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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. मध्य प्रदेश में मंत्रियों की संख्या निर्धारित संवैधानिक सीमा से अधिक

2. एक राष्ट्र एक मतदाता पहचान पत्र

3. सकतेंग अभयारण्य पर चीन के दावे के विरोध में भूटान का आपत्तिपत्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत का पहला प्लाज्मा बैंक

2. चन्द्रमा, पूर्व अनुमानों से अधिक धात्विक: नासा शोध अध्ययन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ICAR और NICRA

2. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)

3. करण- 4 (Karan- 4)

4. किसान रथ (Kisanrath)

5. आत्म-निर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज

6. स्टेविओसाइड (STE)

7. लद्दाख के लिए विंटर ग्रेड डीजल

8. एलिमेंट्स (Elyments)

9. धन्वंतरि रथ

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

मध्य प्रदेश में मंत्रियों की संख्या निर्धारित संवैधानिक सीमा से अधिक

संदर्भ:

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश में संविधान का उल्लंघन करते हुए नियमों के विरुद्ध ज्यादा मंत्री बनाए गए हैं। इसके विरोध में पार्टी शीघ्र ही अदालत में जाने की योजना बना रही है।

पृष्ठभूमि

हाल ही में, मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया, जिसमे 20 कैबिनेट मंत्री तथा आठ राज्य मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में सम्मिलित किया गया। इस प्रकार, मंत्रिमंडल में कुल मंत्रियों की संख्या 34 हो गयी है।

वर्तमान में सदन में विधायकों की प्रभावी संख्या 206 है, तथा कुल मंत्रियों की संख्या, विधायकों की प्रभावी संख्या के 15% से अधिक हो गयी है। नियमों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या अधिकतम 30 हो सकती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन की कुल संख्या 230 है, जिसमे से दो सीटें निर्वाचित सदस्यों की म्रत्यु हो जाने से खाली है तथा 22 सदस्यों ने कांग्रेस से बगावत कर इस्तीफ़ा दे दिया था और बाद में भाजपा में सम्मिलित हो गए थे।

संवैधानिक प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 164 (1A)  के अनुसार, किसी राज्य में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित कुल मंत्रियों की संख्या उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। तथा, किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या बारह से कम नहीं होनी चाहिए।

इस प्रावधान को 91वें संविधान (संशोधन) अधिनियम, 2003 के अंतर्गत लागू किया गया था।

अनुच्छेद 163. राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद्:

  1. राज्यपाल को, विवेकानुसार किये जाने कृत्यों के अतिरिक्त, अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
  2. यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय ऐसा है या नहीं जिसके संबंध में राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने विवेकानुसार कार्य करे तो राज्यपाल का अपने विवेकानुसार किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि उसे अपने विवेकानुसार कार्य करना चाहिए था या नहीं।
  3. इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी है, और यदि दी है तो क्या।

अनुच्छेद 164 (2) के अंर्तगत यह प्रावधान किया गया है, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होगी।

अनुच्छेद 164 (4) प्रावधान करता है कि कोई मंत्री, जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक राज्य के विधान मण्डल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  • अनुच्छेद 163 तथा 164 किससे संबंधित हैं?
  • सामूहिक उत्तरदायित्व क्या है?
  • मुख्यमंत्री तथा मंत्रिमंडल की नियुक्ति कौन करता है?
  • मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण कौन करता है।
  • 91वां संविधान (संशोधन) अधिनियम, 2003 किससे संबंधित है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

एक राष्ट्र एक मतदाता पहचान पत्र

(One Nation One Voter ID)

संदर्भ:

देश में जारी COVID-19 महामारी के मद्देनजर, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए डाक-मतपत्र (Postal Ballot) द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी है; क्योंकि इस आयु-वर्ग के लोगों में कोरोनावायरस से संक्रमित होने का अधिक खतरा है।

अभी तक, यह विकल्प केवल विकलांग नागरिकों तथा 80 वर्ष अधिक आयु के लोगों के लिए उपलब्ध था।

इस लेख में इसी प्रावधान का विस्तार मताधिकार को प्रयोग करने में भारी कठिनाइयों का सामना करने वाले अन्य समूह; प्रवासी मजदूरों, तक करने का निवेदन किया गया है।

प्रवासी श्रमिकों के लिए क्यों?

