Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 July

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-I

1. हिमालय की तलहटी में नए भ्रंशो की खोज

 

सामान्य अध्ययन-II

1. विटामिन- डी और इसका महत्व

2. ‘मालाबार युद्धाभ्यास’ को ‘चतुष्पक्षीय’ बनाने का सही निर्णय

3. पृथक ‘यातना-रोधी’ कानून

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सौर ऑर्बिटर

2. असम में बाढ़

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL)

2. मामला मृत्यु दर (CFR)

3. गोधन न्याय योजना

4. उर्ध्वाधर संचरित संक्रमण क्या होता है?

5. चर्चित स्थल- मगुरी मोटापुंग वेटलैंड:

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

हिमालय की तलहटी में नए भ्रंशो की खोज

(Previously unknown faults at the foot of the Himalaya discovered)

संदर्भ:

हाल ही में, एक तेल एवं गैस अन्वेषण कंपनी (Oil And Gas Exploration Company) की सहायता से भू-वैज्ञानिकों द्वारा हिमालय की तलहटी में ‘भ्रंशो’ (Faults) की एक श्रंखला की खोज की गयी है।

यह भ्रंश-श्रंखला नेपाल के दक्षिणपूर्वी क्षेत्र में स्थित है तथा इसके कारण इस घनी आबादी वाले देश में भूकंप आने की प्रबल संभावना है।

इस खोज का महत्व:

भ्रंशो के प्रसार से ज्ञात होता है, कि पूर्व अनुमानित स्थिति से हिमालय का विरूपण लगभग 40 किलोमीटर आगे दक्षिण की ओर हो चुका है।

यह खोज, हिमालय की संरचना तथा इस क्षेत्र में आने वाले भूकंपों को पूर्णतयः समझने के लिए हिमालय की सतह तथा आस-पास की भूगार्भिक संरचनाओं के अध्ययन की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

भ्रंश-श्रंखला का भारत पर प्रभाव

  • इस नई खोजी गई भ्रंश-श्रंखला का भारत की सीमा में विस्तार प्रतीत नहीं होता है, परंतु, इससे उत्पन्न होने वाले भूकंपीय तरंगे सीमा पर स्थित क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं।
  • हालांकि, इसी प्रकार के अन्य भ्रंश, हिमालय के दक्षिणी किनारे पर कहीं अन्यत्र भी मौजूद हो सकते हैं, जिनका विस्तार उत्तरी भारत के नीचे हो सकता है।

भ्रंश क्या होते है?

भ्रंश, किसी चट्टान के दो खंडो के मध्य होने वाले विखंडन से उत्पन्न भू-संरचना अथवा विखंडन मंडल (fracture zone) होता है।

  • भ्रंश के सहारे शिला-खंड, एक दूसरे के सापेक्ष गति करते हैं।
  • यह गति कई प्रकार से हो सकती है, शिला-खण्डों के मध्य गति तीव्र होने पर भूकंपीय घटनाएं होती है तथा धीमी गति होने पर विसर्पण की स्थिति होती है।
  • हाल ही में, हिमालय की तलहटी में, अब तक अज्ञात, नए भ्रंशों खोजे गए है।

भ्रंश, पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों के संचरण से संबंधित होते हैं। एक विस्तृत भ्रंश, दो प्लेटों के बीच की सीमा को चिह्नित करता है।

world_fault_line_map

भ्रंशों के प्रकार:

मुख्य रूप से तीन प्रकार के भ्रंश पाए जाते है:

  1. नतिलंब-सर्पण भ्रंश (Strike-slip): इस प्रकार के भ्रंशों में चट्टानें एक-दूसरे के सापेक्ष क्षैतिज रूप से गति करती हैं, तथा इसमें उर्ध्वाधर संचरण न के बराबर होता है। सैन एंड्रियास (San Andreas) तथा अनातोलियन (Anatolian) भ्रंश इसके उदाहरण हैं।
  2. सामान्य भ्रंश (Normal fault): इस प्रकार के भ्रंशों में भू-पर्पटी के शिलाखंड विखंडित होकर विपरीत दिशाओं में संचरण करते है, इसके परिणामस्वरूप दरार-घाटी अथवा भ्रंश-घाटी का निर्माण होता है।
  3. क्षेप (उत्क्रम) भ्रंश [Thrust (reverse) fault]: इस प्रकार के भ्रंश में भू-पर्पटी का एक खंड विखंडित होकर दूसरे खंड के ऊपर क्षेपित हो जाता है। यह भ्रंश, सामान्यतः संघट्ट मंडलों (Collisions Zones) में पाए जाते है। इन स्थानों पर टेक्टोनिक प्लेटें परस्पर विपरीत दिशाओं से आकर टकराती है, तथा उत्क्षेपित होकर पर्वत निर्माण करती है। हिमालय और रॉकी पर्वत का उत्थान विवर्तनिक प्लेटों की इस प्रकार के संचरण का उदहारण है।

