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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 (DDH2020)

2. इतालवी नौसैनिक केस

3. रूस में संवैधानिक संशोधन

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रेलवे का निजीकरण

2. जैव ईंधन (Biofuels)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

2. धम्म चक्र दिवस:

3. चर्चित स्थल: बोत्सवाना

4. प्रेरक दौर सम्मान

5. नीमू(Nimu/Nimoo)

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 (DDH2020)

(Drug Discovery Hackathon 2020)

यह क्या है?

  • यह हैकथॉन दवा की खोज प्रक्रिया में मदद करने के लिए अपनी तरह की पहली राष्ट्रीय पहल है।
  • इसमें कंप्यूटर विज्ञान, रसायन विज्ञान, फार्मेसी, चिकित्सा विज्ञान, बुनियादी विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों,शिक्षकों,शोधकर्ताओं और छात्रों की भागीदारी होगी।

इस पहल में भागीदार

यह ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन एक संयुक्त पहल है, तथा इसमें निम्नलिखित संस्थाएं भागीदार है:

  1. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ (MHRD’s Innovation Cell- MIC),
  2. अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (All India Council for Technical Education- AICTE)
  3. वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR)
  4. सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (CDAC),
  5. MyGov तथा अन्य निजी कंपनियां।

विवरण:

हैकथॉन में कई चुनौतियां शामिल हैं जो विशिष्ट दवा खोज विषयों पर आधारित होती हैं। इन्हें समस्या कथन के रूप में पोस्ट किया जाता है और प्रतिभागियों को इन्हें हल करना होता है।

इस हैकथॉन में तीन ट्रैक होंगे।

  1. ट्रैक 1 में मुख्य रूप से कोविड​​-19 रोधी पीढ़ी के लिए ड्रग डिजाइन पर काम किया जायेगा।
  2. ट्रैक 2 नए उपकरणों और एल्गोरिदम को डिजाइन / अनुकूलित करने पर काम करेगा जो इन-सिलिको (in silico) ड्रग डिस्कवरी की खोज प्रक्रिया को तीव्र करने पर काफी प्रभाव डालेगा।
  3. ट्रैक 3 को ‘मून शॉट’ (Moon shot) कहा जाता है। यह उन समस्याओं पर काम करने की अनुमति देता है जो ‘आउट ऑफ दबॉक्स’ की प्रवृत्ति के होते हैं।

इन-सिलिको’ ड्रग डिजाइन (in silico drug design) क्या है?

  • ‘इन-सिलिको’ ड्रग डिज़ाइन एक शब्द है जिसका अर्थ है, कंप्यूटर एडेड आणविक डिज़ाइन
  • इसमें आणविक मॉडलिंग, फॉर्माकोफोर ऑप्टिमाइज़ेशन, आणविक डॉकिंग, हिट/ लीड ऑप्टिमाइज़ेशन आदि जैसे टूल का उपयोग करके किया जाता है।
  • दूसरे शब्दों में, यह कम्प्यूटेशनल विधियों की विस्तृत विविधता का उपयोग करके दवाओं का तर्कसंगत डिजाइन या खोज है।
  • इस प्रकार यह जैव सूचना विज्ञान उपकरणों का प्रयोग करके दवा लक्षित अणुओं की पहचान है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हैकथॉन किसके द्वारा शुरू किया गया है?
  2. जैव सूचना विज्ञान उपकरण क्या हैं?
  3. इन-सिलिको ड्रग डिस्कवरी क्या है?
  4. नवाचार प्रकोष्ठ (MHRD’s Innovation Cell- MIC) की संरचना।
  5. CDAC के बारे में।

मेंस लिंक:

ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन 2020 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

इतालवी नौसैनिक केस

(Italian Marines case)

संदर्भ:

हेग स्थित ‘स्थायी मध्यस्थता न्यायालय’ (Permanent Court of Arbitration- PCA) ने भारत को झटका देते हुए इतालवी नौसैनिक केस के संदर्भ में अपना फैसला सुनाया है। इसके अनुसार, केरल के मछुआरों के साथ गोलीबारी में पकडे गए इतालवी नौसैनिकों पर मुकदमा चलाना भारत के अधिकार-क्षेत्र में नहीं है।

