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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 2 July

विषय-सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. पुलिस सुधार तथा महत्वपूर्ण न्यायिक कर्ता

2. समान भाषा उप-शीर्षक (SLS) परियोजना

3. G4 वायरस (G4 Virus)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. NBFC और HFC के लिए विशेष नकदी प्रवाह योजना

2. नेवेली तथा विज़ाग आपदा: सुरक्षा में शिथिलता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. अरुणाचल की नई तितली प्रजातियाँ

2. प्रोग्रामिंग और डाटा साइंस में विश्व का पहला बीएससी (BSc) ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम

3. हुल दिवस (Hul Divas)

4. राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2020

5. ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना

 


 सामान्य अध्ययन-II


 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

पुलिस सुधार तथा महत्वपूर्ण न्यायिक कर्ता

(Police reform and the crucial judicial actor)

संदर्भ:

हाल ही में, तमिलनाडु राज्य के ‘तुथुकुडी’ जिले ‘सथानकुलम’ शहर में एक पिता और पुत्र की कथित तौर पर पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किये जाने से मौत हो गयी, जिससे ‘पुलिस सुधार तथा न्यायपालिका की भूमिका’ विषय चर्चा के केंद्र में आ गया है।

इस तरह की बार-बार होने वाली घटनाएं एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाती हैं:

“पुलिस द्वारा ‘सच’ की खोज के लिए ‘जांच’ के नाम पर और कितनी बार बेबस नागरिकों को लाठी या डंडे की मार, जूतों की ठोकर, पुलिस लॉकअप में घंटो की बेवजह कैद तथा निजी अंगों पर लकड़ी के बेलन से उत्पीडन झेलना पड़ेगा?”

न्यायपालिका की भूमिका:

सदैव की भांति, जब भी बात-चीत की दिशा इस दिशा में मुडती है, तो स्वाभाविक रूप से न्यायपालिका की ओर ‘उम्मीद तथा कार्यवाही’ के स्रोत के रूप में निगाहें उठ जाती हैं।

‘मदुरै उच्च न्यायालय’ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है तथा स्थिति की “बारीकी से निगरानी” कर रहा है।

इस विषय पर उच्चत्तम न्यायालय द्वारा उठाये गए कदम

उच्चत्तम न्यायालय ने 1990 के दशक में इस विषय पर, जोगिंदर कुमार बनाम उत्तरप्रदेश राज्य [एआईआर 1994 एससी 1349] तथा डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य [(1997) 1 SCC 416] जैसे मामलों के माध्यम से कई बार हस्तक्षेप किया है। इन मामलों में राज्य द्वारा की गयी कार्यवाही के संदर्भ में दो अधिकारों को सुरक्षित करने हेतु दिशा-निर्देश जारी किये गए थे:

  1. जीवन का अधिकार (A right to life)
  2. जानने का अधिकार (A right to know)

इन दिशानिर्देशों के माध्यम से, अदालत ने गिरफ्तार करने की शक्ति पर अंकुश लगाने तथा आरोपी व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी से संबंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारीयों से अवगत कराये जाने, तथा गिरफ्तारी कि दशा में आरोपी के सगे-संबंधियों को सूचित किये जाने को सुनिश्चित किया।

इन न्यायिक दिशानिर्देशों को दंड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम’, 2008 के माध्यम से वैधानिक आधार प्रदान किया गया, तथा यह कानून का हिस्सा बन गए है।

अंततः, ‘प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ’ (2006) मामले में, न्यायालय ने समस्त भारत के राज्यों को पुलिस बलों को नियंत्रित करने हेतु नए विधान पारित करने के लिए कहा। इन नए विधानों के अंतर्गत अन्य प्रावधानों के अतिरिक्त, शिकायत समाधान प्रणाली हेतु जबावदेही के लिए मजबूत ढांचा स्थापित किया गया।

पुलिस हिंसा को कम करने हेतु न्यायपालिका की अन्य निर्देश

  1. ‘वैज्ञानिक’ जांच हेतु समर्थन।
  2. ‘नार्को-एनालिसिस’ जैसी तकनीकों के लिए प्रोत्साहन, जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करना।
  3. पुलिस स्टेशनों के अंदर क्लोज-सर्किट टेलीविज़न कैमरे लगाने हेतु आदेश।

पुलिस हिंसा पर अंकुश लगाने में न्यायिक हस्तक्षेप की विफलता का कारण

न्यायपालिका का मात्र दिशानिर्देश पारित करने का दृष्टिकोण विफल साबित हुआ है।

  • इसके लिए, साधारण मजिस्ट्रेट नहीं बल्कि संवैधानिक न्यायलय को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है, जिसके पास, पुलिस प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तनों को लागू करने के लिए वास्तविक शक्ति होती है।
  • भारत में सर्वोच्च न्यायालय तथा निचले स्तर के पुलिस अधिकारी के बीच अंतर को कई अध्ययनों में रेखांकित किया गया है। इन अध्ययनों से पाता चलता है, कि किस प्रकार, असंवैधानिक घोषित किये जाने के बाद भी, देश के विभिन्न भागों में स्थानीय पुलिस द्वारा ‘आपराधिक कानूनों’ को लागू किया जाता है।

आगे की राह

  • मात्र दिशानिर्देशों को पारित करने में ऊर्जा व्यय करने के बजाय, संवैधानिक न्यायालयों को गंभीरता से उन मामलों, जो आम आदमी के लिए पुलिस हिंसा के विरुद्ध न्याय प्राप्त करने में होने वाली कठिनाई को उजागर करते हैं, को अभियोजन अथवा क्षतिपूर्ति दावों के माध्यम से सख्ती से निपटना चाहिए।
  • न्यायालयों को उस संस्थागत बोझ से मुक्त होना चाहिए, जिसके कारण अक्सर उन्हें पुलिस के कथित कमजोर मनोबल की रक्षा करनी होती है।
  • यह व्यापक स्तर पर प्रतिबंधों को लागू करने और जिला स्तर पर मौद्रिक दंड लगाने का समय है, इसके माध्यम से यह संदेश प्रेषित किया जाए कि एक अधिकारी के गलत कार्यों को फ़ोर्स की विफलता के रूप में देखा जायेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय पुलिस आयोग की स्थापना कब की गई थी?
  2. रिबेरो समिति (Ribeiro committee) किससे संबंधित है?
  3. मलिमथ समिति (Malimath Committee) द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें।
  4. भारतीय संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत पुलिस।
  5. प्रकाश सिंह मामला किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

पुलिस सुधार पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

समान भाषा उप-शीर्षक (SLS) परियोजना

(Same Language Subtitling-SLS) Project

संदर्भ:

‘समान भाषा उप-शीर्षक’ (Same Language Subtitling-SLS) परियोजना के अंतर्गत IIM-अहमदाबाद में टेलीविजन पर आठ प्रमुख भारतीय भाषाओं में SLS पायलटों पर शोध तथा उनका कार्यान्वयन किया गया है।

इस परियोजना के 23 साल पूरे हो चुके है, परन्तु अभी भी, सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत कदम- टीवी चैनलों पर गुणवत्तापूर्ण नीति का कार्यान्वयन– अधूरा है।

SLS परियोजना के बारे में:

वर्ष 1996 में समान भाषा उपशीर्षक (SLS) कार्यक्रम को एक अनुसंधान परियोजना के रूप में शुरू किया गया था।

इस परियोजना का उद्देश्य इस बात का पता लगाना था, कि क्या मुख्यधारा की टीवी सामग्री के उपशीर्षक दिए जाने से उन लोगों की मदद की जा सकती है, जो पारंपरिक साक्षरता कार्यक्रमों के अंतर्गत पढने-लिखने से वंचित है?

वर्ष 1999 में, SLS को आधिकारिक तौर पर ‘भारतीय प्रबंधन संस्थान’, अहमदाबाद (IIMA) और एक ‘गैर-लाभकारी संगठन’ (प्लेनेट रीड- PlanetRead) द्वारा एक साक्षरता कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया था।

SLS, टेलीविजन तथा डिजिटल ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को नित्य की रीडिंग प्रैक्टिस में बदलने की क्षमता को साबित कर चुका है। ये रीडिंग प्रैक्टिस, अपरिहार्य, अवचेतन, स्थायी, मापनीय तथा लागत प्रभावी होती है।

सितंबर 2019 में लागू किये गए, ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम’ (Right of Person with Disability Act), 2016 के अंतर्गत, ‘सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) के ‘सुगम्यता मानदंडों के  तहत टेलीविजन पर उपलब्ध सभी मनोरंजन सामग्री के 50% पर वर्ष 2025 तक समान भाषा उप-शीर्षक देना अनिवार्य है।

SLS की कार्यप्रणाली: इसमें दृश्य-श्रव्य सामग्री (audio-visual content) का आडियो की भाषा में उपशीर्षक दिया जाता है, ताकि स्क्रीन पर लिखे हुए उपशीर्षक तथा आवाज का पूर्णतया मेल हो सके। टीवी देखते समय, दर्शक स्क्रीन पर ध्वनियों को सुनते हुए शब्दों का मिलान कर सकते हैं।

परियोजना का महत्व तथा क्षमता:

भारत विश्व स्तर पर पहला देश है, जहां मुख्यधारा की टीवी पर SLS सामग्री का व्यापक रूप से साक्षरता प्रदान करने हेतु प्रसारण किया जा रहा है।

  • SLS, सभी भारतीय भाषाओं में टीवी पर कार्यान्वित किया जा रहा है। प्रसारण नीति के अनुसार, यह स्वतः ही लगभग 600 मिलियन कमजोर पाठकों को दैनिक रूप से रीडिंग प्रैक्टिस का मंच प्रदान करता है।
  • SLS के लागू होने से लगभग एक बिलियन दर्शक और 600 मिलियन कमज़ोर पाठक दैनिक व स्वचालित रूप से पढ़ने का अभ्यास कर सकेंगे।
  • तीन से पांच सालों की अवधि में मनोरंजन सामग्री पर SLS के नियमित संपर्क से निरक्षर व्यक्ति पढना-लिखना सीख सकते है तथा उनमें से कुछ धाराप्रवाह पाठक बन जाएंगे।

पृष्ठभूमि:

भारत में लगभग एक अरब दर्शक प्रतिदिन औसतन 3 घंटे और 46 मिनट टीवी देखते हैं (FICCI-EY, 2019)। राष्ट्रीय स्तर पर कोई अन्य गतिविधि, प्रतिदिन इतने समय तक करोड़ों व्यक्तियों को नियंत्रित करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं है।

COVID19 महामारी की स्थिति में:

COVID-19 के दौरान देश के सामूहिक पठन-पाठन कौशल को बढ़ाने के लिए SLS माध्यम की क्षमता उजागर हुई है। महामारी के दौरान, वैश्विक स्तर पर, लगभग 1.4 बिलियन छात्र तथा भारत में लगभग 300 मिलियन छात्र स्कूल से बाहर है। महामारी के समाप्त होने तक कुछ अवधि के लिए स्कूलों के खुलने तथा बंद होने की संभावना है।

आगे की राह:

SLS का, राष्ट्रीय स्तर पर टीवी तथा अन्य प्रसारण मंचों, जैसे, ओवर-द-टॉप (OTT) पर कार्यान्वयन करने से भारत में साक्षरता क्रांति आ सकती है।

SLS के लागू होने से मूक-बधिर लोगों तक मीडिया की आसान पहुँच तथा रीडिंग लिटरेसी में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OTT प्लेटफार्मों के उदाहरण
  2. SLS परियोजना किसके द्वारा शुरू की गई थी?
  3. कार्यक्रम का फोकस?
  4. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम’, 2016 के प्रमुख बिंदु

मेंस लिंक:

SLS परियोजना पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

G4 वायरस (G4 Virus)

संदर्भ:

चीन में शोधकर्ताओं द्वारा एक स्वाइन फ्लू की तरह दिखने वाले एक नए वायरस जी4 (G4) की खोज की गई है, यह वायरस स्वाइन फ्लू का एक नया रूप हो सकता है। G4 वायरस मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है तथा इसमें भविष्य में महामारी उत्पन्न करने की क्षमता है।

शोधकर्ताओं ने G4 वायरस, H1N1 वायरस का ही एक प्रकार घोषित किया है जो वर्ष 2009 में फ़ैली स्वाइन फ्लू महामारी का कारण था।

जी 4 वायरस क्या है?

  • G4 वायरस H1N1 फ्लू वायरस की एक नयी खोजी गयी नस्ल है।
  • यह मूल रूप से सूअरों में पाया जाने वाला एक वायरस है।
  • जी4 वायरस, मानव कोशिकाओं में संग्राहक अणुओं (receptor molecules) से बंध जाता है और श्वसन तंत्र की बाहरी परत में खुद की प्रतिकृतियां तैयार कर सकता है अर्थात खुद की संख्या बढ़ा सकता है।

संचरण तथा लक्षण:

अध्ययन में पता चला है कि यह वायरस एयरोसोल ट्रांसमिशन के माध्यम से फेरेट (नेवले की जाति का एक जानवर) को संक्रमित कर सकता है जिससे उनमें छींक, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसे गंभीर लक्षण नजर आने के साथ ही उनके शरीर का 7.3 से 9.8 फीसदी द्रव्यमान के बराबर वजन कम हो सकता है।

चिंताएं:

  • मनुष्यो में संचरित होने में सक्षम है तथा एक अन्य वैश्विक महामारी का रूप ले सकता है।
  • शोधकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि यह वायरस पहले ही म्यूटेट होकर जानवरों से मनुष्यों में न पहुंच चुका हो, लेकिन अभी तक इसके मनुष्य से मनुष्य में प्रसार को कोई सबूत नहीं मिला है।
  • अध्ययन में यह भी पाया गया कि मनुष्य को अन्य इंफ्लुएंजा वैक्सीन से मिलने वाली रोग प्रतिरोधक क्षमता जी4 वायरस से प्रतिरक्षा प्रदान करने में अक्षम है।

H1N1 इन्फ्लूएंजा क्या है?

  • स्वाइन फ्लू एक तीव्र संक्रामक रोग है, जो इनफ्लुएंजा वायरस (H1N1) के द्वारा फैलता है।
  • H1N1 संक्रमण को स्वाइन फ्लू कहा जाता है, क्योंकि अतीत में यह उन्हीं लोगों को होता था जो सूअरों के सीधे संपर्क में आते थे।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इन्फ्लुएंजा A, अर्थात H1N1, व्यक्ति से व्यक्ति में फैल सकता है।
  • इसे WHO द्वारा वर्ष 2009 में एक महामारी घोषित किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. H1N1 और इसके उपभेद
  2. G4 वायरस क्या है?
  3. WHO – महानिदेशक
  4. हाल ही में फैली महामारी

स्रोत: द हिंदू

 


 सामान्य अध्ययन-III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

NBFC और HFC के लिए विशेष नकदी प्रवाह योजना

(Special Liquidity Scheme for NBFCs and HFCs)

संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र में किसी भी संभावित प्रणालीगत जोखिम से बचने के लिए एक विशेष उद्देश्य संवाहक (Special Purpose VehicleSPV) के माध्यम से ‘गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों’ (Non-Banking Finance Companies- NBFCs) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (Housing Finance Companies- HFCs) के लिए विशेष नकदी प्रवाह योजना की घोषणा की।

पृष्ठभूमि:

केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा NBFCs तथा HFCs की नकदी प्रवाह स्थिति में सुधार के उद्देश्य से 13 मार्च 2020, को 30,000 करोड़ रुपये की एक विशेष नकदी प्रवाह योजना शुरू करने की घोषणा की गयी थी।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • RBI ट्रस्ट द्वारा जारी सरकारी गारंटी वाली विशेष प्रतिभूतियों को खरीदकर इस योजना के लिए धन प्रदान करेगा।
  • इस प्रकार की प्रतिभूतियों के लिए जारी कुल राशि किसी भी समय 30,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगी।
  • भारत सरकार ट्रस्ट द्वारा जारी विशेष प्रतिभूतियों के लिए बिना शर्त और अपरिवर्तनीय गारंटी प्रदान करेगी।

पात्रता:

  • भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (प्रमुख कोर निवेश कंपनियों के रूप में पंजीकृत को छोड़कर) के तहत RBI में पंजीकृत सूक्ष्‍म-वित्त संस्‍थान (Microfinance Institutions) सहित कोई भी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों’ (NBFCs)
  • राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम,1987 के तहत राष्ट्रीय आवास बैंक (National Housing Bank) में पंजीकृत कोई भी हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC)।

अन्य पात्रता मानदंड:

निम्‍नलिखित व्‍यापक शर्तों का अनुपालन करने वाली कंपनियाँ ही उक्‍त सुविधा से धन जुटाने के लिए पात्र होंगी:

  • पूंजी पर्याप्तता के मामले में आरबीआई नियमों का अनुपालन।
  • 31 मार्च 2019 को शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां 6% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • पिछले दो वित्तीय वर्षों (2017-2018 और 2018-2019) में कंपनी किसी एक वर्ष के दौरान शुद्ध लाभ में रही हो।
  • 1 अगस्त, 2018 से पिछले एक वर्ष के दौरान किसी भी बैंक द्वारा उसके उधार के लिये एसएमए -1 या एसएमए -2 श्रेणी के तहत रिपोर्ट नहीं की गई हो।
  • सेबी पंजीकृत रेटिंग एजेंसी द्वारा इन्वेस्टमेंट ग्रेड की रेटिंग प्राप्त हो।

कार्यान्वयन:

  1. सार्वजनिक क्षेत्र का एक बड़ा बैंक स्ट्रेस्ड संपत्ति फंड (SAF) का प्रबंधन करने के लिए एक विशेष उद्देश्य संवाहक (SPV) का गठन करेगा जो भारत सरकार की गारंटी के साथ ब्याज वाली विशेष प्रतिभूतियां जारी करेगी और उसे सिर्फ भारतीय रिज़र्व बैंक ही खरीदेगा।
  2. SPV जरूरत के हिसाब से प्रतिभूतियां जारी करेगा जो प्रतिभूतियों की बकाया राशि पर निर्भर करेगा और यह राशि 30,000 करोड़ से अधिक नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर इसे अभीष्ट राशि तक बढ़ाई जा सकती है।
  3. विशेष उद्देश्य संवाहक (SPV) द्वारा जारी प्रतिभूतियों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा खरीदा जाएगा।

आगे की राह:

  • ट्रस्ट द्वारा सदस्यता ग्रहण करने हेतु यह योजना 3 महीने तक खुली रहेगी।
  • ट्रस्ट से ली जाने वाली उधारी की अवधि (90 दिनों तक की छोटी अवधि के लिए NBFCs / HFCs के CP/NCD) 90 दिनों तक की होगी।
  • इस वित्तपोषण का उपयोग NBFCs / HFCs द्वारा केवल मौजूदा देनदारियों को चुकाने के लिए किया जाएगा और परिसंपत्तियों के विस्तार के लिए उसका उपयोग नहीं किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NBFCs क्या हैं?
  2. NBFCs तथा वाणिज्यिक बैंकों में अंतर
  3. NBFC और HFC के लिए विशेष नकदी प्रवाह योजना- कार्यान्वयन
  4. कोर निवेश कंपनियां क्या हैं?
  5. आरबीआई अधिनियम 1934

मेंस लिंक:

NBFC और HFC के लिए विशेष नकदी प्रवाह योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

नेवेली तथा विज़ाग आपदा: सुरक्षा में शिथिलता

(Lax on safety: On Nevveli and Vizag disasters)

संदर्भ:

तमिलनाडु के नेवेली संयत्र में दो महीने में दूसरा घातक बॉयलर विस्फोट हुआ है।

यह विस्फोट राज्य की राजधानी चेन्नई से लगभग 180 किलोमीटर दूर कुड्डालोर में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली NLC इंडिया लिमिटेड (जिसे पहले नेवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से जाना जाता था) के एक बिजली संयंत्र में हुआ था।

यह दुर्घटना एक बार फिर से सुरक्षा प्रोटोकॉल, विशेष रूप से ‘भारतीय बॉयलर अधिनियम’ के महत्व को रेखांकित करती है ।

भारतीय बॉयलर अधिनियम, 1923 के बारे में:

भारतीय बॉयलर अधिनियम (Indian Boilers Act),1923 को मुख्य रूप से स्टीम बॉयलरों के विस्फोटों के खतरे से लोगों की जीवन और संपत्ति की सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य अधिनियमित किया गया था। इसका अद्देश्य, भारत में बॉयलरों के पंजीकरण तथा संचालन और रखरखाव के निरीक्षण में एकरूपता सुनिश्चित करना भी है।

परिभाषाएं:

बॉयलर: अधिनियम की धारा 2 (बी) के तहत, बॉयलर एक ऐसा बंद दबाव पात्र होता है, जिसकी क्षमता 22.75 लीटर से अधिक होती है तथा दाब द्वारा बाष्प उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया जाता है, तथा जो बाष्प बंद कर दिए जाने पर भी पूर्णतः अथवा अंशतः दबावाधीन रहता है।

दुर्घटना का तात्पर्य, बॉयलर या स्टीम-पाइप में विस्फोट अथवा बॉयलर या स्टीम-पाइप का कोई नुकसान होता है।

निष्कर्ष:

इस तरह दुर्घटनाओं के लिए रोका जा सकता है, और औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा-चूक होने से कभी-कभार ही घटित होती हैं। भारत की औद्योगिकीकरण संबंधी आकांक्षाओं को सुरक्षा आधारित होने की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


अरुणाचल की नई तितली प्रजातियाँ

लेपिडोप्टेरिस्ट्स (Lepidopterists) ने अरुणाचल प्रदेश में तितलियों की दो प्रजातियों की खोज की है। ये हैं:

  1. स्ट्राइप्ड हेयरस्ट्रेक (Striped Hairstreak), जिसका वैज्ञानिक नाम Yamamotozephyrus kwangtugenesis हैं, भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित विजयनगर में खोजा गया है। इस प्रजाति को पहली बार एक जापानी एंटोमोलॉजिस्ट द्वारा चीन के हैनान प्रांत में रिकॉर्ड किया गया था।
  2. इलूसिव प्रिंस (Elusive Prince), वैज्ञानिक नाम ‘रोहाना टोनकिनिआना’(Rohana Tonkiniana) है, इस प्रजाति को नामदफा नेशनल पार्क की परिधि में मियाओ (Miao) में खोजा गया है। यह मूलतः ‘वियतनाम’ से संबंधित है और यह पूर्वी हिमालय में पाई जाने वाली तितली की प्रजाति ‘ब्लैक प्रिंस’ के समान है।

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प्रोग्रामिंग और डाटा साइंस में विश्व का पहला बीएससी (BSc) ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम

  • इस कार्यक्रम को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) द्वारा शुरू किया गया है।
  • इस कार्यक्रम में अध्यापकों द्वारा तैयार किये गए विडियो व्याख्यान, साप्ताहिक असाइनमेंट तथा किसी भी अन्य नियमित पाठ्यक्रम की तरह परीक्षा आयोजित की जायेगी।

पात्रता:

  • यह कोर्स ऐसे किसी भी विद्यार्थी के लिए है जो कक्षा बारहवीं उत्तीर्ण कर चुका है एवं दसवीं में उसके पास उसके पास अंग्रेजी और गणित विषय थे तथा जो कैंपस वाले किसी स्नातक पाठ्यक्रम मे दाखिला करा चुका है।
  • जो विद्यार्थी इस बार बारहवीं उत्तीर्ण कर रहे हैं, वे भी आवेदन के पात्र हैं। स्नातक और कार्यशील पेशेवर भी यह पाठ्यक्रम कर सकते हैं।

हुल दिवस (Hul Divas)

  • हूल क्रान्ति दिवस प्रत्येक वर्ष 30 जून को मनाया जाता है।
  • सिद्धू तथा कान्हू दो भाइयों के नेतृत्व में 30 जून, 1855 ई. को वर्तमान झारखंड के साहेबगंज ज़िले के भगनाडीह गांव से हुल विद्रोह का प्रारंभ किया गया था।
  • इस मौके पर सिद्धू ने घोषणा की थी- करो या मरो, अंग्रेज़ों हमारी माटी छोड़ो।
  • इसे अंग्रेजों के खिलाफ पहली लड़ाई माना जाता है।

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 राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस 2020:

  • प्रख्यात चिकित्सक डॉ. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में प्रतिवर्ष 1 जुलाई को मनाया जाता है।
  • वर्ष 1991 में भारत सरकार द्वारा डॉक्टर दिवस की स्थापना की गई थी।
  • इसे भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) द्वारा पारंपरिक रूप से देश में आयोजित किया जाता है।
  • विश्व स्तर पर, पहला डॉक्टर दिवस 28 मार्च, 1933 को जॉर्जिया के विंडर में मनाया गया था।

डॉ. बिधान चंद्र रॉय के बारे में:

  • वे पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री थे।
  • वह महात्मा गांधी के दोस्त और डॉक्टर भी थे।
  • उन्हें 4,1961 फरवरी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना

(Accelerate Vigyan’ Scheme)

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सांविधिक निकाय विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड (Scientific and Engineering Research BoardSERB) द्वारा ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना की शुरुआत की गई है।

इस योजना का मूल उद्देश्य देश में वैज्ञानिक शोध की गति को तेज करने और विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाले मानव संसाधन को तैयार करना है।

योजना के घटक

  • अभ्यास’ (ABHYAAS): ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएचडी के छात्रों को उनके संबंधित विषयों में कौशल विकास को प्रोत्साहित करता है, ताकि वे शोध एवं विकास को बढ़ावा देने में सक्षम हो सकें।
  • इस कार्यक्रम के दो घटक ‘कार्यशाला’ और रिसर्च इंटर्नशिप ‘वृत्तिका’ हैं।

मिशन समूहन: एक्सेलरेट विज्ञान की शुरुआत

इसका उद्देश्य देश में एक ही छत के नीचे सभी वैज्ञानिक वार्ताओं को प्रोत्साहित करना, एकत्र करना और समेकित करना है।

इसे उप-विभाजित किया गया है:

  1. संयोजिका: देश में सभी सरकारी फंडिंग एजेंसियों द्वारा समर्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्षमता निर्माण गतिविधियों को सूचीबद्ध करने के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम है।
  2. संगोष्ठी: SERB द्वारा संचालित एक अन्य कार्यक्रम है।

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