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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 8 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-I

1. सेना में सभी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague)

2. अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम (CAATSA)

3. अमेरिका के नए वीजा नियमों से छात्रों के लिए संकट

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नमामि गंगे कार्यक्रम

2. UNFCCC तथा पेरिस समझौते के तहत वित्तीय और तकनीकी प्रतिबद्धताएँ

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. भारत की सबसे बड़ी तितली

2. दिल्ली नगर कला आयोग (DUAC)

3. चर्चित स्थल- इदलिब (Idlib)

 


 सामान्य अध्ययन-I


  

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

सेना में सभी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन

(Permanent commission to all women officers in Army)

उच्चत्तम न्यायालय ने, 17 फरवरी को अपने एक निर्णय में सरकार को सशस्त्र बलों में योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन / कमांड पोस्टिंग देने के लिए कहा था। हाल ही में, शीर्ष न्यायालय ने अपने निर्णय को लागू करने हेतु सरकार को एक महीने के विस्तार की अनुमति दी है।

चर्चा का कारण

कुछ समय पूर्व, उच्चत्तम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें कहा गया था कि सरकार, शीर्ष न्यायालय के निर्णय के कार्यान्वयन में बाधा डाल रही है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्णय को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है तथा केवल आधिकारिक आदेश जारी करना ही रह गया है।

उच्चत्तम न्यायालय का फरवरी आदेश तथा इसके निहितार्थ:

  1. महिला अधिकारी, पुरुष अधिकारियों के साथ सभी कमांड पोस्टिंग पर नियुक्तियों के लिए योग्य पात्र हैं, इससे महिला अधिकारीयों के लिए उच्च पदों पर पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।
  2. न्यायालय ने सरकार के इस विचार को खारिज कर दिया, कि केवल 14 वर्ष से कम की सेवा वाली महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के लिए विचार किया जाना चाहिए, तथा 20 वर्ष से अधिक की वाली महिला अधिकारियों को तत्काल पेंशन दी जानी चाहिए।
  3. न्यायालय ने सेवा के वर्षों के आधार पर स्थाई कमीशन दिए जाने के लिए होने वाले भेदभाव को समाप्त कर दिया तथा महिला अधिकारियों को, युद्धक भूमिका में पुरुष अधिकारियों के समकक्ष भारतीय सेना की 10 शाखाओं में स्थायी कमीशन दिये जाने को कहा है।

न्यायालय द्वारा अपने फैसले में की गयी टिप्पणियाँ:

न्यायालय ने महिला अधिकारियों को महत्तम भूमिका दिये जाने के खिलाफ तर्कों को खारिज कर दिया, और इसे ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन बताया (अनुच्छेद 14)।

न्यायालय ने जैविक तर्क (biological argument ) को भी विचलित करने वाला कहते हुए खारिज कर दिया।

शीर्ष अदालत ने महिलाओं की शारीरिक सीमा का हवाला देने वाले केंद्र के रूख को खारिज करते हुए इसे ‘लैंगिक रूढ़ियों’ और ‘महिला के खिलाफ लैंगिक भेदभाव’ पर आधारित बताया था, (अनुच्छेद 16)।

न्यायालय के अनुसार, यह केवल ‘सेना में वास्तविक रूप से समानता लाने के लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देने की आवश्यकता’ को दर्शाता है।

सरकार द्वारा दिए गए तर्क

  • सेना में महिला अधिकारियों की नियुक्ति पर मातृत्व, शिशु पालन, मनोवैज्ञानिक सीमाओं का प्रभाव पड़ता है।
  • परिवार में अलगाव, जीवनसाथी का रोजगार, बच्चों की शिक्षा, गर्भावस्था के कारण लंबे समय तक अनुपस्थिति, मातृत्व सेवा की जरूरतों को पूरा करना आदि, महिलाओं के लिए सैन्य सेवाओं की अनिवार्यता को पूरा करने में एक बड़ी चुनौती है।

शारीरिक सीमाएँ: सैनिकों को दुर्गम इलाकों, निर्जन पोस्टों तथा प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में काम करना होता है। अधिकारियों को आगे बढ़कर नेतृत्व करना होता है। इन युद्ध कार्यों को पूरा करने के लिए उन्हें उत्कृष्ट शारीरिक स्थिति में होना चाहिए। सरकार के अनुसार, महिलायें जमीनी युद्धक भूमिकाओं में सेवा करने योग्य नहीं होती है।

