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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 July

विषय – सूची:

सामान्य अध्ययन-I

1. वैश्विक जनसंख्या प्रवृत्तियों पर एक अध्ययन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सक्रिय औषधीय सामग्री (API) पर रिपोर्ट

2. शिशु निमोनिया के निवारण हेतु पहले स्वदेश निर्मित टीके को स्वीकृति

3. भारत ऊर्जा मॉडल फोरम

4. एशियाई विकास बैंक (ADB)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. संयुक्त अरब अमीरात का पहला मंगल मिशन ‘होप’

2. चंबल नदी में डॉल्फिन की संख्या में कमी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. आजाद पट्टन जल विद्युत परियोजना

2. चर्चित स्थल: मोंट ब्लांक पर्वत श्रृंखला

3. कोच्चि पोर्ट केरल का वल्लारपदम टर्मिनल- भारत का पहला ट्रांस-शिपमेंट हब

4. ‘मिल्क टी अलायंस’ (Milk Tea Alliance) क्या है?

5. चियांग मे पहल (Chiang Mai initiative – CMI)

6. मेलघाट टाइगर रिज़र्व (MTR)

7. सुपरकैपेसिटर (Super capacitor) क्या है?

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

वैश्विक जनसंख्या प्रवृत्तियों पर एक अध्ययन

(A study on world population trends)

हाल ही में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के ‘इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ (Institute for Health Metrics and Evaluation- IHME) के शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन किया गया था। इसके अंतर्गत शोधकर्ताओं द्वारा विश्व के 195 देशों में जनसंख्या प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया।

इसके लिए शोधकर्ताओं द्वारा विभिन्न परिदृश्यों में भविष्य की जनसंख्या का प्रतिरूप तैयार करने के लिए ‘द ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज स्टडी’ (Global Burden of Disease Study) 2017 के आंकड़ों का उपयोग किया गया।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • विश्व की जनसंख्या वर्ष 2064 में चरम पर पहुँच जायेगी तथा इस समय कुल जनसँख्या 9. 73 बिलियन हो जाएगी।
  • पिछले वर्ष की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स’ में वर्ष 2100 में 11 बिलियन जनसँख्या के साथ चरम स्थिति का अनुमान किया गया था।
  • IHME के अध्ययन के अनुसार, जनसंख्या की चरम स्थिति UN रिपोर्ट के अनुमानों से 36 वर्ष पूर्व होगी
  • अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2064 में चरम पर पहुँच पहुचने के बाद वर्ष 2100 में 8.79 बिलियन की कमी होगी।

रिपोर्ट में वैश्विक सकल प्रजनन दर (TFR)

वैश्विक सकल प्रजनन दर (Total Fertility Rate- TFR), वर्ष 2017 में 2.37 से घटकर वर्ष 2100 में 1.66 हो जाने का अनुमान है।

  • 183 देशों में TFR के 2.1 से नीचे जाने का अनुमान है।
  • जापान, थाईलैंड, इटली और स्पेन सहित 23 देशों में, TFR में 50% से अधिक की कमी होगी।

एक पूरी पीढ़ी के प्रतिस्थापन के लिए, प्रतिस्थापन-स्तर सकल प्रजनन दर (TFR) 2.1 मानी जाती है।

भारत संबंधी निष्कर्ष:

  • अध्ययन के अनुसार, भारत में जनसँख्या, वर्ष 2017 (38 बिलियन) से बढ़कर वर्ष 2048 (1.6 बिलियन) में अपनी चरमावस्था में पहुँच जायेगी।
  • वर्ष 2100 तक, जनसंख्या में 32% की कमी होगी, तथा वर्ष 2100 में भारत की कुल जनसंख्या 1.09 बिलियन होने का अनुमान है।
  • भारत की सकल प्रजनन दर (TFR), वर्ष 2019 में पहले से ही 2.1 से कम है। वर्ष 2100 में TFR 1.29 तक हो जाएगी।
  • भारत में कामकाजी उम्र के वयस्कों (20-64 वर्ष) की संख्या 2017 में 748 मिलियन थी, इसके वर्ष 2100 तक घटकर लगभग 578 मिलियन हो जाने का अनुमान है। हालांकि, यह वर्ष 2100 तक विश्व की सबसे बड़ी कामकाजी-आयु वर्ग की आबादी होगी।
  • वर्ष 2020 के मध्य तक, भारत द्वारा, चीन की कामकाजी जनसंख्या (2017 में 950 मिलियन, तथा वर्ष 2100 में 357 मिलियन) को पीछे करने की उम्मीद है।
  • वर्ष 2017 से वर्ष 2100 तक, भारत के सर्वाधिक जीडीपी वाले देशों की सूची में सातवें स्थान तीसरे स्थान तक पहुचने का अनुमान है।
  • भारत, वर्ष 2100 में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सकल आव्रजन करने वाला देश होगा। वर्ष 2100 में भारत में बाहर से प्रवास करने वालों की संख्या, भारत से बाहर प्रवास करने वालों की संख्या की तुलना में लगभग 5 लाख अधिक होगी।
  • वर्ष 2017 अथवा 2100 में सर्वाधिक जनसँख्या वाले 10 देशों में, भारत में जीवन प्रत्याशा काफी कम (2017 में  69.1 से बढ़कर वर्ष 2100 में 79.3 वर्ष) होने का अनुमान है।

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 चुनौतियां

रिपोर्ट के पूर्वानुमान, घटते कार्यबल के समक्ष आर्थिक वृद्धि की चुनौती को उजागर करते है, जिसमे बढ़ती उम्र की जनसँख्या के स्वास्थ्य तथा सामाजिक सहयोग तंत्रों का भारी बोझ सम्मिलित है।

रिपोर्ट में, महिला शिक्षा में वृद्धि तथा गर्भनिरोधक उपायों को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप प्रजनन में तीव्रता से कमी तथा धीमी जनसंख्या वृद्धि होगी।

आगे की राह

सभी देशों के लिए घटती हुई कामकाजी जनसंख्या से होने वाले संभावित भयावह प्रभाव के सामाधान हेतु उपाय करने चाहिए।

सुझाए गए उपाय: TFR में वृद्धि हेतु प्रोत्साहन तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का प्रयोग।

यूनाइटेड किंगडम तथा USA जैसे समृद्ध देश, बढ़ती जनसँख्या वाले देशों के कामकाजी युवाओं के प्रवासन से इन परिवर्तनों से होने वाले प्रभावों का मुकाबला कर सकते हैं।

महिलाओं के लिए प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों के साथ अधिक आर्थिक स्वतंत्रता भी प्रदान की जानी चाहिए। इससे महिलाएं सामाजिक व्यवस्था में अपनी शर्तो पर प्रजनन कर सकती है, तथा बेहतर परवरिश की मांग कर सक्ती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘द ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज स्टडी’ क्या है? इसे कौन जारी करता है?
  2. सर्वाधिक जीडीपी वाले शीर्ष 5 देश।
  3. TFR क्या है

 नोट: उपरोक्त लेख में काफी मात्रा में तथ्य दिए गए है। परन्तु, प्रीलिम्स के लिए, प्रमुख डेटा जैसे- TFR, दोगुना होने की दर, जनसंख्या चरम, कामकाजी जनसंख्या (भारत से संबंधित तथ्यों पर विशेष) पर ध्यान केंद्रित करें, तथा संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन प्रॉस्पेक्ट्स’ के आंकड़ों के साथ इन आंकड़ों की तुलना भी करें।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

सक्रिय औषधीय सामग्री (API) पर रिपोर्ट

(Report on ‘Active Pharmaceutical Ingredients)

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन, ‘प्रौद्योगिकी सूचना पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद’ (Technology Information Forecasting and Assessment Council- TIFAC) द्वारा हाल ही में ‘सक्रिय औषधीय सामग्री- स्थिति, मुद्दे, प्रौद्योगिकी तत्परता और चुनौतियां’ शीर्षक पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई।

रिपोर्ट में दी गई प्रमुख अनुशंसाएं:

  1. अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी विकास के पक्षों पर ध्यान केंद्रित करना,
  2. अणुओं के निर्बाध संश्लेषण के लिए स्पष्ट लक्ष्य के साथ मिशन के रूप में रसायन अभियांत्रिकी की आवश्यकता,
  3. भारत में सामान्य बुनियादी ढाँचे के साथ व्यापक स्तर पर औषध विनिर्माण समूहों का सृजन,
  4. फ्लोरीनेशन और अनुकूल लागत हेतु प्रक्रियागत चरणों को कम करते हुए जैव प्रौद्योगिकी के लिए प्रौद्योगिकी मंच का विकास करना,
  5. व्यापक क्षमता के प्रोत्साहन क्षेत्र में प्राथमिकता रूप से निवेश,
  6. जोखिमपूर्ण अभिक्रियाओं, प्रवाह रसायन विज्ञान, क्रायोजेनिक अभिक्रियाओं और झिल्ली प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता की सहायता को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहन देना।

API क्या होता है?

प्रत्येक औषधि दो मुख्य अवयवों से बनती हैरासायनिक रूप से सक्रिय API तथा रासायनिक रूप से निष्क्रिय, एक्ससिपिएंट्स (Excipients)। एक्ससिपिएंट्स, ऐसा तत्व होता है जो किसी व्यक्ति के शरीर में API को प्रभावी बनाता है।

  • API, वे रासायनिक यौगिक होते है जो किसी दवा के उत्पादन करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल होते है।
  • औषधियों में, API किसी बीमारी को ठीक करने के लिए इच्छित प्रभाव पैदा करते है। उदाहरण के लिए, पैरासिटामोल, क्रोसिन के लिए API है और यह API पैरासिटामोल, शरीर में दर्द और बुखार से राहत देता है।
  • फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन दवाओं में कई API का उपयोग किया जाता है, जबकि क्रोसिन जैसी सिंगल-डोज़ दवा सिर्फ एक API का उपयोग करती हैं।

API का निर्माण किस प्रकार होता है?

  • API मात्र कच्चे माल की एक अभिक्रिया द्वारा उत्पादित नहीं किये जाते है, बल्कि कई रासायनिक यौगिकों के माध्यम से API बनता है। वे रासायनिक यौगिक, जो कच्चे माल से API बनने की प्रक्रिया में होते है, मध्यवर्ती (intermediate) कहे जाते हैं।
  • कुछ APIs ऐसे होते हैं जो कच्चे माल से API बनने की प्रक्रिया में दस से अधिक प्रकार के मध्यवर्ती योगिकों से होकर गुजरते हैं। इस दीर्घ निर्माण प्रक्रिया को उच्च स्तर की शुद्धता की प्राप्ति तक जारी रखा जाता है।

भारत के लिए चिंता का विषय

भारत कई देशों में उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, इसके बावजूद भी ‘भारतीय औषधि उद्योग’ API के लिए चीन पर काफी निर्भर है।

  • वित्तीय वर्ष 2018-19 में, सरकार ने लोकसभा को सूचित किया था कि देश के दवा निर्माताओं द्वारा चीन से भारी मात्रा में 2.4 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं और मध्यवर्ती का आयात किया गया था।
  • घातक कोरोनावायरस माहामारी की बजह से लगने वाले लॉकडाउन के कारण, एचआईवी, कैंसर, मिर्गी, मलेरिया के इलाज के लिए दवाओं का उत्पादन करने तथा आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक्स और विटामिन की गोलियों के उत्पादन हेतु चीन से कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।

भारत, API मार्केट में चीन से किस प्रकार पिछड़ गया?

90 के दशक की शुरुआत में, भारत API उत्पादन में आत्मनिर्भर था। हालांकि, API निर्माता के रूप में चीन के उदय के साथ, इसने भारतीय बाजार पर सस्ते उत्पादों के माध्यम से कब्जा कर लिया।

  • चीन ने कम लागत वाला API उत्पादन उद्योग स्थापित कर लिया। इस उद्योग को कम-लागत पूंजी तथा सरकार द्वारा भारी मात्रा में वित्तीय सहायता तथा कर प्रोत्साहन आदि का लाभ मिला।
  • चीन में उद्योग परिचालन की लागत भारत की लागत की एक-चौथाई है। यहां तक ​​कि चीन में वित्तीय लागत 6-7 प्रतिशत है, जबकि भारत में वित्तीय लागत 13-14 प्रतिशत होती है।
  • अतः, अधिक लागत तथा कम मुनाफे वाले उद्योग के कारण भारतीय फार्मा कंपनियों ने कुछ वर्षों से API का उत्पादन बंद कर दिया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. API क्या है?
  2. मध्यवर्ती क्या है?
  3. फिक्स्ड-डोज़ दवाओं बनाम सिंगल-डोज़ दवा संयोजनों में API
  4. भारत तथा चीन में API उत्पादन की तुलना
  5. औषधियों में एक्ससिपिएंट्स क्या होते हैं?