2017 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में आंतरिक प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग 13.9 करोड़ है, जोकि, भारत की कुल श्रम शक्ति का लगभग एक तिहाई है।

ये प्रवासी श्रमिक बहुधा अपने मताधिकार का प्रयोग करने में असमर्थ होते हैं। इस प्रकार, ये प्रवासी-मजदूर अपने मताधिकार से लगभग वंचित, भूले-बिसरे मतदाता बन कर रह जाते है, क्योंकि ये लोग अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए निर्वाचन वाले दिन अपने घर जाने का जोखिम नहीं उठा सकते।

  • आंतरिक प्रवासी श्रमिक अपने रोजगार के स्थान पर मतदाता के रूप में नामांकन नहीं करा पाते क्योंकि इनके लिए आवास का प्रमाण देना कठिन होता है।
  • इस समूह पर पर्याप्त ध्यान भी नहीं दिया जाता है, क्योंकि ये किसी वोट-बैंक का निर्माण नहीं करते है।
  • इनमे से अधिकाँश मौसमी प्रवासी श्रमिक होते हैं, जो अवसर मिलने पर अपने गांवों में मतदान करना चाहते हैं।

आगे की राह:

‘प्रत्येक योग्य भारतीय मतदाता को अपने मताधिकार का सुनिश्चित प्रयोग करने में सक्षम बनाना’, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित होना चाहिए।

ECI, देश में कहीं से भी मतदाताओं द्वारा डिजिटल रूप से मतदान करने हेतु सक्षम बनाने के लिए आधार-लिंक्ड वोटर-आईडी आधारित समाधान का परीक्षण कर रहा है।

  • प्रवासी श्रमिकों को मतदान की सुविधा प्रदान करने हेतु, ECI, पर्याप्त पंहुच के लिए, जिला कलेक्ट्रेट नेटवर्क का उपयोग कर सकता है।
  • प्रवासियों को अपने मौजूदा मतदाता पहचान पत्र और उनके अस्थायी प्रवास की अवधि के आधार पर अपने रोजगार के शहर में भौतिक रूप से मतदान करने में सक्षम होना चाहिए।

 निष्कर्ष:

‘एक राष्ट्र एक राशनकार्ड’ योजना ने प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों हेतु देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ उठाने के लिए सक्षम बनाने की राह दिखाई है।

इसी प्रकार, मतदान को केवल नागरिक कर्तव्य के रूप में नहीं बल्कि नागरिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। हमारे नीति-निर्माताओं को ‘एक राष्ट्र एक मतदाता पहचान पत्र’ लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा, ताकि मतपत्र-परिवर्तनीयता को सुनिश्चित करते हुए ‘भूले-बिसरे’ प्रवासी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम हो सकें।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मतदान का अधिकार- क्या संवैधानिक अधिकार है?
  2. औपनिवेशिक शासन के दौरान मतदान का अधिकार- संक्षिप्त घटनाएँ।
  3. डाक-मतपत्र क्या है?
  4. ECI – रचना और प्रमुख कार्य।
  5. गुप्त मतदान क्या है?
  6. आधार नंबर क्या है?

