौदेबाजी की जाती है।

 भारत में ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ का आरंभ

  • भारत में ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ (Plea Bargaining) को वर्ष 2006 में, दाण्डिक प्रक्रिया सहिंता (CrPC) में किये गए संशोधन के पश्चात लागू किया गया था।
  • इसके लिए दाण्डिक प्रक्रिया सहिंता के अध्याय XXI-A के अंतर्गत धारा 265A से लेकर धारा 265L तक में संशोधन किये गए।

‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ की प्रक्रिया

भारत में, ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ प्रक्रिया केवल अभियुक्त द्वारा शुरू की जा सकती है;

  • इसके लिए, अभियुक्त न्यायालय में ‘सौदेबाजी’ का लाभ प्रदान करने के लिए आवेदन करता है।
  • इसमें आवेदक यह घोषित करता है कि, यह उसकी स्वैच्छिक प्राथमिकता है तथा वह अपराध के लिए क़ानून द्वारा दिए जाने वाले दंड की सीमा तथा प्रकृति को समझाता है।
  • इसके पश्चात, न्यायालय द्वारा, अभियोजक तथा शिकायतकर्ता अथवा पीड़ित, को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया जाता है ।
  • इस प्रकार के आवेदन की स्वैच्छिक प्रकृति को एक न्यायाधीश द्वारा कैमरे की उपस्थिति में जांच करना आवश्यक होता है, इस प्रक्रिया में दूसरे पक्ष की मौजूदगी नहीं होती है।
  • इसके पश्चात्, न्यायालय अभियोजक, जांच अधिकारी और पीड़ित को “मामले के संतोषजनक निपटान” करने हेतु बैठक आयोजित करने की अनुमति प्रदान करता है।
  • इस समझौते के परिणाम में अभियुक्त द्वारा पीड़ित को क्षतिपूर्ति तथा अन्य खर्चों का भुगतान करना सम्मिलित हो सकता है।
  • एक बार आपसी संतुष्टि हो जाने के बाद, न्यायलय, सभी पक्षों और पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक रिपोर्ट के माध्यम से समझौते को अंतिम रूप प्रदान कर देता है।
  • इसके अंत में, आरोपी को अपराध के लिए न्यूनतम निर्धारित कारावास की आधी अवधि के लिए जेल की सजा हो सकती है। अपराध के लिए न्यूनतम अवधि निर्धारित नहीं होने पर, कानून द्वारा निर्धारित अधिकतम सजा की एक-चौथाई सजा आरोपी को भुगतनी होगी।

किन मामलों में ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ प्रक्रिया की अनुमति प्रदान की जाती है:

  • दाण्डिक प्रक्रिया सहिंता के अध्याय XXI-A के अंतर्गत दिए गए प्रावधानों के अनुसार, कोई आरोपी व्यक्ति, जिसने मृत्युदंड, आजीवन कारावास, अथवा सात साल से अधिक की सजा प्रदान किये जाने अपराध नही किये हों, इस योजना का लाभ उठा सकता है।
  • यह अदालत द्वारा संज्ञान में ली गयी निजी शिकायतों पर भी लागू होता है।
  • देश की “सामाजिक-आर्थिक स्थिति” को प्रभावित करने वाले अपराध करने वाले, तथा महिलाओं और 14 वर्ष से कम आयु के बच्चे के विरुद्ध अपराध करने वाले आरोपियों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाता है।

‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ योजना की उपपत्ति

आपराधिक न्याय प्रणाली के सुधारों पर गठित जस्टिस मलिमथ कमेटी ने ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ के संदर्भ में विधि आयोग द्वारा की गयी विभिन्न सिफारिशों का समर्थन किया है।

योजना का लाभ

  1. शीघ्र सुनवाई की सुनिश्चितता।
  2. आपराधिक मामलों के परिणाम पर अनिश्चितता की समाप्ति।
  3. मुकदमेबाजी की लागत तथा चिंता से मुक्ति।
  4. दोषसिद्धि दरों पर प्रभाव।
  5. अपराधियों के लिए जीवन में एक नई शुरुआत करने में सहायक।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. न्यायमूर्ति मलीमथ समिति किससे संबंधित है?
  2. भारत में ‘अपराध दण्ड सौदेबाजी’ योजना कब शुरू की गई थी?
  3. क्या यह दाण्डिक प्रक्रिया सहिंता (CrPC) के तहत आता है?
  4. समवर्ती सूची के अंतर्गत महत्वपूर्ण विषय।