मेंस लिंक:

API क्या हैं? API उद्योग में चीन कैसे और क्यों एक अग्रणी निर्माता बन गया? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

शिशु निमोनिया के निवारण हेतु पहले स्वदेश निर्मित टीके को स्वीकृति

(First indigenous vaccine for infant pneumonia approved)

भारतीय औषधि महानियंत्रक (Drug Controller General of IndiaDCGI)  ने पहली बार पूरी तरह से स्‍वदेशी तरीके से विकसित ‘न्यूमोकोकल पॉलीसैकराइड कंजुगेट’ टीके (Pneumococcal Polysaccharide Conjugate Vaccine) को बाजार में बेचने की मंजूरी दे दी है।

यह टीका ‘मेसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’, पुणे द्वारा विकसित किया गया है।

यह टीका शिशुओं में “स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया” (Streptococcus pneumonia) के कारण होने वाले रोग और निमोनिया के खिलाफ सक्रिय टीकाकरण अभियान के लिए उपयोग किया जाता है।

निमोनिया किस प्रकार फैलता है?

निमोनिया, बैक्टीरिया, वायरस तथा कवक आदि संक्रामक एजेंटों के माध्यम से फैलता है।

बच्चों में बैक्टीरिया-जनित निमोनिया का सबसे आम कारण स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया होता है, तथा हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (Haemophilus influenzae type b- Hib) बैक्टीरिया-जनित निमोनिया का दूसरा सामान्य कारण है। रेस्पिरेटरी सिंक्राइटियल वायरस (Respiratory syncytial virus) निमोनिया का सबसे आम वायरल कारण है।

संक्रमित व्यक्ति के फेफड़े (वायु-कोश) में द्रव्य तथा मवाद के जमा होने के कारण अवरुद्ध हो जाते है, जिससे व्यक्ति को सांस लेना कठिन हो जाता है।

संक्रमण के लक्षण

इसके लक्षणों में, तेज बुखार तथा ठंड लगना, कफ के साथ खांसी, शारीरिक कमजोरी तथा अस्वस्थ होने की भावना, सांस लेने में तकलीफ तथा धडकनों का बढ़ना आदि सम्मिलित होते हैं।

रोकथाम तथा उपचार

निमोनिया के निवारक उपायों में स्वच्छता तथा निमोनिया-कारक जीवाणुओं के लिए प्रतिरोधी टीकाकरण को सम्मिलित किया जाता है।

किसी बच्चे को निमोनिया से बचाने के लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, जिसमें सामान्यतः एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए औसतन पांच से सात दिनों तक उपचार चलता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. निमोनिया- प्रकार, कारण और लक्षण
  2. एंटीजन बनाम एंटीबाडी।
  3. टीका कैसे काम करता है?
  4. टीकों के प्रकार।
  5. DGCI के बारे में।
  6. भारत में वैक्सीन की मंजूरी के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।

स्रोत: द हिंदू

 

भारत ऊर्जा मॉडल फोरम

(India Energy Modelling Forum)

हाल ही में, सतत विकास स्तंभ (Sustainable Growth Pillar) के संयुक्त कार्य समूह की बैठक में,  भारत ऊर्जा मॉडल फोरम का शुभारंभ किया गया।

  • गठन: फोरम में ज्ञान साझेदार, डेटा एजेंसियां और संबंधित सरकारी मंत्रालय शामिल होंगे।
  • शुरुआती स्तर पर नीति आयोग मंच की गतिविधियों का समन्वय करेगा और इसकी शासकीय संरचना को अंतिम रूप देगा।

