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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 13 July

 

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

  1. गैर-न्यायिक हत्याएं (Extra-judicial Killings)
  2. नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID)

 

सामान्य अध्ययन-III

  1. निओवाइस धूमकेतु
  2. भारत में बाघों की गणना द्वारा नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित
  3. देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा
  4. भारत में सर्पदंश

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

  1. इटोलिज़ुमाब (Itolizumab)
  2. ATL ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल:
  3. प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (TIFAC):
  4. ओफियोसोरडायसेप्स सिनेंसिस
  5. बांग्लादेश के लिए भारत से विशेष पार्सल ट्रेन
  6. ‘टाइगर आर्किड’ (Tiger Orchid)
  7. स्वर्णा सब-1 (Swarna Sub1)

 


सामान्य अध्ययन-II


विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य – सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

गैर-न्यायिक हत्याएं (Extra-judicial Killings)

संदर्भ:

हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक मुठभेड़ में विकास दुबे की हत्या ने ‘न्यायेतर हत्याओं’ (Extra-judicial Killings) तथा इससे संबंधित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है।

  • सरकार ने इस प्रकरण की जांच हेतु न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) शशि कांत अग्रवाल की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया है।

 

मुठभेड़ों (Encounters) से संबंधित कानून:

शुरुआत से ही, भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी अधिकारी को, किसी अपराधी के लिए सीधे मुठभेड़ में मार देने के लिए अधिकृत करता हो, चाहे अपराधी के द्वारा कितना भी बड़ा जघन्य अपराध किया गया हो।

हालांकि, कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो अधिकारियों के लिए किसी अपराधी के खिलाफ बल प्रयोग करने की शक्ति प्रदान करते है।

  1. भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code), 1860 की धारा 100: इसके अंतर्गत, किसी भी व्यक्ति को अपने निजी बचाव के अधिकार प्रदान किया गया है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति, अपने जीवन अथवा शरीर के किसी अंग को खतरा होने की आशंका में अपना बचाव कर सकता है, और इसमें खतरा उत्पन्न करने वाले की जान भी जा सकती है।
  2. दण्ड प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code), 1973 की धारा 46: इसके अंतर्गत, पुलिस अधिकारी को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए सभी आवश्यक साधनों का उपयोग करने की अनुमति प्रदान की गयी है।
  3. भारतीय दंड संहिता की धारा 300: इसके अंतर्गत, किसी लोक सेवक द्वारा सार्वजनिक न्याय के उत्कर्ष के लिए क़ानून द्वारा प्रदत्त शक्ति को लांघते हुए तथा अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए आवश्यक होने पर किसी व्यक्ति की गैर-इरादतन आपराधिक मानव हत्या (culpable homicide) को हत्या नहीं माना जायेगा।

 

उच्चत्तम न्यायलय का दृष्टिकोण:

शीर्ष न्यायालय में संबंधित मामलों में निम्नलिखित निर्णय दिए है:

  1. ओम प्रकाश बनाम झारखंड राज्य मामले में शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि “यह पुलिस का कर्तव्य नहीं है कि वह आरोपी को केवल इसलिए मार दे क्योंकि वह एक अपराधी है।” तथा इसमें आगे कहा गया कि मुठभेड़ में की गयी हत्या (Encounters’) ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ के समान होती है।
  2. सत्यवनी पोनराई बनाम सैमुअल राज मामले में शीर्ष न्यायालय ने कहा है, कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 39 के तहत एक निष्पक्ष जांच अनिवार्य है तथा यह न केवल एक संवैधानिक अधिकार है, बल्कि एक प्राकृतिक अधिकार भी है।
  3. निर्मल सिंह कहलों पंजाब राज्य मामले में उच्चत्तम न्यायालय ने कहा है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अभियुक्त और पीड़ित दोनों के लिए, ‘जाँच और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार’ लागू होता है।
  4. प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्ता मामले में न्यायालय ने निर्णय दिया, कि पुलिस अधिकारी द्वारा किया गया एक फर्जी एनकाउंटर दुर्लभतम मामले की श्रेणी में आता है, जैसा कि बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य में स्थापित किया गया है तथा साबित होने पर संबंधित पुलिस अधिकारी को मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।
  5. पब्लिक यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम भारतीय संघ मामले में, न्यायालय ने कहा है कि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन करने हेतु राज्य भी ‘जीवन और दायित्व के अधिका’र का भी उल्लंघन नहीं कर सकता है। न्यायालय ने कहा कि पुलिस द्वारा की गयी एनकाउंटर हत्याओं की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए क्योंकि इससे  “कानून के शासन की विश्वसनीयता और दाण्डिक न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।”