मेंस लिंक:

‘एक राष्ट्र एक मतदाता पहचान पत्र’ की आवश्यकता और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

सकतेंग अभयारण्य पर चीन के दावे के विरोध में भूटान का आपत्तिपत्र

(Bhutan demarches China on its claim to Sakteng Sanctuary)

संदर्भ:

पूर्वी भूटान में स्थित ‘सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य’ (Sakteng Wildlife sanctuary) पर बीजिंग द्वारा पूर्वी दावा किये जाने के विरोध में भूटान विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास को आपत्तिपत्र जारी किया है।

विवाद का विषय:

भूटान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्र में स्थित ‘जकरलंग घाटी’ (Jakarlung Valley), पसामलंग घाटी’ (Pasamlung Valley) तथा चुम्बी घाटी (Chumbi Valley) स्थानों को लेकर चीन तथा भूटान के मध्य विवाद जारी है। हालांकि, भूटान का पूर्वी क्षेत्र, भूटान-चीन सीमा वार्ता का हिस्सा नहीं रहा है और इससे पहले चीन ने सकतेंग वन्यजीव अभ्यारण्य पर कभी भी अधिकार का दावा नहीं किया था।

हाल ही में, चीन ने वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF) की 58 वीं बैठक में भूटान के इस क्षेत्र पर अपना दावा जताया। चीन ने भूटान में स्थित सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य हेतु एक परियोजना के लिए ‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF) द्वारा वित्त पोषण करने का विरोध किया और कि यह विवादित क्षेत्र है

ज्ञात हो, कि थिम्पू और बीजिंग के मध्य औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, पर दोनों पक्षों के मध्य सीमा- विवादों को सुलझाने तथा सीमांकन करने के लिए वार्ता जारी है।

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सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य

सकतेंग पूर्वी भूटान के तराशिगंग झोंगखाग (Trashigang Dzongkhag) जिले में स्थित है, तथा यह भारत के अरुणाचल प्रदेश के साथ सीमा बनाता है।

  • यह पूर्वी नीले चीड़ (Eastern Blue Pine) तथा काली दुम वाले मैगपाई पक्षी (Black-Rumped Magpie) सहित कई स्थानिक प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है।
  • इसकी स्थापना का एक उद्देश्य ‘मिगोई’, एक ‘यति’ जैसी प्रजाति के संरक्षण करना था, यद्यपि, इस जीव की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, परन्तु स्थानीय लोगों में इसके प्रति दृढ़ विशवास है।

‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF)

GEF की स्थापना पृथ्वी की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से ‘रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन’ (Rio Earth Summit), 1992 की पूर्व संध्या पर की गयी थी।

  1. GEF विभिन्न देशों, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, नागरिक समाज संगठनों तथा निजी क्षेत्रों की एक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी है, और इसका उद्देश्य वैश्विक पर्यावरण मुद्दों का सामाधान करना है।
  2. वैश्विक पर्यावरण सुविधा, अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलनों और समझौतों के अंतर्गत उद्देश्यों को पूरा करने हेतु अल्प-विकसित तथा विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  3. इस संगठन के द्वारा जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र, ओजोन परत का क्षरण, मृदा की उर्वरा शक्ति में कमी तथा आर्गेनिक प्रदूषक इत्यादि 6 मुख्य क्षेत्रों पर कार्य किया जाता है।
  4. विश्व बैंक GEF ट्रस्टी के रूप में कार्य करता है तथा GEF ट्रस्ट कोष का प्रबंधन करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. GEF के ट्रस्टी।
  2. GEF से अनुदान
  3. पृथ्वी शिखर सम्मेलन 1992 के परिणाम
  4. मानचित्र पर निम्नलिखित को खोजें: सकतेंग, डोकलाम, जकरलंग, चुम्बी घाटी और डोकलाम।
  5. भारत, भूटान और चीन के मध्य त्रि-पक्षीय संधि-स्थल सीमा।

मेंस लिंक:

डोकलाम स्टैंड-ऑफ पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

 भारत का पहला प्लाज्मा बैंक

(India’s first plasma bank)

‘यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान’ (The Institute of Liver and Biliary Sciences- ILBS), दिल्ली में स्थापित।

उद्देश्य: Covid-19 से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए परीक्षण के रूप में उपयोग किए जाने वाले प्लाज्मा तक पहुंच को आसान बनाना।

कार्यप्रणाली

  • प्लाज्मा बैंक, एक ब्लड बैंक की भांति कार्य करता है, तथा इसे विशेष रूप से Covid-19 से संक्रमित लोगों की इलाज हेतु स्थापित किया गया है।
  • बैंक, Covid-19 संक्रमण से ठीक हुए प्लाज्मा दान करने योग्य व्यक्तियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।

