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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-II 

1. अध्यक्ष/सभापति के निर्णय से पूर्व न्यायिक समीक्षा

2. शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों की समग्र उन्नति के लिए एक राष्ट्रीय पहल- निष्ठा

3. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM)

2. मानव वृद्धि हार्मोन (hGH)

3. गैर-वैयक्तिक डेटा (Non- Personal Data)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हाल ही में, भारत में किस राज्य ने सरकारी नौकरियों में प्लाज्मा दाताओं को वरीयता देने का फैसला किया है?

2. हाल ही में चर्चित APT29 क्या है?

3. चर्चित स्थल- चट्टोग्राम बंदरगाह

4. भारत-भूटान के मध्य नया व्यापार मार्ग

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

अध्यक्ष/सभापति के निर्णय से पूर्व न्यायिक समीक्षा

हाल ही में, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी द्वारा सचिन पायलट सहित अन्य 19 कांग्रेस विधायकों को नोटिस भेजा गया है, नोटिस में इन विधायकों से यह पूछा गया है, कि आपको ‘अयोग्य’ (Disqualified) घोषित क्यों नहीं किया जाए? विधायकों को उत्तर देने के लिए 17 जुलाई तक का समय दिया गया है

कांग्रेस पार्टी ने, विधानसभा अध्यक्ष को दी गयी याचिका में इन बागी विधायकों पर पार्टी बदलने का आरोप लगाया है।

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 19 कांग्रेस विधायकों को दिए गए नोटिस का आधार

19 कांग्रेस विधायकों के लिए यह नोटिस, संविधान की ‘दसवीं अनुसूची’ के अंतर्गत दिया गया है, जिसे दलबदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है।

क्या विधायक उत्तर देने हेतु निर्धारित की गयी समयसीमा से पूर्व न्यायालय में अपील कर सकते है?

  • न्यायालय, दसवीं अनुसूची के अंतर्गत अध्यक्ष की शक्तियों में हस्तक्षेप करने के प्रतिकूल है।
  • सदस्यों की अयोग्यता-संबंधी निर्णय लेते समय, अध्यक्ष संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करता है।
  • वर्ष 2019 में कर्नाटक विधानसभा मामले में भी, न्यायालय ने विधायकों द्वारा अपील करने पर भी विधानसभा अध्यक्ष को अयोग्यता-संबंधी निर्णय लेने का समय दिया था।

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा ‘किहोटो होलोन बनाम जचिल्लहू बनाम अन्य’ (Kihoto Hollohan vs Zachillhu And Others) मामले में निर्णय:

  • न्यायालय ने विधायकों की निर्हरता-संबंधी मामलों पर निर्णय लेने हेतु विधानसभा अध्यक्ष को प्राप्त विवेकाधिकार को बरकरार रखा था।
  • हालांकि, बाद में अध्यक्ष के निर्णयों को चुनौती दी जा सकती है, परन्तु न्यायालय, प्रकिया पर रोक अथवा स्टे नहीं लगा सकता है।
  • अतः, अध्यक्ष/सभापति द्वारा निर्णय लेने से पूर्व न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है, विधायकों के ‘भय की वजह से कार्यवाही’ (Quia timet action) की अनुमति नहीं दी जा सकती है। तथा न ही प्रक्रिया के वादकालीन चरण (Interlocutory Stage) में हस्तक्षेप की अनुमति दी जायेगी।
  • इसके अतिरिक्त, न्यायालय केवल संवैधानिक अधिदेश के उल्लंघन, दुर्भावनापूर्ण न्याय, प्राकृतिक न्याय-नियमों का पालन नहीं होने तथा भ्रष्टता के आधार पर निर्णय की समीक्षा कर सकता है।

 प्रश्नगत मौलिक अधिकार

राजस्थान के पूर्व-उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट तथा अन्य 18 विधायकों ने दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 2 (1) (क) की संवैधानिकता को चुनौती देने हेतु राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। दसवीं अनुसूची के अनुच्छेद 2 (1) (क) में, ‘स्वेच्छा से किसी राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ना’ को सदस्य की अयोग्यता का एक आधार बताया गया है।

विधायकों का कहना है कि, यह प्रावधान उनके ‘असंतोष व्यक्त करने के अधिकार’ का उल्लंघन करता है तथा विधायक के रूप में स्वतंत्र अभिव्यक्ति के मूल अधिकार का उल्लंघन है।

दल-बदल विरोधी कानून के लिए:

देखें: https://www.insightsonindia.com/2020/03/13/what-is-the-anti-defection-law-and-how-is-it-implemented/.