नतिलंब-सर्पण भ्रंश, सामान्यतः पृथ्वी की सतह के लंबवत होते है, जबकि, सामान्य तथा उत्क्रम भ्रंश पृथ्वी-सतह के सापेक्ष एक कोण बनाते है

serface_earth

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भ्रंश क्या हैं? प्रकार?
  2. एक अधिकेन्द्र (epicentre) क्या होता है?
  3. प्रमुख प्लेटों के नाम बताइए
  4. उत्क्षेपित तथा निमज्जित तट
  5. सर्वाधिक विनाशकारी भूकंपीय तरंगें

मेंस लिंक:

हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय खतरों के कारणों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

विटामिन- डी और इसका महत्व

संदर्भ:

वर्तमान में, COVID-19 महामारी के दौरान, वैज्ञानिकों के मध्य विटामिन-डी के महत्व पर गंभीर चर्चाएँ हो रही हैं।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

विटामिन-डी किस प्रकार निर्मित होता है?

विटामिन-डी का निर्माण, सौर प्रकाश (अथवा, कृत्रिम प्रकाश, विशेष रूप से 190-400 नैनो मीटर तरंग दैर्ध्य का पराबैंगनी क्षेत्र में) के त्वचा पर पड़ने और कोलेस्ट्रॉल-आधारित अणुओं की रासायनिक अभिक्रिया के आरंभ होने पर होता है। इस अभिक्रिया में कोलेस्ट्रॉल-आधारित अणुओं का यकृत (liver) में कैल्सीडियोल के रूप में तथा वृक्क (kidney) में कैल्सीट्रियोल के रूप में परिवर्तन हो जाता है।

विटामिन डी, वसा में घुलनशील विटामिन होती है, अर्थात, यह वसा और तेलों में घुल जाती है और इसे शरीर में लंबे समय तक संग्रहीत किया जा सकता है।

 मानव शरीर में विटामिन-डी की भूमिका:

विटामिन-डी को हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा को संतुलित करने के लिए जाना जाता है, इसके साथ ही यह कोशिका झिल्ली को सुरक्षित रखने वाली प्रक्रिया को उत्प्रेरित करती है, उतकों की सूजन तथा ऊतकों द्वारा फाइबर निर्माण को रोकती है।

विटामिन-डी ‘अस्थि-सुषिरता’ (ऑस्टियोपोरोसिस- osteoporosis), जिसमे हड्डियां गलने लगती है, को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चिंता का कारण:

  1. मधुमेह, उच्च रक्तचाप, निमोनिया, मोटापा तथा धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों में विटामिन डी की कमी होने पर COVID-19 से संक्रमित होने का काफी जोखिम है।
  2. इसकी कमी से श्वांस-नालिका तथा फेफड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

 विटामिन-डी के अनुपूरण (Supplementation) की आवश्यकता:

  1. एक अध्ययन के अनुसार, भारत में सौर-प्रकाश पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है, इसके बाद भी यहाँ आश्चर्यजनक रूप से, शहरी अथवा ग्रामीण, आयु-वर्ग, स्त्री-पुरुष, धनी-निर्धन, आदि सभी वर्गों के लोगों में विटामिन डी की कमी पायी जाती है।
  2. अतः, यह स्पष्ट है कि विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए अधिकांश भारतीयों को इसकी अनुपूरक खुराक दिए जाने की आवश्यकता है।

आगे की राह:

भारत के निवासियों में विटामिन डी की कमी को देखते हुए,  सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाये जाने की आवश्यकता है:

  • सरकार के लिए, स्कूली बच्चों को दिए जा रहे भोजन तथा गरीबों को वितरित की जारी रही खाद्य सामग्री में पोषक तत्वों को सम्मिलित किये जाने हेतु ‘पोषण विशेषज्ञों तथा संस्थानों से परामर्श व सुझाव लेने की आवश्यकता है।
  • अन्य मामलों में, चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श से विटामिन-डी, अन्य विटामिनों तथा कैल्शियम का निःशुल्क वितरण किया जा सकता है।

इन उपायों से. भारत सरकार, अपने देश के गरीब व्यक्तियों में वर्तमान महामारी तथा भविष्य में किसी भी महामारी से लड़ने की क्षमता विकसित कर सकता है।

vitamin_d

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानव शरीर में विटामिन डी का उत्पादन किस प्रकार होता है?
  2. विटामिन डी के कार्य।
  3. विटामिन डी की कमी के लक्षण।
  4. वसा में घुलनशील विटामिन के उदाहरण।
  5. कैल्सिडिओल और कैल्सीट्रियोल किससे संबंधित हैं?

