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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 July

विषय-सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. मिजोरम भूकंपीय क्षेत्र

 

सामान्य अध्ययन-II

1. दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति कोटे की भांति समान लाभों के हकदार हैं: उच्चत्तम न्यायालय

2. अफगानिस्तान द्वारा वाघा बॉर्डर से भारत को निर्यात

3. चाबहार रेल परियोजना से ईरान ने भारत को अलग किया

 

सामान्य अध्ययन-III

1. संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (HLPF)

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. स्वयं पर शासन करने हेतु लोगों को अधिकार प्रदान करना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चुशूल (Chushul)

2. ‘अरद और कार्मेल’ (Arad and Carmel)

3. विश्व की सबसे लंबी अंतःसागरीय (subsea) केबल:

4. तांगम (Tangams)

5. भानु जयंती (Bhanu Jayanti):

 


सामान्य अध्ययन-I


 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ आदि।

मिजोरम भूकंपीय क्षेत्र

मिजोरम में 21 जून से 9 जुलाई के मध्य कम से कम आठ मध्यम स्तर के भूकंपों का अनुभव किया गया। रिक्टर पैमाने पर इन भूकम्पो की तीव्रता 4.2 से 5.5 तक दर्ज की गयी।

इनमें से अधिकांश भूकंपों का अधिकेन्द्र म्यांमार की सीमा से लगे हुए चंपई जिले (Champhai district) के नीचे था।

हाल के निष्कर्ष:

हाल ही में किये गए एक अध्ययन के अनुसार, मिजोरम दो अधःस्थलीय भ्रंशों– चूड़ाचांदपुर माओ भ्रंश (Churachandpur Mao Fault) तथा मैत भ्रंश (Mat Fault) के मध्य आ गया है।

  1. चूड़ाचांदपुर माओ भ्रंश, का नामकरण मणिपुर के दो स्थानों के नाम पर किया गया है तथा यह चंपई के सीमा के साथ-साथ उत्तर-दक्षिण दिशा में म्यांमार में विस्तारित है।
  2. मैत भ्रंश (Mat Fault) मिजोरम में सेरछिप ज़िले के समीप मैत नदी (river Mat) के नीचे उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम दिशा में विस्तारित है।

इन दो प्रमुख भ्रंशों के मध्य कई उथले अनुप्रस्थीय अथवा छोटे भ्रंश पाए जाते है।

भ्रंश क्या होते है?

भ्रंश, भूगार्भिक हलचलों के परिणामस्वरूप विवर्तनिक प्लेटों पर अत्याधिक दबाव अथवा तनाव के कारण भू-पर्पटी की शिलाओं में होने वाले विस्थापन से निर्मित होते हैं। इन भ्रंशो के सहारे भूकंप आने पर भू-पर्पटी की शिलायें एक दोस्सरे के सापेक्ष ऊपर अथवा नीचे की ओर सरक जाती है।

  • भ्रंशो की लम्बाई कुछ सेंटीमीटर से लेकर हजारों किलोमीटर तक हो सकती है।
  • भ्रंश-सतह ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज अथवा पृथ्वी की सतह पर कुछ कोण पर हो सकती है।
  • भ्रंश, पृथ्वी में गहराई तक विस्तारित हो सकते है तथा पृथ्वी की सतह तक भी फैल सकते हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. मानचित्र पर माओ तथा मैत भ्रंश का पता लगाएं।
  2. भूकंप तरंगें
  3. भ्रंश के प्रकार
  4. भूकंप अधिकेन्द्र क्या होता है?
  5. प्लेट टेक्टोनिक्स क्या है?

मेंस लिंक:

मिजोरम में अधिक भूकंप आने का क्या कारण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति कोटे की भांति समान लाभों के हकदार हैं: उच्चत्तम न्यायालय

 

(Disabled are entitled to same benefits of SC/ST quota: SC)

संदर्भ:

उच्चत्तम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, कि विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति भी सामाजिक रूप से पिछड़े होते हैं तथा सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के समान छूट एवं लाभों के हकदार हैं।

न्यायालय ने अनमोल भंडारी (नाबालिग), (पिता / अभिभावक के माध्यम से) बनाम दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के वर्ष 2012 के निर्णय को बरकरार रखा है।

चर्चा का विषय

एक दिव्यांगजन, आर्यन राज द्वारा गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स, चंडीगढ़ के ख़िलाफ़ याचिका दायर की गई थी।

