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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. अमेरिका का ट्रिनिटी परीक्षण

 

सामान्य अध्ययन-II

1. प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi)

2. केरल पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम

3. लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020

4. भारत में ‘मातृत्व मृत्यु अनुपात (MMR)’ में गिरावट

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. इओसिनोफिल गणना

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: विश्व के इतिहास में 18वीं सदी तथा बाद की घटनाएँ यथा औद्योगिक क्रांति, विश्व युद्ध, राष्ट्रीय सीमाओं का पुनःसीमांकन, उपनिवेशवाद, उपनिवेशवाद की समाप्ति, राजनीतिक दर्शन जैसे साम्यवाद, पूंजीवाद, समाजवाद आदि शामिल होंगे, उनके रूप और समाज पर उनका प्रभाव।

अमेरिका का ट्रिनिटी परीक्षण

(US’ Trinity Test)

संदर्भ:

16 जुलाई 1945 को, ठीक 75 वर्ष पूर्व अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा द गैजेट (Gadget) – विश्व का पहला परमाणु बम- का परीक्षण किया गया था, इसे बाद में ‘ट्रिनिटी परीक्षण’ (Trinity Test) का नाम दिया गया।

इसके एक माह से भी कम समय पश्चात, जापान के ‘नागाशाकी’ शहर पर ‘फैट मैन’ (Fat Man) नाम का एक समान परमाणु बम गिराया गया, जिससे हजारों लोगों की मौत हो गई।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. पहले सुपर बम, जिसे गैजेट‘, का उपनाम दिया गया था, अमेरिका के नेतृत्व में मैनहट्टन प्रोजेक्ट (Manhattan Project) के अंतर्गत विकसित किया गया था।
  2. मैनहट्टन प्रोजेक्ट का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र देशों की सेनाओं के लिए जर्मनी, जापान तथा इटली पर बढ़त बनाने लिए परमाणु हथियार विकसित करना था।
  3. सुपर बम को जूलियस रॉबर्ट ओपनहाइमर (J Robert Oppenheimer) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने डिजाइन तथा विकसित किया था। ओपनहाइमर, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में भौतिकी के प्रोफेसर थे। इन्हें, परमाणु बम के जनक’ के रूप नाम से जाना जाता है।
  4. इस परीक्षण को न्‍यू मेक्सिको के रेगिस्‍तान में, लॉस अलामोस (Los Alamos) से लगभग 337 किमी दूर स्थित आलमगार्डो बॉम्बिंग रेंज (Alamagordo Bombing Range) में किया गया था।

ट्रिनिटी परीक्षण के परिणाम

  • न्यू मैक्सिको के निवासियों को इस परीक्षण के बारे में चेतावनी नहीं दी गई थी तथा विस्फोट जनित विकिरण के प्रतिकूल प्रभाव को परीक्षण के पश्चात् कई वर्षों तक नजरअंदाज किया गया।
  • परीक्षण के पश्चात इस क्षेत्र में शिशु मृत्यु दर में अचानक वृद्धि हुई।
  • स्थानीय निवासियों द्वारा ट्रिनिटी परीक्षण के पश्चात कैंसर रोगियों की संख्या में वृद्धि की शिकायत की गयी।
  • विस्फोट-जनित धूल, परीक्षण स्थल से लगभग 100 मील की दूरी तक फ़ैल गयी, जिससे वहां के निवासियों के लिए गंभीर संकट उत्पन्न हो गए।
  • स्थानीय निवासियों के पालतू पशुओं की त्वचा जलने, रक्त स्राव तथा बाल गिरने के मामले बड़ी संख्या में देखे गए।

काफी समय पश्चात वर्ष 1990 में अमेरिकी सरकार ने रेडीएशन एक्सपोजर कंपनसेशन एक्ट’ (Radiation Exposure Compensation Act– RECA) पारित किया, इसके पश्चात उत्तरी मेक्सिको के रेडियोधर्मी विकिरण से पीड़ित निवासियों को क्षतिपूर्ति प्रदान की गयी।

वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के पास परमाणु अस्त्रों की स्थिति

ट्रिनिटी परीक्षण के 75 वर्षो के पश्चात, वर्तमान में विश्व के नौ देशों के पास परमाणु अस्त्र भण्डार है।