मेंस लिंक:

विटामिन डी की भूमिका और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

मालाबार युद्धाभ्यासको ‘चतुष्पक्षीय’ बनाने का सही निर्णय

(Make the right call on ‘Malabar’ going Quad)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के रक्षा मंत्रालय द्वारा, इस वर्ष के अंत में, बंगाल की खाड़ी में होने वाले ‘जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका’ के साथ होने वाले त्रिपक्षीय ‘मालाबार नौसेना अभ्यास’ में ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करने के विषय पर चर्चा की गयी।

हालांकि, अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, परन्तु ऑस्ट्रेलिया को नौसेना अभ्यास में सम्मिलित किये जाने के संकेत मिले हैं। वर्ष 2007 के बाद पहली बार ‘क्वाड समूह’ (Quad group) के सभी सदस्य राष्ट्र संयुक्त सैन्याभ्यास में भाग लेंगे, यह प्रत्यक्ष रूप से चीन के विरुद्ध शक्ति प्रदर्शन होगा।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

‘क्वाड समूह’ के प्रति चीन की आशंकाएं

  1. बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है।
  2. चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है।
  3. इसके अतिरिक्त, वर्तमान में भारत तथा चीन संबंध तनावपूर्ण हैं, ऐसे में ‘मालाबार युद्धाभ्यास’ में ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करना, चीन के विरुद्ध भारत का एक कदम माना जा सकता है।

भारत के लिए चुनौतियां:

लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ, हाल ही में, हुई मुठभेड़ के पश्चात, कई भारतीय विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह भारत के लिए समुद्री क्षेत्र में अपनी पारंपरिक आत्मरक्षात्मक नीति को छोड़ देने का उचित्त समय है।

भारतीय यथार्थवादी, हिंद महासागर में चीन की चालों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ गठबंधन का समर्थन करते हैं।

हालांकि, ‘चीन पर अधिक दबाव डालना’ तथा ‘हिंद महासागर’ एवं ‘दक्षिण प्रशांत क्षेत्र’ में अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना, भारत के लिए भारी भी पड़ सकता है।

  1. वर्तमान में, भारत और चीन के मध्य पूर्वी लद्दाख में सीमा पर शांति बहाली के लिए वार्ता जारी है, ऐसे में नई दिल्ली द्वारा मालाबार युद्धाभ्यास में सम्मिलित होने के लिए ऑस्ट्रेलिया को निमंत्रित करना, बीजिंग के लिए विपरीत संकेत भेज सकता है।
  2. यदि चीन प्रत्युत्तर में, पूर्वी हिंद महासागर में अभद्र तरीके से आक्रामक रूख अपनाता है, तो इससे भारत-चीन विवादों में एक नया मोर्चा खुल सकता है।
  3. इसके अतिरिक्त, बिना सामरिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के, अमेरिका और जापान के साथ सहयोग से, हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) में भारतीय नौसेना की निवारक क्षमता (deterrence potential) में सुधार नहीं होगा।
  4. परिचालनात्मक रूप से भी, क्वाड सदस्यों के साथ बहुपक्षीय संबंधो को प्रारंभ करना दिल्ली के लिए असामयिक हो सकता है। पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में यू.एस. और चीन के बीच सामरिक स्थिति उत्तेजनात्मक है, ऐसी परिस्थितियों में, क्वाड सैन्य गठबंधन का उपयोग एशिया-प्रशांत सुरक्षा गातिकी में भारत को सम्मिलित करने के लिए किया जा सकता है।

निष्कर्ष

नई दिल्ली के लिए सामरिक-परिचालन क्षेत्र में अपने निवेश-लाभों को सुनिश्चित किये बिना चतुष्पक्षीय गठबंधन पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए। जो स्थितियां राजनीतिक रूप से समझदारी पूर्ण प्रतीत होती है, वह परिचालन के मामले में अविवेकपूर्ण भी हो सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • चतुष्पक्षीय संगठन मे जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।
  • मालाबार युद्धाभ्यास का आरंभ भारत और अमेरिका के मध्य वर्ष 1992 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुआ था, वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड (Quad)- संरचना और सदस्य
  2. मालाबार युद्धाभ्यास – संरचना और प्रतिभागी
  3. एशिया प्रशांत क्षेत्र तथा भारत-प्रशांत क्षेत्र: भौगोलिक भूगोल
  4. दक्षिण चीन सागर में महत्वपूर्ण द्वीप
  5. हिंद महासागर क्षेत्र में द्वीप तथा विभिन्न चैनल

मेंस लिंक:

मालाबार नौसेना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करना भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

पृथक ‘यातना-रोधी’ कानून

(Why a separate anti-torture law?)