व्यवहारिक तथा मनोवैज्ञानिक चुनौतियां: आर्मी यूनिट्स में एक ‘विशिष्ट प्रकार का सर्व-पुरुष माहौल’ होता है। महिला अधिकारियों की उपस्थिति के लिए ‘संयत व्यवहार’ की आवश्यकता होगी। पुरुष सैनिक मुख्यतः ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते है, तथा वे महिला अधिकारी से आदेश लेने को तैयार नहीं हो सकते हैं।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. SSC क्या होता है?
  2. स्थायी कमीशन क्या है?
  3. अनुच्छेद 14 तथा अनुच्छेद 16।
  4. उच्चत्तम न्यायालय के निर्णय का अवलोकन।
  5. WSES क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague)

हाल ही में, चीन में ब्यूबोनिक प्लेग नामक बीमारी का एक संदिग्ध मामला सामने आया है। इसके बाद उत्तरी चीन के एक शहर बायानूर (Bayannur) में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

आंतरिक मंगोलिया स्वायत्त क्षेत्र के अधिकारियों ने प्लेग की रोकथाम और नियंत्रण के थर्ड लेवल की चेतावनी जारी कर दी है। स्थानीय अधिकारियों ने घोषणा की है, कि प्लेग फैलने के संभावित खतरे को देखते हुए चेतावनी-अवधि वर्ष 2020 के अंत तक जारी रहेगी।

प्लेग क्या होता है?

प्लेग एक ऐसी बीमारी है जो ‘यर्सिनिया पेस्टिस’ (Yersinia pestis) नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बीमारी, जानवरों तथा मुख्य रूप से कृन्तकों (rodents) में पाई जाती है।

यह संक्रमित जानवरों तथा पिस्सुओं से मनुष्यों में संचारित होता है।

मध्यकाल (5वीं-15वीं शताब्दी) में, प्लेग को काली मौत’ के रूप में भी जाना जाता था क्योंकि इससे यूरोप में लाखों लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

प्लेग, तीन प्रकार का होता हैं:

ब्यूबोनिक प्लेग: यह व्यक्ति के लसीका तंत्र- lymphatic system (जो मनुष्य के प्रतिरक्षा तंत्र का एक भाग होता है) को संक्रमित करता है, जिससे लसीका पर्व (lymph nodes) में सूजन आ जाती है।

यदि इसका समय पर उपचार नहीं किया जाये तो, यह निमोनिया के सेप्टिकमिक प्लेग (Septicemic Plague) में परिवर्तित हो सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, कमजोरी और सिरदर्द आदि सम्मिलित होते हैं।

न्यूमोनिक प्लेग (Pneumonic plague): WHO के अनुसार, यह प्लेग का सर्वाधिक संक्रामक प्रकार होता  है’ तथा 24 से 72 घंटों के भीतर यह जानलेवा हो सकता है। यह बैक्टीरिया द्वारा फेफड़ों को संक्रमित करने पर होता है। मानव से मानव में फैलने वाला यह एकमात्र प्लेग है।

लक्षण: सीने में दर्द, बुखार तथा खांसी हैं। यह खांसी के माध्यम से तीव्रता से फैलता है।

सेप्टिकमिक प्लेग (Septicemic Plague): यह बैक्टीरिया द्वारा रक्त प्रवाह में प्रवेश करने से, तथा वहां अपनी संख्या में वृद्धि करने से होता है।

अनुपचारित छोड़ देने पर, न्यूमोनिक और ब्यूबोनिक प्लेग से सेप्टिकम प्लेग हो सकता है। सेप्टिकैमिक प्लेग से संक्रमित व्यक्ति की त्वचा काली पड़ने लगती है।

प्लेग का इलाज तथा नियंत्रण

प्लेग एक जानलेवा बीमारी है, परन्तु जल्दी पहचान होने पर एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज किया जा सकता है। हालांकि, शीघ्र उपचार नही किये जाने पर, यह रोग गंभीर रूप धारण कर सकता है तथा मृत्यु का कारण बन सकता है।

इसके उपचार के लिए, कभी-कभी, केवल एंटीबायोटिक्स पर्याप्त नहीं होते हैं, तथा साथ में अंतःशिरा तरल पदार्थ (Intravenous Fluids) और अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