पृष्ठभूमि

  • सतत विकास आधार स्तंभ भारत-अमेरिकी रणनीतिक ऊर्जा भागीदारी का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह नीति आयोग और USAID की सहअध्यक्षता वाला मंच है।
  • सतत विकास आधार स्तंभ तीन प्रमुख गतिविधियों के रूप में ऊर्जा डेटा प्रबंधन,ऊर्जा मॉडलिंग प्रबंधन और कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों के सहयोग पर जोर देता है।

फोरम का उद्देश्य

  1. महत्वपूर्ण ऊर्जा और पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करना;
  2. निर्णय लेने की प्रक्रिया से भारत सरकार को अवगत कराना;
  3. मॉडलिंग टीमों, सरकार और ज्ञान के भागीदारों और वित्त पोषकों के बीच सहयोग में सुधार;
  4. विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाना, उच्च गुणवत्ता वाला अध्ययन सुनिश्चित करना ;
  5. विभिन्न स्तरों पर और विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान के बीच परस्पर कमी की पहचान करना;
  6. भारतीय संस्थानों की क्षमता बढ़ाने में मदद करना।

ऊर्जा मॉडलिंग क्या है?

ऊर्जा मॉडलिंग या ऊर्जा प्रणाली मॉडलिंग एक प्रक्रिया है, जिसमे ऊर्जा प्रणालियों के कंप्यूटर मॉडल तैयार किये जाते है, तथा, इसके पश्चात इनका विश्लेषण किया जाता है।

  • इस तरह के मॉडल अक्सर किसी परियोजना में तकनीकी और आर्थिक स्थितियों के संदर्भ में विभिन्न अनुमानों के परीक्षण हेतु परिदृश्य विश्लेषण का उपयोग करते हैं।
  • इसके परिणामों में, प्रणाली की व्यवहार्यता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन, संचयी वित्तीय लागत, प्राकृतिक संसाधन उपयोग, तथा प्रणाली की ऊर्जा दक्षता के बारे में पता चलता है।

ऊर्जा मॉडलिंग फ़ोरम (EMF) क्या हैं?

संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊर्जा मॉडलिंग फोरम (Energy Modelling Forums- EMF) की स्थापना 1976 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में सरकार, उद्योग, विश्वविद्यालयों और अन्य शोध संगठनों के प्रमुख मॉडलिंग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक साथ लाने के लिए की गई थी।

फोरम, ऊर्जा और पर्यावरण से संबधित समकालीन मुद्दों पर चर्चा के लिए एक निष्पक्ष मंच प्रदान करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नीति आयोग – रचना और प्रमुख कार्य।
  2. EMF की भूमिका।
  3. सतत विकास स्तंभ क्या है?
  4. ऊर्जा मॉडलिंग क्या है?

मेंस लिंक:

भारतीय ऊर्जा मॉडलिंग फोरम के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

एशियाई विकास बैंक (ADB)

(Asian Development Bank)

हाल ही में, एशियाई विकास बैंक (Asian Development Bank- ADB) द्वारा भारत के निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा को निजी क्षेत्र के परिचालन तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी के लिए उपाध्यक्ष (Vice-PresidentVP) नियुक्त किया गया है।

एशियाई विकास बैंक के बारे में:

  • यह एक क्षेत्रीय विकास बैंक है
  • 19 दिसंबर 1966 को स्थापित किया गया।
  • मुख्यालय – मनीला, फिलीपींस।
  • आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक।

सदस्यता: बैंक में ‘एशिया एवं प्रशांत के लिये आर्थिक तथा सामाजिक आयोग’ (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific- UNESCAP) और गैर-क्षेत्रीय विकसित देशों को सदस्यों के रूप में सम्मिलित किया जाता है।

  • वर्तमान में, इसमें 68 सदस्य हैं।

मताधिकार (Voting rights):

एशियाई विकास बैंक में वोटिंग अधिकारों को विश्व बैंक में प्रचलित पद्धति के सामान बनाया गया है। अर्थात्, मतों का वितरण सदस्य राष्ट्रों की पूंजी के अनुपात में होता है।