प्लाज्मा दान करने हेतु शर्ते:

COVID-19 संक्रमण से ठीक होने वाले मरीज़ 14 दिनों के बाद अपना प्लाज़्मा दान कर सकते हैं।

  • 18 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोग तथा जिनका वजन 50 किलोग्राम से कम नहीं है, वे प्लाज़्मा दान करने के योग्य हैं।
  • प्रसूता महिलाओं का प्लाज्मा COVID-19 के उपचार हेतु नहीं लिया जा सकता; क्योंकि गर्भावस्था के दौरान उनके शरीर में उत्पन्न एंटीबॉडीज, फेफड़ों के कार्य में बाधा पंहुचा सकते हैं।
  • डायबटीज, हाइपरटेंशन, उच्च रक्तचाप, किडनी अथवा हृदयरोग से ग्रस्त, तथा कैंसर सर्वाइवर प्लाज्मा डोनेट नहीं कर सकते।

 प्लाज्मा दान, रक्त दान से किस प्रकार भिन्न है?

  • रक्तदान के विपरीत, प्लाज्मा दान में, रक्त से मात्र प्लाज्मा को निकाला जाता है तथा रक्त के अन्य घटक डोनर के शरीर में वापस आ जाते हैं।
  • रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं, प्लेटलेट्स, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लाज्मा सहित कई घटक होते हैं।
  • प्रति दो सप्ताह में एक बार 500 मिलीलीटर प्लाज्मा दान किया जा सकता है, जबकि, रक्त दान को तीन महीने में एक बार किया जा सकता है।

plasma_therapy

प्लाज्मा थेरेपी किस प्रकार कार्य करती है?

  1. इस तकनीक में, COVID-19 से ठीक हुए मरीज से रक्त निकाला जाता है।
  2. फिर सीरम को अलग किया जाता है और वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी के लिए जांच की जाती है।
  3. सीरम जिसमें एंटीबॉडीज हैं को COVID-19 के रोगी को दिया जाता है, जिनमें गंभीर लक्षण पाए जाते हैं।
  4. इससे रोगी को अप्रतिरोधी प्रतिरक्षण (passive immunisation) प्राप्त होता है।

प्राप्तकर्ता में एंटीबॉडीज कितने समय तक रहेंगे?

प्लाज्मा थैरेपी के जरिए एक स्वस्थ व्यक्ति से रोग प्रतिरोधक क्षमता बीमारी व्यक्ति के शरीर में ट्रांसफर जा सकती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता युक्त सीरम दिए जाने के बाद, प्राप्तकर्ता पर इसका असर कम से कम तीन से चार दिनों तक रहेगा। इस अवधि के दौरान, बीमार व्यक्ति ठीक हो जाएगा। इस थैरेपी की विभिन्न अध्ययनों के आधार पर पुष्टि की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. टीकाकरण और प्लाज्मा थेरेपी के बीच अंतर?
  2. अप्रतिरोधी प्रतिरक्षण क्या है?
  3. एंटीबॉडी और एंटीजन क्या हैं?
  4. चिकित्सा में प्रथम नोबेल पुरस्कार?
  5. रक्तदान और प्लाज्मा दान के बीच अंतर।

मेंस लिंक:

कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरेपी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चन्द्रमा, पूर्व अनुमानों से अधिक धात्विक: नासा शोध अध्ययन

(NASA research says the Moon is more metallic than thought before)

  • नासा के ‘लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर’ (Lunar Reconnaissance Orbiter- LRO) अंतरिक्षयान ने चंद्रमा के अध्ययन के दौरान कुछ नए साक्ष्य प्राप्त किये हैं, इसके अनुसार चंद्रमा की निचली सतह में लौह तथा टाइटेनियम जैसी धातुओं की मात्रा, इससे पहले आंकी गयी मात्रा से काफी अधिक है।
  • चंद्रमा की निचली सतह पर इस धात्विक वितरण को LRO पर स्थापित ‘मिनिचुर रेडियो फ्रीक्वेंसी (Miniature Radio FrequencyMini-RF) उपकरण द्वारा देखा गया है।
  • Mini-RF के निष्कर्षों को LRO के वाइड-एंगल कैमरा, जापान के कगुया मिशन (Kaguya mission) तथा नासा के लूनर प्रॉस्पेक्टर अंतरिक्ष यान से निर्मित धातु ऑक्साइड मानचित्र द्वारा पुष्टि की गयी है।

इसकी खोज किस प्रकार हुई?