चूंकि यह अत्यधिक संक्रामक बीमारी होती है, तथा न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमित व्यक्तियों को अलग  रखा जाता है।

  • संक्रमित व्यक्ति के निकटवर्ती लोगों को भी निवारक उपाय के रूप में एंटीबायोटिक दवाओं की एक खुराक दी जाती है।
  • प्लेग नियंत्रण हेतु अन्य निवारक उपायों के अंतर्गत कृंतक जीवों को कीट नियंत्रण के माध्यमों से नियंत्रित किया जाता है।

भारत में प्लेग:

ब्यूबोनिक प्लेग, भारत को भी बुरी तरह प्रभावित कर चुका है।

  • प्लेग का पहला मामला तत्कालीन बंबई में 23 सितंबर 1896 को दर्ज किया गया था। यह वर्ष 1855 में चीन से उत्पन्न हुई तीसरी प्लेग महामारी का एक हिस्सा था।
  • यह बीमारी भारत में व्यापारिक जहाजों के माध्यम से कलकत्ता, कराची, पंजाब और संयुक्त प्रांत के बंदरगाह शहरों में फ़ैल गयी थी।
  • इस बीमारी के कारण भारत में लगभग 12 मिलियन से अधिक मौते हुई थी।

उस समय प्लेग की स्थिति विकराल हो चली थी, कि इसे नियंत्रित करने लिए बने ‘महामारी रोग अधिनियम’,1897 का मसौदा जल्दबाजी में तैयार किया गया। इस कानून में ‘खतरनाक महामारी को नियंत्रित करने हेतु विशेष उपाय करने तथा नियमों को निर्धारित करने’ का प्रावधान किया गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्लेग किसके कारण होता है?
  2. क्या यह जूनोटिक है?
  3. प्लेग के प्रकार और अंतर?
  4. इसे “काली मौत” क्यों कहा जाता है?
  5. 1897 की महामारी रोग अधिनियम का अवलोकन।

मेंस लिंक:

ब्यूबोनिक प्लेग के कारणों, लक्षणों और प्रभावों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम (CAATSA)

(Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act- CAATSA)

अमेरिका ने अपने सभी सहयोगियों भागीदारों से रूस के साथ व्यवहार को समाप्त करने को कहा है, अन्यथा उन पर ‘अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम‘ (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act- CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं।

यह इस बात का संकेत है, हाल ही में, भारत तथा चीन के मध्य वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LAC) पर हुए घातक संघर्ष के बाद जमीनी वास्तविकता में हुए परिवर्तन के बावजूद अमेरिका का नजरिया नहीं बदला है तथा उसने भारत सहित अन्य देशों को रूस से हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है

CAATSA क्या है?

CAATSA को वर्ष 2017 में अमेरिकी संसद द्वारा अधिनियमित किया गया था। यह एक अमेरिकी संघीय कानून है जिसके अंतर्गत ईरान, उत्तर कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं।

इसके अंतर्गत, रूस के साथ रक्षा तथा खुफिया क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विनिमय करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया गया है।

यह अधिनियम अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी रक्षा और खुफिया क्षेत्रों में ‘महत्त्वपूर्ण लेनदेन’ करने वाले व्यक्तियों पर अधिनियम में उल्लिखित 12 सूचीबद्ध प्रतिबंधों में से कम से कम पाँच प्रतिबंध लगाने अधिकार देता है।

लगाये जाने वाले प्रतिबंध

  1. अभिहित व्यक्ति (sanctioned person) के लिए ऋणों पर प्रतिबंध।
  2. अभिहित व्यक्तियों को निर्यात करने हेतु ‘निर्यात-आयात बैंक’ सहायता का निषेध।
  3. संयुक्त राज्य सरकार द्वारा अभिहित व्यक्ति से वस्तुओं या सेवाओं की खरीद पर प्रतिबंध।
  4. अभिहित व्यक्ति के नजदीकी लोगों को वीजा से मनाही।

भारत पर प्रभाव

हालाँकि, अमेरिका से भारत पर सीधे तौर पर प्रतिबंध नहीं लगाए गए हैं, फिर भी यह भारत को प्रभावित करतें है। इसका मुख्य कारण भारत के ईरान और रूस के साथ संबंधों की प्रकृति है। भारत के इन दोनों देशों के काफी अच्छे व्यापारिक संबंध है।