  • कॉलेज ने पेंटिंग और एप्लाइड आर्ट पाठ्यक्रम में न्यूनतम अहर्ता अंकों में आर्यन राज को छूट देने से इंकार कर दिया।
  • कॉलेज का कहना है, कि अभियोग्यता परीक्षा में विकलांग व्यक्तियों को भी 40% के सामान्य अहर्ता मानक को पूरा करना आवश्यक है। हालांकि, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों को सामान्य अहर्ता मानकों में 35% की छूट दी गई थी।

आरक्षण की आवश्यकता:

बौद्धिक / मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों की कुछ सीमाएँ होती हैं, जो शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों में नहीं होती हैं।

आगे की राह

  1. नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए।
  2. विषय विशेषज्ञों को, इस प्रकार के व्यक्तियों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण की व्यवहार्यता की जांच करनी चाहिए।
  3. विषय-विशेषज्ञ, ऐसे छात्रों को समायोजित करने की दृष्टि से पेंटिंग और एप्लाइड आर्ट के पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या बढ़ाने की संभावना पर भी विचार कर सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 15 (4), 16 (4A) और 46 का अवलोकन
  2. उत्प्रेषण याचिका
  3. ‘सुगम्य भारत अभियान’ के बारे में
  4. राष्ट्रीय विकलांग वित्त विकास निगम (NHFDC) के बारे में

मेंस लिंक:

विकलांगता से पीड़ित व्यक्ति भी सामाजिक रूप से पिछड़ा क्यों माना जाना चाहिए तथा वे सार्वजनिक रोजगार और शिक्षा में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के समान छूट एवं लाभों के हकदार क्यों हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

अफगानिस्तान द्वारा वाघा बॉर्डर से भारत को निर्यात

(Afghan exports to India through Wagah border)

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 15 जुलाई से वाघा बॉर्डर से भारत के लिए माल भेजने की अनुमति दी है। यह निर्णय पाकिस्तान-अफगानिस्तान पारगमन व्यापार समझौते (Pakistan-Afghanistan Transit Trade AgreementAPTTA) के अंतर्गत इस्लामाबाद की प्रतिबद्धताओं का एक हिस्सा है।

हालांकि, इस्लामाबाद, भारत द्वारा अफगानिस्तान को वस्तु निर्यात के मामले पर भारत को समान सुविधा देने के विषय में चुप है।

 APTTA के बारे में:

अफगानिस्तान-पाकिस्तान पारगमन व्यापार समझौता (APTTA), पाकिस्तान तथा अफगानिस्तान द्वारा वर्ष 2010 में हस्ताक्षरित एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है। यह समझौता, दोनों देशों के मध्य माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने हेतु प्रावधान करता है।

APTTA के समक्ष समस्याएं

  1. हाल के वर्षो में, पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमाओं को कई बार बंद किया गया है, जिसका उसने अफगानिस्तान में हथियारबंद राजनीतिक हलकों (circles) के लिए अवरोधक के रूप में इस्तेमाल किया है।
  2. इससे, सामान्य तौर पर, अफगान बाजारों में महगाई में कई गुना वुद्धि हुई है, या, मांग को पूरा करने के लिए महंगी वस्तुओं की तस्करी में बढ़ोत्तरी देखी गयी है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व के महत्वपूर्ण स्थलरुद्ध (Landlocked) देश।
  2. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ भारत की सीमाएँ
  3. वाघा बॉर्डर
  4. APTTA क्या है? इसे कब हस्ताक्षरित किया गया था?
  5. वाघा बॉर्डर का पूर्वी भाग

मेंस लिंक:

पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के लिए वाघा बॉर्डर खोलने से भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को किस प्रकार बढ़ावा मिलेगा? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चाबहार रेल परियोजना से ईरान ने भारत को अलग किया

(Iran drops India from Chabahar rail project)

ईरान सरकार ने चाबहार बंदरगाह से ज़ाहेदान (Chabahar port to Zahedan) तक रेल लाइन निर्माण परियोजना से भारत को अलग करने का निर्णय लिया है। ईरान अब फंडिंग में देरी होने के कारण भारत की सहायता के बिना परियोजना को पूरा करेगा।

चर्चा का विषय

भारत सरकार ने अफ़गानिस्तान तथा मध्य एशिया के साथ व्यापार करने हेतु एक वैकल्पिक मार्ग बनाने हेतु अफगानिस्तान तथा ईरान के साथ एक त्रिपक्षीय समझौता किया था। चाबहार रेल परियोजना का निर्माण इसी त्रिपक्षीय समझौते के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं का एक हिस्सा था