मेंस लिंक:

अपराध दण्ड सौदेबाजी’ क्या है? यह किस प्रकार कार्य करती करता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA)

(National Financial Reporting Authority)

संदर्भ:

हाल ही में, लेखा परीक्षा नियामक, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (National Financial Reporting AuthorityNFRA) द्वारा, भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु के प्रोफेसर आर नारायणस्वामी की अध्यक्षता में एक तकनीकी सलाहकार समिति (Technical Advisory CommitteeTAC) का गठन किया गया है।

तकनीकी सलाहकार समिति की संरचना:

तकनीकी सलाहकार समिति (TAC) में अध्यक्ष सहित सात सदस्य होंगे।

TAC के कार्य:

  • लेखा मानकों तथा लेखापरीक्षण मानकों के ड्राफ्ट से संबंधित मुद्दों पर NFRA की कार्यकारी शाखा को सहायता एवं सलाह प्रदान करना।
  • उपयोगकर्ताओं, वित्तीय विवरण को तैयार करने वालों तथा लेखा परीक्षकों के दृष्टिकोण से इनपुट प्रदान करना।

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के बारे में:

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) का गठन भारत सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 132 (1) के तहत 01 अक्तूबर, 2018 को किया गया था।

आवश्यकता

इसका उद्देश्‍य स्‍वतंत्र विनियामकों को स्‍थापित करना और लेखापरीक्षा मानकों को लागू करना, लेखापरीक्षा की गुणवत्ता व लेखापरीक्षा फर्मों की स्‍वतंत्रता को सुदृढ़ बनाना है। अतएव, कंपनियों की वित्‍तीय स्‍थिति के प्रकटीकरण में निवेशक और सार्वजनिक तंत्र का विश्‍वास बढ़ाना है।

NFRA की संरचना:

कंपनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण में एक अध्यक्ष तथा अधिकतम 15 सदस्य होंगे। अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जायेगी।

प्रकार्य और कर्त्तव्य:

  1. केंद्रीय सरकार द्वारा अऩुमोदन के लिए लेखाकर्म और लेखापरीक्षा नीतियां तथा कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले मानकों की अनुशंसा करना;
  2. लेखाकर्म मानकों और लेखापरीक्षा मानकों सहित अनुपालन वाले की निगरानी और लागू करना;
  3. ऐसे मानकों सहित अनुपालन सुनिश्चित करने वाले व्यवसायों की सेवा की गुणवत्ता का पर्यवेक्षण करना;
  4. उक्त प्रकार्यों और कर्त्तव्यों के लिए आवश्यक अथवा अनुषंगी ऐसे अऩ्य प्रकार्य और कर्त्तव्यों का निष्पादन करना।

शक्तियां

  • NFRA यह सूचीबद्ध कंपनियों तथा गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों की जांच कर सकता है जिनकी जिनकी प्रदत्त पूंजी पांच सौ करोड़ रुपये से कम न हो अथवा वार्षिक कारोबार एक हजार करोड़ रुपये से कम न हो।
  • यह किसी नियत वर्ग के वाणिज्यिक संस्थान अथवा किसी व्यक्ति के संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) के सदस्यों द्वारा किए गए पेशेवर कदाचार की जांच कर सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NFRA का गठन किस प्रावधान के तहत किया गया है?
  2. ICAI के बारे में।
  3. NFRA की संरचना।
  4. कंपनी अधिनियम 2013- प्रमुख प्रावधान।

मेंस लिंक:

NFRA के प्रमुख कार्यों पर चर्चा करें और इसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

मेगा फूड पार्क

(Mega Food Park)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री द्वारा मिजोरम में ज़ोरम मेगा फूड पार्क का आरंभ किया गया, यह मेगा फूड पार्क 5000 लोगों को रोजगार देगा और लगभग 25000 किसानों को लाभान्वित करेगा।