भूमिका तथा कार्य

  1. एशियाई विकास बैंक, स्वयं के लिए एक सामाजिक विकास संगठन के रूप में परिभाषित करता है, जो समावेशी आर्थिक विकास, पर्यावरणीय रूप से स्थायी विकास और क्षेत्रीय एकीकरण के माध्यम से एशिया और प्रशांत क्षेत्र में गरीबी को कम करने के लिए समर्पित है।
  2. इन कार्यों को, ऋण, अनुदान और सूचना की साझेदारी – बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, वित्तीय और सार्वजनिक प्रशासन प्रणालियों, राष्ट्रों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिए तैयार करने में सहयोग तथा प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन आदि क्षेत्रों में निवेश, के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ADB के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
  2. ADB का मुख्यालय
  3. ADB सदस्यों के वोटिंग अधिकार
  4. यह विश्व बैंक से किस प्रकार भिन्न है?
  5. ADB के सदस्य कौन हो सकते हैं।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 संयुक्त अरब अमीरात का पहला मंगल मिशन ‘होप’

(Hope: UAE’s first mission to Mars)

संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates UAE) का मंगल ग्रह के लिए पहला मिशन 16 जुलाई को लॉन्च होने वाला है। इसे जापान के तनेगाशिमा स्पेस सेंटर (Tanegashima Space Center) से प्रक्षेपित किया जायेगा।

मिशन प्रक्षेपण हेतु जुलाई माह का महत्व

मंगल ग्रह के लिए अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से जुलाई माह में प्रक्षेपित किया जाता है, क्योंकि पृथ्वी और मंगल, दोनों अलग-अलग गतियों से सूर्य की परिक्रमा करते हैं तथा प्रत्येक दो वर्ष में एक बार परस्पर निकटतम बिंदुओं पर संरेखित होते हैं।

मिशन होप (Hope Mission)

मिशन होप की घोषणा वर्ष 2015 में की गयी थी। इसका उद्देश्य, मानव-जाति के लिए ‘लाल ग्रह’ के वातावरण का पहला सम्पूर्ण प्रतिरूप तैयार करना था।

  • होप मिशन एक मंगल की परिक्रमा करने वाला अंतरिक्ष यान है, जो मंगल ग्रह के विरल वातावरण का अध्ययन करेगा।
  • इस मिशन का आधिकारिक नाम अमीरात मार्स मिशन (Emirates Mars Mission- EMM) है, ऑर्बिटर को होप (Hope) अथवा अल अमाल (‘Al Amal’) नाम दिया गया है।
  • इस मिशन के सफल होने पर, होप ऑर्बिटर, अमेरिका, यूरोप और भारत के मंगल ग्रह का अध्ययन करने वाले छह मिशनों में सम्मिलित हो जाएगा।

होप ऑर्बिटर (Hope Orbiter)

होप प्रोब की मिशन-आयु एक मंगल-वर्ष (Martian year) है, जो पृथ्वी के लगभग दो वर्षों के बराबर है।

होप प्रोब के तीन मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. मंगल के वातावरण की निचली सतह तथा ग्रह पर जलवायु की गतिशीलता का अध्ययन, और मंगल का पहला ग्लोबल वेदर मैप तैयार करना।
  2. मंगल के उपरी तथा निचले वातावरण की स्थितियों के परस्पर संबंध तथा ग्रह से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के पलायन में मंगल के वातावरण की भूमिका को स्पष्ट करना।
  3. मंगल के ऊपरी वायुमंडल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की उपस्थिति तथा परिवर्तनशीलता का अध्ययन।

मिशन का महत्व:

  • मंगल ग्रह पर पानी की उपस्थिति के प्रमाण तथा जैव पदार्थो के अवशेष इस तथ्य की ओर संकेत करते हैं, कि यह लाल ग्रह कभी जीवन-योग्य था।
  • मंगल के अतीत की समझ वैज्ञानिकों को पृथ्वी के भविष्य को समझने में मदद कर सकती है।

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प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित का संक्षिप्त विवरण:

  1. MAVEN
  2. मार्स ऑर्बिटर मिशन
  3. नासा की Curiosity तथा Opportunity मिशन
  4. एक्सोमार्स (ExoMars)
  5. ओडिसी (Odyssey)

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

चंबल नदी में डॉल्फिन की संख्या में कमी

(Dolphin number dips in Chambal river)

हाल ही में, मध्य प्रदेश के वन विभाग द्वारा डॉल्फिन की नवीनतम गणना रिपोर्ट जारी की गयी है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:

  • रिपोर्ट के अनुसार, 435 किलोमीटर लंबे चंबल नदी अभयारण्य में मात्र 68 डॉल्फ़िन बचे हैं। चंबल नदी अभयारण्य (Chambal river sanctuary), तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान- में विस्तृत है।
  • चंबल नदी में डॉल्फ़िन की संख्या पिछले चार वर्षों में 13 प्रतिशत कम हो गई है।
  • वर्ष 2016 में चंबल नदी में डॉल्फ़िन की संख्या 78 थी, इसके बाद से इनकी संख्या में लगातार कमी हो रही है।

डॉल्फ़िन की संख्या में कमी के कारण

  1. अवैध रेत खनन
  2. नदी के पानी का अति प्रयोग
  3. नदी की धारा में बदलाव
  4. अंतर्देशीय जलमार्ग / बड़े मालवाहक जहाजों का आवागमन
  5. विभिन्न मानव / धार्मिक गतिविधियाँ
  6. मत्स्यन संबंधी गतिविधियों से दुर्घटनावश मौत

गंगा डॉल्फिन- प्रमुख तथ्य:

  1. इसका वैज्ञानिक नाम प्लैटनिस्टा गैंगेटिका (Platanista gangetica) है।
  2. यह IUCN की संकटग्रस्त (Endangered) सूची में सूचीबद्ध है।
  3. इसकी आँखें अल्पविकसित होती हैं। यह तैरने से शिकार तक पराश्रव्य ध्वनियों (Ultrasonic Sound) के माध्यम से करती हैं।
  4. यह भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसे सुसु(Susu) के नाम से जाना जाता है
  5. भारत में ये सात राज्यों- असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल– में पायी जाती हैं।

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स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


आजाद पट्टन जल विद्युत परियोजना

अवस्थति: 700MW की यह विद्युत् परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के सुधनोटी (Sudhanoti) जिले में झेलम नदी पर प्रस्तावित है।

चर्चा का कारण: पाकिस्तान और चीन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत इस परियोजना के निर्माण हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस क्षेत्र में अन्य परियोजनाएँ:

  • कोहाला जल विद्युत परियोजना – 1,100 मेगावाट की क्षमता वाली जल विद्युत परियोजना मुजफ्फराबाद के पास झेलम नदी पर।
  • कारोट हाइड्रोपावर स्टेशन– झेलम नदी पर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावलपिंडी जिले तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कोटली जिले की सीमा पर अवस्थित है।
  • गिलगित- बाल्टिस्तान में दो जलविद्युत परियोजनाओं की योजना बनाई गई है – फंडार हाइड्रो पावर, और गिलगित केआईयू (Gilgit KIU)।

चर्चित स्थल: मोंट ब्लांक पर्वत श्रृंखला

(Mont Blanc mountain range)

चर्चा का कारण

हाल ही में, यूरोप के मोंट ब्लांक पर्वत श्रेणी के एक ग्लेशियर के पिघलने से, वहां पर पिछले 54 वर्षों से दफ़न भारतीय समाचार पत्रों को नष्ट कर दिया, इनमे से कुछ अखबारों में, वर्ष 1966 में इंदिरा गांधी की चुनावी जीत के सन्दर्भ में भारत की प्रथम महिला प्रधान-मंत्री’ जैसे शीर्षक वाले, ऐतिहासिक महत्व के अखबार थे।

ये समाचार पत्र, मोंट ब्लांक पर 24 जनवरी, 1966 को दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया की उड़ान 101, बोइंग 707 विमान के अवशेषों में से थे।

दुर्घटना में 177 सवार यात्रियों के मौत हो गयी थी, इन में भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहाँगीर भाभा भी थे।

अवस्थिति:

  1. मोंट ब्लांक यूरोप में माउंट एल्ब्रस के बाद दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत है।
  2. यह आल्प्स और पश्चिमी यूरोप का सबसे ऊँचा पर्वत है।
  3. इसे यूरोप की छत’ भी कहा जाता है।
  4. इसे फ्रेंच में व्हाइट माउंटेन के रूप में भी जाना जाता है।
  5. इटली और फ्रांस के बीच की सीमा मोंट ब्लांक के शिखर से होकर गुजरती है।