संदर्भ:

कुछ समय पूर्व, तमिलनाडु के सथानकुलम (Sattankulam) शहर में एक पिता-पुत्र को दी गयी कथित यातनाओं (Torture) के मामले ने एक पृथक यातना-रोधी क़ानून की मांग को पुनः चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

इस संदर्भ में यह जांचना आवश्यक है, कि हिरासत में यातना देने संबधी घटनाओं को रोकने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त है अथवा नहीं।

 ‘यातना’ का क्या अर्थ है?

भारतीय दंड संहिता में ‘यातना’ (Torture) को परिभाषित नहीं किया गया है, परंतु, ‘आहत करने’ (Hurt) तथा ‘गंभीर रूप से आहत करने’ (Grievous Hurt) सुस्पष्ट रूप से पारिभाषित किया गया है।

  • यद्यपि, ‘आहत करने’ (Hurt) की परिभाषा में मानसिक यातना (Mental Torture) को सम्मिलित नहीं किया गया है, भारतीय न्यायालयों द्वारा इस परिभाषा में मनौवैज्ञानिक यातना, पर्यावरणीय दबाव, थका देने वाली पूछताछ, तथा धमकाने और डराने वाली विधियों को यातना के दायरे में शामिल किया गया है।
  • स्वेच्छा से चोट पहुंचाने तथा स्वीकारोक्ति कराने के लिए गंभीर रूप से चोट पहुचाने के लिए भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।

हिरासत में यातना संबंधी मामलों में उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय

  • डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामला: इस मामले में न्यायालय द्वारा दिशानिर्देश जारी किए गए, इन दिशा-निर्देशों का गिरफ्तारी और हिरासत के सभी मामलों में पुलिस द्वारा पालन किया जाना चाहिए।
  • नीलाबाती बेहरा बनाम उड़ीसा राज्य मामला: न्यायालय ने सुनिश्चित किया कि राज्य, किसी भी सार्वजनिक कानून में उत्तरदायित्व से नहीं बच सकता है तथा राज्य को क्षतिपूर्ति भुगतान करना होगा।
  • इसी प्रकार, न्यायालय ने कई मामलों में कहा है, कि हिरासत में मौत होने पर दोषी पाए गए पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए।

विभिन्न विधि आयोगों का विचार

  • 262वें विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में, ‘आतंकवाद-संबंधी अपराधों’ के अतिरिक्त अन्य सभी मामलों में मृत्युदंड को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
  • विधि आयोग की 273वीं रिपोर्ट में, ‘यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय एवं अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध संयूक्त राष्ट्र अभिसमय’ (Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman or Degrading Treatment or Punishment- CAT) की संपुष्टि करने की अनुशंसा की गयी।
  • UNCAT पर भारत द्वारा हस्ताक्षरित किया गया थे, परंतु अभी तक इसकी संपुष्टि नहीं की गई है।

अन्य संरक्षोपाय

  1. दाण्डिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure- CrPC) के अंतर्गत, हिरासत में मौत होने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच की जाती है।
  2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा कैमरे की नजर में शव परीक्षण करने के लिए विशिष्ट दिशानिर्देश जारी किये गए हैं।

आगे की राह

सर्वप्रथम, पहले से मौजूद कानूनों को सख्ती से लागू किये जाने की आवश्यकता है।

  • इसके पश्चात, जांच व अभियोजन प्रक्रियों को दुरस्त किया जाना चाहिए।
  • पुलिस को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है। थर्ड-डिग्री विधियों के उपयोग की प्रवृत्ति को वैज्ञानिक पद्धति के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।
  • इस प्रकार, समस्या की जड़ पर प्रहार करके विभिन्न आयोगों द्वारा की गयी सिफारिशों को लागू करने की आवश्यकता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:

UNCAT तथा प्रमुख प्रावधान

  1. ‘यातना और अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार या सजा के विरुद्ध संयूक्त राष्ट्र अभिसमय’ (UN Convention against Torture and Other Cruel, Inhuman or Degrading Treatment or Punishment) को आमतौर पर ‘यातना-रोधी संयुक्त राष्ट्र अभिसमय’ (United Nations Convention against Torture– UNCAT) के नाम से भी जाना जाता है, इसका उद्देश्य विश्व में यातना तथा अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार की रोकथाम करना है।
  2. यह अभिसमय, सदस्य देशों को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत किसी भी क्षेत्र में ‘यातना’ को प्रतिबंधित किये जाने के लिए आवश्यक उपाय करने करने की आवश्यकता पर बल देता है, तथा साथ ही, यातना दिए जाने के उद्देश्य से किसी अन्य देशों में व्यक्तियों के स्थानांतरण पर रोक लगाता है।
  3. इस अभिसमय को 10 दिसंबर 1984 को अपनाया गया तथा यह 26 जून 1987 से प्रभावी हुआ।

इस अभिसमय के सम्मान में प्रतिवर्ष 26 जून को ‘यातना पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय दिवस’ (International Day in Support of Victims of Torture) मनाया जाता है।

यातना-रोधी समिति (Committee against TortureCAT)

CAT मानवाधिकार विशेषज्ञों का एक निकाय है। यह सदस्य देशों द्वारा अभिसमय के कार्यान्वयन की निगरानी करता है।

यह समिति संयुक्त राष्ट्र से संबधित आठ मानवाधिकार समझौता संगठनो में से एक है।

  • सभी सदस्य देश, अभिसमय के अंतर्गत, मानवाधिकार संबंधी नियमों के अनुपालन की नियमित रिपोर्ट यातना-रोधी समिति (CAT) के समक्ष पेश करने के लिए बाध्य हैं।
  • अभिसमय की संपुष्टि करने के पश्चात, सदस्य देशों के लिए एक वर्ष के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, इसके बाद प्रत्येक चार वर्ष में रिपोर्ट किया जाना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IPC के तहत यातना की परिभाषा।
  2. यातना-रोधी समिति (CAT) की संरचना और कार्य।
  3. यातना पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय दिवस’ कब और क्यों मनाया जाता है?
  4. UNCAT- गठन, सदस्य और कार्य।
  5. भारत का विधि आयोग- संरचना, रचना और कार्य।

मेंस लिंक:

भारत में पृथक यातना-रोधी कानून की आवश्यकता क्यों है? हाल की घटनाओं के प्रकाश में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

सौर ऑर्बिटर

(Solar Orbiter)

संदर्भ:

हाल ही में, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency) द्वारा सूर्य की अब तक सबसे नजदीक से ली गयी तस्वीरें जारी की हैं। यह तस्वीरें इसी वर्ष फरवरी में लांच किये गए सौर ऑर्बिटर द्वारा खीची गयी हैं।

यह अन्तरिक्ष यान, परिक्रमा करते हुए पहली बार जून के मध्य में सूर्य के सबसे नजदीक, (सूर्य की सतह से 48 मिलियन मील की दूरी पर) से गुजरा, तथा यान पर लगे हुए शक्तिशाली उपकरणों से सूर्य की अब तक सबसे करीबी तस्वीरें उतारीं।

इन चित्रों से प्राप्त विवरण

  1. सूर्य पर लघु-लपटें (Mini-Flares) देखी गयी है, जिन्हें वैज्ञानिकों ने ‘कैंप फायर’ (Camp Fires) कहा है।
  2. आकार: ये ‘कैंप फायर’ पृथ्वी पर स्थित दूरबीनों द्वारा नियमित रूप से देखी जाने वाली विशाल सौर लहरों से आकार में लाखों गुना छोटी हैं।
  3. यह लघु सौर लहरें, ‘कोरोना’ (Corona) के अत्यधिक तप्त होने का कारण हो सकती हैं। कोरोना, सूर्य का बाह्य वातावरण है, जो सूर्य की सतह से अधिक गर्म है।

इंस्टा कॉन्सेप्ट्स:

सौर-लहरें (Solar Flares) क्या होती हैं?

  • सौर लहरें, सूर्य के वातावरण में चुंबकीय ऊर्जा के महा-विस्फोट से उत्पन्न होती है, जिससे सूर्य की चमक में तीव्रता से वृद्धि होती है।
  • ये सौर लहरें, सौर-धब्बों (Sunspots) के आसपास सक्रिय क्षेत्रों में उत्पन्न होती हैं।
  • सौर लहरों के दौरान, सूर्य से ऊर्जा कणों का विस्फोट होता है, जिससे सौर-हवा (Solar Wind) में वृद्धि होती है। यह सौर-हवा सूर्य की सतह से निरंतर बाहर की ओर प्रवाहित होती है।
  • सूर्य से निर्मुक्त हुए ऊर्जा कणों के पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में पहुचने पर ‘चुंबकीय तूफ़ान’ (Magnetic Storms) आने की संभावना होती है, इस स्थिति में पृथ्वी पर स्थिति दूरसंचार नेटवर्क तथा विद्युत् ग्रिड नष्ट हो सकते है।

कोरोना (Corona) क्या होता है?