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दल-बदल कानून के संबंध में विभिन्न समितियों और आयोगों के नाम।
  2. 52 वें संशोधन का अवलोकन।
  3. समितियां बनाम आयोग।
  4. पीठासीन अधिकारी का निर्णय बनाम न्यायिक समीक्षा ।
  5. राजनीतिक दलों के विलय तथा विभाजन में अंतर।
  6. क्या पीठासीन अधिकारी के लिए दलबदल विरोधी कानून लागू होता है?
  7. संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले।

मेंस लिंक:

दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों की जाँच कीजिए। क्या यह कानून काफी हद तक अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों की समग्र उन्नति के लिए एक राष्ट्रीय पहल- निष्ठा

(NISHTHA– National Initiative for School Heads and Teachers Holistic Advancement)

संदर्भ: हाल ही में, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री द्वारा आंध्र प्रदेश के 1200 प्रमुख ज्ञानवर्धक व्यक्तियों (रिसोर्स पर्सन) के लिए पहला ऑनलाइन निष्ठा- शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों की समग्र उन्नति के लिए एक राष्ट्रीय पहल (National Initiative for School Heads and Teachers Holistic Advancement- NISHTHA) कार्यक्रम आरम्भ किया गया है।

ये रिसोर्स पर्सन आंध्र प्रदेश के शिक्षकों हेतु मार्दर्शन में सहायता करेंगे, तथा बाद में इन्हें दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन निष्ठा प्रशिक्षण दिया जायेगा।

निष्ठा (NISHTHA) के बारे में:

यह, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग  के एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की एक पहल है, तथा यह पहल केंद्र प्रायोजित योजना-समग्र शिक्षा का एक हिस्सा है।

  • निष्ठा कार्यक्रम को अगस्त 2019 में फेस-टू-फेस मोड में आरम्भ किया गया था। इसके बाद, 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने राज्य-क्षेत्रों में समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) के तहत इस कार्यक्रम को लागू किया है।
  • अब तक लगभग 23,000 प्रमुख संसाधन व्यक्तियों तथा 5 लाख शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों को इस निष्ठा फेस टू फेस मोड में कवर किया जा चुका है।

प्रमुख विशेषताएं:

  • निष्ठा के तहत विकसित मोड्यूल्स, बच्चों के समग्र विकास पर फोकस करते है, तथा इसलिए इसमें पाठ्यचर्या और समावेशी शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण, व्यक्तिगत सामाजिक गुणों, कला समेकित अध्ययन, पूर्व-विद्यालय शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक शिक्षा आदि शामिल हैं।
  • सभी मोड्यूल्स अध्ययन परिणामों एवं शिक्षार्थी केंद्रित अध्यापन के इर्द-गिर्द केंद्रित होते हैं।
  • ये मोड्यूल्स शिक्षकों के लिए चिन्तन-मनन के साथ-साथ परस्पर संवादमूलक और संबद्ध करने वाली गतिविधियां हैं, जिसमे शिक्षकों एवं विद्यालय प्रमुखों द्वारा रुचिकर अध्ययन के लिए शिक्षा-प्रद खेलों, क्विज, आदि को सम्मिलित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NISHTHA – किसके द्वारा लागू किया गया?
  2. NISHTHA किससे संबंधित है?
  3. समग्र शिक्षा क्या है?
  4. दीक्षा प्लेटफॉर्म के बारे में।

मेंस लिंक:

निष्ठा कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC)

(United Nations Economic and Social Council- ECOSOC)

संदर्भ: प्रधानमंत्री, ‘संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद’ (United Nations Economic and Social Council- ECOSOC) के उच्च-स्तरीय अनुभाग को संबोधित करेंगे।