इसकी खोज, LRO के Mini-RF उपकरण द्वारा चंद्रमा के उत्तरी गोलार्ध में स्थित क्रेटरों की सतह पर मिट्टी में विद्युतीय गुण (electrical property) का परीक्षण करने के दौरान हुई।

इस विद्युतीय गुण को पारद्युतिक स्थिरांक (dielectric constant) कहा जाता है, तथा यह किसी धातु की विद्युत पारगम्यता (electric permeability) का निर्वात में विद्युत पारगम्यता का अनुपात होता है।

  1. ये पारद्युतिक गुण, धात्विक खनिजों की सांद्रता से प्रत्यक्षतः संबंधित होते है।
  2. सर्वेक्षण के दौरान, क्रमिक रूप से 5 किमी व्यास के आकार तक बड़े क्रेटरों में पारद्युतिक गुणों के स्तर में सापेक्षिक रूप से वृद्धि पायी गयी। इससे बड़े आकार के क्रेटर में पारद्युतिक स्थिरांक (dielectric constant) का मान सामान पाया गया।
  3. इन निष्कर्षों ने संभावना को जन्म दिया कि, बड़े क्रेटरों में पारद्युतिक स्थिरांक में वृद्धि होने का कारण, उल्काओं द्वारा इन बड़े क्रेटरों का निर्माण के दौरान चंद्रमा की सतह के नीचे से लौह तथा टैटेनियम ऑक्साइड युक्त धूल का उपरी सतह पर आ जाना है।

चंद्रमा का निर्माण

चंद्रमा के निर्माण से सबंधित सबसे प्रचलित सिद्धांत यह है, कि लगभग 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मंगल ग्रह के आकार का एक आदि-ग्रह (Protoplanet) पृथ्वी निर्माण के आरंभिक काल में ही पृथ्वी से टकरा गया, परिणामस्वरूप पृथ्वी का एक टुकड़ा विखंडित होकर इसका उपग्रह बन गया।

इस परिकल्पना के पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य मिलते है, जैसे कि चन्द्रमा तथा पृथ्वी की रासायनिक संरचना में लगभग समानता, आदि।

इन निष्कर्षों के निहितार्थ:

  • हमें ज्ञात है, कि पृथ्वी की पर्पटी में चंद्रमा की अपेक्षा लौह ऑक्साइड की मात्रा काफी कम पायी जाती है, वैज्ञानिक इसका कारण समझने का प्रयास कर रहे हैं।
  • अब, चंद्रमा पर धातु की अधिक मात्रा की नई खोज ने वैज्ञानिकों के काम को और भी कठिन बना दिया है। इससे, चंद्रमा-निर्माण संबधित परिकल्पनाओं की सत्यता पर प्रश्न-चिन्ह लगता है।
  • इसका एक संभावित कारण यह हो सकता है कि चंद्रमा का निर्माण पृथ्वी की निचली सतह की सामग्री से हुआ हो, अथवा हाल ही में चंद्रमा पर पायी गयी धातुओं की उपस्थिति,चंद्रमा की पिघली हुई सतह के धीरे-धीरे ठंडा होने का परिणाम हो सकती है।

लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (LRO)

LRO नासा का एक रोबोटिक अंतरिक्षयान है जो वर्तमान में चंद्रमा की परिक्रमा करते समय चित्रों के माध्यम से डेटा एकत्र करता है और चंद्रमा की सतह का अध्ययन करता है।