मामले की पृष्ठिभूमि:

वर्ष 2012 में, एक इतालवी पोत ‘एनरिका लेक्सी’ पर सवार दो इतालवी नौसैनिकों ने भारतीय पोत ‘सेंट एंथोनी’ पर सवार दो भारतीय मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी।

घटना के समय मछली पकड़ने का पोत भारतीय जल क्षेत्र की सीमा के भीतर था, अतः यह अपराध भारत के कानूनों के तहत गिरफ्तारी तथा अभियोजन के अंतर्गत आता है।

अंततः, नौसैनिकों को गिरफ्तार कर लिया गया। परन्तु, बाद में नौसैनिकों को भारत से रिहा कर इटली भेज दिया गया।

उस समय, भारत ने उच्चत्तम न्यायालय के निर्देशानुसार, अधिकार क्षेत्र की प्रयोज्यता का निर्धारण करने के लिए एक विशेष अदालत गठित की थी।

  • इस बीच, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (National Investigation Agency-NIA) ने ‘नौ-परिवहन सुरक्षा विधिविरुद्ध कार्य दमन अधिनियम’ (Suppression of Unlawful against Safety of Maritime Navigation) तथा ‘फिक्स्ड प्लेटफॉर्म्स ऑन कॉन्टिनेंटल शेल्फ एक्ट’, 2002 को लागू कर दिया।
  • इतालवी नौसैनिकों पर मुकदमा चलाने के अधिकार को लेकर भारत और इटली के मध्य विवाद की सुनवाई अंतरार्ष्ट्रीय ‘स्थायी मध्यस्थता न्यायालय’ (PCA) में चल रही है।

PCA का निर्णय

  • नौसैनिक, राज्य की ओर से नियुक्त तथा कार्यरत थे, अतः उन्हें प्रतिरक्षा की आधिकारिक छूट प्राप्त है।
  • नौसनिकों के प्रतिरक्षा-अधिकार पर निर्णय करने का अधिकार इटली का होगा।
  • अतः भारत उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चला सकता है।
  • इटली ने ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि’ (United Nations Convention on the Law of the Sea- UNCLOS) के तहत भारत की नौवहन स्वतंत्रता का उल्लंघन किया।
  • जबकि, UNCLOS के प्रावधानों के तहत भारतीय अधिकारियों ने समुद्री कानून का उल्लंघन नहीं किया है
  • परिणास्वरूप, इटली, भारत को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है।

PCA ने इटली द्वारा एक प्रमुख तर्क, कि भारत ने इतालवी पोत को अपने क्षेत्र में ले जाकर नौसैनिकों को गिरफ्तार किया तथा यह UNCLOS के अनुच्छेद 100 के तहत समुद्री डकैती के दमन करने हेतु सहयोग करने के दायित्व का उल्लंघन है, को भी खारिज कर दिया है।

आगे क्या?

दोनों देशों को, भारत को भुगतान की जाने वाले मुआवजे की राशि तय करने हेतु वार्ता आयोजित करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष:

PCA द्वारा दिया गया यह निर्णय अंतिम है, तथा इसे भारत द्वारा स्वीकार किया गया है। यह निर्णय, इतालवी नौसैनिकों पर भारत में आपराधिक मुकद्दमा चलाने की उम्मीदों पर झटका है।

अंत में, इटली इस मामले को भारत के हाथों से लेने में सफल रहा। इसे अब अपने घरेलू कानूनों के तहत नौसैनिकों पर कार्यवाही करने की प्रतिबद्धताओं को पूरा करना चाहिए। भारत के लिए इस मामले से वैधानिक तथा राजनयिक क्षेत्र में अनुभव मिला जिसका भविष्य में ऐसी परिस्थिति उत्पन्न होने पर उपयोग किया जा सकता है।

स्थायी मध्यस्थता न्यायालय’ (PCA):