यह मिजोरम राज्य में संचालित पहला मेगा फूड पार्क है।

मेगा फूड पार्क योजना के बारे में:

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा, वर्ष 2008 में सम्पूर्ण देश में ‘मेगा फूड पार्क’ योजना का आरंभ किया गया था।

  • मेगा फूड पार्क स्कीम का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं तथा खुदरा बिक्रेताओं को एक साथ लाते हुए कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराना है।
  • इन मेगा फूड पार्कों के अंतर्गत मुख्यतः कृषि-उत्पाद कीमतों में वृद्धि करने, खाद्य पदार्थों की बर्बादी रोकने, किसानों की आय में वृधि तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर उपलब्ध करने पर ज़ोर दिया जाता है।

वित्त पोषण: कुल परियोजना लागत में केवल 50% योगदान के साथ न्यूनतम 50 एकड़ भूमि में मेगा फ़ूड पार्क स्थापित करने के लिए 50 करोड़ रुपये का अधिकतम अनुदान दिया जाता है।

परिचालन:

  • मेगा फूड पार्क स्कीम “क्लस्टर” दृष्टिकोण पर आधारित है।
  • इसके अंतर्गत, पार्कों में सुस्थापित आपूर्ति श्रृंखला के साथ उपलब्ध औद्योगिक भूखंडों में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों की स्थापना के लिए सुपरिभाषित कृषि/बागवानी जोन में अत्याधुनिक सहायक अवसंरचना के सृजन की परिकल्पना की गई है।

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कार्यान्वयन:

मेगा फूड पार्क परियोजना का कार्यान्वयन एक ‘विशेष प्रयोजन उपाय’ (Special Purpose Vehicle– SPV)  द्वारा किया जाता है, जो कि कंपनी अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत कॉरपोरेट निकाय होते है।

  • राज्य सरकार, राज्य सरकार की संस्थाओं एवं सहकारिता परिषदों को मेगा फूड पार्क परियोजना के कार्यान्वयन हेतु अलग से SPV बनाने की आवश्यकता नहीं होती है ।
  • योजना दिशानिर्देशों की शर्तों को पूरा करने के अधीन SPV को निधियां जारी की जाती हैं ।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में कार्यात्मक मेगा फूड पार्क।
  2. पहला मेगा फूड पार्क।
  3. यह योजना किस मंत्रालय के तहत संचालित होती है।
  4. मिजोरम का पहला मेगा फूड पार्क।
  5. योजना के तहत अनुदान।

मेंस लिंक:

मेगा फूड पार्क योजना के महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ChAdOx1 Covid-19 वैक्सीन

(What is Oxford university’s ChAdOx1 Covid-19 vaccine?)

हाल ही में, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तथा एक ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी ‘एस्ट्राज़ेनेका (AstraZeneca) द्वारा संयुक्त रूप से COVID-19 महामारी के लिए ChAdOx1 वैक्सीन विकसित की गयी है।

इस वैक्सीन ने प्रारंभिक चरण के नैदानिक ​​परीक्षणों में सुरक्षित तथा प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को बढ़ाने वाले परिणाम दिए है।

वैक्सीन का निर्माण

यह वैक्‍सीन ‘नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्‍टर वैक्सीन’ (Non-Replicating Viral Vector Vaccines) श्रेणी से संबंधित है।

यह वैक्सीन आनुवंशिक रूप से डिजायन किये गए वायरस से निर्मित की गयी है, इस वायरस के संक्रमण से चिंपांज़ी (Chimpanzees) में सर्दी-जुखाम हो जाता है।

वैज्ञानिकों ने वैक्सीन में कोरोना वायरस के ‘स्पाइक प्रोटीन’ के आनुवांशिक निर्देशों को स्थानांतरित कर दिया, यह स्पाइक प्रोटीन मानव कोशिकाओं को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रकार, यह वैक्सीन कोरोनावायरस से मिलती-जुलती प्रतीत होती है, जिससे व्यक्ति का प्रतिरक्षा तंत्र इसका प्रतिरोध करने के लिए प्रेरित होता है।

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यह वैक्सीन किस प्रकार कार्य करती है?