  • परमाणु हथियार संपन्न देशों में, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, रूस, फ्रांस, भारत, चीन, इजरायल, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया सम्मिलित हैं।
  • वर्ष 1945 के बाद से, कम से कम आठ देशों द्वारा 2,000 परमाणु परीक्षण विस्फोट किये गए हैं।
  • परमाणु बम परीक्षण विस्फोटों का सबसे ताजा उदाहरणों में, भारत द्वारा मई 1998 में पोखरण- II परीक्षणों के तहत पांच विस्फोटों की श्रंखला है। भारत द्वारा पहला परमाणु परीक्षण, मई 1974 में किया गया था, जिसका कोड नाम ‘स्माइलिंग बुद्ध’ (Smiling Buddha) था।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्माइलिंग बुद्धा क्या है?
  2. वर्तमान में कितने देशों के पास परमाणु हथियार हैं?
  3. “परमाणु बम के जनक” के रूप में किसे जाना जाता है?
  4. अमेरिका के नेतृत्व वाले मैनहट्टन प्रोजेक्ट किससे संबंधित है?
  5. यूएस का ट्रिनिटी टेस्ट क्या है?

मेंस लिंक:

द्वितीय विश्व युद्ध  पर अमेरिका के ट्रिनिटी परीक्षण के प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi)

संदर्भ: हाल ही में, स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) के लिए माइक्रो-क्रेडिट सुविधा उनके घर तक पहुंचाने के लिए पीएम स्वनिधि मोबाइल ऐप जारी किया गया है।

इस ऐप का उद्देश्य, इस योजना के अंतर्गत स्ट्रीट वेंडर्स के ऋण आवेदनों के एकत्रीकरण तथा संसाधन प्रोसेसिंग के लिए, ऋण प्रदाता संस्थानों (Lending Institutions- LIs) और उनके क्षेत्र कार्यकर्ताओं को अनुकूल डिजिटल इंटरफेस प्रदान करना है।

क्रियान्वयन एजेंसी:

पिछले माह, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना को लागू करने के लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में सिडबी (SIDBI) को सम्मिलित करने हेतु ‘आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय’ और भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India- SIDBI) के मध्य एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सिडबी (SIDBI), ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट’ (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises- CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन भी करेगा।

योजना का विवरण:

  1. यह 50 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को 10,000 रु. तक का सस्ता ऋण प्रदान करने हेतु एक विशेष माइक्रो-क्रेडिट सुविधा योजना है। इसके अंतर्गत 24 मार्च को या उससे पहले कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा
  2. यह योजना मार्च 2022 तक वैध है।
  3. भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) इस योजना के कार्यान्वयन हेतु तकनीकी भागीदार है।
  4. सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के माध्यम से ऋण प्रदाता संस्थानों को क्रेडिट गारंटी का प्रबंधन करेगा।

 योजना के अंतर्गत ऋण

  • इस योजना के तहतस्ट्रीट वेंडर्स 10 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण ले सकते हैं जिसे एक वर्ष की अवधि में मासिक किश्तों में चुकाने होंगे।
  • समय पर / जल्दी ऋण चुकाने पर 7 प्रतिशत की सालाना ब्याज सब्सिडी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में त्रिमासिक आधार पर जमा कर दी जाएगी।
  • ऋण के शीघ्र पुनर्भुगतान पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा।

 पात्रता

इस योजना के अंतर्गत शहरी / ग्रामीण क्षेत्रों के आस-पास सड़क पर माल बेचने वाले विक्रेताओं,सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान चलाने वाले, फल-सब्जी, लॉन्ड्री, सैलून, पान की दुकान तथा वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति करने वालों को ऋण प्रदान किया जायेगा।

योजना की आवश्यकता

  • लॉकडाउन से दिहाड़ी मजदूरों तथा सड़क किनारे ठेले या रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वालों का जीवन तथा उनकी आजीविका विशेष रूप से प्रभावित हुई है।
  • स्ट्रीट वेंडर आमतौर पर अनौपचारिक स्रोतों से काफी अधिक ब्याज दरों पर ऋण लेकर छोटी पूंजी लगाकर काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, इनके सामने लॉकडाउन के दौरान अपनी बचत तथा लागत पूंजी के समाप्त हो जाने से पुनः रोजगार शुरू करने का संकट है।
  • इसीलिये, स्ट्रीट वेंडर्स को फिर से व्यापार शुरू करने में मदद करने हेतु औपचारिक बैंकिंग स्रोतों के माध्यम से कार्यशील पूंजी के लिए तत्काल सस्ता ऋण प्रदान किये जाने की आवश्यकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना की वैधता
  2. कौन लागू करता है?
  3. योजना के तहत पात्रता?
  4. ब्याज की दर?
  5. SIDBI क्या है?