स्थापना: वर्ष 1899।

मुख्यालय: हेग, नीदरलैंड्स।

इसका वित्तीय सहायता कोष होता है जिसका उद्देश्य विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता या PCA द्वारा विवाद निपटान में शामिल साधनों की लागत को पूरा करने में मदद करना है।

इसके सभी निर्णय, विवाद में सभी पक्षों के लिए बाध्यकारी होते हैं और बिना किसी देरी के लागू किए जाते हैं।

कार्य और अधिकार क्षेत्र:

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जो विवाद समाधान के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सेवा प्रदान करने और राज्यों के बीच मध्यस्थता एवं विवाद समाधान हेतु कार्य करता है।
  • इनमें क्षेत्रीय और समुद्री सीमाओं, संप्रभुता, मानवाधिकारों, अंतर्राष्ट्रीय निवेश और अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यापार से जुड़े कानूनी मुद्दों संबंधी विवाद सम्मिलित होते है।

PCA एक संयुक्त राष्ट्र एजेंसी नहीं है, परन्तु इसे आधिकारिक संयुक्त राष्ट्र पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PCA – रचना, कार्य और सदस्य।
  2. UNCLOS क्या है?
  3. UNCLOS के अनुच्छेद 87, 90 और 100 किससे संबंधित हैं?
  4. इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के बारे में।
  5. NIA क्या है?

मेंस लिंक:

PCA के कार्यों और महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

रूस में संवैधानिक संशोधन

(Constitutional amendments in Russia)

संदर्भ:

हाल ही में, रूस में नए संविधान संशोधनों को पारित किया गया है। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, नए संवैधानिक संशोधन के पक्ष में 77.92 प्रतिशत मत पड़े जबकि 22.27 प्रतिशत मतदाताओं ने इसका विरोध किया। इसके पूर्व, 206 संवैधानिक संशोधनों को मंजूरी के लिए राष्ट्रीय जनमत संग्रह करवाया गया था।

ज्ञात हो, कि रूस में वर्तमान संविधान वर्ष 1993 में लागू किया गया था, और समय रूस की 54.8 प्रतिशत ने जनता ने इसके पक्ष में मतदान किया था।

संवैधानिक संसोधनों से होने वाले परिवर्तन:

  1. नए संवैधानिक संसोधनों से वर्तमान राष्ट्रपति पुतिन वर्ष 2024 तथा वर्ष 2030 में अगले छह वर्षीय दो कार्यकालों तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं।

वर्तमान रूसी संविधान के अंतर्गत कोई व्यक्ति लगातार अधिकतम दो कार्यकाल तक राष्ट्रपति पद पर रह सकता है।

नए संविधान में सैधांतिक रूप से दो कार्यकालों की सीमा में बदलाव नहीं किया गया है, परन्तु व्यवहार में इनके माध्यम से ‘पुतिन’ के कार्यकालों को पुन: नियोजित (Reset) कर दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार, वर्ष 2024 में होने वाला चुनाव राष्ट्रपति पुतिन के लिए पहला चुनाव होगा।

  1. अन्य संशोधनों द्वारा, राष्ट्रपति तथा संसदीय शक्तियों को मजबूत किया गया है, इसके अतिरिक्त, समलैंगिक विवाह पर प्रभावी प्रतिबंध सहित पारंपरिक मूल्यों को सुनिश्चित करने तथा बेहतर न्यूनतम मजदूरी और पेंशन की गारंटी हेतु प्रावधान किये गए हैं।
  2. अन्य संवैधानिक परिवर्तनों में, देश की विरासत और ऑर्थोडॉक्स चर्च का सम्मान करने तथा स्थानीय और नगरपालिका प्राधिकारियों पर क्रेमलिन को अधिक शक्ति प्रदान करने संबंधी प्रावधान शामिल किये गए हैं।
  3. नए संशोधनों में विदेशी नागरिकता रखने वाले तथा लोक पदों पर विदेशों में नियुक्त रूसी नागरिकों पर कठोर सीमाएं लगायी गयी है। विशेष रूप से, इन संवैधानिक प्रतिबंधों के तहत, विदेशी नागरिकता रखने वाले तथा लोक पदों पर विदेशों में नियुक्त किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ने पर रोक लगायी गयी है।
  4. नए संशोधनों में, ईश्वर में विश्वास के महत्व तथा रूस को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी राज्य घोषित किया गया है, साथ ही, रूस द्वारा ‘द्वितीय विश्व युद्ध’ के बारे में ऐतिहासिक “सत्य” की रक्षा करने की घोषणा की गयी है।