 

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दृष्टिकोण:

NHRC ने कहा है कि भारत के कानूनों के तहत, पुलिस अधिकारियों को किसी अन्य व्यक्ति की जान लेने का कोई अधिकार नहीं है।

  • यदि कोई पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति की हत्या कर देता है, और यदि वह इसे गैर-अपराध साबित नहीं कर पाता है, तो उस पर सदोष मानव हत्या (culpable homicide) का आरोप लगाया जायेगा।
  • इसके अतिरिक्त वर्ष 2010 में, NHRC ने पुलिस कार्रवाई में हुई मौतों के मामलों में पालन किए जाने वाले दिशानिर्देशों / प्रक्रियाओं का निर्धारण किया है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IPC की धारा 100 और 300 किससे संबंधित हैं?
  2. सीआरपीसी (CrPC) की धारा 46
  3. शशि कांत आयोग किससे संबंधित है?
  4. NHRC- रचना और कार्य
  5. न्यायिक समीक्षा की अवधारणा

 

मेंस लिंक:

‘न्यायेतर हत्याओं’ (Extra-judicial Killings) पर सुप्रीम कोर्ट के विचारों पर चर्चा कीजिए।

 

स्रोत: द हिंदू

 

 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID)

 

हाल ही में, नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau- NCRB) के साथ FIR तथा चोरी के वाहनों से संबंधित केंद्रीकृत ऑनलाइन डेटाबेस का उपयोग करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) क्या है?

NATGRID की परिकल्पना वर्ष 2009 में की गयी थी, इसका उद्देश्य सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के लिए एक ‘सुरक्षित मंच’ पर आव्रजन संबधी प्रविष्टियों अर्थात प्रवासियों के आने व जाने संबंधित सूचनाओं, किसी संदिग्ध का टेलीफ़ोन विवरण तथा बैंकिंग संबंधी जानकारी प्राप्त करने हेतु ‘वन-स्टॉप केंद्र’ का निर्माण करना था।

इस परियोजना को 31 दिसंबर तक सुचारू रूप के जारी करने का लक्ष्य है।

 

डेटा तक कौन पहुंच सकता है?

यह इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R & AW) सहित कम से कम 10 केंद्रीय एजेंसियों के लिए सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर डेटा एक्सेस करने का माध्यम होगा। NATGRID, दूरसंचार, कर-रिकॉर्ड, बैंक, आव्रजन आदि 21 संस्थाओं से डेटा संग्रह करेगा।

आलोचनायें:

  • NATGRID का निजता के संभावित उल्लंघन तथा निजी गोपनीय जानकारी के लीक होने की संभावना के आधार पर विरोध किया जा रहा है।
  • आतंकवाद को रोकने में इसकी प्रभावकारिता पर भी सवाल उठाया गया है, क्योंकि किसी भी राज्य एजेंसी या पुलिस बल को NATGRID डेटाबेस एक्सेस करने की अनुमति नहीं है, जिससे तत्काल प्रभावी कार्रवाई की संभावना कम हो जाती है।
  • कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, NATGRID जैसे डिजिटल डेटाबेस का दुरुपयोग किया जा सकता है। पिछले दो दशकों में, आतंकवादियों द्वारा डिजिटल उपकरणों का उपयोग हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया गया है।
  • NATGRID के संदर्भ में खुफिया एजेंसियों ने भी आशंका व्यक्त की है, इनका कहना कि यह उनके कार्य-क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है तथा उनके काम के संदर्भ में अन्य एजेंसियों को जानकारी लीक कर सकता है।