मेंस लिंक:

पीएम स्वनिधि (PM SVANIDHI) योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

केरल पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम

(Kerala Animals and Birds Sacrifices Prohibition Act)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय ने ‘केरल पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1968 (Kerala Animals and Bird Sacrifices Prohibition Act, 1968) की संवैधानिक वैधता की जाँच करने पर सहमति व्यक्त की है।

विवाद का विषय

हाल ही में, उच्चत्तम न्यायालय में शक्ति पूजक (Shakthi Worshippers) लोगों द्वारा एक याचिका दायर की गयी है। याचिकाकर्ताओं ने अपील में कहा है कि, पशु बलि उनकी धार्मिक प्रथा का एक अभिन्न अंग है।

  • किंतु, केरल पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1968 के अंतर्गत राज्य में धार्मिक अनुष्ठानों में पशु- पक्षियों की बलि देने को प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, अधिनियम, व्यक्तिगत उपभोग के लिए जीव-हत्या को प्रतिबंधित नहीं करता है।
  • याचिकाकर्ताओं का कहना है, कि यह मनमाने वर्गीकरण के समान है, तथा यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।
  • यह संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धर्म का पालन करने तथा धार्मिक मामलों के प्रबंधन के अधिकार का भी उल्लंघन करता है।
  • याचिकाकर्ताओं का तर्क है, कि यदि पशु-पक्षियों की हत्या को प्रतिबंधित किया जाना है, तो इसे धार्मिक तथा अन्य सभी उद्देश्यों के लिए समान रूप से निषिद्ध किया जाए।
  • इसके अतिरिक्त, पशु क्रूरता निवारक अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals), 1960 की धारा 28 में भी धार्मिक उद्देश्यों के लिए जीव-हत्या को अपराध नहीं माना गया है।

उच्च न्यायालय का निर्णय

कुछ समय पूर्व, केरल उच्च न्यायालय इस याचिका को खारिज कर दिया था।

  • इस संदर्भ में केरल उच्च ने कहा था, कि धर्म में बलि प्रथा की अनिवार्यता को स्थापित करने हेतु कोई सामग्री पेश नहीं की गयी है।
  • उच्च न्यायालय के अनुसार, कि पशु क्रूरता निवारक अधिनियम में धार्मिक उद्देश्यों के लिए ‘बलि’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनहित याचिका कौन और कहां दायर कर सकता है?
  2. रिट (writ) तथा रिट याचिका (writ petition) क्या है?
  3. पशु क्रूरता निवारक अधिनियम,1960 की धारा 28
  4. संविधान के अनुच्छेद – 14, 25 तथा 26
  5. केरल पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम 1968 से संबंधित हाल के विषय

मेंस लिंक:

जीव संरक्षण कानून में ‘विरोधाभास’ पर टिप्पणी कीजिए, जिसके तहत निजी तौर पर भोजन के लिए जानवरों को मारने की अनुमति है, परन्तु, धार्मिक उद्देश्यों के लिए पशु-बलि को प्रतिबंधित किया गया है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020

(PM’s Awards for Excellence in Public Administration 2020)

संदर्भ:

हाल ही में, लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए नए संशोधित प्रधानमंत्री पुरस्कारों का आरंभ किया गया है।

प्रमुख विशेषताएं:

  1. परिणामी संकेतकों, जैसे, आर्थिक विकास, लोगों की भागीदारी तथा जन शिकायत निवारण आदि के सन्दर्भ में जिला कलेक्टरों के कार्यों की पहचान के लिए योजना में संशोधन किया गया है।
  2. पुरस्कार नामांकन के लिए चार प्रमुख श्रेणियों- जिला प्रदर्शन संकेतक कार्यक्रम, नवाचार सामान्य श्रेणी, आकांक्षी जिला कार्यक्रम और नमामि गंगे कार्यक्रम, का निर्धारण किया गया है।
  3. योजना में पहली बार, नमामि गंगे कार्यक्रम हेतु जिला स्तर के अधिकारियों के प्रयासों को सम्मिलित किया गया है।
  4. इस पुरस्कार श्रेणी के तहत, नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 57 अधिसूचित जिला गंगा समितियों में से एक जिले को एक पुरस्कृत किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