  1. इस समझौते को वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तेहरान यात्रा के दौरान अंतिम रूप दिया गया था।
  2. भारतीय रेलवे कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (Indian Railways Construction LtdIRCON) ने $ 6 बिलियन की वित्तीय सहायता के अतिरिक्त रेलवे लाइन परियोजना में सहयोग करने का वादा किया था। इस परियोजना पर कार्य आरम्भ होने से पूर्व ही संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे।
  3. हालांकि, इस विशिष्ट रेलवे लाइन परियोजना के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट प्राप्त थी, फिर भी, भारत के लिए उपकरण आपूर्तिकर्ताओं को तलाश करने में कठिनाई हो रही थी, क्योकि, अधिकाँश आपूर्तिकर्ताओं को अमेरिकी कार्यवाही का भय था।

भारत के लिए चिंत्ताएं:

  1. चाबहार रेल परियोजना के संबंध में ईरान द्वारा यह निर्णय ऐसे समय में लिए गया है, जब चीन, ईरान के साथ 25 वर्षीय आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रहा है।
  2. ईरान और चीन के बीच इस समझौते के हो जाने पर, बैंकिंग, दूरसंचार, बंदरगाह, रेलवे तथा कई अन्य परियोजनाओं सहित ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में चीनी मौजूदगी का व्यापक रूप से विस्तार हो सकता है।
  3. ईरान, नई दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी रहा है। चीन- ईरान समझौता इस क्षेत्र में भारत की संभावनाओं को काफी क्षति पहुंचा सकता है। हाल ही में हुए चीन के साथ सीमा विवाद के पश्चात भारत के चीन के साथ संबंध और अधिक तनावपूर्ण हुए है।

चाबहार बंदरगाह कहाँ अवस्थित है?

चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर स्थित है तथा ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है।

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व

  1. चाबहार बंदरगाह के माध्यम से भारत, अफगानिस्तान तक माल परिवहन करने में पाकिस्तान को बाईपास कर सकता है।
  2. इसके माध्यम से भारत की ईरान तक पहुँच में वृद्धि होगी। ईरान, भारत के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor) के लिए प्रवेश मार्ग प्रदान करेगा, जिससे भारत, रूस ईरान, यूरोप तथा मध्य एशिया से समुद्री, रेल और सड़क मार्गों से जुड़ सकेगा।
  3. इसके माध्यम से भारत को अरब सागर में चीनी मौजूदगी का मुकाबला करने में भी सहायता मिलेगी। चीन, पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अरब सागर में अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ग्वादर बंदरगाह, चाबहार से सड़क मार्ग से 400 किमी तथा समुद्री मार्ग से 100 किमी से कम दूरी पर स्थित है।
  4. राजनयिक दृष्टिकोण से, चाबहार बंदरगाह को मानवीय कार्यों (humanitarian operations) के समन्वय करने हेतु इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चाबहार पोर्ट की अवस्थिति
  2. INSTC क्या है?
  3. ओमान की खाड़ी
  4. ज़ाहेदान (Zahaden)
  5. हिंद महासागर क्षेत्र में देश

मेंस लिंक:

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (HLPF)

(UN’s High-Level Political Forum)

हाल ही में, नीति आयोग ने संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (United Nations High-level Political Forum- HLPF) पर सतत विकास, 2020 पर भारत की दूसरी स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा (Voluntary National Review- VNR) प्रस्तुत की है।

भारत VNR 2020 रिपोर्ट का शीर्षक है:  ‘कार्रवाई का एक दशक: SDG को वैश्विक से स्थानीय स्तर पर ले जाना’।

पृष्ठभूमि:

नीति आयोग को राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को अपनाने और उस पर निगरानी रखने का शासनादेश मिला हुआ है।

विवरण:

  • यह रिपोर्ट भारत में 2030 एजेंडा को अपनाने और उसे लागू करने का एक व्यापक ब्यौरा है।
  • 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर प्रगति की समीक्षा प्रस्तुत करने के अलावा, रिपोर्ट में नीति और उसके अनुरूप पर्यावरण को सक्षम बनाने, एसडीजी के स्थानीयकरण के लिए भारत के दृष्टिकोण और इनके कार्यान्वयन के साधनों को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई है।

संयुक्त राष्ट्र उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (HLPF) के बारे में:

  • उच्च-स्तरीय राजनीतिक मंच (High-level Political Forum on Sustainable Development- HLPF) की स्थापना वर्ष 2012 में सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (रियो + 20) के अंतर्गत की गयी थी।
  • संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economic and Social CouncilECOSOC) के तत्वावधान में HLPF की जुलाई में आठ दिनों के लिए सालाना बैठक होती है।
  • HLPF ने वर्ष 1993 से कार्यरत ‘सतत विकास आयोग’ (Commission on Sustainable Development) को प्रतिस्थापित किया है।

HLPF के कार्य:

HLPF, 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) में प्रगति की निरंतरता और समीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मंच है।

वैश्विक स्तर पर सतत विकास हेतु एजेंडा 2030 तथा इसके कार्यान्वयन की समीक्षा का एक महत्वपूर्ण घटक है।

स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा (VNR) क्या है?

  • VNR एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से देश वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रगति का आकलन करते हैं तथा किसी को पीछे नहीं छोड़ने का संकल्प लेते हैं।
  • यह समीक्षा स्वैच्छिक और सदस्य देशों द्वारा खुद की जाती है।
  • इसका उद्देश्य एजेंडा को लागू करने में मिली सफलताओं, चुनौतियों और सबक सहित प्राप्त अनुभवों को साझा करने की सुविधा प्रदान करना है।
  • किसी देश के VNR की तैयारी की प्रक्रिया विभिन्न प्रासंगिक हितधारकों की भागीदारी के माध्यम से साझेदारी के लिए एक मंच प्रदान करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नीति आयोग की स्थापना कब हुई?
  2. VNR क्या है? क्या यह स्वैच्छिक है?
  3. SDG और महत्वपूर्ण उप लक्ष्यों का अवलोकन।
  4. ECOSOC के बारे में।
  5. रियो + 20 के बारे में।
  6. HLPF क्या है?

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन-V


स्वयं पर शासन करने हेतु लोगों को अधिकार प्रदान करना

(Enabling people to govern themselves)

COVID19 महामारी ने किस प्रकार हमारी शासन व्यवस्था में बेमेल स्थितियों को उजागर किया है?

COVID-19 महामारी के परिणामस्वरूप, वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय, सभी स्तरों पर शासन व्यवस्थाओं में दबाव महसूस किया गया है।

कई उप-व्यवस्थाओं, जैसे- स्वास्थ्य देखभाल, रसद, व्यापार, वित्त और प्रशासन में संकट को एक साथ प्रबंधित करना पड़ा। एक उप-व्यवस्था की समस्याओं का समाधान, अन्य उप-प्रणालियों पर कारगर साबित नहीं हुआ।

चर्चा का विषय

प्रशासन की संस्थाओं की रूपरेखा तथा प्रत्यक्ष चुनौतियां परस्पर बेमेल हैं, अर्थात, चुनौतियों से निपटने हेतु जिस प्रकार की आवश्यकता है, प्रशासकीय संस्थाएं उसके अनुरूप डिजाइन नहीं हैं।

प्रशासकीय व्यवस्थाएं तथा उप-व्यवस्थाएं अलग-अलग कार्य कर रही है, और इनमे परस्पर आवश्यक समन्वय नहीं है।

उदाहरार्थ: स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया, इसने साथ ही आर्थिक समस्याओं से निपटना कठिन बना दिया है।

COVID-19 महामारी से उत्पन्न हुए जीवन के खतरे से निपटने हेतु संसाधनों को इस ओर मोड़ दिया गया, जिससे भारत के कुछ भागों में कुपोषण तथा अन्य बीमारियों से होने वाली मौतों की आशंका बढ़ गई है।

चुनौतियाँ

संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals (SDGs) में सूचीबद्ध वैश्विक चुनौतियां, व्यवस्थागत चुनौतियां हैं। ये सभी व्यवस्थागत समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

जैसे कि, पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है तथा प्रत्येक समस्या को अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा अथवा समस्याओं पर केन्द्रित एजेंसीज द्वारा निपटा जाना चाहिए।

समय की मांग:

  1. समस्याओं के सामधनों को देश की विशिष्ट परिस्थितियों, स्थानिक स्थितियों तथा वहां के समाज की स्थिति एवं पर्यावरण के आकार के अनुकूल होना चाहिए।
  2. स्थानीय लोगों का समस्याओं के समाधान हेतु ज्ञान का सक्रिय योगदान तथा सक्रिय प्रतिभागिता होनी चाहिए।
  3. विभिन्न विशेषज्ञों की जानकारी – पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के बारे में – सतह पर वास्तविकताओं के अनुरूप प्रयुक्त की जानी चाहिए।

 स्थानिक व्यवस्थाओं हेतु मामले (नीतिशास्त्र संबधित प्रश्नों में उपयोग किया जा सकता है):

‘जनता का शासन केवल जनता के लिए ही नहीं होना चाहिए, अपितु यह जनता के द्वारा भी होना चाहिए।‘

गांधीजी तथा आर्थिक सलाहकार, जे सी कुमारप्पा और अन्य साथियों ने, स्थानीय उद्यमों की समस्याओं से निपटने हेतु समाधान, वास्तविक स्थितियों के पर्यवेक्षण तथा प्रयोगों के माध्यम से विकसित किये थे, इसके लिए वह बड़े-बड़े नगरों में आयोजित सैधांतिक सेमिनारों में भाग नही लिए थे।

  1. पुनरुत्थान (Resurgence) पत्रिका के संस्थापक संपादक तथा ‘स्मॉल इज ब्यूटीफुल’ (Small is Beautiful) के लेखक F. शूमाकर, ने गांधीजी के विचारों के अनुरूप स्थानीय उद्यमों पर आधारित एक नया अर्थशास्त्र प्रतिपादित किया था।
  2. वर्ष 2009 में अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला एलिनॉर ओस्ट्रोम (Elinor Ostrom) ने भारत सहित कई देशों में सतह पर अनुसंधान करने के पश्चात ‘स्व-शासित समुदायों के लिए सिद्धांत’ (principles for self-governing communities) को विकसित किया था।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चुशूल (Chushul)

  • यह भारत में लद्दाख के लेह जिले में स्थित एक गाँव है।
  • यह दरबुक (Durbuk) तहसील में स्थित है, जिसे ’चुशुल घाटी’ के रूप में जाना जाता है।
  • चुशूल घाटी 4,360 मीटर की ऊंचाई पर रेज़ांग ला और पांगोंग त्सो झील के पास स्थित है।
  • चुशुल, भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच नियमित परामर्श और वार्ता के लिए बैठक हेतु आधिकारिक तौर पर तय किये गए पांच बिंदुओं में से एक है।

वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान यही वह स्थान था जहाँ से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था।

चर्चा का कारण

भारत और चीन के बीच चुशुल में भारत और चीन की सेनाओं के उच्च अधिकारीयों की चौथे दौर की वार्ता होने वाली है।

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अरद और कार्मेल(Arad and Carmel)

  • ये दो नई इजरायली असॉल्ट राइफलें हैं जिन्हें अब भारत में निर्मित किया जायेगा।
  • ये असॉल्ट हथियार ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत मध्य प्रदेश में बनाए जाएंगे, जहां 2017 में इज़राइल वैपन्स सिस्टम्स ने, पीएलआर सिस्टम्स नाम के संयुक्त उद्यम के तहत एक प्लांट स्थापित किया था

विश्व की सबसे लंबी अंतःसागरीय (subsea) केबल:

लिंकनशायर (Lincolnshire) में विश्व की सबसे लंबी अंतःसागरीय (subsea) विद्युत् केबल (767 किमी) पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। यह ब्रिटेन तथा डेनमार्क के मध्य नवीकरणीय ऊर्जा का आदान-प्रदान करेगी।

तांगम (Tangams)

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ‘तांगम्स: एन एथ्नोलिंग्विस्टिक स्टडीज़ ऑफ द क्रिटिकली इंडेंजर्ड ग्रुप ऑफ अरुणाचल प्रदेश’ (Tangams: An Ethnolinguistic Study Of The Critically Endangered Group of Arunachal Pradesh)  शीर्षक से एक पुस्तक जारी की है।

  • तांगम अरुणाचल प्रदेश की बड़ी आदि जनजाति के भीतर एक अल्पज्ञात समुदाय है।
  • तांगम अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से गाँव (कोगिंग) में केंद्रित एक समुदाय है। जिसमे मात्र 253 वक्ता (तांगम भाषा का प्रयोग करने वाले) है।
  • यूनेस्को के ‘वर्ल्ड एटलस ऑफ इंडेंजर्ड लैंग्वेज’ (2009) के अनुसार, ‘तांगम’ एक मौखिक भाषा है जो ‘तिब्बती-बर्मन भाषा परिवार’ के तहत ‘तानी समूह’ से संबंधित है, तथा इस भाषा को ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।

भानु जयंती (Bhanu Jayanti):

  • 13 जुलाई 2020 को भानुभक्त आचार्य की 206 वीं जयंती है।
  • भानु जयंती को प्रतिवर्ष 13 जुलाई को नेपाल में भी मनाया जाता है।
  • भानुभक्त आचार्य प्राचीन भारत के महान महाकाव्य- रामायण का संस्कृत से नेपाली में अनुवाद करने वाले पहले लेखक थे। उनका जन्म नेपाल में हुआ था।

Insights Current Affairs Analysis (I-CAN) by IAS Topper

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