 NATGRID की आवश्यकता

  1. NATGRID जैसे परिष्कृत माध्यमों के न होने का नुकसान यह है, कि पुलिस को कोई जानकारी प्राप्त करने के लिए कठोर तथा अपमानजनक तरीकों को अपनाने के लिए विवश होना पड़ता है।
  2. प्रत्येक आतंकवादी घटना के बाद, पुलिस कई संदिग्धों को गिरफ्तार करती है, जिनमे से अधिकाँश निर्दोष होते हैं। यदि इसके स्थान पर, एक अन्वेषण व पहचान तंत्र के होने पर, मानवाधिकारों के उल्लंघन संबंधी मामलों में कमी आयेगी।
  3. NATGRID, इंटेलिजेंस ब्यूरो के लिए संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर नजर रखने में भी मदद करेगा।
  4. पुलिस के पास संदिग्ध व्यक्ति के सभी डेटा तक पहुंच होगी तथा डेटा बेस की मदद से इसकी गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकेगा।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CCTNS क्या है?
  2. NATGRID- उद्देश्य और उद्देश्य।
  3. NCRB क्या है?
  4. NATGRID के अंतर्गत आने वाली एजेंसियां।

 

मेंस लिंक:

NATGRID के महत्व पर चर्चा कीजिए।

 

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

निओवाइस धूमकेतु

(NEOWISE- a comet)

संदर्भ:

हाल ही में नासा द्वारा खोजा गया C / 2020 F3 नामक धूमकेतु 22 जुलाई को पृथ्वी के सबसे नजदीक से गुजरेगा। C 2020 F3 धूमकेतु को सबसे पहले नासा के निओवाइस (NEOWISE) टेलीस्कोप से देखा गया था, बाद इसी के नाम पर धूमकेतु को यही नाम दे दिया गया।

निओवाइस धूमकेतु, को अपनी कक्षा में एक परिक्रमण करने में 6,800 वर्ष का समय लगता है। 22 जुलाई को यह पृथ्वी की बाहरी कक्षा को पार करते समय पृथ्वी की सतह से 64 मिलियन मील या 103 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर होगा।

 

कोमा (Coma) क्या है?

3 जुलाई को, निओवाइस धूमकेतु सूर्य से 43 मिलियन किमी की दूरी पर था। इस दिन, धूमकेतु ने बुध की कक्षा में प्रवेश किया, तथा सूर्य से निकटता के कारण, इसकी बाहरी परत से गैस और धूल से भरे परिमण्डल का निर्माण हो गया, जिसे कोमा (Coma) नाम दिया गया है।

कभी-कभी इस गैस और धूल युक्त परिमण्डल से हजारों- लाखों किमी लंबी चमकदार पूंछ जैसी संरचना का निर्माण हो जाता है।

क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्का, उल्कापात तथा उल्कापिंड में अंतर

  1. क्षुद्रग्रह (Asteroid): यह एक अपेक्षाकृत छोटा, निष्क्रिय, चट्टानी पिंड होता है जो सूर्य की परिक्रमा करता है।
  2. धूमकेतु (Comet): धूमकेतु जमी हुई गैस, पत्थर और धूल से निर्मित, सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंड होते हैं। सूर्य के नजदीक पहुचने पर इनकी सतह वाष्पित होकर गैस और धूल भरे परिमंडल का निर्माण करती है, जिसे कोमा (Coma) कहा जाता है, जो कभी-कभी पुच्छल (पूंछ) की आकृति में विस्तारित हो जाती है
  3. उल्का (Meteoroid): यह आकार में धूमकेतु अथवा क्षुद्रग्रह से पिंड होते हैं, जो सूर्य की परिक्रमा करते है।
  4. उल्कापात (Meteor): जब कोई उल्का पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय वाष्पित हो जाती है, उस समय होने वाली इस प्रकाशीय घटना को उल्कापात कहा जाता है, जिसे ‘टूटता तारा’ भी कहते है।
  5. उल्कापिंड (Meteorite): यह वह उल्का होती है, जो पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय नष्ट होने से बच जाती है तथा पृथ्वी की सतह पर आकर टकराती है।

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नासा का निओवाइस (NEOWISE) टेलीस्कोप

नासा ने वाइस (WISEWide-Field Infrared Survey Explorer) टेलीस्कोप को दिसंबर 2009 में लांच किया था।