CAATSA के प्रावधानों के अनुसार, अमेरिका अपने सभी प्रतिद्वंदियों तथा इनके साथ संबंध रखने वाले सभी देशो तथा व्यापारिक कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाएगा।

अतः, यदि भारत, रूस और ईरान के साथ अपने संबंध नहीं तोड़ता है, तो अमेरिका भारत के खिलाफ प्रतिबंधों को लागू कर सकता है। भारत, अमेरिका के साथ बढ़ते राजनयिक संबंधों को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता है, लेकिन साथ ही वह रूस और ईरान से रक्षा-सामग्री तथा तेल की आपूर्ति को रोकने का खतरा भी नहीं ले सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CAATSA किससे संबंधित है?
  2. CAATSA के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति की शक्तियां।
  3. लगाये जाने वाले प्रतिबंधों के प्रकार।
  4. भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण रक्षा सौदे।
  5. ईरान परमाणु समझौते का अवलोकन।

मेंस लिंक:

CAATSA की विशेषताओं और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिका के नए वीजा नियमों से छात्रों के लिए संकट

अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (Immigration and Customs Enforcement- ICE) द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के तहत कॉलेजों द्वारा सभी कक्षाएं ऑनलाइन आयोजित करने पर सभी विदेशी छात्रों को अमेरिका छोड़ना होगा या दूसरे शैक्षणिक संस्थान में तबादला कराना होगा।

कौन होगा प्रभावित?

नए वीजा नियमों से विश्वविद्यालय के उन पाठ्यक्रमों के छात्र, जो पूरी तरह ऑनलाइन हो गए है, सर्वाधिक प्रभावित होंगे।

विदेशी छात्रों के समक्ष निर्वासन का संकट उत्पन्न हो गया है, इन नियमों के अनुसार, इन छात्रों को या तो देश छोड़ना पड़ेगा अथवा ‘व्यक्तिगत-निर्देशों’ से दूसरे शैक्षणिक संस्थान में तबादला कराना होगा।

यह आदेश, प्रत्यक्षतः F-1 और M-1 वीजा पर आए छात्रों से संबंधित है।

  1. F-1 वीजा धारक: तृतीयक शिक्षा (उच्च शिक्षा) संस्थानों में स्नातक, स्नातकोत्तर या डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहे हैं।
  2. M1 वीजा धारक: व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययन करते हैं।

नए वीजा नियमों का समग्र प्रभाव:

  1. पूरी तरह से ऑनलाइन हो गए स्कूलों में पढने वाले गैर-प्रवासी F-1 और M-1 छात्र पूरा कोर्स ऑनलाइन नही ले सकते तथा अमेरिका में रह सकते हैं।
  2. जिनके कॉलेज और विश्वविद्यालय ऑनलाइन मॉडल लागू कर रहे है, उन छात्रों को देश छोड़ना होगा अथवा अमेरिका में रहने के लिए कोई दूसरा रास्ता खोजना होगा।
  3. विदेशी छात्रों के अमेरिका में वैधानिक तरीके से रहने के लिए अन्य उपायों के तहत ‘व्यक्तिगत-निर्देशों’ से दूसरे शैक्षणिक संस्थान में तबादला कराया जा सकता है।

भारतीय छात्रों पर प्रभाव

अमेरिका में उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले कुल छात्रों में विदेशी छात्रों का हिस्सा लगभग 5.5 प्रतिशत है।

आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE)के वर्ष 2017-2018 के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी छात्रों में 18 प्रतिशत भारतीय छात्र है तथा यह संख्या में चीनी छात्रों के बाद दूसरे स्थान पर है।

इन नए वीजा नियमो की घोषणा से कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा वर्ष के अंत तक H1-B अत्यधिक कुशल श्रमिक वीजा निलंबित कर दिए गए थे। भारतीय नागरिकों को प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में H1-B वीजा जारी किये जाते थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. H1B, F1 तथा M1 वीजा में अंतर।
  2. एक NRI और एक OCI कार्डधारक के मध्य अंतर।
  3. OCI और PIO का विलय कब किया गया था?
  4. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत किसे नागरिकता प्रदान की जाती है?
  5. भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेंस लिंक:

अमेरिकी वीजा नियमों में हाल के बदलावों से भारतीय छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