  • सौर कोरोना, सूर्य के वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है। यह बाह्य अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर तक फैली हुई है।
  • इसका तापमान एक मिलियन डिग्री सेल्सियस से अधिक है, तथा यह सूर्य की सतह की तुलना में 5500 ° C अधिक गर्म है।
  • वैज्ञानिको द्वारा कई दशकों के अध्ययन के बाद भी कोरोना को गर्म करने वाले कारकों को पूरी तरह से नहीं समझा जा सका है, तथा इसकी तुलना सौर भौतिकी की ‘होली ग्रेल’ (Holy Grail) से की जाती है।

सौर ऑर्बिटर (Solar Orbiter) मिशन

सौर ऑर्बिटर, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency- ESA) तथा नासा का संयुक्त अंतरिक्ष मिशन है।

इस अंतरिक्ष यान को फरवरी 2020 में यूनाइटेड लांच अलायन्स (United Launch AllianceULA) के एटलस- 5 रॉकेट द्वारा केप कैनावेरल (Cape Canaveral) से प्रक्षेपित किया गया था।

  • इसे ESA के कॉस्मिक विजन 2015-2025 कार्यक्रम के अंतर्गत पहले मीडियम-क्लास मिशन के रूप में चुना गया था।
  • यह पहला मिशन है जो छह उपकरणों के माध्यम से सूर्य के उत्तरी व दक्षिणी धुर्वों की तस्वीरें उपलब्ध करायेगा।
  • इस मिशन की अवधि सात वर्षो की है, तथा इस दौरान यह सूर्य से 26 मिलियन मील की दूरी तक पहुंचेगा।
  • इस अन्तरिक्ष यान में कैल्शियम फास्फेट में लेपित विशिष्ट टाइटेनियम हीट शील्ड लगी हुई है जिससे यह 970 डिग्री फ़ारेनहाइट तक तापमान सहन कर सकता है।

सौर ऑर्बिटर निम्नलिखित चार शीर्ष-स्तरीय सवालों के उत्तरों की खोज करेगा:

  1. सौर हवा किस प्रकार गति करती है तथा कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र कहाँ से उत्पन्न होता है?
  2. सौर- अनित्यता किस प्रकार हेलिओस्फेरिक (Heliospheric) परिवर्तनशीलता को उत्पन्न करती है?
  3. हेलियोस्फीयर के पाए जाने वाला ऊर्जावान कण विकिरण सौर विस्फोटों से किस प्रकार उत्पन्न होता है?
  4. सौर डायनेमो किस प्रकार कार्य करता है, तथा सूर्य और हेलियोस्फीयर के बीच किस प्रकार के संबंध है?

 महत्वपूर्ण तथ्य

  • यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) में उन्नीस सदस्य देश हैं: ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इटली, आयरलैंड, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड और यूनाइटेड किंगडम।
  • सौर ऑर्बिटर, यूलिसिस अंतरिक्ष यान (Ulysses spacecraft) के पश्चात् ESA तथा नासा का संयुक्त उपक्रम है। यूलिसिस अंतरिक्ष यान को वर्ष 1990 में लॉन्च किया गया था।

solar_orbit

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मर्चिसन वाइडफील्ड ऐरे (Murchison Widefield Array- MWA) रेडियो टेलिस्कोप के बारे में।
  2. रेडियो तरंगें क्या हैं?
  3. सूरज की विभिन्न परतें?
  4. सोलर फ्लेयर्स क्या हैं?
  5. सनस्पॉट्स क्या हैं?
  6. सूर्य के कोरोना के बारे में।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

असम में बाढ़

(Assam Floods)

असम बाढ़-आपदा के कारण खतरे की स्थिति में फंसा हुआ है, और यह असम की वार्षिक आपदा बन चुकी है। असम में प्रति वर्ष बड़ी बाढ़ आती है और हर बार कई जाने जाती है, लाखों लोग विस्थापित होते हैं, गाँव, फसलें, बुनियादी ढाँचा आदि सब तबाह हो जाते हैं।

इस वर्ष की बाढ़ में, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 85 प्रतिशत क्षेत्र जलमग्न हो गया है।