वार्षिक उच्च-स्तरीय अनुभाग में सरकार, निजी क्षेत्र एवं सिविल सोसायटी के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों का एक विविध समूह सम्मिलित है।

इस वर्ष के उच्च-स्तरीय अनुभाग की थीम है– ‘कोविड-19 के बाद बहुपक्षवाद: 75वीं वर्षगांठ पर हमें किस तरह के संयुक्त राष्ट्र की जरूरत है।’

संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के बारे में:

  1. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) की स्थापना संयुक्त राष्ट्र चार्टर द्वारा वर्ष 1945 में की गयी थी, यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से है।
  2. ECOSOC, समन्वय, नीति समीक्षा, नीतिगत संवाद और आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर सिफारिशें करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत लक्ष्यों के कार्यान्वयन हेतु प्रमुख संस्था है।
  3. इसमें सदस्यों की संख्या 54 है, तथा इनका निर्वाचन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा तीन-वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है। एक-तिहाई सदस्य प्रतिवर्ष पदमुक्त होते हैं।
  4. ECOSOC, संयुक्त राष्ट्र की 14 विशिष्ट एजेंसियों, दस कार्यात्मक आयोगों और पांच क्षेत्रीय आयोगों के कार्यों का समन्वय करता है। इसके अतिरिक्त, यह संयुक्त राष्ट्र निधियों तथा कार्यक्रमों से रिपोर्ट प्राप्त करता है तथा संयुक्त राष्ट्र तंत्र एवं सदस्य देशों के लिए नीतिगत सिफारिशें प्रदान करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग
  2. ECOSOC- रचना और कार्य
  3. संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद का उच्च-स्तरीय अनुभाग
  4. UNGA तथा UNSC- प्रमुख अंतर

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM)

(National Biopharma Mission)

संदर्भ:

हाल ही में, BIRAC द्वारा घोषणा की गयी, कि जाइडस (Zydus) द्वारा डिजाइन और विकसित प्लास्मिड डीएनए वैक्सीन (plasmid DNA vaccine) जाइकोव – डी (ZyCoV-D) के नैदानिक परीक्षणों की शुरुआत हो गयी है।

  • यह कार्यक्रम भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आंशिक रूप से वित्त पोषित है। यह कोविड-19 के लिए पहली स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है, जिसके लिए ‘स्वस्थ मनुष्यों पर परीक्षण चरण’ की शुरुआत हो गयी है।
  • भारत के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने नेशनल बायोफार्मा मिशन के तहत कोविड-19 के लिए एक स्वदेशी वैक्सीन के तेजी से विकसित करने हेतु जाइडस के साथ साझेदारी की है।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन के बारे में:

यह  देश में बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र के तीव्र विकास हेतु एक उद्योग-अकादमिक सहयोग मिशन है।

  • इस मिशन की शुरुआत वर्ष 2017 में 1500 करोड़ रुपये की राशि के साथ की गयी थी, तथा इसमें 50% राशि का वित्त पोषण विश्व बैंक द्वारा किया गया है।
  • राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन को ‘जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद’ (Biotechnology Industry Research Assistance CouncilBIRAC) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • इस मिशन के तहत सरकार ने बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र में उद्यमिता और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु एक सक्षम तंत्र बनाने के लिये ‘इनोवेट इन इंडिया- i3 (Innovate in Indiai3) कार्यक्रम की शुरुआत की है।

इसके अंतगत चार कार्यक्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:

  1. समन्वित भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य ज़रूरतों की पूर्ति हेतु सस्ते एवं सुलभ, वैक्सीन, बायोसिमिलर्स (Biosimilars) तथा चिकित्सा संबंधी उपकरणों का विकास करना।
  2. साझा अवसंरचना सुविधाओं का उन्नयन तथा उसे उत्पाद की खोज एवं विनिर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित करना।
  3. विशिष्ट प्रशिक्षण प्रदान करके मानव पूंजी विकसित करना।
  4. उद्योग-अकादमिक परस्पर संबंधो की वृद्दि में सहायक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यालयों को स्थापित करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन- उद्देश्य और घटक
  2. इनोवेट इन इंडिया (i3) प्रोग्राम क्या है?
  3. BIRAC के बारे में
  4. DNA और RNA टीकों के बीच अंतर