  • आनुवांशिक रूप से संशोधित वायरस को ‘एडेनोवायरस’ (Adenovirus) नाम दिया गया है, यह वायरस मानव में अपनी प्रतिकृति नहीं बना सकता है। यह एडेनोवायरस मानव-कोशिकाओं में प्रवेश करके केवल स्पाइक प्रोटीन के आनुवांशिक कोड संचारित कर देता है।
  • मानव-शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र ‘स्पाइक प्रोटीन’ को हानिकारक बाह्य पदार्थ समझता है, तथा इसके प्रतिरोध के लिए एंटीबॉडी का निर्माण शुरू कर देता है।
  • प्रतिरोधक क्षमता के विकसित हो जाने पर, जब असली कोरोनावायरस संक्रमित करने का प्रयास करेगा, तब एंटीबॉडी इस पर आक्रमण कर इसको नष्ट कर देंगी।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

किसी व्यक्ति के Covid-19 (SARS-CoV-2) वायरस से संक्रमित होने पर यह शरीर में आसानी से फ़ैल जाता है, इसका कारण वायरस की ऊपरी सतह पर कीलों जैसी ‘स्पाइक्स’ होती है। इन संरचनाओं को ‘स्पाइक प्रोटीन’ कहा जाता है, तथा यह विषाणु को कोशिकाओं में प्रवेश करने और इसे ‘गुणित’ (multiply) करने में सक्षम बनाती हैं।

आगे का घटनाक्रम

वैश्विक स्तर पर, ऑक्सफोर्ड तथा एस्ट्राज़ेनेका, ब्राजील में तीसरे चरण का परीक्षण आरम्भ कर चुके है। इन परीक्षणों को 5,000 स्वेच्छाकर्मियों पर किया जा रहा है। शीघ्र ही, दक्षिण अफ्रीका में भी इसी प्रकार के परीक्षण शुरू किये जाने की उम्मीद है।

टीकों का प्रकार:

निष्क्रिय (Inactivated): इस प्रकार के टीकों को नष्ट किये जा चुके Covid-19 वायरस के कणों का उपयोग करके निर्मित किया जाता है। इन कणों की एक विशेष डोज़ रोगी को दी जाती है, इससे शरीर में मृत वायरस से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण होता है और प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

नॉन-रेप्लिकेटिंग वायरल वेक्‍टर वैक्सीन’: इसमें, Covid-19 स्पाइक प्रोटीन को कोशिकाओं में संचारित करने के लिए किसी अन्य वायरस के आनुवंशिक रूप से संशोधित प्रकार का उपयोग किया जाता है।

प्रोटीन सबयूनिट (Protein subunit): इस वैक्सीन में एक लक्षित तरीके से प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए वायरस के एक भाग का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में वायरस के ‘स्पाइक प्रोटीन’ वाले भाग को लक्षित किया जाता है।

आरएनए (RNA): इस प्रकार की वैक्सीन में संदेशवाहक RNA (mRNA) अणुओं का उपयोग करते हैं, यह कोशिकाओं के विशिष्ट प्रोटीन का निर्माण करने के निर्देश देते है। कोरोनावायरस मामले में mRNA, को ‘स्पाइक प्रोटीन’ निर्मित करने का निर्देश देने के लिए कूटबद्ध (coded) किया जाता है।

डीएनए (DNA): ये टीके आनुवंशिक रूप से संशोधित डीएनए अणुओं का उपयोग करते हैं। इन संशोधित डीएनए अणुओं को प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए पुनः से एंटीजन से कूटबद्ध किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. SARS-CoV-2 शरीर में किस प्रकार फैलता है?
  2. T- कोशिकाएँ क्या होती हैं?
  3. वैक्सीन के प्रकार।
  4. ChAdOx1 Covid-19 वैक्सीन किस प्रकार निर्मित की गयी है?
  5. वैक्सीन किस प्रकार कार्य करती हैं?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