  • इस अन्तरिक्षीय टेलीस्कोप को आकाश का अवरक्त सर्वेक्षण करने, क्षुद्रग्रहों, तारों तथा अस्पष्ट आकाशगंगाओं का पाता लगाने हेतु डिज़ाइन किया गया था।
  • फरवरी 2011 में अपने प्राथमिक मिशन को पूरा करने तक इसने सफलतापूर्वक काम किया।
  • दिसंबर 2013 में, इस पुनः निओवाइस (NEOWISE) परियोजना के रूप में आरम्भ किया गया, इसका उद्देश्य पृथ्वी के नजदीक स्थित पिंडों (Near-Earth Objects- NEOs), तथा दूर स्थित क्षुद्रग्रहों और धूमकेतुओं का अध्ययन करना है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NASA का WISE और NEOWISE प्रोजेक्ट।
  2. क्षुद्रग्रह क्या है?
  3. धूमकेतु क्या है?
  4. कोमा क्या है?
  5. क्षुद्रग्रह, धूमकेतु, उल्का, उल्कापात और उल्कापिंड के बीच अंतर।

 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत में बाघों की गणना द्वारा नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित

 

संदर्भ:

पिछले वर्ष वैश्विक बाघ दिवस के अवसर पर घोषित, अखिल भारतीय बाघ आकलन 2018 के चौथे चक्र के परिणामों ने विश्व का ‘सबसे बड़ा कैमरा ट्रैप वन्यजीव सर्वेक्षण’ होने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।

कैमरा ट्रैप (मोशन सेंसर्स के साथ लगे हुए बाहरी फोटोग्राफिक उपकरण, जो किसी भी जानवर के गुजरने पर रिकॉर्डिंग शुरू कर देते हैं) को 141 ​​विभिन्न साइटों में 26,838 स्थानों पर रखा गया था और 1,21,337 वर्ग किलोमीटर के प्रभावी क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया।

भारत में वाघों की स्थिति:

नवीनतम गणना के अनुसार, देश में बाधों की अनुमानित संख्या 2,967 हैं।

इस संख्या के साथ, भारत में बाघ वैश्विक संख्या का लगभग 75% निवास करते हैं।

भारत द्वारा 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में बाघों की संख्या दोगुनी करने वाले अपने संकल्प को निर्धारित लक्ष्य वर्ष 2022 से बहुत पहले ही प्राप्त किया जा चुका है।

अखिल भारतीय बाघ आकलन के चौथा चक्र के निष्कर्ष:

  1. देश में बाघों की सर्वाधिक संख्या, मध्य प्रदेश (526) में है, इसके पश्चात क्रमशः कर्नाटक (524) तथा उत्तराखंड (442) का स्थान हैं।
  2. गत पांच वर्षों में, संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 692 से बढ़कर 860 से अधिक, तथा सामुदायिक संरक्षित क्षेत्रों की संख्या 43 से बढ़कर 100 हो गई है।
  3. वर्ष 2006 की बाघ गणना के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 1,411 थी, जो वर्ष 2010 तथा 2014 में बढ़कर क्रमशः 1,706 तथा 2,226 हो गयी थी, इससे बाघों की संख्या में निरंतर वृद्धि के प्रमाण मिलते है।
  4. मध्य प्रदेश के पेंच बाघ अभ्यारणय में बाघों की सर्वाधिक संख्या दर्ज की गयी तथा, तमिलनाडु के सत्यामंगलम बाघ अभ्यारणय में वर्ष 2014 के पश्चात ‘अधिकतम सुधार’ दर्ज किया गया।
  5. छत्तीसगढ़ और मिजोरम में बाघों की संख्या में कमी पायी गई जबकि ओडिशा में बाघों की संख्या स्थिर रही। अन्य सभी राज्यों में सकारात्मक वृद्धि पायी गयी।

 

अखिल भारतीय बाघ आंकलन:

अखिल भारतीय बाघ आकलन को प्रति चार वर्ष मेंराष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण’ (NTCA) द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के तकनीकी समर्थन से आयोजित किया जाता है तथा राज्य वन विभागों और अन्य भागीदारों द्वारा इसे कार्यान्वित किया जाता है।

 

वैश्विक तथा राष्ट्रीय स्तर पर जारी बाघ संरक्षण के प्रयास:

  1. भारत में वर्ष 1973 में ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ की शुरुआत की गयी, जो वर्तमान में 50 से अधिक संरक्षित क्षेत्रों में, देश के भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 2.2% के बराबर क्षेत्रफल, में सफलतापूर्वक जारी है।
  2. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (National Tiger Conservation Authority- NTCA) द्वारा वन- रक्षकों के लिए एक मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम, M-STrIPESमॉनिटरिंग सिस्‍टम फॉर टाइगर्स इंटेंसिव प्रोटेक्‍शन एंड इकोलॉजिकल स्‍टेट्स (Monitoring system for Tigers’ Intensive Protection and Ecological Status) लॉन्च किया गया है।
  3. वर्ष 2010 में आयोजित पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में, वैश्विक स्तर पर 13 बाघ रेंज वाले देशों के नेताओं ने T X 2’ नारा के साथ बाघों की संख्या को दोगुना करने हेतु अधिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
  4. विश्व बैंक ने अपने ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) कार्यक्रम, के माध्यम से, अपनी उपस्थिति और संगठन क्षमता का उपयोग करते हुए, बाघ एजेंडे को मजबूत करने हेतु वैश्विक साझेदारों को एक मंच पर एकत्रित किया है।
  5. इन वर्षों में, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव’ (GTI) पहल, ‘ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव काउंसिल (GTIC) के संस्थागत रूप में स्थापित हो गयी है, तथा अब यह, – ग्लोबल टाइगर फोरम (Global Tiger Forum) तथा ग्लोबल स्नो लेपर्ड इकोसिस्टम प्रोटेक्शन प्रोग्राम (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program)- के माध्यम से बाघ संरक्षण संबंधी कार्यक्रम चला रही है।

 

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जीवमंडल संरक्षित क्षेत्र के मध्य अंतर।
  2. भारत में महत्वपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व।
  3. M-STREIPES किससे संबंधित है?
  4. GTIC क्या है?
  5. प्रोजेक्ट टाइगर कब लॉन्च किया गया था?
  6. NTCA- रचना और कार्य।

 

स्रोत: पीआईबी

 

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा

 

हाल ही में असम सरकार द्वारा देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य (Dehing Patkai Wildlife Sanctuary) को ‘राष्ट्रीय उद्यान’ के रूप में अपग्रेड करने का निर्णय लिया गया है।

 

देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य के बारे में:

(Dehing Patkai Wildlife Sanctuary)

इसे जेपोर रेनफॉरेस्ट (Jeypore Rainforest) के नाम से भी जाना जाता है, तथा यह अभयारण्य देहिंग पटकाई एलीफेंट रिज़र्व का हिस्सा है।

  • यह असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया ज़िलों में स्थित है और 111.19 वर्ग किमी वर्षा वन क्षेत्र को कवर करता है।
  • देहिंग पटकाई वन्यजीव अभयारण्य को जून, 2004 को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया था।
  • इस अभ्यारण्य में 47 स्तनपायी, 47 सरीसृप और 310 तितली प्रजातियां पायी जाती है।
  • देहिंग पटकाई भारत में उष्णकटिबंधीय तराई वर्षा वनों का सबसे बड़ा क्षेत्र है।

 

देहिंग इस जंगल से होकर बहने वाली नदी का नाम है तथा यह अभयारण्य पटकाई पहाड़ी की तली में अवस्थित है।

राष्ट्रीय उद्यान (National Park)

भारतीय पर्यावरण और वन मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय उद्यान वह संरक्षित क्षेत्र होता है, जिसे राज्य सरकार द्वारा किसी अभ्यारण्य के अंतर्गत अथवा बाहर के किसी क्षेत्र को पारिस्थितिक, पशु-पक्षी, वनस्पति, भू-आकृति, अथवा जैव संरचना के महत्व, संरक्षण तथा प्रसार के उद्देश्य से संरक्षित घोषित किया जा सकता है।

  • भारत में राष्ट्रीय उद्यान IUCN के अंतर्गत श्रेणी II में सूचीबद्ध संरक्षित क्षेत्र हैं।
  • भारत में पहला राष्ट्रीय उद्यान वर्ष 1936 में हैली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था, जिसे वर्तमान में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, उत्तराखंड के रूप में जाना जाता है।

 

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IUCN द्वारा संरक्षित क्षेत्रों का वर्गीकरण।
  2. भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान।
  3. राष्ट्रीय उद्यानों की घोषणा में राज्य सरकारों की भूमिका।
  4. देहिंग नदी।
  5. जेपोर (Jeypore) का जंगल।

 

स्रोत: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

भारत में सर्पदंश

 

(Snakebites in India)

हाल ही में, कनाडा के टोरंटो विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च’ (Centre for Global Health Research-CGHR) द्वारा भारत तथा यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom-UK) के सहयोगियों के साथ सर्पदंश पर एक अध्ययन किया गया था।

