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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 July

विषय – सूची:

 सामान्य अध्ययन-II

1. राजकोषीय परिषद की आवश्यकता

2. श्रम मंत्रालय द्वारा न्यूनतम मजदूरी पर मसौदा अधिसूचना

3. राजस्थान के शिक्षा दिशा-निर्देशों से असंतुष्ट NCPCR

4. उइगरों पर दमनकारी कार्रवाई करने पर चीन व अमेरिका के मध्य विवाद

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य:

1. हागिया सोफिया (Hagia Sophia)

2. असीम पोर्टल (ASEEM portal)

3. इंडिया ग्लोबल वीक 2020

4. राष्ट्रीय मत्‍स्‍यपालन दिवस 2020

5. इंडिया साइकिल्स 4 चेंज चैलेंज

 


 सामान्य अध्ययन-II


राजकोषीय परिषद की आवश्यकता

(Do we need a fiscal council?)

राजकोषीय परिषद क्या है?

राजकोषीय परिषदें स्वतंत्र लोक संस्थाएं होती हैं, जिनका उद्देश्य विभिन्न कार्यों, जैसे, वित्तीय योजनाओं और उनके प्रदर्शन का सार्वजनिक आंकलन, बजटीय पूर्वानुमानों तथा समष्टि आर्थिक नीतियों के प्रावधानों के मूल्यांकन आदि, के माध्यम से दीर्घकालिक लोक वित्त प्रतिबद्धताओं को मजबूत करना है

वर्तमान में राजकोषीय परिषदें, विश्व में कई उभरती हुई तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं सहित 50 से अधिक देशों में संस्थागत राजकोषीय प्रणाली का हिस्सा हैं।

राजकोषीय परिषद का गठन तथा कार्यप्रणाली (14वें वित्त आयोग द्वारा की गयी अनुशंसाएं)

14वें वित्त आयोग ने ‘राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम’ (Fiscal Responsibility and Budget Management Act-FRBM Act) में संशोधन करके एक स्वतंत्र राजकोषीय परिषद की स्थापना करने हेतु एक नया उपबंध जोड़ने की सिफारिश की थी। राजकोषीय परिषद का कार्य, ‘वितीय प्रस्तावों का प्रत्याशित मूल्यांकन करना’ तथा इन प्रस्तावों की ‘वितीय नीतियों तथा नियमों से अनुरूपता’ सुनिश्चित करना होगा।

  1. राजकोषीय परिषद की नियुक्ति संसद द्वारा की जानी चाहिए तथा इसकी रिपोर्ट सीधे संसद में प्रस्तुत की जानी चाहिए, और इसके अतिरिक्त इसका अपना बजट होना चाहिए।
  2. राजकोषीय परिषद के कार्यों में बजट प्रस्तावों के राजकोषीय निहितार्थों का पूर्व आंकलन करना सम्मिलित होगा, जिसके अंतर्गत वह बजटीय पूर्वानुमानों का यथार्थ मूल्यांकन तथा विभिन्न बजटीय प्रस्तावों की लागत और इनकी राजकोषीय नियमों के साथ अनुरूपता का आंकलन करेगी।

पारित होने के पश्चात बजट का मूल्यांकन तथा निगरानी का कार्य ‘भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG)’ का है।

 भारत में राजकोषीय परिषद की आवश्यकता

  1. विभाजन योग्य सकल राजस्व में विभिन्न उपकरों तथा अधिभारों का अनुपात असंगत रूप से बढ़ता जा रहा है। अंतरण प्रक्रिया की मूल भावना के साथ चतुर वित्तीय उपायों अथवा परम्पराओं का सहारा लेकर छेड़छाड़ रोकने को सुनिश्चित करने हेतु एक मजबूत तंत्र होना चाहिए।
  2. वित्त आयोग और जीएसटी परिषद के बीच समन्वय की आवश्यकता है। जीएसटी परिषद को वित्त आयोग के कार्यो के संबंध में कोई जानकारी नहीं है, तथा वित्त आयोग भी जीएसटी परिषद के कार्यों से परिचित नहीं हैं।
  3. इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 293 (3) के अंतर्गत राज्य सरकार की देयताओं हेतु, ऋणों के सन्दर्भ में संवैधानिक नियंत्रण का प्रावधान है। किंतु, केंद्र सरकार पर इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं है।