रूस के समक्ष चुनौतियां:

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, रूस की अर्थव्यवस्था में एक दशक से डॉलर के संदर्भ में विस्तार नहीं हुआ है।

  • IMF का अनुमान है कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस वर्ष 6.6% की गिरावट आई है। महामारी के कारण स्थानीय व्यवसायों को होने वाले नुकसान तथा तेल की कीमतों में गिरावटों से निर्यात कीमतों में कमी के कारण, क्रेमलिन के लिए निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था को ठीक करना मुश्किल लगता है।

विदेश नीति के संदर्भ में, रूस के पश्चिमी देशों के साथ संबंध परेशानीयों से भरे है।

  • वर्ष 2014 में क्रीमिया के राज्य-हरण के पश्चात् रूस पर लगाए गए प्रतिबंध अभी भी जारी हैं।
  • रूस पर अन्य देशों के चुनावों में हस्तक्षेप करने का आरोप भी लगाया जा रहा है।
  • घरेलू स्तर पर, विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी (Alexei Navalny) और उनके समर्थक राज्य की कार्यवाहियों के बावजूद क्रेमलिन के खिलाफ विरोध जारी किये हुए हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति बनाम संसदीय स्वरूप
  2. भारत के राष्ट्रपति तथा रूस के राष्ट्रपति- अंतर
  3. जनमत संग्रह (referendum) क्या है?
  4. जनमत (plebiscite) क्या है?
  5. हाल ही में किये गए संशोधन द्वारा परिवर्तन

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

रेलवे का निजीकरण

संदर्भ:

रेल मंत्रालय ने 150 आधुनिक ट्रेनों के प्रस्ताव के माध्यम से 100 से अधिक मार्गो पर यात्री ट्रेन सेवाओं के परिचालन में निजी भागीदारी के लिए अर्हता संबंधी अनुरोध (Request for QualificationsRFQ) आमंत्रित किए हैं।

इस परियोजना में निजी क्षेत्र से लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यह भारतीय रेल नेटवर्क में यात्री ट्रेनों के परिचालन के लिए निजी निवेश की पहली पहल है।

क्रियाविधि:

  1. इन ट्रेनों के वित्तपोषण, खरीद, परिचालन और रखरखाव के लिए निजी इकाई जिम्मेदार होगी।
  2. निजी रेल गाड़ियों में किराया प्रतिस्पर्धी होगा तथा किराया निर्धारित करते समय एयरलाइन, बसों जैसे परिवहन के अन्य साधनों को ध्यान में रखा जायेगा।
  3. यात्री ट्रेन परिचालन में निजी भागीदारी रेलवे के कुल परिचालन का मात्र 5% होगी। 95% ट्रेनें अभी भी भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जाएंगी।

इस पहल के उद्देश्य:

  1. कम रखरखाव सहित आधुनिक तकनीक से युक्त रेल इंजन और डिब्बों की पेशकश,
  2. कम पारगमन समय,
  3. ज्यादा रोजगार सृजन,
  4. यात्रियों को ज्यादा सुरक्षा,
  5. यात्रियों को विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करना।
  6. यात्री परिवहन क्षेत्र में मांग आपूर्ति की कमी को कम करना।

बिबेक देबरॉय समिति की सिफारिशें:

बिबेक देबरॉय समिति को भारतीय रेलवे के लिए संसाधन जुटाने और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के तरीकों का सुझाव देने हेतु गठित किया गया था। इस समिति ने रोलिंग स्टॉक: वैगन और कोचों के निजीकरण करने की सिफारिश की थी।

रेलवे निजीकरण:

लाभ:

बेहतर अवसंरचना – रेलवे निजीकरण से बेहतर बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

उच्च किराये तथा सेवा-गुणवत्ता में संतुलन – इस कदम से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इससे सेवाओं की गुणवत्ता में समग्र रूप से सुधार होगा।

दुर्घटनाओं में कमी- निजी स्वामित्व से रखरखाव बेहतर होगा। निजीकरण के समर्थकों का मानना है कि इससे दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आएगी, जिसके परिणामस्वरूप दीर्घावधि में सुरक्षित यात्रा और उच्च मौद्रिक बचत होती है।

हानियाँ:

लाभप्रद क्षेत्रों तक सीमित विस्तार – भारतीय रेलवे के सरकारी होने का एक फायदा यह है कि यह लाभ की परवाह किये बगैर राष्ट्रव्यापी संपर्क प्रदान करता है। निजीकरण में संभव नहीं होगा क्योंकि इसमें कम चलने वाले रुट्स को समाप्त कर दिया जाएगा, इस प्रकार कनेक्टिविटी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वस्तुतः, इससे देश के कुछ हिस्से और दुर्गम हो जायेंगे तथा निजीकरण इन क्षेत्रों को विकास की प्रक्रिया से बाहर कर देगा।

किराया- निजी उद्यम प्रत्यक्षतः लाभ आधारित होते है। अतः यह मान लेना स्वाभाविक है कि भारतीय रेलवे में लाभ अर्जित करने का सबसे आसान तरीका किराए में वृद्धि होगी। इस प्रकार रेल सेवा, निम्न आय वर्ग की पहुंच से बाहर हो जायेगी। इस प्रकार, यह भारतीय रेल के बगैर भेदभाव के सभी आय-वर्ग के लोगों को सेवा प्रदान करने के मूल उद्देश्य की पराजय होगी।

जवाबदेही– निजी कंपनियां व्यवहार में अप्रत्याशित होती हैं तथा अपने प्रशासन तरीकों को विस्तार से साझा नहीं करती हैं। ऐसे परिदृश्य में एक विशेष इकाई को जवाबदेह बनाना मुश्किल होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रेलवे और साधारण बजट कब मिलाए गए?
  2. भारत की पहली निजी ट्रेन
  3. बिबेक देबरॉय समिति किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

रेलवे के निजीकरण तथा उसमें समाहित चुनौतियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

जैव ईंधन (Biofuels)

संदर्भ:

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) हैदराबाद के शोधकर्ता कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित ऐसी कम्प्यूटेशनल विधियों का उपयोग कर रहे हैं जो देश के ईंधन क्षेत्र में जैव ईंधन को शामिल करने से जुड़े कारकों और बाधाओं को समझने में मददगार हो सकती हैं।

इस कार्य की एक विशेषता यह है कि इसके ढाँचे में केवल जैविक ईंधन की बिक्री को राजस्व सृजन का आधार नहीं माना गया है, बल्कि इसके अंतर्गत पूरी परियोजना के चक्र में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के माध्यम से कार्बन क्रेडिट को भी शामिल किया गया है।

इसके परिणाम:

शोधकर्ताओं द्वारा विकसित मॉडल से पता चला है कि मुख्यधारा के ईंधन उपयोग में बायो-एथेनॉल क्षेत्र को शामिल करने पर उत्पादन पर सबसे अधिक 43 प्रतिशत खर्च का आकलन किया गया है।

जबकि, आयात पर 25 प्रतिशत, परिवहन पर 17 प्रतिशत, ढाँचागत संसाधनों पर 15 प्रतिशत और इन्वेंटरी पर 0.43 प्रतिशत खर्च का आकलन किया गया है।

इस मॉडल ने यह भी दिखाया है कि अनुमानित माँग को पूरा करने के लिए कुल क्षमता के कम से कम 40 प्रतिशत तक फीड उपलब्धता की आवश्यकता है।

जैव ईंधन का महत्व:

जीवाश्म ईंधन के घटते भंडार और इसके उपयोग से होने वाले प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं ने दुनिया को वैकल्पिक ईंधन की खोज तेज करने के लिए प्रेरित किया है।

  • भारत में, गैर-खाद्य स्रोतों से उत्पन्न जैविक ईंधन कार्बन-न्यूट्रल नवीकरणीय ऊर्जा का सबसे आशाजनक स्रोत है। इन दूसरी पीढ़ी के स्रोतों में कृषि अपशिष्ट जैसे- पुआल, घास और लकड़ी जैसे अन्य उत्पाद शामिल हैं, जो खाद्य स्रोतों को प्रभावित नहीं करते हैं।
  • इसके साथ ही जैव ईधन, सरकार की, ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘कौशल विकास’ पहलों को अच्छी तरह से आगे बढ़ने में सहायक है।

जैव ईंधन क्या हैं?

कोई भी हाइड्रोकार्बन ईंधन, जो किसी कार्बनिक पदार्थ (जीवित अथवा मृत पदार्थ) से कम समय (दिन, सप्ताह या महीने) में निर्मित होता है, जैव ईंधन माना जाता है।

जैव ईंधन प्रकृति में ठोस, तरल या गैसीय हो सकते हैं।

  1. ठोस: लकड़ी, पौधों से प्राप्त सूखी हुई सामग्री, तथा खाद
  2. तरल: बायोएथेनॉल और बायोडीजल
  3. गैसीय: बायोगैस

जैव ईंधन का वर्गीकरण:

पहली पीढ़ी के जैव ईंधन: को पारंपरिक जैव ईंधन भी कहा जाता है। वे चीनी, स्टार्च, या वनस्पति तेल आदि जैसी चीजों से निर्मित होते हैं। ध्यान दें कि ये सभी खाद्य उत्पाद हैं। खाद्य-सामग्री से निर्मित किसी भी जैव ईंधन को मानव भोजन के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है तथा इसे पहली पीढ़ी का जैव ईंधन माना जाता है।

दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन: संवहनीय फीडस्टॉक से उत्पादित होते हैं। फीडस्टॉक की संवहनीयता, इसकी उपलब्धता, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर इसके प्रभाव, भूमि उपयोग पर इसके प्रभाव तथा इसकी खाद्य आपूर्ति को खतरे में डालने की क्षमता से परिभाषित होती है।

दूसरी पीढ़ी का कोई जैव ईंधन खाद्य फसल नहीं होता है, हालांकि कुछ खाद्य उत्पाद, जब वे उपभोग योग्य नहीं बचते है, तब दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन बन सकते हैं। दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन को अक्सर “उन्नत जैव ईंधन” कहा जाता है।

तीसरी पीढ़ी के जैव ईंधन: शैवाल से प्राप्त जैव ईंधन हैं। इन जैव ईंधन को इनकी विशिष्ट उत्पादन प्रणाली तथा पहली और दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन की अधिकांश कमियों में कमी करने की क्षमता के कारण अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया जाता है।

चौथी पीढ़ी के जैव ईंधन: इन ईंधनों के उत्पादन में, जिन फसलों को अधिक मात्रा में कार्बन सोखने के लिए आनुवंशिक रूप से इंजीनियरिंग करके तैयार किया जाता हैं, उन्हें बायोमास के रूप में उगाया और काटा जाता है। इसके पश्चात इन फसलों को दूसरी पीढ़ी की तकनीकों का उपयोग करके ईंधन में परिवर्तित किया जाता है।

जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु भारत सरकार की पहलें:

वर्ष 2014 से भारत सरकार ने कई ऐसी पहले की हैं जिनसे अन्य ईंधनों में जैव-ईंधनों को मिलाने की मात्रा को बढ़ाया जा सके।

  1. मुख्य पहलों में शामिल हैं: एथेनोल के लिये नियंत्रित मूल्य प्रणाली, तेल विपणन कंपनियों के लिये प्रक्रिया को सरल बनाना, 1951 के उद्योग (विकास एवं नियमन) अधिनियम में संशोधन तथा एथेनोल की खरीद के लिये लिग्नोसेलुलोसिक तरीके को अपनाना।
  2. सरकार ने जून 2018 में राष्ट्रीय जैव-ईंधन नीति – 2018 को मंजूर किया है। इस नीति का लक्ष्य 2030 तक 20% एथेनोल और 5% जैव डीजल मिश्रित करना है।
  3. अन्य कामों के अलावा इस नीति ने एथेनोल उत्पादन के लिये कच्चे माल के दायरे को व्यापक बनाया है साथ ही उच्च कोटि के जैव-ईंधनों के उत्पादन को लाभकारी बनाया है।
  4. सरकार ने शीरे पर आधारित सी-तत्व की प्रचुरता वाले एथेनोल का मूल्य में वृद्धि की है, ताकि एथेनोल मिश्रण के कार्यक्रम को बढ़ावा दिया जा सके।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जैव ईंधन क्या है?
  2. जैव ईंधन का वर्गीकरण।
  3. जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति का अवलोकन।
  4. इथेनॉल क्या है? इसका उत्पादन कैसे होता है?

मेंस लिंक:

भारत के लिए जैव ईंधन के महत्व पर चर्चा करें? क्या जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति भारत को जैव ईंधन क्षमता को मुक्त करने में सहायक होगी? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चर्चित स्थल: बोत्सवाना

चर्चा का कारण

बोत्सवाना के ओकावांगो डेल्टा (Okavango Delta) में सैकड़ों हाथियों की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई है। अभी तक इसका कारण स्थापित नहीं किया जा सका है।

प्रमुख बिंदु:

  • बोत्सवाना, दक्षिणी अफ्रीका में एक स्थलरुद्ध देश है।
  • बोत्सवाना स्थलाकृतिक रूप से समतल है, तथा इसका 70 प्रतिशत क्षेत्र कालाहारी रेगिस्तान के अतर्गत है।
  • सीमावर्ती देश: बोत्सवाना, दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व में दक्षिण अफ्रीका, पश्चिम और उत्तर में नामीबिया, उत्तर-पूर्व में जिम्बाब्वे, तथा उत्तर में जाम्बिया से घिरा है।
  • वर्तमान में, बोत्सवाना में किसी भी अन्य अफ्रीकी देश की तुलना में सर्वाधिक हाथी पाए जाते हैं।
  • ओकावांगो डेल्टा उत्तरी बोत्सवाना में एक विशाल अंतर्देशीय नदी डेल्टा है। इसे वर्ष 2014 में विश्व विरासत स्थल सूची में सूचीबद्ध किया गया था।

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केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA)

(Central Zoo Authority)

पर्यावरण मंत्रालय ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (Central Zoo Authority- CZA) का पुनर्गठन किया है। CZA में अब स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली के एक विशेषज्ञ और एक आणविक जीवविज्ञानी सम्मिलित किये जायेंगे।

CZA के बारे में:

  • CZA एक वैधानिक निकाय है जिसकी अध्यक्षता पर्यावरण मंत्री करते हैं।
  • इसे देश भर के चिड़ियाघरों को विनियमित करने का कार्य सौंपा गया है।
  • देश के प्रत्येक चिड़ियाघर को संचालन के लिए CZA से मान्यता प्राप्त करना आवश्यक है।
  • प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, दस सदस्य एवं एक सदस्य सचिव होते है।
  • प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य वन्य जीव के संरक्षण में राष्ट्रीय प्रयास को पूरा करना है।

धम्म चक्र दिवस:

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC), भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की साझीदारी में आगामी 4 जुलाई, 2020 को अषाढ़ पूर्णिमा पर धम्म चक्र दिवस मना रहा है।

धम्म चक्र दिवस का महत्व:

  • यह दिन बुद्ध के ज्ञान प्राप्त करने के बाद भारत में वाराणसी के निकट सारनाथ में आज के दिन हिरण उद्यान, ऋषिपटन में अषाढ़ की पूर्णिमा को पहले पांच तपस्वी शिष्यों (पंचवर्गिका) को उपदेश दिए जाने को चिन्हित करता है।
  • धम्म चक्र-पवट्टनसुता (पाली) या धर्म चक्र प्रवर्तन सूत्र (संस्कृत) का यह उपदेश धर्म के प्रथम चक्र के घूमने के नाम से भी विख्यात है और चार पवित्र सत्य तथा उच्च अष्टमार्ग से निर्मित्त है।
  • अषाढ़ पूर्णिमा का पावन दिवस भारतीय सूर्य कैलेंडर के अनुसार अषाढ़ महीने की पहली पूर्णिमा को पड़ता है,
  • यह श्रीलंका में एसाला पोया तथा थाईलैंड में असान्हा बुचा के नाम से विख्यात है।
  • बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक के बाद बौद्धों के लिए यह दूसरा सबसे पवित्र दिवस है।
  • इस दिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में बौद्धों और हिंदुओं दोनों द्वारा अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

प्रेरक दौर सम्मान

यह पुरस्कारों की एक नई श्रेणी है जिसे स्वच्छ सुरक्षण 2021 के भाग के रूप में घोषित किया गया है।

प्रेरक दौर सम्मान के कुल पांच अतिरिक्त उप वर्ग– दिव्य (प्लेटिनम), अनुपम (स्वर्ण), उज्जवल (रजत), उदित (कांस्य), आरोही (आकांक्षी) हैं जिनमें से प्रत्येक में शीर्ष तीन शहरों को चुना जाएगा।

निहितार्थ:

‘आबादी वर्ग‘ के आधार पर शहरों का मूल्यांकन करने के वर्तमान मानदंड से अलग, यह नया वर्ग शहरों को पांच चुने हुए संकेतक वार प्रदर्शन मानदंड के आधार पर वर्गीकृत करेगा।

जो निम्नलिखित हैं:

  1. अपशिष्ट का गीले, सूखे एवं खतरनाक वर्गों में पृथक्करण
  2. गीले अपशिष्ट के खिलाफ प्रसंस्करण क्षमता सृजित की गई
  3. गीले एवं सूखे अपशिष्ट का प्रसंस्करण एवं रिसाइक्लिंग
  4. निर्माण एवं विध्वंस (C&D) अपशिष्ट प्रोसेसिंग
  5. लैंडफिल में जाने वाले अपशिष्ट का प्रतिशत
  6. नगरों की स्वच्छता स्थिति

नीमू (Nimu/Nimoo)

चर्चा का कारण:

हाल ही में प्रधान मंत्री ने भारतीय सैनिकों के साथ बातचीत करने के लिए लद्दाख में नीमू की यात्रा की।

  • नीमू भारतीय सेना का रिज़र्व ब्रिगेड मुख्यालय है।
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ज़ांस्कर घाटी में पदुम (Padum) से नीमू तक एक सड़क मार्ग का निर्माण कर रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • नीमू लद्दाख क्षेत्र के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित एक गाँव है।
  • यह ज़ांस्कर श्रेणी से घिरा हुआ है।
  • यह सिंधु और ज़ांस्कर नदियों के संगम के दृश्य के लिए प्रसिद्ध है।
  • यहां से आठ किलोमीटर की दूरी पर मैग्नेटिक पहाड़ी है। इस पहाड़ी को ऑप्टिकल इल्यूजन के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसी इलाके के आलची गांव में नीमू-बाजगो पनबिजली परियोजना चल रही है। भारत केइस कदम से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।
  • अक्साई चिन और पीओके के लिहाज से इस क्षेत्र का बड़ा सामरिक महत्व है।

ध्यान दें:
कल कर्रेंट अफेयर्स अपलोड नहीं किया गया था। इसलिए, हमने आज उन मुद्दों को शामिल करने की कोशिश की है। आज के कुछ लेखों को कल को विस्तार से कवर किया जाएगा। असुविधा के लिए खेद है।


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