  • इस अध्ययन रिपोर्ट को अब सार्वजनिक कर दिया गया है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सर्पदंश को एक सर्वोच्च प्राथमिकता वाली उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारी (Neglected Tropical Disease- NTD) के रूप में मान्यता दी है।

 

Key findings:

 

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. भारत में वर्ष 2000 से वर्ष 2019 की अवधि में सर्पदंश से मरने वालों की संख्या: 1.2 मिलियन (12 लाख)।
  2. सर्पदंश से होने वाली वार्षिक मौतों का औसत: 58 हज़ार।
  3. भारत के आठ राज्यों, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित), राजस्थान तथा गुजरात राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों, में सर्पदंश के कारण लगभग 70% मौतें हुई हैं
  4. सर्पदंश के कारण आधे से अधिक मौतें जून से सितंबर माह में मानसून की अवधि के दौरान हुई हैं।
  5. भारत में अधिकांश मृत्यु ज़हरीले रसेल वाइपरस (Russell’s Viper), करैत (kraits) तथा कोबरा (Cobras) साँपों के काटने से होती हैं।
  6. सर्पदंश से होने वाली मौतें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों (97%) में हुईं, जिसमे, पुरुषों में सर्पदंश के कारण मृत्यु का प्रतिशत 59% है जो महिलाओं की तुलना में 41% अधिक है।
  7. सर्पदंश के कारण मरने वालों की सर्वाधिक संख्या 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की रही है।
  8. सर्पदंश के कारण वार्षिक आधार पर सर्वाधिक मृत्यु वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश (8,700 हज़ार), आंध्र प्रदेश (5,200 हज़ार) तथा बिहार (4,500 हज़ार) प्रमुख हैं

 

सर्पदंश से निपटने के उपाय

सर्पदंश के सर्वाधिक मामले ग्रामीण क्षेत्रों में, निम्न स्थलों पर, तथा गहन कृषि क्षेत्रों में प्रतिवर्ष एक निश्चित मौसम में होते है, इससे इस वार्षिक महामारी से निपटने में आसानी हो सकती है।

  1. सर्पदंश के प्राथमिक शिकार ग्रामीण किसान तथा उनके परिवार होते हैं।
  2. विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे क्षेत्रों को लक्षित करना एवं सुरक्षा के संदर्भ में सरल तरीकों से लोगों को शिक्षित करना जैसे- रबर के जूते, दस्ताने, मच्छरदानी और रिचार्जेबल मशालों (या मोबाइल फोन फ्लैशलाइट) का उपयोग कर सर्पदंश के जोखिम को कम किया जा सकता है।
  3. विषैले सर्पों की प्रजातियों तथा सांप के काटने के कारण मानव स्वास्थ पर पड़ने वाले हानिकारक एवं जानलेवा प्रभावों के बारे में लोगों को जानकारी प्रदान करना।
  4. भारत में पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम बनाने की उपयुक्त क्षमता है। अतः भारत में विषैले सर्प प्रजातियों के वितरण की बेहतर समझ से अधिक प्रभावी एंटी-वेनम को विकसित किया जा सकता है।

 

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


इटोलिज़ुमाब (Itolizumab)

इटोलिज़ुमाब (rDNA उत्पत्ति की) एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी है जिसे पहले से ही गंभीर पुरानी प्लेक सोरायसिस (plaque psoriasis) में उपयोग के लिए मंजूरी मिली हुई है। अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने क्लिनिकल ट्रायल डेटा के आधार पर इस इटोलिज़ुमाब के प्रतिबंधित आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी है।

 

ATL ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल:

भारतीय मोबाइल ऐप विकास परितंत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने देश भर में स्कूली छात्रों के लिए ATL ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल लॉन्च किया है।

  • इसे भारतीय स्टार्टअप प्लेज़्मो के सहयोग से ATL ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल लॉन्च किया गया है।
  • इसका उद्देश्य AIM के प्रमुख कार्यक्रम अटल टिंकरिंग लैब्स के तहत आने वाले समय में स्कूली छात्रों के कौशल में सुधार करना है और उन्हें ऐप उपयोगकर्ता से ऐप का निर्माण करने वाला बनाना है।
  • ATL ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल एक ऑनलाइन कोर्स है जो पूरी तरह निःशुल्क है।

 

 

प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (TIFAC):

(Technology Information, Forecasting and Assessment Council)