नमामि गंगे कार्यक्रम

विश्व बैंक और भारत सरकार ने आज ‘नमामि गंगे कार्यक्रम’ में आवश्‍यक सहयोग बढ़ाने के लिए एक ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत गंगा नदी का कायाकल्प किया जाना है।

  • विश्व बैंक ने गंगा के कायाकल्प में सहयोग बढ़ाने के लिए 400 मिलियन डॉलर प्रदान किए है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के बारे में:

यह एक छाता कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत पिछली और वर्तमान में चल रही परियोजनों को, दक्षता बढ़ाने, तालमेल स्थापित करने तथा व्यापक और बेहतर समन्वित हस्तक्षेप के माध्यम से एकीकृत किया जाता है।

इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean GangaNMCG) तथा राज्यों द्वारा संचालित- राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूहों के द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।

राष्ट्रीय गंगा परिषद (National Ganga CouncilNGC)

राष्ट्रीय गंगा परिषद की स्थापना अक्टूबर 2016 में, गंगा नदी (कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन) के प्राधिकार के आदेश, 2016 तहत की गयी थी। इसे गंगा नदी के कायाकल्प, संरक्षण, और प्रबंधन हेतु राष्ट्रीय कार्यान्वयन परिषद के रूप में भी जाना जाता है।

इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।

इसने राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) को प्रतिस्थापित किया है

NGC में गंगा-बेसिन के पांच राज्यों- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के अलावा कई केंद्रीय मंत्री सम्मिलित होंगे तथा इसकी प्रतिवर्ष एक बार बैठक होती है।

नमामि गंगे कार्यक्रम के मुख्य स्तंभ:

  1. अपशिष्ट अपशोधन अवसंरचना
  2. नदी-तल की सफाई
  3. वनीकरण
  4. औद्योगिक प्रदूषकों की निगरानी
  5. रिवर-फ्रंट डेवलपमेंट
  6. जैव विविधता
  7. जन जागरूकता
  8. गंगा ग्राम

‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम की आवश्यकता

  1. गंगा नदी का भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक मूल्य है।
  2. हिमालय से निकल कर तथा बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हुई यह नदी, उत्तर और पूर्वी भारत के मैदानी इलाकों से होकर 2,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करती है।
  3. गंगा बेसिन – जो नेपाल, चीन और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है – भारत के कुल भू-भाग का 26 प्रतिशत है।
  4. गंगा भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक है, जिसका सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व बेसिन की सीमाओं को पार भी है।

गंगा के लिए प्रदूषण खतरे

  1. तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या, रहन-सहन का बढ़ता स्तर, औद्योगीकरण तथा नगरीकरण में घातीय वृद्धि आदि ने जल संसाधनों के क्षरण के विभिन्न रूपों को उजागर किया है।
  2. गंगा के जल की गुणवत्ता में कमी लोगों को तत्काल प्रभावित करती है।
  3. विपरीत मौसम में गंगा, स्नान करने हेतु भी अनुपयुक्त हो जाती है।
  4. गंगा नदी की ऊपरी क्षेत्र में अवसंरचनात्मक परियोजनायें, गंगा नदी की स्वच्छता पर काफी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

आगे की चुनौतियां:

  1. अपशिष्ट शोधन।
  2. प्रवाह को जारी रखना।
  3. गाद नियंत्रण।
  4. अत्याधिक लागत।
  5. शासन व्यवस्था की गड़बड़ियाँ।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NGC की रचना।
  2. NGRBA के बारे में।
  3. NMCG क्या है?
  4. नमामि गंगे कार्यक्रम के घटक।
  5. विश्व बैंक समूह।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

UNFCCC तथा पेरिस समझौते के तहत वित्तीय और तकनीकी प्रतिबद्धताएँ

(Financial and technological commitments under UNFCCC and Paris agreement)

हाल ही में, जलवायु परिवर्तन के दुष्‍प्रभावों के खिलाफ एकजुट कार्रवाई के लिए वि‍भिन्‍न देशों के पर्यावरण मंत्रियो के मध्य वर्चुअल बैठक का चौथे संस्‍करण आयोजित किया गया।

इस बैठक की सह अध्‍यक्षता यूरोपीय संघ, चीन और कनाडा द्वारा संयुक्त रूप से की गयी।

बैठक के परिणाम:

विकसित देशों से UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के तहत विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने को कहा गया।

पेरिस समझौते के तहत क्या घोषणा की गई थी?