इसे भविष्य के मानव-युक्त चन्द्र मिशन तथा मंगल मिशन संबंधी तैयारियों के क्रम में ‘लूनर प्रीकर्सर एंड रोबोटिक प्रोग्राम’ (Lunar Precursor and Robotic ProgramLPRP) के अंतर्गत निर्मित किया गया है।

LRO, नासा के `न्यू विज़न फ़ॉर स्पेस एक्सप्लोरेशन’ के अंतर्गत पहला मिशन है।

LRO के उद्देश्य

  1. चंद्रमा पर संभावित संसाधनों की पहचान
  2. चंद्रमा की सतह का विस्तृत मानचित्रण
  3. चंद्रमा के विकिरण स्तरों पर डेटा संकलन
  4. भविष्य के चन्द्र मिशनों हेतु चंद्रमा के धुर्वीय क्षेत्रों का अध्ययन।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LRO के उद्देश्य
  2. नासा का `न्यू विज़न फ़ॉर स्पेस एक्सप्लोरेशन’
  3. चंद्रमा की उत्पत्ति परिकल्पना
  4. पृथ्वी की पर्पटी संरचना।
  5. पारद्युतिक स्थिरांक क्या है?
  6. कगुया मिशन किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

चंद्रयान 2 मिशन पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ICAR और NICRA

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of agricultural research- ICAR) भारत में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के समन्वय हेतु एक स्वायत्त निकाय है।

  • यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग, कृषि मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री इसके अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
  • यह विश्व में कृषि अनुसंधान और शिक्षा संस्थानों का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
  • जलवायु परिवर्तनशील कृषि पर राष्ट्रीय नवाचार (National innovations of climate resilient agriculture- NICRA) को 2011 में ICAR द्वारा शुरू किया गया है।

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)

(Krishi Vigyan Kendra)

  • कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा किसानों के मध्य प्रमुख कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।
  • इस योजना को ICAR के तहत शत-प्रतिशत केंद्रीय वितपोषण के ज़रिये संचालित किया जा रहा है।
  • कृषि विज्ञान केंद्र सामान्यतः एक स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय के साथ संबद्ध होता है।
  • इसका उद्देश्य कृषि अनुसंधान और व्यावहारिक स्थानीय पद्धतियों को लागू करना है।

करण- 4 (Karan- 4)

  • यह गन्ने की एक नयी किस्म है, इस प्रजाति में चीनी की अधिक मात्रा प्राप्त होती है।
  • उत्तर प्रदेश में गन्ने की उगाई जाने वाली पारंपरिक किस्मों की जगह ले ली है।

किसान रथ (Kisanrath)

  • यह कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा शुरू किया गया एक मोबाइल ऐप है।
  • इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित किया गया है।
  • यह किसानों और व्यापारियों को कोरोनोवायरस लॉक डाउन के दौरान कृषि उपज की आवाजाही के लिए उपयुक्त परिवहन सुविधाओं की पहचान करने की सुविधा प्रदान करेगा।
  • किसान रथ ऐप खेत से मंडी तथा एक मंडी से दूसरे मंडी तक कृषि उपज के परिवहन को सुगम बनायेगा।

आत्म-निर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज

अटल इनोवेशन मिशन – नीति आयोग के साथ साझेदारी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारतीय तकनीकी उद्यमियों और स्टार्टअप्स के लिए डिजिटल इंडिया आत्म-निर्भर भारत ऐप इनोवेशन चैलेंज का शुभारम्भ किया है।

  • इस चैलेंज को आत्म-निर्भर भारत के निर्माण में डिजिटल प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने में मदद करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
  • यह चैलेंज 2 ट्रैकों में चलेगा: मौजूदा ऐप्स का संवर्द्धन और नए ऐप्स का विकास।
  • ट्रैक 1 ऐप इनोवेशन चैलेंज का ध्यान उन सर्वश्रेष्ठ भारतीय ऐप की पहचान करने पर होगा जिनका पहले से ही नागरिकों द्वारा उपयोग किया जा रहा है और उनमें कुछ और सुधार की गुंजाइश है तथा वे अपनी श्रेणी में विश्व स्तर का ऐप बनने की क्षमता रखते हों।
  • ट्रैक 2, भारतीय स्टार्ट-अप / उद्यमियों / कंपनियों की पहचान करने का काम करेगा और उन्हें नए विचार लाने, उन्हें पोषित करने, उनकी प्रतिमूर्ति बनाने (प्रोटोटाइप) और उनके अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