भारत सरकार द्वारा केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा किये गये असाधारण और नव प्रवर्तनकारी कार्य-निष्पादन को अभिस्वीकृति एवं मान्यता देने और पुरस्कृत करने के लिए ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार’ की स्थापना वर्ष 2006 में की गयी थी।

  • वर्ष 2014 में, प्राथमिकता आधारित कार्यक्रमों, नवप्रवर्तनों तथा आकांक्षी जिलों में जिला कलेक्टरों के प्रदर्शन को मान्यता देने हेतु इस योजना का पुनर्गठन किया गया था। वर्ष 2020 में जिलों के आर्थिक विकास के सन्दर्भ में जिला कलेक्टरों के प्रदर्शन को मान्यता प्रदान करने के लिए यह योजना पुनः संशोधित की गयी है।
  • अब, वर्ष 2020 में इस योजना के अंतर्गत, जिलों के विभिन्न क्षेत्रों में समग्र परिणाम-उन्मुख प्रदर्शन को मान्यता देने हेतु पुरस्कारों के दायरे का विस्तार किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार का आरम्भ कब किया गया था?
  2. पात्रता?
  3. हाल में किये गए परिवर्तन
  4. नमामि गंगे क्या है?
  5. गंगा समितियों का प्रमुख कौन होता है?

मेंस लिंक:

नमामि गंगे कार्यक्रम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत में ‘मातृत्व मृत्यु अनुपात (MMR)’ में गिरावट

(India registers a steep decline in maternal mortality ratio)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत के रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General Of India) के नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System-SRS) द्वारा ‘भारत में मातृत्व मृत्यु दर पर विशेष बुलेटिन, 2016-18’ जारी किया गया है।

मातृत्व मृत्यु अनुपात (MMR) क्या है?

मातृत्व मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio- MMR) को प्रति एक लाख जीवित बच्चों के जन्म पर होने वाली माताओं की मृत्यु के रूप में पारिभाषित किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित ‘सतत विकास लक्ष्य’ (Sustainable Development Goals SDG) के लक्ष्य संख्या 3.1 का उद्देश्य, वैश्विक मातृत्व मृत्यु अनुपात को 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म से कम करना है।

मातृत्व मृत्यु दर क्या होती है?

मातृत्व मृत्यु दर, किसी क्षेत्र में महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य का एक मापक होती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मातृत्व मृत्यु, किसी महिला की गर्भावस्था के दौरान अथवा गर्भ की समाप्ति के 42 दिनों के भीतर, उसकी गर्भावस्था अथवा उसके प्रबंधन से संबंधित किसी भी कारण से होने वाली मौत होती है।

विशेष बुलेटिन के प्रमुख निष्कर्ष

भारत में मातृत्व मृत्यु अनुपात (MMR), वर्ष 2016-18 में कम होकर 113 हो गया है। यह अनुपात, वर्ष 2015-17 में 122 तथा वर्ष 2014-16 में 130 था।

विभिन्न राज्यों का MMR: असम (215), बिहार (149), मध्य प्रदेश (173), छत्तीसगढ़ (159), ओडिशा (150), राजस्थान (164), उत्तर प्रदेश (197) और उत्तराखंड (99)।

दक्षिणी राज्यों में MMR में कमी दर्ज की गयी— आंध्र प्रदेश (65), तेलंगाना (63), कर्नाटक (92), केरल (43) और तमिलनाडु (60)।

 प्रीलिम्स लिंक:

  1. मातृ मृत्यु तथा मातृत्व मृत्यु अनुपात क्या है?
  2. SDG का लक्ष्य 1 क्या है?
  3. पिछले 10 वर्षों में भारत में MMR की प्रवृत्ति

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र

(Bhagirathi Eco-Sensitive Zone)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र की अधिसूचना के लिए जोनल मास्टर प्लान (Zonal Master PlanZMP) को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह जोनल मास्टर प्लान ‘गौमुख से उत्तराकाशी’ तक 4179.59 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तारित है।

इस मंजूरी से चारधाम परियोजना को तीव्र गति से निष्पादित करने का रास्ता भी खुलेगा।

जोनल मास्टर प्लान में क्या सम्मिलित है?