TIFAC विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत वर्ष 1988 में स्थापित एक स्वायत्त संगठन है।

  • इसका कार्य ‘प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति करना, प्रौद्योगिकी प्रक्षेप पथों (technology trajectories) का आकलन करना और राष्ट्रीय महत्व के चुनिंदा क्षेत्रों में नेटवर्क अभिक्रियाओं द्वारा नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • TIFAC को इसकी बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर प्रशिक्षण योजना KIRAN-IPR के लिए इसे रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार (नारी शक्ति पुरस्कार 2015) से सम्मानित किया गया है।

 

ओफियोसोरडायसेप्स सिनेंसिस

(Ophiocordyceps sinensis)

इसे हिमालयन वियाग्रा के रूप में भी जाना जाता है, यह विश्व का सबसे महंगा कुकुरमुत्ता (fungus) है।

  • इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature- IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची में सम्मिलित किया गया है।
  • इस कवक को उत्तराखंड में केडा जैदी (keeda jadi) के रूप में भी जाना जाता है, इसकी आकृति इल्ली (caterpillar) जैसी होती है।
  • यह हिमालय और तिब्बती पठार के लिए स्थानिक है और चीन, भूटान, नेपाल और भारत में पाई जाती है।
  • भारत में, यह मुख्य रूप से उत्तराखंड में पिथौरागढ़ और चमोली जैसे जिलों के ऊँचे क्षेत्रों में पाई जाती है।

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बांग्लादेश के लिए भारत से विशेष पार्सल ट्रेन

 

भारतीय रेलवे ने पहली बार देश की सीमा से परे बांग्लादेश के बेनापोल के लिए आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रेड्डीपलेम से सूखी मिर्च की ढुलाई के लिए एक विशेष मालगाड़ी को शुरू किया है।

  • आंध्र प्रदेश के गुंटूर और इसके आस-पास के इलाके मिर्च की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। अपने स्वाद और ब्रांड में विशिष्टता के लिए इस कृषि उपज की गुणवत्ता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है
  • गुंटूर सनम (Guntur Sannam Chilli) मिर्चों की एक किस्म है जिसे भौगोलिक संकेत (GI) दिया गया है।

 

टाइगर आर्किड’ (Tiger Orchid)

‘टाइगर आर्किड’ का वैज्ञानिक नाम ‘ग्राम्माटोफाइलम स्पेसिओसम’ (Grammatophyllum Speciosum) है।

  • इसके फूल बाघ की त्वचा से मिलते जुलते तथा काफी बड़े और चमकीले होते है, इसीलिये इसे टाइगर ऑर्किड कहा जाता है।
  • इसके फूल दो वर्षो में एक बार खिलते है।
  • ये अधिपादपीय (epiphytic) पौधे भारत की मूल प्रजाति नहीं हैं। बल्कि यह दक्षिण पूर्व एशिया की स्थानिक प्रजाति है।
  • टाइगर ऑर्किड, अपने विशाल आकार के कारण गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। अपने प्राकृतिक आवास में परिपक्व पौधे का वजन 2 टन तक का होता है।

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ग्राउंड ऑर्किड (Ground Orchid)

दुधवा टाइगर रिज़र्व में वन विशेषज्ञों द्वारा एक दुर्लभ ग्राउंड ऑर्किड (Ground Orchid) प्रजाति ‘यूलोफिया ओबटुसा’ (Eulophia obtusa) की 118 साल बाद पुनः खोज की गई।

  • इंग्लैंड में केव हर्बेरियम (Kew Herbarium) में प्रलेखित रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में इस प्रजाति को आखिरी बार वर्ष 1902 में पीलीभीत में देखा गया था।
  • यह प्रजाति IUCN की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered) श्रेणी में सूचीबद्ध है।
  • CITES ने भी इस प्रजाति को एक दुर्लभ प्रजाति के रूप में शामिल किया है तथा इसे टियर -2 सूची में रखा है और इसका व्यापार निषिद्ध है।

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स्वर्णा सब-1 (Swarna Sub1)

 यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और मनीला स्थित अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित जल प्रतिरोधी धान की एक किस्म है।

असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में, किसान वर्ष 2009 से ‘स्वर्ण सब-1का उत्पादन कर रहे हैं।

 

Insights Current Affairs Analysis (I-CAN) by IAS Topper

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