कोच्चि पोर्ट केरल का वल्लारपदम टर्मिनल- भारत का पहला ट्रांस-शिपमेंट हब

कोचीन बंदरगाह के वल्लारपदम टर्मिनल की परिकल्पना भारत के पहले ट्रांस-शिपमेंट बंदरगाह के रूप में की गई है।

ट्रास-शिपमेंट हब, पोर्ट पर वो टर्मिनल होते है जो कंटेनरों को संभालता है, उन्हें अस्थायी रूप से संग्रहीत करता है और उन्हें आगे के गंतव्य के लिए अन्य जहाजों में स्थानांतरित करता है।

‘मिल्क टी अलायंस’ (Milk Tea Alliance) क्या है?

‘मिल्क टी अलायंस’ शब्द का प्रयोग थाईलैंड, हांगकांग और ताइवान के सोशल मीडिया उपयोगकर्त्ता ऑनलाइन लोकतांत्रिक एकजुटता का प्रदर्शन करने तथा ताइवान एवं हांगकांग देशों की संप्रभुता का समर्थन करने के लिये कर रहे हैं।

  • यह आन्दोलन सोशल मीडिया पर चीनी ट्रॉल्स तथा राष्ट्रवादी टिप्पणीकारों द्वारा अपमानजनक कमेंट्स के प्रत्युत्तर में उत्पन्न हुआ है।
  • ‘मिल्क टी अलायंस’ सोशल मीडिया के उपयोगकर्त्ताओं द्वारा गढ़ा गया एक अनौपचारिक शब्द है, क्योंकि दक्षिण-पूर्वी एशियाई क्षेत्र में चीन को छोड़कर शेष सभी देशों में दूध के साथ चाय का सेवन किया जाता है।

चियांग मे पहल (Chiang Mai initiative CMI)

  • यह दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN), पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (हांगकांग सहित), जापान और दक्षिण कोरिया सहित 10 सदस्यों के मध्य एक बहुपक्षीय मुद्रा स्वैप व्यवस्था है।
  • इसे ‘क्षेत्रीय अल्पकालिक तरलता’ समस्याओं का प्रबंधन करने और IMF पर निर्भरता समाप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2010 में शुरू किया गया था।

मेलघाट टाइगर रिज़र्व (MTR)

(Melghat Tiger Reserve)

  • यह महाराष्ट्र के अमरावती जिले में स्थित है।
  • यह मध्य भारत में सतपुड़ा पर्वत श्रेणी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है, जिसे गाविलगढ़ पहाडी कहा जाता है।
  • ताप्ती नदी और सतपुड़ा श्रेणी का गाविलगढ़ कटक, मेलघाट टाइगर रिज़र्व की सीमा बनाते हैं।
  • इसे 1974 में टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था। यह प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 1973-74 में अधिसूचित पहले नौ टाइगर रिज़र्व में से एक था।
  • यह महाराष्ट्र का पहला बाघ अभ्यारण्य था।
  • ‘मेलघाट’ नाम से तात्पर्य, विभिन्न ‘घाटों’ या घाटियों का संगम है, जो इस बाघ अभ्यारण्य की विशिष्टता है।

मेलघाट टाइगर रिज़र्व में पाए जाने वाले अन्य मुख्य जानवर स्लॉथ बीयर, भारतीय गौर, सांभर हिरण, तेंदुआ, नीलगाय, आदि हैं।

सुपरकैपेसिटर (Super capacitor) क्या है?

  • सुपरकैपेसिटर नई पीढ़ी का एक ऊर्जा भंडारण उपकरण है, जो उच्च शक्ति घनत्व कैपेसिटर, लंबे समय तक स्थायित्व, और पारम्परिक कैपेसिटर की तुलना में अल्ट्राफास्ट चार्जिंग और लिथियम-आयन बैटरी (LiB) जैसे लाभों के कारण व्यापक अनुसंधान की दिशा में महत्वपूर्ण है।
  • सुपरकैपेसिटर के चार मुख्य घटकों इलेक्ट्रोड, इलेक्ट्रोलाइट, सेपरेटर और वर्तमान कलेक्टर में से, पहले दो प्रमुख घटक हैं, जो तत्काल सुपरकैपेसिटर के विद्युत रासायनिक व्यवहार को निर्धारित करते हैं।

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