2015 में पेरिस सम्मेलन में समझौते पर वार्ता के दौरान, विकसित देशों ने वर्ष 2020 तक जलवायु वित्त के रूप में एक वर्ष में $ 100 बिलियन जुटाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की थी तथा वर्ष 2025 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन डॉलर की राशि जुटाने पर सहमति व्यक्त की थी।

पेरिस समझौता

यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, तथा यह वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने हेतु एक समान लक्ष्य निर्धारित करने के लिए लगभग 200 देशों को एक साथ लाता है।

  1. इस समझौते में कार्बन उत्सर्जन में कटौती के जरिये वैश्विक तापमान में वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस के अंदर सीमित रखने और तापमान वृद्धि को और 1.5 डिग्री सेल्सियस रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  2. इन उद्देश्यों को पूरा करने हेतु, प्रत्येक देश ने उनके ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को सीमित करने वाली लक्षित कार्य योजनाओं को लागू करने का संकल्प लिया है।
  3. इस समझौते में जलवायु परिवर्तन से निपटने तथा अनुकूलन करने के प्रयास में, समृद्ध और विकसित देशों से, विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए कहा गया है।

UNFCCC के बारे में:

संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (United Nations Framework Convention on Climate Change- UNFCCC) को वर्ष 1992 में रियो पृथ्वी शिखर सम्मलेन में अपनाया गया था। यह जलवायु परिवर्तन की समस्या का सामना करने हेतु अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया गया पहला ठोस प्रयास था।

  • UNFCCC को वर्ष 1994 से लागू किया गया है।
  • UNFCCC को रियो कन्वेंशन के रूप में भी जाना जाता है, यह पृथ्वी के वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के संकेंद्रण को स्थिर करने के लिए कार्रवाई के लिए एक रूपरेखा निर्धारित करता है।

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स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


भारत की सबसे बड़ी तितली

एक हिमालयी तितली ‘गोल्डन बर्डविंग’ (Golden Birdwing) को भारत की सबसे बड़ी तितली घोषित किया गया है।

  • मादा गोल्डन बर्डविंग को उत्तराखंड के डीडीहाट में रिकॉर्ड किया गया है, जबकि सबसे बड़ी नर गोल्डन बर्डविंग को मेघालय की राजधानी शिलांग में वानखर तितली संग्रहालय में रिकॉर्ड किया गया है।
  • अब तक दक्षिणी बर्डविंग नामक तितली, देश में सबसे बड़े तितली थी, किसे वर्ष 1932 में रिकॉर्ड किया गया था।
  • शल्किपक्षियों (Lepidoptera) के अध्ययन में प्रयोग किये जाना वाला एकमात्र मापक ‘पंख का आकार’ होता है।
  • मादा गोल्डन बर्डविंग का पंख 194 मिमी लंबा होता है, जो कि दक्षिणी बर्डविंग के पंख (190 मिमी) से थोड़ा बड़ा है।

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दिल्ली नगर कला आयोग (DUAC)

दिल्‍ली नगर कला आयोग (DUAC) वर्ष 1973 में संसद के अधिनियम द्वारा गठित एक वैधानिक निकाय है।

  • इसका प्रमुख कार्य, दिल्‍ली में शहरी तथा पर्यावरणीय डिज़ाइन की सौंदर्यपरक विशिष्‍टता की रक्षा, विकास एवं रखरखाव सम्‍बंधी विषयों में भारत सरकार को परामर्श देना है।
  • यह किसी भी स्थानीय निकाय को सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करता है।
  • आयोग, भारत सरकार के लिए नीति परामर्शी, नियोजन निकाय और विशेषज्ञ की त्रिआयामी भूमिका निभाता है ।

चर्चित स्थल- इदलिब (Idlib)

सीरियाई और रूसी विमानों ने इदलिब प्रांत में स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों पर घातक हवाई हमले किए हैं। संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं ने इन हमलों को युद्ध अपराध करार दिया है।

इदलिब कहाँ है?

इदलिब, सीरिया के उत्तर-पश्चिम में, अलेप्पो (Aleppo) से 59 किलोमीटर दूर दक्षिण पश्चिम में स्थित एक शहर है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 500 मीटर है।

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