अतः, राजकोषीय नियमों को लागू करने तथा केंद्र सरकार के राजकोषीय समेकन पर नजर रखने हेतु  राजकोषीय परिषद जैसे वैकल्पिक संस्थागत तंत्र की आवश्यकता है।

COVID 19 महामारी के दौर में राजकोषीय परिषद् की प्रासंगिकता

सरकार के लिए घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने तथा आर्थिक बहाली सुनिश्चित करने हेतु अधिक ऋण प्राप्त करने तथा व्यय करने की आवश्यकता है।

परन्तु, इससे ऋण-भार में और अधिक वृद्धि होगी, जिससे मध्यावधि विकास संभावनाओं के लिए संकट उत्पन्न होगा। इस स्थिति को विभिन्न प्रमुख रेटिंग एजेंसियों द्वारा हाल के मूल्यांकनों में प्रमुखता से रेखांकित किया है।

राजकोषीय परिषद् पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें:

हाल के वर्षों में, भारत में दो विशेषज्ञ समितियों द्वारा इस प्रकार की संस्था के लिए सिफारिश की है।

  • वर्ष 2017 में, ‘वित्तीय नियमों की समीक्षा करने हेतु’ वित्त मंत्रालय द्वारा गठित ‘एन. के. सिंह कमेटी’ ने एक स्वतंत्र राजकोषीय परिषद की स्थापना करने के लिए सुझाव दिया, जिसका कार्य सरकार के लिए वित्तीय पूर्वानुमान प्रदान करना तथा अधिदेशित वित्तीय नियमों से विचलन कर सकने योग्य परिस्थितियों के बारे में सलाह देना होगा।
  • वर्ष 2018 में, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) द्वारा राजकोषीय आंकड़ों पर गठित की गयी ‘डी.के. श्रीवास्तव समिति’ ने भी सरकार के साथ विभिन्न स्तरों पर समन्वय करने हेतु एक राजकोषीय परिषद की स्थापना का भी सुझाव दिया, जिसका कार्य सभी सरकारी स्तरों पर सामंजस्यपूर्ण राजकोषीय आँकड़ों को उपलब्ध कराना तथा सार्वजनिक क्षेत्र की सकल ऋण आवश्यकताओं का वार्षिक आकंलन प्रदान करना होगा।
  • ये सिफारिशें 13वें तथा 14वें वित्त आयोगों द्वारा की गयी सिफारिशों के अनुरूप थीं। दोनों वित्त आयोगों की रिपोर्ट्स में सरकार द्वारा राजकोषीय नियमों के अनुपालन की समीक्षा करने तथा बजट प्रस्तावों के आकलन करने हेतु स्वतंत्र वित्तीय एजेंसियों की स्थापना की अनुशंसा की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्या भारत में राजकोषीय परिषद है?
  2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 293 (3) किससे संबंधित है?
  3. वित्त आयोग- रचना और कार्य।
  4. एन.के. सिंह समिति की प्रमुख सिफारिशें ।
  5. उपकर क्या होते है?
  6. अधिभार क्या है? उदाहरण

मेंस लिंक:

भारत में राजकोषीय परिषद की आवश्यकता पर चर्चा की कीजिये।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

श्रम मंत्रालय द्वारा न्यूनतम मजदूरी पर मसौदा अधिसूचना

(Labour Ministry notifies draft on minimum wages)

हाल ही में, केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा वेतन संहिता अधिनियम, 2019 के कार्यान्वयन हेतु मसौदा नियमों को प्रकाशित किया गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • नए मसौदा (Draft) नियमों में एक मुख्य परिवर्तन किया गया है, तथा ड्राफ्ट के शेष नियम नवंबर 2019 में प्रकाशित प्रारंभिक मसौदे के समान है। मंत्रालय ने न्यूनतम मजदूरी तथा अन्य लाभ प्राप्त करने हेतु पात्रता के लिए नौ घंटो की बजाय आठ घंटे काम करना आवश्यक कर दिया है।
  • नए ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि, पूर्व ड्राफ्ट में उल्लिखित नौ घंटों में एक घंटे का आराम सम्मिलित था, जिसे अब आठ घंटों के कार्य से अलग उल्लिखित किया गया है।

न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के लिए मानदंड:

  • प्रतिदिन, प्रति व्यस्क हेतु निवल 2,700 कैलोरी की खुराक, प्रति वर्ष, प्रति श्रमिक परिवार हेतु 66 मीटर कपडे की आवश्यकता, मानक श्रमिक परिवार में जीविकोपार्जक के अतिरिक्त एक पत्नी तथा दो बच्चे।
  • आवासीय किराया व्यय, भोजन और कपड़ों पर हुए व्यय का 10 प्रतिशत होगा।
  • ईंधन, बिज़ली, और खर्च की अन्य मदें, न्यूनतम मज़दूरी की 20% होंगी।
  • तथा, बच्चों की शिक्षा पर खर्च, चिकित्सा आवश्यकताएँ, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक खर्चे, न्यूनतम मज़दूरी के 25 प्रतिशत होंगे।

एक दिन की मजदूरी तय हो जाने के बाद, प्रति घंटे के मजदूरी तय करने हेतु आठ से विभाजित की जाती है, तथा पूरे महीने की मजदूरी तय करने के लिए इसे 26 से गुणा किया जाता है।

वेतन संहिता अधिनियम के बारे में:

वेतन संहिता अधिनियम- 2019 में, ‘मज़दूरी भुगतान कानून, (Payment of Wages Act)1936, न्यूनतम मज़दूरी अधिनियम, (Minimum Wages Act) 1948, बोनस भुगतान कानून, (Payment of Bonus Act) 1965, समान पारिश्रमिक अधिनियम, (Equal Remuneration Act), 1976’ को समाहित किया गया है।

  1. वेतन संहिता अधिनियम पूरे देश में एक समान वेतन एवं उसका सभी कर्मचारियों को समय पर भुगतान किये जाने का प्रावधान करता है।
  2. इसके अंतर्गत, प्रत्येक कामगार के लिए ‘जीवन निर्वाह का अधिकार’ सुनिश्चित किया गया है तथा इसके तहत वर्तमान में 40% कार्यबल को प्राप्त न्यूनतम मजदूरी का विधायी संरक्षण 100% कार्यबल तक विस्तृत किया जायेगा।
  3. इस अधिनियम के मुताबिक, हर पांच साल या उससे कम वक्त में केंद्र या राज्य सरकार द्वारा त्रिपक्षीय समिति के माध्यम से न्यूनतम मजदूरी की समीक्षा और पुनर्निधारण किया जाएगा।
  4. मजदूरी की न्यूनतम दर तय करते समय, केंद्र सरकार संबंधित भौगोलिक क्षेत्र को तीन श्रेणियों – महानगरीय क्षेत्र, गैर-महानगरीय क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र में विभाजित करेगी।
  5. मजदूरी में वेतन, भत्ता तथा अन्य घटकों को सम्मिलित किया जाएगा। इसमें कर्मचारियों के लिए देय बोनस अथवा यात्रा-भत्ता सम्मिलित नहीं होता है।
  6. केंद्र अथवा राज्य सरकारों द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी (minimum wages), मानक मजदूरी (floor wage) से अधिक होनी चाहिए।
  7. इसके अधिनियम के तहत, नियोक्ता अपने कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान नहीं कर सकता। न्यूनतम मजदूरी की राशि मुख्य तौर पर क्षेत्र और कुशलता के आधार पर काम के घंटे अथवा उत्पादन- मात्रा देखते हुए तय की जाएगी।
  8. मजदूरी का भुगतान: वेतन का भुगतान (i) सिक्के, (ii) करेंसी नोट, (iii) चेक द्वारा, (iv) बैंक खाते में जमा करके, या (v) इलेक्ट्रॉनिक मोड के माध्यम से किया जाएगा। वेतन अवधि नियोक्ता द्वारा (i) दैनिक, (ii) साप्ताहिक, (iii) पाक्षिक, या (iv) मासिक के रूप में तय की जायेगी।

सलाहकार बोर्ड:

केंद्र और राज्य सरकारें सलाहकार बोर्ड का गठन करेंगी।

केंद्रीय सलाहकार बोर्ड में निम्नलिखित को सम्मिलित किया जायेगा:

  • नियोक्ता,
  • कर्मचारी (नियोक्ता के बराबर संख्या में),
  • स्वतंत्र व्यक्ति, और
  • राज्य सरकारों के पांच प्रतिनिधि।

 राज्य सलाहकार बोर्ड में नियोक्ता, कर्मचारी तथा स्वतंत्र व्यक्ति सम्मिलित होंगे।

इसके अलावा, केंद्रीय और राज्य बोर्डों के कुल सदस्यों में से एक तिहाई महिलाएं होंगी।

यह बोर्ड संबंधित सरकारों को, (i) न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण, और (ii) महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, से संबंधित विषयों पर सलाह देंगे

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वेतन संहिता अधिनियम के तहत स्थापित केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की संरचना और कार्य।
  2. मानक मजदूरी (floor wage) क्या है और इसे कौन तय करता है?
  3. न्यूनतम मजदूरी कौन तय करता है?
  4. अधिनियम के तहत मजदूरी क्या है?
  5. न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के लिए मानदंड।

मेंस लिंक:

वेतन संहिता अधिनियम, 2019 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय।

 राजस्थान के शिक्षा दिशा-निर्देशों से असंतुष्ट NCPCR

(Rajasthan’s education guidelines irk NCPCR)

संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान सरकार द्वारा प्रारंभिक शिक्षा पर जारी किये गए दिशा-निर्देशों की राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights- NCPCR) ने आलोचना की है।

विवाद का विषय

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के अनुसार,  राजस्थान सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 का ‘उल्लंघन’ करते हैं तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को नर्सरी कक्षाओं में मुफ्त शिक्षा का अधिकार प्रदान करने से वंचित करते हैं।

  • दिशानिर्देशों में कहा गया है कि, निजी स्कूलों में, ‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत  शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए प्रवेश केवल कक्षा 1 अथवा उससे ऊपर की कक्षाओं में दिया जाएगा तथा इस कानून के प्रावधान शिशु-कक्षाओं (Pre-Schoolers) पर लागू नहीं होंगे।
  • यह दिशा-निर्देश, RTE अधिनियम 2009 का उल्लंघन करते है, जिसमे कहा गया है, कि सभी निजी स्कूल अपनी कुल सीटों का 25 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमज़ोर बच्चों के लिये आरक्षित रखेंगे तथा उन्हें निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेंगे।
  • यह दिशानिर्देश भी RTE अधिनियम के उन प्रावधानों का भी उल्लंघन का उल्लंघन करते हैं, जिनमे कहा गया है, कि बच्चों के लिए प्रवेश की न्यूनतम आयु 5 वर्ष से 7 वर्ष के मध्य होनी चाहिए।
  • हालांकि, केंद्रीय कानून के तहत ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है तथा ‘छह से चौदह वर्ष की आयु का कोई भी लड़का अथवा लडकी’ प्रवेश ले सकते हैं।

 ‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम’ 2009 के संदर्भ में NCPCR की शक्तियाँ:

rte_act

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR):

  • कानून के उल्लंघन के संबंध में शिकायतों की जांच कर सकता है।
  • किसी व्यक्ति को पूछतांछ करने हेतु बुलाना तथा साक्ष्यों की मांग कर सकता है।
  • न्यायायिक जांच का आदेश दे सकता है।
  • हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकता है।
  • अपराधी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से संपर्क कर सकता है।
  • प्रभावित लोगों को अंतरिम राहत देने की सिफारिश कर सकता है।

NCPCR के बारे में:

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2005 के अंतर्गत मार्च 2007 में स्थापित किया गया।

  • यह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • आयोग का अधिदेश यह सुनिश्चित करता है कि देश में बनायी गयी, समस्त विधियाँ, नीतियां, कार्यक्रम तथा प्रशासनिक तंत्र, भारत के संविधान तथा साथ ही संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन में प्रतिपाादित बाल अधिकारों के संदर्श के अनुरूप हों।

 आयोग की संरचना:

इस आयोग में एक अध्यक्ष और छह सदस्य होते हैं जिनमें से कम से कम दो महिलाएँ होना आवश्यक है।

  • सभी सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा की जाती है, तथा इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होता है।
  • आयोग के अध्यक्ष की अधिकतम आयु 65 वर्ष तथा सदस्यों की अधिकतम आयु 60 वर्ष होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCPCR – रचना और कार्य।
  2. RTE अधिनियम के तहत NCPCR की शक्तियां।
  3. RTE अधिनियम की मुख्य विशेषताएं।
  4. RTE के अंतर्गत आने वाले बच्चे।

मेंस लिंक:

RTE अधिनियम की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

उइगरों पर दमनकारी कार्रवाई करने पर चीन व अमेरिका के मध्य विवाद

(China, US in new spat over Uighur crackdown)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन ने, मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर कड़ी कार्यवाही में सम्मिलित चीनी अधिकारियों पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने के प्रत्युत्तर में ‘जैसे को तैसा’ (tit-for-tat) कार्यवाही करने की घोषणा की है, इसके बाद से दोनों महाशक्तियों में तनाव बढ़ गया है।

विवाद का विषय:

चीन की यह प्रतिक्रिया, अमेरिका द्वारा शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी सचिव चेन क्वांगो (Chen Quanguo) तथा उपद्रवी अल्पसंख्यकों के खिलाफ बीजिंग की कट्टर नीतियों के वास्तुकार तथा एक अन्य अधिकारी समेत तीन चीनी अधिकारियों की अमेरिका में परिसंपत्तियों को फ्रीज़ करने तथा इनके लिए वीजा प्रतिबंध लगाने के जबाव में मानी जा रही है।

गवाहों और मानवाधिकार समूहों के अनुसार, चीन ने शिनजियांग प्रांत में एक मिलियन से अधिक उइगर तथा अन्य तुर्क मुस्लिमों को विशाल ब्रेनवाशिंग केन्द्रों में कैद कर दिया है, जहाँ पर इन अल्पसंख्यक समुदायों को देश की बहुसंख्यक ‘हान’ आबादी के साथ जबरदस्ती एकरूप करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

लेकिन, चीन का कहना है, कि वह हाल ही में हुई घातक-झडपों के बाद इन समुदायों को इस्लामिक कट्टरपंथ के आकर्षण से मुक्त करने के प्रयास में शिक्षा तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

पृष्ठभूमि:

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि शिनजियांग क्षेत्र में विभिन्न शिविरों के अन्दर दस लाख से अधिक मुसलमानों को हिरासत में लिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चीनी अधिकारियों पर मुसलमानों को यातना देने, दुर्व्यवहार करने तथा ‘मूल रूप से उनकी संस्कृति और उनके धर्म को मिटाने की कोशिश करने’ का आरोप लगाया है।

उइगर कौन हैं?

उइगर, चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में निवास करने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय हैं। शिनजियांग प्रांत में इनकी जनसंख्या तकरीबन 40 प्रतिशत है।

उइगर, चीन की तुलना में तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से करीबी नृजातीय संबंधों का दावा करते हैं।

चीन उइगरों को क्यों निशाना बना रहा है?

शिनजियांग तकनीकी रूप से चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। शिनजियांग, चीन का सबसे बड़ा क्षेत्र है तथा खनिजों से समृद्ध है इसके साथ ही इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।

  1. पिछले कुछ दशकों में, शिनजियांग प्रांत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, इसके साथ ही बड़ी संख्या में बहुसंख्यक हान चीनी (Han Chinese) इस क्षेत्र में आकर बस गए तथा बेहतर नौकरियों पर कब्जा कर लिया है। हान चीनीयों ने उइगरों के लिए आजीविका तथा पहचान के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है।
  2. इन्ही कारणों से, छिटपुट हिंसा की शुरुआत हुई तथा वर्ष 2009 में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में 200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हान चीनी थे। तब से कई अन्य हिंसक घटनाएं हुई हैं।
  3. बीजिंग का कहना है कि उइगर समुदाय एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहता है और, उइगरों के तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से सांस्कृतिक संबंधों के कारण, चीनी नेताओं को डर है कि पाकिस्तान जैसी जगहों से संचालित होने वाले उग्रवादी तत्व शिनजियांग में अलगाववादी आंदोलन को प्रोत्साहन व सहयोग दे सकते हैं।
  4. इसलिए, चीन की नीति पूरे समुदाय को संदिग्ध मानने तथा उइगरों की अलग पहचान को समाप्त करने हेतु एक व्यवस्थित परियोजना के आरम्भ करने की प्रतीत होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. शिनजियांग कहाँ है?
  3. हान चीनी कौन हैं?
  4. शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे भारतीय राज्य।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