पिछले वर्ष की बाढ़ की तुलना में वर्तमान बाढ़ की स्थिति

वर्तमान समय में, असम में बाढ़ एक नियमित वार्षिक घटना बन चुकी है, जिसमे प्रतिवर्ष अन्य वर्षो की अपेक्षा अधिक विनाश होता है। इसके मानव जीवन पर प्रभाव के संदर्भ में,  वर्ष 1988, 1998 तथा 2004 की बाढ़ सबसे भयावह थी; वर्ष 2004 की बाढ़ से 12.4 मिलियन लोगों का जीवन प्रभावित हुआ तथा 251 लोगों की मौत हुई थी। वर्तमान बाढ़, अब तक 57 लाख लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है, और विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ की सबसे खराब स्थिति आना अभी बाकी है।

 असम में बाढ़ आने के प्रमुख कारण

ब्रह्मपुत्र नदी कुछ स्थानों को छोड़कर शेष असम में कई शाखाओं में विभाजित है, तथा अपनी प्रकृति में अस्थिर है। नदी की अस्थिरता का मुख्य कारण नदी में गाद का भारी मात्रा में जमाव तथा खड़ी ढलान हैं।

बाढ़ प्रवण क्षेत्र का उच्च प्रतिशत: राज्य के कुल 78.523 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल का 31.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बाढ़ का खतरा बना रहता है। इस उच्च बाढ़ प्रवणता का कारण मानव निर्मित और प्राकृतिक दोनों ही हैं।

भूकंप/ भूस्खलन: असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ अन्य हिस्सों में प्रायः भूकंप आते रहते हैं, जिससे काफी मात्रा में भूस्खलन होता है। भूकंप तथा परिणामी भूस्खलन से नदियों में बहुत अधिक मलबा पहुँचता हैं, जिस कारण नदी का तल ऊँचा हो जाता है।

तट अपरदन (Bank Erosion): असम को ब्रह्मपुत्र तथा बराक नदियों के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों के तटीय कटाव का सामना करना पड़ता है। अनुमानतः प्रतिवर्ष लगभग 8000 हेक्टेयर भूमि कटाव से नष्ट हो जाती है।

बाँध (Dams): मानव निर्मित कारणों में, ऊंचाई पर निर्मित किये गए बांधो से पानी का छोड़ा जाना, असम क्षेत्र में बाढ़ का प्रमुख कारण है। अनियमित रूप से पानी छोड़े जाने से असम के मैदानी इलाकों में प्रतिवर्ष हजारों लोग बेघर हो जाते हैं।

गुवाहाटी की स्थलाकृति– इसकी आकृति एक कटोरे के समान है – यह जल भराव के लिए अतिसंवेदनशील स्थिति है।

शहरी क्षेत्रों के अनियोजित विस्तार: इससे गंभीर रूप से आर्द्र-भूमियों, निचले इलाकों, पहाड़ियों तथा वन क्षेत्रों का अतिक्रमण हुआ है जिससे वन आवरण क्षेत्र में कमी आयी है।

नदियों का मार्ग परिवर्तन: असम राज्य में नदियाँ अक्सर मार्ग परिवर्तित करती रहती हैं, तथा पानी के भारी दबाव के कारण इन्हें तटबंधो में सीमित करना असंभव हो जाता है।

 बाढ़ नियंत्रण के लिए किये गए सरकारों द्वारा प्रयास

मानसून के दौरान असम में बार-बार बाढ़ आना एक सामान्य घटना है। पारिस्थितिकीविदों का कहना है कि बाढ़ के पानी से राज्य के जलोढ़ क्षेत्रों में फसली और उपजाऊ मृदा पुनर्युवनित (rejuvenated) हुई है।

  • परन्तु, यह भी एक तथ्य है कि पिछले 60 वर्षो से अधिक की अवधि में, केंद्र तथा राज्य सरकारें बाढ़ की विभीषिका को कम करने के उपाय नहीं खोज सकी हैं।
  • राज्य, मुख्य रूप से बाढ़-नियंत्रण के लिए तटबंधों पर निर्भर रहते है। बाढ़ नियंत्रण का यह उपाय, असम में 1950 के दशक की शुरुआत में पेश किया गया था, उस समय तक ब्रह्मपुत्र तथा अधिकांश भारतीय नदियों के जल-विज्ञान (Hydrology) को समुचित रूप से नहीं समझा गया था।
  • इस वर्ष, अब तक राज्य के कई तटबंध बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।

आगे की राह

  1. राज्य में प्रतिवर्ष बाढ़ आने के कारणों को जानने के लिए नदियों का अध्ययन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को समझने की आवश्यकता है।
  2. चीन, भारत के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह की जानकारी साझा करता है, भारत, इसके लिए चीन को एक निश्चित राशि का भुगतान करता है। इस जानकारी को जनता के साथ साझा किया जाना चाहिए। इससे नदी को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी तथा लोग बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी कर सकेंगे।
  3. वर्षा का सटीक तथा विकेन्द्रीकृत पूर्वानुमान, बाढ़ से निपटने की तैयारियों में सहायक हो सकते है। मौसम की रिपोर्ट्स को जिला स्तर पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए तथा वे जनता के लिए सुलभ होनी चाहिए।