मेंस लिंक:

NBM की प्रमुख विशेषताओं तथा महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

मानव वृद्धि हार्मोन (hGH)

(Human Growth Hormone)

संदर्भ: वर्ष 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में रजत पदक विजेता और राष्ट्रीय चैंपियन वेटलिफ्टर- प्रदीप सिंह को प्रतिबंधित मानव वृद्धि हार्मोन (Human growth Hormone– hGH) का पॉजिटिव पाया गया है और यह इस तरह का पहला मामला भी है।

इन पर hGH पॉजिटिव पाए जाने के बाद चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है। विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (World Anti-Doping Agency- WADA) द्वारा hGH के प्रयोग को प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने वाले खिलाडियों के लिए निषिद्ध किया गया है

मानव वृद्धि हार्मोन (hGH) क्या है?

hGH को मांसपेशियों में वृद्धि तथा ऊतकों का उपचार करने और इन्हें मजबूत करने के लिए जाना जाता है, इसे ताकत तथा मजबूती वाले खेलों में डोपिंग एजेंट के रूप में प्रयोग किया जाता है।

  • यह मानव शरीर में निर्मित होता है तथा मस्तिष्क के आधार के निकट पिट्यूटरी ग्रंथि (Pituitary Gland) द्वारा स्रावित होता है।
  • पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) निर्मुक्त करने पर यकृत से IGF-1 नामक प्रोटीन का स्राव होता है। यही प्रोटीन, हड्डियों, मांसपेशियों तथा अन्य ऊतकों में वृद्धि को प्रेरित करता है।

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA)

खेलों में ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में समन्वय, निगरानी तथा प्रोत्साहित करने के लिए, कनाडा स्थित अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने ‘विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी’ (World Anti-Doping Agency- WADA) की नींव रखी।

  • इसे वर्ष 1999 में एक अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्र एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था तथा यह खेल-आंदोलनों और विश्व की सरकारों द्वारा समान रूप से वित्त पोषित है।
  • इसका मुख्यालय– मॉन्ट्रियल, कनाडा में है।
  • एजेंसी की प्रमुख गतिविधियों में वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, एंटी-डोपिंग क्षमताओं का विकास तथा विश्व एंटी-डोपिंग संहिता (Code) की निगरानी करना सम्मिलित्त है। विश्व एंटी-डोपिंग संहिता के प्रावधान यूनेस्को इंटरनेशनल कन्वेंशन द्वारा खेलों में डोपिंग के विरुद्ध लागू किये जाते हैं

प्रीलिम्स लिंक:

  1. खेल में डोपिंग के खिलाफ यूनेस्को इंटरनेशनल कन्वेंशन का संक्षिप्त अवलोकन
  2. WADA के बारे में
  3. अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति
  4. hGH क्या है? यह कहाँ जारी किया गया है?
  5. hGH की भूमिका
  6. IGF- 1 प्रोटीन किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी के कार्यों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

गैर-वैयक्तिक डेटा (Non- Personal Data)

हाल ही में, सरकार की विशेषज्ञ समिति द्वारा ‘गैर-वैयक्तिक डेटा’ प्रशासन फ्रेमवर्क पर एक मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया गया है।

इस विशेषज्ञ समिति को वर्ष 2019 में इन्फोसिस के सह-संस्थापक के. गोपालकृष्णन की अध्यक्षता में गठित किया गया था। समिति ने घरेलू कंपनियों और संस्थाओं के लिए, देश में उत्पादित ‘गैर व्यैक्तिक डेटा’ के उपयोग की अनुमति दिए जाने का सुझाव दिया है।

गैर-वैयक्तिक डेटा क्या होता है?

आसान शब्दों में, यह डेटा का वह समूह होता है जिसमें व्यैक्तिक पहचान योग्य कोई भी जानकारी नहीं होती है। अर्थात, ऐसे डेटा को देखकर किसी भी व्यक्ति की पहचान नहीं की जा सकती है।

उदाहरण के लिए, खाद्य वितरण सेवा प्रदान करने वाली किसी कंपनी द्वारा आर्डर लेने पर विवरण में व्यक्ति का नाम, आयु, लिंग तथा अन्य संपर्क जानकारी माँगी जाती है, यदि इस डेटा से पहचानकर्ता के नाम तथा संपर्क जानकारी निकाल दी जाए तो यह गैर-वैयक्तिक डेटा बन जाएगा।

 डेटा का वर्गीकरण:

सरकारी समिति ने गैर-वैयक्तिक डेटा को तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया है, अर्थात्:

सार्वजनिक गैर-वैयक्तिक डेटा (Public non-personal data): इसके अंतर्गत, सरकार तथा उसकी एजेंसियों द्वारा एकत्र किए गए सभी डेटा जैसे, जनगणना, एक अवधि-विशेष में कुल ‘कर प्राप्तियों’ पर नगर निगमों द्वारा एकत्र किए गए डेटा अथवा सभी सार्वजनिक वित्त पोषित कार्यों के निष्पादन के दौरान एकत्र की गई कोई भी जानकारी को सम्मिलित किया गया है।

सामुदायिक गैर-वैयक्तिक डेटा (Community Non-Personal Data): इसके अंतर्गत, किसी एक भौगोलिक स्थिति में रहने वाले, एक धर्म को मानने वाले, समान रोजगार अथवा अन्य सामुदायिक सामाजिक अभिरुचियों संबंधी डेटा को सम्मिलित किया गया है।

निजी गैर- वैयक्तिक डेटा (Private Non-Personal Data): इसमें, किसी व्यक्ति द्वारा उत्पादित डेटा को सम्मिलित किया गया है, जिसे किसी सॉफ्टवेयर अथवा एप्लीकेशन के माध्यम से प्राप्त किए जा सकता है।

समिति के सुझाव:

  1. गैर-वैयक्तिक डेटा के प्रशासन हेतु एक अलग कानून बनाना।
  2. एक नया नियामक निकाय- गैर-वैयक्तिक डेटा प्राधिकरण (Non-Personal Data AuthorityNPDA) की स्थापना।
  3. रिपोर्ट में डेटा प्रिंसिपल, डेटा कस्टोडियन, डेटा ट्रस्टी, और डेटा ट्रस्ट सहित गैर-व्यक्तिगत डेटा पारितंत्र में नए हितधारकों की पहचान तथा परिभाषित किया गया है।
  4. समिति की रिपोर्ट में, उन परिस्थितियां का निर्धारण किया गया है, जिनके तहत किसी निजी संगठन द्वारा गैर- वैयक्तिक डेटा एकत्र करने पर पारिश्रमिक दिए जाने की आवश्यकता है।

नियमन की आवश्यकता:

विश्व में हो रहे डिजिटल रूपांतरणों के कारण डेटा अब एक परिसंपत्ति के रूप में माना जाता है, जिसे कभी प्रत्यक्ष रूप से व्यापार के माध्यम से अथवा अप्रत्यक्ष रूप से, डेटा के आधार पर सेवाओं को विकसित करके मुद्रीकृत किया जाता है

  1. डेटा अर्थव्यवस्था में, ‘सबसे बड़े डेटा-पूल वाली कंपनियों ने काफी अधिक विस्तार किया है तथा तकनीकी-आर्थिक लाभों को फायदा उठाया है।” इन कंपनियों ने, विस्तुत डेटा पूल बनाने के लिए अपनी ‘प्राथमिक-स्थिति’ का लाभ उठाया है, जिससे छोटे स्टार्टअप्स को अक्सर प्रतिस्पर्धा से बाहर कर दिया जाता है, अथवा उनके प्रवेश के लिए बाधाएं खडी कर दी जाती हैं।
  2. भारत, विश्व में दूसरा सर्वाधिक जनसँख्या वाला देश है, तथा यह वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन उपयोगकर्ता देश है। विस्तार की दृष्टि से, भारत विश्व के सबसे बड़े डेटा बाजारों में से एक है।

गैर-वैयक्तिक डेटा पर वैश्विक मानक

मई 2019 में यूरोपीय संघ (European Union-EU) द्वारा गैर- वैयक्तिक डेटा के मुक्त प्रवाह हेतु एक नियामक फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया था, जिसमें इसने, डेटा साझाकरण के मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों द्वारा परस्पर सहयोग करने का सुझाव दिया।

विश्व के कई अन्य देशों में, वैयक्तिक अथवा गैर- वैयक्तिक डेटा के लिए,  कोई भी राष्ट्रव्यापी डेटा संरक्षण कानून नहीं हैं।

अंतिम मसौदे में सम्मिलित किये जाने के लिए सुझाव

‘गैर-वैयक्तिक डेटा’ प्रशासन फ्रेमवर्क का अंतिम मसौदा में निम्नलिखित चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए:

  1. डेटा प्रिंसिपल, डेटा कस्टोडियन, डेटा ट्रस्टी आदि सभी प्रतिभागियों की भूमिकाओं को परिभाषित किया जाए।
  2. बाजार सहभागियों को निश्चितता प्रदान करने के लिए विनियमन को स्पष्ट, सुव्यक्त तथा संक्षिप्त होना चाहिए।
  3. नियामक ढांचे में प्रतिभागियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हाल ही में, भारत में किस राज्य ने सरकारी नौकरियों में प्लाज्मा दाताओं को वरीयता देने का फैसला किया है?

असम सरकार ने प्लाज्मा-दाताओं को सरकारी नौकरियों में वरीयता देने का फैसला किया है।

सरकार द्वारा दिए जाने वाले अन्य लाभ:

  1. साक्षात्कार में अतिरिक्त अंक
  2. एक प्रमाण पत्र
  3. सरकार द्वारा सरकारी योजनाओं में वरीयता देने पर भी विचार किया जा रहा है।
  4. अन्य राज्यों के प्लाज्मा दान कर्ताओं को असम की यात्रा के दौरान राज्य अतिथि गृह की सुविधा प्रदान की जाएंगी तथा राज्य सरकार उनकी वापसी के लिए हवाई टिकट का खर्च वहन करेगी।

हाल ही में चर्चित APT29 क्या है?

APT29 रशियन हैकर्स का ग्रुप है। इस ग्रुप को the Dukes और Cozy Bear के नाम से भी जाना जाता है।

  • यह ग्रुप, खुफिया जानकारी के लिए मुख्य रूप से सरकारी, राजनयिक, थिंक-टैंक, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा संस्थानों को लक्ष्य बनाता है, और इसके लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों और तकनीकों का प्रयोग करता है।
  • APT29 वैश्विक स्तर पर संस्थानों को लक्षित करने के लिए ‘वेलमेस’ (WellMess) और ‘वेलमेल’ (WellMail) के रूप में जाने जाने वाले मैलवेयर का उपयोग कर रहा है।
  • APT29 पर वैक्सीन डेटा चुराने की कोशिश करने का आरोप है।

चर्चित स्थल- चट्टोग्राम बंदरगाह

(Chattogram Port)

हाल ही में, कोलकाता बंदरगाह से बांग्लादेश के चट्टोग्राम बंदरगाह होते हुए अगरतला के लिए पहला परीक्षण मालवाहक जहाज को रवाना किया गया।

इके, भारत के पारगमन जहाजों की आवाजाही के लिए चट्टोग्राम और मोंगल बंदरगाह का उपयोग करने हेतु बांग्लादेश के साथ हुए समझौते के तहत किया गया है।

भारत-भूटान के मध्य नया व्यापार मार्ग

भारत और भूटान ने पश्चिम बंगाल के जयगांव (Jaigaon) तथा भूटान के पासाखा (Pasakha) के बीच एक नया व्यापार मार्ग खोला है।

औद्योगिक कच्चे माल की आवाजाही के लिए पसाखा इंडस्ट्रियल एस्टेट और माल की आवाजाही के लिए यह नया मार्ग द्विपक्षीय व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि करने के साथ–साथ जयगांव- फुंतशोलिंग मार्ग (Jaigaon-Phuentsholing route) पर वाहनों के आवागमन भी कम करेगा।

India_Bhutan


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