RAISE पहल

(RAISE initiative)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा इंडोर एयर क्वालिटी फॉर सेफ्टी एंड एफिशिएंसी में सुधार के लिए रेट्रोफिट एयर कंडीशनिंग’ (Retrofit of Air-conditioning to improve Indoor Air Quality for Safety and Efficiency- RAISE) राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया है।

यह ‘एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज़ लिमिटेड (EESL) तथा ‘यू.एस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डवलपमेंट’ (USAID) के मैत्री (MAITREE) कार्यक्रम  की एक संयुक्त पहल है।

कार्यक्रम की आवश्यकता और महत्व:

  • काफी समय से भारत में हवा की खराब गुणवत्ता चिंता का विषय बनी हुई है और विशेष रूप से कोरोना संक्रमण के समय में इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है।
  • कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कार्यस्थलों के भीतर वायु गुणवत्ता बनाए रखना जरुरी है।
  • RAISE पहल के माध्यम से पूरे देश में कार्यक्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता को सुधार कर उसे स्वास्थ्य के लिहाज से हरित और बेहतर बनाया जा सकता है।

ऊर्जा दक्षता के लिए बाजार एकीकरण तथा सुधार (MAITREE) कार्यक्रम:

ऊर्जा दक्षता के लिए बाजार एकीकरण तथा सुधार (Market Integration and Transformation Program for Energy Efficiency- MAITREE) कार्यक्रम भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय तथा ‘यू.एस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डवलपमेंट’ (USAID) के मध्य और USAID के बीच अमेरिका-भारत द्विपक्षीय साझेदारी का एक हिस्सा है।

इसका उद्देश्य इमारतों के भीतर एक मानक पद्धति के रूप में लागत प्रभावी ऊर्जा दक्षता को अपनाने में तेज़ी लाना तथा विशेष रूप से इमारतों के शीतलन पर ध्यान केंद्रित करना है।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बाथिनोमस रक्सासा

(Bathynomus Raksasa)

हाल ही में शोधकर्ताओं द्वारा हिंद महासागर में  एक नई प्रजाति  के जीव की खोज की गयी है। शोधकर्ताओं ने इस ‘सुपरजाएंट’ (Supergiant) जीव को समुद्री कॉकरोच (Sea Cockroach ) नाम दिया है।

यह पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशिया में पश्चिमी जावा के दक्षिणी तट के नजदीक) खोजी गयी पहली सुपरजाएंट आइसोपॉड प्रजाति है।

  • बाथिनोमस रक्सासा के 14 पैर होते हैं परन्तु यह जीव इन पैरों का उपयोग भोजन की तलाश में महासागरों के तल पर रेंगने के लिये करते हैं
  • इसकी लंबाई लगभग 50 सेंटीमीटर (1.6 फीट) है, जो आइसोपोड्स के हिसाब से काफी अधिक है। आम तौर पर, आइसोपोड्स की अधिकतम लम्बाई 33 सेमी (एक फीट से कुछ अधिक) होती है।
  • 50 सेमी की लम्बाई तक पहुंचने वाले आइसोपोड्स को सुपरजाएंट’ कहा जाता है।
  • यह विशाल आइसोपोड्स केकड़ों, झींगा मछलियों और श्रिम्प (दस पैरों वाले जंतुओं के वर्ग) से संबंधित हैं, तथा प्रशांत, अटलांटिक और भारतीय महासागरों के ठंडे जल में गहराई पर पाए जाते हैं।

आइसोपॉड प्रजाति का एकमात्र सदस्य जो आकार में ‘बाथिनोमस रक्सासा’ से बड़ा होता है, वह ‘बाथिनोमस गिगेंटियस’ (Bathynomus Giganteus) है जो पश्चिमी अटलांटिक महासागर के गहरे जल में पाया जाता है।

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मनोदर्पण (Manodarpan)

मनोदर्पण पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरू किया गया है।

  • यह पहल छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को मानसिक-सामाजिक सहायता प्रदान करेगी और मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण से संबंधित उनके मुद्दों को संबोधित करेगी।
  • इस पहल को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया है।

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