जोनल मास्टर प्लान (ZMP), वाटरशेड दृष्टिकोण पर आधारित है और इसमें वन एवं वन्यजीव, जल प्रबंधन, सिंचाई, ऊर्जा, पर्यटन, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, सड़क अवसंरचना आदि क्षेत्रों में प्रशासन भी सम्मिलित है।

पृष्ठभूमि

भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचना पहली बार पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 18 दिसंबर 2012 को जारी की गई थी।

  • वर्षों तक स्थानीय पर्यावरणविदों द्वारा विरोध के बाद अधिसूचना में, 2 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं, नदी-तल खनन (Riverbed Mining) तथा भूमि उपयोग में परिवर्तन को सीमित करके सम्पूर्ण संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र की रक्षा करने का प्रयास किया गया था।
  • इस अधिसूचना पर उत्तराखंड सरकार द्वारा ‘विकास-विरोधी’ बताते हुए आपत्ति दर्ज की गयी थी, अंततः इसे 16 अप्रैल, 2018 को संशोधित कर दिया गया।
  • संशोधनों के अंतर्गत, पर्यावरणीय प्रभावों के यथोचित अध्ययन तथा राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के पश्चात् नागरिक सुविधाओं तथा सार्वजनिक हित में राष्ट्रीय अवसंरचना विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित अन्य स्थानीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भूमि-उपयोग में बदलाव को मंजूरी प्रदान की गयी है।

चिंताएँ

  1. जोनल मास्टर प्लान (ZMP) का यह अनुमोदन पूरे भागीरथी क्षेत्र को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील बना सकता है।
  2. वर्ष 2013 में हुई केदारनाथ त्रासदी की ओर संकेत करते हुए, विशेषज्ञों ने निम्नलिखित तर्क दिए है:
  3. हिमालय, अत्यंत संवेदनशील पर्वत श्रंखला है। इसकी चट्टाने अभी भी पूरी तरह से संगठित (consolidated) नहीं पायी है। पहाड़ का कटाव निश्चित रूप से पहाड़ियों को अस्थिर करेगा।
  4. वनों की क्षति होने पर मलबा नदी में बह जायेगा, तथा यह नदी को प्रभावित करेगा और सम्पूर्ण क्षेत्र भूस्खलन की चपेट में आ जायेगा।
  5. हिमालय क्षेत्र में 1800 से 2000 मीटर की ऊँचाई पर अधिकाँश क्षेत्र में हिमोढ़ (Moraines) पाए जाते है। बादल फटने की घटना होने पर ये भूस्खलन की संभावना बढेगी।
  6. हिमालय पर्वत भूकंपीय क्षेत्र-V में स्थित हैं- इस क्षेत्र में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है।

भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र का विस्तार

अधिसूचित भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (Bhagirathi Eco- Sensitive Zone) ऊपरी हिमालय में अवस्थित, एक अंतर्वाहित, अन्योन्याश्रित संवेदनशील गंगा- हिमालय बेसिन है।

भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र गढ़वाल मध्य हिमालय (lesser Himalayas) तथा वृहत हिमालय (Great Himalaya) के अंतर्गत आता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र किस प्रकार घोषित किया जाता है?
  2. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र कहाँ है?
  3. हिमालय का वर्गीकरण।
  4. केदारनाथ- अवस्थिति
  5. मानचित्र पर गोमुख का पता लगाएँ।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इओसिनोफिल गणना (Eosinophil count)

  • यह एक रक्त परीक्षण होता है, जिसमे एक विशिष्ट प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाओं, इओसिनोफिल्स (eosinophils) की संख्या को मापा जाता है।
  • व्यक्ति में एलर्जी संबंधी बीमारियां, संक्रमण तथा अन्य चिकित्सीय स्थितियों में इओसिनोफिल्स सक्रिय हो जाते हैं।

चर्चा का कारण

शोधकर्ताओं ने मरीजों में Covid -19 की प्रारंभिक पहचान के लिए इस परीक्षण को हरी झंडी दिखाई है।


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