 स्टेविओसाइड (STE)

(Stevioside)

  • स्टीविओसाइड, हनी येरबा (Stevia rebaudiana Bertoni) की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पादप आधारित ग्लाइकोसाइड है।
  • इसे प्राकृतिक मिठास के रूप में उपयोग किया जाता है तथा इस तत्व में कैलोरी की मौजूदगी भी नहीं होती है।

चर्चा का कारण

शोधकर्ताओं ने हाल ही में पाया कि स्टीविओसाइड तत्व को नैनो कणों पर लेपित किया जाता है तो इससे चुंबकीय अतिताप-मध्यस्थता कैंसर चिकित्सा (Magnetic hyperthermia-mediated cancer therapy- MHCT) की दक्षता में वृद्धि होती है।

लद्दाख के लिए विंटर ग्रेड डीजल

  • विंटर डीजल एक विशेष ईंधन है, जिसे इन्डियन आयल द्वारा विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों और लद्दाख जैसे कम तापमान वाले क्षेत्रों के लिए निर्मित किया गया है, इन क्षेत्रों में साधारण डीजल बेकार हो सकता है।
  • लद्दाख, करगिल, काजा तथा कीलोंग जैसे ऊंचे स्थानों पर मोटर चालकों को तापमान के -30 डिग्री सेल्सियस नीचे आने के कारण डीजल के जम जाने की समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • विंटर ग्रेड डीजल -33 डिग्री सेल्सियस की अत्यधिक सर्दी में भी नहीं जमता, जबकि सामान्‍य ग्रेड के डीजल के इस्‍तेमाल में कठिनाई होती है।
  • विशेष विंटर ग्रेड डीजल में पांच प्रतिशत बायोडीजल भी मिश्रित किया गया है। -33 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी यह डीजल अपनी तरलता बरकरार रखता है।

एलिमेंट्स (Elyments)

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आर्ट ऑफ लिविंग ने भारतीय सोशल मीडिया ऐप तैयार किया है।

  • इसे देश के पहले स्वदेशी रूप से विकसित ‘सोशल मीडिया सुपर ऐप’ के रूप में देखा जा रहा है।
  • इस अकेले ऐप में वो सारी खूबियां होंगी, जिनके लिए लोगों को अभी अलग-अलग ऐप इस्तेमाल करने पड़ते हैं।
  • इसमें सोशल कनेक्टिविटी के साथ, चैटिंग, ऑडियो-वीडियो कॉलिंग, ग्रुप कॉलिंग, ई-पैमेंट, ई-कॉमर्स जैसे फीचर्स होंगे।
  • यह आठ भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
  • यूजर्स के डाटा की सिक्योरिटी के लिए भी आर्ट ऑफ लिविंग की तरफ से कहा गया है कि यूजर्स का डाटा देश में ही रहेगा, किसी भी थर्ड पार्टी को इसका डाटा बिना यूजर की स्पष्ट अनुमति के नहीं दिया जाएगा।

धन्वंतरि रथ

  • धन्वंतरि रथ शहर में लोगों के घरों तक गैर-कोविड ​​आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाली मोबाइल मेडिकल वैन है।
  • इसे अहमदाबाद नगर निगम द्वारा आरम्भ किया गया है।
  • इन चिकित्सा वाहनों में अहमदाबाद नगर निगम के शहरी स्वास्थ्य केंद्र के स्थानीय चिकित्सा अधिकारी के साथ आयुष चिकित्सक, चिकित्सा सहायक, और नर्सिंग स्टाफ होते हैं।

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