इन उपायों की आवश्यकता:

असम की अर्थव्यवस्था, काफी हद तक प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। कृषि और जंगलों को प्रभावित करने वाली घटनाओं से लोगों की आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बाढ़ के दौरान, पानी दूषित हो जाता है तथा जलवायु परिवर्तन का जल संसाधन क्षेत्रों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। परिणामतः क्षेत्र के निवासियों को ताजे मीठे पाने की कमी का सामना करना पड़ता है।

brahmaputra

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL)

(National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories)

यह अनुरूपता मूल्यांकन निकायों (Conformity Assessment Bodies), प्रयोगशालाओं, को मान्यता प्रदान करता है।

  • NABL, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है जिसका पंजीकरण संस्था पंजीकरण अधिनियम-1860 के तहत किया गया है।
  • NABL का एशिया पैसिफिक लेबोरेटरी एक्रिडिटेशन कोऑपरेशन (APLAC), इंटरनेशनल लेबोरेटरी एक्रिडिटेशन कोऑपरेशन (ILAC) के साथ म्यूचुअल रिकॉग्निशन अरेंजमेंट (MRA) है।
  • यह विज्ञान और इंजीनियरिंग के सभी प्रमुख क्षेत्रों, जैसे जैविक, रासायनिक, विद्युत, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, द्रव-प्रवाह, गैर-विनाशकारी आदि में मान्यता प्रदान करता है।

मामला मृत्यु दर (CFR)

(Case Fatality Rate)

CFR, एक निश्चित अवधि में किसी विशिष्ट बीमारी से संक्रमित होने वाले तथा उससे मरने वाले व्यक्तियों की संख्या का अनुपात होता है।

गोधन न्याय योजना

(Godhan Nyay Yojana)

इस योजना को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया जा रहा है।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • पशुपालकों से गाय के गोबर की खरीद 2 रुपये प्रति किलोग्राम।
  • गाय के गोबर को वर्मीकम्पोस्ट और अन्य पर्यावरण अनुकूल वस्तुओं में प्रयोग किया जायेगा।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को 8 रुपये प्रति किलो के हिसाब से वर्मीकम्पोस्ट को बेंचा जायेगा।

 उर्ध्वाधर संचरित संक्रमण क्या होता है?

(What is a vertically transmitted infection?)

एक उर्ध्वाधर संचरित संक्रमण रोगजनकों (जैसे बैक्टीरिया और वायरस) के कारण होने वाला एक संक्रमण है। इसमें संक्रमण माँ से बच्चे में संचारित होता है, अर्थात, यह गर्भावस्था या प्रसव के दौरान ही माँ से भ्रूण, अथवा शिशु में संचारित हो जाता है।

चर्चित स्थल- मगुरी मोटापुंग वेटलैंड:

मगुरी-मोटापुंग वेटलैंड (Maguri-Motapung Wetland) डिब्रू-साइखोवा नेशनल पार्क तथा डिब्रू-साइखोवा जैव संरक्षित क्षेत्र से 10 किमी दक्षिण में स्थित है।

इस आर्द्रभूमि का नाम ‘कैटफ़िश क्लैरियस बैट्रेकस’ (Catfish Clarius Batrachus) के लिए स्थानीय शब्द ‘मगुर’ से लिया गया है, जो यहां बहुतायत में पाया जाता है। मोटापुंग पास में स्थित एक गाँव है।

महत्व: इसे वर्ष 1996 में एक महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र (Important Bird and Biodiversity Area- IBA) घोषित किया गया था।

अवस्थिति

  • यह आर्द्र्भूमि असम के राष्ट्रीय उद्यान को अरुणाचल प्रदेश के नामदापा नेशनल पार्क से जोड़ती है, तथा भारत-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट में एक महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे का निर्माण करती है।
  • यह आर्द्र्भूमि, ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदान में स्थित है, तथा उत्तर में लोहित नदी और दक्षिण में डिब्रू इसकी सीमायें बनाते है।

चर्चा का कारण

कुछ समय तिनसुकिया के बाघजान गांव में स्थित ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) के प्लांट में विस्फोट (ब्लोआउट) होने से प्राकृतिक गैस का रिसाव हुआ था। यह आर्द्र्भूमि उस स्थान से 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।

beel


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos