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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 10 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. मंगोलियाई कंजुर पांडुलिपियाँ

 

सामान्य अध्ययन-II

1. राजनीति का अपराधीकरण

2. WHO द्वारा श्रीलंका तथा मालदीव खसरा-मुक्त घोषित

3. संयुक्त राज्य अमेरिका, WHO से बाहर

4. ऑस्ट्रेलिया एवं मालाबार युद्धाभ्यास

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रीवा सौर परियोजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भासन चार द्वीप

2. समाधान से विकास

 


 सामान्य अध्ययन-I


  

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

मंगोलियाई कंजुर पांडुलिपियाँ

(Mongolian Kanjur Manuscripts)

संस्कृति मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन’ (National Mission for ManuscriptsNMM) के तहत मंगोलियाई कंजुर के 108 अंकों के पुनर्मुद्रण करने परियोजना आरंभ की है।

हाल ही में, NMM के अंतर्गत, मंगोलियाई कंजुर पांडुलिपियों के प्रथम पांच पुनर्मुद्रित अंक जारी किए गए है।

मंगोलियाई कंजुर क्या है?

  • मंगोलियाई भाषा में ‘कंजुर‘ का अर्थ होता है ‘संक्षिप्त आदेश‘ जो विशेष रूप से भगवान बुद्ध के शब्द होते हैं।
  • मंगोलियाई बौद्धों द्वारा इसका काफी सम्मान किया जाता है तथा वे मंदिरों में कंजुर की पूजा करते हैं तथा एक धार्मिक रिवाज के रूप में अपने प्रतिदिन के जीवन में कंजुर की पंक्तियों का पाठ करते हैं।
  • मंगोलियाई कंजुर को तिब्बती भाषा से अनुदित किया गया है। कंजुर की भाषा शास्त्रीय मंगोलियाई है।

भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक संबंध:

भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक परस्पर संबंध सदियों पुराने हैं।

  • मंगोलिया में बौद्ध धर्म भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक राजदूतों द्वारा आरंभिक ईस्वी के दौरान ले जाया गया था।
  • इसके परिणामस्वरूप, आज मंगोलिया में बौद्धों का सबसे बड़ा धार्मिक प्रभुत्व है।
  • भारत ने 1955 में मंगोलिया के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए। तब से, दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ संबंध एक नई ऊंचाई तक पहुंच गए हैं।

राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM) के बारे में:

राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय द्वारा  फरवरी 2003 में आरंभ किया गया था।

  • इसका कार्य पांडुलिपियों में संरक्षित ज्ञान के दस्तावेजीकरण, संरक्षण एवं प्रसार करना है।
  • मिशन का एक उद्देश्य दुर्लभ एवं अप्रकाशित पांडुलिपियों को प्रकाशित करना है जिससे कि उनमें प्रतिष्ठापित ज्ञान शोधकर्ताओं, विद्वानों एवं बड़े पैमाने पर आम लोगों तक प्रसारित हो सके।

पृष्ठभूमि

भारत में विभिन्न प्रकार की लगभग दस मिलियन पांडुलिपियां है, जो संभवतः विश्व का सबसे बड़ा संग्रह है। ये विभिन्न विषयों, बनावट और सौंदर्यशास्त्र, लिपियों, भाषाओं, सुलेखों, चित्रों और चित्रों को कवर करती हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगोलिया कहाँ है?
  2. NMM कब लॉन्च किया गया था? उद्देश्य?
  3. मंगोलियाई कंजुर – अर्थ और महत्व।
  4. भारत और मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध।
  5. विभिन्न बौद्ध मुद्राएँ, हाथ के इशारे और उनके अर्थ।

मेंस लिंक:

मंगोलियाई कंजुर पांडुलिपियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीईबी

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

राजनीति का अपराधीकरण

(Criminalization of Politics)

संदर्भ:

फरवरी 2020 में उच्चत्तम न्यायालय द्वारा राजनीति में अपराधीकरण पर दिए गए फैसले के भारतीय लोकतंत्र के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

फैसले का विषय

उच्चत्तम न्यायालय द्वारा यह निर्णय भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ दायर न्यायालय की अवमानना न्यायालय की पीठ द्वारा वर्ष 2018 के ​​मामले में सुनाया गया था।

उच्चत्तम न्यायालय की पीठ ने वर्ष 2018 में एक निर्णय दिया था, जिसने सभी राजनीतिक दलों के सभी उम्मीदवारों के लिए उनके खिलाफ, यदि कोई हो तो, लंबित सभी आपराधिक मामलों को घोषित करने और प्रकाशित करने के लिए अनिवार्य बना दिया था।

कुछ समय पूर्व उच्चत्तम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी, जिसमे कहा गया था, कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, न्यायालय के निर्णय कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु कोई भी कदम उठाने में विफल रहे है।

  • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है, कि राजनीतिक दल, अपने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि विवरणों को ‘अप्रसिद्ध तथा सीमित ग्राहक संख्या वाले समाचार पत्रों’ में प्रकाशित करके तथा अपनी वेबसाइट पर उपरोक्त विवरण को जटिल तरीके से अपलोड कर रहे हैं, ताकि आम-जन विवरण तक आसानी से न पहुच सके। इस प्रकार, राजनीतिक दल न्यायालय के वर्ष 2018 के निर्णय को नाकाम बना रहे हैं।

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निर्णय:

न्यायालय ने निर्णय दिया था, कि राजनीतिक दल यह स्पष्ट करें कि ‘उनके द्वारा इस प्रकार के उम्मीदवारों के चयन का क्या कारण है तथा साथ ही साथ ये भी बताएं कि गैर-आपराधिक पृष्ठभूमियों के उम्मीदवारों क्यों नहीं चुना जा सकता था’।

  • यदि कोई राजनीतिक दल इस निर्णय का अनुपालन करने में विफल रहता है, तो यह न्यायालय के आदेशों / निर्देशों की अवमानना ​​होगी।

न्यायालय द्वारा जारी किए गए निर्देश:

  1. सभी राजनीतिक दलों को उनके चुने हुए उम्मीदवारों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के बारे में सभी विवरण प्रकाशित करना अनिवार्य है। इस विवरण को स्थानीय समाचार पत्रों में, संबंधित पार्टी की वेबसाइटों तथा पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर भी प्रकाशित किया जाएगा।
  2. लंबित मामलों के विवरण के साथ, राजनीतिक दलों के लिए, ‘इस प्रकार के उम्मीदवारों के चयन के कारणों को भी प्रकाशित करना होगा, तथा साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि उनके द्वारा गैर-आपराधिक पृष्ठभूमियों के उम्मीदवारों क्यों नहीं चुना गया था।
  3. उम्मीदवारों के चयन के लिए दिए गए ‘कारण’ संबंधित उम्मीदवारों की योग्यता, उपलब्धियों और गुणों के संदर्भ में होना चाहिए, तथा इन कारणों में ‘उनकी चुनाव जीतने की क्षमता’ नहीं होना चाहिए।

इस विषय पर ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RPA) के प्रावधान

वर्तमान में, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People- RPA) 1951 के तहत, किसी आपराधिक मामले में सजा-युक्त होने के पश्चात चुनाव नहीं लड़ सकते हैं।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के अंतर्गत, किसी भी आपराधिक मामले में दो अथवा दो से अधिक वर्षो के सजायाफ्ता व्यक्ति को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है। परन्तु, जिन व्यक्तियों का मामला अदालत में विचारधीन है, वे चुनाव में भाग ले सकते हैं।

राजनीति में अपराधीकरण के मुख्य कारण:

  1. भ्रष्टाचार
  2. वोट बैंक
  3. शासन में कमियां

आगे की राह

  1. राजनीतिक दलों को स्वयं ही दागी व्यक्तियों को टिकट देने से मना कर देना चाहिए।
  2. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करके, उन व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर देना चाहिए जिनके खिलाफ जघन्य प्रकृति के मामले लंबित हैं।
  3. फास्ट-ट्रैक अदालतों को दागी नीति-निर्माताओं से संबंधित मामलों को शीघ्रता से निपटाना चाहिए।
  4. चुनाव अभियानों के वित्तपोषण में अधिक पारदर्शिता लाई जाए।
  5. भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) को में राजनीतिक दलों के वित्तीय खातों के ऑडिट की शक्ति प्रदान की जानी चाहिए।

सुधारों की आवश्यकता:

वर्ष 2004 में, संसद के 24% सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले थे।

  • 2009 में, इनकी संख्या 30% हो गयी।
  • 2014 में, इनकी संख्या 34% हो गयी।
  • 2019 में, लगभग 43% सांसदों पर आपराधिक मामले थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8
  2. उच्चत्तम न्यायालय दिशानिर्देश।
  3. ECI – रचना और कार्य।
  4. CEC- नियुक्ति।
  5. उम्मीदवारों के चुनाव से संबंधित मामलों पर निर्वाचन आयोग की शक्तियां।

मेंस लिंक:

राजनीति के अपराधीकरण से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा कीजिए और इन चिंताओं को दूर करने के लिए उच्चत्तम न्यायालय ने क्या कदम उठाये हैं?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

WHO द्वारा श्रीलंका तथा मालदीव खसरा-मुक्त घोषित

(WHO Declares Sri Lanka, Maldives Measles-Free)

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, श्रीलंका और मालदीव से खसरा और रूबेला का उन्मूलन हो गया है।

इसके साथ, श्रीलंका और मालदीव WHO के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र से पहले दो देश बन गए जिन्होंने वर्ष 2023 के लक्ष्य से पूर्व खसरा तथा रूबेला बीमारियों को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है।

किसी देश को ‘खसरा और रूबेला मुक्त’ कब घोषित किया जाता है?

किसी देश में, एक बेहतर निगरानी तंत्र की देख-रेख में लगातार तीन वर्षों तक खसरा और रूबेला वायरस के स्थानिक संचरण को साक्ष्य नहीं मिलने पर, देश को ‘खसरा और रूबेला मुक्त’ घोषित कर दिया जाता है।

  • मालदीव में खसरा का अंतिम स्थानिक मामला वर्ष 2009 तथा रूबेला वायरस का अंतिम मामला अक्टूबर 2015 में दर्ज किया गया था।
  • जबकि श्रीलंका में खसरा का अंतिम स्थानिक मामला मई 2016 में और रूबेला का अंतिम मामला मार्च 2017 में पाया गया था।

पृष्ठभूमि

WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के सदस्य देशों ने पिछले साल सितंबर में खसरा और रूबेला उन्मूलन हेतु वर्ष 2023 को लक्ष्य के रूप में निर्धारित किया था।

  • WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का ‘खसरा उन्मूलन और रूबेला नियंत्रण कार्यक्रम’ वर्ष 2014 से जारी है
  • भूटान, उत्तर कोरिया और पूर्वी तिमोर को भी खसरा मुक्त घोषित किया जा चुका है।

उन्मूलन की आवश्यकता

इस क्षेत्र में खसरा से प्रतिवर्ष 500,000 लोगों की मृत्यु होती है, तथा रूबेला / CRS के संक्रमण के प्रतिवर्ष लगभग 55,000 मामले दर्ज किये जाते है। खसरा तथा रूबेला उन्मूलन से इन होने वाली मौतों और संक्रमण पर रोक लगेगी तथा गर्भवती महिलाओं और शिशुओं के स्वास्थ्य में बढ़ोत्तरी होगी।

खसरा (Measles) के बारे में:

यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है।

संचरण: यह संक्रमित व्यक्तियों के नाक, मुंह अथवा गले से निकले बहते द्रव के सीधे या वायुविलय के माध्यम से संपर्क में आने से फैलता है।

प्रारंभिक लक्षण: सामान्यतः संक्रमण के 10-12 दिनों बाद दिखाई देते हैं, इनमे तेज बुखार, नाक बहना, आंखों में खून आना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे आदि लक्षण सम्मिलित होते हैं। कुछ दिनों बाद, छोटे-छोटे दाने विकसित होते है, जो चेहरे और ऊपरी गर्दन पर शुरू होकर धीरे-धीरे नीचे की ओर फैलते है।

संवेदनशीलता: खसरा संक्रमण की संभावना कुपोषित बच्चों में सर्वाधिक होती है, विशेष रूप से विटामिन ए की कमी वाले अथवा जिनका एचआईवी / एड्स या अन्य बीमारियों के कारण प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो चुका हो, खसरा संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

  • सबसे गंभीर जटिलताओं में अंधापन, एन्सेफलाइटिस (संक्रमण, जो मस्तिष्क में सूजन का कारण बनता है), गंभीर दस्त तथा निर्जलीकरण, और निमोनिया जैसे गंभीर श्वसन संक्रमण शामिल हैं।
  • रोकथाम: बच्चों के लिए नियमित खसरा टीकाकरण, निम्न कवरेज वाले देशों में व्यापक टीकाकरण अभियान आदि, वैश्विक स्तर पर खसरा से होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियाँ हैं।
  • निवारक प्रयास: ग्लोबल वैक्सीन एक्शन प्लान के तहत, वर्ष 2020 तक पाँच WHO क्षेत्रों में खसरा और रूबेला को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। WHO, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी देशों में सहयोग, टीकाकरण और निगरानी गतिविधियों के समन्वय के लिए जिम्मेदार प्रमुख एजेंसी है।

रूबेला (Rubella):

यह सामान्यतः पर एक हल्का संक्रमण है, परन्तु गर्भवती महिलाओं के लिए यह बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसके कारण गर्भवती महिलायें ‘जन्मजात रूबेला सिंड्रोम’ (congenital rubella syndromeCRS) से ग्रस्त हो जाती है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय है।

CRS से ग्रसित होने पर भ्रूण तथा नवजात शिशुओं में जन्मजात आंखों (मोतियाबिंद), कान (सुनने में कमी), मस्तिष्क (माइक्रोसेफेली, मानसिक मंदता) और जन्मजात विसंगतियाँ आदि होने की संभावना रहती है, जो कि परिवारों पर भारी सामाजिक-आर्थिक बोझ का कारण बनती हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. खसरा और रूबेला के मध्य अंतर?
  2. ग्लोबल वैक्सीन एक्शन प्लान क्या है?
  3. टीकाकरण कैसे कार्य करता है?
  4. WHO- दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र
  5. यूनिसेफ की संरचना।

मेंस लिंक:

खसरा के विरुद्ध लड़ाई में भारत कहाँ खड़ा है? क्या आपको लगता है कि भारत अपना 2020 का लक्ष्य हासिल कर सकता है? भारत में खसरा के कारण होने वाली म्रत्यु-दर की स्थिति और इसे समाप्त करने में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

संयुक्त राज्य अमेरिका, WHO से बाहर

(U.S. withdrawal from WHO)

हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ को आधिकारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन से सदस्यता वापस लेने के संदर्भ में सूचित किया है। अमेरिका में 6 जुलाई को नोवल कोरोनावायरस मामलों की संख्या तथा इससे होने वाली मौतों की संख्या क्रमशः 2.8 मिलियन और लगभग 0.13 मिलियन से अधिक हो चुकी थी।

इसके पूर्व, 29 मई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा WHO के लिए फंडिंग रोकने तथा इस वैश्विक स्वास्थ्य संस्था से बाहर निकलने की घोषणा की गयी थी।

इस फैसले का कारण

राष्ट्रपति ट्रम्प का आरोप है कि चीन में कोरोना वायरस की पहचान और उसे महामारी घोषित करने में WHO ने जानबूझकर देरी की। ट्रंप ने कहा है कि WHO पर चीन का नियंत्रण है और COVID -19 को लेकर जरूरी स्वास्थ्य सूचनाएं काफी बाद में जारी की गईं, जिससे अमेरिका सर्वाधिक प्रभावित हुआ है।

 इस फैसले के निहितार्थ:

अमेरिका द्वारा WHO से हटने के इस सनक भरे फैसले से वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम पड़ेगा।

  • अमेरिका का WHO से बाहर निकलना विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए महत्वपूर्ण झटका होगा, क्योंकि इससे, संगठन के लिए महत्वपूर्ण अमेरिकी तकनीकी विशेषज्ञता तथा लगभग 450 मिलियन डॉलर की वार्षिक धनराशि का नुकसान होगा।
  • WHO अपने संविधान के अनुच्छेद 7 के अनुसार, सदस्यता त्यागने वाले देश के मतदान अधिकार निलंबित करेगा तथा संबंधित देश के लिए अपनी सेवाओं को प्रतिबंधित करेगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)

WHO की स्थापना 7 अप्रैल, 1948 को हुई थी – इस दिन को अब प्रतिवर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में है।
  • संगठन 150 देश में अपने कार्यालयों, तथा छह क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से कार्य करता है तथा इसके 7,000 से अधिक कर्मचारी विश्व में अपनी सेवायें प्रदान करते हैं।

WHO को किस प्रकार प्रशासित किया जाता है?

  1. विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly), सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की एक सभा है, जो WHO की नीतियों को निर्धारित करती है।
  2. इसके कार्यकारी बोर्ड में स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञता-धारक सदस्य होते हैं, जो विश्व स्वास्थ्य सभा के निर्णयों तथा नीतियों को प्रभावी बनाते है।
  3. इसका मुख्य कार्य सहयोग के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यों का निर्देशन और समन्वय करना है।

WHO का वित्त पोषण

विश्व स्वास्थ्य संगठन को चार प्रकार से वित्त प्राप्त होता है:

  1. निर्धारित योगदान (Assessed contributions): इसके अंतर्गत संगठन के प्रत्येक सदस्य को सदस्यता राशि के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान करना होता है। प्रत्येक सदस्य देश द्वारा किए जाने वाले भुगतान की गणना देश के धन और जनसंख्या के सापेक्ष की जाती है।
  2. स्वैच्छिक योगदान (Voluntary contributions): इसके अंतर्गत सदस्य देशों (उनके निर्धारित योगदान के अतिरिक्त) तथा अन्य भागीदारों से अनुदान दिया जाता है।
  3. कोर स्वैच्छिक योगदान (Core voluntary contributions): इसके तहत कम वित्त पोषित कार्यक्रमों को वित्त की कमी के कारण वाधित होने पर सुचारू ररूप से संचालित करने के लिए फंडिंग की जाती है।
  4. इंफ्लूएंजा महामारी से निपटने हेतु योगदान (Pandemic Influenza PreparednessPIP): इसे संभावित महामारी के दौरान विकासशील देशों की वैक्सीन तथा अन्य सामग्री की आपूर्ति को सुनिश्चित करने हेतु वर्ष 2011 से आरम्भ किया गया है।

सर्वाधिक योगदानकर्ता:

  1. वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका WHO का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। यह प्रतिवर्ष $ 553.1 मिलियन राशि का योगदान करता है, जो संगठन को प्राप्त होने वाली कुल राशि का 67 प्रतिशत है।
  2. अमेरिका के बाद बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, WHO के लिए सर्वाधिक योगदान करता है। यह प्रतिवर्ष कुल प्राप्त राशि का 76 प्रतिशत अथवा $ 367.7 मिलियन का अनुदान करता है।
  3. तीसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता GAVI वैक्सीन एलायंस है, जो कुल अनुदान का 39 प्रतिशत योगदान करती है, इसमें यूके (7.79 प्रतिशत) और जर्मनी (5.68 प्रतिशत) क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।
  4. इसके पश्चात चार सबसे बड़े अंशदाता अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हैं: मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs- UNCHA) (09 प्रतिशत), विश्व बैंक (3.42 प्रतिशत), रोटरी इंटरनेशनल (3.3 प्रतिशत), और यूरोपीय आयोग (3.3 प्रतिशत) )।
  5. भारत कुल योगदान का 0.48 प्रतिशत और चीन 0.21 प्रतिशत योगदान करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WHO का प्रशासन
  2. WHO में योगदान के प्रकार
  3. सबसे बड़ा योगदानकर्ता
  4. विश्व स्वास्थ्य दिवस का महत्व
  5. GAVI क्या है?

मेंस लिंक:

विश्व में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में WHO की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

ऑस्ट्रेलिया एवं मालाबार युद्धाभ्यास

(Australia and the Malabar Exercise)

चर्चा का कारण

भारत सरकार शीघ्र ही ‘मालाबार नौसैनिक अभ्यास’ में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने विषय में निर्णय लेगा।

ऑस्ट्रेलिया को इस समूह में क्यों शामिल किया जाना चाहिए?

इस नौसैना अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करना ‘चतुष्पक्षीय गठबंधन’ (Quad coalition) के सैन्यीकरण की दिशा में  पहला कदम होगा। इस तरह की पहल का चीन के द्वारा सदैव से विरोध किया जाता रहा है।

इसके अतिरिक्त, जापान तथा अमेरिका भी इस गठबंधन में आस्ट्रेलिया को सम्मिलित किये जाने के पक्ष में है तथा भारत पर इसके लिए दवाब बना रहे है।

इसके लिए प्रक्रिया:

भारत सरकार द्वारा ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करने के संबंध में निर्णय लेने के पश्चात्, प्रक्रिया के अनुसार, भारत अन्य दोनों भागीदार देशो- जापान तथा अमेरिका- को उनकी सहमति के लिए सूचित करेगा। इन सहयोगी देशों के सहमत होने के पश्चात भारत, ऑस्ट्रेलिया के लिए समूह में सम्मिलित होने के लिए औपचारिक निमंत्रण देगा।

मालाबार युद्धाभ्यास के बारे में:

मालाबार युद्धाभ्यास का आरंभ भारत और अमेरिका के मध्य वर्ष 1992 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुआ था, वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया।

इस वर्ष COVID-19 महामारी के कारण मालाबार युद्धाभ्यास में देरी हुई है।

‘क्वाड समूह’ (Quad Group) क्या है?

यह एक चतुष्पक्षीय संगठन है जिसमे जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया सम्मिलित हैं।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी साझा हित रखते हैं।
  • इस विचार को पहली बार वर्ष 2007 में जापानी प्रधान मंत्री शिंजो आबे द्वारा प्रस्तावित किया गया था। हालाँकि, ऑस्ट्रेलिया के समूह में सम्मिलित नहीं होने के कारण यह विचार आगे नहीं बढ़ सका है।

इस संगठन का महत्व:

  1. क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  2. इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  3. यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


  

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

रीवा सौर परियोजना

(Rewa solar project)

हाल ही में प्रधान मंत्री द्वारा रीवा सौर परियोजना का उद्घाटन किया गया, यह एशिया की सबसे बड़ी 750 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना है।

यह मध्य प्रदेश के रीवा में स्थित है।

इस सौर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (RUMSL) ने विकसित किया है, जो मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम लिमिटेड (MPUVN) तथा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की संयुक्त उद्यम कंपनी है।

परियोजना का महत्व:

रीवा परियोजना को भारत और विदेशों में इसकी ठोस परियोजना संरचना और नवाचारों के लिए जाना जाता है।

  1. इसे MNRE द्वारा बिजली डेवलपर्स के जोखिम को कम करने के लिए इसके भुगतान सुरक्षा तंत्र को अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में अनुशंसित किया गया है।
  2. इस परियोजना को नवाचार और उत्कृष्टता के लिए इसे वर्ल्ड बैंक ग्रुप प्रेसिडेंट अवॉर्ड भी मिला है। तथा इसे प्रधानमंत्री की ‘अ बुक ऑफ इनोवेशन: न्यू बिगनिंग्स’ पुस्तक में भी शामिल किया गया है।
  3. यह परियोजना राज्य के बाहर एक संस्थागत ग्राहक को आपूर्ति करने वाली पहली अक्षय ऊर्जा परियोजना भी है। अर्थात, यह दिल्ली मेट्रो को अपनी कुल उत्पादन का 24 प्रतिशत बिजली देगी जबकि शेष 76 प्रतिशत बिजली मध्य प्रदेश के राज्य बिजली वितरण कंपनियों (DISCOM) को आपूर्ति की जाएगी।
  4. रीवा परियोजना 100 गीगा वाट (GW) की सौर स्थापित क्षमता के साथ 2022 तक 175 गीगा वाट की स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

स्रोत: पीईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


  भासन चार द्वीप

(Bhashan Char island)

  • इसे चार पिया (Char Piya) के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह बांग्लादेश में एक द्वीप है।
  • यह बंगाल की खाड़ी में स्थित है।
  • इस द्वीप का निर्माण वर्ष 2006 में हिमालयन गाद से हुआ था।
  • इसका क्षेत्रफल 40 किमी² है।

चर्चा का कारण

बांग्लादेश के अधिकारियों ने हाल ही में कहा है, कि जब तक रोहिंग्या शरणार्थी वापस घर लौटने के लिए सहमत नहीं हो जाते है, उन्हें इस द्वीप को छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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समाधान से विकास

  • यह हरियाणा सरकार द्वारा जारी की गयी ‘बाह्य विकास शुल्क’ (External Development Charges- EDC) और ‘अवसंरचनात्मक विकास शुल्क’ (Infrastructural Development Charges- IDC) के कारण लंबे समय से लंबित बकाया की वसूली हेतु एक बार की निपटान योजना है।
  • यह योजना केंद्र सरकार की ‘विवाद से विश्वास- 2020’ योजना पर आधारित है।

 


Insights Current Affairs Analysis (ICAN) by IAS Topper

 


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