  हागिया सोफिया (Hagia Sophia)

इस विश्व प्रसिद्ध इमारत का निर्माण बाइज़ेंटाइन साम्राज्य (Byzantine Empire) के दौरान एक चर्च के रूप में हुआ था। 1453 में जब इस शहर पर इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा हुआ तो इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया।

  • यह इस्तांबुल में स्थित एक ऐतिहासिक पूजा स्थल है।
  • यह ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा समान रूप से पूजनीय है।
  • 1935 में, मुस्तफा कमाल अतातुर्क के अधीन आधुनिक धर्मनिरपेक्ष तुर्की राज्य के आरंभिक दिनों में, इसे एक संग्रहालय बना दिया गया।
  • यह UNESO में सूचीबद्ध एक विश्व धरोहर स्थल है।

चर्चा का कारण

हल ही में, तुर्की के सुप्रीम कोर्ट ने इस्तांबुल की प्रसिद्ध हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में बदलने का फैसला सुनाया है।

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असीम पोर्टल (ASEEM portal)

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) द्वारा आत्मानिर्भर कुशल कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण’ (Aatmanirbhar Skilled Employee Employer Mapping- ASEEM) पोर्टल को आरम्भ किया गया है।

इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित प्लेटफॉर्म को उद्योग-संबंधित कुशल कार्यबल प्राप्त करने और कोविड के बाद की स्थितियों में उभरते नौकरी के अवसरों का पता लगाने में कार्यबल की मदद करने के लिये तैयार किया गया है।

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इंडिया ग्लोबल वीक 2020

यह लंदन स्थित मीडिया हाउस. ‘इंडिया इंक’ द्वारा आयोजित एक वार्षिक प्रमुख कार्यक्रम है।

  • इंडिया ग्लोबल वीक 2020 में 30 देशों के 5000 वैश्विक प्रतिभागियों को 75 सत्रों में 250 वैश्विक वक्ता संबोधित करेंगे।
  • थीम: द रिवाइवल: इंडिया एंड अ बेटर न्यू वर्ल्ड।
  • उद्देश्य: कोविद -19 संकट से उभरते हुए व्यापार, रणनीतिक और सांस्कृतिक अवसरों का अन्वेषण करना, चुनौतियों को समझते निर्णय लेना।

राष्ट्रीय मत्‍स्‍यपालन दिवस 2020

(National Fish Farmers Day)

राष्ट्रीय मत्‍स्‍य किसान दिवस प्रतिवर्ष 10 जुलाई को, वैज्ञानिक डॉ. केएच एलिकुन्ही (Dr. K. H. Alikunhi) और डॉ. एच एल चौधरी की स्मृति मनाया जाता है।

  • इन वैज्ञानिकों ने इंडियन मेजर कार्प में प्रेरित प्रजनन तकनीक (Hypophysation) का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया था।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य मत्‍स्‍य के स्‍तत स्टॉक एवं स्वस्थ परिवेश को सुनिश्चित करने के लिए देश के मत्स्यपालन संसाधनों को प्रबंधित करने के तरीके को बदलने पर ध्यान आकर्षित करना है।

भारत में, प्रमुख कार्प्स के रूप में, कतला (Catla), रोहू (Labeo rohita) और मृगल (Cirrhinus mrigala) मीठे पानी की एक्वाकल्चर का प्रमुख आधार हैं।

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इंडिया साइकिल्स 4 चेंज चैलेंज

(India Cycles4Change Challenge)

भारतीय शहरों ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए साइकिलिंग को बढ़ावा देने की दिशा में स्मार्ट सिटीज मिशन, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की एक पहल है।

इस चुनौती का उद्देश्य साइक्लिंग को प्रोत्साहन देने के लिए शहरों को अपने नागरिकों के साथ-साथ विशेषज्ञों को इस मुहिम से जोड़ने हेतु एकीकृत दूरदर्शिता विकसित करने में मदद करना है।

आवेदन करने हेतु पात्रता

  • 5 लाख से अधिक की आबादी वाले शहर।
  • राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी।
  • स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत शहर।

Insights Current Affairs Analysis (ICAN) by IAS Topper

 


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